6 भाईबहनों में गोपाल सेजाणी सब से छोटा था. कुछ समय पहले एक दुर्घटना में उस के पिता की मौत के बाद मां ने दूसरी शादी कर ली थी. बच्चों को छोड़ कर वह दूसरे पति के साथ कहीं और जा कर रहने लगी थी. बच्चे अकेले पड़ गए तो उन की देखभाल के लिए उन के मौसा हरसुख पटेल आगे आए. उन्होंने बच्चों को सहारा दिया. उस समय गोपाल की उम्र यही कोई 11 साल थी.

हरसुख अपने बच्चों की तरह उन की भी देखभाल कर रहे थे. सब ठीकठाक चल रहा था, लेकिन 8 फरवरी, 2017 को एक अनहोनी घट गई. शाम को हरसुख अपने स्कूटर पर गोपाल को बिठा कर गांव की तरफ आ रहे थे. उन का दोस्त महादेव भी उन के साथ था.

गांव के बाहर उन की मुलाकात नितेश मंड से हो गई. वह एनआरआई था, जो स्थाई रूप से लंदन में रहता था. उन दिनों वह भारत आया हुआ था. हरसुख को रोक कर वह उन से बातें करने लगा. उन्हें बातचीत करते हुए कुछ ही मिनट हुए होंगे कि मोटरसाइकिल से 2 लड़के आए और पास खड़े गोपाल को उठा कर भागने लगे.

नितेश ने उन का विरोध किया. जबकि हरसुख ने जान पर खेल कर गोपाल को बचाने की कोशिश की. लेकिन दोनों लड़कों के पास हथियार थे, जिस की वजह से वह उन का मुकाबला नहीं कर सके. वे लड़के हरसुख को घायल कर गोपाल को अपने साथ ले जाने में सफल हो गए. शोरशराबा सुन कर वहां काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. हरसुख गंभीर रूप से घायल थे, इसलिए उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया.

सूचना पा कर थानाप्रभारी ए.वी. टिल्वा पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी ने मुख्य मार्गों की नाकेबंदी करवा दी. वह भी अपहर्त्ताओं को तलाशने लगे, पर उन का पता नहीं चल सका.

अगले दिन औटोचालक श्यामण अपने औटो से केशोड़ हाईवे से गुजर रहा था, तभी उस की निगाह अचानक एक गड्ढे की तरफ चली गई. उस गड्ढे में उसे एक छोटा लड़का जख्मी हालत में पड़ा दिखाई दिया. श्यामण ने औटो रोक कर देखा तो वह खून से लथपथ था. उस की सांस अभी चल रही थी. श्यामण उसे अपने औटो से केशोड़ अस्पताल ले गया.

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डाक्टरों ने बच्चे को बचाने की बहुत कोशिशें कीं, लेकिन उस की मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन द्वारा इस की सूचना पुलिस को दी गई तो थानाप्रभारी ए.वी. टिल्वा हरसुख को साथ ले कर केशोड़ अस्पताल पहुंच गए. हरसुख ने उस की शिनाख्त गोपाल सेजाणी के रूप में कर दी.

चलती सड़क पर सरेराह एक बच्चे के इस तरह अपहृत हो जाने से लोगों में डर बैठ गया था. जब उस की मौत की बात सामने आई तो मामला और उछल गया. पुलिस ने इस मामले को भादंवि की धारा 361 के तहत दर्ज कर लिया. बाद में इस में भादंवि की धाराएं 364 और 302 और जोड़ दी गईं. जूनागढ़ के एसपी निलेश जिगाडि़या ने इस सनसनीखेज मामले की जांच के लिए एक स्पैशल टीम गठित कर दी थी.

हरसुख पटेल ने अपनी शिकायत में किसी को आरोपी नहीं बनाया था और न ही किसी पर शंका जाहिर की थी. एसपी जिगाडि़या ने उन से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की. उन्होंने सीधेसीधे बताया कि साजिश रच कर गोपाल का अपहरण कर के उस की हत्या की गई है. अपहरण फिरौती के लिए नहीं, बल्कि किसी अन्य मकसद से किया गया है. इस के पीछे नितेश मंड के अलावा एनआरआई आरती का हाथ है.

एसपी ने आरती के बारे में पूछा तो हरसुख पटेल ने उन्हें आरती के बारे में विस्तार से बता दिया. 53 वर्षीया आरती लोकनाथ धार बरसों पहले भारत से लंदन गई थी और वहीं बस गई थी. कभीकभी वह भारत भी आती रहती थी. उन्होंने लंदन में अपना एक अपार्टमेंट बनवा लिया था, जिस में कई किराएदार रहते थे. उन्हीं में एक नितेश मंड भी था. नितेश से आरती की खासी बनती थी.

मूलरूप से नितेश पंजाब का रहने वाला था, लंदन जाने से पहले वह गुजरात में जा कर कारोबार करने लगा था. गुजरात के कई लोग उस के संपर्क में थे. उन्हीं में हरसुख पटेल भी थे. वह जूनागढ़ के पास मालियाहाटिन गांव में रहते थे. नितेश का भी वहां पर एक मकान था.

नितेश मंड से हरसुख की जानपहचान थी. करीब एक साल पहले की बात है. एक दिन नितेश हरसुख के पास आया. इधरउधर की बातें करने के बाद उस ने कहा, ‘‘हरसुख भाई, बुरा न मानो तो एक बात कहूं?’’

‘‘हां, कहो.’’ हरसुख ने सहज भाव से कहा.

‘‘आप ने अपनी साली के बच्चों की जो जिम्मेदारी अपने ऊपर ले रखी है, यह बहुत बड़ी बात है.’’ नितेश ने कहा.

‘‘पता नहीं यह बड़ी बात है या छोटी, पर इतना जरूर जानता हूं कि मैं अपना फर्ज पूरा कर रहा हूं. एक तरह से वे भी मेरे ही बच्चे हैं.’’

‘‘यह तो आप की महानता है हरसुख भाई, वरना आज के महंगाई के जमाने में अपने परिवार की गुजर करना ही मुश्किल हो रहा है, ऐसे में आप… इस बारे में मेरा मन आप की मदद करने को कर रहा है.’’

‘‘कैसी मदद?’’ हरसुख पटेल ने हैरानी से पूछा.

‘‘कुछ ऐसी मदद, जिस से आप के कंधे का बोझ थोड़ा हलका हो जाए और आप के सब से छोटे भांजे गोपाल का भविष्य भी संवर जाए.’’

‘‘मैं कुछ समझा नहीं, जो कुछ कहना चाहते हो, खुल कर कहो.’’ हरसुख ने नितेश के चेहरे को सवालिया नजरों से देखते हुए कहा.

‘‘ऐसा है हरसुख भाई, लंदन में जहां मैं रहता हूं, उस अपार्टमेंट की मालकिन एक सज्जन महिला हैं. वह मूलरूप से हिंदुस्तानी हैं. उन के पास बहुत कुछ है. इसलिए वह सब की मदद करती रहती हैं. वह बहुत ही नेकदिल औरत हैं.’’

‘‘यह तो बड़ी अच्छी बात है. लेकिन उन के बारे में आप मुझे क्यों बता रहे हैं?’’ हरसुख ने पूछा.

‘‘मैं उन के बारे में इसलिए बता रहा हूं क्योंकि इतनी भलाई का काम करने के बावजूद उन्हें संतान सुख नहीं मिला. एक बच्चे की मां कहलाने को तरसती हैं वह. मैं चाहता हूं कि…’’

‘‘…यानी कि मैं अपना गोपाल उन के हवाले कर दूं.’’ हरसुख ने नितेश की बात बीच में ही काट कर कहा.

‘‘अरे नहीं भाई, ऐसा नहीं है. उन्हें औलाद पैदा नहीं हुई तो इस का मतलब यह नहीं है कि वह किसी का बच्चा छीनना चाहती हैं.’’

‘‘तो क्या चाहती हैं वह?’’

‘‘दरअसल, वह एक भारतीय बच्चा कानून के अनुसार गोद लेना चाहती हैं. मैं सोचता हूं कि अगर आप के छोटे भांजे को उन का दत्तक पुत्र बना दिया जाए तो उस की जिंदगी बन जाएगी. आप इस बारे में सोच लीजिए.’’ नितेश ने कहा.

हरसुख सचमुच सोचने लगे. आखिर उन्होंने नितेश से कह दिया कि वह इस बारे में उसे कल बताएंगे. भांजे के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए हरसुख ने नितेश का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. इस के बाद नितेश एडौप्शन पेपर तैयार कराने लगा. उस ने आरती को भी भारत आने के लिए फोन कर दिया था. आरती भी लंदन से हिंदुस्तान आ गई.

हरसुख को हर तरह से आश्वस्त कर आरती ने बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली. उस के बाद हरसुख को समझाया कि वह बच्चे का पासपोर्ट बनवा कर रखें, जल्दी ही वीजा लगवा कर वह उसे अपने पास लंदन बुला लेगी. इस के बाद वह लंदन चली गई. नितेश भी उस के साथ चला गया था. यह सन 2015 की बात है.

हरसुख ने एसपी निलेश जिगाडि़या को बताया कि इस के बाद उन लोगों ने गोपाल के नाम से लंदन में ही जीवन बीमा करवा लिया था. इंडियन करेंसी के मुताबिक उस पौलिसी की वैल्यू एक करोड़ रुपए से भी ज्यादा थी. बीमा कराने के बाद वह उस से बच्चे का पासपोर्ट जल्द बनवाने को कहते रहे. लेकिन काफी कोशिश के बाद भी बच्चे का पासपोर्ट नहीं बन सका, जिस से वह लंदन नहीं जा सका.

हरसुख की बात सुन कर एसपी सारा माजरा समझ गए. नितेश को संदेह के आधार पर हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. इस पूछताछ में एनआरआई होने के नाते वह पुलिस को ही धमकाने लगा. पुलिस उस की धमकी में नहीं आई. उस से जब सख्ती से पूछताछ की गई तो तो उस ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए.

उस ने गोपाल की हत्या कराने की बात स्वीकार कर ली. पुलिस ने 13 फरवरी, 2017 को उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर के 6 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि में उस से सघन पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने पुलिस को गोपाल की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह एक अनोखी अपराध कथा थी—

लंदन में आरती धार के अपार्टमेंट में किराए पर रहते हुए नितेश मंड उस से काफी घुलमिल गया था. उम्र में अच्छाखासा अंतर होने की वजह से दोनों के बीच मांबेटे जैसा रिश्ता कायम हो गया था. दोनों आपस में सुखदुख भी साझा करने लगे थे.

एक दिन बातें करतेकरते दोनों ने अपनीअपनी आर्थिक परेशानियां बयान कर दीं. नितेश के पास जहां ढंग की नौकरी नहीं थी, वहीं आरती का कहना था कि भले ही उस ने ठीकठाक प्रौपर्टी बना ली थी, लेकिन उस के ऊपर बहुत कर्ज चढ़ गया था. वह कर्ज उतार पाना उस के लिए कठिन हो रहा था. लेनदार कंपनियां उसे परेशान कर रही थीं.

एक दिन सुबह दोनों बैठे चाय पी रहे थे, तभी अपनीअपनी परेशानियों का रोना रोने लगे. रोना रोतेरोते वे योजना बनाने लगे कि किस तरह एक ही झटके में मोटे पैसों का जुगाड़ किया जाए. इस बारे में बात करते हुए दोनों ने कई मुद्दों पर विचार किया.

आखिर नितेश ने एक तरकीब सुझाते हुए आरती को सुझाव दिया कि किसी गरीब बच्चे को गोद ले कर उस का मोटा लाइफ इंश्योरेंस करवा दिया जाए. कुछ दिनों बाद उस बच्चे की हत्या कर के इंश्योरेंस का क्लेम ले लिया जाएगा.

आरती को बात जंच गई. यह भी तय हो गया कि गोद लेने वाला बच्चा हिंदुस्तानी हो. लेकिन मोटा बीमा करवाने को प्रीमियम अदा करने के लिए उस के पास ज्यादा पैसा नहीं था. जब बीमा करोड़ रुपए से अधिक का होगा तो जाहिर है, उस का प्रीमियम भी बड़ा होगा. इसलिए आरती ने कहा कि उस के पास प्रीमियम देने के पैसे नहीं हैं.

नितेश ने कहा कि भारत में बच्चे को तलाश करने का काम वह भारत के ही रहने वाले अपने एक दोस्त पर छोड़ देता है. इस काम को वह जल्दी पूरा कर देगा. उसे भी इस योजना में शामिल कर लिया जाएगा. बीमा का प्रीमियम तीनों मिल कर बराबरबराबर अदा कर देंगे. बच्चे को लंदन ला कर कुछ दिनों तक उस का खूब ध्यान रखेंगे, ताकि किसी को पर शक न हो. उस के बाद बच्चे की रहस्यमय तरीके से हत्या कर इंश्योरेंस का क्लेम ले लिया जाएगा.

आरती ने खुश हो कर हामी भर दी. इस के बाद नितेश ने अपना काम करना शुरू कर दिया. उस ने अपने दोस्त कंवलजीत सिंह रायजादा से बात की तो उस ने योजना में शामिल होने की हामी भर दी. 28 वर्षीय कंवलजीत सिंह जूनागढ़ के कस्बा मालिया का रहने वाला था.

कंवलजीत किसी बच्चे की तलाश करने लगा. जल्दी ही उस ने मालियाहाटिना के रहने वाले हरसुख पटेल के भांजे गोपाल सेजाणी के बारे में जानकारी हासिल कर ली. उस ने यह बात फोन द्वारा नितेश को बताते हुए कहा कि अगर वह या आरती भारत आ कर गोद लेने वाले बच्चे गोपाल के मौसा से बात कर लें तो काम हो सकता है. नितेश ने ऐसा ही किया. पहले वह भारत आया और हरसुख से बात की. बाद में बात फाइनल हो गई तो आरती भी भारत आ गई.

दोनों ने गोपाल सेजाणी को गोद लेने की काररवाई पूरी कर ली. इस के बाद आरती और नितेश लंदन चले गए. वहां उन्होंने गोपाल का भारतीय मुद्रा के हिसाब से 1.30 करोड़ रुपए का जीवन बीमा करवा दिया. इस के लिए बीमा कंपनी को 13 लाख का प्रीमियम देना पड़ा, जो आरती, नितेश और कंवलजीत ने मिल कर दिया.

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गोपाल को लंदन ले जा कर मौत के घाट उतारने का काम पहले ही साल में कर दिया जाना था. लेकिन पासपोर्ट न बन पाने की वजह से उसे लंदन नहीं ले जाया जा सका. देखतेदेखते एक साल का समय निकल गया. इस बीच बीमा कंपनी का 13 लाख का आगामी प्रीमियम ड्यू हो गया. इस बार इन लोगों को यह रकम अदा करने में काफी परेशानी हुई.

इस के बाद तय किया गया कि आगामी प्रीमियम ड्यू होने से पहले ही गोपाल का काम तमाम कर दिया जाए. वह लंदन नहीं आ पाता तो इंडिया में इस की व्यवस्था की जाए. इस की जिम्मेदारी कंवलजीत को सौंपी गई. कंवलजीत अकेला काम को अंजाम नहीं दे सकता था, इसलिए उस ने एक बदमाश से बात की.

नितेश भी लंदन से इंडिया आ गया. योजना बना कर कंवलजीत और उस के साथी ने 8 फरवरी, 2017 को गोपाल का अपहरण कर के उसे चाकुओं से गोद डाला. अगले दिन अस्पताल में उस की मौत हो गई.

नितेश मंड के बाद पुलिस ने गोपाल की हत्या के आरोप में कंवलजीत को भी गिरफ्तार कर लिया. लेकिन उस का साथी फरार हो गया था. अभी तक आरती को डिपोर्ट नहीं किया जा सका है.

कथा तैयार होने तक जूनागढ़ पुलिस ने नितेश और कंवलजीत के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था. केस के अन्य वांछित आरोपियों के गिरफ्तार होने पर सप्लीमेंट चालान तैयार कर के अदालत में दाखिल कर दिया जाएगा.

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