पूनम पांडे को डेट कर चुके हैं विनोद खन्ना के बेटे

अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना के अलावा विनोद खन्ना के एक और बेटे हैं जिनका नाम साक्षी खन्ना है. साक्षी अभी 25 साल के हैं और अपने इंस्टाग्राम फोटोज को लेकर काफी सुर्खियों में रहते हैं. खबरों की मानें तो साक्षी इस साल बॉलीवुड डेब्यू कर सकते हैं. दरअसल साक्षी खन्ना, संजय लीला भंसाली को उनकी फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में असिस्ट कर चुके हैं जिसके बाद भंसाली ने उन्हें लॉन्च करने का वादा किया है. हालांकि अभी उनके प्रोजेक्ट का कोई नाम सामने नहीं आया है.

साक्षी जहां प्रोफेशनल लाइफ को लेकर चर्चा हैं तो वहीं उनकी पर्सनल लाइफ भी कुछ कम सुर्खियों में नहीं रही है. साक्षी को लेकर बीच में खबरें आई थीं कि वो पूनम पांडे को डेट कर रहे हैं. साक्षी और पूनम को कई बार साथ साथ टाइम स्पेंड करते देखा गया है. यहां तक कि दोनों पार्टीज में भी अक्सर साथ स्पॉट हुए. हालांकि कभी साक्षी या पूनम का इन खबरों पर कोई रिएक्शन नहीं आया.

साक्षी खन्ना काफी बिंदास लाइफ जीते हैं. उन्हें लंबे बाल और ढिले-ढाले कपड़े पहनना पसंद है. साक्षी को पार्टीज और फोटोग्राफी का काफी शौक हैं. वो अक्सर अपने इंस्टाग्राम पर ऐसे मौकों की फोटोज पोस्ट करते रहते हैं. यहां तक कि वो इन फोटोज में ज्यादातर स्मोकिंग करते दिखाई देते हैं. बता दें, साक्षी को साल 2011 में उनके दोस्तों के साथ पार्टी से ड्रग केस में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. हालांकि साक्षी ने इस सभी खबरों से हमेशा इंकार किया है.

विनोद खन्ना ने 1971 में गीतांजलि से शादी की थी लेकिन 1985 में उनका तलाक हो गया. गीतांजलि से विनोद के दो बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना हैं. विनोद ने साल 1990 में कविता खन्ना से दूसरी शादी की थी. जिनसे उन्हें एक बेटा साक्षी खन्ना और एक बेटी श्रद्धा खन्ना है. बता दें, साक्षी दिखने में एकदम पापा विनोद खन्ना जैसे दिखते हैं.

जब हेमा मालिनी से शादी करने वाले थे जितेंद्र

‘जंपिंग जैक’ के नाम से पॉपुलर जितेंद्र 75 साल के हो चुके हैं. जितेंद्र का असली नाम रवि कपूर है. उन्होंने साल 1974 में अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड शोभा कपूर से शादी की थी. हालांकि बेहद कम लोग ही ये जानते हैं कि जितेंद्र की नजदीकियां कभी हेमा मालिनी से भी थीं. यहां तक कि वो अपनी मंगेतर शोभा को छोड़ उनसे शादी करने वाले थे लेकिन ऐन मौके पर धर्मेंद्र दोनों के बीच आ गए.

फिल्म ‘दुल्हन’ की शूटिंग के दौरान जितेंद्र, हेमा मालिनी को दिल दे बैठे. दोनों ने शादी करने का फैसला भी कर लिया था. जब इस बात की भनक जितेंद्र की मंगेतर और बचपन की दोस्त शोभा कपूर को लगी तो उन्होंने धर्मेंद्र को हेमा को समझाने की जिम्मेदारी सौंपी. नतीजा ये हुआ कि ये शादी रुक गई. ये अलग बात है कि बाद में खुद धर्मेंद्र ने हेमा के साथ दूसरी शादी की.

शोभा कपूर जब 14 साल की थीं तब जितेंद्र को उनसे प्यार हो गया था. उस वक्त जितेंद्र बॉलीवुड स्टार नहीं थे. जब जितेंद्र बॉलीवुड में अपनी किस्मत आज़मा रहे थे उसी वक्त शोभा ब्रिटिश एयरवेज में कम कर रही थीं. जॉब की वजह से शोभा को अक्सर विदेश में रहना पड़ता था और वो चाह कर भी जीतू से नहीं मिल पाती थीं.

फिल्मों में सक्सेस मिलने के बाद 1973 में जीतू और शोभा की शादी की डेट फिक्स हुई थी. लेकिन जितेंद्र के पिता की तबीयत खराब होने की वजह से दोनों की शादी टल गई. इसी बीच हेमा, जितेंद्र की लाइफ में आ गईं. लेकिन कई मुसीबतों का सामना करते हुए आखिरकार 18 अक्टूबर, 1974 को जितेंद्र और शोभा शादी के बंधन में बंध गए. दोनों के दो बच्चे एकता और तुषार हैं.

करीब 200 फिल्मों में काम कर चुके जितेंद्र को फिल्मों में सबसे पहला ब्रेक फिल्ममेकर वी. शांताराम ने दिया था. 1964 में आई इस फिल्म का नाम था ‘गीत गाया पत्थरों ने’. जितेंद्र ने अपने करियर में जीने की राह, मेरे हुजूर, फर्ज, हमजोली, कारवां, धरमवीर, परिचय, खुशबू, तोहफा और हिम्मतवाला जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है.

सनी लियोनी ने इस स्‍कूल में लिया है एडमिशन

सनी लियोनी को फिल्‍मे करते-करते अचानक पढ़ाई का भूत सवार हो गया है. जिसे पूरा करने के लिये उन्‍होंने एक स्‍कूल में एडमिशन भी लिया है. आप को लग रहा होगा कि हम मजाक कर रहे हैं पर सच यही है. सनी अब पढ़ाई करना चाहती हैं. बॉलीवुड डीवा सनी लियोनी ने कुछ ही समय में हिन्‍दी फिल्‍मों में अपनी पहचान बना ली है. रणदीप हुड्डा के साथ फिल्‍म मर्डर 3 से उन्‍होंने अपने फिल्‍मी करियर की शुरुआत की थी. कुछ साल तक बैक टू बैक काम करने के बाद अचानक से सनी का मूड हुआ कि अब पढ़ने का टाइम है. फिर क्‍या था सनी लियोन ब्रेक लेकर एक बार फिर से पढ़ाई की ओर रूख कर लिया है.

जनाब आप को सुन कर हैरानी होगी कि पढ़ाई करने के लिये सनी लियोनी ने दोबारा से स्कूल में दाखिला लिया है. वो भी भारत में नहीं. उन्‍होंने विदेश से पढ़ाई करने का फैसला लिया है. सनी अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हैं. जहां उन्होंने स्क्रिप्‍ट राइटिंग और एडिटिंग के कोर्स में अपना नाम एनरोल कराया है.

सनी को बॉलीवुड में आखिरी बार फिल्म रईस में शाहरुख के साथ एक आइटम नंबर लैला मैं लैला में देखा गया था. सूत्रों के मुताबिक सनी अब फिल्मों की बारीकियों को और अच्छी तरह से जानने के लिए पढ़ाई करना चाहती हैं. वहीं सनी ने बताया कि वो अपने नए कोर्स को लेकर काफी उत्साहित हैं. जल्द ही वो फिल्मों के बारे में बहुत कुछ सीख कर वापिस आएंगी.

अलग अलग राह पर समाजवादी पार्टी के महारथी

समाजवादी पार्टी 3 हिस्सों में बंट चुकी है. हर हिस्सा अलग अलग राह पर चलने की योजना में है. पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव पूरी तरह से बेबस हो चुके हैं. ऐसे में पूरी समाजवादी विचारधारा खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है. कुर्सी से उतरने के बाद अखिलेश यादव पार्टी के सर्वमान्य नेता नहीं रहे हैं. ऐसे में सपा के लिये अपने वजूद को बचाये रखना बड़ी चुनौती है. सामान्य तौर पर देखें तो समाजवादी पार्टी पर अखिलेश यादव का कब्जा है. अब उनको घर से खुलकर चुनौती मिलने लगी है. मुलायम की दूसरी बहू अपर्णा यादव और पु़त्र प्रतीक यादव अब भाजपा के करीब जा रहे हैं. अपर्णा यादव ने अपनी हार के लिये पार्टी में हुये भीतरघात को जिम्मेदार माना है.

सपा के दो बड़े नेता पार्टी प्रमुख मुलायम सिह यादव और शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव पर खुलकर बोलना शुरू कर दिया है. शिवपाल यादव ने कहा कि कुछ माह में मेरा और नेता जी का जितना अपमान हुआ उतना कभी नहीं हुआ होगा. खुद मुलायम ने इस बात को स्वीकार करते कहा कि जो बेटा बाप की बात नहीं सुनता वो किसी और की क्या सुनेगा. ऐसे में यह साफ हो गया है कि शिवपाल यादव अब सपा से हट कर नई पार्टी बनायेंगे. सपा प्रमुख शिवपाल के साथ होंगे. शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच चला संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है. अब तक अखिलेश से सामने झुक चुके शिवपाल यादव झुकने को तैयार नहीं है.

अखिलेश यादव अब अपने लोगों के साथ सपा को मजबूत कर आगे बढ़ने को तैयार हैं. वह किसी तरह के दबाव में खुद को नहीं रखना चाहते. चाचा शिवपाल, पिता मुलायम और परिवार के दूसरे सदस्यों के बीच तालमेल करने के लिये समझौते करने वाले अखिलेश अब खुद को दबाव से मुक्त रखना चाहते हैं. वह खुद से पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं. अखिलेश के पास पार्टी को बनाने के लिये पूरा समय है. तकनीकि रूप में सपा पूरी अखिलेश के साथ है. अब उसे एकजुट रखना अखिलेश की जिम्मेदारी है.

सपा में बड़ा बदलाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा. बिखर कर सपा अपने वजूद को बचाने का प्रयास करेगी. प्रदेश की राजनीति में मुख्य भूमिका निभा रहे मुलायम सिंह यादव के लिये अब पुरानी जगह हासिल करना संभव नहीं है. बिखरने के बाद सपा भी अपने को बचा नहीं पायेगी. 1990 के दशक में जो उदय सपा का हुआ था अब वह अपने वजूद की तलाश में है. देखने वाली बात यह होगी कि परिवारवाद की पार्टी परिवारवाद का शिकार होकर डूब रही है. जो परिवार कभी सपा की ताकत होता था वही अब उसके डूबने की वजह बन गया है.

अप्रैल में किए जाने वाले खेती के जरूरी काम

आमतौर पर अप्रैल का महीना हंसीमजाक के अंदाज में एकदूसरे को अप्रैलफूल यानी मूर्ख बनाने के लिए जाना जाता है. 1 अप्रैल का लोग काफी पहले से इंतजार करते हैं ताकि अपने चहेतों को मधुर तरीके से उल्लू बना सकें. तमाम किसान भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देते और अपने साथी किसानों व रिश्तेदारों को मूर्ख बनाने के हथकंडे खुल कर आजमाते हैं. जागरूक किसान इस मामले में भी कमाल करते रहते हैं. मेरे एक परिचित किसान ने जामुन की बेल लगाने का नाटक कर के कई लोगों को खुलेआम बेवकूफ बना दिया था.

बहरहाल, हंसीमजाक से हट कर अप्रैल महीने के दौरान खेती के मोरचे पर भी भरपूर काम किए जाते हैं. इस महीने रबी मौसम की तमाम फसलों की कटाई का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस दौरान जायद मौसम की फसलें खेतों में हिलोरे लेती नजर आती हैं. आइए डालें एक तीखी नजर अप्रैल महीने के खेती से जुड़े खास कामों पर:

* रोटी यानी गेहूं की फसल अप्रैल तक पक कर तैयार रहती है, लिहाजा इस महीने का खास काम गेहूं की फसल की कटाई करने का होता है.

* गेहूं काटने के बाद उसे अच्छी तरह सुखा कर उस की गहाई करें. अगर उस के भंडारण का इरादा है, तो उस के लिए भंडारण के नए व उन्नत तरीकों को आजमाएं.

* चना पुराने जमाने से गेहूं का खास जोड़ीदार रहा है. पहले तमाम लोग बराबर मात्रा में गेहूंचना मिला कर ही आटा पिसवाते थे, जिसे मिस्सा आटा कहते हैं. अप्रैल तक चने की भी फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, लिहाजा इस की कटाई का काम भी फौरन निबटा लेना चाहिए.

* चने की देरी से बोई जाने वाली फसल अप्रैल तक कटाई लायक नहीं होती. इस की कटाई की नौबत बाद में आती है.

* देरी से बोई गई चने की फसल पर अगर फलीछेदक कीट का हमला नजर आए तो वैज्ञानिकों से पूछ कर मुनासिब दवाएं इस्तेमाल करें. इस के लिए जैविक तरीके आजमाना बेहतर रहेगा.

* आमतौर पर अप्रैल में बारिश का कोई आसार नहीं रहता और खेत सूखने लगते हैं. ऐसी हालत में गन्ने की फसल में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. वैसे कभीकभी अप्रैल में भी तगड़ी बारिश होती है, तब उसी हिसाब से सिंचाई करनी चाहिए.

* गन्ने के खेत में निराईगुड़ाई करें और किसी तरह के खरपतवार न पनपने दें. बेहतर होगा कि निराईगुड़ाई से पहले खेत में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद, कंपोस्ट खाद या केंचुआ खाद डालें. इस के बाद निराईगुड़ाई करने से खादें खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाएंगी. इस के खेत की मिट्टी की पानी जज्ब करने की करने की कूवत में भी इजाफा होगा और यकीनन बेहतर गन्ने पैदा होंगे.

* सूरजमुखी के खेत का मुआयना करें. उन में अप्रैल तक फूल आने लगते हैं. ऐसे में खेत की निराईगुड़ाई करना जरूरी होता है. खेत की नमी का जायजा भी लें. नमी में कमी होने पर सिंचाई करें. जरूरी लगे तो वैज्ञानिकों से पूछ कर खेत में यूरिया खाद का छिड़काव करें.

* बैसाखी मौसम की मूंग बोने का भी यह सही वक्त होता है. अगर मूंग बोने का इरादा हो तो 15 अप्रैल तक इस की बोआई का काम निबटा लें.

* जो मूंग मार्च महीने में बोई गई थी, उस के खेत की जांच भी करें. अमूमन अप्रैल में इसे सिंचाई की जरूरत होती है. अगर खेत सूखे नजर आएं बगैर चूके उन की सिंचाई करें.

* इनसानों की तरह गायभैंसों वगैरह को भी सारे साल खाने यानी चारे की दरकार रहती है. पशुओं के चारे के लिहाज से अप्रैल में मक्का, लोबिया व बाजरे की बोआई करें, ताकि मईजून में चारे की दिक्कत न रहे.

* फरवरी में चारे के लिए जो फसलें बोई थीं, उन में नाइट्रोजन की खुराक देने के लिए यूरिया खाद डालें और खेत में बराबर नमी कायम रखें.

* इस बीच फूलगोभी की बीज वाली फसल आमतौर पर कटाई लायक हो जाती है, लिहाजा उस की कटाई का काम निबटा लें. कटाई के बाद फसल को सुखा कर बीज निकाल लें. बीजों को सही तरीके से पैक कर के उन का भंडारण करें.

* तुरई की नर्सरी अप्रैल के पहले हफ्ते के दौरान जरूर डालें, ताकि समय पर पौध तैयार हो सकें. फरवरीमार्च महीनों के दौरान डाली गई नर्सरी के पौधों की रोपाई कर दें. रोपाई 100×50 सेंटीमीटर की दूरी पर करें. रोपाई करने के बाद सिंचाई जरूर करें.

* अरबी की खेती का इरादा हो तो अप्रैल में ही इस की अगेती किस्मों की बोआई का काम निबटा लें.

* जनवरीफरवरी के दौरान नर्सरी में तैयार किए गए करेले व लौकी के पौधों की रोपाई करें. करेले की रोपाई 150×60 सेंटीमीटर की दूरी पर करें, जबकि लौकी की रोपाई 2×1 मीटर की दूरी पर करें.

* मार्च में रोपी गई बैगन की फसल में निराईगुड़ाई करें व जरूरत के हिसाब से सिंचाई भी करें. नाइट्रोजन के लिहाज से खेत में यूरिया खाद डालें व बराबर नमी बरकरार रखें.

* अप्रैल में लहसुन की फसल की खुदाई निबटा लें. खोदने के बाद फसल को 3 दिनों तक खेत में रहने दें. इस के बाद फसल को छाया में ठीक से सुखा कर लहसुन का भंडारण करें.

* अप्रैल तक मूली व गाजर की बीज वाली फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. उस की कटाई कर के फसल को ढंग से सुखाने के बाद बीज निकालें. बीजों को ठीक से सुखा कर पैक करें और फिर उन का सही तरीके से भंडारण करें.

* अदरक की बोआई का काम भी अप्रैल में निबटाएं. बोआई के लिए करीब 20 ग्राम वाले कंदों का इस्तेमाल करें. इस की बोआई 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर मेंड़ें बना कर करें. कंदों के बीच 20 सेंटीमीटर का फासला रखें.

* यदि शिमला मिर्च की फसल लगाई हो, तो उस की निराईगुड़ाई करें व जरूरत के हिसाब से सिंचाई भी करें. यूरिया खाद भी डालें ताकि नाइट्रोजन की कमी न रहे और फल अच्छे किस्म के आएं.

* आम का रसीला मौसम आने वाला है, लिहाजा आम के बागों की सिंचाई करें ताकि नमी कम न होने पाए. पेड़ों पर कीटों या बीमारियों के लक्षण नजर आएं, तो कृषि वैज्ञानिक से राय ले कर सही दवा का इस्तेमाल जरूर करें.

* ठंड से पिछले दिनों परेशान रहे अपने पशुओं का पशुचिकित्सक से मुआयना कराएं. कोई दिक्कत हो तो इलाज कराने या टीके लगवाने में लापरवाही न करें.

* पशुओं को जरूरी कीड़ों की दवाएं खिलाने का पूरा खयाल रखें. अगर गाय या भैंस गरमी में आ जाए, तो उसे अस्पताल ले जा कर या डाक्टर बुला कर गाभिन कराने में कतई देरी न करें.

किसानों पर भारी, गन्ने की उधारी खरीदारी

मासूम किसानों पर बिजली,पानी या बैंक कर्ज का बकाया होने पर कुर्की, वारंट, जेल जाने व जमीन बिकने तक की नौबत आ जाती है. वहीं दूसरी ओर अगर किसानों की उपज के अरबों रुपए धन्नासेठ दबा लें तो उन का बाल तक बांका नहीं होता. इस से जाहिर होता है कि हमारे मुल्क में खेती की प्रधानता व किसानों की अहमियत सिर्फ कहने की बातें हैं. चीनी मिलों के बेजा रवैए से मीठे गन्ने की खेती किसानों के लिए कड़वाहट की वजह बन चुकी है. कहने को गन्ना, देश की खास व नकदी फसल है, लेकिन ज्यादातर चीनी मिलें गन्ने की कीमत किसानों को वक्त पर नहीं देतीं. लिहाजा हर साल गन्ना कीमत के करोड़ों रुपए चीनी मिलों पर  बकाया पड़े रहते हैं.

गन्ना उपज बेचने के बाद 2-3 सालों तक भी पैसा नहीं मिलता, लिहाजा ज्यादातर गन्ना किसानों की माली जरूरतें पूरी नहीं होतीं. वे अपना कर्ज नहीं चुका पाते. पैसे की तंगी से खासकर छोटे किसान तो बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं.

उत्तर प्रदेश में चल रही 117 चीनी मिलों ने चालू सीजन में 16 फरवरी 2017 तक कुल 165 अरब 72 करोड़ 95 लाख रुपए का गन्ना खरीदा था. इस में से सिर्फ 108 अरब 12 करोड़ 95 लाख रुपए का ही भुगतान किया गया. 57 अरब 59 करोड़ 80 लाख रुपए का भुगतान बकाया है. इतना ही नहीं, साल 2015-16 के 3 अरब 2 करोड़ 32 लाख रुपए व साल 2014-15 के 99  करोड़ 78 लाख रुपए भी अभी तक चीनी मिलों पर बकाया हैं.

नुकसान किसानों का

यह तसवीर अकेले उत्तर प्रदेश की है. पूरे देश की चीनी मिलों पर बकाया रकम और भी बड़ी है. हालांकि गन्ने की कीमत किसानों को जल्द दिलाने के कायदेकानून हैं. मसलन टैगिंग आदेश के तहत मिलों को अपनी चीनी बेचने से मिली रकम का 85 फीसदी हिस्सा किसानों को गन्ने की कीमत अदा करने के लिए देना लाजिम है, लेकिन ऐसा नहीं होता.

बकाएदार चीनी मिलों को नोटिस देने, उन की चीनी के गोदाम, शीरा व खोई आदि अटैच करने, वसूली के लिए आरसी जारी करने व एफआईआर लिखाने तक की रस्म अदायगी की जाती है, लेकिन इस सब के बावजूद ज्यादातर चीनी मिलें नियमों को ताक पर रख देती हैं. मिल मालिक सब का तोड़ निकाल लेते हैं, लिहाजा फायदा उन का व नुकसान किसानों का होता है.

गिरफ्तारी से बचने के लिए कई मिल मालिक तो देश छोड़ कर आसानी से बाहर चले जाते हैं. मसलन मोदीनगर व मलकपुर की चीनी मिलों पर 374 करोड़ रुपए का बकाया है. उन के मालिक लंदन निकल गए हैं. इसी तरह राणा समूह की 4 मिलों पर 200 करोड़ रुपए बकाया हैं, इन के मालिक युगांडा जा चुके हैं. अब सरकार उन की देश वापसी की लकीर पीट रही है. यदि उन के पासपोर्ट पहले जब्त हो जाते तो वे देश से बाहर ही नहीं जा पाते.

ज्यादातर चीनी मिलें किसानों का कई तरह से शोषण करती हैं. उन से गन्ना खरीद कर एकमुश्त अदायगी में आनाकानी करती हैं. वे मनमानी व सहूलियत के हिसाब से गन्ने की कीमत अदा करती हैं. 14 दिनों बाद भुगतान करने पर 15 फीसदी ब्याज देने का नियम है, लेकिन मिलें ब्याज नहीं देतीं. ज्यादातर मिलें तोल कांटों पर घटतोली कराती हैं. गन्ना मिलें अपने रसूख व पैसे के बल पर गन्ना मूल्य के बकाए व ब्याज के मामले कोर्टकचहरी ले जा कर कानूनी पचड़ों में फंसा देती हैं. नतीजतन बहुत से किसान अब गन्ने की खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं.

ढूंढ़े नहीं मिलेगा गन्ना

देश के 18 राज्यों में गन्ने की बहुतायत थी, लेकिन गन्ने की खेती अब लगातार घट रही है. मसलन साल 2014 में गन्ने का कुल रकबा 5341 हजार हेक्टेयर था, जो साल 2015 में घट कर 5307 हजार हेक्टेयर व साल 2016 में महज 5284 हजार हेक्टेयर रह गया. इसी तरह गन्ने की पैदावार में भी कमी आ रही है. साल 2015 के दौरान देश में गन्ने की कुल पैदावार 3456 लाख टन थी, जो साल 2016 में गिर कर 3369 लाख टन रह गई.

यदि गन्ने का रकबा व पैदावार घटने का यही सिलसिला जारी रहा तो जाहिर है कि जल्द ही भारतीय चीनी उद्योग के सामने कच्चे माल की तंगी आ सकती है. ध्यान रहे कि कमी आने पर दाल व गेहूं आदि की तरह गन्ने को दूर या दूसरे मुल्कों से आयात नहीं किया जा सकता है. लिहाजा मजबूरन दूसरे मुल्कों से चीनी आयात करनी पड़ेगी.

मजबूरी

ज्यादातर किसानों के सामने अपनी गन्ना उपज जल्दी से जल्दी बेचने की मजबूरी बनी रहती है, क्योंकि खेत से कटने के बाद गन्ना सूखने लगता है. लिहाजा गन्ने को ज्यादा नहीं रोका जा सकता. किसानों की इसी मजबूरी का सब फायदा उठाते हैं. कोल्हू क्रेशर वाले किसानों से गन्ना खरीद कर रकम तो नकद देते हैं, लेकिन वे औनेपौने दामों पर खरीद करते हैं. ज्यादा गन्ना आते ही वे रेट गिरा देते हैं या खरीद बंद कर देते हैं.

ज्यादातर किसान गन्ने की कुल पैदावार में से गुड़, रस व बीज आदि के लिए करीब 40 फीसदी हिस्सा निकाल कर गन्ने की बाकी उपज चीनी मिलों को बेचना पसंद करते हैं .फिलहाल हमारे देश में 526 चीनी मिलें चल रही हैं. मिलों को गन्ना देने पर आमतौर पर किसानों को उपज की कीमत तयशुदा दरों पर मिलती है.

केंद्र सरकार ने गन्ने की दरें साल 2014 में 210 रुपए, साल 2015 में 220 रुपए व साल 2016 में 230 रुपए प्रति क्विंटल तय की थीं. देश में गन्ने का सब से ज्यादा रकबा 20 लाख 52 हजार हेक्टेयर उत्तर प्रदेश में है. 18 नवंबर 2016 को उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2017 सीजन के लिए गन्ने की कीमतें 25 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई थीं. इस के तहत अगेती गन्ने की कीमत 315 रुपए प्रति क्विंटल, सामान्य गन्ने की कीमत 305 रुपए प्रति क्विंटल तय करते हुए एकमुश्त अदायगी का ऐलान किया था.

गन्ने की कीमतों में हुई इस मामूली बढ़ोतरी का कारण भी किसानों की चिंता नहीं, चुनावों में किसानों को लुभा कर उन के वोट हासिल करना था, क्योंकि पिछले 3 सीजन से उत्तर प्रदेश में गन्ने के रेट 280 व 290 रुपए प्रति क्विंटल ही चल रहे थे और किसानों की लगातार व भारी मांग के बावजूद सरकार ने गन्ने की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया था. इस तरह गन्ना किसानों की मुश्किलों का कोई अंत दिखाई नहीं देता.

चीनी मिलों के मुलाजिम तोल कांटे पर वजन करने के बाद किसानों को एक पर्ची थमा देते हैं, जिस पर तोल की तारीख, गन्ने का कुल वजन, प्रति क्विंटल गन्ने की दर व कुल कीमत आदि लिखी रहती है. कुछ अपवादों को छोड़ कर ज्यादातर चीनी मिलें 14 दिनों बाद भुगतान करने की आड़ में गन्ने की कीमत का भुगतान रोक लेती हैं.

तरकीब है

लखनऊ में जनसंचार संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास विभाग के आला अफसर रह चुके हैं. उन का कहना है कि देश में दाल, तेल, चावल व सूत आदि की भी बहुत से मिलें चलती हैं. वे भी किसानों से उन की दलहन, तिलहन, धान व कपास आदि की उपज खरीदती हैं, लेकिन वे तो उधारी नहीं करतीं. 14 दिनों बाद भुगतान के पुराने कानून की आड़ में किसानों से हो रही यह ज्यादती अब बंद होनी चाहिए.

पिछले दिनों एक केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि सरकार ने अब तक 1159 पुराने कानूनों को बेअसर किया है, जो लालफीताशाही बढ़ाने वाले थे. ऐसे 400 और कानूनों पर काम हो रहा है. बेशक यह सरकार का एक अच्छा व काबिलेतारीफ कदम है. लिहाजा गन्ना उत्पादक राज्यों को गन्ने की उधारी खरीद के पुराने कानून को बेअसर करने का मसौदा केंद्र सरकार को भेजना चाहिए, ताकि किसानों को गन्ना उपज की कीमत भी तुरंत मिले.

बहादुरगढ़ के किसान अमरपाल सिंह का कहना है कि चीनी मिलें अकसर गन्ने की कीमतें व लागत ज्यादा होने व बाजार में चीनी के दाम कम रहने से नुकसान होने का रोना रोती रहती हैं. किसानों के मुकाबले उन की लाबी बहुत मजबूत है. वे एकजुट हो कर खुद को बीमार उद्योग बताती हैं और सरकार से मोटी सहूलियतें हासिल करती हैं, लेकिन किसानों की रकम समय पर अदा नहीं करतीं. उस रकम को खुद इस्तेमाल करती हैं.

चीनी मिलों द्वारा किसानों का गन्ना मूल्य रोकने का सिलसिला बहुत पुराना है, मगर यह गन्ना किसानों का खुला शोषण है. गन्ना किसान इसे मजबूरी में सहते हैं, लेकिन यह किसानों के साथ सरासर नाइनसाफी है. लिहाजा 14 दिनों की उधारी पर गन्ना खरीद का पुराना कानून सरकार को बेअसर कर देना चाहिए, ताकि चीनी मिलों पर नकेल कसी जा सके. इस के लिए किसानों व उन के संगठनों को जागरूक व एकजुट हो कर इस बारे में अपनी मांग जोरदार तरीके से उठानी चाहिए.

अब फीस विवाद भी अदालत ही सुलझाएगा क्या

देश भर की छोटी बड़ी तमाम अदालतें इन दिनी झल्लाई हुईं हैं तो इसकी बड़ी वजह फालतू के वे मुकदमे ज्यादा हैं जो शौक और शौहरत  के लिए ज्यादा और इंसाफ नाम की चिड़िया के लिए कम लड़े जाते हैं. बेशुमार मुकदमों और उनकी फाइलों के बोझ तले दबी अदालतें अभी गर्मियों की छुट्टियों में अतरिक्त घंटे काम करने मन बना ही रहीं थीं कि नया बखेड़ा फिर दिल्ली से उठ खड़ा हुआ, जिस पर अगली पेशी पर जज साहिबान और झल्लाते यह भी कह सकते हैं कि आप लोग यानि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और महा मशहूर हो चले वकील साहब राम जेठमलानी पहले तय कर लें कि वकील की फीस कौन देगा. आम आदमी पार्टी, दिल्ली की जनता, सरकार या खुद प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल, इस के बाद ही अदालत में पांव रखें.

मुकदमे में कोई तकनीकी पेंच नहीं है, अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेता, और दिल्ली क्रिकेट के तत्कालीन  सर्वे सर्वा  वित्त मंत्री अरुण जेटली जो खुद भी वकील हैं पर क्रिकेट में भ्रष्टाचार की आरोप लगाए थे और उन्हे साबित करने एक कमेटी भी गठित कर दी थी. यह बात अरुण जेटली को अच्छी नहीं लगी तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा ठोक दिया. यह चर्चित हो चला मुकदमा जल्द ही अपनी दूसरी वर्षगांठ मनाएगा. केजरीवाल ने अपने बचाव के लिए जेठमलानी को वकील नियुक्त किया, जिन्होंने पिछली पेशी पर मौखिक जिरह में जेटली के पसीने छुड़ा दिये थे. तब तक यह किसी को नहीं मालूम था कि जेठमलानी पिछले साल दिसंबर में ही अपनी फीस का बिल केजरीवाल को भेज चुके हैं और उन्होंने इसके भुगतान के लिए सरकारी खजाने को मुफीद समझा है.

यह बात उजागर हुई तो दिलचस्प किस्म का हल्ला मच गया. भाजपा की तरफ से प्रकाश जावडेकर ने तर्क दिये कि भला यह कौन सी बात हुई कि अपने निजी मामलों के लिए केजरीवाल जनता की गाढ़ी कमाई लुटाएं. चूंकि जेटली जी ने स्टाम्प ड्यूटी खुद भरी है और वकील की फीस भी अपने खीसे से दी है, इसलिए केजरीवाल को भी ऐसा ही करना चाहिए . विवाद बढ़ा तो आप के पट्ठे भी मैदान में यह दलील देते कूद पड़े कि चूंकि केजरीवाल पर सीएम रहते मुकदमा दायर हुआ, इसलिए सरकारी खजाने से फीस देने के विवाद को भाजपा ईवीएम मशीनों की खामी ढकने तूल दे रही है.

अब भाजपा का यह कहना भी एकदम बेमानी नहीं है कि केजरीवाल पर तो मानहानि के दस मुकदमे चल रहे हैं, क्या उनका खर्च भी जनता भुगतेगी और अगर वे यह मुकदमा हार गए तो दस करोड़ रुपये कौन देगा. राजनीति क्यों और कैसे मनोरंजन का जरिया बनती जा रही है इसे इस विवाद में जेठमलानी की इस दखलंदाजी से भी समझा जा सकता है कि वे तो सिर्फ अमीर क्लाइंटों से फीस लेते हैं, निर्धनों के मुकदमे मुफ्त लड़ देते हैं. यह उन्होंने नहीं बताया कि कितने गरीब गुरबों के केस उन्होंने लड़े हैं, पर यह जरूर सच है कि तहसील और जिला स्तर के वकील महज वक्त काटने की गरज से मुफ्त के भाव मुकदमे लड़ने की दरियादिली दिखाते हैं और काबिल और कामयाब वकील उधारी में भी मुकदमे लड़ते हैं, फिर बाद में अपनी फीस मय ब्याज के मुवक्किल से वसूलते हैं.

इस फीस विवाद पर मीडिया, वकीलों और आम लोगों ने भी अपनी अपनी बहूमूल्य राय निशुल्क प्रचारित प्रसारित कीं कि अगर मुकदमा दिल्ली के सीएम के खिलाफ है तो फीस सरकारी खजाने से चुकाना हर्ज की बात नहीं और अगर जेटली ने मुकदमा व्यक्ति अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर किया है तो केजरीवाल जेठमलानी की भारीभरकम फीस भुगतें. चूकि दूसरी राय भारी पड़ रही थी इसलिए जेठमलानी ने अपना गरीबों रईसों वाला फार्मूला पेश कर डाला.

इस मसले पर राजद सुप्रीमो लालू यादव की यह चुटकी अहम है कि चाचा यानि जेठमलानी उनके मुकदमे तो फ्री लड़ते हैं. खुद जेठमलानी पिछले दिनों भोपाल में कह चुके हैं कि कभी  भाजपा में उन्हें इस शर्त पर लिया गया था कि वे उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चल रहे हत्या के एक मुकदमें में पैरवी करेंगे, यानि वे लगभग इसी शर्त पर बिहार से राजद के सदस्य चुने गए थे कि लालू और उनकी टीम के मुकदमे मुफ्त में लड़ेंगे. अगर ऐसा है तो सुप्रीम कोर्ट खुद भी इस पर संज्ञान लेने का अधिकार रखता  है कि मुकदमे की सुनवाई बाद में होगी, पहले ऐसे उलझे मामलों में यह स्पष्ट किया जाये कि फीस कौन कितनी और कैसे दे और ले रहा है और वकील इसे किसी संवैधानिक पद के एवज में तो नहीं ले रहा.

राखी सावंत की ये हैं टॉप 6 कॉन्‍ट्रोवर्सी

हाल ही में राखी सावंत को महर्षि वाल्‍मीकि पर टिप्‍पणी किए जाने के मामले में गिरफ्तारी की खबर आई है. हालांकि पंजाब पुलिस का दावा है कि उन्‍होंने अभी गिरफ्तार नहीं किया है, जबकि राखी की टीम का दावा है कि उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब राखी सावंत अपने किसी बयान के चलते विवादों में फंसी हैं. दरअसल राखी सावंत अक्‍सर अपने बड़बोलेपन और विवादित बयानों के चलते विवाद खड़े करती रही हैं लेकिन शायद यह पहली बार ही है जब राखी को अपने बयान की ऐसी कीमत चुकानी पड़ रही है. कभी प्रधानमंत्री मोदी के फोटो वाली ड्रेस पहन कर तो कभी अपने लीक्‍ड वीडियोज के चलते, राखी हमेशा सुर्खियां बटोरती रही हैं. यहां हम आपको ऐसे ही कुछ विवादों के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें राखी ने अपने आप खड़ा किया.

महर्षि वाल्‍मीकि पर की टिप्‍पणी पर हुई अरेस्‍ट

पंजाब में लुधियाना की एक अदालत ने रामायण रचयिता महर्षि वाल्मीकि के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिपपणी करने के मामले में अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और मंगलवार को पुलिस ने राखी को मुंबई में गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कहा कि राखी पर आरोप लगाया गया है कि उन्‍होंने पिछले वर्ष एक निजी टीवी चैनल पर कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मिकी के खिलाफ टिप्पणी करके वाल्मीकि समुदाय की भावनाओं को आहत किया है.

राखी : सनी लियोन बिगाड़ रही हैं देश का यूथ

राखी सावंत को जब भी मौका मिलता है वह सनी लियोनी पर कमेंट करने से पीछे नहीं हटतीं. राखी अक्‍सर सनी लियोनी को उनके प्रोफेशन, उनके लुक्‍स आदि को लेकर कमेंट करती रहती हैं. हाल ही में राखी सावंत ने बयान दिया कि सनी लियोन देश के युवाओं को बर्बाद कर रही हैं. राखी ने अपने इस बयान में कहा था कि सनी लियोनी को देवी की तरह ट्रीट किया जा रहा है चाहे वह कितने भी कम कपड़े पहने जबकि अन्‍य लड़कियों को इसी के लिए काफी कुछ सुनाया जाता है.

जल्‍द ही पोर्न स्‍टार बनूंगी : राखी

राखी सावंत की सनी लियोन से तकरार जग जाहिर है. ऐसे में जब सनी लियोन के साथ काम करने की इच्‍छा खुद आमिर खान ने जतायी तो राखी को यह ज्‍यादा अच्‍छा नहीं लगा. उस दौरान जब एक इवेंट के दौरान राखी से पूछा गया कि आमिर खान, सनी लियोनी के साथ काम करना चाहते हैं तो आपका क्‍या कहना है, तो राखी ने कहा, ‘कौन आमिर खान …? अब मैं भी जल्‍द पोर्न स्‍टार बनने वाली हूं.’

मीका सिंह के समर्थन में उतरी राखी

मीका सिंह ने एक व्‍यक्ति को थप्‍पड़ मार दिया था. इस विवाद में और भी सुर्खियां तब जुड़ गईं जब राखी ने मीका का साथ दिया. इस कॉन्‍ट्रोवर्सी के दौरान एएनआई के अनुसार राखी ने कहा, ‘डॉक्‍टर ने बहुत ज्‍यादा शराब पी रखी थी और वह मी‍का के साथ फोटो खिंचाना चाहते थे. वह बैक स्‍टेज सभी के साथ गलत बर्ताव कर रहा था. मीका ने उस डॉक्‍टर को थप्‍पड़ मार कर सही किया.’ बता दें कि गायक मीका सिंह ने अपनी बर्थडे पार्टी में राखी सावंत को ‘किस’ किया था जिसके बाद राखी ने इसका विरोध किया था.

‘जो भगवान नहीं देता, डॉक्‍टर देता है’

राखी सावंत ने करण जौहर के शो पर जो बोला वह सुन कर करण भी दंग रह गए. राखी द्वारा कराई गई सर्जरियों पर जब करण ने सवाल पूछा तो राखी ने माना कि उन्‍होंने अपने शरीर में सर्जरी कराई है. राखी ने कहा, ‘जो भगवान नहीं देता, वो डॉक्‍टर देता है.’

‘मोदी जी’ वाले कपड़े पहन कर निकली राखी

हाल ही में राखी ने फिर सुर्खियां बटोरी जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो वाले कपड़े पहन कर एक इवेंट में पहुंच गईं. राखी स्‍वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले भारतीयों के लिए अमेरिका में हुए इवेंट में इसे पहन कर गई थीं. इस ब्‍लैक ड्रेस में हर तरफ पीएम मोदी की फोटो लगी हुई थी. राखी के मोदी ड्रेस के यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे.

कपिल के शो में फिर नजर आएंगी रिंकू भाभी..!

जो दर्शक कपिल शर्मा के कॉमेडी शो ‘द कपिल शर्मा शो’ को सिर्फ डॉ. मशहूर गुलाटी के कॉमेडी इलाज या रिंकू भाभी की अदाओं के लिए देखते थे उन सभी के लिए खुशखबरी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुनील ग्रोवर एक बार फिर कपिल शर्मा शो में वापसी कर सकते हैं. लेकिन फ्लाइट में अपने साथ हुए बर्ताव का बदला वह अपनी फीस बढ़ा कर ले रहे हैं. दरअसल खबरें हैं कि जल्‍द ही कपिल शर्मा के शो में सुनील ग्रोवर फिर से दिखने वाले हैं. सुनील से शो में अपनी वापसी के लिए अपनी फीस दोगुनी कर दी है. सुनील ग्रोवर इन दिनों छुट्टियां मना रहे हैं.

बता दें कि इससे पहले भी सुनील ग्रोवर कपिल शर्मा का शो छोड़ चुके हैं. उस समय भी सुनील ने अपनी फीस बढ़ाने की मांग की थी, जिसे चैनल ने नहीं माना था और सुनील ने कपिल शर्मा का शो छोड़कर अपना खुद का एक शो शुरू किया था. हालांकि सुनील ग्रोवर का यह शो काफी फ्लॉप रहा और कुछ महीनों बाद सुनील फिर से कपिल के शो में नजर आए थे.

बता दें कि सुनील ग्रोवर के शो छोड़ने के बाद कपिल के शो की टीआरपी अचानक बहुत नीचे आई गई थी और टीवी पर सुपरहिट यह शो अचानक लोगों की आलोचनओं का शिकार हो रहा है. सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि चैनल ने भी कपिल शर्मा के इस शो को एक महीने का अल्‍टीमेटम दे दिया है. 24 अप्रैल 2016 को शुरू हुए ‘द कपिल शर्मा शो’ का कॉन्‍ट्रैक्‍ट सोनी इंटरटेनमेंट टेलिविजन्‍स के साथ अगले दो हफ्तों में खत्‍म होने वाला है. ऐसे में जहां चैनल कपिल के शो से खुश होकर उसकी फीस 106 करोड़ करने का एलान कर चुका था, उसी चैनल ने शो की इस हालत को सुधारने के लिए कपिल शर्मा को सिर्फ एक महीने ही वक्‍त दिया है.

सुनील ग्रोवर के जाने के बाद कपिल ने तीन एपिसोड शूट किए हैं. खबर है कि आने वाले दो एपिसोड के बाद सुनील ग्रोवर वापस एंट्री कर सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में चैनल से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर दी गई है कि सुनील जल्द ही कपिल शर्मा शो में वापसी कर सकते हैं. सुनील ने झगड़े से पहले ही अपने पर्सनल शोज के लिए प्रॉडक्शन वालों से छुट्टी मांग रखी थी. सुनील के बिना आने वाले चार एपिसोड का शूट होना भी तय था. ऐसे में, कपिल और सुनील के झगड़े ने इसे एक नया मोड़ दे दिया है. सुनील अपनी छुट्टियों के दौरान कॉमिडी लाइव शोज करने वाले थे.

एक तरफ जहां इस झगड़े के बाद सुनील और कपिल दोनों ही सोशल मीडिया पर अपनी-अपनी बात कह चुके हैं, लेकिन सुनील ग्रोवर ने यह कहीं भी नहीं कहा कि वह इस शो को छोड़ रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि सुनील ग्रोवर ने आधिकारिक तौर पर शो से कोई दूरी नहीं बनाई है.

सूत्रों के अनुसार, अगले शो का शेड्यूल 7, 8, 11 और 12 अप्रैल तय किया गया है. कपिल इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘फिरंगी’ की शूटिंग के लिए राजस्थान में हैं. वहां से शूटिंग पूरी कर वह 7 अप्रैल को मुंबई आकर अपने शो के आने वाले एपिसोड्स की शूटिंग करेंगे. शो से जुड़े सूत्रों की मानें, तो इस महीने के आखिरी हफ्ते में सुनील भी इस शो से जुड़ जाएंगे. लेकिन यह वापसी चैनल के लिए थोड़ी महंगी पड़ रही है. दरअसल सुनील अपनी फीस बढ़ा कर ही इस शो से दोबारा जुड़ेंगे.

याद दिलाते चलें कि हाल ही में ऑस्‍ट्रेलिया से लौटते वक्‍त कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर, समेत पूरी टीम से हुए झगड़े ने अचानक इस सुपरहिट शो के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी थीं. इस झगड़े के बाद सुनील ग्रोवर, अली असगर, चंदन प्रभाकर और सुगंधा मिश्रा जैसे कलाकारों ने कन्‍नी काट ली है. कपिल का शो छोड़ने के बाद जहां अली असगर सब टीवी के एक शो में नजर आ रहे हैं तो वहीं सुगंधा मिश्रा और सुनील ग्रोवर सोनी चैनल के ही रिएलिटी सिंगिंग शो ‘इंडियन आइडल’ के ग्रैंड फिनाले में नजर आ चुके हैं.

फिर टॉपलेस हुईं पूनम पांडे

अपने बोल्ड अंदाज और सेक्सी तस्वीरें शेयर करने को लेकर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री पूनम पांडे ने एक बार फिर अपनी टॉपलेस तस्वीर शेयर कर तापमान बढ़ा दिया है. यही नहीं पूनम ने इस तस्वीर के साथ किसी सीक्रेट प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया है. उन्होंने इस तस्वीर के साथ सीक्रेट प्रोजेक्ट का इंतजार करने की बात कही है. पूनम ने तस्वीर फैंस के साथ सोशल मीडिया पर शेयर की है. जिसके कैप्शन में उन्होंने जहां एक तरफ सीक्रेट प्रोजेक्ट को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ उन्होंने तस्वीर के बारे में भी पूछ डाला है.

इस पोस्ट के जरिए पूनम का कहना है कि वे इस बार कुछ बहुत अलग करने वाली हैं. जो कि एक सीक्रेट प्रोजेक्ट है. ये सीक्रेट क्या है और ये पूनम पांडे के लिए कितना अलग है. ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा.

पूनम पांडे ने फैंस के साथ ट्विटर पर पोस्टरनुमा तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर में वे टॉपलेस नजर आ रही हैं. इसके साथ ही तस्वीर पर एक तरफ टॉपलेस पूनम खड़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी तस्वीर पर पोस्टर से जुड़ी बातें लिखी हैं. तस्वीर पर लिखावट की मानें तो पूनम पांडे किसी ‘सीक्रेट प्रोजेक्ट’ पर काम कर रही हैं. उन्होंने टॉपलेस फोटो के कैप्शन में भी अपने सीक्रेट प्रोजेक्ट पर काम करने की बात शेयर की है. तस्वीर पर लिखा है ‘पूनम पांडे का सीक्रेट प्रोजेक्ट….कमिंग सून’

वहीं अपनी इस तस्वीर को शेयर करते हुए पूनम ने कैप्शन में भी कई बातें कही हैं. उन्होंने लिखा है कि “Tweethearts!! Doing something different this time.. Secret project to be out sooon..;) how is the pic?”

वेलेन्टाइन्स और होली के मौके पर बेहद बोल्ड वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर पूनम ने सुर्खियां बटोरी थीं. उन्होंने वेलेंटाइन्स डे पर खुद को डेट करते हुए बेहद बोल्ड वीडियो शेयर किया था. वहीं होली पर शेयर किए गए वीडियो में भी वे बिकिनी में होली खेलती दिखाई दी थीं. इससे पहले पिछले साल सिंतबर में शार्ट फिल्म ‘द वीकएंड’ में भी अपने बोल्ड वीडियो को लेकर पूनम सुर्खियां में रही थी. इस फिल्म में पूनम ने कई बोल्ड सीन दिए थे. बोल्ड सीन्स से भरी इस फिल्म को लेकर पूनम काफी चर्चाओं में रही थीं.

पूनम पांडे ने 2013 में फिल्म ‘नशा’ से बी-टाउन में डेब्यू किया था. इस फिल्म में भी पूनम ने जमकर बोल्ड सीन दिए थे. वहीं इतने बोल्ड सीन्स के बावजूद भी पूनम की ये फिल्म कुछ खास नहीं कर सकी और फ्लॉप हो गई. फिल्म में बतौर एक्ट्रेस कई बोल्ड और स्टीमी सीन्स देने के बाद फ्लॉप फेस करने वाली पूनम अब आइटम डांसर के तौर पर दिखाई देंगी. गोविंदा की अपकमिंग फिल्म ‘आ गया हीरो’ में पूनम पांडे का एक बोल्ड आइटम नंबर भी होगा.

पूनम पांडे किसी और वजह से नहीं बल्कि अपनी बोल्डनेस को लेकर ही सुर्खियां बटोर लेती हैं. वहीं सोशल मीडिया पर कई बार बोल्डनेस की हदें तोड़ने वाली पूनम इसी के चलते विवादों में भी रह चुकी हैं.

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