मृत्युभोज जैसी कुरीति को मात्र सामाजिक बुराई मानकर टालना जायज नहीं है. यह एक आर्थिक बर्बादी का बहुत बड़ा कारण है. गरीब परिवारों की तीन-तीन पीढियां इससे बर्बादी की कगार पर पहुंच जाती है.मृत्युभोज के खर्चे से बच्चों के अरमानों, मां-बाप के सपनों का कत्ल हो जाता है.जब एक पीढ़ी शिक्षा से वंचित हो जाती है तो उसका खामियाजा अगली तीन पीढ़ी भुगतती है.एक बड़ा तरक्की का जनरेशन गैप हो जाता है.

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