बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 जुलाई, 2017 की शाम को 6 बज कर, 32 मिनट पर राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंप कर 20 महीने पुराने महागठबंधन को एक झटके में तोड़ डाला. ‘संघ मुक्त भारत’ का नारा गला फाड़फाड़ कर चिल्लाने वाले नीतीश कुमार रात के 9 बजे तक एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की गोद में जा बैठे. बिहार की सियासत में ‘इस्तीफा मास्टर’ और ‘पलटीमार’ नेता के नाम से मशहूर हो चुके नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपनी इमेज को पुख्ता कर दिया है.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तेजस्वी यादव द्वारा इस्तीफा नहीं देने पर जब लालू प्रसाद यादव अड़ गए, तो नीतीश कुमार ने अपना पुराना राग ‘अंतरात्मा की आवाज’ गाया. साथ ही, महागठबंधन और लालू प्रसाद यादव से नाता तोड़ कर अपनी पुराने साथी भाजपा से हाथ मिला लिया.

जिस भाजपा को नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के साथ मिल कर साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में धूल चटा दी थी, उसी भाजपा के लिए उन्होंने बिहार में सियासत की मजबूत जमीन तैयार कर दी है.

इस्तीफा देने के एक घंटे बाद ही नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं के साथ बैठक की और राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मिल कर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया. सबकुछ इतनी तेजी के साथ हुआ, तो खुलासा हो गया कि नीतीश कुमार और भाजपा के बीच काफी समय से सियासी खिचड़ी पक रही थी और नीतीश कुमार इसे परोसे जाने के लिए खास समय का इंतजार कर रहे थे या इस के लिए भूमिका तैयार कर रहे थे.

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