बात बढ़ी तो आग भी बढ़ी और एक रोज दोनों तन की इस आग में मर्यादा को जला बैठे. इस के बाद मिथलेश के लिए सतीश ही सब कुछ हो गया. वह उस का ज्यादा से ज्यादा सान्निध्य पाने के लिए लालायित रहने लगी. इस तरह सतीश और मिथलेश का रिश्ता मजबूत हो गया.मिथलेश से मिलन की भूख मिटाने के लिए सतीश कभीकभी शाम को गजेंद्र के लिए शराब भी ले आता था. दोनों एक साथ बैठ कर पीतेखाते और जब गजेंद्र नशे में धुत हो कर खर्राटे भरने लगता तो मिथलेश और सतीश के देह मिलन का सफर शुरू हो जाता. यह सिलसिला महीनों चलता रहा.
सतीश को मिथलेश से इतना लगाव हो गया था कि वह उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. सतीश ने मिथलेश के पति गजेंद्र को आर्थिक मदद दे कर उसे एक पुरानी कार खरीदवा दी. इस कार का उपयोग गजेंद्र टैक्सी के रूप में करने लगा. वह बुकिंग पर शहर से बाहर भी जाने लगा. सतीश के इस एहसान से दोनों बहुत खुश हुए.एक रोज गजेंद्र ने मिथलेश से कहा कि बुकिंग पर वह इटावा जा रहा है. वहां उसे रात को रुकना भी पड़ेगा. वह रात को उस का इंतजार न करे और बच्चों का खयाल रखे.
रंगेहाथों पकड़ी गई मिथलेश
यह सूचना मिथलेश के लिए काफी खुशी वाली थी. गजेंद्र टैक्सी ले कर घर से चला गया तो मिथलेश ने फोन पर प्रेमी सतीश से बात की और बताया कि रात को गजेंद्र घर पर नहीं होगा. यह सुन कर सतीश भी खुश हो गया.शाम ढलते ही सतीश मिथलेश के घर आ गया. मिथलेश ने उस के लिए खानेपीने का इंतजाम किया. देर रात तक खानेपीने का दौर चलता रहा. फिर दोनों कमरे में कैद हो गए. लेकिन सुबह करीब 4 बजे अचानक गजेंद्र लौट आया. उस ने कमरे का दरवाजा खटखटाते हुए मिथलेश को आवाज दी. लगभग 5 मिनट बाद मिथलेश ने दरवाजा खोला और उस के दोनों पल्ले पकड़ कर वहीं खड़ी हो गई.
‘‘क्यों? कमरे के अंदर आने नहीं दोगी मुझे?’’ गजेंद्र बोला.
मिथलेश के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं और उस की भयभीत आंखें नीचे झुकी हुई थीं. तभी गजेंद्र को कमरे के अंदर से किसी चीज के गिरने की आवाज सुनाई दी तो उस ने पूछा, ‘‘अंदर कौन है?’’मिथलेश ने कोई जवाब नहीं दिया. गजेंद्र का मन आशंका से भर उठा. उस ने मिथलेश को धकेल कर एक ओर किया और कमरे के अंदर घुस गया. अंदर कदम रखते ही सामने का दृश्य देख कर उस के तनबदन में आग लग गई. सतीश वहां पलंग के नीचे छिपने का असफल प्रयास कर रहा था.
गजेंद्र उसे देख कर चीखा, ‘‘खड़ा हो जा और चुपचाप यहां से भाग जा, वरना तेरी जान ले लूंगा. तू तो आस्तीन का सांप निकला.’’गजेंद्र का गुस्सा देख कर सतीश सिर पर पैर रख कर भाग गया. मिथलेश अभी तक पकड़े गए चोर की तरह मुंह लटकाए खड़ी थी. गजेंद्र का पूरा शरीर गुस्से से जल रहा था. उस ने नफरत से पत्नी को देखा और पैर पटकता बाहर निकल गया. इस बीच सतीश वहां से रफूचक्कर हो चुका था. गजेंद्र ने आसपास देखा और लौट कर अंदर आ गया.
आते ही गजेंद्र ने मिथलेश की चुटिया पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया. फिर लातघूंसों से बेतहाशा मारने लगा. मिथलेश रोनेगिड़गिड़ाने लगी. लेकिन गजेंद्र नेमिथेलश को तभी छोड़ा जब वह उसे मारतेमारते थक गया.इस घटना के बाद गजेंद्र ने अपने घर में सतीश के आने पर पाबंदी लगा दी. उस की दोस्ती में भी दरार आ गई. दोनों ने साथ महफिल जमानी भी छोड़ दी. इस के साथ ही उस ने बड़े बेटे से कह दिया कि अब अगर कभी सतीश घर आए तो वह उसे जरूर बताए.
पति गजेंद्र से छुटकारा चाहती थी मिथलेश
सतीश मिथलेश से मिलने कई दिनों तक नहीं आया. लेकिन मिथलेश की मोहब्बत के कारण वह अपने दिल से मजबूर था. उस की आंखें मिथलेश को देखने के लिए तरसने लगीं और दिल बेचैन रहने लगा.
आखिर जब सतीश से नहीं रहा गया तो एक दोपहर मिथलेश से मिलने उस के घर पहुंच गया. मिथलेश उस समय घर पर अकेली थी. उस के दोनों बच्चे स्कूल गए थे और गजेंद्र अपनी टैक्सी कार ले कर निकल गया था.
सतीश को घर आया देख कर मिथलेश के मुरझाए चेहरे पर बहार आ गई. उस ने सतीश की आंखों में झांक कर देखा तो उस की आंखें डबडबा आईं. वह भावावेश में आ कर सतीश से लिपट गई. फिर उस ने कहा, ‘‘मुझे बचा लो सतीश, वरना यह जालिम किसी रोज तुम्हारी मिथलेश को मार ही डालेगा.’’सतीश ने मिथलेश को तसल्ली देते हुए समझाया. इस के बाद दोनों काफी देर तक वहीं बैठेबैठे बातें करते रहे. बातों ही बातों में सतीश ने पूछा, ‘‘अगर वह अपनी हरकत बंद नहीं करता तो उसे ठिकाने क्यों न लगा दिया जाए? फिर हम दोनों आराम से ऐश की जिंदगी व्यतीत करेंगे.’’
‘‘तुम जो भी करना चाहो करो. सतीश, मेरी जिंदगी उस राक्षस के हाथों से बचा लो. वरना वह मुझे छोड़ेगा नहीं. जिस रोज उस ने मुझे तुम्हारे साथ देखा था, उसी रोज मुझे मारतेमारते बेहोश कर दिया था. उस ने मेरे शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं छोड़ा, जहां जख्म न दिए हों.’’ कहने के साथ मिथलेश ने सतीश को अपने शरीर पर आई अनेक चोटों के निशान दिखाए.यह सब देख कर सतीश की आंखें क्रोध से जल उठीं. वह कुछ सोचते हुए बोला, ‘‘मैं जल्द ही उस का कोई न कोई उपाय खोजता हूं. मैं अपने जीते जी तुम पर इस तरह का जुल्म नहीं होने दूंगा. तुम पर जुल्म करने वाले को सबक सिखा कर ही रहूंगा. बस तुम हमारा साथ देना.’’
यह सुनते ही मिथलेश ने सतीश का हाथ पकड़ कर अपने हाथों में ले लिया. फिर बोली, ‘‘तुम जैसा भी कहोगे सतीश, अब मैं वैसा ही करूंगी. भले ही वह काम कितना ही जोखिम भरा क्यों न हो.’’डुबो कर पति की कर दी हत्यायोजना के तहत सतीश ने गजेंद्र से माफी मांगी और दोबारा गलती न करने का वादा किया. बारबार माफी मांगने से गजेंद्र का दिल पिघल गया और उस ने उसे माफ कर दिया. इस के बाद सतीश का गजेंद्र के घर फिर से आनाजाना शुरू हो गया. दोनों की महफिल भी जमने लगी.
27 जुलाई, 2020 को सतीश और मिथलेश ने योजना के तहत घूमने का प्रोग्राम बनाया. इस के लिए मिथलेश ने अपने पति गजेंद्र को भी राजी कर लिया. गजेंद्र अपनी कार से जिसे वह टैक्सी के रूप में चलाता था, घर से पत्नी व दोस्त के साथ निकला. वे दिन भर घूमते रहे. रात 8 बजे वे इटावा पहुंचे.
यहां सतीश ने गजेंद्र को शराब पिलाई फिर वह सैफई पहुंचे. अब तक गजेंद्र पर नशा हावी हो चुका था. सतीश ने सैफई हवाई पट्टी के पास नहर किनारे कार रोकी फिर गजेंद्र को सीट बेल्ट पहना कर कार नहर में ढकेल दी. डूबने से गजेंद्र की मौत हो गई. इस के बाद दोनों लौट आए.
28 जुलाई, 2020 की सुबह सैफई पुलिस ने गजेंद्र की लाश बरामद की और अज्ञात में पोस्टमार्टम कराया. चूंकि पुलिस को कोई तहरीर नहीं मिली थी और युवक की मौत पानी में डूबने से हुई थी, इसलिए इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और आत्महत्या मान कर फाइल बंद कर दी.
पति को ठिकाने लगाने के बाद मिथलेश अपनी ससुराल पहुंची. उस ने ससुरालीजनों को गजेंद्र के लापता होने की जानकारी दी और 2 महीने तक घडि़याली आंसू बहाती रही. उस के बाद एक रोज बच्चों के साथ गायब हो गई. ससुरालीजनों ने तब थाना पचेरी में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.ससुरालीजनों को चकमा देने के बाद मिथलेश अपने दोनों बेटों के साथ नोएडा आ गई और अपने प्रेमी सतीश चंद्र यादव के साथ उस की पत्नी बन कर रहने लगी. लौकडाउन में सतीश की नौकरी छूट गई थी.अब उस ने एक पुरानी कार खरीद ली थी और टैक्सी के रूप में चलाने लगा था. वह टोकन के रूप में कटियार ट्रैवल एजेंसी की पर्ची का प्रयोग करता था. हालांकि एजेंसी ने टोकन पर्ची देनी बंद कर दी थी.
मिथलेश का भिड़ गया पहाड़ी युवक से टांका
मिथलेश और सतीश ने लगभग एक साल तक हंसीखुशी जीवन बिताया. उस के बाद उन के जीवन में कड़वाहट का जहर घुलने लगा. उस का पहला कारण था मिथलेश की फैशनपरस्ती और रंगीनमिजाजी.
दरअसल, मिथलेश का मन भटकने लगा था और उस का टांका एक पहाड़ी युवक से भिड़ गया था. वह उस से खुल कर बतियाती थी और उस के साथ शौपिंग करने भी जाती थी. सतीश को यह सब पसंद नहीं था. अत: घर में कलह होने लगी.
इधर सतीश की पहली पत्नी कमला को भी जानकारी हो गई थी कि सतीश ने 2 बच्चों की मां मिथलेश को पत्नी का दरजा दे दिया है और शहरी मेम के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा है.कोई भी औरत पति की उपेक्षा और मारपीट तो सह सकती है, लेकिन पति का बंटवारा सहन नहीं कर सकती है. कमला को भी सहन नहीं हुआ और उस ने विरोध शुरू कर दिया. सतीश जब भी घर जाता वह उसे जलील करती और झगड़ा करती.
घरवाली का विरोध और मिथलेश की रंगीनमिजाजी से टैक्सी चालक सतीश चंद्र यादव बौखला गया. इसी बौखलाहट में उस ने मिथलेश की हत्या की योजना बना डाली.
योजना के तहत सतीश ने मिथलेश से कहा कि उस के गांव के पास नाग देवता का मंदिर है. वह वहां दर्शन के लिए जाना चाहता है. चाहो तो तुम भी बच्चों के साथ चलो. नाग देवता के दर्शन के लिए मिथलेश राजी हो गई.21 जून, 2022 को मिथलेश सजधज कर तैयार हुई. फिर उस ने दोनों बच्चों को भी तैयार किया. पूजा सामग्री की थाली भी सजाई. उस के बाद सतीश के साथ कार में बैठ कर नाग देवता के दर्शन के लिए निकल पड़ी.सतीश मिथलेश और बच्चों को खिलातापिलाता रात 8 बजे नोएडा से इटावा पहुंचा. इटावा में कुछ देर रुकने के बाद रात 9 बजे सतीश अपने गांव रमपुरा से 2 किलोमीटर दूर स्थित नाग देवता के मंदिर पहुंचा. अब तक दोनों बच्चे कार में सो गए थे.
मंदिर सुनसान जगह पर था और चारों ओर सन्नाटा पसरा था. सतीश ने सड़क किनारे कार खड़ी कर दी. मिथलेश पूजा का थाल सजा कर कार से उतरी और नाग देवता मंदिर पहुंची. वहां उस ने पूजाअर्चना की. इसी बीच सतीश ने तमंचा लोड कर लिया था.मिथलेश पूजा कर के जैसे ही कार के पास आई, तभी उस ने पीछे से कनपटी से तमंचा सटा कर फायर कर दिया.मिथलेश के मुंह से चीख निकली और वह सड़क पर बिछ गई. पूजा की थाली व सामग्री भी बिखर गई. सड़क खून से लाल हो गई. कुछ मिनट तड़पने के बाद मिथलेश ने दम तोड़ दिया.
मिथलेश की हत्या के बाद सतीश ने उस के शव को सड़क से घसीट कर खेत किनारे नाली में डाल दिया. फिर शव से सारे आभूषण उतार कर सुरक्षित अपने पास रख लिए. आभूषण उतारते समय ही ट्रैवल एजेंसी की टोकन पर्ची उस की जेब से गिर गई. उस के बाद वह कार व उस में सो रहे बच्चों सहित फरार हो गया.
वह बच्चों को ले कर घर पहुंचा और घर वालों को बता दिया कि इन की मां अस्पताल में भरती है.
घर वालों को पहले से ही सतीश और मिथलेश के संबंधों की जानकारी थी, इसलिए उस के अस्पताल में भरती होने की वजह से चुप रहे. लेकिन जब पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर लिया, तब उन्हें सच्चाई
पता चली.
पुलिस ने अभियुक्त सतीश चंद्र यादव से पूछताछ करने के बाद उसे इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. मिथलेश के दोनों बच्चों को उस के मायके वालों के सुपुर्द कर दिया गया था.



