अक्षय तृतीया की झूठी, तर्कहीन महत्ता प्रचारित कर पंडेपुजारी स्वार्थ साध रहे हैं. धर्मभीरु जनता उन के धार्मिक रैकेट के जाल में फंसती रहती है. सचाई तो यह है कि इस का कोई महत्त्व ही नहीं है,