Yogi Government : यूपी सरकार का बुलडोजर न्याय और आम आदमी

 

Buldozer Sarkar : इन दोनों देश भर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की तर्ज पर बुलडोजर न्याय चल पड़ा है. देश के अनेक राज्यों में बुलडोजर चला करके आनन-फानन में विकास और न्याय करने का ढोंग किया जा रहा है.

यह बुलडोजर न्याय उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुआ है जहां एक वर्ग विशेष के लोग अगर किसी अपराध में पाए जाते हैं तो उनके घर मकान को जमीदोज कर दिया जाता है. ऐसा लगता है कि अब सरकार सत्ता के साथ न्यायाधीश भी बन गई है जैसे कभी राजा महाराजा हुआ करते थे इस शैली में न्याय करने का प्रयास किया जा रहा है जिसकी कम से कम लोकतंत्र में कहीं भी जगह नहीं है.

यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय ने 6 नवंबर 2024 दिन बुधवार को 2019 में अवैध तरीके से ढांचों को गिराने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से नाखुशी जताई और कहा, आप ऐसा नहीं कर सकते कि बुलडोजर लेकर आएं और रातों रात भवनों को गिरा दें…! कोर्ट ने साथ ही सड़कें चौड़ी करने एवं अतिक्रमण हटाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए. देश के सबसे बड़े अदालत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया -” उस व्यक्ति को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए जिसका घर 2019 में सड़क चौड़ी करने की एक परियोजना के लिए गिरा दिया गया था.”

पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से कहा, -” आप ऐसा नहीं कर सकते कि बुलडोजर लेकर आएं और रातों रात भवनों को गिरा दें. आप परिवार को घर खाली करने के लिए समय नहीं देते. घर में रखे घरेलू सामान का क्या ? शीर्ष अदालत की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से कहा कि महाराजगंज जिले में मकान गिराने से संबंधित मामले में जांच कराई जाए और उचित कार्रवाई की जाए.

बिना सूचना ढहा दी हास्पिटल

देश में इन दिनों फोर लेन और सिक्स लेन का काम बड़े जोरों से चल रहा है, समयबद्ध तरीके से सड़के बनाने के निर्देश और दबाव के बीच कई तरह की घटनाएं सामने आ रही है. ऐसे में ही एक घटना छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा में घटित हुई जहां कोरबा चांपा मार्ग के सरगबुंदिया गांव में प्रतिष्ठित डॉक्टर देवनाथ एम डी के अक्षय हॉस्पिटल को बिना किसी सूचना दिए रातोंरात ढहा दिया गया. जबकि डॉक्टर के पास जमीन के सभी दस्तावेज मौजूद है इसके बावजूद ना कोई मुआवजा दिया गया है और ना ही कुछ सुनवाई हो रही है. डॉक्टर देवनाथ मामले को लेकर के उच्च न्यायालय बिलासपुर पहुंचे हैं. ऐसी ही कुछ और घटनाएं भी देश में घटित हुई है. इस परिपेक्ष में कहा जा सकता है कि उच्चतम अदालत ने राज्यों से कहा – अभिलेखों या मानचित्रों के आधार पर सड़क की मौजूदा चौड़ाई का पता लगाएं तथा सर्वेक्षण करें, जिससे सड़क पर यदि कोई अतिक्रमण है तो उसका पता चल सके.

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि सड़क पर अतिक्रमण का पता चलता है तो राज्य को इसे हटाने से पहले अतिक्रमण करने वाले को नोटिस जारी करना होगा और यदि नोटिस की सत्यता और वैधता पर आपत्ति जताई जाती है तो राज्य प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ (कारण सहित 1 आदेश) जारी करेगा।

पीठ ने कहा कि यदि आपत्ति को खारिज कर दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को अतिक्रमण हटाने के लिए एक तर्कसंगत नोटिस दिया जाएगा.पीठ ने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति इसका अनुपालन – नहीं करता, तो सक्षम प्राधिकारी अतिक्रमण हटाने के लिए कदम उठाएंगे, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी या अदालत के आदेश से रोक न लगाई जाए.

पीठ ने कहा – ऐसे मामले में जहां सड़क की मौजूदा चौड़ाई, जिसमें उससे सटी राज्य की भूमि भी शामिल है, सड़क चौड़ीकरण के लिए पर्याप्त नहीं है, तो राज्य इस कार्रवाई को शुरू करने से पहले कानून के अनुसार अपनी भूमि का अधिग्रहण करने के लिए कदम उठाएगा. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ भटनागर और अधिवक्ता शुभम कुलश्रेष्ठ पक्ष रख रहे थे।

अदालत ने उनका पक्ष सुनते हुए कहा, यह स्पष्ट है कि मकान गिराने की प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी थी और कानून का पालन किए बिना इसे अंजाम दिया गया. सुनवाई के दौरान पीठ को संबंधित क्षेत्र में 123 ढांचों को गिराए जाने के बारे में सूचित किया गया. पीठ ने कहा अदालत के रेकार्ड के अनुसार मकान को गिराने से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया गया.

आप कह रहे हैं कि आपने केवल मुनादी की थी. शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के वकील से यह भी पूछा कि किस आधार पर निर्माण कार्य को अनधिकृत बताया गया है. जब राज्य के वकील ने पीठ को सड़क चौड़ी करने की परियोजना के बारे में बताया तो उन्होंने कहा, सड़क चौड़ी करना बस एक बहाना है। यह पूरी कवायद के लिए उचित कारण नहीं लगता.

पीठ ने निर्देश दिया, उत्तर प्रदेश राज्य याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपए का मुआवजा देगा. पीठ ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वह उसके आदेश की एक प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजें ताकि सड़क चौड़ीकरण के उद्देश्य से प्रक्रिया पर जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके. जिस तरह उच्चतम न्यायालय ने इस संदर्भ में संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया है वह एक सकारात्मक संदेश है कि देश में अन्याय नहीं हो सकता.

योगी सरकार के राज में महिलाएं चलाएगी हाई टेक नर्सरी

बागवानी को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका में सुधार के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा योजना के तहत इज़राइली तकनीक पर आधारित 150 हाई-टेक नर्सरी स्थापित करने का निर्णय लिया है.

इन हाईटेक नर्सरी का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं करेंगी.

योजनान्तर्गत प्रत्येक जिले में बेर, अनार, कटहल, नींबू, आम, अमरूद, ड्रेगन-फ्रूट आदि फल तथा स्थानीय भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक सब्जियां उगाने के लिए दो-दो हाईटेक नर्सरी विकसित की जा रही हैं.

सरकार गुणवत्तापूर्ण फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ हाई-टेक नर्सरी में गुणवत्ता वाले पौधे और बीज विकसित करना चाहती है. सरकार के इस कदम का एक और उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की बढ़ती संख्या के लिए पर्याप्त फसल उपलब्ध कराना भी है.

उल्लेखनीय है कि बस्ती और कन्नौज में क्रमशः फलों और सब्जियों के लिए इंडो-इजरायल सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध मिल सके.

ये 150 हाईटेक नर्सरी राज्य के कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों के परिसर, बागवानी विभाग के अनुसंधान केंद्र में स्थापित की जाएंगी ताकि किसानों को आसानी से प्रशिक्षित किया जा सके. उद्यान विभाग के अनुमान के अनुसार प्रत्येक हाई-टेक नर्सरी की औसत लागत लगभग एक करोड़ रुपये होगी.

इन नर्सरियों को उचित बाड़, सिंचाई सुविधा, हाई-टेक ग्रीन हाउस जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा और सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) / राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्य समूहों के माध्यम से इनका रखरखाव किया जाएगा.

इन नर्सरी से उत्पादित पौधों को इच्छुक स्थानीय किसानों, क्षेत्रीय स्तर पर किसान उत्पादन संगठनों (एफपीओ), राज्य स्तर पर अन्य निजी नर्सरी, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्य सरकारों और अन्य के पौधरोपण के लिए बेचा जाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले 5 वर्षों में बागवानी फसलों की खेती के क्षेत्र को 11.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पर्याप्त फल और सब्जियां मिल सकें.

मुरादनगर श्मशान घाट हादसा: भ्रष्टाचार पर जीरो टौलरैंस की अंत्येष्टि

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ईटैंडरिंग योजना पर अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा था कि ठेके देने की पारदर्शी व्यवस्था बन सकेगी, जिससे भ्रष्टाचार खत्म होगा, पर सरकार के दूसरे तमाम दावों की तरह यह दावा भी खोखला निकला. मुरादनगर हादसा ‘श्मशान में दलाली’ का सबसे बड़ा सुबूत है. यह योगी सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टौलरैंस नीति के सच को भी सब के सामने ला रहा है. भ्रष्टाचार करने वालों ने श्मशान की दीवारों पर तमाम ‘सूक्ति वाक्य’ लिखवाए जरूर थे, पर उन पर खुद अमल नहीं किया.

साल 2017 में जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उन की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टौलरैंस की नीति पर काम करेगी. पर भ्रष्टाचार कहीं भी कम नहीं हुआ, उलटे जब लोगों ने भ्रष्टाचार की शिकायत की तो उनकी बात सुनी नहीं गई. जिसने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की उसके ही खिलाफ सरकार ने मुकदमे तक कायम करा दिए. सरकारी स्कूल में मिड डे मील घोटाले और लापरवाही की शिकायत करने पर मिर्जापुर जिले में पत्रकार के खिलाफ मुकदमा कायम कर के जेल भेज दिया गया.

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगरनिगम में आयुक्त और मेयर के बीच का विवाद भी भ्रष्टाचार के ही चलते था. मेयर की शिकायत के बाद आयुक्त का तबादला किया गया था. सरकार इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही थी.

गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट के 70 फुट लंबे गलियारे की एक महीने पहले बनी छत (लिंटर) पहली ही बारिश में गिरी तो उस के नीचे 25 आदमी दब कर मर गए और 15 घायल हुए.

एक कहावत है कि ‘गंदगी को कितना भी दबाने की कोशिश कीजिए वह बाहर आ ही जाती है’. मुरादनगर श्मशान घाट हादसे में भी यही हुआ. इस हादसे ने योगी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टौलरैंस नीति का खुलासा कर दिया. सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि सरकार बनने के 3 साल बाद भी भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ? सरकार अब मरने वालों को 10 लाख रुपए का नकद मुआवजा और रहने के लिए घर देने का दिखावा कर के अपने अपराध को कम करने की कोशिश कर रही है. सरकार के पास अब यह कहने का मौका नहीं है कि उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार मुक्त राज्य है.

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ऐसे मिलता है ठेका

मुरादनगर नगरपालिका के चेयरमैन विकास तेवतिया हैं. मुरादनगर के उखलारसी अंत्येष्टि स्थल के निर्माण का ठेका ठेकेदार अजय त्यागी को दिया गया था. अजय त्यागी को चेयरमैन विकास तेवतिया का करीबी माना जाता है. अजय त्यागी ने जिले के दूसरे अफसरों से भी अच्छे संबंध बनाए हैं. इस के दम पर ही उसे मुरादनगर उखलारसी अंत्येष्टि स्थल के निर्माण ठेके के साथसाथ शहर में दूसरी जगह काम करने का ठेका भी मिला हुआ है.

एक साल पहले उखलारसी अंत्येष्टि स्थल के निर्माण का ठेका 55 लाख रुपए में दिया गया था. इस के निर्माण में 60 लाख रुपए की लागत आई थी. अक्तूबर महीने में अंत्येष्टि स्थल पर बने भवन और गलियारे पर छत (लिंटर) डाली गई थी. दिसंबर महीने में निर्माण का काम पूरा हो गया था. निर्माण के बाद जांच अधिकारी ने भवन की जांच कर के क्वालिटी रिपोर्ट में सभी मानको को दुरुस्त बताया था. क्वालिटी रिपोर्ट सही पाए जाने के बाद भवन को खोल दिया गया था. अभी इस का लोकार्पण नहीं किया गया है.

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3 जनवरी, 2021 को अंत्येष्टि स्थल ढह गया. 60 लाख रुपए का निर्माण जनता के लिए खोले जाने के बाद 15 दिन में ही ढह गया. मंडलायुक्त अनीता मेश्राम के निर्देश पर मुरादनगर नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी निहारिका चौहान, ठेकेदार अजय त्यागी, जेई सीपी सिंह, सुपरवाइजर आशीष के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, भ्रष्टाचार और लापरवाही का मुकदमा आईपीसी 1860 की धारा 304, 337, 338, 427 और 409 के तहत अपराध संख्या 0006 में कायम किया गया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत मुकदमा कायम करने का आदेश दिया गया है. सरकार ने लिखापढ़ी में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम कराया, पर जिन लोगों के इशारे पर ठेके दिए जाते हैं, उन के खिलाफ कुछ भी नहीं किया गया.

शोकसभा में हुआ हादसा

मुरादनगर के बंबारोड संगम विहार के बाशिंदे 70 साल के जयराम की मौत रविवार, 3 जनवरी, 2021 को हो गई थी. जयराम के बेटे दीपक ने गाजियाबाद के मुरादनगर थाने मे दी गई अपनी तहरीर में बताया कि वह अपने पिता का अंतिम संस्कार करने उखलारसी अंत्येष्टि स्थल आया था. साथ में गांवमहल्ले के कुछ लोग और रिश्तेदार भी थे. इन में से कुछ लोग बरसात से बचने के लिए श्मशान घाट में नए बने भवन के नीचे खड़े थे. वहीं पर शोक सभा होने लगी थी.

दोपहर के तकरीबन 12 बजे थे. इसी बीच बरसात के चलते वहां बना लिंटर भरभरा कर गिर गया, जिस में कई लोगों की मौत हो गई और बहुत से लोग घायल हो गए. कई वाहन भी इस मलबे में दब गए. दीपक ने पुलिस से जांच करने और इंसाफ दिलाने की मांग की.

घटिया निर्माण पहले भी होता रहा है, पर यह पहली बार हुआ है जब नई बनी इमारत एक महीने में ही ढह गई और उस के नीचे आ कर 25 लोगों की मौत हो गई. मुरादनगर श्मशान घाट पर जब यह निर्माण हो रहा था, उसी समय घटिया निर्माण की शिकायत की गई थी. पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रेखा अरोड़ा के पति समाजसेवी राधे अरोड़ा और सभासद दिनेश कुमार शर्मा ने नगरपालिका के अधिकारियों को निर्माण कार्य में घटिया सामान इस्तेमाल किए जाने की शिकायत की थी.

ठेकेदार अजय त्यागी को राजनीतिक सिफारिश के बाद ठेका मिला था. इस वजह से नगरपालिका के अफसर घटिया निर्माण की शिकायत के बाद भी खामोश रहे.

दलाली की जांच

मुरादनगर श्मशान घाट हादसे में घटिया निर्माण की जांच का काम भी वहीं के अफसरों को दिया गया है, जिससे साफ है कि मामले में कोई फंसेगा नहीं. कुछ दिन बाद मामला निपटा दिया जाएगा. सरकार ने अपना दामन बचाने के लिए कड़े कदम उठाने का दावा करते हुए इस घटना के जिम्मेदार छोटे कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा कायम करने, रासुका लगाने और सरकारी पैसे को उन से वसूलने का बड़ा वादा किया है, पर इस के बाद भी भ्रष्टाचार खत्म होगा, यह नहीं कहा जा सकता. जब तक ठेकों में राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं बंद होगी, तब तक यह सब चलता रहेगा. सरकारी कर्मचारियों को मोहरा बना कर नेता मोटी कमाई करते रहेंगे.

श्मशान घाट हादसे में घटिया निर्माण की जांच के लिए जिले के डीएम अजय शकर पांडेय ने जीडीए और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया है. जांच के 2 बिंदु हैं कि क्या निर्माण के सामान की क्वालिटी घटिया थी और जब इस बात की शिकायत मिली थी, तब उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया.

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वैसे, सरकार की तरफ से अब बड़ेबड़े दावे किए जा रहे हैं कि कोई भी जिम्मेदार बचने नहीं पाएगा. सांसद और केंद्रीय मंत्री रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने कहा कि जांच में किसी को बचाया नहीं जा सकेगा. कमिश्नर और एडीजी स्तर के अधिकारी जांच कर रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह कहते हैं, ‘भाजपा श्मशान में दलाली वाले काम कर रही है. मुरादनगर की घटना ने यह बात साफतौर पर साबित कर दी है. अभी तक भाजपा इस बात को नहीं मान रही थी. वह उत्तर प्रदेश की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को मानने के लिए तैयार नहीं थी. मुरादनगर की घटना ने सुबूत दे दिया है. केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.’

उत्तर प्रदेश: गुस्सा जाहिर करती जनता

त्रेता युग के रामराज में सरकार के लोग वेशभूषा बदल कर जनता के दुखदर्द को राजा तक पहुंचाने का काम करते थे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रामराज में जनता अब गुस्सा जाहिर करने लगी है. गुस्सा जाहिर करने के लिए जनता अपनी जान को भी दांव पर लगाने से परहेज नहीं कर रही है.

अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए लोग विधानसभा भवन और भाजपा कार्यालय के सामने आत्मदाह करने लगे हैं. आत्मदाह की आधा दर्जन घटनाएं इस का सुबूत हैं.

अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद प्रदेश में रामराज बनाने का दावा फेल हो चुका है. जनता की बात नहीं सुनी जा रही, जिस से भड़के लोग आत्मदाह का रास्ता चुन रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के विधानसभा भवन, लोकभवन और भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय के बीच 200 मीटर की लंबी सड़क आत्मदाह का केंद्र बन गई है. हाई सिक्योरिटी जोन में विधानसभा के चारों तरफ 650 वर्गमीटर का विशेष निगरानी घेरा बनाया गया है. यहां के चप्पेचप्पे पर अत्याधुनिक साधनों से लैस पुलिस लगाई गई है.

पुलिस को गच्चा देने के लिए पीडि़त पक्ष ने आत्मदाह की जगह वहीं पर बड़ी मात्रा मे नींद की गोलियां खा कर जान देने की कोशिश शुरू कर दी. अक्तूबर महीने में विधानसभा भवन के सामने इस तरह की 6 घटनाएं घट चुकी हैं.

4 मामलों में आग लगा कर जान देने की कोशिश की गई, जिस में 2 औरतों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. विधानसभा भवन और भारतीय जनता पार्टी कार्यालय अपनी दुखभरी दास्तान कहने के लिए हौट स्पौट बन गया है.

विधानसभा भवन के सामने आत्मदाह की घटनाएं अनलौक 2 के बाद से तेज हुईं. 17 जुलाई को अमेठी की रहने वाली सोफिया और उस की बेटी ने खुद को आग लगा ली. सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान सोफिया की मौत हो गई.

13 अक्तूबर को महाराजगंज जिले की रहले वाली अंजलि तिवारी उर्फ आयशा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की. जली अवस्था में पुलिस ने सिविल अस्पताल में भरती कराया, जहां उस की मौत हो गई.

19 अक्तूबर को लखनऊ के ही हुसैनगंज इलाके के रहने वाले सुरेंद्र चक्रवर्ती ने आत्मदाह करने की कोशिश की. इसी दिन बाराबंकी का रहने वाला परिवार भी आत्मदाह के इरादे से विधानसभा भवन के सामने पहुंचा था. उसे पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया था.

22 अक्तूबर को बेबी खान नामक औरत नींद की गोलियां खा कर बदहवास हालत में विधानसभा गेट के सामने पहुंची, पर पुलिस ने उस को भी पकड़ लिया था.

कोई नहीं सुनता दर्द

जैसेजैसे सरकार ने जनता की आवाज को सुनना बंद कर दिया है, वैसेवैसे इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. फिल्म ‘शोले’ में पानी की टंकी के ऊपर चढ़ कर बसंती से मिलने की जिद को सभी ने देखा था. अखिलेश सरकार में परेशान एक नौजवान विधानसभा भवन के सामने पेड़ पर चढ़ कर फांसी लगाने की जिद कर रहा था.

आत्मदाह करने वाले सुरेंद्र चक्रवर्ती डायमंड डेरी कालोनी में जावेद के घर में किराए के मकान में रहता था. वह फोटोकौपी मशीन का कारोबार करता था. साल 2013 से मकान के किराए को ले कर विवाद चल रहा था.

‘तालाबंदी’ के दौरान बेरोजगारी बढ़ने से सुरेंद्र बेहद परेशान था. ऐसे में जब मकान मालिक ने उस का सामान घर से निकाल कर सड़क पर फेंक दिया, तब आर्थिक तंगी में उसे विधानसभा भवन के सामने आत्मदाह करने का रास्ता ही सम झ आया.

लखनऊ के सिविल अस्पताल में भरती सुरेंद्र चक्रवर्ती ने बताया, ‘मेरा किराएदारी का मुकदमा चल रहा था. ऐसे में मेरे सामान को जब घर से बाहर फेंक दिया गया, तो मेरे सामने कोई रास्ता नहीं था. पुलिस भी मेरी बात सुन नहीं रही थी. वह मकान मालिक के दबाव में थी. मैं कब तक चुप रहता.

‘मु झे लगा कि अब जान की कीमत पर ही सही पर गूंगेबहरे प्रशासन के सामने अपनी बात कहनी है. मेरे घर से विधानसभा की दूरी एक किलोमीटर थी. मु झे लगा कि अगर सरकार के सामने अपनी आवाज उठाई जाए तो शायद वह मेरी पीड़ा सुन सकेगी. ऐसे में विधानसभा भवन के सामने आत्मदाह करने का फैसला किया.’

बाराबंकी का रहने वाला नसीर और उस का परिवार भी विधानसभा भवन के सामने आत्मदाह करने पहुंचा था, पर पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया. नसीर सरकारी जमीन पर दुकान लगाता था. नगरनिगम ने दुकान तोड़ दी. परेशान नसीर को कुछ सम झ नहीं आया, तो सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उस ने यह रास्ता चुना था.

लखनऊ के राजाजीपुरम की रहने वाली बेबी खान का भाई अपराधी था. पुलिस उसे पकड़ने घर जाती थी. जब वह नहीं मिलता था, तो पुलिस घर वालों के साथ गालीगलौज और बदतमीजी करती थी. पुलिस की इस हरकत से बचने के लिए उस ने यह कदम उठाया.

लखनऊ के ही सिविल अस्पताल में भरती बेबी खान ने बताया, ‘मेरे भाई को पुलिस परेशान कर रही थी. उसे पुराने मुकदमों की धमकी दे कर जेल भेजने के लिए पकड़ने की कोशिश कर रही थी. भाई का मेरे घर किसी भी तरह से कोई आनाजाना नहीं था. इस के बाद भी हर दूसरेतीसरे दिन पुलिस हमारे घर पहुंच जाती थी. पुलिस अकसर रात को घर जाती थी.

‘हम जिस महल्ले में रहते हैं, वहां बदनामी होती थी. हम ने कई बार पुलिस को सम झाने की कोशिश की कि हम से उस का कोई मतलब नहीं है. ऐसे में उलटे पुलिस हमें ही धमकी दे रही थी. ऐसी बदनामी से बचने के लिए ही हम ने विधानसभा और भाजपा के औफिस के सामने जान देने का संकल्प ले लिया था.’

महाराजगंज की रहने वाली अंजलि तिवारी उर्फ आयशा छत्तीसगढ की रहने वाली थी. महाराजगंज के अखिलेश के साथ उस की शादी हुई. इस के बाद दोनों में विवाद हो गया और वे अलग हो गए.

अंजलि ने मोहम्मद आलम के साथ निकाह किया और आयशा बन कर उस के साथ रहने लगी. कुछ दिन के बाद मोहम्मद आलम नौकरी करने अरब चला गया, तो उस के घर वालों ने आयशा को ससुराल से निकाल दिया.

अंजलि ने पुलिस में शिकायत की, तो पुलिस ने सुनी नहीं. लिहाजा, उस ने आत्मदाह करने का फैसला लिया.

युद्ध सी तैयारी

आत्मदाह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को युद्ध की सी तैयारी करनी पड़ी है. विधानसभा भवन और भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के सामने आत्मदाह और जान देने की घटनाओं को रोकने के लिए हर 10 कदम पर पुलिस लगा दी गई है.

पुलिस कमिश्नर सुजीत कुमार पांडेय बताते हैं, ‘इस क्षेत्र में आनेजाने वालों पर नजर रखी जा रही है. पुलिस के साथ अग्निशमन वाहन, आग बु झाने के उपकरण, कंबल और एंबुलैंस का इंतजाम किया गया है. इस के साथ ही सभी थानों को हाई अलर्ट भेजा गया है, जिस में आत्मदाह की धमकी देने वालों की सूचनाएं जमा करने और जरूरी कार्यवाही करने के लिए कहा गया है.’

विधानसभा भवन के सामने आत्मदाह जैसी घटनाओं को रोकने के लिए 18 पुलिस टीमों को तैनात किया गया है. इस के अलावा 50 कंबल, 15 अग्निशमन उपकरण, 4 दोपहिया वाहन, 3 चारपहिया वाहन, एक अग्निशमन वाहन और एक एंबुलैंस वाहन तैनात किया गया है.

विधानसभा भवन लखनऊ के चारबाग से हजरतगंज मुख्य मार्ग पर बना है. मुख्य सड़क मार्ग होने के चलते यहां पर यातायात खूब रहता है. अब यह मार्ग रात के समय बंद कर दिया गया है. सुबह 6 बजे से यह मार्ग यातायात के लिए खोला जाता है. शनिवार और रविवार को यह रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.

बढ़ रहा है असंतोष

वरिष्ठ पत्रकार योगेश श्रीवास्तव कहते हैं, ‘सभी घटनाओं की विवेचना करें तो एक बात साफतौर पर दिखती है कि व्यवस्था के प्रति जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है. लोगों को सम झ नहीं आ रहा है कि वह किस से अपनी बात कहे. थानों में पुलिस अपनी मनमानी करती है. कई बार वह आरोपी के साथ मिल कर पीडि़त के ऊपर ही दबाव बनाने लगती है. अपराध की तमाम घटनाओं में यह बात सामने आती है.

‘उन्नाव के चर्चित रेप कांड, जिस में भाजपा के विधायक रहे कुलदीप सेंगर पर आरोप था, में भी जब उन्नाव की पुलिस ने लड़की की बात नहीं सुनी, तो लड़की ने मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह करने की कोशिश की थी. उस के बाद उस के मामले में पुलिस ने सुनवाई शुरू की थी.

‘ये घटनाएं देखदेख कर दूसरे परेशान लोगों को भी यही रास्ता आसान लगता है, जिस से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं.’

4 पीएम अखबार के संपादक संजय शर्मा कहते हैं, ‘पुलिस नहीं सुनती तो लोग अपने जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, सांसद और विधायक के पास फरियाद ले कर जाते हैं. पिछले दिनों पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग के 2 फोन ओडियो वायरल हुए, जिन में उन्होंने पीडि़तों की बात नहीं सुनी. उन्हें बुराभला कहा. वे पीडि़त दोनों मामलों में अपने परिजनों के अस्पताल में भरती होने का दर्द बता कर मदद मांगने गए थे.

‘जब पीडि़त जनता की बात नहीं सुनी जाती तो उसे अपनी बात सुनवाने के लिए यह रास्ता ही दिखता है, जिस की वजह से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं.’

मनोविज्ञानी समाजसेवी डाक्टर मधु पाठक कहती हैं, ‘इस तरह के मामलों में जिस तरह से मीडिया रिपोर्टिंग करने लगी है, उस में भी संवदेनशीलता की जरूरत है. मीडिया का समाज पर बहुत असर पड़ता है. इन घटनाओं को देख कर लगता है कि अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का यह सब से आसान रास्ता है.

‘अगर लोगों को शुरुआती लैवल पर सुन लिया जाए और परेशानी को दूर कर दिया जाए, तो लोग ऐसे कदम कम उठाएंगे.’

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