राजस्थान का बाड़मेर जिला रेतीले धोरों के लिए प्रसिद्ध है. करीब दोढाई दशक पहले कुछ कंपनियों

ने बाड़मेर सहित आसपास के कुछ अन्य जिलों में खोज की तो यहां के रेतीले धोरों के पीछे कच्चे तेल एवं गैस का अथाह भंडार मिला. इस के बाद केंद्र सरकार ने अलगअलग बेसिन बना कर राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को तेल एवं प्राकृतिक गैस के दोहन की जिम्मेदारी सौंप दी.

करीब 2 दशक से राजस्थान के करीब 21 ब्लौकों में तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज एवं दोहन का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है. जानीमानी कंपनी केयर्न इंडिया की ओर से बाड़मेर के 10 ब्लौकों में पैट्रोलियम की खोज के लिए 700 से अधिक कुआें की खुदाई की गई.

इन में मंगला, मंगला ईओआर, सरस्वती, रागेश्वरी, रागेश्वरी दक्षिण, रागदीप, भाग्यम, एनआई, एनई एवं ऐश्वर्या ब्लौक शामिल हैं. केयर्न इंडिया ने जो कुएं खोदे, उन में से 380 कुओं में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस के दोहन का काम चल रहा है. बाकी 58 कुएं ड्राई हो कर फेल हो गए, जबकि 270 कुओं में खोज का काम चल रहा है.

अगस्त, 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाड़मेर में केयर्न इंडिया के एक आयलफील्ड का उद्घाटन किया था. केयर्न इंडिया के पास देश का सब से बड़ा खजाना बाड़मेर के मंगला ब्लौक में है. मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (एमपीटी) में पिछले कई सालों से क्रूड आयल की बड़े पैमाने पर चोरी हो रही थी.

क्रूड आयल को काला सोना भी कहा जाता है. काले सोने के खजाने में चोरी की छोटीमोटी घटनाएं यदाकदा सामने आती रहती थीं. पुलिस इस पर काररवाई भी करती रहती थी. आरोपियों की गिरफ्तारी होती और अधिकांश मामलों में क्रूड आयल की बरामदगी हो जाती.

इसी साल 14 जुलाई को बाड़मेर जिले की थाना नगाणा पुलिस ने किसी की शिकायत पर तेल का एक टैंकर पकड़ा. वह टैंकर नरेंद्र रोडलाइंस का था. उस टैंकर की जांच की गई तो उस के 3 चैंबरों में प्रोड्यूस्ड वाटर (अशोधित पानी) और 2 चैंबरों में क्रूड आयल भरा था.

आगे की जांच में पता चला कि टैंकर चालक ने क्रूड आयल के साथ अशोधित पानी भर कर केवल उसी के कागजात तैयार कराए थे. यह टैंकर मंगला टर्मिनल में खाली होना था, लेकिन वह वहां से बाहर आ गया था. पुलिस ने इस मामले में टैंकर चालक सताराम और हेल्पर धर्माराम को गिरफ्तार कर लिया.

इस मामले में केयर्न इंडिया के लीगल अफसर गणपत सिंह चौहान की रिपोर्ट पर थाना नगाणा पुलिस ने 14 जुलाई को मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद थानाप्रभारी केसर कंवर ने मामले की जांच शुरू की.

बाड़मेर के एसपी गगनदीप सिंगला को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने क्रूड आयल के चोरी के मामले को गंभीरता से लिया. उन्हें लगा कि यह मामला छोटामोटा नहीं, बल्कि इस में किसी माफिया का हाथ हो सकता है. मामले की जांच के लिए कई सीनियर अधिकारियों की टीम गठित की गई. टीम ने गिरफ्तार किए गए सताराम और धर्माराम से पूछताछ की. उन दोनों से की गई पूछताछ के बाद क्रूड आयल चोरी के मामले की जड़ें बहुत गहराई तक फैली मिलीं.

इस में केयर्न इंडिया कंपनी के कर्मचारियों के अलावा राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के नेता भी संलिप्त पाए गए. पुलिस ने तेजी से काररवाई करते हुए 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया. उन्होंने बताया कि बाड़मेर से चोरी हुआ क्रूड आयल गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों तक पहुंचता था.

एसपी गगनदीप सिंगला ने 21 जुलाई को प्रेस कौंन्फ्रैंस में बताया कि केयर्न इंडिया के उत्पादन केंद्रों से रोजाना 15 से 20 हजार लीटर क्रूड आयल की चोरी हो रही थी. मौजूदा रेट के हिसाब से रोजाना करीब 3 लाख रुपए का क्रूड आयल चोरी हो रहा था. इस तरह साल भर में करीब 11-12 करोड़ रुपए के क्रूड आयल की चोरी हो रही थी और यह सिलसिला कई सालों से चला आ रहा था.

लोगों का मानना है कि पुलिस ने 14 जुलाई को 2 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले के खुलासे में जितना समय लगाया, वह संदेह के दायरे में हैं. इसी वजह से लोगों को लग रहा है कि पुलिस बडे़ लोगों को बचा सकती है. क्षेत्रीय विधायक एवं सांसद ने भी इस मामले में सवाल उठाए हैं. मामला जयपुर और दिल्ली तक पहुंच गया है.

इस के बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच राजस्थान पुलिस के स्पैशल औपरेशन ग्रुप (एसओजी) को सौंप दी है. एसओजी ने जांच भी शुरू कर दी है.

इस से पहले बाड़मेर पुलिस की करीब 2 सप्ताह तक चली जांच और गिरफ्तार आरोपियों से की गई पूछताछ मे ंजो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

सरस सलिल विशेष

केयर्न इंडिया के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल के तहत गुढ़ामलानी, भाड़खां, बायतू सहित कई क्षेत्रों में तेल कुएं हैं. तेल के इन कुओं से क्रूड आयल के साथ अशोधित पानी भी निकलता है. क्रूड आयल को रिफायनरी में अलगअलग तापमान पर शोधित किया जाता है तो उस में से पैट्रोल, डीजल, नेप्था कैमिकल, लुब्रिकेटिंग आयल, तारकोल आदि बनाए जाते हैं.

कुओं से निकलने वाले अशोधित पानी में कई तरह के अपशिष्ट पदार्थ होते हैं. इस पानी को मशीनों से साफ कर के दूसरे कामों में उपयोग लायक बनाया जाता है. यह पानी जमीन के साथसाथ इंसानों और पशुओं के लिए भी हानिकारक होता है. इसलिए इस पानी को कहीं फेंका या बहाया नहीं जाता.

कुओं से निकलने वाला क्रूड आयल और अशोधित पानी टैंकरों द्वारा उत्पादन केंद्र से कंपनी के ही कई किलोमीटर क्षेत्र में फैले अलगअलग प्लांटों तक ले जाया जाता है. ये प्लांट मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में लगे हैं.

क्रूड आयल और अशोधित पानी को उत्पादन केंद्र से मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनपल तक पहुंचाने का ठेका कंपनी ने विभिन्न कंपनियों को दे रखा है. ठेके पर लगे इन टैंकरों पर नजर रखने के लिए कंपनी ने जीपीएस लगा रखे हैं.

जांच में पता चला कि केयर्न इंडिया ने तेल उत्पादन केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से टैंकरों के मालिक, चालक व हेल्पर टैंकरों में अशोधित पानी के बजाय क्रूड आयल भरवा कर लाते थे और टैंकरों के ढक्कन के सील तोड़ कर आसपास की फैक्ट्रियों में बने भूमिगत टैंकों में खाली कर देते थे.

इस के बाद खाली टैंकरों में सादा पानी भर कर ये टैंकर मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल पहुंचते और वहां टैंकर का पानी खाली कर देते. केयर्न के तेल उत्पादन केंद्र एवं अनलोडिंग पौइंट पर तैनात कर्मचारियों को इस गोरधंधे का पता था.

पर टैंकर मालिक इन कर्मचारियों को अवैध रूप से मोटी रकम देते थे, इसलिए वे चुप रहते थे. जैसेजैसे जांच आगे बढ़ती गई, अधिकारी हैरान होते गए कि लोगों ने किस तरह चोरी के नएनए रास्ते निकाल लिए थे. जांच में सामने आया कि तेल उत्पादन केंद्र से जो टैंकर मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल के लिए जाते थे, वे केवल निश्चित स्थानों पर ही रोके जा सकते थे.

इस की मौनिटरिंग जीपीएस द्वारा की जाती थी. पर गोरखधंधे में लगे टैंकर मालिकों और फैक्ट्री मालिकों ने जीपीएस की मौनिटरिंग में लगे कर्मचारियों से मिल कर इस का भी तोड़ निकाल लिया था. उन्होंने अपनी गाडि़यों, स्कौपियो, स्विफ्ट डिजायर व दुपहिया वाहनों में जीपीएस की पिन का इंस्टालेशन करवा लिया था.

इस के बाद ये लोग टैंकर को रास्ते में धोरीमन्ना और मांगता नामक स्थान के बीच कुछ मिनट के लिए रोक लेते और वहीं पर टैंकर में लगे जीपीएस को पिन से निकाल कर स्कौर्पियो, स्विफ्ट डिजायर या बाइक से जोड़ देते.

इस के बाद टैंकर चालक वहां से तेज गति से टैंकर चला कर उस फैक्ट्री के भूमिगत टैंकों में क्रूड आयल को डाल आते थे, जहां उन की सेटिंग थी. वहीं टैंकर में पानी भर लिया जाता था.

इस के बाद टैंकरों पर जीपीएस को दोबारा इंस्टाल कर दिया जाता था. इस तरह जीपीएस को टैंकर से हटा कर अपनी कार पर लगाने में करीब 40 मिनट का समय मिल जाता था. इस 40 मिनट में ही रोजाना लाखों रुपए के क्रूड आयल को दूसरी फैक्ट्रियों में पहुंचा दिया जाता था.

जिन फैक्ट्रियों में क्रूड आयल पहुंचाया जाता था, वे बख्तरबंद किले से कम नहीं हैं. वहां बाहर से किसी को कुछ नजर नहीं आता. फैक्ट्री में बाहर से हर आनेजाने वाले पर कड़ी निगरानी रहती थी. फैक्ट्री के गेट किसी अपरिचित के लिए नहीं खुलते थे. क्रूड आयल से भरे टैंकर के प्रवेश करते ही फैक्ट्री का गेट बंद कर दिया जाता था.

टैंकर को तत्काल खाली करने और उस में पानी भरने के लिए इलैक्ट्रिक फाइटर का उपयोग किया जाता था. इस में केवल 30 मिनट ही लगते थे.

टैंकर से क्रूड आयल खाली करने के बाद भूमिगत टैंकों पर सैकड़ों पुराने टायरों का ढेर लगा दिया जाता था, ताकि किसी को पता न चल सके कि वहां भूमिगत टैंक बने हुए हैं.

मुकदमों में सौ से अधिक लोग नामजद किए गए हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक फैक्ट्री मालिक गौतम सिंह राजपुरोहित के अलावा ओमप्रकाश, आदूराम, उकाराम, पर्बत सिंह, हुकमाराम एवं सब से पहले 14 जुलाई को पकड़े गए सताराम व धर्माराम शामिल हैं.

अभियुक्तों से की गई पूछताछ में पता चला कि केयर्न इंडिया के तेल उत्पादन केंद्रों से टैंकरों में अशोधित पानी के नाम पर चोरीछिपे भर कर लाए जाने वाले क्रूड आयल को बाड़मेर- अहमदाबाद एनएच-15 पर खेत सिंह के प्याऊ के पास स्थित फैक्ट्री में अपलोड किया जाता था. इस फैक्ट्री के मालिक महाबार के रहने वाले गौतम सिंह एवं भूर सिंह राजपुरोहित हैं.

पुलिस ने इस फैक्ट्री पर दबिश दे कर पुराने टायरों के नीचे अंडरग्राउंड बनाए गए टैंकरों से करीब 3500 लीटर क्रूड आयल बरामद किया. इस कू्रड आयल का रासायनिक परीक्षण केयर्न इंडिया की प्रयोगशाला में कराया गया. इस से पता चला कि यह क्रूड आयल केयर्न इंडिया के आयल फील्ड का ही था. इस संबंध में सदर थाने में भादंवि की धारा 420, 120बी व 3/7 आवयश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.

जांच में पता चला कि भूर सिंह राजपुरोहित ने इस फैक्ट्री का राजस्थान के वाणिज्यिक कर विभाग में दिसंबर, 2012 में ग्रीनटेक एंटरप्राइजेज के नाम से रजिस्टे्रशन कराया था. इस फर्म ने 5 साल में केवल एक बार रिटर्न भरा. बाकी सालों में कोई माल खरीदा या बेचा नहीं गया. इस फैक्ट्री के एक संचालक का गुजरात में पालनपुर के पास तारकोल प्लांट भी बताया जाता है. वहां से होलसेल सप्लाई के लिए तारकोल बाड़मेर भी आता था.

पुलिस को इस के अलावा एक अन्य फैक्ट्री के बारे में पता चला. यह फैक्ट्री गादान रोड पर थी. पुलिस को यहां भी कंकरीट और टायरों के नीचे 8 भूमिगत टैंक मिले. इन टैंकों में 43 हजार लीटर क्रूड आयल मिला. पुलिस ने इस की जांच कराई तो यह केयर्न इंडिया की साइट सरस्वती-1, सरस्वती-2 एवं आरजीटी से उत्पादित क्रूड आयल निकला.

इसी फैक्ट्री से 150 लीटर अवैध केरोसिन और विशेष रासायनिक पाउडर के 60 कट्टे भी बरामद हुए. इस का उपयोग क्रूड आयल से डीजल बनाने में किया जाता है. पुलिस ने इस संबंध में सदर थाने में भादंवि की धारा 420, 120बी व 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया.

जांच में पता चला कि फैक्ट्री मालिक गौतम सिंह राजपुरोहित व भूर सिंह राजपुरोहित टैंकर मालिकों से साढ़े 7 रुपए प्रति लीटर की दर से क्रूड आयल खरीदते थे. इसी क्रूड आयल को ये औसतन 25 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से आगे बेच देते थे. इस तरह वे साढ़े 17 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मुनाफा कमाते थे.

टैंकर मालिक जो क्रूड आयल साढ़े 7 रुपए प्रति लीटर बेचते थे, उस में से साढ़े 3 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से तेल उत्पादन केंद्र पर तैनात केयर्न इंडिया कंपनी के कर्मचारियों को दिया जाता था. इस साढ़े 3 रुपए प्रति लीटर में से एक रुपया प्रति लीटर सर्वेयर को मिलता था और बाकी रकम हेल्पर एवं अन्य कर्मचारियों में बांट दी जाती थी. टैंकर मालिक एमपीटी पर तैनात जीपीएस के कर्मचारियों व सर्वेयर को भी कुछ हिस्सा देते थे.

पुलिस जांच में सामने आया है कि केयर्न इंडिया के आयल फील्ड के दक्षिणी इलाके में नरेंद्र रोडलाइंस एवं श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के 44 टैंकर लगे हुए थे. प्रारंभिक जांच में इन में से 39 टैंकरों के जरिए क्रूड आयल की चोरी होने की बात सामने आई है. इस के बाद पुलिस ने जीपीएस के कार्डिनेट के माध्यम से 33 टैंकर जब्त कर लिए.

चोरी के क्रूड आयल को निजी फैक्ट्री मालिक टैंकरों में भर कर गुजरात, कोलकाता व अन्य जगहों पर भेजते थे. 22 जुलाई को पुलिस ने जालौर जिले में कू्रड आयल की चोरी के मामले में 3 फैक्ट्रियों पर दबिश दी. इन फैक्ट्रियों में 20 हजार लीटर क्रूड आयल बरामद हुआ. इन फैक्ट्रियों में बाड़मेर से केयर्न इंडिया का चोरी का क्रूड आयल भेजा जाता था.

बाड़मेर एवं जालौर पुलिस ने संयुक्त काररवाई कर जालौर जिले के सांचोर क्षेत्र में बीढ़ाणी स्थित एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में दबिश दे कर टैंकर में भरा 20 हजार लीटर क्रूड आयल जब्त किया. वहीं जालौर के ही सिवाड़ा में कुलदीप ट्रांसपोर्ट कंपनी के बख्तरबंद बाड़े में भूमिगत टैंक में क्रूड आयल मिला. यहां भी क्रूड से डीजल बनाने वाला सफेद रंग का रासायनिक पदार्थ मिला.

उसी दिन बाड़मेर पुलिस ने सदर थाने में दर्ज मामले में 2 लोगों पांचाराम विश्नोई व धौलाराम विश्नोई को गिरफ्तार किया. इन के टैंकर भी केयर्न इंडिया में लगे हुए थे. पुलिस ने इन से 2200 लीटर क्रूड आयल जब्त किया. इन्होंने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वे टैंकरों में से आधा क्रूड आयल निकाल कर उस के स्थान पर पानी भर देते थे.

23 जुलाई, 2017 को पुलिस ने बाड़मेर जिले में ही भाड़खा की एक फैक्ट्री अपने कब्जे में ले ली. मामले में नए खुलासे होते रहे तो जिला कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जांच शुरू कर दी. वहीं पैट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई.

पुलिस ने 24 जुलाई को केयर्न इंडिया के अधिकारियों को पत्र लिख कर कई तरह के रिकौर्ड मांगे. इतना ही नहीं, पुलिस ने 25 जुलाई को केयर्न इंडिया के प्रोडक्शन हैड मनोज अग्रवाल एवं औपरेशन हैड वाई.के. सिंह से पूछताछ की. दूसरी ओर केयर्न इंडिया ने काररवाई करते हुए 2 कंपनियों श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी व नरेंद्र रोडलाइंस के परिवहन ठेके निरस्त कर दिए. कुछ कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया.

कंपनी के कई स्थाई कर्मचारियों को बर्खास्त करने की काररवाई शुरू कर दी गई. पुलिस ने 26 जुलाई को इस मामले में कांग्रेस के बाड़मेर जिला आईटी सेल के सह कोऔर्डिनेटर मनोज गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया.

वह श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी में मैनेजर का काम करता था. पुलिस का कहना है कि मनोज गुर्जर चोरी का क्रूड आयल खरीदने वाली फैक्ट्री के मालिक गौतम सिंह राजपुरोहित से प्रति टैंकर 10 हजार रुपए की वसूली करता था.

सरस सलिल विशेष

केयर्न इंडिया में किराए के टैंकर उपलब्ध कराने का ठेका श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं नरेंद्र रोडलाइंस ने ले रखा था. श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी बाड़मेर के सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी के चचेरे भाई लालचंद की है. हालांकि बाड़मेर के सांसद कर्नल सोनाराम कहते हैं कि लालचंद रिश्ते में उन के भाई जरूर हैं, लेकिन पिछले 8 सालों से उन दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई है. क्योंकि लालचंद ने सोनाराम की पत्नी व बेटे के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा रखे हैं. श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से बाड़मेर रिफायनरी के लिए भूमि अवाप्ति से प्रभावित किसानों एवं कई अन्य ठेकेदारों के टैंकर किराए पर लगे हुए हैं.

कहा जाता है कि श्रीमोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी में एक भाजपा नेता के रिश्तेदार के टैंकर लगाने की बात पर ठेकेदार से विवाद हो गया था. इस विवाद ने तूल पकड़ लिया. इस के बाद नगाणा थाना पुलिस ने उस नेता की शिकायत पर 14 जुलाई को क्रूड आयल चोरी के मामले में एक टैंकर को पकड़ लिया. इसी शिकायत के बाद क्रूड आयल चोरी के गोरखधंधे का खुलासा हुआ.

इस पूरे मामले में मजेदार बात यह है कि केयर्न इंडिया में दोनों कंपनियों की ओर से जो टैंकर अनुबंध पर लगे थे, उन टैंकरों के मालिक को ठेकेदार हर महीने 50 हजार रुपए किराया देता था. तेल कुओं से कू्रड आयल चोरी कर एमपीटी से बाहर निजी फैक्ट्री तक पहुंचाने पर टैंकर मालिक को हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपए तक कमीशन मिल जाता था. कई बार क्रूड आयल की मात्रा अधिक होने पर कमीशन की राशि भी बढ़ जाती थी.

यह बात भी सामने आई है कि क्रूड आयल की चोरी मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल की सीधी पाइप लाइन से नहीं होती थी. पाइप लाइन के जरिए क्रूड आयल सीधे एमपीटी पहुंचता है. इस की मात्रा व सप्लाई का डेटा औनलाइन रहता है. इसलिए वे वैलपैड से क्रूड आयल चुराते थे, क्योंकि वैलपैड का रिकौर्ड आफलाइन रहता है.

एक बात और पता चली है कि वैलपैड से क्रूड आयल टैंकर में भर कर एमपीटी में खाली करने का रूट करीब 60 किलोमीटर लंबा है. ऐसे में जीपीएस सिस्टम से दूरी 60 किलोमीटर दिखानी होती थी. गुढ़ामलानी क्षेत्र के वैलपैड से क्रूड आयल के टैंकर एनएच-15 से होते हुए मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल पहुंचते थे.

इस के लिए गोरखधंधे में लिप्त लोगों ने खेत सिंह की प्याऊ के पास निजी फैक्ट्री लगा रखी थी. वहीं भाड़खा क्षेत्र में आने वाले वैलपैड से चलने वाले टैंकरों का क्रूड खाली करने के लिए भीमड़ा के पास दूसरी फैक्ट्री लगाई गई, ताकि रूट के बीच में ही टैंकर खाली हो जाए और किसी बाहरी व्यक्ति को पता न चले.

तेल एवं प्राकृतिक गैस राष्ट्रीय संपत्ति है. इन के दोहन से सरकार को भी अरबों रुपए का राजस्व मिलता है. राजस्थान विधानसभा में पेश की गई एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक सन 2015 में बाड़मेर जिले में प्रतिदिन एक लाख 74 हजार बैरल खनिज तेल का उत्पादन किया जा रहा था. इस से राज्य सरकार को सन 2014-15 के दौरान रायल्टी के रूप में औसतन 400 करोड़ रुपए प्रति माह एवं भारत सरकार को पैट्रोलियम सैस एवं एनसीसीडी के रूप में औसतन 416 करोड़ रुपए प्रति माह का राजस्व मिल रहा था.

बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. राजनीतिक दबाव के कारण केयर्न इंडिया के बड़े अफसरों व नेताओं के रिश्तेदारों के खिलाफ काररवाई नहीं की जा रही है. जैन ने बायतू विधायक कैलाश चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.

जैन का आरोप है कि बायतू विधायक जिस गाड़ी में घूमते हैं, वह रेवंतराम की है और उसी के टैंकर लगाने को ले कर विवाद हुआ था. इस के बाद बायतू विधायक की शिकायत पर ही क्रूड आयल से भरा टैंकर पकड़ा गया था और पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ था. विधायक श्री जैन का कहना है कि काल डिटेल्स की जांच कराई गई तो मामले में कई अहम खुलासे होंगे.

बाड़मेर विधायक जैन ने अप्रैल, 2015 में राजस्थान विधानसभा में केयर्न इंडिया की साइटों से क्रूड आयल चोरी का मामला उठाया था. इस पर सरकार ने जवाब दिया था कि एक अक्तूबर, 2014 से 28 फरवरी, 2015 तक बाड़मेर जिले के 4 थानों में 4 अलगअलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इन में 49 हजार लीटर क्रूड आयल बरामद हुआ था. इन मामलों में 10 लोग मुलजिम थे.

दूसरी ओर बायतू विधायक कैलाश जैन की ओर से लगाए आरोपों को मिथ्या व निराधार बताते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग इस में लिप्त हैं, इसलिए वे इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. विधायक चौधरी ने इस मामले में दिल्ली जा कर केंद्रीय पैट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान से मुलाकात की और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की.

बहरहाल, काले सोने की चोरी के इस गोरखधंधे में एक ओर जहां राजनीति चल रही है, वहीं एसओजी ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. एसओजी इस मामले में कई बड़े लोगों पर हाथ डाल सकती है. लेकिन सरकार को क्रूड आयल की चोरी से अब तक जो करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई है, उस की भरपाई कभी नहीं होगी. दूसरी ओर इस गोरखधंधे के उजागर होने से केयर्न इंडिया जैसी नामी कंपनियों की सुरक्षा की पोल खुल गई है.

– कहानी पुलिस सूत्रों व अन्य दस्तावेजों पर आधारित

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