‘पद्मावत’ देखने के बाद अमिताभ ने दीपिका को दिया ये इनाम

फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर इन दिनों अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की जमकर वाह वाही हो रही है. जिसे लेकर दीपिका सहित फिल्म की पूरी टीम खासा खुश नजर आ रहे हैं. जहां एक तरफ दीपिका चारों तरफ से प्रशंसा बटोर रही हैं, वहीं हाल ही में उन्हें एक ऐसे शख्स से फिल्म में उनके काम के लिए सराहना मिली जो उनके दिल के बेहद करीब हैं.

अमिताभ बच्चन ने अपने अंदाज मे दीपिका को शुभकामनाएं दी. बौलीवुड के शहंशाह से किसी भी कलाकार को उसके काम के लिए तारीफ मिलना बेहद खास होता है.

फिल्म पद्मावत में दीपिका के जबरदस्त परफौर्मेंस की सराहना करने के लिए बिग बी ने हाथ से लिखे हुए एक पत्र के जरिये उनके शानदार अभिनय की तारीफ की है. पत्र में बिग बी ने बताया कि फिल्म में उनका दमदार अभिनय उन्हें किस कदर पसंद आया है और वह काफी खुश है.

इस पत्र को ‘इनाम’ समझते हुए, दीपिका ने इस प्यार को सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ शेयर किया. इस संदेश को शेयर करते हुए दीपिका ने भी एक बेहद भावुक संदेश लिखा. दीपिका ने लिखा, ”अवौर्ड्स.. अवौर्ड्स और फिर आता है ये..थैंक्यू बाबा”.

इससे पहले रणवीर सिंह को भी अमिताभ बच्चन ने ऐसा ही एक शुभकामना संदेश भेजा था. इस संदेश को ‘पुरस्कार’ बताते हुए अभिभूत रणवीर सिंह ने ट्विटर पर खत और एक गुलदस्ते की तस्वीर शेयर की थी. ‘पद्मावत’ फिल्म देखने के बाद अमिताभ द्वारा भेजे गए खत और गुलदस्ते की तस्वीर के कैप्शन में रणवीर ने लिखा है, “ मुझे मेरा अवौर्ड मिल गया.” अभिनेता को इस फिल्म में ‘सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी’ का किरदार अदा करने के लिए प्रशंसा मिल रही है. इससे पहले, सिंह को साल 2015 में बच्चन की तरफ से ‘बाजीराव मस्तानी’ के लिए हाथ से लिखा खत मिला था.

आपको बता दें कि 2015 में आई फिल्म पीकू में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण साथ काम कर चुके हैं जिसके लिए उन्हें काफी सराहना मिली थी. फिल्म में दोनों की कैमेस्ट्री को भी औडियंस ने खूब पसंद किया था. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने दीपिका पादुकोण के पिता की भूमिका निभाई थी. अमिताभ बच्चन के साथ दीपिका असल जिंदगी मे एक विशेष बंधन साझा करती है. फिल्म की रिलीज के बाद, आलोचकों से मिल रही प्रशंसा और बौक्स औफिस के शानदार कलेक्शन के साथ पद्मावत अभिनेत्री सफलता के रथ पर सवार हैं. बौक्स औफिस पर 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली ‘पद्मावत’ दीपिका की 7वीं फिल्म हैं, जिससे बौक्स औफिस पर विशाल कलेक्शन अपने नाम करने वाली वह बौलीवुड की एकलौती अभिनेत्री बन गई हैं.

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धर्म की दुकानदारी को गैरकानूनी करना ही होगा

वीरेंद्र देव दीक्षित जैसे बाबा कैसे लड़कियों को बहकाते हैं कि वे अपने मातापिता को भी भुला देती हैं, एक चमत्कार ही है. मध्य प्रदेश के सतना के राजेश प्रताप सिंह ने 7 साल पहले अपनी 16 वर्षीय बेटी को किस मोह में या किस अंधविश्वास में बाबा के द्वारका आश्रम में भेज दिया यह आश्चर्य है.

लोग खुले हाथ अपनी मेहनत की मोटी कमाई इन बाबाओं को देते रहते हैं जो कोई नई बात नहीं है पर बच्चों को भी आज के युग में उपहार की तरह बाकायदा स्टांप पेपर पर अनुबंध लिख कर दे दिया जाए यह गंभीर मामला है.

धर्म के नाम पर अनाचार सदियों से होता रहा है और पीड़िताएं खुद ब खुद इस अनाचार को ठीक उसी तरह नियति मान कर स्वीकार करती रही हैं जैसे वेश्याएं चकलों में जिंदगी को सहन करने लगती हैं और सैनिक गोलियों की बौछारों को. इन सब मामलों में निरंतर तर्क और सत्य के स्थान पर अंधभक्ति इस प्रकार दिमाग में प्रत्यारोपित कर दी जाती है कि लड़कियां व उन के मातापिता इसी को भाग्य मान कर संतुष्ट ही नहीं हो जाते, इस बात पर समाज में गर्व भी करने लगते हैं.

वैसे दुनिया के सभी समाजों में पिता अपनी बेटियों को उन के लिए ढूंढ़े गए वर के हाथ में सौंपते हुए भी यही कहते हैं कि बेटी, अब जो कुछ तुम्हारे साथ होगा, वह पति करेगा यानी कि वे बेटी को जीवन से पूरी तरह बाहर निकाल देते हैं. कई समाजों में तो विवाह बाद बेटियों की शक्ल ही नहीं देखी जाती. अन्य उदार समाजों में भी पिता के घर के दरवाजे लगभग बंद ही हो जाते हैं.

बेटियों के प्रति यही सोच आश्रमों के बाबाओं को मालामाल बनाती है. बेटी का भार ग्रहण करते हुए आश्रमों के बाबा मातापिता से मोटा दान भी दहेज की तरह ले लेते हैं और फिर उन का मनमाना दुरुपयोग करते हैं. 2-4 महीनों में बेटियां आश्रम के जीवन की आदी हो जाती हैं और मरजी से अपनी जगह वहीं बनाना शुरू कर देती हैं. सैकड़ों बाबाओं ने इसी का लाभ उठाया है. वे बेटियां भी ग्रहण करते हैं, पत्नियां भी. बहुत सी औरतें पतियों को जानबूझ कर छोड़ कर आश्रमों में बस जाती हैं तो कुछ घर में सेंध लगा कर आश्रम की अपने तन और पति के धन दोनों से सेवा करती हैं.

जब कभी हल्ला मचता है तो लोग ऐसे हायहाय करते हैं मानों राम रहीम या वीरेंद्र देव दीक्षित कई अपवाद और अपराधी हैं जबकि ये औरतें अपनी या मातापिता की मरजी से ही इन आश्रमों में आती हैं.

अगर इस दुर्दांत कथा का अंत करना है तो धर्म की दुकानदारी को गैरकानूनी करना होगा, जो भारत हो या अमेरिका कहीं भी संभव नहीं लगता. जब तक यह नहीं होगा राम रहीम, वीरेंद्र देव दीक्षित और अमेरिका के अपने ही ऐसे बाबा पनपते रहेंगे.

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‘परी’ का दूसरा टीजर रिलीज, बेहद डरावनी लग रही है फिल्म

बौलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘परी’ को लेकर चर्चा में हैं. अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘परी: नौट ए फेयरीटेल’ का दूसरा टीजर आज रिलीज हो गया है. ट्रेलर को देखकर कहा जा सकता है कि अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘परी’ एक हौरर मूवी है. फिल्म ‘परी’ के दूसरे टीजर में अनुष्का का अवतार बिल्कुल बदला हुआ नजर आ रहा है.

फिल्म के दूसरे टीजर के रिलीज होने के बाद बौलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा चर्चा में आ गई हैं. अनुष्का टीजर में टीवी देखते हुए नजर आ रही हैं. फिल्म ‘परी’ का पोस्टर अऩुष्का शर्मा ने अपने वैरीफाइड ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था जिसमें वह बेहद डरावने अवतार में नजर आ रही थीं. पोस्टर के सामने आने के बाद अनुष्का शर्मा सुर्खियों में रही थीं. अब फिल्म ‘परी’ का नया टीजर सामने आया है जिसमें उनका रूप बिल्कुल अलग नजर आ रहा है.

फिल्म ‘परी’ के दूसरे टीजर में अनुष्का शर्मा के हाथों में हथकड़ी नजर आ रही है. अनुष्का एक कमरे के बेडरुम से टीवी देखते हुए दिख रही हैं. अनुष्का शर्मा टीवी पर कार्टून देख रही हैं औऱ उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान भी है. फिर कैमरा अनुष्का के पैरों के पास जाता है जिसमें अनुष्का के पैरों के नाखून बढ़े और बेहद डरावने नजर आ रहे हैं. हाल ही में अनुष्का ने मीडिया से बातचीत में कहा था, ”वह फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं, यदि मैं आपसे कहूं कि परी एक लवस्टोरी है तो आप फिल्म देखने के बाद शौक्ड हो जाएंगे.”

अनुष्का के फिल्म ‘परी’ की टैगलाइन है नौट ए फेयरीटेल, जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी यह फिल्म सुपरनैचुरल थ्रिलर है. अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘परी’ का दूसरा टीजर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. क्लीन स्लेट फिल्म नाम के एक यू-ट्यूब चैनल ने अनुष्का के फिल्म के टीजर को शेयर किया है. अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्म परी 2 मार्च को रिलीज होने जा रही है.

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नाक की शेप को लेकर ट्रोल हुई दीपिका ने दिया मुंहतोड़ जवाब

बौलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर सुर्खियों में रही हैं. दर्शक फिल्म को लेकर पौजिटिव रिस्पौंस दे रहे हैं. दर्शकों को फिल्म में दीपिका का अभिनय काफी पसंद आ रहा है और यह फिल्म बौक्स औफिस पर सक्सेसफुल साबित हो रही है.

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दीपिका एक फिर से चर्चा में हैं और इस बार उनके चर्चा में होने का कारण फिल्म पद्मावत नहीं बल्कि कुछ और है. जी हां, इस बार बौलीवुड की ये अदाकारा अपनी नाक को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं. दीपिका पादुकोण सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं और फैंस के लिए अपनी तस्वीरें भी साझा करती रहती हैं.

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दीपिका ने हाल ही में एक प्रतिष्ठित मैगजीन के लिए फोटोशूट कराया था जिसका कवर फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया था, फोटो को देखने के बाद फैंस उनकी नाक के शेप को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे. फोटो में दीपिका की नाक पहले से कुछ अलग नजर आ रही है. फोटो को देखकर ऐसा लगता है कि फोटो में दीपिका की नाक की एडिटिंग की गई है.

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने ट्रोलर्स को मुंह तोड़ जवाब देते हे कहा कि मुझे मेरी नाक बेहद पसंद है, कृपया इसे लेर कुछ भी अनाप शनाप ना कहे, आपकी बाते मुझे समझ नहीं आ रही. वैसे मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा क्योंकि मैं इस समय कुछ भी नहीं सोच रही.. “इस फोटो में मेरे पांव भी बहुत बड़े हैं. आप मेरे पांव ले सकते हैं, पर नाक को लेकर कुछ ना कहे”

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किन्नर अखाड़े की पीठाधीश पुष्पा माई का संघर्ष

‘पिंक सिटी’ जयपुर की रेलवे कालोनी के पास ही बने पौश इलाके बनिपास में रहने वाले बालक प्रदीप को डांस का बड़ा शौक था. 80 के  दशक में बाल प्रतिभाओं को निखारने के लिए स्कूलों में बाल सभाएं हुआ करती थीं और तीसरे दर्जे में पढ़ने वाले प्रदीप का घाघराचुन्नी में राजस्थान का पारंपरिक डांस खूब पसंद किया जाता था.

प्रदीप को अपनी बहन के कपड़े पहनने में खास दिलचस्पी होती थी और स्कूल से लौट कर वह अपनी मां की साड़ी शरीर पर लपेट कर कालोनी में मस्ती करने चला जाया करता था. कालोनी के बच्चे प्रदीप को छेड़ते, पर बचपन की हंसीठिठोली में सबकुछ सामान्य रहता. 5वें दर्जे में प्रदीप ने गृह विज्ञान को विषय के रूप में चुना. उस के हाथों का बना खाना इतना स्वादिष्ठ और लाजवाब होता था कि टीचर भी वाहवाह करते थे.

प्रदीप अपने खेल टीचरको बहुत पसंद करता था. उस ने मां से जिद की कि वह अपने खेल टीचर के यहां पढ़ने जाएगा. दरअसल, खेल टीचर का उस को सहलाना बहुत पसंद आता था. एक दिन कालोनी के एक लड़के ने, जो प्रदीप से 3-4 साल बड़ा था, चुपके से प्रदीप को पकड़ लिया और उस के अंगों को सहलाने लगा. कालोनी के ही किसी लड़के ने यह बात प्रदीप के घर जा कर बता दी.

प्रदीप की बहन ने अपने भाई का बचाव किया, लेकिन प्रदीप चुपके से छत पर आ कर रोने लगा. उस की मां और बहन उस के पास गईं. मां ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘जैसे भी हो, तुम मेरे जिगर का टुकड़ा हो. देशी घी का लड्डू टेढ़ा ही सही, मेरा है. तू हमारा दीप नहीं, घर को महकाने वाला पुष्प है.’’

मां का अपार स्नेह प्रदीप पर बरस रहा था, लेकिन वे यह जान गई थीं कि उन के जिगर का टुकड़ा प्रदीप नहीं पुष्पा है. प्रदीप को परिवार के समर्थन और दुलार में कभी कोई कमी नहीं आई. डांस का शौकीन वह बेपरवाह हो कर परिवार और रिश्तेदारों के यहां शादियों में लड़कियों की ड्रैस में कमाल का डांस करता था. पिता के स्नेह और मां के हमसाए में प्रदीप की पढ़ाई-लिखाई तो हो गई, लेकिन उन का साया उठते ही सबकुछ बदल गया.

अब प्रदीप का अकेलापन उसे खाने लगा और उसे दोहरी जिंदगी सालने लगी. राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीए और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संगीत में एमए करने वाले प्रदीप ने साल 2005 में खुल कर समाज का सामना करने का फैसला किया और यह बता दिया कि वह किन्नर है. प्रदीप, जो अब पुष्पा था, का मकसद साफ था, लेकिन उसे किन्नर समाज के विरोध का सामना करना पड़ा.

पुष्पा को हाईकोर्ट से नोटिस भी मिला, लेकिन उस की ईमानदारी और सच्चाई ही थी, जो अनेक परेशानियों के बावजूद एक नई राह बनती चली गई. पुष्पा ने साल 2007 में अपनी संस्था ‘नई भोर’ की शुरुआत की. पुष्पा ने किन्नर समुदाय की अच्छी सेहत पर भी काम किया. साल 2011 में सरकार के ‘पहचान’ प्रोजैक्ट से पुष्पा जुड़ी और खुल कर काम किया. ‘नई भोर’ ने राजस्थान में लगातार बेहतर काम किए हैं, लेकिन सरकारी इमदाद अब तक उसे नहीं मिल पाई है.

किन्नर समाज के साथ ही समूचे ट्रांसजैंडर कल्याण के लिए पुष्पा ने अपने समुदाय के हक के लिए लगातार कोशिश करते हुए 4 मई, 2015 को राजस्थान सरकार से ट्रांसजैंडर के मानव अधिकारों की रक्षा और उन के कल्याण के लिए एक बोर्ड बनाने की मांग रखी. पुष्पा की यह कोशिश रंग लाई और 18 महीने की कोशिश के बाद सरकार ने आखिरकार इसे हरी झंडी दे दी.

राजस्थान में ट्रांसजैंडर समुदाय के कल्याण के लिए अलग बोर्ड बनाया गया है, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का चौथा राज्य है. यह बोर्ड ट्रांसजैंडरों की सेहत, पढ़ाईलिखाई और रोजगार के लिए काम करेगा. गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने ऊंची तालीम पाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश/आवेदनपत्रों में ट्रांसजैंडरों के लिए अलग कौलम का प्रावधान किया है और उन के लिए सीटें भी आरक्षित की गई हैं.

लेकिन अभी भी पुष्पा और उस के समुदाय के सामने कई चुनौतियां हैं, क्योंकि इस समुदाय के पास गानेबजाने के अलावा दूसरा कोई रोजगार का जरीया नहीं है. किन्नरों के पास खुद का कोई पहचानपत्र नहीं होता है. इस वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब राजस्थान में ‘राजस्थान ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ के तहत ट्रांसजैंडर आईडी बनाए जाएंगे.

इस बोर्ड के एक सदस्य के मुताबिक, एक किन्नर को पहले शपथपत्र पेश करना होगा, जिसे हर जिले के विशेषज्ञ को देना होगा. कमेटी के कार्यकर्ता पहचानपत्र के लिए फार्म मुहैया कराएंगे. पुष्पा कहती है कि इस के लिए विभिन्न जिलों में 2 से 3 दिन के लिए कैंप लगाए जाएंगे, जिस से एक ही छत के नीचे ट्रांसजैंडर परिचयपत्र बनाए जा सकेंगे. ये परिचयपत्र जिला कलक्टर के दस्तखत से जारी होंगे और इन्हें नैशनल लैवल पर मंजूर किया जाएगा.

ट्रांसजैंडर आईडी मिलने के बाद किन्नरों को बैंक अकांउट खोलने, चिकित्सा सुविधा के अलावा और भी तमाम कामों में सहूलियत होगी. ‘ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ समुदाय के लिए कम्यूनिटी हाल बनाना, आवास योजना, बीपीएल कार्ड, पैंशन योजना, शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, सांस्कृतिक, खेलकूद, बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना, सेहत संबंधित समस्याएं, सैक्स संबंधी मामले वगैरह के लिए भी काम करेगा.

हालांकि पुष्पा को इस बात का मलाल है कि राजस्थान में ‘ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ का अध्यक्ष मंत्री है और वह किन्नर समुदाय से नहीं है. बोर्ड की पहली मीटिंग में पुष्पा ने बड़ी बेबाकी से कहा कि बोर्ड का अध्यक्ष भी किन्नर बिरादरी से ही हो.

मार्च, 2015 में किन्नर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पुष्पा ने अपना गुरु बनाया. उस के बाद वे पुष्पा माई कहलाने लगीं. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भी हैं. पुष्पा माई कहती हैं कि किन्नर अखाड़ा ट्रांसजैंडर समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वीकार्यता के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

बहरहाल, किन्नरों की सामाजिक इंसाफ की लड़ाई लंबी है, लेकिन पुष्पा माई ने मतदाता परिचयपत्र में अपना नाम प्रदीप, पुष्पा दर्ज करा कर किन्नर समुदाय के लिए पहचान के क्रांतिकारी तरीके अपनाए हैं और अपने जज्बे से यह साबित भी किया है कि जमाने को जो चाहे कहने दो, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती.

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सपना को नहीं मिला अमन और फिर…

29 सितंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना सहजनवा के गांव रहीमाबाद  के पास सड़क के किनारे, एक लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के तमाम लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पा कर थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव भी पुलिस बल के साथ आ गए. उन्हें लाश की शिनाख्त कराने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि वहां जमा भीड़ में मृतक का एक दोस्त था, जिस ने लाश की शिनाख्त ही नहीं कर दी, बल्कि यह भी बताया कि उस ने मृतक के घर वालों को सूचना भी दे दी है. लाश की शिनाख्त जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार के रहने वाले जितेंद्र सिंह के बेटे अमनप्रताप सिंह के रूप में हुई थी. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश में रहते थे. गांव में उन के भाई राजू सिंह रहते थे. मृतक अमन के दोस्त ने उन्हें ही फोन कर के उस की हत्या के बारे में बताया था. सूचना मिलते ही वह परिवार के कुछ लोगों के साथ तुरंत चल पड़े थे.

थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव ने लाश का निरीक्षण किया तो पता चला कि सिर और सीने में गोली मारी गई थी. इस के अलावा पेचकस जैसी नुकीली चीज से उस के सीने में कई वार किए गए थे. वह घटनास्थल की काररवाई कर रहे थे, तभी मृतक अमन के चाचा राजू सिंह आ गए थे.

उन्होंने भी लाश की पहचान अपने भतीजे अमनप्रताप सिंह के रूप में कर दी तो पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. इस के बाद राजू सिंह की तहरीर पर थाना सहजनवा में अज्ञात के खिलाफ अमन की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया था.

मृतक का मोबाइल गायब था. पुलिस ने फोन किया तो पता चला कि वह बंद है. पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगवाने के साथ उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस के फोन की आखिरी लोकेशन सिंहडि़या के एक पेट्रोल पंप के पास की थी.

काल डिटेल्स के अनुसार आखिरी बार उस के मोबाइल पर जिस नंबर से फोन आया था, वह गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा का था. थाना सहजनवा पुलिस ने थाना कैंट पुलिस से संपर्क कर के पूरी बात बताई तो पता चला कि 2 साल पहले जगदंबा ने मृतक के खिलाफ बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा थाना कैंट में दर्ज कराया था.

इस जानकारी से ब्रजेश यादव को लगा कि इस हत्या में कहीं न कहीं से जगदंबा का हाथ जरूर हो सकता है. शक के आधार पर ब्रजेश यादव ने जगदंबा के घर छापा मारा तो वह अपने घर से फरार मिला. उस के साथ उस की वह बेटी भी गायब थी, जिस के साथ छेड़छाड़ का उस ने मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने जब मुखबिरों से बापबेटी के बारे में पता कराया तो पता चला कि बाप के साथ गायब बेटी सपना से मृतक के प्रेमसंबंध ही नहीं थे, बल्कि वह उस के साथ भागी भी थी.

इस के बाद ब्रजेश यादव को समझते देर नहीं लगी कि यह हत्या प्रेमसंबंधों की वजह से हुई है और हत्या भी जगदंबा ने ही बेटी के साथ मिल कर की है.

वह जगदंबा के पीछे हाथ धो कर पड़ गए तो करीब 15 दिनों बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. जगदंबा और सपना को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अमन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और सपना से प्रेम से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

इस के बाद उसी दिन यानी 17 अक्तूबर, 2016 की शाम को गोरखपुर के एसएसपी रामलाल वर्मा ने पत्रकारवार्ता कर अमन की हत्या का जो खुलासा किया, उस के अनुसार इस हत्याकांड में जगदंबा का बेटा नितेश पांडेय और साला संजीव द्विवेदी भी शामिल था. लेकिन ये दोनों भी फरार थे, इसलिए इन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था. इस पूछताछ में सपना और संजय पांडेय उर्फ जगदंबा ने अमन की हत्या की जो कहानी सुनाई थी, वह इस प्रकार थी—

अमन प्रताप सिंह उर्फ सोनू उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार का रहने वाला था. उस के पिता जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के जबलपुर में सड़क निर्माण विभाग में कंस्ट्रक्शन सेक्शन में इंजीनियर थे. अमन गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला रुस्तमपुर में किराए का कमरा ले कर पढ़ाई के लिए अकेला ही रह रहा था.

एकलौता बेटा होने की वजह से अमन के पिता चाहते थे कि बेटा उन्हीं की तरह पढ़लिख कर इंजीनियर बने. इसलिए उस की पढ़ाई पर वह विशेष ध्यान दे रहे थे. लेकिन गोरखपुर में जिस कोचिंग में वह पढ़ रहा था, वहां उस की मुलाकात खूबसूरत सपना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठा.

खूबसूरत सपना गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा की बड़ी बेटी थी. वह पढ़ने में अन्य भाईबहनों से ठीक थी, इसलिए प्राइवेट नौकरी कर के गुजरबसर करने वाले जगदंबा ने उस से कह रखा था कि वह जितना चाहे, पढ़ सकती है. लेकिन एक ही कोचिंग में पढ़ रहे अमनप्रताप सिंह उर्फ सोनू ने जब उस से प्यार का इजहार किया तो वह उस के प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकी और उस ने भी मुसकराते हुए कह दिया, ‘‘इट्स ओके, आई लाइक यू वैरी मच.’’

‘‘रियली.’’ अमन ने कहा तो सपना ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘यस, रियली आई लाइक यू वैरी मच. आई लव यू.’’

इस के बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं और हर मुलाकात के बाद उन के बीच प्यार बढ़ता गया. यही नहीं, दोनों प्यार का घरौंदा बनाने के सपने भी देखने लगे. उन का यह घरौंदा बन पाता, उस के पहले ही सपना के घर वालों को उस के प्यार का पता चल गया.

दरअसल, हमेशा गुमसुम रहने वाली सपना का चेहरा अमन से प्यार होने के बाद खिलाखिला रहने लगा था और उस की चालढाल भी बदल गई थी. बेटी में आए बदलाव को देख कर मां को हैरानी होने के साथ संदेह भी हुआ था कि बेटी में अचानक यह बदलाव कैसे आ गया, वह मोबाइल पर घंटों चिपकी किस से बातें करती रहती है? पूछने पर कुछ बताती भी नहीं है.

सयानी हो चुकी बेटी के हावभाव और हरकतों को देख कर मां को संदेह हुआ तो उन्होंने पति से बात करने का विचार किया. दूसरी ओर जगदंबा खुद भी बेटी के बदले व्यवहार से सकते में थे. वह पिता थे, इसलिए बेटी से सीधे कुछ पूछ नहीं सकते थे, इसलिए वह उस पर चोरीछिपे नजर रखने लगे थे.

इस का नतीजा यह निकला कि उन्हें पता चल गया कि सपना अमनप्रताप सिंह नाम के लड़के से प्यार करती है. यह जान कर उन के होश ही उड़ गए, क्योंकि बेटी से उन्हें इस तरह की कतई उम्मीद नहीं थी. उन्होंने यह बात पत्नी से बताई तो उन की शंका सच साबित हुई. उन्होंने चिंता में कहा, ‘‘लड़की कुछ ऐसावैसा कर बैठी तो हम समाजबिरादरी में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

पतिपत्नी काफी परेशान थे, जबकि सपना अपनी ही दुनिया में खोई थी. उसे इस बात की भनक तक नहीं लग पाई कि मांबाप को उस के प्यार की खबर लग गई है. उसे पता तब चला, जब जगदंबा ने अचानक उस के कोचिंग जाने पर रोक लगा दी. इस से सपना को समझते देर नहीं लगी कि पापा को उस के प्यार वाली बात का पता चल गया है. जबकि इस के पहले उन्होंने उसे पढ़ने के लिए कहीं भी आनेजाने से मना नहीं किया था.

सपना ने पिता के इस निर्णय के बारे में मां से बात की तो उन्होंने कहा, ‘‘सपना, तुम ने जो किया है, उस की हम लोगों को जरा भी उम्मीद नहीं थी.’’

‘‘मां, मैं ने ऐसा क्या कर डाला कि मेरी पढ़ाई बंद करा दी गई?’’

‘‘तुम ने जो किया है बेटी, उस का तुम्हारे पापा को पता चल चुका है. तुम्हें घर से पढ़ने के लिए भेजा जाता था, न कि किसी लड़के से प्यार करने. तुम ने क्या सोचा था कि तुम बताओगी नहीं तो हमें पता ही नहीं चलेगा.’’

‘‘तो यह बात है. आप लोगों को मेरे और अमन के प्यार के बारे में पता चल गया है.’’ सपना ने बेशर्मी से कहा, ‘‘मां, अमन बहुत अच्छा लड़का है, हम दोनों ही एकदूसरे को बहुत प्यार करते हैं.’’

‘‘मां के सामने यह कहते तुझे शर्म नहीं आई. 4 अक्षर पढ़ क्या लिया, तुम ने खुद को न जाने क्या समझ लिया? हम ने तुम्हें यही संस्कार दिए थे. आज भी हमारे यहां बेटियों के भाग्य का फैसला मांबाप करते हैं. इतनी बेशर्मी ठीक नहीं, अगर तेरी इन बातों को तुम्हारे पापा ने सुन लिया तो तुझे जिंदा गाड़ देंगे.’’

मां की बातें सुन कर सपना की बोलती बंद हो गई. मां ने सपना को काफी देर तक समझाया, लेकिन ऐसे लोगों पर किसी के समझाने का असर कहां होता है. सपना पर भी नहीं हुआ. मौका मिलते ही उस ने अमन को फोन कर के बता दिया कि उस के मांबाप को उन के प्यार का पता चल गया है.

सपना की बात सुन कर अमन को जैसे सांप सूंघ गया. वह बुरी तरह घबरा गया, क्योंकि सपना ने उस से यह भी कहा था कि उस के पापा बहुत गुस्से में हैं. वह उस से मिलने कोचिंग जरूर जाएंगे, इसलिए वह सतर्क रहे.

ऐसा हुआ भी. अपने साले संजीव द्विवेदी को साथ ले कर जगदंबा कोचिंग सेंटर जा पहुंचे थे. कोचिंग सेंटर के गेट पर अमन को रोक कर जब उन्होंने उसे अपना परिचय सपना के पिता के रूप में दिया तो वह परेशान हो उठा.

लेकिन उस समय उन्होंने उसे डांटनेफटकारने के बजाय प्यार से सपना से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि यह उस की पहली गलती मान कर उसे चेतावनी दे कर इस शर्त पर छोड़ रहे हैं कि अब वह कभी सपना से मिलने की कोशिश नहीं करेगा.

परिस्थितियों को देखते हुए अमन ने उस समय दोनों हाथ जोड़ कर माफी मांगते हुए वादा कर लिया कि अब वह कभी भी सपना से नहीं मिलेगा. ऐसा उस ने वक्त की नजाकत देख कर किया था, ताकि जगदंबा को उस पर भरोसा हो जाए कि वह जो भी कह रहा है, सच कह रहा है. जबकि मन ही मन उस ने कुछ और ही तय कर रखा था. बहरहाल अमन के वादे पर विश्वास कर के जगदंबा घर आ गए. सपना का कोचिंग जाना बंद ही करा दिया गया था, इसलिए घर का हर कोई उस पर नजर भी रख रहा था.

प्रेमी से मिलने के लिए सपना ने एक खेल यह खेला कि वह ऐसा व्यवहार करने लगी, जैसे वह पूरी तरह बदल गई हो. अपनी बातचीत और हावभाव से आखिर उस ने मांबाप को भरोसा दिला दिया कि वह अमन को भूल चुकी है. इस के बाद उस पर लगी पाबंदी हटा ली गई तो वह चोरीछिपे अमन से मिलने लगी. क्योंकि शायद वह अमन के बिना खुद को अधूरी समझती थी.

उसी तरह अमन भी सपना को टूट कर प्यार करता था. वह उस की रगों में लहू बन कर दौड़ रही थी. दोनों ही एकदूसरे से अलग रह कर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. सपना और अमन की ये मुलाकातें ज्यादा दिनों तक सपना के घर वालों से छिपी नहीं रह सकीं. जगदंबा को पता चल गया कि सपना अमन से फिर मिलने लगी है. इस बार उन्होंने खुद सपना को अमन के साथ घूमते देख लिया था. बेटी की हरकतों से वह परेशान हो उठा था. अमन से बेटी का पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उस के खिलाफ थाना कैंट में बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करा दिया. थाना कैंट पुलिस ने अमन को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. यह सन 2014 की बात है.

अमन के पिता परिवार सहित जबलपुर में रहते थे. उस के चाचा राजू सिंह गांव में परिवार के साथ रहते थे. वह गांव के प्रधान भी थे. अमन के गिरफ्तार होने के बारे में जब उन्हें पता चला तो वह परेशान हो उठे. इस बात को बड़े भाई यानी अमन के पिता को बताए बगैर वह गोरखपुर पहुंचे और अमन को जमानत दिलवा कर जेल से बाहर निकलवाया.

राजू सिंह को अमन की गिरफ्तारी की वजह का पता चला तो वह वह उसे समझाबुझा कर घर ले आए. चूंकि अमन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुका था और सरकारी नौकरी के लिए वहां तैयारी कर रहा था, इसलिए चाचा के समझाने पर वह हैदराबाद चला गया, जहां उसे प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई.

हैदराबाद जाने के बाद भी अमन सपना को नहीं भूला. सपना ही उसे कहां भूली थी. दोनों की फोन पर बराबर बातें होती रहती थीं. इसी का नतीजा था कि एक दिन सपना घर से भाग कर अमन के पास हैदराबाद जा पहुंची. वहां मंदिर में दोनों ने शादी कर ली और पतिपत्नी की तरह रहने लगे. दोनों अपने इस फैसले से काफी खुश थे. जबकि दोनों के ही मांबाप उन के इस फैसले से अनजान थे.

सपना के भाग जाने से उस के मांबाप काफी दुखी और परेशान थे. मोहल्ले में उन की काफी बदनामी हुई थी. इस के बावजूद जगदंबा बेटी की खोज में जुटे रहे. आखिर खोजतेखोजते वह हैदराबाद अमन के पास जा पहुंचे, जहां उन्हें सपना मिल गई. सपना को देख कर उन का खून खौल उठा, लेकिन वहां उन्हें गुस्से से नहीं, समझदारी से काम लेना था.

जगदंबा को देख कर अमन और सपना भी हैरान थे. जगदंबा अकेले नहीं थे, उन के साथ उस का साला यानी सपना का मामा संजीव द्विवेदी भी था.

जगदंबा ने बेटी को समझाया कि उसे जो करना था, वह उस ने कर लिया. अब वह घर लौट चले. उन्हें उस के इस फैसले पर कोई ऐतराज नहीं है. वह उन की बड़ी बेटी है, इसलिए वह उस की शादी समाज के सामने धूमधाम से करना चाहते हैं, जिस से उन पर लगा बदनामी का दाग धुल जाए.

पिता की बातें सुन कर सपना का चेहरा शर्म से झुक ही नहीं गया, बल्कि उसे अपने किए पर पछतावा भी हुआ. वह पिता के साथ चलने को तैयार हो गई तो जगदंबा उसे ले कर गोरखपुर आ गए. पर गोरखपुर आने के बाद जगदंबा के तेवर बदल गए. उन्होंने अपना पूरा गुस्सा सपना पर निकाला.

उस की जम कर पिटाई कर के उसे कमरे में बंद कर दिया. इस के बाद सपना को अपनी गलती का अहसास हुआ. जब इस बात की जानकारी अमन को हुई तो उसे भी बड़ा कष्ट हुआ. चूंकि अमन को सपना के बिना वहां अच्छा नहीं लगा तो वह भी नौकरी छोड़ कर आ गया.

उसी बीच अमन की छोटी बहन की शादी तय हो गई तो खरीदारी के लिए वह गोरखपुर आनेजाने लगा कि शायद वहां सपना से उस की मुलाकात ही हो जाए. इस तरह जब सपना से मुलाकात नहीं हो सकी तो उस ने सपना के पड़ोस में ही किराए का एक कमरा ले लिया और वहीं रह कर सपना से मिलने की कोशिश करने लगा. उस की यह कोशिश रंग लाई और जब सपना से उस की मुलाकात हुई तो मांबाप की मानमर्यादा को ताक पर रख कर एक बार फिर सपना उस के कमरे पर आ गई.

सपना और अमन ने मंदिर में विवाह किया था. घर और समाज में अधिकार पाने के लिए घर वालों के सामने या कोर्टमैरिज करना जरूरी था. इसलिए अपना हक पाने के लिए सपना ने अमन से कोर्टमैरिज करने को कहा तो उस ने वादा किया कि बहन की शादी के बाद वह मांबाप से बात कर के कोर्टमैरिज कर लेगा. लेकिन बहन की शादी हो जाने के बाद भी वह शादी करने के बजाय बहाने करने लगा तो सपना को समझते देर नहीं लगी कि वह उस से शादी नहीं करना चाहता.

सपना को जब लगा कि अमन को उस से नहीं, उस के जिस्म से प्यार है तो जिस दिल में उस के लिए प्यार के दिए जलते थे, उस में नफरत की ज्वाला धधकने लगी. उस ने मांबाप से अपने किए की माफी मांगी और वादा किया कि अब वे जो कहेंगे, वह वही करेगी. जिस से शादी करने को कहेंगे, वह शादी भी उसी से करेगी.

बेटी के साथ हुए धोखे से जगदंबा और उस की पत्नी भी दुखी थी. सपना के मातापिता अब उस के साथ थे. अमन ने उस के साथ जो किया था, उस से वह बहुत दुखी थी, इसलिए वह उसे सबक सिखाने के बारे में सोचने लगी. दूसरी ओर बेटी के साथ धोखा करने और इज्जत के साथ खिलवाड़ करने से जगदंबा भी अमन से नफरत करते थे, इसलिए बापबेटी ने मिल कर उसे सबक सिखाने का निर्णय कर लिया.

इस के बाद बापबेटी ने मिल कर अमन को सबक सिखाने के लिए जो योजना बनाई. जगदंबा ने बेटे नितेश पांडेय और साले संजीव द्विवेदी से बात की तो बात इज्जत की थी, इसलिए वे भी हर तरह से साथ देने को तैयार हो गए. उस के बाद 27 सितंबर, 2016 की शाम सपना ने जगदंबा के मोबाइल फोन से अमन को फोन कर के सिंहडि़या पेट्रोल पंप पर मिलने के लिए बुलाया.

प्रेमिका के बुलाने पर अमन वहां पहुंचा तो सफेद रंग की वैगनआर कार में सपना बैठी थी. उस ने इशारा कर के अमन को उस में बैठने का कहा तो बिना कुछ सोचेविचारे वह उस में बैठ गया. उस के बैठते ही पीछे से आ कर जगदंबा और नितेश भी बैठ गए. ड्राइविंग सीट पर संजीव द्विवेदी पहले से ही बैठा था.

चारों के बैठते ही गाड़ी गोरखपुरलखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल पड़ी. अमन को जिस तरह घेर लिया गया था, उस से वह समझ गया कि इन लोगों की नीयत ठीक नहीं है. यह अंदाजा होते ही वह हाथ जोड़ कर उन से जान की भीख मांगने लगा.

वे सभी तो उस की हत्या करने के लिए लाए थे, थाना सहजनवा के गांव रहीमपुर के पास सुनसान पा कर उसे गाड़ी से उतार कर उस के सिर और सीने में गोली मार दी. जगदंबा को गोली मार कर संतोष नहीं हआ था, इसलिए उस ने कार में रखा पेचकस ले कर उस के सीने में कई बार घोंपा. इस के बाद लाश वहीं छोड़ कर सभी घर वापस आ गए.

घर आ कर जगदंबा ने नितेश और संजीव को घर से भगा दिया. लेकिन उन के गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने उन की गिरफ्तारी के करीब 15 दिनों बाद उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने पूछताछ के बाद उन्हें भी अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. जेल भेजने से पहले पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त देशी कट्टा, पेचकस, वैगनआर कार और अमन का मोबाइल फोन बरामद कर लिया था.

अभियुक्तों के पकडे़ जाने के बाद पुलिस ने अज्ञात की जगह संजय पांडेय उर्फ जगदंबा पांडेय, सपना, नितेश और संजीव द्विवेदी को नामजद कर के चारों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर के न्यायालय में दाखिल कर दिया है.

सपना को अपने किए का तनिक भी मलाल नहीं है. उस का कहना था अमन ने उस के साथ जो बेवफाई की थी, उस की उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी. लेकिन शायद वह यह नहीं सोच पा रही है उस की इस सजा की वजह से कितने घर बरबाद हुए हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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स्वार्थ की राह पर बिखरा अपनों का खून

उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज का एक छोटा सा गांव है अभयपुरा. महावीर सिंह इसी गांव के संपन्न किसान बंसीलाल का बेटा था. इसी जिले के थाना मिरहची के अंतर्गत गांव कल्यानपुर में महावीर की बहन ब्याही थी. 5 अक्तूबर, 2016 को वह अपने घर से बहन के घर जाने के लिए निकला. बहन को उस ने यह खबर फोन कर के दे दी थी कि वह शाम तक पहुंच जाएगा. जब शाम तक महावीर बहन के घर नहीं पहुंचा तो बहन ने महावीर की पत्नी केला देवी को फोन कर के पूछा, ‘‘भाभी, महावीर भैया आने को कह रहे थे, अभी तक नहीं आए.’’

‘‘वह तो सुबह ही यहां से मिरहची के लिए निकल गए थे. अभी तक नहीं पहुंचे तो कहां चले गए.’’ केला देवी बोली.

‘‘पता नहीं भाभी,’’ बहन बोली, ‘‘आप उन के दोस्तों को फोन कर के देखो. क्या पता दोस्तों के साथ हों.’’

केला देवी ससुर बंसीलाल के पास गई और यह बात उन्हें बता दी. बंसीलाल ने महावीर का फोन नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ आ रहा था. बंसीलाल की भी समझ में नहीं आया कि बेटा गया तो गया कहां. उन्होंने उस के दोस्तों को भी फोन कर के पूछा पर कहीं से भी उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

उन का दिल तेजी से धड़कने लगा, चिंता बढ़ने लगी. कुछ नहीं सूझा तो वह मोहल्ले के  1-2 लोगों को साथ ले कर थाना अमोपुर पहुंच गए. थानाप्रभारी विजय सिंह को उन्होंने बेटे महावीर के गायब होने की बात बताई.

थानाप्रभारी ने बंसीलाल को विश्वास दिलाया कि वह महावीर का जल्द पता लगा लेंगे. उस की गुमशुदगी लिखने के बाद पुलिस महावीर की तलाश में जुट गई. महावीर कोई दूध पीता बच्चा तो था नहीं, जिस से यह समझा जाता कि वह कहीं खो गया होगा. वह समझदार और शादीशुदा था.

पुलिस यह मान कर चल रही थी कि या तो किसी ने उस का अपहरण कर लिया होगा या फिर उस के गायब होने के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला होगा.

थानाप्रभारी ने सब से पहले महावीर के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस के बाद उन्होंने उस के बारे में जांच की कि वह किस तरह का शख्स था. गांव में उस का किसकिस के साथ उठनाबैठना था.

इस जांच में थानाप्रभारी विजय सिंह को एक नई जानकारी यह मिली कि महावीर का बदन सिंह के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना था. उस की बीवी निर्मला के साथ उस के नाजायज संबंध थे. इस जानकारी के बाद वह बदन सिंह के घर पहुंचे तो बदन सिंह घर पर नहीं मिला. उस की पत्नी निर्मला ने बताया कि वह एक दिन पहले ही दिल्ली गए हैं. इस पर पुलिस ने उस का पता लगाने के लिए अपने मुखबिर लगा दिए.

3 हफ्ते बीत गए पर बदन सिंह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इस दौरान पुलिस महावीर के बारे में अन्य स्रोतों से भी पता लगाने की कोशिश कर रही थी. 30 अक्तूबर, 2016 को एक मुखबिर ने थानाप्रभारी को बदन सिंह के बारे में एक खास सूचना दी. उस ने बताया कि बदन सिंह आज गांव के बाहर ईंट भट्ठे पर आएगा. इस खबर को सुन कर थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ गांव के बाहर ईंट भट्ठे पर पहुंचे तो वहां पर उन्हें बदन सिंह के साथ एक युवक और मिला.

पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. बदन सिंह के साथ जो युवक था, उस ने अपना नाम मान पाल निवासी गांव सामंती बताया. थाने में उन दोनों से पूछताछ की गई तो बदन सिंह ने बताया कि महावीर सिंह उस का जिगरी दोस्त था, पर दोस्ती की आड़ में उस ने उस के साथ ऐसा गुनाह किया जो माफी के लायक नहीं था इसलिए हालात ऐसे हो गए कि उस की हत्या करानी पड़ी.

इस के बाद उस ने महावीर की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

महावीर कासगंज जिले के थाना अमापुर के एक छोटे से गांव अभयपुरा में रहता था. वह दिल्ली में नौकरी करता था, इसलिए उसे दिल्ली की हवा लगी हुई थी. उस के पिता के पास अच्छीखासी जमीन थी पर महावीर का खेती के काम में मन नहीं लगता था, इसलिए वह दिल्ली में नौकरी करता था. पिता ने उस की शादी एटा निवासी केला देवी से कर दी थी. बाद में वह एक बेटे का पिता बना जिस का नाम यशवीर रखा.

महावीर की गांव के कई हमउम्र लड़कों से दोस्ती थी. उन्हीं में से एक था बदन सिंह. बदन सिंह के पिता के पास भी अच्छीखासी खेती की जमीन थी. वह पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाता था. बदन सिंह की शादी निर्मला से हो चुकी थी. बाद में वह भी 2 बच्चों का पिता बना.

महावीर और बदन सिंह एक तरह से लंगोटिया यार थे. महावीर महीने 2 महीने में जब भी दिल्ली से आता तो उस का ज्यादातर वक्त बदन सिंह के साथ ही बीतता था. घर आने पर बदन सिंह की पत्नी निर्मला महावीर की खूब खातिर करती थी. महावीर के दिल्ली चले जाने के बाद बदन सिंह भी खुद को अकेला महसूस करता था.

एक बार जब महावीर दिल्ली से गांव आया तो कुछ अलग ही घटित हो गया. वह अपने दोस्त बदन सिंह के घर पहुंचा तो उस की पत्नी निर्मला को देखता ही रह गया. वह बहुत सुंदर लग रही थी. महावीर के दिल में अजीब सी हलचल होने लगी.

वह निर्मला के नजदीक आने की ख्वाहिश रखने लगा. लेकिन उस के मन के किसी कोने में यह बात भी उठ रही थी कि क्या दोस्त की बीवी को ले कर ऐसी बातें सोचना सही है? उस ने निर्मला से अपने मन की बात नहीं कही और घर लौट आया. पर बारबार निर्मला की चाहत उसे बेचैन किए जा रही थी. उसे परेशान देख कर पत्नी केला देवी ने उस से परेशानी की वजह पूछी पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया.

महावीर ने गांव के कई लड़कों को दिल्ली ले जा कर नौकरी पर लगवाया था. कुछ सोच कर उस ने इस बार बदन सिंह को भी दिल्ली चल कर नौकरी करने को कहा, लेकिन बदन सिंह ने साफ इनकार कर दिया.

मन में अजीब सी कशमकश लिए महावीर दिल्ली चला तो गया लेकिन वहां उस का मन नहीं लगा. निर्मला उस के जेहन में हलचल मचाती रही. 15 दिन बाद उस ने फिर छुट्टी ली और घर आ गया. इतनी जल्दी घर लौटने पर घर वालों ने पूछा तो उस ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया.

महावीर को मालूम था कि बदन सिंह दोपहर के समय खेतों पर चला जाता है और फिर शाम ढले ही लौटता है. इसी मौके का फायदा उठा कर वह निर्मला का दिल टटोलना चाहता था. अगले दिन दोपहर में वह नहाधो कर तैयार हुआ और पत्नी से यह कह कर घर से निकल गया कि वह डाक्टर के पास दवा लेने जा रहा है. अपने घर से वह सीधा बदन सिंह के घर पहुंचा.

अचानक महावीर को आया देख कर निर्मला बोली, ‘‘अरे देवरजी, तुम इतनी जल्दी दिल्ली से आ गए.’’

‘‘आप को देखने का दिल कर रहा था, इसलिए आ गया.’’ महावीर ने मजाक किया. उस की बात पर निर्मला हंसते हुए बोली, ‘‘आप तो बड़े मजाकिया हो.’’ कह कर निर्मला रसोई में गई और फिर कुछ देर में उस के लिए चाय बना कर ले आई.

महावीर चुपचाप चाय पीने लगा. उस के दिमाग में यही बात घूम रही थी कि अपने मन की बात उस से कैसे कहे. तभी निर्मला ने उस से पूछा, ‘‘चुप क्यों हो, क्या हमारी देवरानी से झगड़ा हुआ है?’’

‘‘नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी पर आप की इस चाय ने मुझे भलाचंगा कर दिया है.’’

‘‘क्यों, हमारी देवरानी को चाय बनानी भी नहीं आती क्या?’’ कहते हुए निर्मला हंसी.

‘‘नहीं भाभी, वो सब तो ठीक है पर बहुत सी बातें हैं जो आप को आती हैं और उसे नहीं आतीं. भाभी, कभी आप ने खुद को आईने के सामने गौर से देखा है. आप जितनी सुंदर हैं, पूरे गांव में इतनी सुंदर औरत कोई नहीं है.’’ महावीर ने तारीफ की.

‘‘ओह देवरजी, बहुत हो गया. अब मुद्दे पर आ जाओ. आखिर इतनी तारीफें क्यों कर रहे हो. कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है?’’ निर्मला हंसते हुए बोली.

इस से महावीर की थोड़ी हिम्मत बढ़ी, तभी उस ने आगे बढ़ कर निर्मला का हाथ पकड़ लिया. महावीर की इस हरकत से निर्मला को झटका सा लगा. उस ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, ‘‘ये सब क्या है?’’

‘‘भाभी, मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूं. पर यह सच है कि मैं आप से बहुत प्यार करता हूं.’’

‘‘अजीब आदमी हो, तुम जानते हो कि अगर तुम्हारे दोस्त को पता चल गया तो क्या होगा? लगता है तुम्हारी तबीयत सचमुच ठीक नहीं है इसलिए अभी अपने घर चले जाओ और आराम करो.’’  निर्मला ने नसीहत दी.

महावीर ने तो सोचा था कि वह अपनी मीठीमीठी बातों से निर्मला को बहला लेगा पर पासा उलटा पड़ गया. वह अपमानित सा वहां से चला आया और घर में आ कर सिर पकड़ कर बैठ गया.

केला चाय बना कर ले आई और पूछा, ‘‘दवा ले आए?’’

‘‘नहीं, डाक्टर की दुकान बंद थी.’’

केला कुछ नहीं बोली. महावीर चाय पी कर चादर ओढ़ कर लेट गया. उसे इस बात का डर था कि अगर निर्मला ने अपने पति को उस के बारे में बता दिया तो तूफान आ जाएगा. पर रात तक कुछ नहीं हुआ तो महावीर ने चैन की सांस ली. अगले दिन महावीर दिल्ली चला गया.

बेशक निर्मला ने उस के प्यार को स्वीकार नहीं किया था फिर भी दिल्ली में उस का मन नहीं लगा. आखिर नौकरी छोड़ कर वह घर लौट आया.

सामान सहित घर लौटे महावीर को देख कर घर वाले चौंके. पत्नी ने पूछा, ‘‘ये सब क्या है?’’

‘‘तुम हमेशा कहती थी न कि मैं खेती देखूं. अब हम साथसाथ रहेंगे. सच कहूं केला, तुम्हारे और यशवीर के बिना मेरा दिल्ली में दिल नहीं लगता था इसलिए चला आया.’’ महावीर ने कहा. पर इस की असल वजह उस के अलावा कोई नहीं जानता था.

बदन सिंह ने जब निर्मला को बताया कि महावीर नौकरी छोड़ कर आ गया है तो वह उस के गांव लौटने की असल वजह समझ गई.

निर्मला ने उस दिन महावीर का प्रस्ताव ठुकरा दिया था पर बाद में न जाने क्यों उस का झुकाव महावीर की ओर हो गया था. उसे अब अपने किए का पछतावा हो रहा था. उस का मन कर रहा था कि वह महावीर से इस  के लिए माफी मांगे. इसी तरह के विचार उसे बेचैन कर रहे थे.

आखिर निर्मला को एक तरीका सूझा. उस ने पति का मोबाइल चैक किया तो उसे उस में महावीर का नंबर मिल गया. दोपहर को जब बदन सिंह खेत पर चला गया तो उस ने महावीर का नंबर मिलाया. महावीर ने हैलो कहा तो निर्मला के दिल की धड़कनें तेज होने लगीं. तभी महावीर ने कहा, ‘‘अरे भाई बोलो भी, चुप क्यों हो.’’

तभी निर्मला ने हैलो कहा तो महावीर के दिल में घंटियां सी बजने लगीं. निर्मला अब सीधेसीधे मुद्दे पर आ गई. उस ने कहा, ‘‘आग लगा कर अब दूर क्यों भाग रहे हो?’’

‘‘ये क्या कह रही हो भाभी, मैं ने क्या किया?’’ वह नासमझ बनते हुए बोला.

‘‘ओह, तो यह भी हम ही बताएं कि तुम ने किया क्या है. यहां हम बेचैन हो रहे हैं और तुम वहां मौज कर रहे हो. अच्छा, सुनो आज रात को घर आ जाना. तुम्हारे दोस्त बाहर जा रहे हैं.’’

महावीर का हाल अजीब था. दिल की धड़कनें बेकाबू हो रही थीं. उस ने अच्छा कह कर फोन काट दिया और सोचने लगा कि क्या सचमुच निर्मला भी उसे चाहने लगी है. दिन भर वह सोच में रहा. न ठीक से खाया न ही खेत पर चैन मिला. वह बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतजार करने लगा.

आखिर रात आ ही गई. घर वाले जब सो गए तो महावीर चुपचाप दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया. वह बदन सिंह के दरवाजे पर पहुंचा तो दरवाजा भिड़ा हुआ था. हलका का धक्का देते ही वह खुल गया. जैसे ही वह अंदर गया तो निर्मला कमरे से निकल आई. महावीर को देख कर वह खुश हो गई और दरवाजे की कुंडी लगा दी. वह कमरे में महावीर के पास आ कर बोली, ‘‘इस आशिकी के चक्कर में तुम क्यों 2 परिवारों को बरबाद करना चाहते हो. जानते तो हो मेरे 2 बच्चे हैं.’’

‘‘जानता हूं, पर इस दिल का क्या करूं जो मानता ही नहीं है.’’ महावीर ने कहा.

‘‘क्या तुम सचमुच मेरे प्रति गंभीर हो?’’ निर्मला ने पूछा, ‘‘केला का क्या होगा, सोचा है कभी.’’

‘‘हां, बिलकुल गंभीर हूं. उस की चिंता मत करो. वह भी अपने बारे में सोच ही लेगी.’’ कहते हुए महावीर ने निर्मला को खींच कर गले से लगा लिया. महावीर के आगोश में निर्मला ने भी समर्पण कर दिया. उस ने अपनी जिंदगी की नाव को तूफान के हवाले कर दिया.

इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. इस से उन्हें संतुष्टि भले ही हासिल हुई होगी पर यह बात सच थी कि उन्होंने जो काम किया, उस से उन के पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद हिलने की शुरुआत हो चुकी थी.

देर रात महावीर घर पहुंचा तो घर में सभी को सोते देख कर उस ने राहत की सांस ली. अब महावीर और निर्मला की आशिकी मोबाइल के जरिए चलने लगी. दोनों मिलने का समय तय कर लेते और समय निकाल कर एकदूसरे की बांहों में खो जाते.

पत्नी के कृत्य से बदन सिंह तो अभी तक बेखबर था पर केला को लगने लगा था कि जरूर कुछ गड़बड़ है. फिर गांव के एक युवक ने केला से कह भी दिया, ‘‘भाभी, महावीर भैया का बदन सिंह के घर ज्यादा आनाजाना ठीक नहीं है. लोग उन के बारे में तरहतरह की बातें करते हैं.’’

केला के पति की बदन सिंह से काफी पुरानी दोस्ती थी. इसी वजह से लोगों ने उस के बारे में कभी कुछ नहीं कहा. वह सोचने लगा कि अब ऐसी क्या बात हो गई जो लोग तरहतरह की बातें करते हैं. यही बात केला के दिमाग में घूमने लगी. एक दिन कपडे़ धोते समय महावीर की जेब में निर्मला का फोटो मिला तो उस का शक और भी गहरा गया. वह सोचने लगी कि पति से कैसे पूछे. उसे अपना और बेटे यशवीर का भविष्य खतरे में नजर आने लगा.

एक रात जब केला की नींद खुली तो महावीर बिस्तर से नदारद था. उस का दिल तेजी से धड़कने लगा. महावीर बाहर से देर रात आया और बिस्तर पर लेटने लगा तो वह बोली, ‘‘आ गए, उस से मिल कर?’’

महावीर के पैरों तले से जमीन खिसकने लगी. वह बात को छिपाते हुए बोला, ‘‘मैं तो बाहर हवा खाने गया था.’’

केला ने कुछ नहीं कहा. इस के पीछे उस की मजबूरी यह थी कि उस के मातापिता का देहांत हो चुका था. एक भाई था. सोचा अगर पति ने छोड़ दिया तो वह बच्चे को ले कर कहां जाएगी. इसलिए वह चुप रही.

अगले दिन सुबह उसे लगा कि पति से उस की दूरी बढ़ चुकी है. खाना खाते समय भी महावीर ने उस से बात नहीं की. महावीर के दिल में भी अपराधबोध था पर वह अपने दिल का क्या करता जो निर्मला के पल्लू में बंधा हुआ था.

काफी देर बाद आखिर केला ही चुप्पी तोड़ते हुए बोली, ‘‘जो तुम कर रहे हो, ठीक नहीं है.’’

‘‘मैं क्या कर रहा हूं. तुम क्या कह रही हो, मैं समझा नहीं.’’ वह बोला.

‘‘लेकिन मैं सब कुछ समझ रही हूं विनाश काल में बुद्धि विपरीत हो जाती है. डरती हूं कि कहीं तुम्हारा भी यही हाल न हो.’’

इस बीच बदन सिंह को भी पता चल गया कि उस की पत्नी के संबंध महावीर के साथ हैं. दोस्त के इस विश्वासघात पर बदन सिंह को बड़ा गुस्सा आया. उस ने महावीर से तो कुछ नहीं कहा पर पत्नी पर निगाह रखने लगा. बदन सिंह एक दिन दोपहर में घर लौटा तो घर में महावीर को देख कर उस के तनबदन में आग लग गई. उस ने महावीर को बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा, ‘‘अब कभी भी मेरी गैरमौजूदगी में मेरे घर मत आना.’’

महावीर घबरा गया, ‘‘यह क्या कह रहे हो दोस्त, मैं तो तुम से मिलने आया था.’’

‘‘तो फिर खेत पर मिलते.’’ कहते हुए बदन सिंह ने महावीर का हाथ पकड़ कर बाहर निकाला और दरवाजा बंद कर दिया.

निर्मला अवाक रह गई. वह बोली, ‘‘ये तुम ने ठीक नहीं किया.’’

बदन सिंह उसे घूरते हुए बोला, ‘‘अगर तुम नहीं संभली तो मैं इस से भी ज्यादा बुरा कर दूंगा.’’

निर्मला ने फोन द्वारा महावीर को सतर्क किया और इस के बाद दोनों अमापुर जा कर मिलने लगे. साथ ही उन्होंने घर से भाग जाने की योजना बना ली. बदन सिंह को पता चल गया कि निर्मला महावीर के साथ भाग जाना चाहती है. यदि ऐसा हो जाता तो उस की समाज में बहुत बदनामी होती. इस से पहले कि वह ऐसा कोई कदम उठाती, बदन सिंह ने महावीर को ही ठिकाने लगाना बेहतर समझा.

वह अपने एक दोस्त मान पाल निवासी गांव सामंती, थाना सोरों से मिला और अपनी परेशानी बताई. मान पाल ने उस का साथ देने का वादा किया. इस के बाद दोनों मौके की तलाश में लग गए. इसी बीच उन्हें पता चला कि 5 अक्तूबर, 2016 को महावीर को कल्याणपुर स्थित अपनी बहन के घर जाना है.

उस दिन बदन सिंह और मानपाल महावीर के घर से बाहर निकलने का इंतजार करने लगे. महावीर जैसे ही घर से निकला, दोनों पीछे लग गए. मानपाल ने महावीर से बात की और उसे बहलाफुसला कर शराब के ठेके पर ले आया. उस ने महावीर को खूब शराब पिलाई. इसी बीच बदन सिंह भी वहां आ गया और दोनों उसे ई-रिक्शा में डाल कर तबल नगला के जंगल में ले गए.

जंगल में पहुंचने पर उन्होंने महावीर को उतार कर ई-रिक्शा चालक को पैसे दे कर भेज दिया और महावीर को मार डाला और लाश को वहीं डाल कर भाग खड़े हुए. जिस अंगौछे से गला घोंट कर उस की हत्या की गई थी, उसे उस के गले में ही रहने दिया.

बदन सिंह दिल्ली चला गया था लेकिन उस के पास पैसे खत्म हो चुके थे. अत: उस ने मान पाल से कहा कि वह पैसों का इंतजाम कर के उसे अमापुर में भट्ठे पर मिले. यह बात मुखबिर को पता लग गई. उसी मुखबिर के इशारे पर दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए.

बदन सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने महावीर का कंकाल और गले में पड़ा अंगौछा बरामद कर लिया. पुलिस ने भादंवि की धारा 346, 302, 201, 120बी और 404 के तहत बदन सिंह और मान पाल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. निर्मला की आशिकी में उसे कुछ हासिल नहीं हुआ, 2 परिवार जरूर बरबाद हो गए.

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बोल्ड तस्वीरों के चलते चर्चा में आईं ईशा गुप्ता

ईशा गुप्ता की गिनती बौलीवुड की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में होती है. पूर्व मिस इंडिया ईशा इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव है और अक्सर अपनी तस्वीरें वहां शेयर करती रहती है. सोशल मीडिया पर अपनी बेहद बोल्ड और ग्लैमरस तस्वीरों को लेकर चर्चा में रहने वाली एक्ट्रेस ईशा गुप्ता एक बार फिर से खबरों में छाई हुई हैं.

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हाल ही में ईशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फोटो शेयर किया है. फोटो शेयर करते ही ईशा को ट्रोलर्स ने अपने निशाने पर ले लिया. पोस्ट की गई तस्वीर में ईशा काले रंग के गाऊन में नजर आ रही हैं. गाऊन में उनका क्लीवेज दिखाई दे रहा है जो शायद कई यूजर्स को जरा भी पसंद नहीं आया. इसके बाद इन तस्वीरों पर कई लोगों ने काफी आलोचना भी की. कपड़ों को लेकर भद्दे-भद्दे कमेंट किए गए. एक यूजर्स ने यहां तक लिख दिया कि कपड़े ही उतार दो.हालांकि उनके कई प्रशंसकों ने उनकी खूबसूरती की तारीफें भी की.

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बता दें कि ईशा हाल ही में ब्रौन्ड विजन समिट में शामिल हुई थी. ये तस्वीरें वहीं की हैं. औफ शोल्डर काले रंग की एमेरल्ड गाउन में ईशा बेहद खूबसूरत लग रही थीं.

इससे पहले ईशा गुप्ता की 18 साल के एक लड़के के साथ कुछ तस्वीरें सामने आई थीं. तस्वीरों को शेयर करते हुए ईशा ने जिस तरह के कैप्‍शन लिखे थे, उसको देखकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच खलबली मच गई थी.

ईशा साल 2007 में मिस इंडिया रह चुकी हैं. इसके बाद साल 2012 में उन्होंने फिल्म जन्नत 2 से बौलीवुड में कदम रखा. ईशा फिल्म बादशाहो में अजय देवगन और इमरान हाशमी के साथ भी नजर आ चुकी हैं. ईशा फिल्म कमांडो 2 में नजर आई थी. इस फिल्म में ईशा निगेटिव रोल में थी. ईशा जल्द ही आंखें-2 और हेरा-फेरी 3 में नजर आएंगी.

प्रियंका चोपड़ा चाहती हैं बहुत सारे बच्चे, लेकिन किसके साथ..

बौलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अक्सर अपने काम और बयान दोनों को लेकर ही सुर्खियों में बनी रहती है. बौलीवुड से हौलीवुड तक का सफर करने वाली प्रियंका ने एक बार फिर से ऐसा ही कुछ कहा है जो अनचाहे ही लोगों का ध्यान उनकी ओर खींच रहा है.

हालांकि प्रियंका अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को बेहद अच्छे से मेंटेन करती आई है, लेकिन इस दफा उन्होंने खुलकर अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े सवालों का जवाब दिया है.

प्रियंका ने कभी भी मीडिया में अपने अफेयर की खबरों पर रिएक्ट नहीं किया है, लेकिन हाल ​ही में दिए इंटरव्यू में प्रियंका ने अपनी दिल की बात सामने रखी है. प्रियंका ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह बहुत सारे बच्चे चाहती है, लेकिन समस्या ये है कि ऐसा किसके साथ होगा ये वह भी नहीं जानती.

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परिवार और शादी पर प्रियंका को है पूरा यकीन

प्रियंका ने इस दौरान यह भी बताया कि वह पिछले लंबे समय से सिंगल हैं और वह इस सवाल का सही जवाब देना चाहती हैं. साथ ही कहा कि ऐसा मैं अटेंशन पाने के लिए नहीं कह रही हूं, बल्कि वास्तव में जो है वही साझा कर रही हूं. उन्होंने कहा मैं शादी को लेकर बेहद सीरियस हूं और मुझे परिवार जैसी संस्था पर पूरा भरोसा है.

प्रियंका ने बताया कैसे जीते उनका दिल

इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उनका दिल कैसे जीता जा सकता है. प्रियंका ने कहा कि यदि उनका पार्टनर उनकी केयर नहीं कर सका और वह स्मार्ट नहीं है तो फिर ये मेल संभव नहीं हो सकेगा. इतना ही नहीं प्रियंका ने यह भी कहा कि उनका पार्टनर उन्हें इंगेज नहीं रख सकता तो ऐसे में वह उस शख्स के साथ नहीं रहना चाहेंगी. एक्ट्रेस ने कहा कि यह बात उनके लिए बेहद मायने रखती है. साथ ही कहा कि वह बहुत भावुक और रोमांटिक भी हैं.

21वीं सदी में पैदा होना भाग्यशाली

इसी बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी शादी और बच्चों को लेकर प्लान्स के बारे में भी बताया. प्रियंका ने कहा कि शादी और बच्चे दोनों ही उनके लिए बड़े गोल हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐसा किसके साथ होगा वह यह नहीं जानती हैं. प्रियंका ने यह भी कहा कि शादी और परिवार उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण संस्था है.

पीसी ने कहा कि 21वीं सदी में पैदा होने उन्हें भाग्यशाली होने का एहसास करवाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि विज्ञान यहां आजादी देता है. बहरहाल प्रिंयका ने अपने दिल का हाल बता दिया है और साथ में यह भी कि उन्हें कैसे इंप्रेस किया जा सकता है.

बेइज्जती करने में कसर नहीं छोड़ते सलमान : सपना चौधरी

‘बिग बौस 11’ में बेहतरीन पारी खेलने के बाद हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. बिग बौस ने सपना को पैसा और नाम दोनों दिया. हाल ही में सपना ने अपने डेब्‍यू फिल्‍म की शूटिंग शुरू की है. जिसमें वह अभिनेता अभय देओल के साथ नजर आयेंगी.

इस फिल्म के अलावा उन्होंने कई आइटम सौन्‍ग भी शूट करवाये हैं. बता दें कि सपना चौधरी आनेवाली फिल्‍म ‘वीरे दी वेडिंग’ में एक आइटम नंबर करनेवाली हैं. फिल्‍म में करीना कपूर, सोनम कपूर और स्‍वरा भास्‍कर लीड रोल में हैं.

हाल ही में सपना चौधरी ने बिग बौस से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर करते हुए बिग बौस के होस्ट और सुपरस्‍टार सलमान खान के बारे में भी एक बड़ा बयान दिया है.

सपना ने एक हिन्दी चैनल से बातचीत के दौरान बिग बौस से जुड़े कई बातों का खुलासा किया. जब उनसे पूछा गया कि बिग बौस के घर में वह वो चीजें क्‍यों नहीं कर पाईं जिसकी उनके फैंस को उम्‍मीद थी? इसके जवाब में सपना ने कहा,’ ऐसा नहीं है, मैं सबकी बैंड बजाकर आई हूं. आपको मालूम होगा कि नार्थ इंडिया वाले साइलेंट बम होते हैं. जल्‍दी से कुछ नहीं बोलते, लेकिन जब उन्‍हें कोई छेड़ता है तो वे उन्हें छोड़ते भी नहीं है. मैंने भी यही किया.’

सपना से जब बिगबौस के होस्ट सलमान खान को लेकर बात की तो उन्होंने सलमान के बारे में बताया, ‘सलमान ने शो के दौरान किसी की भी बेइज्‍जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मुझे कभी पलटकर जवाब नहीं दिया. वो दिल के बहुत अच्‍छे इंसान है.’

सपना का यह भी कहना है कि उनका बिग बौस के घर में मन नहीं लगता था. उन्होंने कहा, ‘मुझे बिग बौस के घर में एडजस्‍ट होने में दिक्‍कत हो रही थी. इसीलिए जब मैं शो से बाहर हुई तो मुझे बिल्‍कुल भी दुख नहीं हुआ.’ सपना ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिग बॉस के घर में जाने के बाद आपके पास ना मोबाइल फोन होता है और ना ही कोई काम. ऐसे में आपका बाहर की दुनिया से बिल्कुल भी नाता नहीं होता और आपको बाहर की दुनिया याद भी नहीं रहती है.’

सपना ने अपनी शादी के सवालों पर कहा कि उनकी मां रिश्‍ते लेकर आती रहती हैं लेकिन उन्‍हें शादी की कोई जल्‍दबाजी नहीं है इसलिए वे इसके लिए मना कर देती हैं.

सिक्‍योरिटी गार्ड्स रखने के बारे में सपना चौधरी ने बताया, ‘गार्ड्स सेलीब्रिटी के लिए भगवान की तरह होते हैं. वो 24 घंटे हमारे साथ रहते हैं. उनका कर्ज उतारा नहीं जा सकता. जिस दिन में बिग बौस के घर की सदस्य बनी थी, मेरे गार्ड्स रोये थे.’

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