Education System. इम्तिहान का डर बच्चों के लिए नया नहीं है, मगर इस बार सीबीएसई ने डर की नई इबारत लिख दी है. रिजल्ट आने के बाद बच्चे प्रश्नपत्र पर नहीं, अपनी ही उत्तर पुस्तिका पर शक कर रहे हैं.
12वीं बोर्ड 2025-26 में औनस्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम को पारदर्शिता का पुल बताया गया था, पर बोर्ड की लापरवाही और तकनीकी चूकों ने उस पुल को ही ढहा दिया. नतीजे में 4,04,319 छात्र यानी हर चौथा बच्चा, बोर्ड से अपनी कौपी मांग रहा है.
यह सामूहिक अविश्वास है, जिस ने सीबीएसई के प्रति विश्वास की सारी हदें पार कर दी हैं.
इस साल 17,68,962 छात्र 12वीं में बैठे. रिजल्ट के बाद 11,31,960 स्कैन कौपियों के लिए आवेदन आया. पहले यह आंकड़ा 2-3 फीसदी रहता था. इस बार 22 फीसदी से ऊपर पहुंचना बताता है कि कुछ बहुत गलत हुआ है.
संकट की जड़ ओएसएम लागू करने की हड़बड़ी में है. कौपियां स्कैन करने में एक महीना देर हुई. समय कम बचा तो शिक्षकों पर दबाव बढ़ा. टारगेट पूरा करने को रोज 12 से 15 कौपियां जांचनी पड़ीं.
नियम था कि धुंधली कौपी रिजैक्ट कर दोबारा स्कैन हो, मगर 2 दिन बचाने को ब्लर कौपी ही जांच दी गई. ऐसी कौपी पर शून्य अंक मिले या परीक्षक ने अंदाज से नंबर दे दिए. 2 दिन बचाने के लिए किसी बच्चे का पूरा साल बरबाद कर दिया गया.
12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव को फिजिक्स में कम अंक मिले. कौपी मंगाई तो पता चला वह उस की थी ही नहीं. उस ने ‘एक्स’ पर लिखा कि वह टूट गया था क्योंकि सीबीएसई ने जो फिजिक्स की आंसरशीट अपलोड की थी वह उस की थी ही नहीं.
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