हैल्दी डाइट से दूर क्यों हो रहे हैं युवा

आज युवाओं में फास्टफूड की आदत तेजी से पनप रही है. इस से उन की सेहत को कितना नुकसान हो रहा है, इस बात का अंदाजा उन्हें तब लगता है जब उन का शरीर इस छोटी सी आयु में ही रोगग्रस्त होने लगता है. संतुलित भोजन के अभाव में शरीर कईर् तरह की बीमारियों से घिरने लगता है. इन बीमारियों में मुख्यरूप से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप असमय आंखों में चश्मा लगना और बालों का सफेद होना शमिल है :

कैसे जिएं स्वस्थ जीवन

युवाओं को चाहिए कि वे युवावस्था से ही ताउम्र स्वस्थ जीवन जीने के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें.

  • सुबह साढ़े 5 से 6 बजे के बीच नियमित उठने की आदत डालें.
  • उठते ही रोज 2-3 गिलास कुनकुना पानी पिएं. इस से पेट साफ रहेगा और पूरे दिन शरीर में ताजगी बनी रहेगी.
  • नियमित रूप से दांत साफ करें और चेहरा अच्छी तरह धोएं. इस से रात को चेहरे पर आई मृत चमड़ी के साफ होने से चेहरे के रोमकूप खुल जाते हैं और चेहरा चमकने लगता है.
  • हर रोज सुबह व्यायाम करें.
  • व्यायाम के बाद थोड़ा आराम कर स्नान अवश्य करें, इस से शरीर के रोमकूप साफ हो कर खुलते हैं और दिनभर पसीने के रूप में शरीर की गंदगी के लिए बाहर निकलने का रास्ता बनता है. इस तरह त्वचा में ताजगी बनी रहती है.
  • जब भी समय मिले, 1-2 घंटे मैदान में जा कर खूब खेलें और पसीना बहाएं.
  • हमेशा संतुलित भोजन ही करें.

भोजन हमें स्वाद के लिए नहीं करना चाहिए बल्कि स्वस्थ रहने के लिए करना चाहिए, इसलिए बिना भूख के खाना न खाएं. मनुष्य यह आदत जानवरों से भी सीख सकता है. जानवरों का पेट भरा होने के बाद आप चाहे उन के सामने कितना ही अच्छा चारा क्यों न डालें, वे नहीं खाते. यही कारण है कि जानवर कभी मोटापे का शिकार नहीं होते.

भोजन के समय को हम 3 भागों में बांट सकते हैं:

  1. सुबह का नाश्ता, 2. दोपहर का भोजन, 3. रात्रि का भोजन.

नाश्ता : नाश्ते में दूध, अंडा, मक्खन, पनीर, अंकुरित अनाज, कच्चा सलाद, दलिया, उपमा, चपाती, हरी सब्जियां, सूखे मेवे, फल इत्यादि हर रोज अपनी इच्छानुसार बदलबदल कर ले सकते हैं. इन में से मनपसंद चीजें रोटी में डाल कर रोल बना कर खाया जा सकता है. इस तरह का पौष्टिक नाश्ता शरीर को स्वस्थ और तरोताजा रखता है.

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कुछ लोग नाश्ता करना आवश्यक नहीं समझते जोकि सरासर गलत है. चूंकि हम रातभर लंबे समय तक बिना कुछ खाए रहते हैं इसलिए अगले दिन शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए सुबह का नाश्ता अनिवार्य है. यदि हम अधिक शारीरिक परिश्रम करते हैं और भूख लगती है तो  दोपहर के भोजन से 2 घंटे पहले और शाम को जूस या अन्य हलका भोजन भी ले सकते हैं.

दोपहर का भोजन :  दोपहर का भोजन आवश्यकतानुसार भरपेट खाएं. इस समय हमारा भोजन कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण विटामिनयुक्त संतुलित भोजन होना चाहिए.

रात्रि भोजन :  रात्रि का भोजन सोने से 2-3 घंटे पहले अवश्य कर लेना चाहिए. भोजन करने के तुरंत बाद सोने से भोजन ठीक से पचता नहीं है. रात्रि का भोजन संतुलित होने के साथसाथ दोपहर के भोजन से हलका और सुपाच्य होना चाहिए, क्योंकि इस समय हमारे शरीर को केवल आराम ही करना होता है.

संतुलित भोजन के स्रोत

कार्बोहाइड्रेट्स : यह शरीर को शक्ति देता है. शारीरिक परिश्रम करने वालों को इस की अधिक आवश्यकता होती है. यह हमें स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों जैसे चावल, आटा, मैदा, आलू विभिन्न प्रकार के अनाजों, दालों आदि से प्राप्त होता है. यह मीठे फलों खजूर, गन्ना, शलजम, चुकंदर, मेवा, चीनी, गुड़, शक्कर, शहद इत्यादि से प्राप्त होता है. इस की कमी से शरीर में निर्बलता आती है और भोजन भी ठीक से पचता नहीं है.

प्रोटीन : शारीरिक शक्ति प्रदान करने, कोशिकाओं की टूटफूट में सुधार करने, नई कोशिकाएं बनाने, मानसिक शक्ति बढ़ाने, रोग निवारणशक्ति उत्पन्न करने और शारीरिक वृद्धि के लिए भोजन में प्रोटीन का सेवन बहुत आवश्यक है. प्रोटीन में नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक होती है जो शारीरिक वृद्धि के लिए बहुत जरूरी है. नाइट्रोजन प्रतिदिन मूत्र के साथ काफी मात्रा में हमारे शरीर से बाहर निकलता रहता है. इसलिए इस कमी को पूरा करने के लिए हमें प्रतिदिन प्रोटीन का सेवन अवश्य करना चाहिए.

यह हमें 2 प्रकार से प्राप्त होता है :

  1. वनस्पति प्रोटीन, 2. पशु प्रोटीन.

वनस्पति प्रोटीन हमें मटर, मूंग, अरहर, चना, अंकुरित अनाजों और हरी सब्जियों से प्राप्त होता है जबकि पशु प्रोटीन हमें दूध, मक्खन, पनीर, मांस, अंडे, मछली आदि से प्राप्त होता है जो उच्चकोटि का प्रोटीन माना जाता है.

इस की कमी से शारीरिक विकास रुक जाता है, त्वचा पर झाइयां पड़ जाती हैं, बाल झड़ जाते हैं, लिवर बढ़ जाता है. और बच्चों को सूखा रोग हो जाता है. इस की अधिकता से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता.

वसा : भोजन में पोषक तत्त्वों में वसा का महत्त्वपूर्ण स्थान है. इस के प्रयोग से शरीर में गरमी और शक्ति उत्पन्न होती है. यह शरीर के ऊतकों की क्षय हुई चरबी को पूरा करती है, त्वचा में चमक बनी रहती है और कार्बोहाइड्रेट्स को पचाने में सहायता मिलती है.

यह हमें 2 प्रकार से प्राप्त होती है :

  1. वनस्पति वसा, 2. प्राणीजन्य वसा.

वनस्पति वसा हमें विभिन्न प्रकार के   खाद्य तेलों, बादाम, अखरोट, सोयाबीन, नारियल, काजू, पिस्ता, मूंगफली इत्यादि से प्राप्त होती है जबकि प्राणीजन्य वसा हमें घी, दूध, मक्खन, क्रीम, मछली के तेल आदि से प्राप्त होती है.

इस की कमी से त्वचा शुष्क हो जाती है और अधिकता से शरीर मोटा होने लगता है, पाचनक्रिया ठीक नहीं रहती, शरीर में बहुत अधिक मात्रा में वसा के एकत्रित होने से पित्ताशय में पथरी का डर रहता है.

खनिज लवण : हमारे शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, मैगनीशियम, फास्फोरस, लोहा, आयोडीन, क्लोरीन, सिलोकौन, सल्फर आदि अनेक क्षारीय पदार्थ पाए जाते हैं जो शरीर को रोग और निर्बलता से बचाते हैं. ये हमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों, हरी पत्तेदार

सब्जियों में पालक, चौलाई, सरसों का साग, मूली के पत्ते आदि से प्राप्त होता है. दूध से हमें कैल्शियम और फास्फोरस नामक खनिज लवण मिलते हैं.

कैल्शियम तथा फास्फोरस हड्डियों और दांतों का निर्माण व उन्हें मजबूत बनाते हैं. सोडियम, पोटैशियम, क्लोरीन और फास्फोरस घुलनशील लवण हैं जो शरीर को तरल द्रव पहुंचाते हैं.

इन की कमी से स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. कैल्शियम की कमी से दांत और हड्डियां कमजोर होती हैं. बच्चों की वृद्धि रुक जाती है. लोहे की कमी से शरीर पीला पड़ जाता है जबकि आयोडीन की कमी से गलगंड नामक रोग हो जाता है. फास्फोरस की कमी से हड्डियों में विकार आ जाता है और मांसपेशियां दिखाई देने लगती हैं. पोटैशियम की कमी से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और घबराहट होने लगती है.

विटामिन :  फल, दूध, कच्चे अंडे और हरी सब्जियों में अधिकता से पाए जाते हैं. ये ताप सहन नहीं कर सकते, इसलिए खाद्य पदार्थों को उबालने, तलने, गलने और सूखने से विटामिन नष्ट हो जाते हैं. विटामिन कई प्रकार के होते हैं :

विटामिन ‘ए’ :  यह ताजा घी, मांसाहारी पदार्थों, बंदगोभी, गाजर, मेथी के साग आदि में पाया जाता है. इस की कमी से रात को कम दिखाई देता है, लिवर में पथरी बनने लगती है, शरीर दुर्बल हो जाता है, दांतों में पायरिया नामक रोग हो जाता है.

विटामिन ‘बी’ :  यह ताजे फलों, सब्जियों, दूध, अनाज के ऊपरी छिलकों में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. इस की कमी से बेरीबेरी नामक रोग होता है जबकि विटामिन ’बी 12‘ की कमी से एनीमिया हो जाता है.

विटामिन ‘सी’ :  यह आंवला, नीबू, संतरे, मौसमी, टमाटर, अंकुरित अनाज आदि में पाया जाता है. इस की कमी से स्कर्बी नामक रोग होता है.

विटामिन ‘डी’ :   यह सूर्य के प्रकाश से मानव शरीर में बनता है. इस के अतिरिक्त यह दूध, अंडे, मक्खन, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियों, मछली के तेल आदि में भी मिलता है. इस की कमी से रिकेट्स नामक रोग होता है जिस में हड्डियां विकृत और कमजोर हो जाती हैं.

स्वप्न नगरी के जहरीले सपने

9 मई, 2018, दिन बुधवार. उस दिन मुंबई की सेशन कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.जी. शेट्टी की अदालत में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी थी. वजह यह थी कि न्यायाधीश शेट्टी उस दिन अभिनेत्री मीनाक्षी थापा के अपहरण और हत्या के आरोपियों को दोषी, निर्दोष या संदेह का लाभ देने का फैसला सुनाने वाले थे.

अदालत सबूतों को देखने परखने के साथसाथ केस के 36 गवाहों की गवाही सुन चुकी थी. दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से बहस भी पूरी हो चुकी थी. इस केस में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता थे विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम, जो अपनी धारदार दलीलों के लिए महाराष्ट्र ही नहीं, देश भर में मशहूर हैं. उज्जवल निकम की दलीलों ने ही मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले के आरोपी पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को फांसी के तख्ते तक पहुंचाया था.

न्यायाधीश एस.जी. शेट्टी 10 बजे ही अदालत में पहुंच गए थे. दोनों पक्षों के अधिवक्ता, दोनों आरोपी, मीनाक्षी थापा के परिवार वाले, कुछ मुख्य गवाहों और दर्शकों की अच्छीभली भीड़ अदालत में मौजूद थी. सुनवाई शुरू हुई तो बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कुछ दलीलें अदालत के सामने रखीं. फिर नंबर आया विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम का.

उन्होंने अपनी अंतिम दलीलों से पहले मीनाक्षी थापा के दोस्त आलोक थापा को पुन: अदालत के सामने खड़ा किया. आलोक थापा ने पहले हुई गवाही की तरह अदालत को बताया, ‘‘12 मार्च, 2012 को मीनाक्षी ने मुझ से कहा था कि वह प्रीति एल्विन और अमित जायसवाल के साथ एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में गोरखपुर जा रही है. इतना ही नहीं, मीनाक्षी ने 12 मार्च, 2012 को लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पर मुझे प्रीति एल्विन और अमित जायसवाल से मिलवाया भी था.’’

आरोपी प्रीति एल्विन के पिता नवीन सुरीन ने अदालत को बताया, ‘‘मैं अदालत को पहले भी बता चुका हूं और अब फिर बता रहा हूं कि 14 मार्च, 2012 को प्रीति और अमित इलाहाबाद स्थित हमारे घर आए थे.’’

मीनाक्षी थापा की मां कमला थापा ने अपनी गवाही में बताया, ‘‘14 मार्च, 2012 को मीनाक्षी ने मुझे फोन कर के बताया था कि वह इलाहाबाद पहुंच चुकी है और प्रीति के घर जा रही है, रात का खाना वह उसी के घर खाएगी. इस के अगले दिन मीनाक्षी की भाभी ने मैसेज कर के मुझे बताया कि मीनाक्षी को ले कर घर के सब लोग चिंतित हैं और उस के लापता होने की शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं.’’

कमला थापा ने अपने बयान में आगे बताया, ‘‘इस के बाद अपहरणकर्ताओं की ओर से मैसेज आया कि मीनाक्षी को जिंदा देखना है तो उस के खाते में 15 लाख रुपए जमा कर दो. मैसेज पढ़ कर हम लोग घबरा गए और मुंबई के थाना अंबोली में एफआईआर दर्ज करा दी. बाद में दोनों आरोपियों को 14 अप्रैल, 2012 को गिरफ्तार कर लिया गया.’’

महत्त्वपूर्ण गवाहियां दोबारा हो जाने के बाद विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने अपनी दलील देते हुए अदालत से कहा, ‘‘सर, इन गवाहियों और पेश किए गए सबूतों के बाद, साफ हो जाता है कि मीनाक्षी थापा के अपहरण और हत्या के गुनहगार प्रीति एल्विन और अमित जायसवाल ही हैं.

‘‘मैं अदालत से दरख्वास्त करूंगा कि दोनों आरोपियों को दोषी करार दे कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, क्योंकि ऐसा नहीं हुआ तो इस तरह के अपराधी बचते रहेंगे और मीनाक्षी थापा, जो मुंबई में अपना कैरियर बनाने आई थी, जैसी लड़कियां छलावे में आ कर मारी जाती रहेंगी.’’

सुनवाई पूरी हो चुकी थी. न्यायाधीश एस.जी. शेट्टी ने एकएक पौइंट पर ध्यान देते हुए प्रीति एल्विन और अमित जायसवाल पर एक नजर डाली और अपना फैसला सुना दिया, ‘‘तमाम सबूतों को देखनेपरखने और गवाहों की बात सुनने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि मीनाक्षी थापा के अपहरण और हत्या के दोषी प्रीति एल्विन और अमित जायसवाल ही हैं. यह अदालत दोनों को दोषी करार देती है और साथ ही घोषणा करती है कि दोनों दोषियों को 11 मई शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी.’’

अमित जायसवाल और प्रीति एल्विन की किस्मत का फैसला क्या हुआ, यह जानने से पहले आइए इस पूरे केस के बारे में जान लें.

मूलरूप से नेपाल की रहने वाली मीनाक्षी के पिता तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) देहरादून में पोस्टेड थे. वर्षों पहले वह देहरादून आ कर बस गए थे. उन की पत्नी कमला थापा भी फौरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में सरकारी नौकरी में थीं. परिवार में उन के 2 बेटे नवराज और विक्की के अलावा 2 बेटियां हेमू और मीनाक्षी थीं. हेमू की शादी अजय थापा से हो चुकी थी. नवराज मिलिट्री में था.

मीनाक्षी ने देहरादून के मशहूर दून स्कूल से शिक्षा ग्रहण की थी. इस के बाद उस ने फेंकसिन इंस्टीट्यूट से एविएशन में डिप्लोमा किया. मीनाक्षी खूबसूरत थी, इसलिए उस के मन में फिल्मों में काम करने की इच्छा जागृत हुई. इस के लिए उस ने विधिवत डांस सीखा और सेंट जोसेफ एकेडमी में डांस टीचर बन गई. लेकिन उस की मंजिल यह नहीं मुंबई थी.

मीनाक्षी को अभिनय का भी शौक था. इसलिए कुछ दिनों तक स्थानीय स्तर पर मौडलिंग करने के बाद वह फिल्मों में किस्मत आजमाने के लिए मुंबई चली गई. मुंबई में स्ट्रगल करने पर उसे फिल्म ‘बंगला नंबर 404 एरर नौट फाउंड’ में एक छोटा सा रोल मिला.

इस रोल का भले ही उसे मेहनताना ज्यादा नहीं मिला, लेकिन पहली बार फिल्म में काम मिलने पर वह बहुत खुश थी. उसे 1-2 फिल्मों में छोटीछोटी भूमिकाओं के अलावा कुछ विज्ञापन भी मिले. हालांकि मीनाक्षी को ग्लैमर की लाइन में आगे बढ़ने का सही मौका नहीं मिल पा रहा था, फिर भी वह अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए कोशिश कर रही थी.

मीनाक्षी मुंबई में रह जरूर रही थी, लेकिन वह लगभग रोजाना फोन पर अपनी मां कमला थापा से बात करती थी. कह सकते हैं कि वह फोन द्वारा बराबर मां के संपर्क में रहती थी. 12 मार्च, 2012 को मीनाक्षी ने मां को फोन कर के कहा कि वह 2-3 दिनों के लिए इलाहाबाद जा रही है.

मां के पूछने पर उस ने बताया कि उसे एक भोजपुरी फिल्म में काम मिलने की संभावना है, लेकिन इस के लिए उसे इलाहाबाद जा कर फिल्म निर्माता से बात करनी होगी. चूंकि मीनाक्षी को फिल्म लाइन में काम करना था और उस के बारे में वह खुद बेहतर जानती थी, इसलिए कमला थापा ने कुछ नहीं कहा. बाद में मीनाक्षी ने 14 मार्च, 2012 को मां को फोन कर के कहा कि वह इलाहाबाद पहुंच चुकी है और प्रीति के घर जा रही है.

अचानक लापता हुई मीनाक्षी

इस के बाद 2 दिनों तक कमला थापा के पास मीनाक्षी का कोई फोन नहीं आया तो उन्होंने उस का मोबाइल ट्राई किया. लेकिन उस का फोन बंद मिला. मीनाक्षी कभी भी अपना फोन बंद नहीं करती थी. यह पहला मौका था, जब कमला को बेटी का फोन बंद मिला. बेटी से बात न होने पर कमला थापा को चिंता हुई.

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उन्होंने कई बार मीनाक्षी का फोन ट्राई किया, लेकिन उस का फोन बंद ही मिला. तीसरे दिन कमला थापा का माथा तब घूम गया जब उन के मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज में लिखा था, ‘मीनाक्षी हमारे कब्जे में है, हम ने उस का अपहरण कर लिया है. अगर उसे जिंदा देखना चाहते हो तो उस के खाते में तुरंत 15 लाख रुपए जमा कर दो. अगर हमारी बात नहीं मानोगे तो हम उस की हत्या कर देंगे.’

उस एसएमएस को पढ़ कर कमला थापा को एक बारगी विश्वास नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. उन्होंने तुरंत बेटी के नंबर पर फोन मिला दिया. इस बार उस के फोन की घंटी बज रही थी. कमला थापा ने सोचा कि अब बात होने पर ही सच्चाई पता चलेगी. लेकिन काल रिसीव करने के बजाए किसी ने तुरंत फोन काट दिया. बात के बदले दूसरी ओर से फिर मैसेज आया, ‘‘जो भी बात करनी है, एसएमएस से करो.’’

इस से कमला थापा की चिंता बढ़नी स्वाभाविक ही थी. उन्हें कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने फोन कर के यह बात अपने बेटे नवराज को बताई. नवराज उस समय देहरादून में ही था. वह शाम तक घर आ गया. बहन के बारे में जान कर नवराज भी बहुत चिंतित हुआ.

उस ने भी मीनाक्षी के नंबर पर बात करने की कोशिश की, लेकिन दूसरी ओर फोन रिसीव नहीं किया जा रहा था. इस से परिवार के लोगों को लगा कि मीनाक्षी का सचमुच अपहरण हो चुका है और अपहर्त्ता फिरौती के लिए उसी का मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं.

मीनाक्षी के अपहरण ने उस के घर वालों के होश उड़ा दिए. उन की माली हालात ऐसी नहीं थी कि अपहर्त्ताओं की मांग को पूरा किया जा सकता. चूंकि मीनाक्षी उन लोगों के कब्जे में थी. इसलिए वह कोई रिस्क भी नहीं लेना चाहते थे. अपहर्त्ताओं की बात मानने के अलावा उन के पास कोई दूसरा चारा नहीं था. लेकिन सवाल उस रकम का था, जो वे मांग रहे थे.

नवराज ने अपने हालातों का हवाला दे कर एसएमएस भेज कर कहा कि वह थोड़ाथेड़ा कर के पैसा दे सकते हैं. एसएमएस के जरिए ही तय हुआ कि फिरौती की रकम किस्तों में दी जा सकती है. अपहर्त्ता इस के लिए तैयार हो गए तो नवराज ने पहली किस्त के रूप में मीनाक्षी के बैंक में 30 हजार रुपए जमा कर दिए.

मीनाक्षी के घर वालों के लिए इस बात का पता लगाना बहुत मुश्किल था कि मीनाक्षी कहां है. और उस के फोन से कहां से मैसेज आ रहे हैं.

कोई रास्ता न देख नवराज ने देहरादून के थाना बसंत विहार जा कर पुलिस को पूरी बात बताई. साथ ही आए हुए मैसेज भी पुलिस को दिखाए. लेकिन देहरादून पुलिस ने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह मामला मुंबई का है, इसलिए मुंबई पुलिस ही कुछ कर सकती है.

बहन की तलाश में नवराज पहुंचा मुंबई

नवराज किसी भी तरह बहन को बचाना चाहता था, सो वह उसी दिन मुंबई के लिए रवाना हो गया. मीनाक्षी मुंबई के अंधेरी स्थित अंबोली थानाक्षेत्र में रहती थी, इसलिए नवराज ने थाना अंबोली जा कर पुलिस को पूरी बात बताई.

फिरौती के एसएमएस पढ़ कर मुंबई पुलिस को यह मामला अपहरण का लगा. 18 मार्च को मुंबई पुलिस ने मीनाक्षी के अपहरण का मामला दर्ज तो कर लिया, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया.

उसी दिन पैसे के लिए जब अपहर्त्ताओं का एसएमएस फिर आया तो नवराज ने मीनाक्षी के खाते में 10 हजार रुपए और जमा किए. तीसरी किस्त के तौर पर उस ने 20 हजार रुपए फिर जमा करा दिए. इस सब के चलते अपहर्त्ता एसएमएस के जरिए इस बात पर अड़े थे कि मीनाक्षी को छोड़ने की एवज में उन्हें पूरे 15 लाख रुपए ही चाहिए.

अपहर्त्ताओं को जिद पर अड़ा देख कर नवराज ने एसएमएस कर के कहा, ‘‘जब तक मेरी बात मीनाक्षी से नहीं कराई जाएगी, तब तक मैं कोई पैसा नहीं दूंगा.’’ इस के बाद अपहर्त्ताओं की ओर से कोई जवाब नहीं आया. उन्होंने मीनाक्षी के मोबाइल का स्विच भी औफ कर दिया. जब बातचीत का रास्ता बंद हो गया तो नवराज को बहन के साथ किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी.

अंबोली पुलिस द्वारा कोई काररवाई न करने पर नवराज ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई. इस पर यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. इस बीच अपहर्त्ताओं से पूरी तरह संपर्क टूट चुका था. न उन का कोई एसएमएस आ रहा था और न ही फोन. मीनाक्षी ने जब आखिरी बार अपनी मां से बात की थी तो इलाहाबाद जाने की बात कही थी.

मोबाइल की काल डिटेल्स के सहारे क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच

क्राइम ब्रांच ने नवराज से पूछताछ के बाद इसी बात को ध्यान में रख कर अपनी जांच शुरू की. इस के लिए पुलिस ने सब से पहले मीनाक्षी के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से यह तो साफ हो गया कि वह इलाहाबाद गई थी, लेकिन किस के साथ गई थी, यह पता नहीं लग सका.

मीनाक्षी के फोन की काल डिटेल्स का अध्ययन करने पर पुलिस को उस में 2 नंबर ऐसे मिले, जिन पर मीनाक्षी की ज्यादा देर तक बातें होती थीं. पुलिस ने उन नंबरों का पता लगाया तो वे नंबर अमित जायसवाल और प्रीति एल्विन सुरीन के निकले.

छानबीन करने पर पता चला कि अमित और प्रीति इलाहाबाद के रहने वाले थे और फिल्मों में काम करने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे. उन का इलाहाबाद का पता भी मिल गया.

अमित और प्रीति के बारे में जानकारी मिलते ही मुंबई क्राइम ब्रांच की एक टीम 29 मार्च को इलाहाबाद के लिए रवाना हो गई. अमित ममफोर्डगंज, निवासी सुरेंद्र जायसवाल का बेटा था. पता चला कि वह अपनी किस्मत आजमाने मुंबई गया था और मौडलिंग के साथसाथ फिल्मों में छोटीमोटी भूमिकाएं करता था.

प्रीति एल्विन उस की प्रेमिका थी, जिस के लिए उस ने अपना घर छोड़ दिया था. अमित न केवल विवाहित था, बल्कि 2 बच्चों का बाप भी था. उस की पत्नी का नाम भी प्रीति ही था. सुरेंद्र जायसवाल ने पुलिस को बताया कि अमित से उन का ज्यादा संपर्क नहीं है.

प्रीति एल्विन इलाहाबाद की ही दरभंगा कालोनी के दुर्गापूजा पार्क के सामने स्थित एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में रहा करती थी. उस के पिता नवीन मूलत: झारखंड के रहने वाले थे और एक स्कूल में मामूली सी नौकरी करते थे. वह पिछले 30 साल से सपरिवार इलाहाबाद की दरभंगा कालोनी स्थित एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में रह रहे थे.

प्रीति की मां कई साल पहले घर छोड़ कर चली गई थी. नवीन ने पुलिस को बताया   कि वह अपनी एकलौती बेटी प्रीति की हरकतों से परेशान थे. उस के सिर पर हीरोइन बनने का भूत सवार था और समझाने पर भी उस ने उन की बात नहीं मानी थी.

नवीन ने मुंबई क्राइम ब्रांच को बताया कि उन्हें बंगले के चौकीदार भोलाराम पांडे से पता चला था कि प्रीति 13 मार्च को अमित के साथ आई थी और एक रात वहां रुकी थी. उन दोनों के साथ खूबसूरत सी एक अन्य लड़की भी थी. वह लड़की कौन थी, इस बारे में न तो नवीन को पता था और न भोलाराम पांडे को.

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भोलाराम पांडे ने मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम को अमित और प्रीति के साथ आई लड़की का हुलिया बताया तो क्राइम ब्रांच अफसरों ने पक्का यकीन हो गया कि वह लड़की मीनाक्षी ही रही होगी. पुलिस ने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उन लोगों ने मीनाक्षी की हत्या कर के उस की लाश इधरउधर फेंक दी हो.

इसी आशंका की वजह से मुंबई क्राइम ब्रांच ने जिला पुलिस से अज्ञात शवों के बारे में जानकारी हासिल की. लेकिन इस तरह के किसी शव की जानकारी नहीं मिली. निराश हो कर मुंबई पुलिस वापस लौट गई.

मुंबई क्राइम ब्रांच की पहली सफलता

मुंबई पुलिस को अमित जायसवाल और प्रीति एल्विन पर ही शक था. उन दोनों के फोन भी बंद थे. कोई और रास्ता न देख क्राइम ब्रांच ने उन दोनों के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. पता चला कि 14 मार्च को उन दोनों की लोकेशन भी इलाहाबाद थी.

14 मार्च को अमित, प्रीति और मीनाक्षी के फोन की लोकेशन इलाहाबाद में ही थी. इस का मतलब अमित और प्रीति से बात कर के ही मीनाक्षी के बारे में जाना जा सकता था. इसलिए क्राइम ब्रांच अमित और प्रीति तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी.

इस के लिए अमित के मोबाइल की काल डिटेल्स में ऐसे नंबरों को जांचा गया, जिन पर वह ज्यादा फोन किया करता था. उन नंबरों में ज्यादातर उस के दोस्तों के थे. उन नंबरों पर संपर्क किया गया तो पुलिस को अमित का नया नंबर मिल गया. उस के साथ ही प्रीति का नंबर भी मिल गया.

दोनों के फोन नंबर मिल जाने के बाद पुलिस ने दोनों की लोकेशन सर्च की तो पता चला कि दोनों मुंबई में ही हैं. इस के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने 15 अप्रैल, 2012 को जाल बिछा कर दोनों को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए अंबोली पुलिस के हवाले कर दिया.

पुलिस ने उन से मीनाक्षी के बारे में पूछताछ की. शुरू में दोनों कहते रहे कि उन्हें मीनाक्षी के बारे में कोई पता नहीं है, लेकिन जब उन के साथ सख्ती बरती गई तो वे टूट गए. उन्होंने जो कुछ बताया, उसे सुन कर सब के रोंगटे खड़े हो गए. पता चला कि अमित और प्रीति ने मीनाक्षी को इलाहाबाद ले जा कर उस की हत्या कर दी थी और सिर व धड़ अलगअलग जगहों पर फेंक दिए थे.

पुलिस ने अमित और प्रीति के खिलाफ अपहरण व हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस मामले की जांच इंसपेक्टर सुजीत कुमार गोविस्कर को सौंपी गई. पुलिस पूछताछ में मीनाक्षी की हत्या की जो कहानी पता चली, वह चौंकाने वाली तो थी ही, उन युवाओं के लिए नसीहत भरी भी थी, जो बिना आगापीछा सोचे सपनों के पीछे भागते हैं.

मीनाक्षी के सपनों की उड़ान

देहरादून के एक मध्यमवर्गीय परिवार की मीनाक्षी थापा खूबसूरत और हुनरमंद लड़की थी. जवानी की दहलीज पर आतेआते उस की खूबसूरती ने उस के सपनों को पंख लगा दिए थे. जब वह इंटरमीडिएट में थी, तभी उस ने सोच लिया था कि वह फिल्मों में हीरोइन बनेगी.

इसी बात को ध्यान में रख कर उस ने स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू कर दिया था. इस के साथसाथ वह मौडलिंग भी करती थी.

चूंकि देहरादून में बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं, इसलिए उस ने मायानगरी मुंबई जाने का फैसला कर लिया. लेकिन बिना परिवार वालों की मरजी के वह मुंबई नहीं जा सकती थी. इस बारे में उस ने मां से बात की तो उन्होंने दो टूक मना कर दिया.

भैयाभाभी ने भी साफ कह दिया कि वह कहीं नहीं जाएगी. लेकिन मीनाक्षी फिल्म लाइन में जाने का फैसला कर चुकी थी, इसलिए उस ने घर वालों को समझाने की कोशिश की. जब उस की यह कोशिश कमयाब नहीं हुई तो उस ने जिद पकड़ ली.

अंतत: घर वालों को उस की जिद के सामने झुकना पड़ा. 2 साल पहले मीनाक्षी अपने एक परिचित के माध्यम से मुंबई चली गई. मायानगरी मुंबई में हजारों लोग फिल्मों में किस्मत आजमाने आते हैं. इन में से चंद खुशकिस्मत वालों की बात छोड़ दें तो ज्यादातर के सपने टूटते ही हैं.

लाखों की भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाना जंग जीतने से कम नहीं है. मीनाक्षी ने भी मुंबई में अपने पैर जमाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी. देखतेदेखते 2 वर्ष गुजर गए. इन 2 सालों में उसे निम्न स्तर की एकाध फिल्म, मौडलिंग और कुछ विज्ञापनों में ही काम करने का मौका मिल पाया.

मीनाक्षी संघर्ष करना चाहती थी. उस ने आगे बढ़ने के लिए अपने सपने को मरने नहीं दिया था. उसे बी ग्रेड की फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट के छोटेमोटे रोल मिलने लगे थे. इस से वह इतना कमाने लगी थी कि अपनी जिंदगी आराम से चला सके. मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में बने रहने के लिए स्टेटस की जरूरत होती है.

अपना स्टेटस बनाए रखने के लिए मीनाक्षी ब्रांडेड कपड़े पहनती थी. उस के लाइफस्टाइल में वह सब झलकता था, जो ऊंचे घराने की लड़कियों में होता है. इस सब के बीच वह अपने घर वालों से बराबर संपर्क बनाए रखती थी. सन 2010 में उसे हिंदी फिल्म ‘404: एरर नौट फाउंड’ में काम करने का मौका मिला.

अमित और प्रीति भी उसी की तरह फिल्मी दुनिया में संघर्ष करने मायानगरी आए थे. अमित व प्रीति की मीनाक्षी से मुलाकात मधुर भंडारकर की फिल्म ‘हीरोइन’ के सेट पर हुई थी, जिस की मुख्य भूमिका में करीना कपूर थीं. मीनाक्षी को इस फिल्म में छोटा सा रोल मिला था. फिल्म हीरोइन में अमित और प्रीति की भी छोटीछोटी भूमिकाएं थीं. अमित ने मीनाक्षी से खुद को भोजपुरी फिल्मों का फिल्म प्रोड्यूसर बताया और प्रीति को मौडल.

मीनाक्षी भी इस मामले में कहां पीछे रहने वाली थी, उस ने भी खुद को नेपाल राजघराने से संबंधित बता दिया. फलस्वरूप जल्दी ही तीनों की दोस्ती हो गई.

मुंबई आने के पीछे अमित व प्रीति की अपनी अलग कहानी थी. अमित इलाहाबाद के ममफोर्डगंज निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र जायसवाल का बेटा था. सुरेंद्र चाहते थे कि अमित भी उन्हीं की तरह नामी वकील बने, इसीलिए उन्होंने उसे एलएलबी कराई थी.

पिता की बात मान कर अमित ने वकालत की पढ़ाई तो कर ली, लेकिन उस की ख्वाहिश थी कि वह फिल्मों में काम करे.

अमित के घर वालों ने 7 साल पहले उस का विवाह प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले ओमप्रकाश जायसवाल की बेटी प्रीति जायसवाल के साथ कर दिया था. वह 1 बेटे और 1 बेटी का पिता भी बन गया था.

इस के बावजूद अमित की फिल्मों में काम करने की हसरत मरी नहीं थी. इसी चाह में वह हीरो की तरह बनठन कर रहता था और शरीर को फिट रखने के लिए रोजाना व्यायाम भी करता था. उस ने छिटपुट मौडलिंग भी की थी और अपना प्रोफाइल भी बनवा रखा था.

अमित की असलियत और चाहत

पूर्वी उत्तर प्रदेश में यदाकदा भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग होती रहती थी. अमित को अगर किसी भोजपुरी फिल्म की शूटिंग की जानकारी मिलती तो वह वहां पहुंच जाता और डायरेक्टरों को अपना हुनर दिखाने की कोशिश करता. लेकिन इस से बात नहीं बन पाती थी. फिर भी उस ने अपनी कोशिश जारी रखी. इसी बीच वह भोजपुरी फिल्मों में काम करने वाले कुछ लोगों के संपर्क में आया तो उन की बदौलत उसे जूनियर आर्टिस्ट के रोल मिलने लगे.

ये छोटीछोटी भूमिकाएं न तो गुजारे लायक थीं और न ही उस की इच्छाओं के अनुरूप. वैसे तो अमित संपन्न परिवार से था. उस का परिवार फाफामऊ, इलाहाबाद के अपने मकान में रहता था. उन का ममफोर्डगंज वाला मकान खाली था. अपनी जीविका चलाने के लिए अमित ने उस मकान में डांस स्कूल खोल लिया था.

जब इस में भी उस का मन नहीं लगा तो उस ने उसी मकान में तिरुपति एकेडमी के नाम से कोचिंग सेंटर शुरू कर दिया. छात्रछात्राओं को वह खुद तो पढ़ाता ही था, साथ ही उस ने कुछ अन्य शिक्षकों को भी अपने यहां नौकरी पर रख लिया था.

अमित की एकेडमी में प्रीति एल्विन सुरीन भी पढ़ने के लिए आती थी. प्रीति गरीब परिवार की लड़की थी. जवानी की दहलीज तक पहुंचतेपहुंचते उसे गरीबी से नफरत होने लगी थी. वह महत्त्वाकांक्षी थी. उस ने मन ही मन ठान लिया था कि चाहे कुछ भी करना पड़े. वह अपनी तकदीर खुद लिखेगी. परिवार की हालत खस्ता होते हुए भी पिता नवीन सुरीन उसे पढ़ा रहे थे.

चूंकि प्रीति खूबसूरत थी, इसलिए उस ने मौडलिंग करने का फैसला कर लिया. यह बात अलग है कि इस काम में वह ज्यादा सफल नहीं हो पाई. प्रीति की इच्छा मुंबई जाने की थी. इस के लिए वह अपनी अंगरेजी में सुधार करना चाहती थी. अंगरेजी सीखने के लिए उस ने तिरुपति एकेडमी में दाखिला ले लिया था.

बाद में प्रीति को पता चला कि तिरुपति एकेडमी का मालिक अमित अच्छा डांसर है और भोजपुरी फिल्मों में भी काम करता है. प्रीति को लगा कि अमित के सहयोग से वह भी आगे बढ़ सकती है. इसलिए उस ने जल्दी ही अमित से नजदीकी बढ़ा ली.

अमित व प्रीति फिल्मों व मौडलिंग को ले कर अकसर बातें किया करते थे. बातोंमुलाकातों के इसी दौर में दोनों के दिलों में चाहत ने जन्म ले लिया. बातोंबातों में एक दिन अमित ने प्रीति के सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया.

बन गई अमित और प्रीति एल्विन की जोड़ी

प्रीति को अमित की बात पर कोई हैरत नहीं हुई, बल्कि उस के दिल की कलियां खिल उठीं. उस ने भी मुसकरा कर जाहिर कर दिया कि वह भी उसे प्यार करती है. प्रीति जानती थी कि अमित शादीशुदा है, लेकिन हीरोइन बनने के सपने ने उस की आंखों पर पट्टी बांध दी थी.

आगे बढ़ने के लिए अमित बहुत बड़ा सहारा बन सकता था, इसलिए प्रीति ने उस के शादीशुदा होने की बात को नजरअंदाज कर दिया. अमित जो कमाता था, उस का ज्यादातर हिस्सा अपनी प्रेमिका प्रीति एल्विन सुरीन पर खर्च करने लगा. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब आते गए.

दोनों प्यार के नाम पर एक नैया पर सवार तो हो गए थे, लेकिन जब उन की नैया जन सागर में उतरी तो उस पर लोगों की नजर पड़ गई. कानोंकान हो कर यह बात अमित की पत्नी तक भी पहुंची. पति की करतूत सुनते ही वह आगबबूला हो उठी. उस ने अमित को लताड़ा तो उस ने सफाई दी कि चूंकि प्रीति और वह एक ही पेशे में हैं, इसलिए दोनों में केवल दोस्ती है और कुछ नहीं.

लेकिन प्रीति जायसवाल के मन में संदेह घर कर चुका था. इसलिए परिवार में कलह रहने लगी. सुरेंद्र जायसवाल को भी बेटे की करतूत का पता चल गया था. उन्होंने भी उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन अमित ने अपनी सफाई दे कर बात खत्म कर दी.

प्रीति एल्विन के पिता को भी अमित और अपनी बेटी के चक्कर की बात पता चल चुकी थी. बेटी के बहकते कदमों से उन्हें चिंता हुई. उन्होंने उसे जमाने की ऊंचनीच समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ, पिता के बारबार समझाने पर भी वह अमित का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हुई.

अमित और प्रीति की एक जैसी सोच थी. दोनों ने मिल कर तय किया कि वे उस शहर को ही छोड़ देंगे. जहां के लोग उन के प्यार, उन के सपनों की कीमत नहीं समझते. उन के सपनों का शहर मुंबई था.

सपनों की उस दुनिया में अपने हिस्से की जमीन तलाशने के लिए अगस्त, 2011 में दोनों इलाहाबाद छोड़ कर मुंबई चले गए और लिव इन रिलेशन में रहने लगे. काफी भागदौड़ के बाद दोनों को कुछ फिल्मों में छोटेमोटे रोल भी मिले, जिस के सहारे गुजरबसर होने लगी.

उधर अमित की पत्नी प्रीति जायसवाल को जब यह पता चला कि उस का पति प्रीति सुरीन के साथ मुंबई में रह रहा है तो उसे बहुत दुख हुआ. अमित अपने घर फोन करता रहता था. उस के पिता फोन पर उसे समझाते, लेकिन वह उन की बात एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देता था. जब सुरेंद्र जायसवाल ने समझ लिया कि अमित नहीं आएगा तो उन्होंने ममफोर्डगंज वाला मकान किराए पर उठा दिया.

सितंबर, 2011 में अमित को जब पता चला कि उस के पिता बीमार हैं और अस्पताल में एडमिट हैं तो वह उन्हें देखने के लिए इलाहाबाद आया और 2 दिनों बाद मुंबई लौट गया. नवंबर के महीने में वह फिर घर लौटा तो पिता ने उस से पूछा, ‘‘तुम मुंबई में क्या करते हो?’’

‘‘पापा, मैं एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करता हूं और मुझे 16 हजार रुपए सैलरी मिलती है.’’ अमित ने बताया.

‘‘मुंबई जैसे शहर में इतने पैसों में क्या होता होगा. तुम घर चले आओ. ममफोर्डगंज वाले मकान के किराए के जो 25 हजार रुपए मिलते हैं, उन पैसों को तुम ही लेते रहना. कम से कम तुम हमारी आंखों के सामने तो रहोगे.’’ सुरेंद्र ने अमित को समझाने की कोशिश की. लेकिन अमित पर पिता के समझाने का कोई असर नहीं हुआ और वह मुंबई लौट गया.

प्रीति के लिए तो पिता के मायने ही खत्म हो गए थे. मुंबई जा कर वह पूरी तरह आजाद खयाल हो चुकी थी. इसी दौरान अमित और प्रीति को मधुर भंडारकर की करिश्मा कपूर स्टारर मूवी ‘हीरोइन’ में काम मिल गया था, जहां मीनाक्षी भी काम कर रही थी.

मीनाक्षी से मुलाकात के बाद तीनों अच्छे दोस्त बन गए. तीनों का सपना एक था और सोच भी लगभग एक जैसी थी. इसलिए तीनों अकसर साथ घूमतेफिरते, खातेपीते. कुछ दिनों तक सब ठीक चला. फिर अचानक प्रीति को लगने लगा कि मीनाक्षी उस के मुकाबले सुंदरता में भी अव्वल है और काम में भी. इसलिए उसे मन ही मन उस से जलन सी होने लगी.

अमित अच्छा डांसर था, मीनाक्षी उस से डांस सीखती थी. उन दोनों को डांस करते देख प्रीति मन ही मन कुढ़ कर रह जाती थी. उन  दोनों का हंसनाबोलना भी उसे बिलकुल पसंद नहीं था. दोनों की नजदीकियों की वजह से कई बार मीनाक्षी से उस की तकरार भी हो जाती थी. एक तो वे दोनों आर्थिक तंगियों से जूझ रहे थे, ऊपर से अमित और मीनाक्षी की नजदीकी प्रीति को कांटे की तरह चुभती थी.

बंधने लगी भविष्य की खतरनाक भूमिका

प्रीति जानती थी कि मीनाक्षी खूबसूरती और अपने टैलेंट से कोई अच्छा मुकाम हासिल कर लेगी. ऐसे में अमित उस के प्यार में पड़ कर आगे बढ़ने के चक्कर में उसे छोड़ देगा. यही सोच कर उस ने मन ही मन एक खतरनाक योजना तैयार कर ली. वह अपनी इस योजना में किसी तरह अमित को भी शामिल करना चाहती थी.

अमित और प्रीति ने एकदूसरे का साथ पाने और कैरियर बनाने के लिए ही घर छोड़ा था. दोनों भले ही पैसे के लिए परेशान थे, लेकिन जब भी मीनाक्षी को देखते थे तो उस के रहनसहन, खानपान व पहनावे को देख कर जरूर चौंकते थे. उस का लाइफ स्टाइल बिलकुल मुंबईया और पैसे वालों जैसा था. मीनाक्षी ने उन्हें बता रखा था कि उस का परिवार भले ही देहरादून में रहता है, वह नेपाल के राजघराने से ताल्लुक रखती है.

साथ ही उस ने यह भी बताया था कि अनबन की वजह से उस के पिता उन के साथ नहीं रहते. एक बार बातोंबातों में इलाहाबाद का जिक्र आया तो मीनाक्षी ने कहा, ‘‘सुना है, इलाहाबाद बड़ा अच्छा शहर है. 3 नदियों का संगम होता है वहां. मेरा मन है, इलाहाबाद जा कर संगम देखूं.’’

मीनाक्षी के मुंह से अपने शहर की तारीफ सुन कर अमित को अच्छा लगा. उस ने बिना सोचेसमझे कह दिया, ‘‘जब चाहो चलो, मैं तुम्हें पूरा शहर घुमाऊंगा.’’

दरअसल, अमित मीनाक्षी के साथ मौजमस्ती करना चाहता था, जो प्रीति के रहते संभव नहीं था. इसलिए उस ने बिना सोचेसमझे उसे इलाहाबाद ले जाने की बात कह दी थी. लेकिन बाद में जब उस ने इस मुद्दे पर सोचा तो उसे लगा कि बिना प्रीति की सहमति के वह मीनाक्षी को इलाहाबाद नहीं ले जा सकता. सोचविचार कर एक दिन अमित ने प्रीति से कहा, ‘‘मैं सोच रहा हूं कि 1-2 दिन के लिए इलाहाबाद हो आऊं. पैसे की परेशानी है, घर से पैसे भी ले जाऊंगा.’’

पैसे की वाकई परेशानी थी. दोनों साथसाथ जाते तो आनेजाने में ज्यादा खर्च होता. इसलिए प्रीति ने उसे अकेले जाने की स्वीकृति दे दी, लेकिन जब अमित ने उसे बताया कि मीनाक्षी भी इलाहाबाद घूमने जाना चाहती है, तो उस के कान खड़े हो गए. वह जानती थी कि जब उस ने अमित को उस की पत्नी से छीन लिया है तो मीनाक्षी भी अमित को उस से छीन सकती है. मनचले आदमी का क्या भरोसा?

अगर वह उस के हाथ से निकल गया तो वह न घर की रहेगी न घाट की. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए उस ने अमित से दो टूक कह दिया, ‘‘हम दोनों ने एकदूसरे का हाथ थाम कर घर छोड़ा था. अब हम साथ जिएंगे साथ मरेंगे. मैं तुम्हें मीनाक्षी के साथ जाने की छूट नहीं दे सकती. अगर तुम उसे साथ ले कर जाओगे तो मैं भी साथ चलूंगी.’’

अमित ने प्रीति को समझाया, खर्चे का वास्ता दिया, लेकिन प्रीति अपनी बात पर अड़ गई. परेशानी यह थी कि अमित मीनाक्षी को इलाहाबाद ले जाने का वायदा कर चुका था. जब बात खर्चे की आई तो प्रीति अपनी योजना के पहले हिस्से को ध्यान में रख कर बोली, ‘‘मीनाक्षी को इलाहाबाद घुमाना है न, कोई बात नहीं. हम अपना खर्च उसी से वसूल करेंगे.’’

‘‘मतलब, मैं कुछ समझा नहीं?’’ अमित ने पूछा तो प्रीति बोली, ‘‘तुम इलाहाबाद चलने की योजना बनाओ. मीनाक्षी पैसे वाले घर की लड़की है. हम उस का अपहरण कर के मोटी रकम वसूलेंगे.’’

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अमित प्रीति की बात सुन कर चौंका तो वह उसे समझाते हुए बोली, ‘‘देखो अमित, हम यहां कैरियर बनाने के लिए आए हैं. भावनाओं में बहने नहीं. कैरियर बनाने के लिए पैसा चाहिए, जो हमारे पास है नहीं. प्रीति का अपहरण कर के हम मोटी रकम वसूल करेंगे और फिर आराम से मुंबई में रह कर कैरियर बनाएंगे.’’

प्रीति की बात सुन कर अमित का दिमाग घूम गया. उसे भी लगा कि प्रीति जो कह रही है, वह सही है. जबकि प्रीति का मकसद मीनाक्षी के घर वालों से पैसा वसूलना ही नहीं, बल्कि उसे अमित की जिंदगी से पूरी तरह दूर करना था. चूंकि अमित को पैसों की जरूरत थी, इसलिए वह प्रीति की बातों में आ गया.

मीनाक्षी के मन में बोया हीरोइन बनने का सपना

जब दोनों एक मत हो गए तो उन्होंने मिल कर एक ऐसी योजना बनाई, जो बहुत ही खतरनाक थी. मीनाक्षी उन दोनों को अपना दोस्त मानती थी और उन पर हर तरह से विश्वास करती थी. इसी का फायदा उठा कर वे दोनों उसे अपने जाल में फांसना चाहते थे.

उन की योजना थी कि मीनाक्षी को इलाहाबाद ले जा कर मार डालेंगे और फिर उस के घर वालों से मनचाहा पैसा वसूलेंगे. वे दोनों सोच भी नहीं सकते थे कि जिस मीनाक्षी को वे किसी अमीर खानदान की समझ रहे हैं, वह एक मामूली घर की लड़की है.

जब योजना तैयार हो गई तो एक दिन अमित ने मीनाक्षी से कहा, ‘‘मीनाक्षी इलाहाबाद में एक भोजपुरी फिल्म की शूटिंग चल रही है. मेरे पास फोन आया था, मुझे वहां काम के सिलसिले में बात करने जाना है. मेरी जानपहचान के लोग हैं. तुम चाहो, तो मैं डायरेक्टर से कहसुन कर तुम्हें काम दिलवा सकता हूं. बाद में वह तुम्हें हीरोइन का रोल दे देगा.’’

मुंबई में जमे रहने के लिए मीनाक्षी को काम की जरूरत थी. स्ट्रगलर छोटामोटा काम कर के ही आगे बढ़ते हैं, इसलिए वह इलाहाबाद जाने के लिए तैयार हो गई.

मीनाक्षी के हां करते ही अमित और प्रीति के चेहरों पर चमक आ गई. वे दोनों पहले ही सारी योजना बना चुके थे. योजनानुसार 13 मार्च को तीनों इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए.

अमित और प्रीति के सपनों को तब झटका लगना शुरू हुआ, जब सफर के दौरान मीनाक्षी ने उन्हें अपनी असलियत बताई. उस ने उन्हें बताया कि ग्लैमर की दुनिया में बने रहने के लिए कदमकदम पर झूठ बोलने पड़ते हैं. पेट भले ही खाली हो, पर दिखावे के लिए अच्छे कपड़े पहनने पड़ते हैं.

ऐसा न हो तो कोई पूछेगा ही नहीं. बातों के दौरान उस ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में भी बताया. यह सब मीनाक्षी ने इसलिए बताया था, जिस से अमित उस की मजबूरी को समझ कर उसे भोजपुरी फिल्म में काम दिला दे.

मीनाक्षी की हकीकत जानने के बाद अमित और प्रीति को वह सोने का अंडा देने वाली मुरगी की जगह बिना पंखों की चिडि़या दिखने लगी. उन्होंने सोचा था कि काम दिलाने के नाम पर भी मीनाक्षी के घर वालों से पैसा लेंगे, लेकिन यहां तो कहानी ही उलटी निकली. मीनाक्षी की सच्चाई जान कर उन दोनों को बहुत गुस्सा आया.

14 मार्च, 2012 की शाम तीनों इलाहाबाद पहुंच गए. रेलवे स्टेशन से वे दरभंगा कालोनी स्थित बंगले के उस सर्वेंट क्वार्टर में पहुंचे, जहां प्रीति के पिता रहते थे, लेकिन उस समय उस के पिता क्वार्टर में नहीं थे. क्वार्टर पर प्रीति का चचेरा भाई जौन सुरीन मिला.

कुछ देर रुक कर प्रीति ने जौन को गोरखपुर जाने के लिए चौरीचौरा ट्रेन के 2 साधारण टिकट लेने इलाहाबाद जंक्शन भेज दिया. उस ने जौन से कहा कि टिकिट ले कर वह जंक्शन के सामने ही मिले, वह वहीं पहुंच कर उस से टिकिट ले लेगी.

जौन के जाने के बाद जब अमित, प्रीति और मीनाक्षी अंदर बैठे थे तो प्रीति ने खिन्न हो कर कहा, ‘‘मीनाक्षी, तुम्हारी सारी बात तो हम ने सुन ली. अब मैं भी तुम्हें सच्चाई बता देना चाहती हूं. सच्चाई यह है कि तुम्हें भोजपुरी फिल्मों मे काम नहीं मिल पाएगा.’’

‘‘लेकिन क्यों?’’ मीनाक्षी ने चौंक कर पूछा तो प्रीति बोली, ‘‘क्योंकि इस के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, जो तुम्हारे पास नहीं हैं.’’

‘‘यह बात तो तुम मुझे मुंबई में भी बता सकते थे. मुझे पता होता, तो मैं यहां आती ही क्यों?’’

‘‘बताते कैसे, हम तो सोच रहे थे कि तुम रईस परिवार की हो. हमें क्या पता था कि तुम बिलकुल फटीचर हो.’’

‘‘तुम हद से आगे बढ़ रही हो प्रीति. रईस तो तुम भी नहीं हो, तुम्हारा फटीचरपन यहां साफ दिख रहा है. रही बात मेरी तो मैं चाहे जो भी हूं, मैं ने तुम लोगों पर इतने अहसान किए हैं, जिन्हें तुम लोग कभी नहीं उतार पाओगे. मीनाक्षी ने प्रीति को ही नहीं, अमित को भी खूब खरीखोटी सुनाई.

मौत आ खड़ी हुई मीनाक्षी के सिर पर

मीनाक्षी और प्रीति के बीच इतनी गरमागरमी हुई कि नौबत मारपीट तक पहुंच गई. किसी तरह अमित ने दोनों को समझाबुझा कर शांत किया. जब बात आई गई हो गई तो तीनों ने खाना खाया. खाना खा कर तीनों लेट गए. थोड़ी देर में मीनाक्षी तो सो गई, लेकिन अमित और प्रीति की आंखों से नींद कोसों दूर थी. वे दोनों उस के सोने का इंतजार कर रहे थे. जब उन्हें विश्वास हो गया कि मीनाक्षी सो गई है तो अमित ने उस के गले में दुपट्टे का फंदा कस दिया. सांसें रुकीं, तो मीनाक्षी की आंखें खुल गईं.

उस ने देखा कि अमित और प्रीति के रूप में उस की मौत सामने खड़ी है. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे दोनों इस तरह उस की जान के दुश्मन बन जाएंगे. गले पर दबाव और बढ़ा तो मीनाक्षी ने छटपटाते हुए हाथपैर चलाए. कहीं वह बेकाबू न हो जाए, यह सोच कर प्रीति ने उस के दोनों हाथ पकड़ लिए. अमित उस के गले पर तब तक दबाव बनाए रहा, जब तक उस की सांसों की डोर नहीं टूट गई.

प्रीति और अमित मीनाक्षी की हत्या कर चुके थे. अब उन्हें उस की लाश को ठिकाने लगाना था. इस मुद्दे पर बात हुई तो तय हुआ कि चाहे जो भी करना पड़े, मीनाक्षी की लाश की शिनाख्त नहीं होनी चाहिए. जिस बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में मीनाक्षी की हत्या की गई थी, उस के पीछे एक पतली नालीनुमा गली थी. वे दोनों मीनाक्षी की लाश को उठा कर वहां ले गए.

प्रीति रसोई से चापड़ उठा लाई थी. उसी गली में रख कर दोनों ने मीनाक्षी की गरदन काट कर अलग कर दी. उस वक्त प्रीति उस का सिर पकड़े हुए थी, ऐसा करते वक्त उस का दिल जरा भी नहीं कांपा. सिर काटने के बाद दोनों ने सीवर का ढक्कन खोल कर मीनाक्षी का धड़ उस में डाल दिया और उस का कटा सिर व चापड़ 2 अलगअलग पौलीथीन में रख लिए.

मीनाक्षी का पर्स, मोबाइल फोन व एटीएम कार्ड कमरे में ही रखा था. प्रीति और अमित को विश्वास था कि मीनाक्षी की लाश सीवर में गल जाएगी और उन तक कोई भी नहीं पहुंच पाएगा. उस के सिर को उन्होंने कहीं दूर जा कर ठिकाने लगाने का फैसला किया.

अमित और प्रीति दोनों थैला थामे इलाहाबाद जंक्शन पहुंचे. वहां प्रीति ने जौन से गोरखपुर जाने के रेलवे टिकट ले लिए. फिर जौन के वहां से जाने के बाद प्रीति ने गोरखपुर जाने का कार्यक्रम बदल कर रेलवे टिकिट वापस कर दिए और इलाहाबाद बसअड्डे की तरफ चल दिए.

बसअड्डे जा कर दोनों ने लखनऊ जाने वाली एसी बस पकड़ी. उन्होंने सोचा था कि रास्ते में कोई सुनसान जगह देख कर मीनाक्षी के सिर को फेंक देंगे लेकिन चाह कर भी वे ऐसा नहीं कर सके. क्योंकि एसी बस में शीशा खोलने की व्यवस्था नहीं थी. वह रात दोनों ने लखनऊ में ही बिताई. अगले दिन दोनों ने लखनऊ से बनारस जाने वाली बस पकड़ी. रास्ते में मीनाक्षी के सिर व चापड़ वाली पौलीथिन उन्होंने अलगअलग जगहों पर फेंक दीं, वह जगह इलाहाबाद से 108 किलोमीटर दूर थीं.

इस तरह मीनाक्षी की लाश को ठिकाने लगने के बाद अमित और प्रीति ने उस के ही मोबाइल से उस के घर वालों से फिरौती वसूलने के लिए मैसेज भेजने शुरू किए. मीनाक्षी के एकाउंट में पैसा डालने के लिए उन्होंने इसलिए कहा था, क्योंकि उन के पास उस का एटीएम कार्ड तो था ही, उस का पिन नंबर भी था. जब मीनाक्षी के भाई ने उस के एकाउंट में पैसे डाल दिए तो एटीएम से पैसे निकाल कर दोनों मुंबई के लिए रवाना हो गए.

मीनाक्षी का सिर या शव तो बरामद नहीं हुआ, यह जानने के लिए अमित और प्रीति 25 मार्च को फिर इलाहाबाद आए थे. इंटरनेट और समाचार पत्रों में भी दोनों इस मामले से जुड़ी खबरें देखते रहते थे.

जब मीनाक्षी का भाई उस से बात कराने के बाद ही फिरौती देने की जिद करने लगा तो अमित और प्रीति को लगा कि शायद अब बात आगे नहीं बढ़ पाएगी. इसलिए उन्होंने मीनाक्षी का मोबाइल तोड़ कर फेंक दिया. इसी के साथ दोनों ने अपने फोन नंबर भी बदल दिए.

अपराध से पीछा छुड़ाने की कोशिश

हैवानियत भरा कृत्य कर के अमित और प्रीति अपने पाप से पीछा छुड़ाने के लिए फिरौती के पैसों से वैष्णो देवी व शिरडीधाम भी घूमने गए थे. कई शहरों में घूमने के बाद वे लोग मुंबई लौटे और जगह बदल कर रहने लगे. उन दोनों को लग रहा था कि मीनाक्षी के घर वाले मुंबई आ कर ज्यादा पूछताछ नहीं करेंगे. लेकिन उन की सोच गलत निकली और वे पुलिस के शिकंजे में फंस गए.

पुलिस के लिए मीनाक्षी का शव और वह हथियार बरामद करना जरूरी था, जिस से कत्ल हुआ था. इस के लिए मुंबई पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को इलाहाबाद ले जाने के लिए एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम के इलाहाबाद रवाना होने से पहले इलाहाबाद पुलिस से बात कर ली गई थी.

इंसपेक्टर सुजीत कुमार के नेतृत्व वाली मुंबई पुलिस की टीम में 2 सबइंसपेक्टर, 3 कांस्टेबल और 2 महिला कांस्टेबल शामिल थीं. 17 अप्रैल की दोपहर यह पुलिस टीम अमित और प्रीति को ले कर गोदान एक्सप्रेस से इलाहाबाद पहुंच गई. इस पुलिस टीम ने सब से पहले इलाहाबाद के तत्कालीन एसएसपी नवीन अरोड़ा से मुलाकात की. एसएसपी ने स्थानीय पुलिस की एक टीम मुंबई पुलिस के साथ लगा दी.

18 अप्रैल को मुंबई व स्थानीय पुलिस दोनों अभियुक्तों को ले कर उन के बताए स्थान पर पहुंची और सीवर से मीनाक्षी का धड़ बरामद कर लिया. उस का शव सड़गल चुका था. काररवाई के बाद पुलिस ने मीनाक्षी के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. वीडियोग्राफी के बीच उसी दिन शव का पोस्टमार्टम कर दिया गया. पता चला मीनाक्षी की हत्या गला दबा कर की गई थी.

उस के दाएं पैर की हड्डी टूटी हुई थी. यह हड्डी संभवत: लाश सीवर में डालने के दौरान टूटी होगी. हालांकि शव की शिनाख्त मीनाक्षी के रूप में ही हुई थी, लेकिन सबूत पुख्ता करने के लिए डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया गया. इस के लिए उस के खून, बाल व हड्डी के नमूने ले कर डीएनए टेस्ट के लिए भेजे गए.

मीनाक्षी के शव को उस के भाई नवराज व जीजा अजय थापा के हवाले कर दिया गया. शव की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे देहरादून ले जाया जा सकता, इसलिए उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में इलाहाबाद के दारागंज घाट पर उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

पुलिस ने चापड़ रायबरेली के ऊंचाहार के पास झाडि़यों से बरामद कर लिया. मृतका का सिर बरामद करने के लिए पुलिस ने अमित और प्रीति को साथ ले कर गोरखपुर, लखनऊ व वाराणसी रोड के किनारे 2 दिनों तक तलाशी अभियान चलाया. लेकिन सिर बरामद नहीं हो सका. निराश हो कर पुलिस टीम मुंबई लौट गई.

बौलीवुड में सपने पूरे करने की चाह ले कर मुंबई आई मीनाक्षी की खूबसूरती और साथियों पर आंख मूंद कर किया गया विश्वास ही उस की जान का दुश्मन बन गया. महत्त्वाकांक्षा के चक्कर में उस की जान तो गई ही, साथ ही उस की तरह बौलीवुड के रुपहले परदे पर अपनी पहचान बनाने के सपने देखने वाले अमित और प्रीति भी कहीं के नहीं रहे.

मुंबई पुलिस ने विस्तृत पूछताछ के बाद दोनों आरापियों को अदालत पर पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. जांच के बाद पुलिस ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में दोनों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया, जहां लंबी सुनवाई के बाद यह मामला फैसले के लिए सत्र न्यायालय पहुंचा.

सत्र न्यायालय में इस की सुनवाई करीब 5 साल चली. अभियोजन पक्ष की ओर से फोरैंसिक रिपोर्ट, मृतका की डीएनए रिपोर्ट और हत्या में इस्तेमाल हथियार के साथसाथ तमाम सबूत पेश किए गए. इस केस में 36 गवाहों की गवाहियां भी हुईं. न्यायाधीश महोदय ने इस केस को रेयरेस्ट औफ रेयर नहीं माना.

लंबी सुनवाई के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस.जी. शेट्टी ने 9 मई, 2018 को अमित जायसवाल और प्रीति एल्विन सुरीन को अपहरण, हत्या और साजिश रचने का दोषी करार दिया. 11 मई, 2018 को न्यायाधीश जी.एस. शेट्टी ने अमित जायसवाल और प्रीति एल्विन सुरीन को आजन्म कारावास की सजा सुनाई. सजा सुनाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया.

लेडी डौन बनने की चाहत

प्रिया सेठ. यही नाम है उस भोलीभाली और खूबसूरत चेहरे वाली लड़का का. वह चंद पलों में नौजवानों के दिल में उतर जाती है. अपनी इसी खूबसूरती से प्रिया हजारों लोगों को शिकार बना चुकी है. पुलिस के रिकौर्ड में प्रिया के खिलाफ  केवल 4 मामले दर्ज हैं. इन में एक हत्या, दूसरा एटीएम तोड़ने, तीसरा ब्लैकमेलिंग और चौथा पीटा एक्ट का.

वह पढ़ीलिखी है. राजस्थान के पाली जिले के छोटे से शहर फालना में नेहरू कालोनी की रहने वाली प्रिया के पिता अशोक सेठ सरकारी कौलेज में लेक्चरर हैं. मां अध्यापिका रही हैं. दादा सिरोही में प्रिंसिपल रहे. फूफा जोधपुर की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. एक बहन और एक भाई है.

इंगलिश मीडियम से 82 प्रतिशत अंकों के साथ प्रिया ने फालना से 10वीं कक्षा पास की थी. फिर सीनियर सेकैंडरी में 78 प्रतिशत नंबर आए. मातापिता अपनी इस लाडली बड़ी बेटी को प्रोफेसर बनाना चाहते थे. इसलिए कौलेज की पढ़ाई के लिए 20 साल की उम्र में ही जयपुर भेज दिया. यह सन 2011 की बात है.

छोटे से शहर फालना से जयपुर आ कर प्रिया ने मानसरोवर कालोनी के एक निजी कौलेज में प्रवेश लिया तो उस की आंखों में प्रोफेसर बनने के सपने तैर रहे थे. पहले वह रिश्तेदार के घर पर ठहरी. कौलेज जाने के बाद जब भी मौका मिलता, वह जयपुर में घूमती. कभीकभी दिन ढले घर लौटती.

जल्दी ही वह जयपुर महानगर की चकाचौंध में खो गई और उन्मुक्त जीवन जीने के बारे में सोचने लगी, जिस में ना किसी की रोकटोक हो और ना ही कोई बंधन.

प्रिया की उन्मुक्तता में प्रोफेसर बनने का सपना धुंधला सा गया. वह रिश्तेदार का घर छोड़ कर मानसरोवर में ही पेइंगगेस्ट के रूप में रहने लगी. वैसे तो मातापिता उसे जयपुर में रहनेखाने और पढ़ाई के खर्च के लिए पैसे भेज देते थे, लेकिन उन पैसों से उस की मनचाही आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती थीं. अपने शौक पूरे करने के लिए प्रिया को पैसों की जरूरत महसूस होने लगी. अकेले रहते हुए दौलत की चाह में वह कब अनैतिक काम करते हुए अपराध की दलदल में उतर गई, उसे खुद पता नहीं चला.

आज प्रिया के हाथ खून से रंगे हुए हैं. उस ने जयपुर में रहते हुए 5 साल के दौरान हर तरह के हथकंडे अपनाए. आलीशान फ्लैट में रहना, लग्जरी कार में घूमना, महंगी शराब पीना, गांजे की सिगरेट का नशा और मौजमस्ती. उस ने सब तरह की ऐश की. अपने हुस्न की झलक दिखाने के लिए वेबसाइट भी बनाई.

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वह करोड़पति और अरबपति लोगों को अपने हुस्न के जाल में फांसने की फिराक में रहती थी. बहुत से नवधनाढ्य उस की अदाओं पर फिदा हुए. प्रिया ने उन को अपने गोरे बदन की चमक दिखाई और पैसे झटकने के बाद उन को ही झटक दिया.

पहली मुलाकात में ही अपनी मोहक मुस्कान दिखा कर वह 20-25 हजार रुपए आराम से झटक लेती थी. बीच में कुछ समय के लिए वह दिल्ली और नोएडा में जा कर रहने लगी थी, लेकिन वहां से जल्दी ही वापस जयपुर लौट आई.

अब वह जयपुर के व्यवसायी दुष्यंत शर्मा की हत्या के मामले में अपने बौयफ्रैंड और एक दोस्त के साथ सलाखों के पीछे है. 3 बार पहले भी वह गिरफ्तार हो चुकी है. उसे ना तो दुष्यंत की हत्या का मलाल है और ना ही कोई अपराधबोध.

प्रिया कुख्यात लेडी डौन बनना चाहती है. वह कहती है, ‘मैं ने दुनिया का कोई पहला मर्डर नहीं किया है.’ शायद उसे पता नहीं है कि कोई मर्डर पहला या आखिरी नहीं होता. प्रिया कहती है, ‘मुझे सिर्फ  दौलत चाहिए. मैं पैसे की बदौलत वे सब चीजें खरीदना चाहती हूं, जिस की मुझे ख्वाहिश है.’ वह यह भी कबूलती है कि 2 साल में उस ने डेढ़ करोड़ रुपया कमाया है.

प्रिया की घुमावदार राहें

प्रिया जितनी खूबसूरत है, उस की मेधावी लड़की से कातिल बनने और लेडी डौन बनने की तमन्ना रखने तक की कहानी उतनी ही घुमावदार है. अपनी तमन्नाओं को पूरा करने के लिए ही उस ने दुष्यंत का अपहरण कर लिया और फिरौती वसूलने के बाद भी उसे मौत के घाट उतार दिया.

जयपुर में शिवपुरी विस्तार झोटवाड़ा के रहने वाले रामेश्वर प्रसाद शर्मा सहकारिता विभाग में नौकरी करते हैं. उन का इकलौता बेटा दुष्यंत फ्लाई ऐश और बिल्डिंग मैटेरियल का काम करता था. दुष्यंत की शादी करीब 3 साल पहले विनीता से हुई थी. उन का करीब डेढ़ साल का एक बेटा है, जिस का नाम है कान्हा.

इसी 2 मई की शाम करीब 6 बजे दुष्यंत अपने घर पहुंचा था. इस के कुछ देर बाद ही उस के मोबाइल पर फोन आया तो वह परिवार वालों से यह कह कर कार में बैठ कर घर से निकला कि जरूरी काम है, निपटा कर आता हूं. दुष्यंत देर रात तक घर नहीं लौटा तो पिता रामेश्वर ने उस की तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला.

दुष्यंत अगले दिन सुबह भी घर वापस नहीं लौटा तो परिवार वाले चिंतित हो गए. वे उस के कारोबारी दोस्तों और अन्य लोगों से पता करने लगे. इस बीच, सुबह करीब सवा 10 बजे रामेश्वर प्रसाद शर्मा के मोबाइल पर दुष्यंत का फोन आया. दुष्यंत ने मोबाइल पर ही रोते हुए पिता से कहा, ‘ये लोग मुझे मार देंगे या रेप के केस में फंसा देंगे. इन को पैसे दे दो.’

रामेश्वर प्रसाद बेटे की बात समझ पाते, इस से पहले ही दुष्यंत से एक युवती ने फोन छीन लिया और रामेश्वर प्रसाद से कहा, ‘दुष्यंत हमारे कब्जे में है. अभी आधे घंटे में 10 लाख रुपए इस के खाते में जमा करा दो, पुलिस को बताया तो इस को मार डालेंगे.’

युवती की बात सुन कर रामेश्वर प्रसाद समझ गए कि बेटा दुष्यंत किसी संकट में है. वे दुष्यंत को मारने की धमकी दिए जाने से घबरा गए. उन्होंने युवती से फोन पर गिड़गिड़ाते हुए कहा कि इतने पैसे तो हमारे पास नहीं हैं. अभी मैं 3 लाख रुपए दे सकता हूं. इस पर वह युवती गालियां देने लगी और तुरंत पैसे जमा कराने को कहा.

रामेश्वर प्रसाद ने करीब एक घंटे में 3 लाख रुपए का इंतजाम कर दुष्यंत के खाते में डलवा दिए. फिर दुष्यंत के फोन पर उस युवती को 3 लाख रुपए जमा कराने की सूचना दी. इस पर युवती ने वाट्सऐप पर 3 लाख रुपए की रसीद मंगवाई और बाकी रुपए जल्दी से जल्दी डालने को कहा.

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इस बीच, दुष्यंत की पत्नी विनीता को पति के अपहरण और हत्या की धमकी की बात पता चली, तो उस ने अपने भाई को यह  बात बताई. विनीता के भाई ने पुलिस को सूचना दी.

दुष्यंत के अपहरण की सूचना पर पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अशोक कुमार गुप्ता ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रतन सिंह, झोटवाड़ा के सहायक पुलिस आयुक्त आस मोहम्मद, करघनी थानाप्रभारी अनिल जसोरिया, झोटवाड़ा थानाप्रभारी गुर भूपेंद्र सिंह, सबइंसपेक्ट हेमंत व मानसिंह और कांस्टेबल सुरेश, अमन एवं प्रवीण की एक टीम गठित की.

इस पुलिस टीम ने दुष्यंत की तलाश की. उस की मोबाइल लोकेशन और काल डिटेल्स निकलवाई गई. दुष्यंत के घरवालों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कारोबारियों से पूछताछ की गई. दुष्यंत के मोबाइल की लोकेशन जयपुर में बजाजनगर, अनिता कालोनी के आसपास आ रही थी. इस पर पुलिस दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अनिता कालोनी पहुंच गई और दुष्यंत व उस की कार को तलाशती रही, लेकिन कुछ पता नहीं चला.

पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी. उसे यह पता लग गया था कि दुष्यंत के अपहर्त्ताओं ने उस के बैंक खाते में रकम डलवाई है. इसलिए पुलिस उस के बैंक खाते पर भी नजर रखे हुए थी. इसी बीच, पता चला कि दुष्यंत के खाते से जयपुर में टोंक रोड पर नेहरू उद्यान के पास स्थित एक एटीएम से किसी युवती ने 20 हजार रुपए निकाले हैं.

एक तरफ  पुलिस की टीमें दुष्यंत को तलाश कर रही थीं. दूसरी ओर 3 मई की देर शाम जयपुर के ही आमेर थाना इलाके में दिल्ली बाईपास पर नई माता मंदिर के पास सुनसान जगह पर ट्रौली वाले सूटकेस में एक युवक की लाश बरामद हुई. मृतक के सिर पर चोट के निशान मिले. गले पर भी 4-5 निशान थे.

वह दुष्यंत ही था

जहां सूटकेस मिला, वहां एक कार के पहियों के निशान भी नजर आए. ट्रौली सूटकेस में लाश मिलने की सूचना पर पुलिस उपायुक्त (उत्तर) सत्येंद्र सिंह मौके पर पहुंचे. युवक के हाथपैर चुनरी व स्कार्फ से बंधे हुए थे. उस के कपड़ों की जेब में ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से उस की शिनाख्त होती.

दूसरी ओर, पुलिस की एक टीम ने दुष्यंत की काल डिटेल्स के आधार पर कुछ मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो पता चला कि दुष्यंत ने उन से पैसे मांगे थे, लेकिन वह पैसे लेने नहीं आया. एक मोबाइल नंबर पर पुलिस की बात दुष्यंत के दोस्त महेश से हुई.

महेश ने पुलिस को बताया कि दुष्यंत का एक युवती से प्रेमप्रसंग चल रहा था. वह युवती बजाजनगर अनिता कालोनी के ईडन गार्डन अपार्टमेंट में रहती है.

दुष्यंत की प्रेमिका का पता चलते ही झोटवाड़ा पुलिस 3 मई की रात अनिता कालोनी के ईडन गार्डन अपार्टमेंट स्थित 402 नंबर के फ्लैट पर पहुंची. वहां एक युवती और एक युवक कहीं जाने की तैयारी करते मिले. पुलिस ने फ्लैट की तलाशी ली तो वहां खून फैला हुआ था. दोनों से पूछताछ की गई, तो युवती का नाम प्रिया सेठ और युवक का नाम दीक्षांत कामरा पता चला. उन्होंने दुष्यंत का अपहरण करने के बाद उस की हत्या करने की बात बता दी.

दुष्यंत की हत्या होने का पता चलने पर मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी सन्न रह गए. उन्होंने दुष्यंत की लाश के बारे में पूछा तो प्रिया व दीक्षांत ने बताया कि उन्होंने दुष्यंत की लाश एक ट्रौली सूटकेस में बंद कर के आमेर

इलाके में फेंक दी है. इस पर पुलिस ने दुष्यंत के परिजनों से लाश की शिनाख्त कराई. दुष्यंत की लाश मिलने के बाद मामला बेहद संगीन हो गया था.

पुलिस ने दुष्यंत के अपहरण और हत्या के मामले में प्रिया सेठ व दीक्षांत कामरा से पूछताछ के बाद एक दूसरे युवक लक्ष्य वालिया को भी हिरासत में ले लिया. बाद में तीनों को भादंसं की धारा 364ए एवं 302 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया.

प्रिया के अपार्टमेंट में खड़ी दुष्यंत की कार भी बरामद कर ली गई. गिरफ्तार आरोपियों में दीक्षांत कामरा श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर कस्बे में इंद्रा कालोनी और लक्ष्य वालिया श्रीगंगानगर के चावला चौक पुरानी आबादी का रहने वाला था.

ऊंचे सपनों की चाह वाले बने कातिल

दीक्षांत कामरा मुंबई में मौडलिंग करता था. वह आजकल प्रिया सेठ के साथ लिवइन रिलेशनशिप में जयपुर के ईडन गार्डन अपार्टमेंट में रह रहा था. दीक्षांत के पिता सरकारी स्कूल में हैडमास्टर हैं. लक्ष्य वालिया जयपुर में मालवीय नगर स्थित तनिश अपार्टमेंट में रहता था. उस के पिता जीवित नहीं हैं. मां सेल्स टैक्स विभाग में कर्मचारी है. प्रिया सेठ ने ईडन गार्डन अपार्टमेंट में करीब डेढ़ महीने पहले ही दिल्ली निवासी हर्ष कुमार यादव से 402 नंबर का फ्लैट किराए पर लिया था.

तीनों आरोपियों से पूछताछ में दुष्यंत के अपहरण और हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

प्रिया सेठ सोशल मीडिया टिंडर ऐप पर एक्टिव थी. इसी साल फरवरी-मार्च महीने में इसी ऐप पर दुष्यंत का प्रिया से संपर्क हुआ था. दुष्यंत ने खुद को दिल्ली निवासी विवान कोहली बता कर प्रिया से चैटिंग शुरू की थी. चैटिंग करते हुए दोनों के बीच दोस्ती हो गई. फिर मिलनाजुलना और घूमनाफिरना भी होने लगा.

दुष्यंत ने प्रिया से खुद को विवान कोहली के रूप में दिल्ली का अरबपति व्यापारी बताया था. उस ने प्रिया से कहा था कि उस के बिजनैस का सालाना टर्नओवर 25 करोड़ रुपए से ज्यादा का है. दुष्यंत का रहनसहन करोड़पति व्यापारी जैसा था भी.

विवान कोहली को अरबपति व्यापारी समझ कर प्रिया उसे अपने हुस्न के जाल में फांसना चाहती थी. दरअसल, प्रिया के बौयफ्रैंड दीक्षांत कामरा पर काफी कर्जा हो गया था. इसलिए प्रिया ने दीक्षांत का कर्ज उतारने के लिए अपने दोस्तों के साथ मिल कर विवान कोहली को फांसने की योजना बनाई.

योजना के अनुसार, प्रिया ने 2 मई को विवान कोहली बने दुष्यंत को फोन कर के जयपुर में अपने फ्लैट पर बुलाया. दुष्यंत उस दिन शाम को प्रिया के ईडन गार्डन अपार्टमेंट स्थित फ्लैट पर पहुंचा तो प्रिया ने अपने दोस्तों दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया के साथ मिल कर उसे बंधक बना लिया.

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दुष्यंत को बंधक बनाने के बाद प्रिया ने उस के कपड़ों की तलाशी ली, तो जेब में मिले दस्तावेजों से उसे पता चला कि वह दिल्ली का विवान कोहली नहीं, बल्कि जयपुर के झोटवाड़ा का रहने वाला दुष्यंत है. उस के बैंक खाते में भी ज्यादा रकम नहीं थी. इस पर तीनों ने मिल कर पहले दुष्यंत के परिजनों से फिरौती वसूलने की बात तय की. इसी के तहत 3 मई को सुबह करीब सवा 10 बजे दुष्यंत से उस के पिता रामेश्वर प्रसाद को फोन कर 10 लाख रुपए मांगे गए.

ऐसे लिखी गई खूनी स्क्रिप्ट

रामेश्वर प्रसाद ने बेटे दुष्यंत के खाते में 3 लाख रुपए डाल दिए, तो प्रिया सेठ ने कुछ देर बाद ही अपने फ्लैट से कुछ दूर स्थित एटीएम से 20 हजार रुपए निकाल भी लिए. बाद में प्रिया और उस के दोस्तों को यह डर लगा कि दुष्यंत को छोड़ देने से उन का भांडा फूट जाएगा.

इसलिए 3 मई की दोपहर में फ्लैट पर ही उन्होंने चाकू से गोद कर दुष्यंत को मार डाला. फिर उस के हाथपैर बांध दिए. इस के बाद ये लोग दुष्यंत के शव को एक ट्रौली सूटकेस में रख क र दुष्यंत की ही कार से उसी दिन दोपहर को आमेर इलाके में दिल्ली बाईपास पर फेंक आए.

प्रिया के लालच ने रामेश्वर प्रसाद शर्मा के घर का आखिरी चिराग भी बुझा दिया. 2 बेटों की अर्थियों को कंधा दे चुके रामेश्वर प्रसाद की आंखें पथरा गईं. उन का सबसे बड़ा बेटा हिमांशु 30 साल पहले महज डेढ़ साल की उम्र में ही चल बसा था. इस के बाद 2 बेटे दुष्यंत और पीयूष पैदा हुए, तो उन की जिंदगी फिर पटरी पर लौटने लगी.

लेकिन करीब 6 साल पहले सड़क दुर्घटना में पीयूष की मौत हो गई थी. दुखों का पहाड़ छंटा भी नहीं था कि इन लोगों ने दोस्त बन कर अपने लालच के लिए दुष्यंत को मौत की नींद सुला कर रामेश्वर के बुढ़ापे का आखिरी सहारा भी छीन लिया.

सन 2011 में कालेज की पढ़ाई करने जयपुर आई प्रिया अपनी रूममेट के साथ रहते हुए देह व्यापार से जुड़े गिरोह के संपर्क में आई थी. पहली बार जुलाई 2014 में जयपुर के श्याम नगर थाना इलाके में वह देह व्यापार में पकड़ी गई थी.

इस के 5 महीने बाद ही 30 नवंबर, 2014 की रात वह मानसरोवर इलाके में रजत पथ पर एक एटीएम तोड़ने के प्रयास में अपने साथी अनिल जांगिड़ के साथ पकड़ी गई. उस समय वह जयपुर में गजसिंहपुरा के सुंदर नगर में किराए पर रहती थी.

अनिल जांगिड़ अजमेर में किशनगढ़ के पास कासिर गांव का रहने वाला है. वह जयपुर में गजसिंहपुरा में रहता था और फर्नीचर का काम करता था. प्रिया ने एक दिन अनिल को अपने कमरे का फर्नीचर ठीक करने के लिए बुलाया था. इस के बाद दोनों मिलने लगे. प्रिया ने अनिल को मोटा पैसा कमाने का झांसा दिया और एटीएम लूटने की योजना बनाई.

कैसेकैसे खेल खेले प्रिया ने

योजनानुसार वे रैकी करने के बाद गैस कटर और जरूरी औजार ले कर टैक्सी से बैंक औफ  इंडिया का एटीएम लूटने रजतपथ पर पहुंचे.

टैक्सी उन्होंने दूर खड़ी कर दी. उन्होंने गैस कटर से एटीएम को काट भी दिया. इस दौरान पुलिस का मोटरसाइकिल गश्ती दल आ गया. पुलिस को देख कर प्रिया भाग गई. पुलिस ने अनिल जांगिड़ को मौके पर ही पकड़ लिया. कई घंटे बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने प्रिया सेठ को भी गिरफ्तार कर लिया.

एटीएम लूटने के मामले में जमानत पर छूटने के बाद प्रिया जयपुर छोड़ कर दिल्ली चली गई. वहां नोएडा में रहते हुए जयपुर के रहने वाले गजराज सिंह से उस की जानपहचान हुई. इस दौरान प्रिया व गजराज सिंह आपस में मिलनेजुलने लगे. बाद में प्रिया सेठ वापस जयपुर आ गई.

इसी साल जनवरी में जयपुर के वैशाली नगर में रहने वाले गजराज सिंह ने प्रिया के खिलाफ  वैशाली नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में कहा था कि 4 महीने पहले प्रिया ने गजराज को रेप केस में फंसाने की धमकी दे कर 10 लाख रुपए मांगे थे और कहा था कि पैसे नहीं दिए तो तेजाब फेंक कर जलवा भी दूंगी.

इस से घबरा कर गजराज ने प्रिया को साढ़े सात लाख रुपए दे दिए थे. पूरे 10 लाख रुपए नहीं मिलने पर वह आए दिन गजराज के घर आ कर हंगामा करने की धमकी देने लगी. तब गजराज ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई. गजराज की रिपोर्ट पर वैशाली नगर थाना पुलिस ने इसी साल 8 मार्च को प्रिया को गिरफ्तार किया था.

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि प्रिया अनैतिक काम के लिए औनलाइन एस्कौर्ट सेवा भी चलाती थी. इस के अलावा ऐप की मदद भी लेती थी.

औनलाइन संपर्क होने के बाद प्रिया कार से अपने ड्राइवर गणेश के साथ ग्राहक के पास पहुंचती और वहां अनैतिक काम का 10 से 50 हजार रुपए में सौदा कर पैसे ले लेती. इस के बाद पैसे गाड़ी में रख कर आने की बात कह कर वह ड्राइवर के साथ अपनी कार से भाग जाती थी.

प्रिया ने पैसे के लिए सोशल मीडिया को बनाया मीडियम

सोशल मीडिया के जरिए प्रिया लोगों से दोस्ती करती और मिलने के लिए फ्लैट पर बुलाती. वह पहले महंगी शराब पिला ती और आवभगत करने के बाद खुद ही अपने कपड़े फाड़ कर रेप केस में फंसाने की धमकी देती और पैसों की डिमांड करती. पीडि़त लोग मजबूरन उसे पैसे दे कर पीछा छुड़ाते. लोकलाज के भय से पुलिस में शिकायत भी नहीं करते.

प्रिया सेठ ने इस तरह की सैकड़ों वारदातें की हैं, लेकिन वे पुलिस के रिकौर्ड में कहीं दर्ज नहीं हैं, क्योंकि पीडि़त लोगों ने ऐसे मामलों की शिकायत ही नहीं की.

प्रिया इतनी शातिर है कि जब उस ने अपने साथियों के साथ मिल कर 3 मई को दुष्यंत की हत्या की थी, तभी उस के पास एक व्यक्ति का अनैतिक काम के लिए फोन आया. उस व्यक्ति ने प्रिया को रेलवे स्टेशन के पास नामचीन होटल में बुलाया. प्रिया कैब ले कर उस होटल में पहुंच गई और उस व्यक्ति से रुपए ले कर भाग आई.

पूछताछ में सामने आया कि प्रिया और दीक्षांत का एक महीने का खर्चा करीब 2 लाख रुपए है. खाने से पहनने तक उन के लग्जरी शौक हैं. दीक्षांत 80 हजार के विदेशी ब्रांड के जूते और 45 हजार की घड़ी पहनता है. कपड़े भी ऐसे ब्रांड के पहनता है, जिन के स्टोर राजस्थान में नहीं हैं. प्रिया भी 45 हजार रुपए कीमत के सैंडल पहनती थी. उसे महंगे कपड़े, परफ्यूम, सौंदर्य प्रसाधन के अलावा कीमती शराब व नशीली सिगरेटों का शौक था. वह हमेशा हवाई जहाज में सफर करती थी.

यह भी विडंबना है कि प्रिया और उस का बौयफ्रैंड दीक्षांत लोगों को ही नहीं, एकदूसरे को भी धोखा दे रहे थे. वैसे तो दोनों ने अपने हाथों पर एकदूसरे के नाम के टैटू बनवा रखे थे. दोनों के ही कई लोगों से संबंध थे. प्रिया ने दीक्षांत का पासपोर्ट भी छीन कर अपने पास रखा हुआ था.

एक बार दीक्षांत प्रिया को छोड़ कर गंगानगर चला गया, तो प्रिया ने उसे रेप केस में फंसाने की धमकी दे कर ब्लैकमेल भी किया था. बाद में दीक्षांत वापस जयपुर आ कर प्रिया के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा था. प्रिया ही उस का खर्च उठाती थी.

लक्ष्य इन दोनों का दोस्त था. ये तीनों मिल कर शराब पार्टी करते थे. 2 मई को भी लक्ष्य वालिया शराब पीने प्रिया के फ्लैट पर आया था. वहां दुष्यंत से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई गई. बाद में अगले दिन प्रिया और दीक्षांत का साथ देते हुए उस ने दुष्यंत की हत्या में सहयोग किया. दुष्यंत की लाश ठिकाने लगाने भी वह कार से प्रिया और दीक्षांत के साथ गया था.

दीक्षांत का ईवौलेट अकाउंट है. आरोपियों का दुष्यंत के बैंक खाते से 3 लाख रुपए ईवौलेट में ट्रांसफर कराने का इरादा था. यह काम करने से पहले ही वे पुलिस की पकड़ में आ गए. आरोपियों का इरादा दुष्यंत की कार ले कर जयपुर से बाहर भाग जाने का भी था. इस के लिए उन्होंने फरजी नंबर प्लेट भी तैयार करवा ली थी, लेकिन वे पुलिस की गिरफ्त में आ गए.

पुलिस ने तीनों आरोपियों को 5 मई को अदालत में पेश कर 11 मई तक रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में पुलिस ने प्रिया के फ्लैट से बैग, चाकू, खून से सने कपड़े, चादर, रस्सियां और सूटकेस आदि बरामद किए. इस के अलावा शराब की बोतलें, कागज में लिपटी नशीली सिगरेट आदि भी मिलीं.

बोल्ड सीन देने में माहिर हैं ये अभिनेत्रियां

बौलीवुड में फिल्म रिलीज होने से पहले उसे सेंसर बोर्ड देखती है. सेंसर बोर्ड न्यूडिटी और सेक्शुअलिटी की इजाजत नहीं देता है. लेकिन विदेशों में इस तरह के सीन्स पर कोई आपत्ति नहीं होती. बौलीवुड की कई एक्ट्रैसेस विदेशी फिल्मों और सीरियल्स में न्यूड और इंटीमेट सीन दे चुकी हैं. ऐसी ही एक्ट्रैसेस पर डालते हैं एक नजर…

–  बौलीवुड में प्रियंका को हॉट एक्ट्रैस के तौर पर जाना जाता है. उन्होंने ‘क्वांटिको’ से इंटरनेशनल टीवी पर डेब्यू किया. इस शो में प्रियंका के सेक्स सीन खूब सुर्खियां बटोर चुके हैं.

–  ‘मासूम’ और ‘हद कर दी आपने’ जैसी फिल्मों में नजर आईं हेलन बोरडी ने 1999 में अमेरिकन-इंडो ड्रामा टेल्स ऑफ़ द कामसूत्र 2 : मानसून में न्यूड सीन दिए थे.

– ‘मेरा नाम जोकर’ में न्यूड सीन देकर सिमी ग्रेवाल ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इसके करीब 2 साल बाद उन्हें अमेरिकन फिल्म ‘सिद्धार्था’ में पूरी तरह न्यूड देखा गया था.

– अनु अग्रवाल ने शॉर्ट फिल्म ‘द क्लाउड डोर’ में काम किया. मणि कौल के डायरैक्शन में बनी इस फिल्म में अनु ने शाद अली के भाई मुराद अली के साथ न्यूड सीन दिया था.

– ‘गुलाब गैंग’ और ‘पार्च्ड’ जैसी फिल्मों की एक्ट्रैस तनिष्ठा चटर्जी ने 2015 में ऑस्ट्रेलियन रोमांटिक ड्रामा ‘अनइंडियन’ में न्यूड सीन दिए थे.

– ‘हेट स्टोरी’ फेम पाउली डैम फिल्म ‘मशरुम्स’ यानी ‘चत्रक’ में अनुब्रत बसु के साथ इंटिमेट होती नजर आती हैं. ये सीन्स असली हैं. इस इंडो-फ्रेंच फिल्म के सीन्स पर बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में काफी बवाल हुआ था.

– लीना यादव के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘पार्च्ड’ में राधिका आप्टे ने न्यूड सीन्स दिए हैं. मसलन एक सीन में उन्होंने तनिष्ठा चटर्जी और एक अन्य सीन में आदिल हुसैन के साथ न्यूड सीन दिया है.

– फिल्म ‘कामसूत्र 3D’ खूब विवादों में रही थी. फिल्म में शर्लिन चोपड़ा ने कई न्यूड और सैक्स सीन दिए थे.

– धार्मिक शो ‘यात्रा’ को होस्ट कर चुकीं दीप्ति भटनागर ने 1997 में ‘इन्फर्नो’ में खूब बोल्ड सीन दिए थे. फिल्म में उनके अपोजिट हॉलीवुड एक्टर डॉन विल्सन लीड रोल में थे.

जब सामने आया था इन अभिनेत्रियों का MMS

बात बॉलीवुड की हो और विवाद का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है. एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि जिसका जितना नाम होता है, वह उतना ही ज्यादा बदनाम भी होता है. बॉलीवुड के सितारे इसमें सबसे आगे हैं. बॉलीवुड में शायद ही कोई ऐसा अभिनेता या अभिनेत्री होगी जिसका नाम विवादों में ना आया हो. हर कोई किसी ना किसी वजह से मीडिया की सुर्खियों में छाया रहता है. आज हम यहां अभिनेताओं की नहीं बल्कि अभिनेत्रियों की बात करेंगे. हम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों के बारे में आपको बताएंगे जो अपने एमएमएस की वजह से सुर्खियों में छायी रही थीं.

बॉलीवुड की ज्यादातर अभिनेत्रियों के नाम विवादों से जुड़े हुए हैं. अब कंगना को ही ले लीजिये, भले ही वह बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्री हैं, लेकिन उनका नाम कई बार लड़ाई-झगड़ा करने में आ चुका है. लेकिन आज हम लड़ाई-झगड़े नहीं बल्कि उन एमएमएस की बात करेंगे जिनकी वजह से अभिनेत्रियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही हैं.

करीना कपूर

इनमें सबसे पहला नाम आता है करीना कपूर का, करीना और उनके पुराने ब्यॉयफ्रेंड शहीद कपूर के बारे में कौन नहीं जनता. जब ये दोनों साथ थे तब इनका एक किस वाला एमएमएस काफी वायरल रहा था. एक रेस्टोरेंट में दोनों को किस करते हुए किसी ने उनकी फोटो ले ली थी. फोटो वायरल होने के बाद करीना ने केस भी किया था.

प्रीती जिंटा

प्रीती जिंटा भी एक बार अपने एमएमएस की वजह से चर्चा का विषय बन चुकी हैं. होटल के बाथरूम में बिना कपड़ों के इनका एमएमएस खूब वायरल हुआ था. वह बाथरूम में बिना कपड़ों के शीशे के सामने खड़े होकर शावर ले रही थीं. यह फोटो आने के बाद काफ़ी हल्ला मचा था.

मल्लिका शेरावत

इनका नाम आते ही लोगों के दिमाग में अपने आप ही आ जाता है कि इनके लिए यह सब कोई नई बात नहीं है. इनका भी एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह बिना कपड़ों के एक विस्तर पर लेटी हुई थीं. वहां मल्लिका ने किसी अंजान विदेशी के साथ सम्बन्ध भी बनाया था.

सोनाक्षी सिन्हा

सोनाक्षी का नाम इस तरह के विवाद में आएगा ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा. लेकिन कुछ दिनों पहले सोनाक्षी का भी एक एमएमएस इन्टरनेट पर वायरल हो चुका था. एमएमएस में दिखने वाली लड़की की पहचान दबंग अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के रूप में की गयी है, जिसमें वह अपने घुटनों के बल झुकी हुई हैं और उनके पीछे कोई व्यक्ति खड़ा है.

राधिका आप्टे

राधिका का नाम भी एक बार एमएमएस मामले में सामने आ चुका है. इनकी भी एक फोटो इन्टरनेट पर वायरल हुई थी, जिसमे वह अपने कपड़े खोलकर सामने बैठे हुए व्यक्ति को कुछ दिखा रही थीं.

रात को तो छम्मक की जान ही निकल गई

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बातूनी बच्चों से कैसे निबटें

कानपुर के मालरोड पर बने एक पब्लिक स्कूल की बात है. कक्षा 4 में पढ़ने वाला छात्र प्रदीप हमेशा किसी न किसी से बात करता रहता था. ऐसे में स्कूल के बच्चे परेशान रहते थे. कई बार तो वह टीचर से भी ऐसे सवाल करता था कि टीचर को समझ में नहीं आता था कि वह उसे कैसे समझाए.

एक दिन स्कूल में प्रार्थना के दौरान प्रदीप ने अध्यापकों से प्रार्थना को ले कर कई सवाल कर डाले. इस से उस के दोस्त और टीचर के साथ प्रिसिंपल भी परेशान हो गए. जब प्रदीप के सवाल खत्म नहीं हुए तो प्रिसिंपल ने टीचर से कहा कि प्रदीप के मुंह पर टेप चिपका दो. टीचर ने प्रदीप के मुंह पर भूरे रंग की टेप चिपका दी. इस के बाद वह क्लास में गया तो वहां सभी बच्चे उस का मजाक उड़ाने लगे. परेशान हो कर प्रदीप वहां से बाहर चला आया.

इसी स्कूल में उस की मां क्षमा टीचर थी. दूसरे पीरियड की घंटी बजी तो प्रदीप मां के पास गया. मां ने पहले उस के मुंह पर से टेप हटाई और उस से इस के बारे में पूछा तो उस ने घटना की जानकारी दी. क्षमा ने प्रिसिंपल से बात की. प्रिंसिपल ने कहा कि प्रदीप बहुत बातूनी बच्चा है,

ऐसे में उस की वजह से पूरी क्लास और स्कूल डिस्टर्ब होता है. काफी समझानेबुझाने पर मामला सुलझा. प्रिंसिपल उसे क्लास में लेने को तैयार नहीं थे तो क्षमा ने पिं्रसिपल और टीचर के खिलाफ बच्चे के साथ मारपीट का मुकदमा दायर करने की धमकी दे दी.

हंगामा भी करते हैं बातूनी बच्चे

प्रदीप जैसे बातूनी बच्चे होना कोई नई बात नहीं है. बहुत से बच्चे ऐसे सवाल करते हैं कि उन के जवाब देने मुश्किल हो जाते हैं. ऐसे बातूनी बच्चे केवल बातें ही नहीं बनाते बल्कि कई बार ये अजबगजब शरारतें भी करते हैं, जिस की वजह से बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है.

नेहा को शिकायत है कि वह अपने बच्चे को जब भी किसी होटल में ले जाती है, वह वहां खाने की चीजों को ले कर बहुत सवाल करता है. इस के बाद कई खाने वाली चीजें मंगा लेता है और थोड़ाथोड़ा खा कर छोड़ देता है.

नेहा कहती है कि वह हद से ज्यादा बातें तो बनाता ही है, कई बार होटल में प्लेट और गिलास भी तोड़ देता है, जिस वजह से कई बार न चाहते हुए भी नेहा को बच्चे पर हाथ उठाना पड़ता है. बातूनी बच्चे केवल छोटी उम्र में ही परेशान नहीं करते, बड़े हो कर भी वे अपनी बातों से लोगों को परेशान करते हैं.

अनीता के जुड़वां बच्चे हैं. मजेदार बात यह है कि दोनों ही बहुत बातूनी हैं. स्कूल से ले कर घर तक दोनों की बातें चलती रहती हैं. बातों के चक्कर में वे स्कूल का होमवर्क भी नहीं करते. इस की वजह से स्कूल में रोज उन को सजा मिलती है. अनीता को समझ में नहीं आता कि वह कैसे अपने बच्चों को समझाए.

कई बार बच्चों का तनाव पति और घर के दूसरे सदस्यों पर निकल जाता है, उन से झगड़ा हो जाता है. बच्चों का तनाव घरपरिवार के संबंधों से ले कर दोस्तों तक पर भारी पड़ता है. अनीता कहती है कि उस ने अपने बच्चों की देखभाल के लिए नौकरानी रखी थी. बच्चों ने उसे इतना परेशान किया कि वह नौकरी छोड़ कर चली गई. वह बोली, ‘दीदी, आप के बच्चों को संभालना बहुत ही मुश्किल काम है.’

प्यार से संभालिए ऐसे बच्चे

बातूनी बच्चों को तनाव या गुस्से से मत संभालिए. उन्हें प्यार से संभालें. कई बार ऐसे बच्चों की हरकतों पर लोग गुस्सा हो जाते हैं और बच्चों के साथ मारपीट या सजा देने लगते हैं.

फिजियोथेरैपिस्ट और पेरैंट्स कोच नेहा आनंद कहती हैं, ‘‘बच्चों का ज्यादा बात करना, उन के द्वारा तरहतरह के सवाल किए जाना स्वाभाविक प्रक्रिया है. कई बार पेरैंट्स, बड़े भाईबहन, रिश्तेदार या टीचर इन सवालों को ठीक से जवाब नहीं देना चाहते. वे बच्चे को बिना ठीक से समझाए उस का मुंह बंद कराने के लिए चुप करा देते हैं. कई बार डांटडपट देते हैं. जब इस से भी बात नहीं बनती तो वे मारपीट या सजा देने तक पहुंच जाते हैं.’’

नेहा आनंद आगे बताती हैं, ‘‘जब बच्चा सवाल करे तो उसे धैर्यपूर्वक सुनें. सवाल गलत हो तो भी उस को प्यार से समझाएं. बच्चे की जिज्ञासा जब पूरी हो जाएगी तो वह संतुष्ट हो जाएगा. अगर सही से बच्चे को समझाया नहीं गया तो उस के मन में गलत बात घर कर जाएगी. ऐसे में कई बार बच्चों का मानसिक विकास रुक जाता है. यही वजह है कि आज बच्चों की शिक्षा में ऐसे तमाम सब्जैक्ट जोड़े गए हैं, जहां उन को सवाल करने की पूरी आजादी दी जाती है. सही जवाब न मिलने से बच्चा कुंठित हो जाता है, वह अपने सवालों के जवाब के लिए दूसरे लोगों के पास जा सकता है, जो हो सकता है कि सवाल के जवाब तो गलत दें ही, उस को गुमराह भी कर बैठें. पेरैंट्स को बच्चों के ये सवाल बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं लगते. सही मानो में देखें तो बच्चों के लिए ये सवाल बड़े उपयोगी होते हैं.’’

सवाल दर सवाल

बातूनी बच्चे असल में एनर्जी से भरपूर और ऐक्टिव होते हैं. जब ऐसे बच्चों के साथ सही व्यवहार नहीं होता तो वे चिड़चिड़े और जिद्दी हो जाते हैं. अगर इन बच्चों को सही तरह से संभाल लिया जाए तो ये बहुत इंटैलिजैंट और जीनियस हो जाते हैं. सवाल करने के समय यदि इन बच्चों को रोका जाता है या इन्हें सही जवाब नहीं दिया जाता तो ये दब्बू बन जाते हैं. इन की सवाल करने की आदत खत्म हो जाती है. इस से उन का स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों की बातों को ठीक से सुना जाए और सही तरीके से उस का जवाब दिया जाए. यह बच्चों के स्वाभाविक विकास में सहायक होता है. बच्चे जिज्ञासू स्वभाव के होते हैं. वे अपने आसपास की चीजों को समझना चाहते हैं. जो बच्चे बातूनी होते हैं उन को एक्सट्रोवर्ट कहा जाता है. उन से किसी भी विषय पर बात करना अच्छा लगता है.

ऐसे बच्चों के सवालों के जवाब देने चाहिए. उन को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. ऐसे बच्चों को संभालना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है पर संयम से बात कर के संभाला जा सकता है.

ऐसे बच्चों से स्नेहपूर्वक बात करनी चाहिए. इस से ये अपनी बात को सरलता से कह लेते हैं. ऐसे बच्चों को जब संभाल लेंगे तो उन को सजा देने की जरूरत नहीं होगी. बच्चे भी अपने सवाल कर के आगे बढ़ सकेंगे. पेरैंट्स के साथसाथ ऐसे बच्चों को टीचर को भी सही तरीके से संभालना चाहिए, तभी इन का पूर्ण विकास हो सकेगा.

थोड़ा प्यार, थोड़ी समझ से संभालें अपने लाड़लों को

बातूनी यानी एक्सट्रोवर्ट बच्चों को संभालने के लिए सावधानीपूर्वक प्रयास करने चाहिए. कुछ टिप्स के सहारे यह काम सरल हो सकता है. इन टिप्स को धीरेधीरे बच्चों के साथ व्यवहार में ढाल लेंगे तो बातूनी बच्चों को सुधारा जा सकेगा :

–    बच्चों को बात करने पर कभी हतोत्साहित न करें. बच्चे बातों के जरिए ही अपनी फीलिंग्स और इमोशंस को जाहिर करते हैं.

–    कई बार वे आप का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे समय सवाल करते हैं जब आप व्यस्त होते हैं. इस दौरान भी बच्चों को झिड़कने के बजाय सही तरह से जवाब दें.

–    ऐसे बच्चों को संभालने के लिए घर में 10 से 15 मिनट का खेल खेलें, उस में उन्हें शामिल करें और उन्हें भी अपने साथ उतनी देर चुप रहने को कहें.

–    बच्चों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनना शुरू करेंगे तो वे भी आप की बातें सुनेंगे. बच्चों के साथ बात करने से आपस में सामंजस्य बैठाना सरल होगा.

–    बच्चे एनर्जी का पावरहाउस होते हैं. उन की एनर्जी को सही दिशा में लगाना जरूरी होता है. आर्ट, क्राफ्ट, पेंटिंग और डांस जैसी गतिविधियों में उन को लगा कर उन की एनर्जी को सही दिशा में ले जा सकते हैं.

–    बच्चों को किताबें पढ़ना अच्छा लगता है. आप उन को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें. इस से वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकेंगे, हर वक्त आप से सवाल नहीं करेंगे.

मोहब्बत पर भारी सियासत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 35 किलोमीटर दूर रायसेन जिले का एक कस्बा है, उदयपुरा. इस कस्बे की गिनती पिछड़े इलाकों में शुमार होती है. हालांकि आधुनिकता और नए गजेट्स उदयपुरा भी पहुंच चुके हैं, लेकिन वे चीजें इस कस्बे के पिछड़ेपन की पहचान मिटाने में नाकाम साबित हुई हैं.

उदयपुरा की राजनैतिक पहचान ठाकुर रामपाल सिंह हैं, जो इन दिनों राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री हैं. राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले जानते हैं कि जिन इनेगिने नेताओं से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घरेलू संबंध हैं उन में से रामपाल सिंह भी हैं. विदिशा रायसेन संसदीय क्षेत्र से लगभग एक साथ राजनैतिक सफर शुरू करने वाले ये दोनों नेता एकदूसरे पर आंख बंद कर के विश्वास करते हैं. साल 2006 में विदिशा लोकसभा सीट से उपचुनाव की वजह से शिवराज सिंह चौहान की जिद ने रामपाल सिंह को ही उम्मीदवार बनाया गया था.

हालांकि रामपाल सिंह तब इतने बड़े और लोकप्रिय नेता नहीं थे, लेकिन उन्होंने भाजपा का परंपरागत गढ़ ढहने नहीं दिया था और भाजपा व शिवराज सिंह चौहान का भरोसा कायम रखा था. 2013 के विधानसभा चुनाव में वे रायसेन की ही सिलवानी सीट से जीते तो शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें कैबिनेट में शामिल किया था.

यह रामपाल सिंह की खूबी ही कही जाएगी कि कभी उन का नाम किसी विवाद में नहीं आया. वे आमतौर पर शांत रहने वाले नेता हैं. उन की पहुंच सीधे पार्टी आलाकमान तक है. भोपाल के शिवाजी नगर के लिंक रोड स्थित उन के सरकारी बंगले पर दूसरे मंत्रियों जितनी भीड़भाड़ नहीं दिखती. जो 2-4 लोग दिखते भी हैं वे उन के क्षेत्र उदयपुरा के भाजपा कार्यकर्ता या फिर मतदाता होते हैं.

रामपाल सिंह का पैतृक घर उदयपुरा के लक्ष्मी चौक मोहल्ले में है. वह पैतृक घर किसी चुनाव के वक्त या महत्त्वपूर्ण तीज त्यौहारों पर जा पाते हैं. जब भी वे उदयपुरा में होते हैं तो सभी से खासतौर पर अड़ोसियोंपड़ोसियों से मिल कर उन की कुशलक्षेम पूछते हैं. ऐसा सिर्फ नेतागिरि के लिए नहीं, बल्कि खुद के मिलनसार स्वभाव की वजह से होता है. शायद इसी विनम्रता के चलते उन की छवि अडि़यल और अक्खड़ ठाकुर की नहीं बन पाई.

रामपाल सिंह के घर के ठीक सामने एक किसान चंदनसिंह रघुवंशी का घर है. पड़ोसी होने के नाते दोनों में पारिवारिक संबंध थे. मंत्री बनने के बाद रामपाल सिंह का अधिकांश वक्त भोपाल में ही बीतता था, लिहाजा अपने क्षेत्र की बात तो दूर मोहल्ले और घर की जानकारियां भी उन्हें पहले की तरह नहीं रहती थीं.

उन्हें तो यह भी नहीं मालूम था कि उन के मंझले बेटे गिरजेश प्रताप सिंह ने चोरीछिपे चंदनसिंह की बेटी प्रीति से शादी कर ली है. 28 वर्षीय प्रीति खासी खूबसूरत थी और 10वीं क्लास से आगे नहीं पढ़ पाई थी. यही हाल गिरजेश का था, उस की भी पढ़ाईलिखाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी. दसवीं के बाद उस ने भी पढ़ाई से नाता तोड़ लिया था.

बीती 17 मार्च को सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिस में लिखा था कि मंत्री रामपाल सिंह की बहू ने घर में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली है. इस पोस्ट ने हर किसी को चौंकाया, जिस में लिखी इबारत का सार यह था कि सुबह तड़के 5 बजे रामपाल सिंह की बहू प्रीति रघुवंशी ने उदयपुरा स्थित अपने घर में फांसीं लगा कर जान दे दी है.

इस वायरल पोस्ट में प्रीति का एक फोटो भी संलग्न था, जिस में वह एक मंदिर के प्रांगण में रेलिंग से टिकी हुई दिखाई दे रही थी. सफेद गुलाबी रंग का सूट पहने प्रीति के चेहरे पर सौम्य मुसकराहट थी और वह फोटो में काफी खुश नजर आ रही थी.

जिस ने भी इस पोस्ट को देखा, पढ़ा उन में से हर किसी को पूरा किस्सा तो समझ नहीं आया, लेकिन इस पोस्ट को अधिकतर लोगों ने फारवर्ड किया. खुद रामपाल सिंह सहित उन के जानने वाले हैरान थे कि गिरजेश की तो अभी शादी ही नहीं हुई है, फिर प्रीति को क्यों उस की पत्नी बताया जा रहा है. जबकि पोस्ट में साफ तौर पर प्रीति को गिरजेश की पत्नी बताया गया था.

रामपाल सिंह के बेहद नजदीकी और रिश्तेदार ही यह जानते थे कि 2 दिन पहले ही गिरजेश की सगाई बुंदेलखंड इलाके के टीकमगढ़ जिले से 60 किलोमीटर दूर खरियापुर में एक किले में हुई, फिर प्रीति उस की पत्नी कैसे कहीं जा रही है.

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17 मार्च की सुबह करीब 6 बजे प्रीति की मां रामाबाई जब उस के कमरे में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर सन्न रह गईं. उन की लाडली बेटी फांसी के फंदे पर झूल रही थी. उन्होंने शोर मचाया तो वे घर के सारे सदस्य प्रीति के कमरे की तरफ दौड़े.

रामपाल सिंह के परिवार की तरह चंदन सिंह का परिवार भी संयुक्त है. सभी ने मिल कर आहिस्ता से प्रीति को नीचे उतारा और उस की नब्ज टटोली तो वह बंद हो चुकी थी. कुछ देर सोचविचार के बाद प्रीति को उदयपुरा के अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उस के मृत होने की पुष्टि कर दी.

सुबह 8 बजे से ले कर 10 बजे तक क्या हुआ, यह किसी को कुछ खास नहीं मालूम, लेकिन जो होने जा रहा था वह किसी हाहाकार से कम नहीं था. प्रीति की मौत की पुष्टि हो जाने के बाद एकाएक ही न केवल उदयपुरा, रायसेन और भोपाल बल्कि राज्यभर का पारा चढ़ते सूरज के साथ गरमा उठा था.

अस्पताल में खासी भीड़ जमा हो गई थी. इसी भीड़ के सामने प्रीति ने पिता ने यह रहस्योद्घाटन किया कि प्रीति की शादी पिछले साल 20 जून को मंत्री रामपाल सिंह के बेटे गिरजेश के साथ भोपाल के जवाहर चौक स्थित आर्य समाज मंदिर में हुई थी.

चंदन सिंह के इस रहस्योद्घाटन या स्वीकारोक्ति कुछ भी कह लें से मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया. बवाल उस वक्त और मचा जब अपनी शिकायत उन्होंने उदयपुरा थाने में दर्ज कराई.

इस शिकायत से बहुत कुछ के साथ एक प्रेमकथा भी सामने आई. साथ ही सामने आई एक कस्बाई युवती की बेबसी की कहानी, जिस में उस के प्रेमी ने पहले उस के साथ चोरीछिपे शादी की और फिर मांबाप को दबाव में ले कर दूसरी जगह भी सगाई कर डाली. यानी प्यार में धोखा भी दिया.

प्रीति और गिरजेश बचपन से एकदूसरे को जानते थे. उन की यह पहचान जवानी आतेआते कब प्यार में बदल गई. उन्हें पता ही नहीं चला. एकदूसरे को दिल दे चुके थे और साथ जीनेमरने की कसमें भी खा ली थीं.

चूंकि गांव में खुलेआम मिलनाजुलना जोखिम वाली बात थी, इसलिए दोनों अकसर धार्मिक आयोजनों में मिलते थे और वहां भक्तों की आंखों में धूल झोंक कर प्यार भरी बातें करते रहते थे. गांव देहातों में प्रेमीप्रेमिकाओं के मिलने को लिए मौल, पार्क या कौफी हाउस तो होते नहीं, इसलिए उन्हें खेत खलिहान या बाग बगीचे में जगह ढूंढनी होती है.

धार्मिक या शादी ब्याह जैसे सामूहिक आयोजन भी उन की आंखों की प्यास बुझाने का जरिया बन जाते हैं. प्रीति और गिरजेश का भी यही हाल था.

इस बात का अहसास गिरजेश को भी था और प्रीति को भी कि घर वाले आसानी से नहीं मानेंगे. लेकिन दोनों ही प्रीत में पूरी तरह डूब चुके थे. इसलिए उन की स्थिति असमंजस भरी थी. प्यारप्यार में गिरजेश तो प्रीति से शादी करने का वादा कर चुका था. प्रीति का भी यही हाल था, वह गिरजेश को अपना सब कुछ मान चुकी थी.

गिरजेश में इतनी हिम्मत नहीं थी कि दिल की बात मांबाप से कर सके. लेकिन उस में प्रीति से चोरीछिपे शादी करने का साहस न जाने कहां से आ गया था. जून के दूसरे हफ्ते में दोनों योजना बना कर भोपाल आए. गिरजेश का तो भोपाल आनाजाना लगा रहता था, लेकिन प्रीति इलाज के बहाने अपने भाई को साथ ले आई थी.

14 जून को दोनों नेहरू नगर स्थित आर्य समाज मंदिर गए. वहां उन्होंने मंदिर के प्रभारी प्रमोद वर्मा से शादी करने के लिए जानकारी ली कि क्याक्या औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और कौनकौन से कागज लगेंगे.

प्रमोद वर्मा के लिए यह हैरानी की बात नहीं थी, क्योंकि रोज कोई न कोई युगल आ कर ऐसी जानकारी हासिल करता था. बाद में उन में से कई शादी के लिए आते थे और भी शादी के ख्वाहिशमंद जोड़ों को बता दिया जाता था कि उन के फोटो, शपथ पत्र और आयु संबंधी प्रमाण पत्र के अलावा 2 गवाहों की जरूरत पड़ेगी.

यह जानकारी ले कर प्रीति और गिरजेश लौट आए और फिर 20 जून को जरूरी कागजात ले कर वहां पहुंच गए. दोनों के साथ नजदीकी रिश्तेदार या दोस्त भी थे. 20 जून की दोपहर को आर्य समाज पद्धति से दोनों की शादी हो गई और उन्हें शादी का प्रमाण पत्र भी जारी हो गया. इस से प्रीति और गिरजेश ने सुकून की सांस ली कि बिना किसी अड़ंगे के शादी संपन्न हो गई.

जुदा होते वक्त दोनों ने भविष्य के बारे में कुछ जरूरी बातें कीं और वापस अपने घर लौट गए. आर्य समाज मंदिर में गिरजेश ने अपना भोपाल का पता लिखवाया था.

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चोरीछिपे शादी तो कर ली पर दोनों को बाद की दुश्वारियों का अंदाजा नहीं था. अलबत्ता यह बात दोनों जानते थे कि ठाकुर सनातनी उसूलों के चलते औलाद की बलि तो चढ़ा सकते हैं पर उसूलों से कोई समझौता नहीं कर सकते.

बहरहाल शादी के 8 महीने तक दोनों अलगअलग रह कर एकदूसरे की जुदाई में तड़पते रहे. लेकिन गिरजेश की हिम्मत अपने मंत्री पिता को सच बताने की नहीं हुई. उलट इस के प्रीति के घर वालों को दूसरे दिन ही मंदिर में शादी की बात पता चल गई थी. लेकिन वे चुप थे, क्योंकि गिरजेश ने प्रीति से वादा किया हुआ था कि वह जल्द ही घर वालों को मना लेगा और उसे ससम्मान बहू की तरह घर ले जाएगा.

दुखी और गुस्साए चंदन सिंह उदयपुरा के अस्पताल में 17 मार्च को बेटी की लाश के पास खड़े हो कर यही आरोप लगा रहे थे, पर उन के निशाने पर गिरजेश नहीं बल्कि रामपाल सिंह थे. जाहिर है कि वे यह मानने को तैयार नहीं थे कि रामपाल सिंह को अपने बेटे की चोरीछिपे की गई शादी की खबर नहीं होगी.

चंदन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शादी के बाद गिरजेश प्रीति को यह कह कर मायके छोड़ गया था कि वह जल्द ही अपने मांबाप को राजी कर लेगा. प्रीति को उस ने तब तक खामोश रहने के लिए कहा था. रामपाल सिंह ने गिरजेश की सगाई कहीं और तय कर दी तो प्रीति मानसिक तौर पर परेशान हो उठी थी. खुदकुशी के एक दिन पहले उस ने फोन कर पति से बात भी की थी.

चंदन सिंह के मुताबिक शादी से नाखुश मंत्री रामपाल सिंह और उन का पूरा परिवार प्रीति को प्रताडि़त कर रहा था और उन से भी यह कहा जा रहा था कि वे कुछ ले दे कर प्रीति की शादी कहीं और कर दें. रामपाल सिंह ने ही प्रीति की जिंदगी बरबाद की है.

इस बयान के साथ ही प्रीति का लिखा सुसाइड नोट भी सामने आया जो लाल स्याही से लिखा गया था. सुसाइड नोट की भाषा से ही पता चल रहा था कि प्रीति जिंदगी के कितने बड़े इम्तहान और कशमकश से गुजर रही थी और आत्महत्या के सिवाय उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.

हादसे की रात गिरजेश प्रीति के घर के सामने वाले मकान में ही था, सुबह होने के पहले ही वह गायब हुआ था. इस के बाद प्रीति ने गिरजेश को उस का दिया हुआ मोबाइल फोन और 25 तोले सोने के गहने वापस लौटा दिए थे.

अपने सुसाइड नोट में प्रीति ने बारबार अपनी बड़ी गलती के लिए मांबाप से माफी मांगी थी और चंदन सिंह से आग्रह किया था कि वे मम्मी से न लड़ें और न ही चाचा को कुछ कहें.

प्रीति गिरजेश को किस हद तक चाहती थी, इस का अंदाजा उस के सुसाइड नोट से लगता है क्योंकि उस ने कहीं और उस का जिक्र नहीं किया था. तय है इसलिए कि वह गिरजेश की मजबूरी या बेवफाई कुछ भी कह लें समझ गई थी. वह चाहती तो गिरजेश की बेवफाई को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहरा सकती थी.

चंदन सिंह की शिकायत के बाद भी पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो राज्य का रघुवंशी समाज आक्रोशित हो उठा. मध्य प्रदेश में गुना, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, होशंगाबाद, बैतूल, नरसिंहपुर, जबलपुर और छिंदवाड़ा जिलों में रघुवंशी बहुतायत में हैं. प्रीति की मौत की खबर सुन कर लोग उदयपुरा पहुंचने लगे थे.

अब मोहब्बत पर सियासत होने लगी थी. भोपाल में कांग्रेसियों ने धरने प्रदर्शन शुरू कर दिए थे. कांग्रेसियों ने शिवराज सिंह मंत्रीमंडल के एक बेदाग छवि वाले मंत्री को घेरने का सुनहरा मौका हाथ से जाने नहीं दिया.

18 मार्च को बड़ी दिक्कत उस वक्त खड़ी हो गई, जब चंदन सिंह रघुवंशी और उन के परिजन इस जिद पर अड़ गए कि रामपाल सिंह प्रीति का शव लें और गिरजेश पति की जिम्मेदारी निभाते उस का अंतिम संस्कार करे. एफआईआर दर्ज न किए जाने पर रघुवंशी समाज ने भी आंदोलन की चेतावनी दे डाली थी और जगहजगह रामपाल सिंह के पुतले भी फूंके जा रहे थे.

दूसरी तमाम जातियों की तरह रघुवंशी जाति का भी अपना गौरवशाली इतिहास और अतीत है, जो इच्छावाकु से शुरू हो कर राम के बेटों लवकुश पर खत्म होता है. रघुवंशी समुदाय बड़े गर्व से खुद को राजा रघु और राम का वंशज बताता है.

यहां असल विवाद यही था जिसे हर कोई समझा कि असल लड़ाई जाति और ठसक की थी. रामपाल सिंह क्षत्रिय राजपूत हैं. हालांकि रसूख और हैसियत में रघुवंशी किसी से कम नहीं बैठते, जिन के बारे में इतिहास में यह दिलचस्प बात दर्ज है कि रघुवंशी जमींदार होते थे और वे खुद खेती नहीं करते थे, बल्कि करवाते थे.

अतीत के कई विवाद और जातिगत पूर्वाग्रह व किस्से कहानियां साकार हो रहे थे. रघुवंशी समुदाय ने जब साफ कह दिया कि मृतका प्रीति को रामपाल बहू मानें तभी उस का अंतिम संस्कार होगा तो अब बारी रामपाल सिंह की भी थी. वे या तो सर झुका कर इस मांग को मान लें या फिर अड़ कर भाजपा और शिवराज सिंह के लिए सिरदर्द खड़ा करें.

जब उन से इस बारे में सवाल किया गया तो वे साफ तौर पर बोले कि बेटे ने शादी कर ली है, यह उन्हें नहीं पता. गिरजेश सामने क्यों नहीं आ रहा, इस सवाल पर रामपाल सिंह का जवाब बड़ा मासूमियत भरा था कि उन की उस से बातचीत हुई है और वह साफ कह रहा है कि उसे फंसाया जा रहा है.

रामपाल सिंह ने अपने बचाव में यह भी कहा कि विपक्ष उन्हें और उन के परिवार को जानबूझ कर इस मामले में घसीट रहा है. यह बयान कितना खोखला है चालाकी भरा था, यह जल्द ही उजागर भी हो गया.

राज्य में माहौल गर्मा उठा था और 18 मार्च को ही उदयपुरा कस्बा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. किसी अनहोनी की आशंका से कोई इनकार नहीं कर रहा था.

कांग्रेस के ताबड़तोड़ हमलों से घबराए भाजपाई सब कुछ जानतेसमझते हुए भी रामपाल सिंह के बचाव को अपना धर्म या अधर्म जो भी समझ लें, निभा रहे थे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहते पल्ला झाड़ लिया था कि प्रीति रघुवंशी की मौत की जांच चल रही है और जल्द ही सभी तथ्य सामने आ जाएंगे.

गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी रामपाल सिंह का बचाव करते हुए कहा कि सुसाइड नोट में पीडि़ता ने किसी का भी नाम नहीं लिखा है. जांच चल रही है और जांच के बाद दोषियों पर काररवाई की जाएगी.

इधर उदयपुरा के अस्पताल जहां प्रीति का शव रखा हुआ था में भी खासा बवाल मचा हुआ था. इस दिन प्रीति के परिवार वालों ने 3 प्रार्थना पत्र प्रशासन को दिए. इन प्रार्थनापत्रों में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की मांग के अलावा रामपाल सिंह से सुरक्षा की मांग की गई थी कि अगर भविष्य में उन को कुछ हुआ तो उस का जिम्मेदार रामपाल सिंह को माना जाए.

रायसेन की कलेक्टर और एसपी पूरी कोशिश कर रही थीं कि जैसे भी हो प्रीति का अंतिम संस्कार हो जाए. पर यह आसान काम नहीं था, क्योंकि रघुवंशी समाज रामपाल सिंह को मंत्री पद से हटाने की मांग करने लगा था. इधर भोपाल में भी कांग्रेसियों की तरफ से बयानबाजी जारी थी. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का आरोप था कि पूरी सरकार रामपाल सिंह और उन के बेटे को बचाने में लगी हुई है, जबकि प्रथम दृष्टया प्रीति की मौत के जिम्मेदार ये दोनों ही हैं.

रायसेन की कलेक्टर भावना वालिंबे निष्पक्ष जांच की बात करती रहीं तो एसपी किरणलता केरकेड़ा ने साफ तौर पर कहा कि मामले में अभी आरोपों के प्रमाण नहीं आए हैं, जांच जारी है.

रायसेन से भोपाल के आर्य समाज मंदिर गई पुलिस टीम को मंदिर संचालक प्रमोद वर्मा ने प्रीति और गिरजेश की शादी का प्रमाणपत्र सौंपा, जिस की प्रति भी वायरल हुई तो लोगों के दिल से यह शक जाता रहा कि इन दोनों की शादी वास्तव में हुई थी भी या नहीं.

दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने वालों के साथसाथ भड़काने वालों की फौज भी इकट्ठा हो गई थी. एक पक्ष के लोगों की राय यह थी कि बगैर एफआईआर दर्ज हुए अंतिम संस्कार हुआ तो सारा मामला बेदम हो जाएगा.

मामला चूंकि ठाकुर रामपाल सिंह का था, इसलिए प्रशासन एफआईआर दर्ज करने की हिम्मत या हिमाकत नहीं कर पा रहा था. अब तक जो हुआ था, उस में गिरजेश की बुजदिली और रामपाल सिंह की चालाकी साफ दिखाई दे रही थी. इस पर यह दोहा सटीक बैठ रहा था कि समरथ को नहीं दोष गुसाईं.

प्रीति अगर जिंदा होती तो जरूर ये नजारे देख और चर्चे सुन कर शर्म से मर जाती. राजनैतिक उठापटक के बीच कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के दफ्तरों में बतियाते कार्यकर्ता अपनाअपना हिसाबकिताब पेश कर रहे थे कि जिस सिलवानी विधानसभा से रामपाल सिंह जीतते रहे हैं, उस में रघुवंशी मतदाताओं की तादाद 40 हजार से ज्यादा है.

ऐसे में अब भाजपा उन्हें सिलवानी तो क्या विदिशा रायसेन की किसी भी विधानसभा सीट से नहीं उतार सकती, क्योंकि हर जगह रघुवंशी वोट खासी तादाद में हैं, जो अब उन्हें नहीं मिलेंगे.

प्रीति के बौखलाए परिजनों ने उत्तेजना और आक्रोश में रामपाल सिंह के खिलाफ कुछ सच्चे और कुछ झूठे आरोप लगा दिए थे, पर इस के बाद क्या होगा यह सोच कर वे घबरा भी उठे थे.

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अपना दबाव बढ़ाने की गरज से ये लोग दाह संस्कार से मना कर रहे थे, लेकिन स्थिति उस वक्त और अप्रिय हो उठी जब प्रीति के भाइयों ने उस का शव नैशनल हाइवे पर रख कर चक्का जाम करने की धौंस दे डाली.

बात में और दम लाने के लिए प्रीति के चाचा जयसिंह ने खुलासा किया कि प्रीति और गिरजेश की शादी में प्रीति का छोटा भाई नीरज भी मौजूद था. उस ने शादी के फोटो खींचने की कोशिश की थी, लेकिन गिरजेश के साथियों ने उसे फोटो नहीं खींचने दिए थे. शादी का प्रमाणपत्र भी प्रीति को नहीं दिया गया था, इसलिए फरवरी में वे लोग प्रमाणपत्र लेने गए थे.

प्रीति की मां रामाबाई ने नया रहस्योद्घाटन यह किया कि उन्हें शादी की जानकारी 21 जून को ही हो गई थी. कुछ दिन बाद दोनों परिवारों की मीटिंग भी हुई थी, जिस में गिरजेश की मां शशिप्रभा ने दोटूक कहा था कि वे प्रीति को अपनी बहू नहीं मानेंगी और जरूरत पड़ी तो गिरजेश को गोली मार देंगी.

इन सब बातों के बीच अंतिम संस्कार खटाई में पड़ता नजर आया तो समाज के कुछ बुजुर्ग आगे आए और सभी को समझाया. फलस्वरूप प्रीति के घर वाले क्रियाकर्म करने के लिए तैयार हुए. सूरज ढलने के कुछ देर पहले प्रीति को मुखाग्नि उस के भाई ने दी. प्रीति को बाकायदा दुलहन की तरह सजा कर, सुहागन की तरह दुनिया से विदा किया गया.

अब तक ये बातें बहुत आम हो चुकी थीं कि प्रीति और गिरजेश का प्रेमप्रसंग बीते 6 सालों से चल रहा था और उदयपुरा का बच्चाबच्चा जानता था कि दोनों शादी कर चुके हैं. लेकिन जाने क्यों बेटे की शादी की खबर दुनिया भर की खबर रखने वाले रामपाल सिंह को नहीं थी.

अब तक रामपाल सिंह की खासी छीछालेदर हो चुकी थी. व्यक्तिगत के बजाए हर कोई राजनैतिक नफानुकसान देखने और आंकने लगा था. कांग्रेस ने जगहजगह घेराव कर विधानसभा में हल्ला किया और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर डाला, क्योंकि वे सदन में इस मामले पर बहस की इजाजत नहीं दे रहे थे.

एक बार दूसरे दिन फिर से पाला बदलते रामपाल सिंह ने चौंका देने वाला यह बयान दे डाला कि वे प्रीति को बहू का दर्जा देने को तैयार हैं, क्योंकि बेटे गिरजेश ने उस से शादी की थी.

इतना ही नहीं पत्नी के अंतिम संस्कार तक घर में दुबके बैठे गिरजेश को उन्होंने प्रीति की खारी उठाने भी भेज दिया. खारी का कार्यक्रम मुखाग्नि के तीसरे दिन होता है. कुछ लोग इसे तीजा भी कहते हैं. यह और बात है कि गिरजेश के साथ करीब 60 लोगों की फौज थी.

प्रीति के अंतिम संस्कार के बाद उस का यह डर सच साबित हुआ कि उस की मौत के बाद उस के घर वालों को परेशान किया जा सकता है. चंदन सिंह एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश करते रहे और पुलिस जांच की बात कहते उन्हें टालती रही. अब नेता तो नेता आम लोग भी शिवराज सिंह को कोसने लगे कि वे बडे़ फख्र से खुद को मामा तो कहलवाते हैं, लेकिन प्रीति नाम की भांजी को इंसाफ नहीं दिला पा रहे हैं.

23 मार्च को जब चंदन सिंह को बयान देने के लिए पुलिस ने भोपाल बुलाया तो उन से ऐसेऐसे बेतुके सवाल पूछे गए कि उन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा. प्रीति मांग भरती थी या नहीं, मंगलसूत्र और दूसरे सुहाग चिन्ह पहनती थी या नहीं, जैसे सवालों से जाहिर हो गया कि सत्ता पक्ष अब अपनी पर उतारू हो आया है.

इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पुलिस ने गिरजेश या किसी और के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की थी. चंदनसिंह का परिवार हैरानपरेशान और घबराया हुआ था और उदयपुरा में खुद को असुरक्षित बता रहा था. लेकिन उन की सुनवाई कहीं नहीं हो रही थी. कांग्रेसी पहले की तरहतरह से रामपाल सिंह और शिवराज सिंह चौहान पर हमलावर थे. राज्य में लड़कियां सुरक्षित कैसे हैं, इन नारों को तरहतरह से उछाला जा रहा था.

प्रीति की प्र्रेमकथा का अंत दुखद हुआ, लेकिन विवाद का नहीं जो इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा होगा और इस का असर भाजपा सरकार की छवि पर पड़ना अभी से तय नजर आ रहा है.

चोरीछिपे शादी करने का अंजाम अकसर खतरनाक साबित होता है और हर बार प्रेमी अपने वादे पर खरा उतरे यह जरूरी नहीं. प्रीति की मौत से ये बातें साबित हो रहीं हैं कि जो प्रेमी की बेवफाई पति की बुजदिली और ठाकुरों की ठसक का शिकार हुई.

देखा जाए तो इस मामले का बड़ा गुनहगार गिरजेश है, जिसे मंत्री पुत्र होने का फायदा मिला. प्रीति ने गिरजेश पर विश्वास किया था और एवज में विश्वासघात मिला तो उस ने मौत को गले लगा लिया.

आधार कार्ड की जकड़न

सुप्रीम कोर्ट ने आधारकार्ड पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. क्या आधार नंबर को टैलीफोन, बैंक अकाउंट, परिचयपत्र, आयकर, पैनकार्ड से जोड़ना अनिवार्य होना चाहिए. दुनियाभर में निजता एक गंभीर मामला बनता जा रहा है. जहां चीन और रूस में सरकारें जानकारी को नागरिकों के अधिकारों को कुचलने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं लोकतांत्रिक देशों में इस का उपयोग हर नागरिक के बारे में और जानने व उस को अपना माल बेचने को उकसाने के लिए किया जा रहा है. आधार जैसे तरीके से एकत्र की गई जानकारी की जम कर खरीदफरोख्त हो रही है. फेसबुक, व्हाट्सऐप, गूगल भी जबरन आम नागरिक की जानकारी जमा कर लेते हैं. यही जानकारी फिर नागरिकों को बहलानेफुसलाने में इस्तेमाल करते हैं.

अब आप के मैडिकल रिकौर्ड भी जमा हो रहे हैं. आप किसी भी अस्पताल में चले जाइए, आप का आधारकार्ड भी मांग लिया जाएगा और आधार से जुड़ी आप के खून की बूंदबूंद की जानकारी एक जगह इकट्ठी होती रहेगी. आप का मैडिकल रिकौर्ड अब सरकारी होता जा रहा है. आप का मैडिकल इतिहास गोपनीय होना चाहिए पर हर बड़े अस्पताल में यह बीसियों कंप्यूटरों में पड़ा है. आप का ईसीजी, स्कैन रिपोर्ट, लैब रिपोर्ट, कब किस डाक्टर ने आप को देखा सब कंप्यूटर पर है. जल्द ही आप ने कौन सी दवा कितनी खाई, यह जानकारी भी आधार से जुड़ी फार्मेसी से एक जगह जमा हो जाएगी. आप किसी से कोई बात छिपा नहीं सकेंगे. आप के हर पल पर सरकार का नियंत्रण होगा.

सरकारें चाहेंगी कि आप तंदुरुस्त गुलाम रहें, इसलिए चीन की तरह अंक देना शुरू कर देंगी, जैसे क्रैडिट कार्ड या हवाईजहाज वाले आप को पौइंट्स देते हैं. चीन तो सड़क पर चलते हुए अपने लाखों कैमरों से नागरिकों को देख रहा है और हरदम नागरिकों को अनुशासित कर रहा है. भारत में भी आधार को यदि सरकार की मनचाही छूट मिली तो यही होगा.

यदि मैडिकल डाटा उपलब्ध होगा तो नौकरियां मिलने में जांचा जाएगा. इंश्योरैंस कंपनी प्रीमियम बढ़ा देगी, एयरलाइंस कंपनी टिकट का दाम बढ़ा देगी, मकानमालिक किराया ज्यादा वसूलेगा, स्कूल बच्चों को मातापिता के मैडिकल रिकौर्ड के अनुसार दाखिला देगा. सरकारी या निजी क्षेत्र में पदोन्नति में मैडिकल रिकौर्ड देखा जाएगा. विवाहों में भी इसे इस्तेमाल किया जाएगा. हर नागरिक असल में जल्द ही कंप्यूटर की जंजीरों का गुलाम बनने जा रहा है और कोई कुछ नहीं कर सकता. ये जंजीरें हम ने खुद को पहनाई हैं.

पत्नी का स्वच्छता अभियान

उस दिन सुबहसुबह अपनी पत्नी की कोयल जैसी आवाज सुन कर मैं चौंक गया कि हर पल शेरनी जैसी दहाड़ने वाली मेरी श्रीमतीजी में यह कायापलट कैसे हो गया?

वे प्यार भरी आवाज में बोलीं, ‘‘अजी उठिए और गरमागरम चाय पीजिए.’’

मेरी आंखों को विश्वास ही नहीं हुआ कि ये मेरी ही धर्मपत्नी हैं.

मैं ने डरतेडरते पूछ ही लिया, ‘‘प्रिय, क्या तुम सचमुच मेरी पत्नी ही हो या मैं कोई सपना देख रहा हूं?’’

‘‘हांहां, मैं तुम्हारी ही धर्मपत्नी हूं. चलिए, जल्दी से चाय पी कर फारिग हो जाइए और घर के सारे काम निबटा दीजिए,’’ मेरी ‘स्वीटहार्ट’ मेरे गले में अपनी बांहें डालते हुए बोलीं.

मैं ने किसी अच्छे आज्ञाकारी कुत्ते की तरह अपनी दुम हिलाते हुए कहा, ‘‘ओके डार्लिंग, जब तुम आज हम पर इतनी मेहरबान हो, तो समझो कि घर का सारा काम भी हो ही गया.’’

मेरी महबूबा जोरजोर से हंसते हुए बोलीं, ‘‘यह हुई न मर्दों वाली बात.’’

हमारी सारी पड़ोसनें भी इसलिए तो जलीभुनी रहती हैं कि उन के ‘मर्द’ घर के किसी काम में हाथ नहीं डालते हैं, जबकि मैं हर रोज पत्नी के काम में हाथ बंटाता रहता हूं.

इस के बाद मेरी अप्सरा जैसी पत्नी ने किसी जासूस की तरह राज उगलते हुए कहा, ‘‘आज से मैं अपने महल्ले में ‘स्वच्छता अभियान’ की शुरुआत करूंगी, क्योंकि गलीगली में शोर है कि ‘स्वच्छ भारत’ बनाने के लिए साफसफाई अभियान रफ्तार पकड़ रहा है.’’

मैं ने अपनी समझदार बीवी का आइडिया सुना, तो हैरान रह गया. जिस औरत को टैलीविजन देखने, क्लब जाने का चसका लगा हो, उस के लिए अपने घर को साफसुथरा रखना बहुत मुश्किल काम है.

मैं बुदबुदाया, ‘जेब में नहीं धेला, चढ़ना रेला.’ मतलब, जेब में पैसा नहीं और सफर करना रेल का. अपने घर के अंदरबाहर चाहे गंदगी पसरी हो, पर सनक चढ़ी है महल्ले में ‘स्वच्छता अभियान’ में कुछ करदिखाने की.

मैं ने अपनी स्वप्नसुंदरी पत्नी को टोकते हुए पूछा, ‘‘डार्लिंग, क्या तुम अकेले ही पूरा महल्ला साफ करोगी?’’

‘‘नहींनहीं, मैं अकेले ही इस गंदगी में हाथ नहीं डालूंगी, बल्कि महल्ले की जो औरतें अपना टाइमपास करने के लिए एकदूसरे के घरों में सेंध लगा कर पारिवारिक रिश्तों को तोड़ने में माहिर हैं, उन को एक मंच दिया जा रहा है और मैं उन की रिंग लीडर हूं,’’ मेरी पत्नी किसी पहलवान की तरह अपनी छाती ठोंकते हुए बोलीं.

मुझे अपनी पत्नी की इन बचकानी हरकतों को जान कर बड़ी कोफ्त हुई. मैं फिर बुदबुदाया, ‘पता नहीं, घर में अब कौन सा जलजला आने वाला है.’

मेरी पत्नी मेरा चेहरा देख कर कहने लगीं, ‘‘शायद तुम मेरी कामयाबी के मनसूबे जान कर जलने लगे हो. आखिर मर्द हो न तुम… सारी की सारी अक्ल तुम्हीं में ही है.’’

मैं ने अपनी बीवी को प्यार से समझाया, ‘‘बेगम साहिबा, बड़ी मुश्किल से तुम मेरी जिंदगी में आई हो, फिर ऐसी दिल तोड़ने वाली बातें कर के क्यों मेरी लानतमलानत कर रही हो? आखिर तुम मेरी चांद जैसी खूबसूरत महबूबा हो.’’

थोड़ी देर बाद तिल का ताड़ बनाने वाली मेरी पत्नी जींस व टीशर्ट पहन कर हाथ में झाड़ू पकड़े हुए आईं और कहने लगीं, ‘‘सचसच बताओ कि मैं अब कैसी लग रही हूं?’’

मेरा दिल किया कि पत्नी को डांटते हुए कहूं, ‘तुम ‘स्वच्छता अभियान’ में जा रही हो या किसी फूहड़ मौडलिंग शो में?’ पर अपने दब्बू स्वभाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह अपने ‘मन की बात’ नहीं कह सका.

तभी बाहर आंगन में बड़े जोर का शोर सुनाई दिया. महल्ले की वे औरतें जो महल्ले की गंदगी को साफ करने जाने वाली थीं, हमारे ही घर की ओर कूच कर रही थीं. साथ ही साथ बैनर व गत्तों पर लिखे नारों का शोर भी बड़ा कानफाड़ू था. ‘गलीगली में शोर है, साफसफाई का जोर है’, ‘जब तक सूरजचांद रहेगा, ‘सफाई अभियान’ का नाम रहेगा’, ‘जब भी नारी ने झाड़ू को उठाया, गंदगी ने सिर नहीं उठाया’, ‘मर्दों को हम देतीं ललकार, औरतों पर न करो अत्याचार’ वगैरह.

तभी मेरी पत्नी ने उन सब पड़ोसनों को कुछ टिप्स दिए कि ‘स्वच्छता अभियान’ को इस ढंग से चलाना है कि मीडिया व दूसरे लोगों को लगे कि सचमुच ही औरतें साफसफाई के प्रति गंभीर हैं. फिर कल जब चहुंओर हमारी चर्चा होगी, तो देखना कि कोई इस गांव को भी गोद ले लेगा. अखबारों में फोटो छपेंगे सो अलग.

इस के बाद वे सभी जब घर से चली गईं, तो मेरा दिल जोरजोर से धड़कने लगा कि पता नहीं मेरी जानलेवा बीवी कौन सा करिश्मा कर के आ जाएंगी कि मेरी बचीखुची जिंदगी भी समाज के लोगों के ताने सुन कर नासूर बन जाए.

मुझे तो दिनभर अपने दफ्तर में भी बौस की खरीखोटी सुननी पड़ती है, जबकि मेरे साथी पीठ पीछे यह कहने से नहीं चूकते हैं, ‘बेचारा क्या करे, यह तो जोरू का गुलाम है.’

दफ्तर से घर आओ, तो काम के बोझ के मारे वैसे ही दम निकल जाता है. और तो और घर का काम भी मेरे कंधों पर टिका है. बस, किसी तरह पत्नी खुश रहे, इसी गम में हर रोज मरताखपता रहता हूं. अगर किसी के पास इस समस्या से निबटने का इलाज है, तो जरूर बताए.

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