भ्रष्ट पटवारी सब पर भारी

इस सामूहिक हत्याकांड ने एक नई बहस खड़ी कर दी है कि क्या इनसान के जान की कीमत जमीन के टुकड़े से भी कम है? लेकिन इस से बड़ा एक सवाल यह है कि गांवदेहात में जमीन से जुड़े विवाद पैदा ही क्यों होते हैं?

इन विवादों के पीछे ज्यादातर जमीनों का हिसाबकिताब रखने वाला वह मुलाजिम होता है जिसे अलगअलग जगहों पर लेखपाल या पटवारी के नाम से जाना जाता है. ये पटवारी चंद रुपयों के लालच में दबंगों और पहुंच वालों के साथ मिल कर किसी भी जमीन को विवादित बना देते हैं. एक बार जमीन के विवादित होने की दशा में किसान की कोर्ट के चक्कर लगातेलगाते चप्पलें घिस जाती हैं. पटवारियों द्वारा विवादित की गई जमीन के चक्कर में पीढि़यां दर पीढि़यां मुकदमे झेलने को मजबूर होती हैं. कई बार तो बेकुसूरों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है.

चंद रुपयों के लिए पटवारी किसी भी जमीन को कैसे विवादित बना देते हैं, इस की बानगी हम सिद्धार्थनगर के डंडवा पांडेय गांव की 2 बहनों के मामले में देख सकते हैं.

अनीता और सरिता नाम की इन 2 बहनों के मांबाप की मौत पहले ही हो चुकी थी. एक भाई था जिस की मौत भी बाद में गंभीर बीमारी के चलते हो गई. ऐसे में कानूनी रूप से मांबाप की सारी जायदाद इन दोनों बहनों को मिलनी थी, लेकिन जो काम आसानी से होना था उसे यहां के 2 पटवारियों ने पैसों के लालच में विवादित बना दिया.

छोटी बहन अनीता के ससुर रवींद्रनाथ तिवारी ने जब पटवारी से दोनों बहनों के नाम उन जमीनों को करने की बात कही तो पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने इस के एवज में पैसे की मांग की. लेकिन इन दोनों बहनों की तरफ से पैसे नहीं मिलने की दशा में उस ने पड़ोसियों से पैसे ले कर जमीन उन के नाम करने का लालच दिया और जमीन को विवादित बना दिया.

ससुर रवींद्रनाथ तिवारी ने बताया कि पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने उन से एक लाख रुपए की मांग की थी लेकिन उतने पैसे न होने के चलते उस ने जमीन को विवादित बना दिया. अब उन्हें आएदिन कोर्ट और तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

दूसरे पटवारी रत्नाकर को इन लड़कियों के नाम घर करना था. उस ने इन से 2,000 रुपए वरासत के ले लिए. उस के बावजूद उस पटवारी द्वारा वरासत नहीं की गई, जबकि मांबाप की मौत के बाद कानूनन यह जमीन इन दोनों लड़कियों को मिलनी है.

नहीं रहता डर

जमीनों का हिसाबकिताब रखने वाले पटवारियों को अपने से बड़े अफसरों का भी डर नहीं होता है. ये उन के आदेश को भी ठेंगा दिखा देते हैं. जब कभी बड़े अफसर इन पटवारियों पर कार्यवाही करने की हिम्मत जुटाते भी हैं तो पटवारियों की यूनियन धरने पर बैठ जाती है, इसलिए कामकाज ठप होने के चलते बड़े अफसर भी कार्यवाही करने से बचते हैं.

सरिता और अनीता ने जब सभी जरूरी कागजात के आधार पर वरासत न होने पर स्थानीय एसडीएम से मिल कर शिकायत की तो एसडीएम ने वरासत किए जाने का आदेश भी दिया लेकिन पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने एसडीएम के आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया.

मजबूत है गठजोड़

अनीता और सरिता का मामला बानगीभर है. पटवारियों द्वारा रिश्वत के लालच में भोलेभाले लोगों को परेशान करना अब आम बात होती जा रही है. ये पटवारी किसी भी आम इनसान की जमीन के भूमाफिया से गठजोड़ कर मोटी रिश्वत के लालच में फर्जी कागजात तैयार कर डालते हैं और फिर उन कागजात के दम पर भूमाफिया दूसरे की जमीनों पर कब्जा कर बैठते हैं.

रिश्वतखोरी बिना काम नहीं

किसी का फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाना हो, जमीन से जुड़े कागजात लेने हों, जमीन की पैमाइश करानी हो तो लेखपाल यानी पटवारी बिना रिश्वत के कोई भी काम नहीं करते हैं. ऐसे कई मामले हैं जिन में नियमकानून को ताक पर रख कर रिश्वत के दम पर काम किया जाता है.

ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले की हरैया तहसील के पटवारी घनश्याम चौधरी द्वारा किया गया, जिस ने शासनादेश की आड़ में 3 अनुसूचित जाति के और 2 पिछड़ी जातियों के लोगों को अनुसूचित जनजाति के होने की फर्जी रिपोर्ट लगा कर तहसील में भेज दी.

पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर आंख मूंद कर जिम्मेदारों ने अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया. इस मामले की जानकारी जन सूचना अधिकार कानून से मिली.

इसी तरह पटवारी रानी वर्मा द्वारा किसान सम्मान निधि योजना की पत्रावली बनाने के नाम पर हरैया तहसील के ही अमारी बाजार के किसानों से खुलेआम पैसा वसूले जाने के मामले का वीडियो वायरल हुआ. इस की जांच की गई तो मामला सही पाया गया. इस के बाद पटवारी रानी वर्मा को निलंबित कर दिया गया.

जिंदा को बना दें मुरदा

अगर किसी जिंदा को मुरदा साबित करना हो तो पटवारी से बढि़या उदाहरण कोई नहीं हो सकता है. ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले के गौर ब्लौक के बुढ़ौवा गांव का है. यहां के रहने वाले छोटेलाल कई महीने से अफसरों की चौखट पर सिर पटक रहे हैं. इस का कारण बस इतना है कि उन्हें उसी गांव के पटवारी ने मरा दिखा कर उन की गाटा संख्या 47 की तकरीबन 40 बीघा जमीन गांव के ही रविंद्र कुमार, विधाराम यादव व सीतापति के नाम कर दी.

यही नहीं, इस जमीन का दाखिल और खारिज भी 22 अक्तूबर, 2018 में हो चुका है. इस मामले की जानकारी छोटेलाल को उस समय लगी जब वे खतौनी लेने पहुंचे. जमीन किसी दूसरे के नाम दर्ज होने पर उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. तकरीबन 8 महीने से जमीन वापस अपने नाम कराने और खुद को जिंदा साबित करने के लिए वे पटवारी से ले कर तहसील तक के चक्कर लगा रहे हैं.

बिना रिश्वत नहीं काम रिपोर्ट

गांवदेहात लैवल पर अगर किसी किसान की किसी आपदा से मौत हो जाए, आपदा से माली नुकसान हो, शादीब्याह का अनुदान हो, इन सभी मामलों में जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी पटवारी की होती है. उस की रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाता है कि जिसे सरकारी सहायता यानी अनुदान दिया जाना है, वह शख्स सरकारी सहायता हासिल करने की श्रेणी में है भी या नहीं.

लेकिन पटवारी सरकारी सहायता हासिल करने योग्य पात्र लोगों से भी बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते हैं. ऐसे में जो लोग पटवारियों को रिश्वत देने में सक्षम नहीं होते हैं, वे पात्र होते हुए भी सरकारी सहायता हासिल नहीं कर पाते हैं.

पीड़ितों की सुनें

डाक्टर एसके सिंह ने बताया कि बस्ती जिले की रुधौली तहसील में एक पटवारी अंजनी नंदन, जो तकरीबन 13 साल से तहसील में जमा हुआ है, उसे अभी तक रिलीव नहीं किया गया है जबकि उस का ट्रांसफर दूसरी जगह किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि भूमाफिया को अवैधानिक कब्जा कराने के आरोपी व विवादित चल रहे पटवारी के साथ ही तहसीलदार की भूमिका भी संदिग्ध है.

अंजनी नंदन नाम के इस पटवारी के ऊपर कई गंभीर आरोप भी हैं, जिन में भूमाफिया की मिलीभगत से जमीनों के नक्शे में फेरबदल करने से ले कर अवैध कब्जा कराने तक की कई लिखित शिकायतें शामिल हैं.

इस पटवारी को तहसील प्रशासन व स्थानीय स्तर की राजनीतिक इकाइयां बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं. पटवारी के ट्रांसफर को रोकने के पीछे का बड़ा मकसद भ्रष्ट अफसर और स्थानीय नेताओं की आमदनी में कमी हो जाना बताया जाता है.

रुधौली तहसील में पटवारी द्वारा जमीनों के अभिलेखों में फेरबदल कर के मोटी रकम की कमाई करने के भी आरोप लग चुके हैं.

रुधौली तहसील क्षेत्र के गांव कैडिहा के गाटा संख्या 38 के नक्शे में संशोधन व बटा कटाने की अवैधानिक प्रक्रिया के तहत व्यापक धांधली कर के भूमाफिया को गैरकानूनी कब्जा कराने का काम भी इसी लेखपाल के समय में हो चुका है, जिस की शिकायत तहसील समाधान दिवस पर की गई थी.

भदोही जिले के रहने वाले रमेश दुबे ने बताया कि जमुनीपुर अठगवां मोढ़, भदोही का पटवारी शुभम ओझा ने मोटी रिश्वत न मिलने के चक्कर में पूरे गांव के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. अभी वह नयानया पटवारी नियुक्त हुआ है, इस के बावजूद उस ने गरीबों का जीना मुश्किल किया हुआ है.

इस मसले में रमेश दुबे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से ले कर सभी बड़े अफसरों से इस पटवारी की शिकायत की है, जिस के बाद उस पटवारी ने पूरे गांव को सरकारी जमीन पर बसा होने का आरोप लगाते हुए एकतरफा आरसी जारी करा दिया.

जमीनी मामलों में हत्याओं पर अगर नजर डाली जाए तो इस विवाद की शुरुआत पटवारी द्वारा रिश्वत ले कर किए गए जमीनी कागजात में हेरफेर का नतीजा होता है.

सोनभद्र जिले के गांव उभ्भा में जमीन के पीछे हुई 10 हत्याओं में अगर पटवारी ने सही भूमिका निभाई होती तो आज 10 लोग जिंदा होते.

लेखपालों यानी पटवारियों की रिश्वतखोरी व बढ़ते जमीनी विवादों को अगर रोकना है तो सरकार को राजस्व से जुड़े कानूनों में बदलाव करना चाहिए और कुसूरवार पाए जाने वाले पटवारियों को नौकरी से बरखास्त कर उन्हें सख्त सजा देनी चाहिए, तभी आम जनता इन रिश्वतखोरों से नजात पाएगी.

Crime : एक गुनाह मोहब्बत के नाम

Crime News in Hindi: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शहर ग्वालियर (Gawalior) के थाना थाटीपुर के थानाप्रभारी आर.बी.एस. विमल 5 अगस्त की रात करीब 3 बजे इलाके की गश्त लगा कर थोड़ा सुस्ताने के मूड में थे. तभी उन के पास किसी महिला का फोन आया. महिला ने कहा, ‘‘सर, मैं तृप्तिनगर से बोल रही हूं. मेरे पति रविदत्त दूबे का मर्डर हो गया है. उन की गोली मार कर हत्या (Murder) कर दी गई है,’’ इतना कहने के बाद महिला सिसकने लगी. अपना नाम तक नहीं बता पाई.

थानाप्रभारी ने उस से कहा भी, ‘‘आप कौन बोल रही हैं? घटनास्थल और आसपास की लोकेशन के बारे में कुछ बताइए. वहां पास में और कौन सी जगह है, कोई चर्चित दुकान, शोरूम या स्कूल आदि है तो उस का नाम बोलिए.’’

‘‘सर, मैं भारती दूबे हूं. तृंिप्तनगर के प्रवेश द्वार के पास ही लोक निर्माण इलाके में टाइमकीपर दूबेजी का मकान पूछने पर कोई भी बता देगा.’’ महिला बोली.

घटनास्थल का किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की सख्त हिदायत देने के कुछ समय बाद ही थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ घनी आबादी वाले उस इलाके में पहुंच गए. थानाप्रभारी आर.बी.एस. विमल और एसआई तुलाराम कुशवाह के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों को अल सुबह देख कर वहां के लोग चौंक गए.

लोगों से भारती दूबे का घर मालूम कर के वह वहां पहुंच गए. जब वह पहली मंजिल पर पहुंचे तो एक कमरे में भारती के पति रविदत्त दूबे की लाश पड़ी थी. पुलिस के पीछेपीछे कुछ और लोग भी वहां आ गए. उन में ज्यादातर परिवार के लोग ही थे.

थानाप्रभारी ने लाश का मुआयना किया तो बिस्तर पर जहां लाश पड़ी थी, वहां भारी मात्रा में खून भी निकला हुआ था. उन के पेट में गोली लगी थी.

मुंह से भी खून निकल रहा था, लाश की स्थिति को देख कर खुद गोली मार कर आत्महत्या का भी अनुमान लगाया गया, किंतु वहां हत्या का न कोई हथियार नजर आया और न ही सुसाइड नोट मिला.

घर वालों ने बताया कि उन्हें किसी ने सोते वक्त गोली मारी होगी. हालांकि इस बारे में सभी ने रात को किसी भी तरह का शोरगुल सुनने से इनकार कर दिया. थानाप्रभारी ने मौके पर फोरैंसिक टीम भी बुला ली.

पुलिस को यह बात गले नहीं उतरी. फिर भी थानाप्रभारी ने हत्या के सुराग के लिए कमरे का कोनाकोना छान मारा. उन्होंने घर का सारा कीमती सामान भी सुरक्षित पाया. इस का मतलब साफ था कि बाहर से कोई घर में नहीं आया था.

अब बड़ा सवाल यह था कि जब बाहर से से कोई आया ही नहीं, तो रविदत्त  को गोली किस ने मारी? फोरैंसिक एक्सपर्ट अखिलेश भार्गव ने रविदत्त के पेट में लगी गोली के घाव को देख कर नजदीक से गोली मारे जाने की पुष्टि की.

जांच के लिए खोजी कुत्ते की मदद ली गई. कुत्ता लाश सूंघने के बाद मकान की पहली मंजिल पर चक्कर लगाता हुआ नीचे बने कमरे से आ गया. वहां कुछ समय घूम कर बाहर सड़क तक गया, फिर वापस बैडरूम में लौट आया. बैड के इर्दगिर्द ही घूमता रहा. उस ने ऐसा 3 बार किया. फिगरपिं्रट एक्सपर्ट की टीम ने बैडरूम सहित अन्य स्थानों के सबूत इकट्ठे किए.

इन सारी काररवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. साथ ही भादंवि की धारा 302/34 के तहत अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. पुलिस को दूबे परिवार के बारे में भारती दूबे से जो जानकारी मिली, वह इस प्रकार थी—

ग्वालियर के थाटीपुर के तृप्तिनगर निवासी 58 वर्षीय रविदत्त दूबे अपनी पत्नी भारती, 2 बेटियों और एक बेटे के साथ रहते थे. रविदत्त लोक निर्माण विभाग में टाइमकीपर की नौकरी करते थे. उन की नियुक्ति कलेक्टोरेट स्थित निर्वाचन शाखा में थी.

साल 2006 में पहली पत्नी आभा की बेटे के जन्म देते वक्त मौत हो गई थी. उस के बाद उन्होंने साल 2007 में केरल की रहने वाली भारती नाम की महिला से विवाह रचा लिया था. वह अहिंदी भाषी और भिन्न संस्कार समाज की होने के बावजूद दूबे परिवार में अच्छी तरह से घुलमिल गई थी.

दूबे ने भारती से कोर्टमैरिज की थी. शादी के बाद भारती ने दिवंगत आभा के तीनों बच्चों को अपनाने और उन की देखभाल में कोई कमी नहीं रहने दी थी. बड़ी बेटी कृतिका की शादी नयापुरा इटावा निवासी राममोहन शर्मा के साथ हो चुके थी, किंतु उस का ससुराल में विवाद चल रहा था, इस वजह से वह पिछले 3 सालों से अपने मायके में ही रह रही थी. छोटी बेटी सलोनी अविवाहित थी.

पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए कई बिंदुओं पर ध्यान दिया. मृतक की पत्नी भारती और बड़ी बेटी कृतिका समेत छोटी बेटी सलोनी ने पूछताछ में बताया कि 4-5 अगस्त की आधी रात को तेज बारिश होने कारण लाइट बारबार आजा रही थी.

रात तकरीबन 9 बजे खाना खाने के बाद वे अपने घर की पहली मंजिल पर बने बैडरूम में सोने के लिए चली गई थीं. घटना के समय परिवार के सभी बाकी सदस्य एक ही कमरे में सोए हुए थे.

भारती और बड़ी बेटी कृतिका को रात के ढाई बजे हलकी सी आवाज सुनाई दी थी तो उन्होंने हड़बड़ा कर उठ कर लाइट का स्विच औन किया. इधरउधर देखा. वहां सब कुछ ठीक लगा. वह तुरंत बगल में रविदत्त दूबे के कमरे में गई. देखा बैड पर वह खून से लथपथ पड़े थे. उन के पेट से खून निकल रहा था.

कृतिका और भारती ने उन्हें हिलायाडुलाया तब भी उन में कोई हरकत नहीं हुई. नाक के सामने हाथ ले जा कर देखा, उन की सांस भी नहीं चल रही थी. फिर भारती ने दूसरे रिश्तेदारों को सूचित करने के बाद पुलिस को सूचित कर दिया.

थानाप्रभारी को दूबे हत्याकांड से संबंधित कुछ और जानकारी मिल गई थी, फिर भी वह हत्यारे की तलाश के लिए महत्त्वपूर्ण सबूत की तलाश में जुटे हुए थे. घटनास्थल पर तहकीकात के दौरान एसआई तुलाराम कुशवाहा को दूबे की छोटी बेटी पर शक हुआ था.

कारण उस के चेहरे पर पिता के मौत से दुखी होने जैसे भाव की झलक नहीं दिखी थी. उन्होंने पाया कि सलोनी जबरन रोनेधोने का नाटक कर रही थी. उस की आंखों से एक बूंद आंसू तक नहीं निकले थे.

घर वालों के अलगअलग बयानों के कारण दूबे हत्याकांड की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती ही जा रही थी. उसे सुलझाने का एकमात्र रास्ता काल डिटेल्स को अपनाने की योजना बनी. मृतक और उस के सभी परिजनों के मोबाइल नंबर ले कर उन की काल डिटेल्स निकलवाई गई.

कब, किस ने, किस से बात की? उन के बीच क्याक्या बातें हुईं? उन में बाहरी सदस्य कितने थे, कितने परिवार वाले? वे कौन थे? इत्यादि काल डिटेल्स का अध्ययन किया गया. उन में एक नंबर ऐसा भी निकला, जिस पर हर रोज लंबी बातें होती थीं.

पुलिस को जल्द ही उस नंबर को इस्तेमाल करने वाले का भी पता चल गया. रविदत्त दूबे की छोटी बेटी सलोनी उस नंबर पर लगातार बातें करती थी. पुलिस ने उस फोन नंबर की जांच की तो वह नंबर परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार का नहीं था बल्कि ग्वालियर में गल्ला कठोर के रहने वाले पुष्पेंद्र लोधी का निकला.

पुलिस इस जानकारी के साथ पुष्पेंद्र के घर जा धमकी. वह घर से गायब मिला. इस कारण उस पर पुलिस का शक और भी गहरा हो गया. फिर पुलिस ने 14 अगस्त की रात में उसे दबोच लिया.

उस से पूछताछ की. पहले तो उस ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश की, लेकिन बाद में सख्ती होने पर उस ने दूबे की हत्या का राज खोल कर रख दिया.

साथ ही उस ने स्वीकार भी कर लिया कि रविदत्त दूबे की हत्या उस ने सलोनी के कहने पर की थी. उन्हें देशी तमंचे से गोली मारी थी. पुष्पेंद्र ने पुलिस को हत्या की जो वजह बताई, वह भी एक हैरत से कम नहीं थी. पुलिस सुन कर दंग रह गई कि कोई जरा सी बात पर अपने बाप की हत्या भी करवा सकता है.

बहरहाल, पुष्पेंद्र के अपराध स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल .315 बोर का तमंचा भी बरामद कर लिया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पुष्पेंद्र लोधी ने बताया कि वह पिछले एक साल से सलोनी का सहपाठी रहा है. सलोनी के एक दूसरे सहपाठी करण राजौरिया से प्रेम संबंध थे. दोनों एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. उस की तो सलोनी से केवल दोस्ती थी.

उस ने बताया कि एक बार करण के साथ सलोनी को रविदत्त दूबे ने घर पर ही एकदूसरे की बांहों में बांहें डाले देख लिया था.

अपनी बेटी को किसी युवक की बांहों में देखना रविदत्त को जरा भी गवारा नहीं लगा. उन्होंने उसी समय सलोनी के गाल पर तमाचा जड़ दिया. बताते हैं कि तमाचा खा कर सलोनी तिलमिला गई थी.

उस ने अपने गाल पर पिता के चांटे का जितना दर्द महसूस नहीं किया, उस से अधिक उस के दिल को चोट लगी. उस वक्त करण तो चुपचाप चला गया, लेकिन सलोनी बहुत दुखी हो गई. यह बात उस ने अपने दोस्त पुष्पेंद्र को फोन पर बताई.

फोन पर ही पुष्पेंद्र ने सलोनी को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह उस की सलाह सुनने को राजी नहीं हुई. करण के साथ पिता द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और उस के सामने थप्पड़ खाने से बेहद अपमानित महसूस कर रही थी. अपनी पीड़ा दोस्त को सुना कर उस ने अपना मन थोड़ा हलका किया.

उस ने बताया कि उस घटना से करण भी बहुत दुखी हुआ था. उस के बाद से उस ने एक बार भी सलोनी से बात नहीं की, जिस से उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. सलोनी समझ रही थी कि उस के पिता उस की मोहब्बत के दुश्मन बन बैठे हैं.

इस तरह सलोनी लगातार फोन पर पुष्पेंद्र से अपने दिल की बातें बता कर करण तक उस की बात पहुंचाने का आग्रह करती रही. एक तरफ उसे प्रेमी द्वारा उपेक्षा किए जाने का गम था तो दूसरी तरफ पिता द्वारा अपमानित किए जाने की पीड़ा. सलोनी बदले की आग में झुलस रही थी. उस ने पिता को ही अपना दुश्मन समझ लिया था.

कुछ दिन गुजरने के बाद एक दिन पुष्पेंद्र की बदौलत सलोनी की करण से मुलाकात हो गई. उस ने मिलते ही करण से माफी मांगी, फिर कहा, ‘‘तुम अब भी दुखी हो?’’

‘‘मैं कर भी क्या सकता था उस वक्त?’’ करण झेंपते हुए बोला.

‘‘सारा दोष पापा का है, उन्होंने तुम्हें बहुत भलाबुरा कहा,’’ सलोनी बोली.

‘‘तुम्हें भी तो थप्पड़ जड़ दिया. कम से कम वह तुम्हारी राय तो जान लेते, एक बार…’’ करण बोला.

‘‘यही तकलीफ तो मुझे है. आव न देखा ताव, सीधे थप्पड़ जड़ दिया. मां रहती तो शायद यह सब नहीं होता. मां सब कुछ संभाल लेती.’’ कहती हुई सलोनी की आंखें नम हो गईं.

‘‘कोई बात नहीं, मैं उन से एक बार बात कर लूं?’’ करण ने सुझाव दिया.

‘‘अरे, कोई फायदा नहीं होने वाला, दीदी को ले कर वह हमेशा गुस्से में रहते हैं. दीदी की मरजी से शादी नहीं हुई थी. नतीजा देखो, उस का घर नहीं बस पाया. न पति अच्छा मिला और न ससुराल. 3 साल से मायके में हमारे साथ बैठी है.’’ सलोनी बिफरती हुई बोली.

‘‘तुम्हारी भी शादी अपनी मरजी से करवाना चाहते हैं क्या?’’ करण ने पूछा.

‘‘ऐसा करने से पहले ही मैं उन को हमेशा के लिए शांत कर दूंगी,’’ सलोनी गुस्से में बोली.

‘‘क्या मतलब है तुम्हारा?’’ करण ने पूछा.

‘‘मेरा मतलब एकदम साफ है. बस, तुम को साथ देना होगा. उन के जीते जी हम लोग एक नहीं हो पाएंगे. हमारा विवाह नहीं हो पाएगा.’’ सलोनी बोली.

‘‘मैं इस में क्या मदद कर सकता हूं?’’ करण ने पूछा.

इस पर सलोनी उस के कान के पास मुंह ले जा कर धीमे से जो कुछ कहा उसे सुन कर करण चौंक गया, अचानक मुंह से आवाज निकल पड़ी, ‘‘क्या? यह क्या कह रही हो तुम?’’

‘‘हां, मैं बिलकुल सही कह रही हूं, पापा को रास्ते से हटाए बगैर कुछ नहीं होगा. और हां, यह काम तुम्हें ही करना होगा.’’ सलोनी बोली.

‘‘नहींनहीं. मैं नहीं कर सकता हत्या जैसा घिनौना काम.’’ करण ने एक झटके में सलोनी के प्रस्ताव पर पानी फेर दिया. उस ने नसीहत देते हुए उसे भी ऐसा करने से मना किया.

सलोनी से दोटूक शब्दों में उस ने कहा कि भले ही वह उस से किनारा कर ले, मगर ऐसा वह भी कतई न करे. उस के बाद करण अपने गांव चला गया. उस ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया. करण से उस का एक तरह से संबंध खत्म हो चुका था. यह बात उस ने पुष्पेंद्र को बताई.

पुष्पेंद्र से सलोनी बोली कि करण के जाने के बाद उस का दुनिया में उस के सिवाय और कोई नहीं है, इसलिए दोस्त होने के नाते वह उस की मदद करे.

उस ने तर्क दिया कि अगर उस ने साथ नहीं दिया तो उस का हाल भी उस की बड़ी बहन जैसा हो जाएगा. एक तरह से सलोनी ने पुष्पेंद्र से हमदर्दी की उम्मीद लगा ली थी.

पुष्पेंद्र सलोनी की बातों में आ गया. वह उस की लच्छेदार बातों और उस के कमसिन हुस्न के प्रति मोहित हो गया था. मोबाइल पर घंटों बातें करते हुए सलोनी ने एक बार कह दिया था वह उसे करण की जगह देखती है. उस से प्रेम करती है.

करण तो बुजदिल और मतलबी निकला, लेकिन उसे उस पर भरोसा है. यदि वह उस का काम कर दे तो दोनों की जिंदगी संवर जाएगी. उस ने पुष्पेंद्र को हत्या के एवज में एक लाख रुपए भी देने का वादा किया.

पुष्पेंद्र पैसे का लालची था. उस ने सलोनी की बात मान ली और फिर योजनाबद्ध तरीके से 4 अगस्त, 2021 की रात को तकरीबन 10 बजे उस के घर चला गया. सलोनी ने उसे परिवार के लोगों की नजरों से बचा कर नीचे के कमरे में छिपा दिया, जबकि परिवार के लोग पहली मंजिल पर थे.

कुछ देर बाद जब घर के सभी सदस्य गहरी नींद में सो गए तो रात के ढाई बजे सलोनी नीचे आई और पुष्पेंद्र को अपने साथ पिता के उस कमरे में ले गई, जहां वह सो रहे थे.

रविदत्त अकेले गहरी नींद में पीठ के बल सो रहे थे. पुष्पेंद्र ने तुरंत तमंचे से रविदत्त के पास जा कर गोली मारी और तेजी से भाग कर अपने घर आ गया.

पुलिस के सामने पुष्पेंद्र द्वारा हत्या का आरोप कुबूलने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. सलोनी को भी तुरंत थाने बुलाया गया. उस से जैसे ही थानाप्रभारी ने उस के पिता की हत्या के बारे में पूछा, तो वह नाराज होती हुई बोली, ‘‘सर, मेरे पिता की हत्या हुई है और आप मुझ से ही सवालजवाब कर रहे हैं.’’

यहां तक कि सलोनी ने परेशान करने की शिकायत गृहमंत्री तक से करने की धमकी भी दी.

थानाप्रभारी बी.एस. विमल ने जब पुष्पेंद्र लोधी से मोबाइल पर पिता की हत्या से पहले और बाद की बातचीत का हवाला दिया, तब सलोनी के चेहरे का रंग उतर गया. तब थानाप्रभारी विमल ने पुष्पेंद्र द्वारा दिए गए बयान की रिकौर्डिंग उसे सुना दी.

फिर क्या था, उस के बाद सलोनी अब झूठ नहीं बोल सकती थी. अंतत: सलोनी ने भी कुबूल कर लिया कि पिताजी की हत्या उस ने ही कराई थी.

पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को रविदत्त दूबे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया. वहां से उन्हें हिरासत में ले कर जेल भेज दया गया.

पहले सास के साथ बनाए अवैध संबंध, फिर इस वजह से कर दिया मर्डर

Crime News in Hindi: दिलचस्प और चिंतनीय मामला भोपाल के अशोका गार्डन इलाके का है. जुर्म और देह व्यापार के लिए बदनाम इस इलाके में बीती 20 अक्तूबर को उस वक्त सनसनी मच गई जब एक अधेड़ उम्र की औरत की लाश अशोक विहार कालोनी के एक फ्लेट से बरामद हुई. पुलिस को इसी इलाके के एक वाशिंदे ने खबर दी थी कि कालोनी के एक फ्लेट में कत्ल हो गया है. पुलिस जब फ्लेट पर पहुंची तो वहां उसका सामना खून से लथपथ पड़ी शाहीन नाम की औरत की लाश से हुआ.

लाश को पोस्ट मार्टम के लिए भेजकर पुलिस ने पूछताछ और छानबीन शुरू की तो कई चौंका देने वाली बातें सामने आईं जिनमें से पहली यह थी कि शाहीन देह व्यापार करती थी और इस फ्लेट में एक नौजवान नाम शाहरुख खान के साथ रहते थी जो उसका दामाद है. दरअसल में कुछ साल पहले ही शाहरुख की शादी शाहीन के बेटी शबनम ( बदला नाम ) से हुई थी.

आमतौर पर जैसा होता है कि शादी के बाद के कुछ दिन तो ठीक ठाक गुजरे लेकिन इसके बाद शाहीन और शाहरुख एक दूसरे को दिल दे बैठे. जब सास जवाईं के मन मिल गए तो तन मिलने में भी देर नहीं लगी. दोनों पहले तो चोरी छुपे और फिर चोरी न छुपने पर दिन दहाड़े जिस्मानी ताल्लुकात बनाने लगे. नौबत यहां तक आ पहुंची कि शबनम कुछ न कर पाने की बेबसी के चलते अपने नाना के यहां रहने चली गई और शाहीन ने दामाद शाहरुख को पाने के लिए अपने शौहर को तलाक दे दिया. इसके बाद सास दामाद दोनों अलग लिव इन में रहने लगे.

अब तक बात समाज और रिश्तेदारी में आम हो चुकी थी लेकिन किसी ने इनके चक्कर में अपनी टांग नहीं अड़ाई . कुछ दिनों बाद ही शाहरुख को एक ऐसी बात पता चली जो कुछ लोगों को पहले से ही मालूम थी कि शाहीन देह व्यापार करती है. यह बात जानकारी में आते ही शाहरुख ने उसे इस दलदल से बाहर आने को कहा तो शाहीन ने इंकार कर दिया. लिहाजा दोनों में हर कभी झगड़ा होने लगा. अब शाहरुख को समझ आया कि देह व्यापार करने वाली अपनी सास के लिए उसने शबनम जैसी नेक बीवी को छोडकर भारी गलती कर डाली है लेकिन बात इतनी बिगड़ चुकी थी कि अब कुछ हो भी नहीं सकता था.

शबनम पर जो गुजर रही थी उसका अंदाजा शायद ही कोई लगा सके. एक तरफ जन्म देने वाली मां थी तो दूसरे तरफ वह शख्स था जिसे वह निकाह के बाद सरताज मानने लगी थी लेकिन इन दोनों ने ही उसके जज़्बातों और अपने रिश्ते की कद्र और परवाह ना करते जो किया था वह किसी भी बीवी के लिए किसी सदमे से कम नहीं था .

बहरहाल अपने किए पर पछता रहे शाहरुख ने शाहीन को 19 अक्तूबर को फिर समझाया कि वह जिस्म के कारोबार को छोड़ दे और उसके साथ इज्जत से रहे तो शाहीन ने साफ मना कर दिया. इस पर दोनों में खूब झगड़ा हुआ और गुस्साये शाहरुख ने अपनी सास या लिव इन पार्टनर कुछ भी कह लें का गला रेत दिया और उसे तड़प तड़प कर मरने छोड़ फरार हो गया.

जाते जाते उसने यह बात और शाहीन की हकीकत अपने एक दोस्त को बता दी थी. इसी दोस्त के जरिये पुलिस को पता चला कि मामला क्या था तो पुराने मामले खोलने यानि तफ्शीश में उसे पता चला कि शाहीन एक साल पहले ही देह व्यापार के मामले में गिरफ्तार भी हो चुकी है. इन लाइनों के लिखे जाने तक शाहरुख गिरफ्तार नहीं हो पाया था लेकिन लग नहीं पा रहा कि वह ज्यादा दिनों तक पुलिस से बच पाएगा.

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि शाहीन ने क्या सोचकर अपनी ही बेटी का घर उजाड़ डाला और बेटे समान दामाद के साथ शारीरिक संबंध बना डाले, इस बारे में हालफिलहाल सभी खामोश हैं शाहीन का शौहर भी कुछ नहीं बोल रहा और शबनम भी चुप है और यह तय है कि इन दोनों के पास बोलने को कुछ बचा भी नहीं है, एक का शौहर बेईमान निकला तो दूसरे की बीबी बेवफा निकली.

जाने क्यों शाहरुख ने भी यह नहीं सोचा कि अच्छी खासी जवान बीवी को छोड़ अधेड़ उम्र की बदचलन सास के साथ नाजायज तरीके से रहने से उसे क्या मिलेगा. अब अदालत में जो होगा सो होगा लेकिन असल इंसाफ तो हो ही गया है. शाहीन ने बेटी से उसका शौहर छीनने का जो गुनाह किया था उसकी सजा तो उसे वही दामाद दे गया और शाहरुख बीवी को छोड़ सास को ही बीवी बनाने की सजा अभी फरारी की शक्ल में भुगत रहा है और पकड़े जाने के बाद जेल की चक्की पीसते भुगतेगा.

हर मां चाहती है कि बेटी को हेंडसम और स्मार्ट पति मिले जो उसे दुनिया भर के सुख दे लेकिन इस मामले को देख लगता है कि शायद शाहीन शबनम से जलती थी जो उसने जानबूझकर शाहरुख को अपने हुस्न और अदाओं के जाल में फंसाया, तब उसे लगा होगा कि अब शाहरुख भी उसके इशारों पर नाचेगा लेकिन यह वह भूल गई थी कि शाहरुख उसका ग्राहक नहीं बल्कि कम उम्र कच्चा आशिक है जो उसे सही रास्ते पर लाना चाहता था पर वह नहीं मानी तो अंजाम एक हैरतअंगेज जुर्म की शक्ल में सामने आया.

पत्नी का षड्यंत्र, पति को गोली!

Crime News in Hindi: जिन आरोपियों की तलाश में पुलिस इधर-उधर भटकती रही और यहां तक की थाना प्रभारी की पिटाई तक हो गई . उस हत्या के पार्श्व मे कोई और चेहरा, विलेन  नहीं बल्कि उसी की पत्नी का कारनामा उजागर हुआ है. पत्नी मंजू बघेल (Manju Bhagel) ने अपने प्रेमी(Lover) और उसके साथियों के साथ मिलकर अपने ही पति कामता बघेल (Kamta Bhagel) की गोली मारकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया था. छत्तीसगढ़ (Chhattishgarh) में घटित इस सनसनीखेज वारदात राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी बलौदा बाजार भाटापारा (Balauda Bazar Bhatapara) शांत जिला कहलाता है जहां भाटापारा थाना के एक खेत में सुबह-सुबह एक शख्स को गोली मार दी जाती है पुलिस इस मामले पर सतर्क होती है और या हत्याकांड (Murder) चर्चा का बयास बन जाता है इस एक तरह से अबूझ हत्याकांड की सच्चाई आपको सोचने पर विवश कर देगी कि समाज में आज क्या क्या घटित हो जाता है और उसके दुष्परिणाम परिवार को भोगना पड़ता  है.

पति लगने लगा, जब प्रेम में रोड़ा

बलौदा बाजार भाटापारा जिला की पुलिस कप्तान नीथू कमल ने मामले का खुलासा करते हुए संवाददाता को बताया कि गोलीकांड में मृतक पति कामता बघेल की पत्नी आरोपी मंजू बघेल, आशिक यदु कुमार नवरंगे और साथी रामू यादव व राजा बाबू को गिरफ्तार किया गया है. इन चारों ने ही मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था.

पुलिस द्वारा हत्या में इस्तेमाल पिस्टल को बरामद कर लिया गया है. पाठकों को बताते चलें कि कामता बघेल की हत्या भाटापारा के ग्राम सुरखी शराब भट्ठी के पास 5 अक्टूबर 2019 को की गई  थी.मृतक की पत्नी मंजू बघेल पूर्व में सब्जी मंडी भाटापारा में मजदूरी का काम करती थी.

यही उसका आलू प्याज,टमाटर बेचने वाले बिटकुली के निवासी यदू नवरंगे से प्यार हो गया था. इसकी जानकारी पति को 6 महीने पहले लगी थी. जिसके बाद पति ने पत्नी को समझाया और ताड़ना भी की.  जब समझाने का बाद भी बात नहीं बनी तो परिवार मे विवाद बढ़ने लगा, कामता बघेल का जीवन दूभर हो गया.

प्रेमी के साथ किया षड्यंत्र

कामता की पत्नी मंजू पति को छोड़कर एक दिन अपने मायके चली गई. कामता परेशान रहने लगा. कामता कोशिश करता रहा कि मंजू बघेल को सद्बुद्धि आ जाए मगर प्रेम के भंवर में फंस कर वह मानो सब कुछ भूल चुकी थी. यही कारण है कि पति को रास्ते से हटाने के लिए उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा और 1 दिन गोली मारकर कामता बघेल की हत्या कर दी गई.

पुलिस इस मामले में लगातार कांच तेज करती चली गई परिणाम स्वरूप सूचना मिलने पर आरोपी यदू कुमार नवरंगे को पूछताछ की गयी. पूछताछ में पता चला कि कामता की पत्नी का यदू कुमार नवरंगे से लगातार संपर्क था और दोनों के बीच प्रगाढ़ प्रेम संबंध भी था.

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट होता चला गया कि मृतक के कारण दोनों का मिल पाना संभव नहीं हो पा रहा था जिस पर मृतक की पत्नी ने यदू नवरंगे के साथ मिलकर चन्द्रकात बघेल उर्फ कामता को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया. पति को रास्ते से हटाने के बाद एक साथ आंध्र प्रदेश या अन्य किसी प्रांत भाग जाने योजना भी उन्होंने बना रखी थी.

मृतक कामता की पत्नी मंजू के खातिर षड्यंत्र कारी यदू कुमार नवरंगे अपने पत्नी एवं बच्चों को भी छोड़ने के लिए तैयार हो चुका था. सहयोगी आरोपी रामू यादव के पास पिस्तौल थी. जिससे कामता बघेल को मारने  स्वीकृति दे दी. यदू कुमार नवरंगे द्वारा अपने अन्य दो दोस्त रामू यादव और राजा बाबू के साथ मिलकर कामता को मिलने के लिए बुलाया.

शराब भट्टी सुरखी रोड के पास रामू यादव एवं यदू कुमार नवरंगे ने कामता की गोली मारकर हत्या कर दी और रामू यादव ने उपयोग किए गए पिस्तौल को सुरखी पुल के पास छुपा कर रख दिया था. पुलिस ने अब चारों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. घटना में इस्तेमाल बाइक एवं पिस्तौल को आरोपियों के कब्जे से मेमोरेंडम के आधार पर बरामद कर लिया गया है.

पीरागढ़ी कांड: मासूम किशोरी के साथ वहशीपन का नंगा नाच

Crime News in Hindi: घरों में अकेले रहना अब मासूमों के लिए ज्यादा मुफीद नहीं रहा है. चोरी के मकसद से आए चोरों ने मासूम किशोरी के साथ दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दिया और फरार हो गए.यह घटना दिल्ली के पीरागढ़ी( Peeragarhi Crime) इलाके में 4 अगस्त, 2020 को घटी. मांबाप तो हर रोज की तरह सुबह ही काम पर चले गए थे, वहीं बड़ी बहन भी दोपहर में काम पर चली गई थी. अनुमान है कि शाम के तकरीबन 4 बजे 12-13 साल की किशोरी कमरे में अकेली थी, तभी चोर चोरी के मकसद से घर में घुसे. अजनबी शख्स को कमरे में देख किशोरी ने शोर मचाया, पर उस की चीख कमरे में ही दब गई. चुप कराने की कोशिश में चोरों ने उस के साथ दरिंदगी की. विरोध करने पर कैंची से उस के सिर और शरीर को बुरी तरह गोद डाला.

घायल होने के बाद भी किशोरी बड़ी बहादुरी से इन चोरों से काफी देर तक जूझती रही. खून से नहाई मासूम को आखिर मरा समझ कर आरोपी फरार हो गए.

काफी देर तक वह बच्ची कमरे में बेसुध रही, उस के बाद जैसेतैसे कमरे से घिसटते हुए वह बाहर आई और पड़ोसी के दरवाजे को खटखटा कर इशारे से खुद की हालत बयां करते हुए फिर बेहोश हो गई. उस के निजी अंगों से लगातार खून बह रहा था.

किशोरी की ऐसी बुरी हालत देख पड़ोसी भी सहम गए. तुरंत ही इस की सूचना पुलिस को दी गई. साथ ही, उस के मातापिता को भी इस हादसे के बारे में बताया गया.

सूचना मिलने पर पश्चिम विहार वेस्ट थाने की पुलिस आई और बच्ची को संजय गांधी अस्पताल में भरती कराया. उस के सिर और हिप्स में किसी धारदार हथियार से कई वार किए गए थे. डाक्टरों ने फौरन ही बच्ची के सिर व कटे हुए हिस्सों में टांके लगाए और हाथोंहाथ एम्स रेफर कर दिया.

किशोरी ने जो बयान दिया, उस के आधार पर इस वारदात में 2 लड़के शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, 13 साल की किशोरी अपने परिवार के साथ पीरागढ़ी में किराए के मकान में रहती है. परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है. जिस कमरे में परिवार रहता है, वह बिल्डिंग तीनमंजिला है. इस बिल्डिंग में छोटेछोटे तकरीबन 2 दर्जन कमरे बने हुए हैं. ज्यादातर आसपास की फैक्टरियों में लेबर का काम करते हैं. बच्ची के परिवार में मातापिता और एक बड़ी बहन है. वे सभी एक फैक्टरी में लेबर का काम करते हैं.

तकरीबन साढ़े 5 बजे फोन के जरीए पुलिस को सूचना मिली थी. आशंका है कि बच्ची के साथ 4 बजे के आसपास वारदात हुई. शुरुआती जांच में उस मासूम किशोरी के साथ सैक्सुअल एसौल्ट की पुष्टि हुई.

पुलिस ने हत्या की कोशिश और पोक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की. तकरीबन 36 घंटे बाद यानी 3 दिन बाद एक आरोपी को पकड़ने का पुलिस ने दावा किया.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ड्रग एडिक्ट है. उस पर पहले से ही चोरी के अलावा दूसरे आपराधिक मामले दर्ज हैं. इस के कारण वह जेल भी जा चुका है.

हाल ही में आरोपी जेल से बाहर आया था. जेल से छूटने के बाद पास के पार्क में ही आरोपी ठहरता था. पुलिस को आरोपी के बारे में सीसीटीवी कैमरे से सुराग हाथ लगा.

घटना को अंजाम दे कर आरोपी फरार होने के बाद आसपास की जगहों पर छिप रहा था. केस की पड़ताल में पुलिस ने क्रिमिनल अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खंगाली. इस के अलावा जमानत पर छूट कर आए चोरउचक्कों की लोकेशन का पता किया. सीसीटीवी, पड़ोसियों और 100 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ के बाद जांच की सूई इस आरोपी पर आ कर टिकी.

पुलिस के मुताबिक, वारदात के समय आरोपी नशे में था और चोरी के इरादे से कमरे में घुसा था. कमरे में अकेली बच्ची ने जब उसे टोका और शोर मचाने की कोशिश की तो  उस ने दबोच लिया.

आरोपी ने नशे में बेरहमी से लड़की पर कैंची से ताबड़तोड़ वार किए और उसे मरा हुआ समझ कर फरार हो गया.

पुलिस ने जब आरोपी को पकड़ा, तब उस के शरीर पर खरोंच के निशान पाए गए थे. इस से खुलासा यह हुआ कि बहादुर किशोरी ने जम कर मुकाबला किया.

वहीं दूसरी ओर जांच में जुटी टीम का मानना है कि मासूम बेसुध होने तक आरोपियों से मुकाबला करती रही. कमरे में बिखरा खून और पास ही पड़ी कैंची इस ओर इशारा कर रहे थे.

कैंची खून से सनी फर्श पर पड़ी थी. पास ही में सिलाई की मशीन रखी हुई थी. उसी सिलाई मशीन पर कैंची रखी थी. माता, पिता और बड़ी बहन हर रोज की तरह काम पर चले जाते थे. घर में किशोरी के पास मोबाइल फोन रहता था, पर वह बंद था.

मासूम किशोरी का एम्स में इलाज चल रहा है और वह जिंदगी और मौत से जूझ रही है. पर, उस ने अपने ऊपर हो रहे जुल्म का डट कर विरोध किया और उन से जम कर जूझी भी. वहीं जेल से छूट कर आए अपराधियों पर पुलिस का नकेल न कस पाना ऐसे अपराधों को बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है.

लगता है, समाज में ओछी यानी गिरती हुई सोच और बदली मानसिकता पर लगाम लगा पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, तभी तो इनसानियत यों शर्मसार हो रही है. यही वजह है कि आएदिन मासूम बच्चियों व किशोरियों पर हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं.

 

कैंची खून से सनी फर्श पर पड़ी थी. पास ही में सिलाई की मशीन रखी हुई थी. उसी सिलाई मशीन पर कैंची रखी थी. घर में किशोरी के पास मोबाइल फोन रहता था, पर वह बंद था.

इश्क में हुआ अंधा, पर क्या मिला माशूक

Crime News in Hindi: सेक्स की चाहत (Sex Desire) और उसके नशे में, आदमी विवेकशील न हो तो अपना सब कुछ खो बैठता है. और कुछ इस कदर अंधा हो जाता है कि खून के रिश्ते भी छोटे पड़ जाते हैं. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जिला भाटापारा (Bhatapara) बलोदा बाजार के थाना बिलाईगढ़ (Bilaigarh Police Station) में एक ऐसा ही हत्याकांड घटित हुआ जिसमें एक भाई ने अपने चचेरे भाई को सिर्फ और सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वह उसकी पत्नी अर्थात् अपनी भाभी से प्यार करने लगा था और उसे किसी भी हालात में प्राप्त करना चाहता था. दरअसल, देवर ने भाभी की किसी भी हालत में हासिल करने की चाहत में अपने बड़े भाई की हत्या कर दी. पुलिस ने आशिक हत्यारे को अपनी गिरफ्त में ले लिया है.अब हालात यह है कि वह अपने भाई को खो चुका है और अपनी चाहत को भी. पढ़िए छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अंचल की एक सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री (Murder Mystrey).

माया  मिली न राम!

हत्या के बाद आरोपी, अपनी भाभी को अपनाना चाहता था, लेकिन मृतक की पत्नी ने उसके चेहरे पर थूक दिया. इस तरह हत्या करने के बाद में कहा जा सकता है कि उस शख्स को ना तो माया मिली और ना ही राम! और जैसा कि अक्सर होता है उसकी पोल खुल गई. हत्या का खुलासा मृतक का कपड़ा मिलने से हुई. जांच में पुलिस ने शव बरामद कर परिजनों से पूछताछ की तो करीबियों पर शक हुआ. पुलिस जांच में जुटी ही थी कि आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. थाना बिलाईगढ के प्रभारी  व मामले के जांच  अफसर राजेश साहू के अनुसार महेश्वर साहू की पत्नी ने रविवार सुबह थाने आकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि शनिवार रात 8 बजे से उसके पति तालाब जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन अभी तक घर नहीं आये है.
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की. रिपोर्ट के बाद पुलिस लगातार जांच में जुटी थी.इस दौरान महेश्वर साहू के कपड़े गांव के तालाब के पास मिले. साथ ही तालाब के पास शराब की बोतले भी थी. मौके पर पहुंचकर जब जांच की गई तो उसकी लाश मिल गई. पुलिस को मामला संदेहजनक लगा. मृतक के घर जाकर परिजनों से पूछताछ की गई. पूछताछ में आरोपी संजय भास्कर ने अपने चचेरे बड़े भाई की हत्या करना स्वीकार कर लिया.

भाभी के प्यार मे हत्या 

अंततः हत्यारे ने पुलिस के समक्ष सच्चाई स्वीकार कर ली और सब कुछ सच-सच बता दिया.पहले तो उसने पुलिस को गुमराह करने शराब के लिए हत्या करने की बात कही. जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो आरोपी ने अपने भाभी से प्यार करने की बात कबूल कर ली. उसने कहा भाभी को पाने के लिए ही बड़े भाई की हत्या करने की साजिश रची थी.
आरोपी संजय ने बताया कि 25 अप्रैल 2020 को हत्या की योजना बनाकर चचेरे भाई को तालाब के  किनारे शराब पिलाने के बहाने ले गया. नशा चढ़ते ही धारदार तलवार ले उसे मारने की कोशिश की तो वह भागा मगर अंततः वार कर उसने हत्या कर दी. तत्पश्चात स्वयं को बचाने के लिए लाश में पत्थर बांधकर उसे फेंक दिया.अब हालात यह है कि वह एक हत्या का आरोपी बन चुका है और जिसे वह चाहता था वह भाभी भी उससे नफरत करने लगी है और चाहती है कि उसे फांसी हो जाए.

कहीं आप भी तो नहीं हो रहे ‘हेरा फेरी’ जैसी ठगी के शिकार!

Crime News in Hindi: अक्षय कुमार (Akshay kumar), सुनील शेट्टी (Sunil Shetty), परेश रावल ({Paresh Rawal) अभिनीत फिल्म ‘हेरा फेरी’ (Movie Hera Pheri) तो आपको याद होगी. जिसमें ठगी को बड़े ही सरल ढंग से दिखाया गया है. फिल्म में पैसे उधार लेकर के भी लोग दांव लगा देते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद रहती है कि पैसा कई गुना ज्यादा हो जाएगा. सच तो यह है कि यह एक तरह से कुछ चालबाज नेताओं और सत्ताधारी पार्टियों के कार्यकर्ताओं का अघोषित धंधा बना हुआ है. नेताओं के संरक्षण में पुलिस (Police) भी कार्रवाई नहीं करती और प्रार्थी को डपट कर थाने से भगा देने के भी कई किस्से अक्सर हमने सुने हैं. यह भी सच है कि बहुत से मामले स्वंय ही दब जाते हैं और पुलिस तक तो गिनती के ही मामले पहुंचते हैं. यह भी गंभीर तथ्य है कि कई मामलों में फरियादी थाना पुलिस के आगे पीछे घूमता रहता हैं.

क्योंकि कुछ मामलों मे फरियादी के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं होते है. जिससे आरोपी को न्यायालय मे सजा दिलाई जा सके,कई मामलों मे पुलिस जानबूझकर कर अपराध दर्ज नहीं करना चाहती. इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता. कई बार पीड़ित ब्याज पर उधार लेकर, पैसा ठग को दे देता है, ठगी का शिकार होने से, जिनसे उधार लिए होते है उनको वापस करना मुश्किल हो जाता है. फिर वे भागते फिरते हैं या आत्महत्या कर लेते हैं.

पहला किस्सा-

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के केदारपुर निवासी जगदीश विश्वकर्मा ने घर में गड़े धन और उसके अदृश्य रक्षकों द्वारा बढ़ाई जा रही परेशानी को दूर कराने के चक्कर मे 21 तोला सोना और 40 हजार रुपए नगद गंवा दिया. करीबी महिला रिश्तेदार के झांसे में आए परिवार के बाबा ने जैसा कहा वे वैसा करते चले गए.

बाबा ने पीतल के मटके में लिपटे सांप से बात करके इन्हें औऱ भी आश्चर्य में डाल दिया था. कथित विघ्नहर्ता बाबा ने स्वार्थ पूरा होने पर इनसे दूरी बनाई तब ठगी का एहसास हुआ. कथित तांत्रिक आचार्य संजय शर्मा द्वारा पैसा एवं सोना ठगी करने की रिपोर्ट सरगुजा अंचल के अंबिकापुर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है.

दूसरा किस्सा- 

संस्कारधानी कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक भौमिक नामक शख्स ने पौश इलाके में एक दमकती दुकान खोली और यह विज्ञापन देना शुरू किया कि आइए लोन लीजिए. लोग अपनी जमीन के कागजात के दस्तावेज जमा करते चले गए और ठगराज भौमिक ने बैंक से सांठगांठ करके उनके दस्तावेजों के आधार पर लगभग 9 करोड़ रुपए बिलासपुर की पांच बैंकों से निकलवा लिया.जब यह जानकारी लोगों को हुई तो बिलासपुर पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत पहुंची जांच शुरू हुई तो मामला सामने आ गया. पुलिस ने कथित ठग भौमिक के खिलाफ जांच प्रारंभ कर दी है.

तीसरा किस्सा-

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगर कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल, रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी ने जिला चांपा जांजगीर, कोरबा के कुछ बेरोजगारों को भ्रमित कर की उन्हें नौकरी दिलाई जाएगी. लगभग बीस लाख रुपए वसूल कर लिए. लंबे समय तक जब नौकरी नहीं लगी तो युवा थाना पहुंचे और मामला रंग लेने लगा. जांच पड़ताल में मामला सही पाया गया और आरोपी को जेल दाखिल कर दिया गया.

देश में बेरोजगार युवाओं को ठगने का धंधा हर कोने में फल-फूल रहा है. हर दिन कहीं न कहीं से अखबारों में ऐसी खबरें सुर्खियां बटोरती रहती हैं कि किसी बेरोजगार युवक का पिता, परिजन या फिर स्वयं बेरोजगार युवक-युवती नौकरी लगाने के नाम पर, मोबाइल टावर लगाने के नाम पर, रूपये दुगुना-तिगुना करने के नाम पर, इंश्योरेंस के नाम पर, मेडिकल कालेज मे एडमिशन के नाम पर, जमीन खरीदने के नाम से, शादी के नाम पर और न जाने  कितने प्रकार के फ्राड के शिकार युवा बेरोजगार और अभिभावक लोग होते रहते है. इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ के आईपीएस रतनलाल डांगी कहते हैं कि-“कई मामलों मे तो पीड़ित व्यक्ति लोकलाज के कारण कहीं पर शिकायत भी नहीं करता, कुछ मामलों मे पीड़ित जब शिकायत करता हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं. ठगने वाले लोग अपना ठिकाना व सम्पर्क नम्बर बदल चुके होते हैं.”

हमारे संवाददाता से बातचीत में रतनलाल डांगी ने बताया की कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच कम ज्यादा करके रकम वापसी का प्रयास चलता रहता है, कई मामलों मे रुपये के लेनदेन का कोई साक्ष्य भी नहीं होता हैं, कई मामलों में रूपये की वापसी किश्तों मे देने की बात करके पीड़ित को घुमाते रहते है.

दुखी पीड़ित आत्महत्या भी कर लेते हैं…

परेशान होकर कुछ पीड़ित न्याय मिलने से पहले ही जीवन लीला समाप्त कर लेते है. जिससे परिवार पर और असहनीय दुखों का पहाड़ टूट पड़ता हैं.कुछ संवेदनशील पुलिस अधिकारी मामला दर्ज भी कर लेते हैं. न्यायालय से मामलों में निराकरण तक कोई रकम पीड़ित को वो रकम वापस नहीं मिलती है और आरोपी उसी पैसे से अपना मामला अदालत मे लड़ते  रहते हैं. आज की सच्चाई है की शिक्षित बेरोजगार कानून की जानकारी नहीं होने की कारण और देश की लुंज पुंज व्यवस्था के कारण दोनों हाथों से ठगे जा रहे हैं. इसके लिए कानून भी जहां लचर है वही प्रश्न यह भी है कि एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति जबकि आज टीवी और समाचार पत्रों में लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं फिर पैसे देकर ठगी का शिकार क्यों हो रहा है. मां-बाप के वर्षों से कमाये हुए पैसों को गंवा कर अपनी इह लीला समाप्त कर रहा है.

युवाओं को सचेत रहना आवश्यक…

ऐसे युवाओं को पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा का संदेश पढ़कर गांठ बांध लेना चाहिए की अगरचे रुपये से ही नौकरी लगती तो आज  केवल अमीर लोगों के ही बच्चे सरकारी नौकरी में होते. सरकारी नौकरी शिक्षा से ही मिलती है. असफल रहने वाले और  मेहनत न करके अपने आपको सांत्वना देने और अपनी कमजोरी छिपाने के लिए लोग कहानी गढ़ लेते है कि बिना पैसे दिए लिए कुछ नहीं होता है.

यह समझने की बात है कि आप किसी तरह का शोर्टकट रास्ता न खोजें और न किसी के झांसे में आए. आपको बालक ध्रुव की कहानी स्मरण होनी चाहिए जब वह प्रभु को ढूंढने निकलता है तो उसे नारद मुनि कहते हैं कि प्रभु को पाने के दो रास्ते हैं एक कठिन जिसमें कांटे हैं पत्थर हैं दूसरा सरल. बालक ध्रुव कठिन रास्ते को अपनाते हैं और प्रभु को आप जानते ही हैं कि प्राप्त कर लेते हैं. अतः आप पढ़िए डिग्री प्राप्त करिए नौकरी आपका इंतजार कर रही है किसी के झांसे में ना आइए.

झांसे देने वाले से कहिए…

अगर आपको कोई नौकरी देने की बात कहता है तो उससे एक बात कहिए कि क्या आप स्टांप पेपर पर लिखित में दे सकते हैं की मैं नौकरी दिलाऊंगा. आप देखेंगे यह सुनते ही वह गायब हो जाएगा. वहीं अगर आप झांसे में आ गए हैं तो समझदारी से काम लें और सुबूत इकट्ठा करें कि आपने फलां व्यक्ति को पैसे दिए हैं और निकट के थाना में शिकायत दर्ज कराएं. कोई भी कदम उठाने से पहले हर बात को तस्दीक कीजिए. संदेह होने से पुलिस को अनिवार्य रूप से सूचना दीजिए. लोकलाज मे किसी बात को छिपाने का काम न कीजिए, हो सकता है आपके द्वारा ऐसी घटना उजागर करने से आपके और भी साथी ठगी का शिकार होने से बच जाए. आपकी सावधानी ही आपको ठगी का शिकार होने से बचा सकती हैं. जितना रूपये आपसे कोई ठगता है उससे आप कोई काम-धंधा भी शुरू करेंगे तो अच्छा रहेगा. आप नौकरी करने के बजाय नौकरी देने वाले बन सकते हैं.

बदले की आग में किया दोस्त का कत्ल

31 मार्च, 2017 को सुबह के करीब 7 बजे की बात है. उत्तरी दिल्ली के थाना तिमारपुर के ड्यूटी अफसर एएसआई सतीश कुमार को पुलिस कंट्रोल रूम से एक चौंकाने वाली खबर मिली. कंट्रोलरूम से बताया गया कि बाहरी रिंग रोड पर गोपालपुर रेडलाइट के पास जो बिजलीघर है, उस के नजदीक तकिए के एक कवर में किसी इंसान के 2 हाथ पड़े हैं.

मामला हत्या का लग रहा था. दरअसल, कुछ शातिर हत्यारे किसी का कत्ल करने के बाद पहचान छिपाने के लिए उस के अंग काट कर अलगअलग जगहों पर फेंक देते हैं. इस से पुलिस भी भ्रमित हो जाती है. ड्यूटी अफसर ने इस काल से मिली सूचना एएसआई अशोक कुमार त्यागी के नाम मार्क कर दी.

एएसआई अशोक कुमार त्यागी कांस्टेबल अनिल कुमार को साथ ले कर सूचना में बताए गए पते की तरफ रवाना हो गए. वह जगह थाने से करीब 2 किलोमीटर दूर थी इसलिए वह 10 मिनट के अंदर वहां पहुंच गए. वहां पर तमाम लोग जमा थे. भीड़ को देख कर उधर से गुजरने वाले वाहनचालक भी रुक रहे थे. एएसआई ने मुआयना किया तो वास्तव में एक मटमैले छींटदार तकिए के कवर में 2 हाथ रखे मिले.

उन्होंने इस की सूचना थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर को दे दी. थानाप्रभारी कुछ देर पहले ही रात्रि गश्त से थाने लौटे थे. एएसआई अशोक कुमार से बात कर के वह भी एसआई हरेंद्र सिंह, एएसआई उमेश कुमार, हेडकांस्टेबल राजेश, कांस्टेबल कमलकांत और निखिल कुमार को ले कर कुछ ही देर में बिजलीघर के पास पहुंच गए.

मौके पर पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम को भी सूचना दे दी. इन दोनों टीमों के पहुंचने तक पुलिस उन अंगों से दूर रही. करीब आधे घंटे में फोरैंसिक और क्राइम इनवैस्टीगेशन की टीमें वहां पहुंच गईं. मौके के फोटो वगैरह खींचने के बाद पुलिस ने तकिए को उठा कर उलटा किया तो उस में से 2 बाहों के अलावा पीले रंग की एक पौलीथिन भी निकली. दोनों बाहों को कंधे से काटा गया था.

उस थैली को खोला गया तो उस में एक युवक का सिर था. सिर और हाथ देख कर वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए. फोरैंसिक टीम और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम का काम निपट जाने के बाद थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी. वहां पर मृतक के चेहरे को कोई भी नहीं पहचान पाया, क्योंकि हत्यारे ने चाकू से उस के चेहरे को बुरी तरह से गोद डाला था. उस के दाहिने हाथ पर ‘ऊं साईंराम’ गुदा हुआ था. जरूरी काररवाई करने के बाद पुलिस ने उन तीनों अंगों को अपने कब्जे में ले लिया.

मृतक के अन्य अंग भी हत्यारे ने कहीं आसपास ही डाले होंगे, यह सोच कर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर बुराड़ी से कश्मीरी गेट की तरफ जाने वाली सड़क की साइड को बड़े ध्यान से देखते हुए चल रहे थे. करीब 100 मीटर चलने पर खून से सनी एक चादर पड़ी मिली. वहीं पर एक विंडचिटर, स्वेटर, लोअर, शर्ट और एक जींस भी पड़ी थी. कांस्टेबल अनिल को वहां छोड़ कर थानाप्रभारी करीब 200 मीटर आगे बढ़े थे कि सड़क किनारे बाईं टांग पड़ी मिली, जो जांघ से कटी हुई थी.

कांस्टेबल कमलकांत को हिफाजत के लिए वहां छोड़ कर थानाप्रभारी और आगे बढ़े. वहां से वह 200 मीटर आगे सड़क के बाईं ओर उन्हें दाहिनी टांग भी पड़ी मिल गई. मृतक का हाथपैर और सिर बरामद हो चुके थे. अब केवल धड़ बरामद करना था. उस की खोजबीन के लिए वह और आगे बढ़े. बाहरी रिंगरोड पर जहां तक उन के थाने की सीमा थी, वहां तक उन्होंने सड़क के दोनों तरफ काफी खोजबीन की. झाडि़यां भी देखीं पर कहीं भी धड़ नहीं मिला.

फोरैंसिक टीम और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी उन जगहों पर पहुंच गई, जहां दोनों टांगें मिली थीं. उन का काम निपट जाने के बाद थानाप्रभारी ने पंचनामे की काररवाई पूरी की. इस के बाद सिर, दोनों हाथों और दोनों पैरों को सब्जीमंडी मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया. खबर मिलने पर डीसीपी जतिन नरवाल ने भी उन जगहों का निरीक्षण किया, जहांजहां पर वे कटे अंग मिले थे.

दोपहर करीब 12 बजे उत्तरी जिला पुलिस को वायरलैस द्वारा मैसेज मिला कि मजनूं टीला गुरुद्वारे के पास स्थित संजय गांधी अखाड़े के नजदीक फुटपाथ के किनारे प्लास्टिक का सफेद रंग का बोरा पड़ा हुआ है. उस बोरे से दुर्गंध आ रही है और उस पर मक्खियां भिनभिना रही हैं. यह इलाका थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में आता था, इसलिए वहां के थानाप्रभारी 10 मिनट में ही मौके पर पहुंच गए.

चूंकि यह मैसेज पूरे जिले में प्रसारित हुआ था, जिसे तिमारपुर के थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने भी सुना था. मैसेज सुनते ही ओ.पी. ठाकुर के दिमाग में विचार आया कि कहीं उस बोरे में उस व्यक्ति का धड़ तो नहीं है, जिस के अन्य अंग उन के इलाके में मिले थे. लिहाजा वह भी संजय अखाड़े के पास पहुंच गए.

सिविल लाइंस थानाप्रभारी ने जब उस बोरे को खुलवाया तो एक चादर में लपेट कर रखी हुई सिरविहीन लाश दिखी. यह देख तुरंत क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम को खबर दे दी गई. कुछ देर में दोनों टीमें मौके पर पहुंच गईं. पुलिस ने चादर में लिपटी हुई लाश बाहर निकलवाई. वह किसी युवक का धड़ था. धड़ देख कर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर को लगा कि यह धड़ उसी युवक का हो सकता है, जिस के और अंग बरामद किए गए हैं.

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम का काम निपट जाने के बाद ओ.पी. ठाकुर ने इस की सूचना डीसीपी को दी. डीसीपी के निर्देश पर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने पंचनामे की काररवाई कर के उस धड़ को भी सब्जीमंडी मोर्चरी भिजवा दिया.

डाक्टरों ने जांच कर बता दिया कि धड़ और कटे हुए सारे अंग एक ही व्यक्ति के हैं. इस से यह बात जाहिर हो रही थी कि हत्यारे बेहद शातिर हैं. उन्होंने मृतक के अंगों को अलगअलग जगहों पर इस तरह डाला था, जिस से पुलिस उन तक न पहुंच सके. लाश के सारे टुकड़े बुराड़ी से कश्मीरी गेट बसअड्डे की तरफ जाने वाली सड़क पर ही डाले गए थे. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि हत्यारों ने लाश ठिकाने लगाने के लिए या तो स्कूटर या स्कूटी का प्रयोग किया होगा या फिर लाश औटोरिक्शा अथवा कार वगैरह से ठिकाने लगाई होगी.

पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती मृतक की शिनाख्त करने की थी. वह कौन था, कहां का रहने वाला था, यह सब पता लगाना आसान नहीं था, क्योंकि मौके से पुलिस को ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से मृतक की शिनाख्त में सहयोग मिल सके. बस दाहिने बाजू पर ‘ॐ साईंराम’ गुदा था.

मृतक का हुलिया बताते हुए थानाप्रभारी ने सब से पहले दिल्ली के समस्त थानों में मैसेज भेज कर यह जानने की कोशिश की कि इस हुलिए से मिलताजुलता कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है. पर किसी भी थाने में इस हुलिए से मिलतेजुलते किसी व्यक्ति की गुमशुदगी की सूचना दर्ज नहीं थी.

31 मार्च को ही शाम के समय बुराड़ी थाने के संतनगर की गली नंबर 92 की रहने वाली शकुंतला नाम की महिला थाने पहुंची. शकुंतला ने ड्यूटी अफसर को बताया कि उस का 26 वर्षीय बेटा नितिन कल रात से घर नहीं आया है. उन्होंने बेटे का हुलिया भी बता दिया.

ड्यूटी अफसर को यह बात तो पता थी ही कि तिमारपुर पुलिस ने किसी व्यक्ति की 6 टुकड़ों में कटी लाश बरामद की है, इसलिए उन्होंने शकुंतला से कहा, ‘‘मैडम, हम तो यही चाहते हैं कि नितिन जहां भी हो सहीसलामत हो. पर आज तिमारपुर थाना पुलिस ने एक लाश बरामद की है, जिस की शिनाख्त अभी नहीं हो सकी है. आप एक बार तिमारपुर थाने जा कर संपर्क कर लें तो अच्छा रहेगा.’’

इतना सुन कर शकुंतला घबराते हुए बोलीं, ‘‘नहीं मेरे बेटे के साथ ऐसा नहीं हो सकता.’’

उधर ड्यूटी अफसर ने तिमारपुर के थानाप्रभारी को फोन कर के बताया कि संतनगर की एक महिला अपने 26 साल के बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराने आई है. इन का बेटा कल से गायब है. यह खबर मिलने पर थानाप्रभारी ने एसआई हरेंद्र सिंह को बुराड़ी थाने भेज दिया. हरेंद्र सिंह ने बुराड़ी थाने में बैठी शकुंतला से उस के बेटे नितिन के गायब होने के बारे में बात की. फिर वह उसे अपने साथ तिमारपुर थाने ले गए.

सब से पहले उन्होंने महिला को बरामद की गई लाश के सारे टुकड़ों के फोटो दिखाए. उस के दाहिने बाजू पर ‘ॐ साईंराम’ लिखा था. यही नितिन के सीधे हाथ पर भी लिखा था. उस का चेहरा ज्यादा क्षतिग्रस्त था इसलिए वह उसे ठीक से नहीं पहचान सकी. इस पर एसआई हरेंद्र सिंह उसे सब्जीमंडी मोर्चरी ले गए.

दरअसल, हत्यारों ने मृतक के चेहरे को चाकू से गोद दिया था, जिस से चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया था. फिर भी उस बिगड़े चेहरे और हाथ पर गुदे टैटू से शकुंतला ने लाश की पहचान अपने बेटे नितिन के रूप में कर ली. इस के बाद तो वह वहीं पर दहाड़ें मारमार कर रोने लगी.

पुलिस ने उसे सांत्वना दे कर जैसेतैसे चुप कराया. इस के बाद शकुंतला ने नितिन की हत्या की जानकारी अपने पति और अन्य लोगों को दी. खबर मिलते ही शकुंतला के पति लालता प्रसाद मोहल्ले के कई लोगों के साथ सब्जीमंडी मोर्चरी पहुंच गए. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि नितिन की कोई इस तरह हत्या कर सकता है. बहरहाल पोस्टमार्टम कराने के बाद लाश के सभी टुकड़े लालता प्रसाद को सौंप दिए गए.

लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस का अगला काम हत्यारों तक पहुंचना था. डीसीपी जतिन नरवाल ने थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में इंसपेक्टर संजीव वर्मा, एसआई अमित भारद्वाज, हरेंद्र सिंह, एएसआई सतेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल सुनील, राजेश, कांस्टेबल कुलदीप, निखिल, कमलकांत, विकास और सुनील कुमार आदि को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले मृतक नितिन उर्फ सुमित उर्फ भोला के परिजनों से बात की. उस की मां शकुंतला ने बताया कि नितिन हैदरपुर में जौनसन एंड जौनसन कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर के यहां सेल्समैन था. वह कल यानी 30 मार्च को अपनी ड्यूटी खत्म कर के 6 बजे घर आ गया था. बाद में वह किसी से मिलने बाहर चला गया था.

जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो उसे कई बार फोन किया पर उस ने नहीं उठाया. सुबह होने तक भी जब नितिन घर नहीं लौटा तो उसे फोन किया पर उस का फोन बंद मिला. उस के दोस्तों और अन्य लोगों को फोन कर के उस के बारे में मालूम किया गया, लेकिन कोई पता नहीं चला. थकहार कर वह थाने में गुमशुदगी लिखाने पहुंची.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने नितिन के दोस्तों से पूछताछ करनी शुरू कर दी.

8-10 दोस्तों से पूछताछ करने के बाद एक दोस्त ने पुलिस को बताया कि नितिन 30 मार्च की शाम सवा 6 बजे सरदा मैडिकल स्टोर के सामने देखा गया था. वह किसी की मोटरसाइकिल पर बैठा था. सरदा मैडिकल स्टोर संतनगर में मेनरोड पर ही है. पुलिस ने उस मैडिकल स्टोर पर पहुंच कर नितिन के बारे में पता किया तो पता चला कि वहां काम करने वाला कोई भी व्यक्ति नितिन को नहीं जानता था.

इस के बाद पुलिस ने वहां मार्केट में दुकानों के सामने लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. फुटेज देखते समय नितिन के कुछ दोस्तों को भी बैठा लिया गया था, जिस से वह नितिन को आसानी से पहचान सकें. एक फुटेज में नितिन मोटरसाइकिल पर जाता दिख गया. दोस्तों ने बता दिया कि वह हैप्पी नाम के दोस्त के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा है. हैप्पी संतनगर की ही गली नंबर 18 में रहने वाले सुनील कपूर का बेटा था. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि हैप्पी बदमाश और दबंग किस्म का है.

पुलिस जब उस के घर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. घर वालों ने बताया कि वह कहीं रिश्तेदारी में गया है. जिस मोटरसाइकिल पर वह फुटेज में दिखा था, वह उस के घर के सामने खड़ी दिखी. इस के अलावा उस के घर के सामने एक वैगनआर कार भी खड़ी थी.

इस के बाद पुलिस ने हैप्पी के बारे में गोपनीय जांच शुरू कर दी. इस जांच में पुलिस को उस के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलीं. यह भी पता चला कि हैप्पी और उस के मामा का लड़का पवन नितिन से गहरी दुश्मनी रखते थे.

पुलिस टीम ने हैप्पी को तलाश करने के बजाय उस के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू कर दिए. उस के फोन की काल डिटेल्स पाने के लिए संबंधित मोबाइल कंपनी को लिख दिया गया. पुलिस ने हैप्पी की उस रात की मूवमेंट देखने के लिए पुन: आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. फुटेज में रात 1 बजे के आसपास उसी वैगनआर कार की मूवमेंट दिखाई दी जो उस के घर के सामने खड़ी पाई गई थी. इस से पुलिस को शक हुआ कि नितिन की हत्या में हैप्पी का हाथ हो सकता है.

नितिन से हैप्पी और उस के मामा का लड़का पवन रंजिश रखते थे. हैप्पी तो घर से गायब था जबकि पवन संतनगर की गली नंबर 88 में रहता था. पुलिस टीम पवन के घर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गया. पुलिस को देख कर वह घबरा गया. पुलिस ने उस से हैप्पी के बारे में पूछा तो उस ने अनभिज्ञता जताई.

पुलिस ने पवन के कमरे की गहनता से जांच की तो बैड के पास खून के छींटे मिले. उन छींटों के बारे में पूछा गया तो वह इधरउधर की बातें करने लगा. तभी थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने उस के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया. एक थप्पड़ लगते ही पवन लाइन पर आ गया. अचानक उस के मुंह से निकल गया, ‘‘सर, नितिन को मैं ने नहीं बल्कि हैप्पी ने मारा था.’’

केस का खुलासा होते ही थानाप्रभारी ने राहत की सांस ली. उन्होंने पवन को हिरासत में ले लिया. इस के बाद हैप्पी के घर के बाहर खड़ी सीबीजेड मोटरसाइकिल और वैगनआर कार कब्जे में लेने के बाद हैप्पी के घर वालों पर उसे तलाश करने का दबाव बनाया. कार चैक की गई तो उस की सीट कवर पर भी खून के धब्बे पाए गए. पुलिस ने पवन से नितिन की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह दोस्ती में अविश्वास की भावना से उपजी हुई निकली.

26 वर्षीय नितिन उर्फ सुमित उर्फ भोले उत्तरी दिल्ली के थाना बुराड़ी के संतनगर में अपने परिवार के साथ रहता था. वह जौनसन एंड जौनसन कंपनी के हैदरपुर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां सेल्समैन था. नितिन की संतनगर के ही रहने वाले सूरज और विक्की से अच्छी दोस्ती थी. तीनों दोस्त साथ खातेपीते थे.

एक बार नितिन को कुछ पैसों की जरूरत पड़ी तो उस ने विक्की से पैसे मांगे. दोस्त की जरूरत को समझते हुए विक्की ने उसे 10 हजार रुपए उधार दे दिए. कई बार पैसों की वजह से अपने नजदीकी संबंधों और यहां तक कि रिश्तेदारी तक में दरार पड़ जाती है. यही बात इन दोस्तों के बीच भी हुई. निर्धारित समय पर जब नितिन ने विक्की के पैसे नहीं लौटाए तो विक्की ने उस से तकाजा करना शुरू कर दिया. नितिन कोई न कोई बहाना बना कर उसे टालता रहा.

नितिन के बारबार किए जा रहे झूठे वादों से विक्की भी परेशान हो गया. 10 हजार की रकम कोई छोटीमोटी तो होती नहीं जो विक्की छोड़ देता. दोस्ती में भी कोई दरार न आए इसलिए वह उस से पैसे लौटाने को कहता रहा. बारबार पैसों का तकाजा करना नितिन को पसंद नहीं था. इस बात पर कभीकभी उन दोनों के बीच तकरार हो जाती थी.

15 अगस्त, 2015 की बात है. नितिन, विक्की और सूरज यमुना किनारे पार्टी करने गए थे. नितिन तो वापस आ गया लेकिन विक्की और सूरज नहीं आए. घर वालों ने पूछा तो नितिन ने बता दिया कि वे दोनों नदी में डूब गए. जवान बच्चों के डूबने की बात पर उन के घरों में हाहाकार मच गया. पुलिस को सूचना दी गई तो पुलिस ने गोताखोरों की मदद से सूरज और विक्की की लाशें बरामद करने की कोशिश की लेकिन उन की लाशों का पता तक नहीं चला. सूरज विक्की का ममेरा भाई था.

विक्की के भाई हैप्पी और सूरज के भाई पवन को नितिन पर शक था. उन का मानना था कि नितिन ने उधारी के पैसों से बचने के लिए दोनों को मार डाला. उन का कहना था कि नितिन ने विक्की और सूरज को शराब पिलाने के बाद गला घोंट कर हत्या कर दी होगी और उन की लाशें पत्थर के साथ बांध कर नदी में डाल दी होंगी.

दोनों ही आपराधिक प्रवृत्ति के थे. दोनों पर ही चोरी, लूट आदि के कई मुकदमे चल रहे थे. उन्होंने दिल्ली पुलिस की औपरेशन सेल से नितिन की शिकायत की थी. औपरेशन सेल ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. शिकायत के लगभग एक साल बाद भी जब इस मामले में कोई नतीजा नहीं निकला तो पवन और हैप्पी को निराशा हुई. उन्होंने सोचा कि नितिन ने पुलिस से सांठगांठ कर के काररवाई दबवा दी है. वे नितिन को ही अपने भाइयों का कातिल मान रहे थे. उस के किए की वे उसे सजा दिलाना चाहते थे.

जब उन्हें लगा कि उसे कानूनी सजा नहीं मिल पाएगी तो उन्होंने खुद ही नितिन को सजा देने की ठान ली और सोच लिया कि जिस तरह उन के भाइयों की लाश आज तक नहीं मिल सकी है, उसी तरह नितिन की हत्या कर के लाश इस तरह से ठिकाने लगाएंगे कि उस के घर वाले ढूंढते ही रहें.

नितिन से उन दोनों की बोलचाल तक बंद हो चुकी थी, लेकिन अपना मकसद पूरा करने के लिए उस से नजदीकी संबंध बनाने जरूरी थे. इसलिए पवन और हैप्पी ने अपनी योजना के तहत उस से दोस्ती की. चूंकि नितिन भी शराब का शौकीन था इसलिए उस ने सारे गिलेशिकवे भुला कर हैप्पी और पवन से दोस्ती कर ली.

लेकिन हैप्पी और पवन के मन में तो कोई दूसरी ही खिचड़ी पक रही थी, जिस से नितिन अनभिज्ञ था. लेकिन इस से पहले नितिन पर अपना विश्वास जमाना जरूरी था ताकि काम आसानी से हो सके.

हैप्पी संतनगर की गली नंबर-18 में अपने परिवार के साथ रहता था जबकि उस का ममेरा भाई पवन गली नंबर-88 में अकेला रहता था. पवन दुकानों पर कौस्मेटिक सामान सप्लाई करता था. उस ने अपने कमरे के ताले की एक चाबी हैप्पी को दे रखी थी और एक खुद रखता था. कभीकभी वे नितिन के साथ इसी कमरे में दारू की पार्टी रखते थे.

हैप्पी नितिन को ठिकाने लगाने के तरहतरह के प्लान बनाता पर उसे मौका नहीं मिल पा रहा था. 30 मार्च, 2017 की शाम को हैप्पी अपनी सीबीजेड मोटरसाइकिल से आ रहा था, तभी संतनगर बसअड्डे पर उसे नितिन दिखाई दिया. दरअसल, ड्यूटी के बाद वह घर हो कर बाहर बाजार में आ गया था. नितिन को देखते ही उस ने उस से बात की और पार्टी करने के बहाने उसे गली नंबर-88 में पवन के कमरे पर ले गया. जाते समय हैप्पी ने शराब की बोतल खरीद ली थी. पवन के कमरे की एक चाबी उस के पास पहले से थी. लिहाजा ताला खोल कर हैप्पी और नितिन शराब पीने बैठ गए. हैप्पी ने सोच लिया था कि वह आज नितिन का काम तमाम कर के रहेगा.

लिहाजा उस दिन उस ने नितिन को खूब शराब पिलाई और खुद कम पी. उस की शराब में उस ने नशीली दवा भी मिला दी थी. नितिन जब शराब के नशे में चूर हो गया तभी हैप्पी ने उसे धक्का दे दिया. नितिन फर्श पर गिर गया. हैप्पी ने आव देखा न ताव चाकू से उस का गला रेत दिया. खून को उस ने एक कपड़े से पोंछ दिया तथा लाश चादर में लपेट कर बैड में छिपा दी और ताला लगा कर घूमने निकल गया.

पवन उस समय तक भी कमरे पर नहीं लौटा था. हैप्पी ने कुछ देर बाद पवन को फोन किया, ‘‘नितिन का मर्डर कर के मैं ने तो अपना इंतकाम पूरा कर लिया, तू भी आ जा.’’

थोड़ी देर बाद पवन कमरे पर लौटा तो उसी समय हैप्पी भी वहां पहुंच गया. हैप्पी ने बैड से नितिन की लाश बाहर निकाली. इस के बाद उन्होंने सब से पहले धड़ से सिर अलग किया. फिर उस की दोनों बाहों को कंधों से काट कर अलग किया. इस के बाद दोनों टांगों को भी काट दिया. पवन के दिल में भी नितिन के प्रति खुंदक भरी हुई थी. गुस्से में उस ने भी उस के चेहरे को चाकू से इस तरह गोद डाला कि उसे कोई पहचान तक न सके.

इस के बाद दोनों भाइयों ने उस की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. नितिन के कटे सिर को उन्होंने एक पौलीथिन में बांध लिया. फिर उसे तकिए के कवर में रख लिया. तकिए के उसी कवर में उन्होंने उस की दोनों भुजाओं को भी रख लिया. धड़ को उन्होंने एक चादर में लपेटा और प्लास्टिक की एक बोरी में डाल लिया.

हैप्पी अपनी वैगनआर कार नंबर एचआर-26एएस-3712 ले आया. रात एक बजे के करीब जब अधिकांश लोग गहरी नींद सो रहे थे, तभी हैप्पी और पवन ने नितिन की लाश के सभी टुकडे़ कार में रखे.

कार ले कर वे कश्मीरी गेट बसअड्डे की तरफ बाहरी रिंगरोड से चल दिए. गोपालपुर बिजलीघर के नजदीक कार रोक कर उन्होंने तकिए का कवर बाहर फेंक दिया. वहां से 100 मीटर चलने के बाद खून से सनी चादर सड़क के किनारे फेंक दी. वहीं पर कुछ और कपड़े फेंके. वहां से करीब 200 मीटर आगे सड़क के बाईं ओर को उन्होंने एक पैर फेंक दिया.

वहां से 200 मीटर और चल कर उन्होंने दूसरा पैर भी सड़क किनारे फेंक दिया. अब उन के पास केवल धड़ बचा था. धड़ वाली बोरी उन्होंने मजनूं का टीला गुरुद्वारे से लगे संजय अखाड़े के नजदीक फुटपाथ के किनारे रख दी.

लाश ठिकाने लगाने के बाद वे दोनों कमरे पर लौट आए. उन्होंने कमरे में जहांतहां लगा खून पोंछ दिया. कार की सीट पर भी खून के कुछ धब्बे लगे थे. वह भी साफ कर दिए. लेकिन किसी तरह बैड पर लगा खून का दाग रह गया, जिस से पुलिस उन तक पहुंच गई.

पवन से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 2 अप्रैल, 2017 को उसे तीसहजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी पवन कुमार के समक्ष पेश कर के 3 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस की निशानदेही पर हत्या से संबंधित कुछ और सबूत जुटाए. फिर 4 अप्रैल को उसे फिर से न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. बाद में हैप्पी को पुलिस ने बिहार के नालंदा से गिरफ्तार कर लिया. अदालत में पेश कर के उसे भी जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

रिहाई: अनवार मियां के जाल में फंसी अजीजा का क्या हुआ?

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रिहाई- भाग 3: अनवर मियां के जाल में फंसी अजीजा का क्या हुआ?

उस दिन खासतौर पर खाला बी ने शौहर के लिए बीवी के फर्ज का बयान करते हुए बताया कि इसलाम में शौहर को दूसरा दरजा दिया गया है. एक किस्सा सुनाते हुए यों बयान किया कि एक शौहर ने बीवी को पानी पिलाने का हुक्म दिया. बीवी के पानी लातेलाते शौहर को नींद आ गई. बीवी ने शौहर की नींद में खलल न डाल कर पूरी रात हाथ में पानी का गिलास लिए खड़ा रहना मुनासिब समझा. बीवी की खिदमत देख कर कुदरत ने उस को बेशकीमती इनाम दिया. यह सुन कर महिलाएं भावविभोर हो गईं. कुछ तो पल्लू से आंसू पोंछने लगीं.

बातबेबात, कसूरवार हों या न हों, आएदिन लातजूते, गालीगलौज खाने वाली औरतों ने भी शौहर की लंबी जिंदगी की दुआएं मांगीं और खुद को नेक बीवी बनाने की शपथ भी ली.

अजीजा की सुनहरी चूडि़यों की खनक में हलाला के जलालत भरे दौर से गुजरने का जरा सा भी मलाल नहीं था. कुरैशा ने हिकारत भरी निगाहों से अपनी बहन अजीजा पर उचटती नजर डाली और तमतमाया चेहरा लिए झटके से उठ कर कमरे से बाहर आ गई.

खाला बी 3 महीने बाद अपने छोटे बेटे की मंगनी के लड्डू ले कर अनवार मियां के घर पहुंचीं. घर में अजीब सा सन्नाटा खिंचा था. इतने बड़े घर में सिर्फ बैठकखाने में ही पीली रोशनी वाला एकमात्र बल्ब जल रहा था.

‘‘अम्मी कहां हैं?’’ खाला बी ने अजीजा की छोटी बेटी से पूछा.

‘‘जीजी, वे ललितपुर गई हैं फूफी के घर,’’ बेटी का खौफजदा चेहरा और आवाज की थरथराहट को खाला बी ने भांप लिया.

‘‘कब तक वापस लौटेंगी?’’

‘‘जी, कुछ पता नहीं है,’’ बेटी का स्वर हकला गया.

खाला बी को याद आ गया, एक बार अजीजा ने बताया था कि अनवार मियां और उन के बहनोई में पैसों को ले कर जबरदस्त झगड़ा हो गया था, इसलिए दोनों घरों में आनाजाना बिलकुल बंद है. फिर अचानक अजीजा का उन के घर जाना और घर में इतनी खामोशी. कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जिंदगी

को नए सिरे से शुरू करने के मधुर एहसास को अजीजा के मुंह से सुनने की बेताबी खाला बी के अंतर्मन में कुलबुला रही थी. आखिर बचपन में मदरसे में अलिफ, बे, ते, से का सबक शुरू करने से ले कर बालों में चांदी चमकने तक का दोनों का पलपल साथ रहा. दोनों ने एकदूसरे से सुखदुख, प्यारमोहब्बत, अमीरीगरीबी के एहसासों को साथसाथ दिल खोल कर बांटा है.

‘‘बस दोचार दिन में वापस आ जाएंगी अम्मी,’’ अजीजा के बड़े बेटे ने छोटी बहन को आंखों ही आंखों में अंदर जाने का इशारा करते हुए तपाक से जवाब दिया.

‘‘अच्छाअच्छा, घर में और तो सब ठीक है न. मेरा मतलब अब्बूअम्मी के बीच अब कोई तकरार…’’ किसी के घर के अंदरूनी मामले की टोह लेने जैसा अपराधबोध खाला बी को छील गया.

‘‘जी, सब ठीक है,’’ बात को एक झटके में खत्म करने की कोशिश की बेटे ने.

‘‘शुक्र है कुदरत का. अच्छा, तो मैं चलती हूं. खुदाहाफिज,’’ कह कर इत्मीनान की सांस ले कर खाला बी सीढि़यों से उतरने लगीं तो जीने के नीचे के स्टोररूम का दरवाजा हिलता दिखाई दिया. खाला बी ने मोबाइल की रोशनी से देखा तो दरवाजे की सांकल में बड़ा सा ताला लटका दिखाई पड़ा. फिर अंदर से दरवाजा कौन हिला रहा है? कहीं कोई जानवर धोखे से बंद तो नहीं हो गया कमरे में. वापस मुड़ कर अजीजा के बच्चों को वे यह बताना ही चाहती थीं कि दरवाजे से मद्धिममद्धिम नारी स्वर में अपना नाम पुकारे जाने की आवाज सुनाई पड़ी. झट सीढि़यों से नीचे उतर कर स्टोररूम के दरवाजे पर कान रख कर सुनने लगीं. नारी स्वर फिर उभरा, ‘‘आपा बी, मैं अजीजा, मुझे बाहर निकालो,’’ अजीजा की सिसकियों भरी आवाज साफ सुनाई पड़ी.

ठीक उसी वक्त ऊपर से किसी के नीचे उतरने की आहट आने लगी. खाला बी काले नकाब और स्याह अंधेरे का फायदा उठा कर जीने की नीचे वाली दीवार से चिपक गईं सांस रोके हुए. धीरेधीरे अजीजा के बड़े बेटे के कदमों की आहट मेन गेट से बाहर चली गई तो खाला बी दबे कदमों से फिर स्टोररूम के दरवाजे की झिरी पर अपने कान रख कर सुनने लगीं :

‘‘आपा बी, मुझे 8 दिनों से इस कोठरी में बंद कर रखा है, भूखाप्यासा.’’

‘‘लेकिन क्यों?’’ खाला बी की बेचैनी बढ़ती चली गई और वे दम साधे सुनने लगीं.

‘‘लालची व दौलत के भूखे हैं मेरे शौहर और बेटे. मेरे नाम पर यह 10 कमरों का मकान है, 8 लाख की बीमा पौलिसी अगले महीने मैच्योर होने वाली है और 5 एकड़ आम के बगीचे वाली जमीन भी मेरे नाम पर है. केस हार जाने पर इन को मेरा खानाखर्चा, मेहर और दहेज वापस देना पड़ता और पूरी जायदाद पर सिर्फ मेरा हक होता. इन के सारे अधिकार खत्म हो जाते. सब कंगाल हो जाते. इसलिए मुझे बहलाफुसला कर दोबारा निकाह करने की साजिश रची गई. मुझ पर पूरी जायदाद अनवार मियां के नाम पर करने का दबाव डाला जा रहा है. मेरे इनकार करने पर मुझे जानवरों की तरह पीटा और यहां बंद कर दिया है.’’

‘‘क्या तुम्हारे बच्चों को ये सब मालूम है?’’ खाला बी ने फुसफुसा कर पूछा.

‘‘हां, बेटियों को छोड़ कर सभी बेटे इस षड्यंत्र में शामिल हैं. मुझे बहलानेफुसलाने और जज्बाती तौर पर धोखा देने में बेटों का पूरापूरा हाथ है और शौहर ने तो निकाह के बाद एक बार भी मुझ से बात नहीं की, यह कह कर कि मैं दूसरे की जूठन को खाना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करता. आपा बी, मुझे इन शैतानों और निहायत गिरे हुए खुदगर्ज शौहर और बेटों से बचा लीजिए.’’

अजीजा की घुटीघुटी दम तोड़ती आवाज ने खाला बी को अंदर तक कंपकंपा दिया.

इतनी गंदी और भयानक सचाई ये नमाजीपरहेजगार अनवार मियां की शातिर दिमागी और ऐसी तुरुपचाल…अफसोस, चंद रुपयों और जायदाद के लिए पत्नी के साथ इतना बड़ा विश्वासघात और घिनौना अमानवीय व्यवहार?

अजीजा की कैदियों सी हालत देख कर खाला बी का कलेजा कांप गया, रोंगटे खड़े हो गए. बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए कांटे उगे गले से बोलीं, ‘‘अजीजा, किसी भी कागज पर किसी भी सूरत में दस्तखत मत करना. बस, चंद घंटे की इस काली रात को और काट लो, हिम्मत से. मैं जल्द ही तुम्हारी रिहाई का इंतजाम करती हूं. हौसला रखना, बहन,’’

खाला बी अनवार मियां के घर की बाउंड्री से चिपकती हुई धीरेधीरे मेनगेट से बाहर निकल गईं.

दूसरे दिन तड़के ही खाला बी की रिपोर्ट पर पुलिस ने अनवार मियां की कोठी से अजीजा को जख्मी और मरणासन्न हालत में बाहर निकाला. अजीजा के बयान पर पुलिस ने अनवार मियां और उन के बेटों को हथकड़ी डाल कर पैदल ही महल्ले की गलियों से ले जाते हुए पुलिस हवालात तक पहुंचा दिया.

पूरे 1 महीने बाद कुरैशा ने अजीजा के सामने अनवार मियां के खिलाफ किए जाने वाले केस के कागजात रख दिए. अजीजा दस्तखत करते हुए खाला बी और कुरैशा को भीगी आंखों से देखते हुए भर्राए गले से बस इतना ही बोल पाई, ‘‘मेरी रिहाई और मेरा आत्मसम्मान लौटाने का शुक्रिया.’’

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