दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में अमेरिका और सोवियत संघ ही 2 महाशक्तियां थीं. दोनों के बीच हमेशा शीतयुद्ध चलता रहता था. मगर सोवियत संघ के टूटने और चीन के शक्ति के रूप में उदय के बाद दुनिया का शक्ति संतुलन बदल गया है. नए समय में अमेरिका और चीन महाशक्तियां हैं. चीन महाशक्ति की हैसियत पाने के बाद अपने तेवर दिखा रहा है. इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकास का नाटक कर रहा है मगर उस का मकसद पुरानी महाशक्तियों की तरह दुनियाभर में अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करना है.

वन बैल्ट वन रोड (ओबीओआर) ऐतिहासिक रेशम मार्ग (सिल्क रूट) की तर्ज पर एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़कें, रेलमार्ग और जलमार्ग से जोड़ने की चीन की अपनी महत्त्वाकांक्षी योजना है जो इस सदी में अंतराष्ट्रीय व्यापार में जबरदस्त उछाल लाएगी. इसे ले कर चीन ने पिछले  दिनों 2 दिनों का अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन किया जिस की दुनियाभर में धूम मची हुई थी. आखिर क्यों न हो, अरबोंखरबों डौलर जो लगे हैं इस परियोजना में.

सम्मेलन में 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस, विश्व बैंक के प्रैसिडैंट जिम योंग किम, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की मैनेजिंग डायरैक्टर क्रिस्टीन लगार्ड के अलावा 130 देशों के अधिकारी, उद्योगपति, फाइनैंसर और पत्रकारों ने  हिस्सा लिया. भारत के बेहद करीबी दोस्त माने जाने वाले रूस ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया. चीन का ऐसा दावा है कि सड़क रास्तों से दुनिया के कई देशों को एकसाथ जोड़ने से इन देशों के बीच कारोबार को बढ़ाने व इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

क्या है परियोजना

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