दलितों और पिछड़ों की जिंदगी आज भी इतनी सस्ती है कि लोग राह चलते जोड़ों को पकड़ कर जाति पूछ कर उन की लड़की का मजे में रेप कर सकते हैं और देश व समाज की भौंहों पर एक बल भी नहीं पड़ता. कश्मीरकश्मीर चिल्लाने वाले, मंदिर को बचाने वाले न जाने कहां चले जाते हैं जब एक दलित व पिछड़ी जाति की लड़की का बलात्कार दिन में उस के साथी के साथ हो रहा होता है.

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