Hindi Story: शेरनी की दहाड़

सुनीता के सपनों की उड़ान उस के गांव की पगडंडियों से शुरू हो कर शहर की यूनिवर्सिटी तक जा पहुंची थी. ऊंची कदकाठी, दोहरा बदन और आंखों में आत्मविश्वास की चमक. वह सिर्फ खूबसूरत और सुशील ही नहीं, बल्कि फौलादी इरादों वाली लड़की थी. जब वह अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर निकलती, तो उस की सख्त शख्सीयत और स्वाभिमान देखने लायक होता. सुनीता के मामा शहर के नामी वकील थे. वही उस के आदर्श थे. वह भी उन्हीं की तरह काला कोट पहन कर गरीबों को इंसाफ दिलाने का सपना देखती थी. कानून की पढ़ाई के साथसाथ वह यह भी जानती थी कि इंसाफ की पहली सीढ़ी बेखौफ और नाइंसाफी के खिलाफ खड़ा होना है.

लेकिन उस शहर की चमक के पीछे अपराध का अंधेरा भी था. जिस इलाके में सुनीता रहती थी, वहां राजा नाम के एक बदमाश का खौफ था. राजा और उस के साथी आएदिन राहगीरों को लूटते और लड़कियों के साथ बदतमीजी करते थे. राजा अकसर सुनीता को दूर से घूरता था, पर उस की आंखों की तेज चमक और कड़क स्वभाव को देख कर वह सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था. उसे सुनीता के कड़क स्वभाव से डर लगता था. शांति तब भंग हुई, जब सुनीता को पता चला कि पड़ोस की मासूम दिव्या ने स्कूल जाना छोड़ दिया है. कई दिनों से वह खामोश और डरी हुई थी. दिव्या को राजा ने बीच सड़क पर रोक कर उस के साथ बदतमीजी की थी.

दिव्या के मातापिता डर के मारे पुलिस के पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे थे. उन का खामोश डर और दिव्या की सिसकियां सुनीता के कानों में गूंज उठीं. उसे लगा कि अगर आज वह चुप रही तो उस की पढ़ाई लिखाई, उस की हिम्मत और वकालत का उस का सपना, सब बेकार है. उस के खून में उबाल गया. अगले दिन सूरज की तपिश के बीच सुनीता ने अपनी चमचमाती बाइक सीधे उस चौराहे पर रोकी, जहां राजा अपने चमचों के साथ बैठा था. इंजन बंद हुआ, चारों तरफ सन्नाटा छा गया. सुनीता ने धीमे से हैलमैट उतारा, उस के खुले बाल हवा में लहराए और उस की तीखी नजरों ने सीधे राजा को भेदा. ‘‘भाई, जरा यहां तो आना,’’ सुनीता की आवाज गूंजी, जिस में चेतावनी और शालीनता दोनों थे.

राजा अपनी अकड़ में साथियों के साथ बाइक के पास पहुंचा. उसे लगा, शायद कोई मदद मांग रही है, पर सुनीता की आंखों में अंगारे थेसुनीता ने बिना डरे, सीधे राजा की आंखों में ?ांकते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी हरकतें हदें पार कर रही हैं राजा. अपनी ताकत निहत्थों पर आजमाना बंद करो. बेहतर होगा कि आज के बाद तुम यहां किसी लड़की की तरफ आंख उठा कर भी देखो, वरना याद रखनाकानून की पढ़ाई बाद में काम आएगी, मेरा हाथ पहले चलेगा.’’ सुनीता की आवाज में ऐसी दहाड़ और आत्मविश्वास था कि राजा के पैर कांपने लगे. उस ने हड़बड़ाते हुए कहा, ‘‘मैं नेमैं ने क्या किया?’’ सुनीता ने कड़क कर जवाब दिया, ‘‘वही, जो एक बुजदिल करता है. तुम्हें शर्म नहीं आती बहनबेटियों को छेड़ते हुए? मैं ने तुम्हेंभाईकह कर पुकारा है, इस शब्द की लाज रख लो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना.’’

वह दबंग राजा, जिस से पूरा महल्ला थरथर कांपता था, सुनीता के सामने बौना पड़ गया. उस ने हाथ जोड़ लिए और वहां से चला गया. वह डर सिर्फ पुलिस का नहीं था, वह एक स्वाभिमानी लड़की के तेज का डर था. कुछ ही दिनों में बदलाव साफ दिखने लगा. सुनीता ने केवल उसे सुधारा, बल्कि उसे उस की रुकी हुई पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए भी बढ़ावा दिया, ‘‘कुछ बन कर दिखाओ. मातापिता का मान बढ़ाओ. यह जिंदगी घरपरिवार, समाज और देश का मान बढ़ाने के लिए मिली है.’’ ‘‘सम? गया दीदी,’’ राजा ने हाथ जोड़ कर कहा. राजा के बदमाश साथी, जो कल तक लड़कियों को छेड़ते थे, भी सुनीता कोदीदीकह कर सम्मान देने लगे थे. कालोनी के लोगों ने राहत की सांस ली. वे अब सुनीता कोशेरनीकहने लगे थे. सुनीता ने साबित कर दिया कि आत्मविश्वास और हिम्मत ही एक महिला का सब से बड़ा गहना और सब से ताकतवर हथियार है.         

पप्पू यादव के दावे पर बवाल   
बिहार में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिला कर केंद्रशासित प्रदेश बनाने की साजिश रच रही है. इस योजना के तहत पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कराया जा सकता है. इस के बाद बिहार विधानसभा से एक प्रस्ताव पास करवाने की कोशिश की जाएगी. इस पूरे प्रोसैस के बाद सीमांचल क्षेत्र के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज और दिनाजपुर जैसे कुछ जिलों को जोड़ कर एक नया केंद्रशासित प्रदेश बनाया जा सकता है, जबकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ शब्दों में कहा कि ये दावे तथ्यों के बिलकुल उलट हैं और इन में रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है.   

Hindi Story: गली के कुत्ते

Hindi Story: रा के तकरीबन साढ़े 10 बज रहे थे. शहर की सड़कों पर हलकीहलकी ठंड उतर आई थी. सड़क किनारे बंद होती दुकानें. झिलमिलाती स्ट्रीट लाइट्स. बीचबीच में भागते आटोरिकशा और मोटरसाइकिलें. यह वही शहर था, जो कभी पूरी तरह सोता नहीं था. बस, कुछ घंटों के लिए आंखें मूंद लेता था.
आर्या औफिस से लौटते हुए बस से उतर कर पैदल घर की ओर बढ़ रही थी. बस स्टौप से घर तक का रास्ता मुश्किल से 10 मिनट का था. पर इन 10 मिनट में वह रोज जाने कितनी दुआएं पढ़ लेती थी.
आर्या के कानों में ईयरफोन नहीं थे. मोबाइल भी हाथ में नहीं था, क्योंकि उस ने बहुत पहले सीख लिया था कि रात की सड़कें सजग रहने वालों का इम्तिहान लेती हैं.

उस गली में कदम रखते ही आर्या ने हलकी सी सीटी बजाई. सीटी की आवाज सुनते ही गली के कोने से
3-4 कुत्ते निकल आए. ये कोई नए कुत्ते नहीं थे. ये वही थे जिन्हें वह महीनों से जानती थी. औफिस से लौटते वक्त वह अकसर उन के लिए बिसकुट ले आती थी. वीकैंड पर उन्हें रोटी खिलाए बिना उस के दिन की शुरुआत नहीं होती थी. जब भी महल्ले के डौग लवर्स उन कुत्तों को टीका लगवाने का इंतजाम करते, आर्या भी बढ़चढ़ कर उन की मदद करती. कुत्तों के इलाज और देखभाल में अकसर वह सब से आगे रहती. बरसात में उन के लिए टिन की शैड बनवाने का विचार भी उसी का था. उस छोटे से इंतजाम ने सर्दी और बारिश में गली के कुत्तों को बड़ी राहत दी थी. यही वजह थी कि वे आर्या की आहट पहचानते थे. उसे अपना मानते थे.

आर्या भी जानती थी कि ये कुत्ते भरोसेमंद हैं, क्योंकि ये अपनी हद जानते हैं. हवस की आग में ये पागल हो कर इधरउधर नहीं भटकते और सब से जरूरी बात यह कि ये गली को अपना घर मानते थे. इन दिनों कुत्तों को ले कर शहर में खूब विवाद चल रहा था. अखबारों में सुर्खियां थीं. टीवी डिबेट में शोर था. कोई कहता था सड़क के कुत्ते खतरनाक हैं. कोई उन्हें हटाने की मांग कर रहा था. पर आर्या जानती थी कि असल खतरा दांतों से नहीं, नीयत से होता है. गली के एक बुजुर्ग अकसर कहते थे, ‘‘बेटा, जिस कुत्ते को रोज खाना मिलता है और इलाज होता है, वह गली का पहरेदार बन जाता है.’’ उन की यह बात आर्या के दिल में उतर गई थी.

जैसे ही वह थोड़ा आगे बढ़ी, पीछे से बाइक का इंजन दहाड़ा. 2 लड़के थे. सिर पर हैलमैट नहीं. चेहरे पर बेहूदा आत्मविश्वास. एक ने कहा, ‘‘ओए देख, नाइट शिफ्ट वाली रही है.’’ दूसरा हंसा, ‘‘चल, मजे लेते हैं.’’ आर्या का दिल जोर से धड़कने लगा. उस ने कदम तेज कर दिए. पीछे से फिर आवाज आई, ‘‘डर क्यों रही हो जानेमन, हम तो आशिक हैं तुम्हारे. इन कुत्तों से कितना दिल लगाओगी, थोड़ा हम से भी लगा लो. कसम से मजा बहुत आएगा.’’ आर्या के मन में एक वाक्य कौंध गया, ‘गली का कुत्ते गली के इन वहशी लड़कों से कहीं बेहतर होते हैं. वे कम से कम इज्जत की हद जानते हैं.’ उस ने फिर से सीटी बजाई. इस बार आवाज तेज थी. कुत्ते तुरंत उस के चारों ओर गए. एक आगे. 2 पीछे. एक बगल में. बाइक जैसे ही पास आई, कुत्तों ने एक साथ भौंकना शुरू कर दिया. तेज, आक्रामक, चेतावनी भरी लहजे में.
एक लड़का घबरा गया, ‘‘अबे चल, ये काट लेंगे.’’ दूसरा भी बोला, ‘‘छोड़ यार, आज नहीं.’’

बाइक लड़खड़ाई और वापस मुड़ गई. गालियां देते हुए वे दोनों अंधेरे में गायब हो गए. आर्या वहीं खड़ी रह गई. उस के हाथ कांप रहे थे. पर इस बार डर से ज्यादा गुस्सा था. उस ने ?ाक कर कुत्तों के सिर पर हाथ फेरा. वह पूंछ हिलाने लगे. जैसे कह रहे हों, ‘तुम निश्चिंत रहो, यह हमारी गली है और हम तुम्हारे साथ हैं.’
घर पहुंचते ही मां ने पूछा, ‘‘आज फिर देर हो गई.’’ आर्या बोली, ‘‘हां मां, कुछ छिछोरे कुत्ते पीछे लग गए थे.’’ मां ने पूछा, ‘‘सब ठीक तो है ?’’ आर्या ने कहा, ‘‘हां मां, गली के कुत्ते साथ थे.’’ मां हलकी मुस्कुराईं, ‘‘अच्छा है. आजकल इनसानों से ज्यादा वही भरोसेमंद हैं.’’ अगले दिन औफिस में आर्या ने जब यह सारी घटना सुनाई. किसी ने कहा, ‘‘समाज के लिए असली खतरा ये 2 टांगों वाले कुत्ते ही हैं, जो
दुनिया को अपनी हवस के चश्मे से देखते हैं.’’

किसी ने कहा, ‘‘नगरनिगम को इन कुत्तों पर भी नकेल कसने की योजना लानी चाहिए. सड़क पर घुमते वहशी जानवर सोसाइटी के लिए बड़ा खतरा हैं.’’ आर्या शांत स्वर में बोली, ‘‘सच में, खतरनाक वे कुत्ते नहीं हैं जिन्हें रोटी नहीं मिलती, बल्कि खतरनाक वह ठरक है जिसे संस्कार मिलता है, सही इलाज.’’
उस दिन से कुत्तों के लिए आर्या के मन में इज्जत बढ़ गई थी. गली के कुत्तों के लिए अब और लोग आगे आने लगे थे. सही देखभाल मिलने पर कुत्तों का बरताव और संतुलित हो गया. धीरेधीरे गली बदलने लगी. मनचले गायब हो गए. रातें थोड़ी सुरक्षित हो गईं. आर्या अब निडर हो कर घर लौटती है. वह जानती है. इस गली में कुत्ते सिर्फ जानवर नहीं हैं. वे पहरेदार हैं. दोस्त हैं और कई बार इनसानों से ज्यादा इनसान हैं.
इस सड़क पर आज भी 2 तरह के कुत्ते हैं. एक वे जो भूख में भौंकते हैं और दूसरे वे जो हवस में नोंचने को दौड़ते हैं. पहले वाले गली की शान हैं, दूसरे समाज का कलंक.                   

Bhojpuri Star: हर महिला बने बोल्ड-अपर्णा मलिक

Bhojpuri Star: कबड्डी की स्टेट चैंपियन रह चुकी अपर्णा मलिक ने अपने कैरियर की शुरुआत साउथ फिल्म इंडस्ट्री से की, जहां उन्होंने तेलुगु फिल्मों में काम कर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की ओर रुख किया और यहां भी अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली.
पटना में आयोजित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स शो के दौरान अपर्णा मलिक से हुई खास मुलाकात में उन्होंने खुल कर बात की. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

कबड्डी की स्टेट चैंपियन से एक्ट्रेस बनने तक, यह ट्रांजिशन कितना फिल्मी रहा?
स्पोर्ट्स बैकग्राउंड होने का बहुत फायदा मिला है. इस से मेरे अंदर हमेशा स्पोर्ट्स स्पिरिट बनी रहती है, जिस से हैल्दी कंपीटिशन की भावना आती है.

क्या आप किसी फिल्म में स्पोर्ट्स गर्ल का रोल करना चाहेंगी?
मैं आप को बताना चाहूंगी कि मेरी एक फिल्म आने वाली है, जिस का नाम हैधाकड़ सासजिस में स्पोर्ट्स गर्ल होते हुए गांव की सीधीसादी लड़की कैसे एक बौक्सिंग चैंपियन बनती है, यह देखने को मिलेगी. मेरी एक तेलुगु फिल्म जो अभी जल्दी ही थिएटर में रिलीज हुई है, ‘वन/4’ जिस में मैं स्विमर बनी हूं, इसलिए मेरी यह हसरत बहुत कम समय में ही पूरी हो चुकी है.

अररिया से सिनेमा तक का सफर, सब से टफ मोमैंट कौन सा था?
अररिया से सिनेमा तक आने का सफर की अगर बात करूं तो मेरा सब से टफ मोमैंट लोगों को सम?ाना रहा क्योंकि अररिया एक छोटी सिटी है. वहां पर लोगों की सोच अभी उतनी विकसित नहीं है कि वे इस चीज को एक्सैप्ट करें कि लड़कियां यहां से निकल के बाहर जा कर या विदेश में जा कर पढ़ाई भी करें, तो फिर सिनेमा जगत में आना तो उन के लिए बहुत बड़ी बात हो जाती है.

आप का पहला आडिशन कैसा गया था?
पहला आडिशन मेरी जिंदगी का बेहद खास अनुभव था. मैं ने उस आडिशन को बहुत ही ध्यान से तैयार किया, 3-4 बार रिकौर्ड किया, अलगअलग स्टेट्स में शूट किया और जब लगा कि यह बिलकुल नैचुरल
और संतोषजनक है, तभी फाइनल वीडियो भेजा. मेरा वह आडिशन बहुत पसंद किया गया. इस के बाद मेरा लुक टैस्ट हुआ, फिर फोटोशूट हुआ और आखिर में मु? तेलुगु फिल्मडैडलाइनऔफर हुई.

क्या ग्लैमरस दिखना इंडस्ट्री की जरूरत है या पर्सनल चौइस?
हर किसी के लिए ग्लैमर की परिभाषा अलग होती है. कई बार लोगों के चेहरे पर ही एक नैचुरल ग्लैमरस लुक होता है, जो उन्हें सब से अलग बनाता है. मेरे हिसाब से ग्लैमरस दिखने के लिए सबसे जरूरी चीज है, आप का कौन्फिडैंस और आप का एटीट्यूड. अगर आप के अंदर खुद को कैरी करने का आत्मविश्वास है, तो वही असली ग्लैमर है.

क्या आप को लगता है कि आज की हीरोइन को ज्यादा बोल्ड होना पड़ता है?
मेरे हिसाब से बोल्ड होने का मतलब है कि आप अपने लिए खड़े हो सकें, अपनी बात खुल कर रख सकें और गलत के खिलाफ आवाज उठा सकें. अगर आप के साथ या किसी और के साथ कुछ गलत हो रहा है और आप उस के खिलाफ बोल पा रहे हैं, तो वही असली बोल्डनैस है, इसलिए मु? लगता है कि सिर्फ हीरोइन को ही नहीं, बल्कि हर महिला को बोल्ड होना चाहिए. हर किसी को अपने हक के लिए खड़ा होना आना चाहिए.

आप का दिल जीतने के लिए किसी में क्या क्वालिटी होनी चाहिए?
हमेशा से सादगी बहुत पसंद है. मेरे लिए सब से जरूरी है कि इनसान दिल का सच्चा हो, अच्छा हो और सम्मान देना जानता हो. अगर किसी में ये गुण हैं, तो मेरे दिल को जीतने के लिए इतना ही काफी है.

इंस्टाग्राम पर फेमस होना कितना चैलेंजिंग है?
आज के समय में इंस्टाग्राम पर फेमस होना काफी चैलेंजिंग हो गया है. कई बार ऐसा लगता है कि वहां
फेमस होने के लिए लोगों को बहुतओवर टौपजा कर काम करना पड़ता हैज्यादा एक्सप्रैसिव होना, कभीकभी जरूरत से ज्यादा ओवर एक्टिंग करना. मैं ने कई ऐसे कलाकारों को देखा है, जो सिर्फ फेमस होने के लिए इस तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन मेरे हिसाब से ये चीजें ज्यादा समय तक टिकती नहीं हैं. जो चीजें जल्दी वायरल होती हैं, उन का असर भी उतनी ही जल्दी खत्म हो जाता है, जैसे वायरल फीवर कुछ दिनों में उतर जाता है.

फैंस के कमैंट्स आप को मोटिवेट करते हैं या प्रैशर देते हैं?
मेरे इंस्टाग्राम और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर हमेशा फैंस का बहुत प्यार और सपोर्ट मिलता है. उन के कमैंट्स प्रैशर नहीं देते, बल्कि और ज्यादा मोटिवेट करते हैं. उन का यही प्यार और सपोर्ट हर दिन बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है.

क्या कभी भोजपुरी के किसी कोस्टार ने आप को सरप्राइज किया?
मेरा पहला काम जब पवन सिंह के साथ आया, तो मैं ने उन के बारे में पहले काफीकुछ सुन रखा था, इसलिए थोड़ा सा संशय था. लेकिन जब मैं ने उन के साथ काम किया, तो मेरा अनुभव बिलकुल अलग और बेहद पौजिटिव रहा. वे बहुत ही स्वीट, डीसैंट और सहयोगी इनसान हैं. इसी तरह, खेसारीलाल यादव के बारे में भी लोगों से कई तरह की बातें सुनने को मिली थीं, लेकिन जब मैं ने उनके साथ काम किया, तो लगा ही नहीं कि वे वैसे हैं जैसा अकसर कहा जाता है. वे बहुत ही सरल, विनम्र और सहयोगी हैं.

आप को साउथ और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सब से बड़ा फर्क क्या लगा?
साउथ फिल्म इंडस्ट्री आज के समय में बहुत बड़ी हो चुकी है और कई मामलों में इंटरनैशनल लैवल तक पहुंच चुकी है. वहीं भोजपुरी इंडस्ट्री में अभी बहुत संभावनाएं हैं और आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है. हालांकि, एक चीज जो दोनों इंडस्ट्री में समान लगी, वह है अपनापन. दोनों ही जगह लोगों का बरताव बहुत ही सहयोगी और आत्मीय होता है. मेरा एक सपना यह भी है कि मैं मलयालम फिल्मों में काम करूं. अभी तक वहां काम करने का मौका नहीं मिला है, लेकिन अगर सबकुछ अच्छा रहा, तो मैं जरूर मलयालम इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहूंगी.

क्या आप पैन इंडिया स्टार बनने का सपना देखती हैं?
जी हां, मैं पैन इंडिया स्टार बनने का सपना जरूर देखती हूं. अभी तक मैं ने 5 अलगअलग भाषाओं में काम किया है और मेरा मानना है कि जिस दिन मैं इन सभी भाषाओं में एकसाथ एक बड़ी फिल्म कर पाऊंगी, उसी दिन खुद को सही माने में पैन इंडिया स्टार कह सकूंगी.
अपने फैंस के लिए कोई मैसेज?
अपने फैंस के लिए मैं बस इतना कहना चाहूंगी, ‘दिल में हो तुम, सांसों में तुमज् बोलो तुम्हें और क्या दूं…’ आप लोगों का जो प्यार और आशीर्वाद मिला है, वही मेरी सब से बड़ी ताकत है.                         

 

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