खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस को जिन दो संदिग्धों की फोटो देकर ‘नजर’ रखने को कहा था, पुलिस ने जोश में आकर उसका सारा ‘नजारा’ दिखा दिया. क्योंकि खुफियां ऐजेंसियों ने इंटरनली अलर्ट के लिए कहा था. पुलिस ने सारी जगह पोस्टर चिपकवा दिए. जब खिंचाई हुई तो पुलिस ने सोमवार रात में चिपके हुए पोस्टर छुड़ाए, साफ कराए और उसकी लिखित रिपोर्ट बनाकर भेजी है.

पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी कर अचानक ही शहर भर में पोस्टर चिपकवाए. खासकर पहाड़गंज के इलाके में चप्पे-चप्पे पर ये फोटो रातोंरात चिपकवा दिए. उसमें दिखाई दे रहे दो युवकों को पाकिस्तानी आतंकवादी बताया, लोगों से चौकन्ना रहने की अपील की, दिल्ली में घुस आने होने की आशंका जताई. साथ ही दोनों के देखे जाने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने के लिए नंबर भी जारी कर दिया. मगर पोस्टर में दिख रहे दोनों युवकों के बारे में नया खुलासा होते ही दिल्ली पुलिस अब बैकफुट पर आ गई है. दिल्ली पुलिस की इस हड़बड़ी को लेकर खिचाईं भी हो रही है.

सूत्रों का कहना है कि दरअसल, इंडियन व इंटरनैशनल नंबरों से ऑपरेट हो रहे वॉट्सऐप ग्रुप, फेसबुक व अन्य सोशल साइट्स पर खुफिया एजेंसियां निगरानी रखती हैं. इस तस्वीर पर नजर पड़ी, जिसमें दोनों युवक उर्दू में लिखे एक माइलस्टोन पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. इसमें दिल्ली 360 किलोमीटर और फिरोजपुर 9 किलोमीटर लिखा हुआ था.

दिल्ली का नाम लिखा होने की वजह से खुफियां एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस को तस्वीर जारी करते हुए एहतियात बरतने के लिए कहा. साथ ही दिल्ली पुलिस में इंटरनली अलर्ट एडवाइजरी जारी करने को कहा गया था. इसी कड़ी में पीएचक्यू से सेंट्रल डिस्ट्रक्ट को इंटरनली मैसेज भेजा गया. \मगर आतंकवादियों के खिलाफ कुछ ज्यादा ही हाई अलर्ट मोड में आते हुए पुलिस ने जोश में पोस्टर बनवाकर होटलों, गेस्ट हाउसों व जगह जगह चिपकवा दिए. सावधान रहने की चेतावनी दी गई और किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर पहाड़गंज पुलिस से संपर्क करने की अपील भी की गई.

तस्वीर में नज़र आ रहे युवकों द्वारा सोमवार 26 नवंबर, को पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक प्रेस वार्ता की गई. प्रेस वार्ता में युवकों ने दिल्ली पुलिस द्वारा किए जा रहे सभी दावों को खारिज़ कर कहा कि वह आतंकवादी नहीं बल्कि फैसलाबाद में तालीम-ए-इस्लामिया के छात्र हैं और कभी भारत नहीं गए. उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल और धार्मिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं. वह पाकिस्तान में मौजूद हैं और सबके सामने उपस्थित हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि 11 नवंबर को रायविंड इज्तिमा के दौरान वो लाहौर गए थे और ये तस्वीर उस समय ली गई थी जब वो गांदा सिंध बॉर्डर पर थे. उन्होंने कहा कि वो नहीं जानते कि उनकी यह तस्वीर कैसे दिल्ली पुलिस के पास पहुंची. दोनों छात्रों के नाम तय्यब और नदीम हैं. इस चूक से दिल्ली पुलिस की खिचाईं हुई.

वे दोनों स्टूडेंट नहीं, संदिग्ध आतंकवादी ही हैं

दो युवकों का फोटो जारी करके दिल्ली पुलिस ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी बताया था. उनके बारे में कहा जा रहा है कि वे पाकिस्तान के स्टूडेंट्स हैं. हालांकि, स्पेशल सेल के सूत्रों का कहना है कि वे मासूम स्टूडेंट्स नहीं हैं बल्कि दोनों का संबंध आतंकवादी संगठन जैश के साथ है.

सेल के सूत्रों के मुताबिक, उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि वह दोनों जैश से जुड़े हुए हैं. कुछ कारणों से अभी पूरे मामले की जानकारी नहीं दी जा सकती. आने वाले दिनों में उनसे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.

सूत्रों का कहना है कि अगर दोनों मासूम थे तो पाकिस्तान की ओर से उन्हें मासूम बताने में 13 दिनों की देरी क्यों की गई. वहां की इंटेलिजेंस को तो इस बात की जानकारी थी. अब लगता है कि पाकिस्तान की ओर से एक नया खेल शुरू किया जा रहा है कि जिन युवाओं को भारतीय खुफिया एजेंसियां आतंकी होने के शक में पकड़े उन्हें मासूम बताकर स्टूडेंट बता दिया जाए.

फोटो में दिखाई दे रहे इन दोनों कथित स्टूडेंट की लोकेशन कुछ समय पहले फिरोजपुर के पास मिली थी. मगर, वहां से वे अचानक गायब हो गए.

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