एक दिन: तीन नेताओं के तीन बयान

आज हम देश के तीन बड़े नेताओं के बयान का विश्लेषण ले कर आए हैं. इन्हें पढ़समझ कर आप खुद अंदाजा लगाइए कि देश किस दिशा में जा रहा है. एक समय था जब देश के बड़े नेता सोच समझ कर जनता के बीच अपनी भावना व्यक्त करते थे. कहां गया वह समय और कहां जा रहा है हमारा भारत देश. पहला बयान है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का और दूसरा है गृह मंत्री अमित शाह का और तीसरा बयान है अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहिन…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 11 नवंबर, 2024 को आरोप लगाया कि कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सामूहिक ताकत को तोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि उन के बीच विभाजन पैदा किया जा सके और उन की आवाज कमजोर की जा सके और अंततः उन के लिए आरक्षण समाप्त किया जा सके.

नरेंद्र मोदी ने ‘नमो एप’ के माध्यम से ‘मेरा बूथ, सब से मजबूत’ कार्यक्रम के तहत झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कहा कि इसलिए मैं चार बार कहता रहता हूं कि एक रहेंगे, तो सेफ (सुरक्षित) रहेंगे. नरेंद्र मोदी ने झारखंड मुक्ति मोरचा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन के पांच साल के शासन की विफलताओं को रेखांकित किया और कहा कि राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए ‘भ्रष्टाचार, माफिया और कुशासन’ से मुक्त कराना होगा.

नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि झारखंड की जनता इस बार विधानसभा चुनाव में बदलाव को संकल्पित है और इस का सब से बड़ा कारण यह है कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने राज्य की रोटी, बेटी और माटी पर वार किया है. उन्होंने कहा कि झारखंड इस बार बदलाव करने को संकल्पित हो गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ ‘राष्ट्र विरोधी’ अपने निहित स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने लोगों से उन्हें हराने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया. नरेंद्र मोदी ने गुजरात के खेड़ा जिले के चडताल में श्री स्वामीनारायण मंदिर की 200वीं वर्षगाठ पर आयोजित समारोह को डिजिटल तरीके से संबोधित किया.

पिछले पांच साल इन्होंने बड़ीबड़ी बातें कीं, लेकिन आज झारखंड के लोग देख रहे हैं कि इन के ज्यादातर वादे झूठे हैं. भाजपा झारखंड में ‘रोटी, बेटी और माटी’ के मुद्दे को जोरशोर से उठा रही है. इस के माध्यम से वह आदिवासी अस्मिता का सवाल
उठा कर बंगलादेशी घुसपैठियों द्वारा आदिवासी महिलाओं का तथाकथित उत्पीड़न, धर्मांतरण, जमीन पर कब्जा और धोखा दे कर विवाह करने तथा इस के परिणामस्वरूप आदिवासियों की संख्या में लगातार कमी आने का मुद्दा उठा रही है .राज्य में झारखंड मुक्ति मोरचा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की गठबंधन सरकार है.

नरेंद्र मोदी ने कहा कि राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने महसूस किया कि लोगों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद को ले कर भी भारी गुस्सा है. उन्होंने कहा कि परिवारवादी पार्टियां, भ्रष्टाचारी तो होती ही हैं. साथ ही समाज के प्रतिभाशाली नौजवानों के रास्ते में सब से बड़ी दीवार होती हैं. झामुमो के परिवारवादियों ने कांग्रेस के ‘शाही परिवार’ से ऐसी गंदी चीजें सीखी हैं, जिस में उन्हें कुरसी और खजाना… इन दो चीजों की ही चिंता रहती है. नागरिकों की उन्हें परवाह हो नहीं होती है. उन्होंने कहा कि इसलिए इस बार के विधानसभा चुनाव में झामुमो गठबंधन की सत्ता से विदाई तय है.

समीक्षा करते हुए हम कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने जो कुछ कहा है, वह दोतरफा है. यह कैसे भूल जाते हैं कि अगर आप किसी की तरफ एक उंगली उठाते हैं तो चार उंगलियां आप की तरफ भी होती हैं.

गृह मंत्री अमित शाह कहिन…

कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार, 11 नवंबर, 2024 को कहा कि वे (कांग्रेस) चुनाव में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नहीं बचा सकती.

अमित शाह ने रांची जिले के तमार में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने झारखंड को बरबाद कर दिया. उन्होंने वादा किया कि चुनाव के बाद भाजपा यदि सत्ता में आई तो वह अगले पांच साल में इसे सब से अधिक समृद्ध राज्य बना देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो, कांग्रेस आदिवासियों को महज वोट बैंक समझती हैं, वे उन का सम्मान नहीं करती हैं. उन्होंने दावा किया कि घुसपैठियों के कारण आदिवासियों की संख्या लगातार घटती जा रही है और ये घुसपैठिए झामुमोनीत (सत्तारूढ़) गठबंधन के वोट बैंक हैं.

कांग्रेस पर प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी की चार पीढ़ियां भी जम्मूकश्मीर में अनुच्छेद 370 वापस नहीं ला सकती हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि झारखंड में अगर भाजपा की सरकार बनती है, तो घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें राज्य से बाहर निकालने के अलावा उन के द्वारा हड़पी गई जमीन को वापस लेने के लिए एक समिति गठित की जाएगी.

गृह मंत्री के रूप में कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष रूप से भी प्रहार किया जा सकता है, मगर जिस स्तर पर आ कर चार पीढ़ियां की बात जम्मूकश्मीर विधेयक 370 के संदर्भ में अमित शाह ने कही है, आप ही बताइए कि क्या वह शोभनीय है?

मल्लिकार्जुन खड़गे कहिन…

11 नवंबर, 2024, दिन सोमवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात कहते हुए बड़े बेचारे से लग रहे थे मगर उन्होंने जो कहा बड़ी बेबाकी से और बड़ा सच कहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को दबाने एवं निर्वाचित सरकारों को गिराने में विश्वास करती है. विधायकों की बकरियों की तरह खरीदफरोख्त की जाती है. उन्होंने नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अडाणी और अंबानी के साथ मिल कर केंद्र सरकार चलाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने योगी आदित्यनाथ को घेरते हुए कहा कि वे मुंह में राम, बगल में छुरी में विश्वास करते हैं.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदीजी सरकारें गिराने में विश्वास रखते हैं. वे विधायक खरीदते हैं. उन का काम विधायकों को बकरी के जैसे अपने पास रख लेना, पालना और फिर बाद में काट कर खाना है.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि मोदी और शाह ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को तैनात कर दिया है, लेकिन हम डरते नहीं हैं. हम ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, अपने प्राणों की आहुति दी.

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी, शाह, अडाणी और अंबानी देश चला रहे हैं, जबकि राहुल गांधी और मैं संविधान और लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कटाक्ष किया कि मोदी आदतन झूठे हैं, जो कभी अपने वादे पूरे नहीं करते.

समीक्षा करें तो साफ है कि तीनों ही बयानों को पढ़ने के बाद आप देखेंगे की नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बयान अतिरेकपूर्ण हैं, वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान आत्मरक्षात्मक है. इन तीनों ही बयानों से ऐसा लगता है कि देश एक राजनीतिक संक्रमणकाल से गुजर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं कहा जा सकता.

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी मचे घमासान, कहीं हो सिरफुटौव्वल, कहीं गोली खाए जवान

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में एक बड़ी योजना ‘जल जीवन मिशन’ शुरू की है, जिस के तहत अरबों रुपए के बजट के तहत गांवगांव में पानी की टंकियां बनाई जा रही हैं. दूसरी तरफ पानी को ले कर होने वाले झगड़े देशभर में अब अपनी सीमाओं को लांघ रहे हैं. कहीं पानी के लिए मारामारी मची हुई है, तो कहीं लाठी और गोली चल रही है.

नरेंद्र मोदी की ‘जल जीवन मिशन’ योजना में पलीता लग चुका है… किस तरह और कैसे हम आप को आगे बताएंगे, अभी तो यह समझना चाहिए कि पानी की कमी सरकार के लिए एक सामान्य घटना हो सकती है, मगर यह सरकार की नाकामी ही कही जाएगी.

हम यहां कुछ घटनाओं का ब्योरा दे रहे हैं, जो बताती हैं कि पानी के चलते किस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं :

-छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पानी को ले कर 2 औरतों में तकरार हुई. एक औरत ने दूसरी औरत पर हमला कर दिया और मामला पुलिस तक जा पहुंचा.

-छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अरजुनी गांव में एक आदमी ने पानी के झगड़े के चलते दूसरे आदमी पर डंडा चला दिया, जिस से उस का सिर फट गया.

यही हालात रहे तो किसी दिन देश और समाज दोनों को ही इस के लिए कोई बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ सकता है. दरअसल, यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि सिर्फ पानी के लिए कोई किसी के सिर पर लाठी मार दे या गोली चला दे. मगर ऐसी वारदातें अब आएदिन हो रही हैं, जो बताती हैं कि सरकार पानी की समस्या को ले कर गंभीर नहीं है.

भीषण गरमी के मौसम में पानी को ले कर मारामारी की खबरें अखबारों में सुर्खियां बनती रहती हैं, मगर इस के लिए गोली भी चल सकती है, क्या आप को मालूम है? यह वारदात बताती है कि पानी की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है.

गाजियाबाद जिले के निवाड़ी थाना क्षेत्र में पानी के झगड़े के चलते एक आदमी और उस के बेटे की गोली मार कर हत्या कर दी गई. यही नहीं, हमले में मृतक का दूसरा बेटा घायल हो गया. पुलिस को जब इस की जानकारी मिली तो मौका ए वारदात पर पहुंच कर उस ने हालात को शांत कराया और आरोपियों को हिरासत में ले लिया.

निवाड़ी इलाके के खिंदौड़ाधौलड़ी रजवाहा के रास्ते पर एक रात कुछ लोगों ने आम के बाग के ठेकेदार और धौलड़ी गांव के रहने वाले 55 साल के पप्पू और उन के 2 बेटों 26 साल के राजा और 22 साल के चांद पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. इस की वजह सिर्फ एक थी, पानी.

इस हमले में पप्पू और राजा की मौके पर मौत हो गई, जबकि कंधे और हाथ में कई गोलियां लगने के बावजूद चांद किसी तरह वहां से बच कर भाग गया.

पुलिस उपायुक्त ग्रामीण विवेकचंद यादव के मुताबिक, जलस्रोत से सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई लेने के मुद्दे पर 2 पक्षों में विवाद हुआ. पप्पू और उन के बेटे मोटरसाइकिल से आम के एक बगीचे से दूसरे बगीचे में जा रहे थे, जिसे उन्होंने वेद प्रकाश त्यागी से ठेके पर लिया था.

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, इन तीनों की शुक्रवार, 21 जून, 2024 की शाम को बगल के बगीचे के मालिक के साथ तीखी नोकझोंक हुई, फिर रात को बाग में पहले से ही मौजूद हमलावरों के एक गुट ने उन पर गोलियां चला दीं. मौके से पुलिस को 5 खाली कारतूस मिले हैं.

पुलिस ने शनिवार, 22 जून, 2024 की सुबह पप्पू और राजा के शवों को नहर से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. दूसरी ओर चांद के गुस्साए परिवार ने शनिवार, 22 जून, 2024 को निवाड़ी रोड पर यातायात जाम कर शासन से इंसाफ की फरियाद की. पप्पू के परिवार की तहरीर के आधार पर 7 नामजद लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है.

पुलिस उपायुक्त के मुताबिक, 3 मुख्य आरोपियों बिट्टू त्यागी, उस के भाई दीपक त्यागी और पिता सुधीर त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है.

दरअसल, देशभर में पानी की कमी की खबरें और उसे ले कर खूनी लड़ाई की वारदातें हो रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘जल जीवन मिशन’ योजना के तहत अरबों रुपए खर्च कर के गांवगांव में पानी की टंकियां बनवा रहे हैं. हम जानते हैं कि उन के पहले कार्यकाल में जब उन्होंने स्वच्छता अभियान चला कर घरघर में शौचालय बनवाए थे, तो आज उन की हालत देखने लायक है. पानी नहीं होने के चलते ज्यादातर शौचालय अब खंडहर बन चुके हैं. अब वे पानी की टंकियां बनवा रहे हैं, वे भी आने वाले समय में खंडहर बन जाएंगी और गांव वालों को पानी मिल ही नहीं पाएगा, क्योंकि इस योजना में खामियां ही खामियां हैं.

अच्छा हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय निकाल कर कभी किसी पानी टंकी के बनने की जगह पर जा कर हालात का जायजा ले आएं, तो शायद कुछ ठोस बदलाव आ जाए.

प्राइवेट स्कूलों पर भारी है सराकरी स्कूल!

आमतौर पर समझा यही जाता है कि आईआईटी, मेडिकल कालेजों, इंजीनियङ्क्षरग कालेजों में पढ़ाई के दरवाजे सिर्फ प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट्स के लिए खुली हैं. दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 2200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों के युवाओं ने नीट, जेईई मेन व जेईई एडवांस एक्जाम क्वालीफाई करके साबित किया है कि स्कूल या मीडिया नहीं स्कूल चलाने बालों की मंशा ज्यादा बड़ा खेल खेलती है.

अरङ्क्षवद केजरीवा की आम आदमी पार्टी जो एक तरफ धर्मभीरू है, भाजपा की छवि लिए घूमती है, दूसर और भाजपा की केंद्र सरकार और उस के  दूत उपराज्यपाल के लगातार दखल से परेशान रहती है, कुछ चाहे और न करे, स्कूलों का ध्यान बहुत कर रही है. सरकारी स्कूलों के एक शहर के इतने सारे युवा इन एक्जाम में पास हो जाएं जिन के लिए अमीर घरों के मांबाप लाखों तो कोङ्क्षचग में खर्च करते हैं, बहुत बड़ी बात है.

यह पक्का साबित करता है कि गरीबी गुरबत और ज्ञान न होना जन्मजात नहीं, पिछले जन्मों के कर्मों का फल नहीं, ऊंचे समाज की साजिश है. एक बहुत बड़ी जनता को गरीबी में ही नहीं मन से भी फटेहाल रख कर ऊंचे लोगों ने अनपढ़ सेवकों की एक पूरी जमात तैयार कर रखी है जो मेहनत करते हैं, क्या करते हैं पर उस में स्विल की कमी है, लिखनेपढऩे की समझ नहीं हैै.

सरकारी स्कूल ही उन के लिए एक सहारा है पर गौ भक्त राज्यों में ऊंची जातियों के टीचर नीची जातियों के छात्रों के पहले दिन से ऊंट फटका कर निकम्मा बना देते हैं कि उन में पढऩे का सारा जोश ठंडा पड़ जाता है और वे या तो गौर रक्षक बन डंडे चलाना शुरू कर देते हैं या कांवड ढोने लगते हैं. केजरीवाल की सरकार के स्कूलों में उन्हें पढऩे की छूट दी, लगातार नतीजों पर नजर रखी. ये लोग चाहे जैसे भी घरों से लाए, पढऩे की तमन्ना थी और जरा सा हाथ पकडऩे वाले मिले नहीं कि सरकारी स्कूलों ने 2000 से ज्यादा को इंजीनियङ्क्षरग और मेडिकल कालेजों की खिड़कियां खोल दीं.्र

यह अपनेआप एक अच्छी बात है और यदि सही मामलों में देश में लोकतंत्र आना है तो जरूरी है कि स्कूली शिक्षा सब के एि एक समान हो, चाहे जिस भी भाषा में हो पर अंग्रेजी में न हो, प्राईवेट कोङ्क्षचग स्कूली शिक्षा के दौरान न हो.

सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहिए तो वोटरों को खयाल रखना होगा कि जो पौराणिक तरीके चाहते हैं उन्हें सत्ता में रखे या जो पुराणों में बनाई गई ऊंची खाईयों को पाटने वालों को वोट दें. वोट से पढ़ाई का स्टैंडर्ड बदला जा सकता है. यूपी, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को हाल क्या है, इस को दूसरों राज्यों के स्कूलों से मुकाबला कर के देखा जा सकता है कि जयश्रीराम का नारा काम का है. ज्ञानविज्ञान और तर्क का नारा.

संसद में कर्मकांड और प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी

देश के नए संसद भवन के उद्घाटन के दरमियान प्राचीन रीति-रिवाजों के नाम पर जिस तरह कर्मकांड दुनिया और हमने देखे हैं उससे यह संदेश गया है कि आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की वैज्ञानिक सोच से इतर आज का भारत यह है जो हवन और कर्मकांड में विश्वास रखता है . क्योंकि इसके बगैर न तो देश की तरक्की हो सकती है और न ही समाज की. संभवत नरेंद्र दामोदरदास मोदी को यह विश्वास और आस्था है कि पंडित पुरोहितो के सामने समर्पण करने से देश दुनिया का सरताज बन सकता है और तथाकथित रूप से विश्व गुरु भी.

यह सब देखने के बाद कहा जा सकता है कि आज देश उस चौराहे पर खड़ा है जहां से एक बार फिर पोंगा पंथ और पुरातन पंथी विचारधारा को  सरकार और  सबसे ज्यादा प्रधानमन्त्री का प्रश्रय मिला है.

दरअसल, यह देश में  हिंदुओं की तुष्टिकरण के कारण और बहुलता के कारण यह सब किया जा रहा है. जो सीधे-सीधे संविधान और अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो जाने वाले लाखों लोगों का अवमान है. यह बताता है कि लोकतंत्र में सत्ता के लिए वोटों की राजनीति का भयावह चित्र कैसा हो सकता है. हमारे देश के संविधान में स्पष्ट रूप से अंकित है कि लोकतांत्रिक गणराज्य है. मगर आज हिंदुत्व वाली सोच कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र दामोदरदास मोदी संविधान की भावना से हटकर के वह सब कर रहे हैं जो इसके पहले 75 वर्षों में कभी भी नहीं हुआ. और मजे‌ बात की लोग कह रहे हैं कि नए भारत का आगाज हो गया है. यह हास्यास्पद है की ऐसा महसूस कराया जा रहा है मानो बीते 75 साल हमारे देश के लिए अंधकार के समान थे और नरेंद्र मोदी की सत्ता आने के बाद देश सही अर्थों में आजाद हुआ है विकास की ओर बढ़ रहा है और दुनिया का नेतृत्व करेगा. मगर यह सब बातें मीडिया का हो हल्ला है. सच्चाई यह है कि देश जिस तरह अपनी संविधान की सीमाओं से हटकर के पीछे की ओर जा रहा है उससे देश की छवि दुनियां में पूरी तरह से बदल रही है जो भविष्य के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती.

नेहरू और नरेन्द्र मोदी

तथ्य यह  है कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्ष को सम्मान नहीं देते और उनके कार्य व्यवहार से महसूस होता है मानो विपक्ष को समाप्त कर देना चाहते हैं.  नरेंद्र मोदी बारंबार विपक्ष को नजरअंदाज कर और हंसी उड़ाते दिखाई देते हैं. अगर ऐसा नहीं है तो जब संसद के निर्माण का विचार नरेंद्र मोदी सरकार को आया तो उन्होंने विपक्ष से मिल बैठकर विचार विमर्श क्यों नहीं किया. जब उद्घाटन का समय आया तब उन्होंने विपक्ष के साथ विचार-विमर्श क्यों नहीं किया. देश सत्ता और विपक्ष के माध्यम से ही चलता है.  मगर नरेंद्र दामोदरदास मोदी की सोच  है कि विपक्ष को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए. यही कारण है कि नई संसद के उद्घाटन के दरमियान कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार कर दिया. मगर उन्हें मनाने के लिए सकारात्मक   पहल नरेंद्र मोदी सरकार ने नहीं की. बल्कि  हुआ यह कि सरकार के चर्चित चेहरों द्वारा चाहे वह राजनाथ सिंह को या फिर स्मृति ईरानी द्वारा विपक्ष का मजाक बनाया गया और उन पर प्रश्नचिन्ह उठाए गए. इस संदर्भ में शरद पवार ने जो कहा है वह सौ फीसदी दी सच है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के मुताबिक,- “नए संसद भवन के बनाने से मैं खुश नहीं हूं. मैंने सुबह कार्यक्रम देखा है, अच्छा है मैं वहां नहीं गया. नई संसद मे जो कार्यक्रम हुआ उससे हम देश को पीछे ले जा रहे हैं.”

शरद पवार देश वरिष्ठ राजनेता है अगर उन्होंने उद्घाटन समारोह पर यह टिप्पणी की है तो यह देश की दुनिया की आवाज ही कही जा सकती है. उनके मुताबिक -“उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  की विभिन्न रस्मों से यह प्रदर्शित हुआ  की देश को दशकों पीछे ले जाया जा रहा है , देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने वैज्ञानिक सोच रखने वाले समाज की परिकल्पना की थी, लेकिन नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में जो कुछ हुआ वह इसके ठीक उलट है.”

सचमुच यह दुखद है और जिसका टेलीकास्ट दुनियाभर में हुआ है सारी दुनिया जानती है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां सभी जाति समुदाय के लोग प्रेम और सद्भाव के साथ रहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम से मानो सब कुछ मिट्टी पलीद हो गया.

संसद भवन का उद्घाटन के दौरान वहां हवन किया गया तथा लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट राजदंड (सेंगोल) स्थापित किया गया. यह साला ढकोसला दुनिया ने देखा है और इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. जिसका दूरगामी असर भारत की राजनीति पर भविष्य पर पड़ने वाला है.

दरअसल,प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा आधुनिक भारत की अवधारणा की बात करने और नई दिल्ली में नए संसद भवन में की गई विभिन्न रस्मों में बहुत बड़ा अंतर है. जो सिर्फ हिंदुत्व की स्थापना और हिंदू तुष्टीकरण के कारण किया गया है. यह पूरी तरह संविधान की भावना के विपरीत है. वस्तुत: यह लोग ऐसे हैं कि अगर आज हिंदुओं की जगह कोई दूसरा जाति समुदाय बहुसंख्यक हो जाए तो यह लोग उनके पैरों में भी लोटने लगेंगे.

नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर देश के सभी छोटे बड़े नेताओं बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे हैं ,ऐसे समय में शरद पवार का बयान अत्यंत महत्वपूर्ण है नए संसद भवन के उद्घाटन के संपूर्ण कार्यक्रम पर उनका यह कहना कि विज्ञान पर समझौता नहीं किया जा सकता. नेहरू ने वैज्ञानिक सोच वाले समाज का निर्माण करने की ओर निरंतर प्रयास किया. लेकिन आज नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में जो कुछ हुआ, वह उससे ठीक उलट है जिसकी नेहरू ने परिकल्पना की थी.

हलचल: भारत जोड़ो यात्रा- भाजपा चंचला, राहुल गांधी गंभीरा

राहुल गांधी ने इस पदयात्रा का आगाज ‘विवेकानंद पौलीटैक्निक’ से 118 दूसरे ‘भारत यात्रियों’ और कई नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ 7 सितंबर, 2022 को शुरुआत की थी. कांग्रेस ने राहुल गांधी समेत 119 नेताओं को ‘भारत यात्री’ नाम दिया है, जो कन्याकुमारी से पदयात्रा करते हुए कश्मीर तक जाएंगे. ये लोग कुल 3,570 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से अपनी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा की औपचारिक शुरुआत की और इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लिखित संदेश में कहा, ‘यह यात्रा भारतीय राजनीति के लिए परिवर्तनकारी क्षण है और यह कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगी.’

इस तरह कहा जा सकता है कि राहुल गांधी की यह पदयात्रा कई माने में गंभीर संदेश देश को देने लगी है. देश के प्रधानमंत्री रह चुके और अपने पिता राजीव गांधी को श्रीपेरंबदूर में श्रद्धांजलि देने के बाद यह पदयात्रा शुरू हुई थी, जो देखतेदेखते भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई और कांग्रेस अब आगे निकलती दिखाई दे रही है.

भाजपा के आरोप

राहुल गांधी की पदयात्रा शुरू होने से पहले से ही भारतीय जनता पार्टी की घबराहट दिखाई देने लगी थी और उस के नेता इस पदयात्रा पर उंगली उठाने लगे थे. जैसेजैसे पदयात्रा का समय निकट आता गया, भारतीय जनता पार्टी और भी आक्रामक होती चली गई.

पदयात्रा शुरू होने के साथ भाजपा के नेताओं की जैसी आदत है, उन्होंने हर मुमकिन तरीके से राहुल गांधी की इस ऐतिहासिक पदयात्रा को शुरू में ही मानसिक रूप से ध्वस्त और कमजोर करने की भरसक कोशिश की. देश में यह संदेश फैलाने का काम किया कि यह सब तो सिर्फ और सिर्फ बेकार की कवायद है.

भाजपा के एक नेता ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का क्या मतलब है भाई? भारत तो पहले से ही जुड़ा हुआ है. इस तरह इस अभियान पर सवालिया निशान लगाने की पूरी कोशिश की गई.

मगर आश्चर्यजनक रूप से भाजपा का यह अमोघ ब्रह्मास्त्र फेल हो गया, क्योंकि देश की जनता राहुल गांधी को बड़ी गंभीरता से देख रही है और भारत जोड़ो यात्रा को पौजिटिव भाव से ले रही थी.

भाजपा का जब भारत जोड़ो यात्रा पर सवाल उठाने वाला तीर नहीं चला, तो उस ने दूसरा तीर चलाया और कहा कि राहुल गांधी तो 41,000 रुपए की महंगी टीशर्ट पहन कर पदयात्रा पर निकले हैं, लेकिन भाजपा का यह तीर भी भोथरा साबित हुआ, क्योंकि देश की जनता ने उसे गंभीरता से नहीं लिया.

वजह, आरोप लगाने वाले भाजपाई नेता चाहे वे प्रधानमंत्री हों या गृह मंत्री या फिर दूसरे बड़े नेता खुद लाखों रुपए के बेशकीमती कपड़े पहनते हैं. इन की फुजूलखर्ची सारा देश देख रहा है. इन के स्वभाव में कहीं भी किफायतदारी नहीं है. ऐसे में यह तीर ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ कहावत बन कर रह गया.

राहुल गांधी की इस पदयात्रा से अब जहां भाजपा हैरान है, वहीं विपक्ष के कई बड़े नेताओं का भी होश काम नहीं कर रहा है. चाहे वे नीतीश कुमार हों या ममता बनर्जी या फिर अरविंद केजरीवाल, प्रधानमंत्री पद के दावेदार सभी के मुंह पर ताला लग गया है.

वैसे तो होना यह चाहिए था कि विपक्ष की एकता की बात करने वाले ये नेता खुल कर राहुल गांधी की पदयात्रा का समर्थन करते. अभी तक शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी की पदयात्रा के पक्ष में अपना बयान दिया है, बाकी सारे नेता खामोश हैं और उन की खामोशी अपनेआप में एक बड़ा सवाल है.

बीजेपी ने लहराया महाराष्ट्र में अपना परचम

भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार को गिरा कर अपना ढाई साल पहले का बदला तो ले लिया पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और अमित शाह को समझ आ गया होगा कि काठ की हांडी में जो खीर पकाई जा रहही थी, अब छेद होने लगे है और हर बार मामला पूरी तरह कंट्रोल में नहीं रहता. शिवसेना को छोड़ कर गए एकनाथ ङ्क्षशदे ने मुख्यमंत्री पद छीन ही नहीं लिया भाजपा को जता दिया कि हर जगह उस की नहीं चलेगी और उसे भी अपना अहम पूरा करने की भारी कीमत देनी पड़ेगी.

कोई बड़ी बात नहीं होती कि सिर्फ 30-35 विधायकों वाली पार्टी अब 112 विधायकों वाली भाजपा को हर रोज धमकी देती रहे. एकनाथ ङ्क्षशदे उन जैसों में से हैं जो किसी भी दिन फिर पलटी मार सकते हैं. उनका शिव सेना के कैडर पर कब्जा है यह पक्का नहीं है.

ठाकरे परिवार जिस मेहनत से शिवसेना को बनाया है, एकनाथ ङ्क्षशदे उसे समेट कर ले जाएं, इस के उदाहरण कम ही है. तमिलनाडू में जयललिता के बाद अन्नाद्रविड़ मुनेत्रकषगम बिखर गई है. एमजे रामचंद्रन और जयललिता ने मिल कर इसे बनाया था. बहुजन समाज पार्टी कांशीराम और मायावती ने बनाई और कमजोर होने के बावजूद आज भी दलित वोटों पर खासी पकड़ मायावती की है चाहे वह आलास्य के कारण पार्टी को आगे नहीं चला पा रही हों.

कांग्रेस बेहद सिकुड़ गई है पर नेताओं और वेटरों को तो दूसरी पाॢटयां ले जा रही हैं  पर वर्कर आज भी गांधी परिवार के साथ हैं. शरद पंवार महाराष्ट्र तक में पूरी कांग्रेस को हड़प नहीं सकते हैं.

एकनाथ ङ्क्षशदे पूरी शिवसेना को ठाकरे परिवार के हाथों छीन लेंगे, इस में संदेह है. उलट शिवसेना में अब ङ्क्षशदे से बदला लेने की भावना तेज हो सकती है और अगले किसी भी चुनाव में जाएं शिवसेना का कैडर न हो, न ङ्क्षशदे जीत सकेंगे न भाजपा.

धोखा देना आसान है पर धोखे के बाद जीवन आसान नहीं होता. इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है जिन में जिस ने धोखा देकर सरकार गिराई वह बाद में फिर लौट के आया. इस शतरंजी चाल में सफेद राज्य जीते या काले राज्य, मरते प्यादे हैं. सभी प्यादों को मार दिया जाता हैं या निकम्मा बना दिया जाता है.

अब महाराष्ट्र में न शिवसेना का कैडर अपनेआप को मजबूत समझेगा न भारतीय जनता पार्टी का जो तालमेल पिछले चुनावों तक दोनों में था वह भाजपा की बेसब्री की वजह से टूट गया है. इस का नुकसान भाजपा पहले पंजाब, बंगाल और ओडिसा में देख चुकी है जहां उस ने सत्ता में आन की छटपटाहट में भयंकर तोड़ाफोड़ी अपने खिलाफ पार्टी में तो की है, अपनी सहयोगी पार्टी में भी की. ममता बैनजी, नवीन ङ्क्षजदल कभी भाजपा के साथ काम कर चुके हैं पर काम कराना, धोखा देना और फिर कब्जा कर लेना यह पौराणिक कथाओं से भाजपा शासक सीखसीख कर आते हैं. विष्णु का वामन अवतार इसी का उदाहरण है भगवान विष्णु ने एक छोटा रूप धारण का राजा बलि को धोखा दिया.

ङ्क्षशदे का ठाकरे परिवार को दिया गया धोखा कुछ दिन काम करेगा और यह दूसरी पाॢटयों को सतर्क कर देगा. अब भाजपा के पास तोडफ़ोड़ करने के लिए लालच नहीं, ईडी की धमकी बची है. ईडी भी कितनी कामयाब होती है, यह देखना है क्योंकि अब तक सिवाए तंग करने के बाद यह कम को ही मुजरिम साबित नहीं कर पाई है.

ङ्क्षशदे का मुख्यमंत्री पद का निवाला देवेंद्र फडनवीस के मुंह से छीन ले जाने का मतलब है कि अब और फडनवीस भाजपा को नहीं मिलेेंगे पर ङ्क्षशदे जरूर मिलेंगे.

लुटियंस दिल्ली की ठंडक पर भारी पड़ा राहुल गांधी का भाषण, याद दिलाया मीडिया का दायित्व

आजादी के की अगर कुछ राजनीतिक घटनाएं याद की जाएं तो पोरो में गिन सकते हैं. 60 के दशक में कांग्रेस का विभाजन, देश में आपातकाल, पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार, 90 के दशक में पहली बार बड़े पैमाने पर आर्थिक बदलाव. इन सब के बाद अगर कुछ बड़ा हुआ तो वो था 2014 का आम चुनाव. वर्षों बाद किसी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला था. ये चुनाव कई मायनों पर खास था. एक मुख्यमंत्री का पीएम पद के लिए नाम आना फिर उस चुनाव की रणनीति. हाईटेक चुनाव, बेशुमार दौलत लगाया गया. उसके बाद कुछ तो था तो अब तक गुम लग रहा था. वो था देश का विपक्ष. वही विपक्ष जिसके बिना लोकतंत्र अधूरा रहता है. इस अधूरेपन को देश 2014 से महसूस कर रहा था लेकिन इसको पूरा किया शनिवार को.

शनिवार को कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान पर ‘भारत बचाओ’ रैली का आयोजन किया. इस रैली में गजब की भीड़ पहुंची. कांग्रेस ने इसको सफल बनाने के लिए प्रदेशों के मुखियाओं को पहले ही आदेश दे दिया था. फिर क्या था. राहुल गांधी के तेवर सातवें आसमान में थे. एक के बाद एक मुद्दे लाकर वो सरकार को घेर रहे थे. ऐसे मुद्दे जो वाकई में आम आदमी के थे. वो मुद्दे जिनसे हर रोज हमको-आपको जूझना पड़ता है.

राहुल गांधी ने कहा, “कल संसद में भाजपा के लोगों ने कहा कि आप अपने भाषण के लिए माफी मांगिए. लेकिन मैं आपको बता दूं कि मेरा नाम ‘राहुल सावरकर’ नहीं है, मेरा नाम ‘राहुल गांधी’ है. मर जाऊंगा, मगर माफी नहीं मांगूंगा. सच बोलने के लिए मैं माफी नहीं मांगूंगा. कांग्रेस का कोई व्यक्ति माफी नहीं मांगेगा.” राहुल ने कहा, “माफी (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी को मांगनी है इस देश से. उनके असिस्टेंट (गृहमंत्री) अमित शाह को देश से माफी मांगनी है,” क्योंकि उन्होंने देश को बर्बाद कर दिया है.

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राहुल का इशारा हिंदूवादी नेता दिवंगत विनायक दामोदर सावरकर द्वारा 14 नवंबर, 1913 को ब्रिटिश सरकार को लिखे गए माफी के पत्र की तरफ था, जिसे उन्होंने अंडमान के सेलुलर जेल में बंद रहने के दौरान लिखा था. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने झारखंड में एक चुनावी रैली के दौरान ‘रेप इन इंडिया’ टिप्पणी की थी, जिस पर भाजपा सदस्यों ने शुक्रवार को संसद में उनसे माफी की मांग की थी. राहुल की इस टिप्पणी को लेकर संसद में काफी हंगाम हुआ था.

राहुल ने आगे कहा, “इस देश की शक्ति, आत्मा यहां की अर्थव्यवस्था थी. पूरी दुनिया हमारी तरफ देखती थी और कहती थी कि यह हिंदुस्तान में क्या हो रहा है. अलग-अलग धर्मो का देश नौ प्रतिशत जीडीपी पर कैसे चल रहा है. पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था भारत और चीन पर निर्भर थी। इसे चिंडिया कहते थे.”

उन्होंने कहा, “लेकिन आज प्याज की कीमत 200 रुपये (प्रति किलोग्राम) पर पहुंच गई है. नोटबंदी कर दिया. उस चोट से जो नुकसान हुआ वह आजतक ठीक नहीं हुआ. देश की अर्थव्यवस्था को नरेंद्र मोदी ने नष्ट कर दिया. इसलिए मोदी को देश से माफी मांगनी है.”

कांग्रेस नेता ने कहा, “उन्होंने आपसे झूठ कहा कि काले धन के खिलाफ लड़ाई है, काले धन, भ्रष्टाचार को खत्म करना है। माताओं, बहनों, युवाओं की जेब से पैसा निकाला और लाखों करोड़ रुपये अडानी और अंबानी के हवाले कर दिया. उसके बाद ‘गब्बर सिंह टैक्स’ (जीएसटी). (पूर्व प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह जी, (पूर्व वित्तमंत्री) चिदंबरम जी ने उनसे कहा कि बिना पायलट प्रोजेक्ट के इसे लागू मत कीजिए, लेकिन मोदी ने उनकी नहीं सुनी.”

बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल ने कहा, “देश में आज 45 सालों की सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. आज जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) नौ प्रतिशत से घटकर चार प्रतिशत पर आ गई है. उन्होंने जीडीपी मापने का तरीका बदल दिया, अगर आज पुराने तरीके से जीडीपी मापी जाए तो यह सिर्फ 2.5 प्रतिशत है.”

उन्होंने कहा कि दुश्मन चाहते थे और चाहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था नष्ट हो जाए और मोदी ने उसे कर दिया. राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “मोदी ने अडानी को 50 कॉन्ट्रैक्ट दे दिए. एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एयरपोर्ट्स पकड़ा दिए. बिना कॉन्ट्रैक्ट के दे दिए, इसे क्या चोरी, भ्रष्टाचार नहीं कहेंगे? कुछ दिनों पहले ही उन्होंने देश के 15-20 लोगों के 1.40 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिए.”

उन्होंने कहा, “हमने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पंजाब में किसानों के कर्ज माफ किए, क्योंकि किसान के बिना अर्थव्यवस्था आगे नहीं जा सकती. मनरेगा इसलिए दिया, क्योंकि मजदूर के बिना अर्थव्यवस्था आगे नहीं जा सकती. नरेंद्र मोदी ने ये पैसा छीन कर अपने दो-चार दोस्तों को दे दिया. आज हर रोज किसानों की आत्महत्या की खबरें आ रही हैं. मैंने संसद में सवाल किया कि कितने किसानों ने आत्महत्या की तो जवाब मिला कि उन्हें (केंद्र सरकार) नहीं मालूम, प्रदेशों से पूछो। इन्हें शर्म आनी चाहिए.”

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राहुल ने भाजपा सरकार पर लोगों को बांटने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “वे (भाजपा) एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़ाने का काम करते हैं. जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, असम, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश में देखिए मोदी ने क्या कर डाला है, जला दिया है उन प्रदेशों को, आग लगा दी है.”

राहुल ने मीडिया और सरकारी संस्थानों को उनके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया. उन्होंने कहा, “मीडिया पर बहुत जिम्मेदारी है. हमारे शासनकाल में आप हम पर आक्रमण करते थे. लेकिन आज आप अपना काम भूल गए हैं. मैं हिंदुस्तान की सभी संस्थाओं, सरकारी कार्यालयों, मीडिया से आग्रह करता हूं कि जिम्मेदारी आपकी भी है. आज हमें डराया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी किसी से नहीं डरती. इस डर को हम सब मिलकर मिटा देंगे.”

‘रेप कैपिटल’ और ‘रेप इन इंडिया’ पर हुआ बवाल

वैसे तो संसद में हंगामा होना आम बात है.किसी न किसी मुद्दे पर हंगामें होते रहते हैं.लेकिन आज लोकसभा में राहुल गांधी के रेप इन इंडिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को लेकर स्मृति ईरानी सहित कई महिला सांसदों ने जमकर हंगामा किया.जैसा कि मालूम हो अभी-अभी देश कुछ ऐसी घटनाओं से गुजरा है जिसे देश की जनता कभी भूल नहीं पाएगी.प्रियंका रेड्डी का केस तो अभी भी ताजा है.निर्भया के दोषियों को अभी भी फांसी की सजा नहीं हुई है.उन्नाव पीड़िता की मौत हो चुकी है.अभी तो देश प्रियंका रेड्डी की मौत को भूला भी नहीं हैं वहीं दूसरी ओर संसद में रेप जैसी वारदात पर सियासत है कि खत्म होने का नाम भी नहीं ले रही है.सभी अपनी सियासी रोटियां सेकनें के लिए तैयार बैठे रहते हैं.आपको बता दूं कि झारखंण्ड रैली में राहुल गांधी ने एक बात कही थी कि प्रधानमंत्री मोदी मेक इन इंडिया की बात करते हैं और जहां देखो रेप इन इंडिया हो रहा है.बस इसी बात को लेकर संसद में हंगामा शुरू हो गया.लोकसभा में स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं आओ और रेप करो उनकी सोच कितनी घटिया है.कुछ ऐसी ही तीखी बातों के साथ संसद में हंगामा शुरू हो गया.

इधर राहुल गांधी ने साफ-साफ माफी मांगने से इनकार कर दिया है.राहुल गांधी ने कहा कि “नार्थ-इस्ट को जला दिया,बेरोजगारी और मंदी से ध्यान भटकाने के लिए मेरे बयान को यहां मुद्दा बनाया जा रहा है.मै माफी नहीं मांगूंगा…क्योंकि नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली को रेप कैपिटल कहा था मैंने तो सिर्फ इतना कहा है कि प्रधानमंत्री मेक इन इंडिया की बात करते हैं और यहां पर तो रेप इन इंडिया बन चुका है”

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मतलब साफ-साफ यही है कि राहुल गांधी यही कहना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री ने भी गलत कहा था फिर उनके बयान पर हंगामा क्यों नहीं.मेरी बात पर हंगामा क्यों हो रहा है.इसलिए मैं बिल्कुल माफी नहीं मांगूंगा.इतना ही नहीं राहुल गांधी ने एक ट्वीट भी किया है जिसमें उन्होंनें साफ-साफ लिखा है कि- Modi should apologise. For burnimng the north East,for destroying India’s economy.मतलब ये कि मोदी को माफी मांगी चाहिए नार्थ-ईस्ट को जलाने के लिए और भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए.साथ ही एक वीडियो भी अपलोड किया मोदी की स्पीच का.जिसमें मोदी ने कह रहे हैं कि आज जिस प्रकार दिल्ली को आपने रेप कैपिटल बना दिया है जिसके कारण पूरे दुनिया में हिन्दुस्तान की बेज्जती हो रही है.इसी बात पर राहुल गांधी ने कहा कि जब खुद देश के प्रधानमंत्री ऐसी बातें बोल रहे हैं तो फिर मेरे ‘रेप इन इंडिया’ बोलने पर मैं माफी नहीं मागूंगा.लेकिन यहां सवाल ये है कि क्या इसी तरह सियासत रेप जैसी वारदात से गर्माती रहेगी और ये सियासी लोग अपनी रोटियां पकाते रहेंगे? क्या ये देश सच में ऐसा ही होता जा रहा है जहां रेप जैसे वारदात रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं? आखिर सरकार इस पर क्या कड़ा रुख अपनाएगी? और कितनी निर्भया को बलिदान देगा होगा सरकार की आंखे खोलने के लिए?

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कश्मीर में धारा 370 समाप्त

देश के एक बड़े वर्ग की इच्छा को भुनाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने संसदीय बहुमत के सहारे कश्मीर के 1947 के विलय के अनुबंधों को तोड़ते हुए जम्मूकश्मीर को अलग संवैधानिक स्थान देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को एक झटके में कुछ घंटों में समाप्त कर के जम कर वाहवाही लूटी. 1947 से ही कश्मीर भारत के लिए नासूर बना हुआ है और मुसलिमबहुल जनता वाला यह राज्य भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है.

इस ऐतिहासिक फैसले का परिणाम इस समस्या को सुलझाने में हो या न हो कश्मीर के अलावा बाकी भारतीयों को जो खटका रहता था कि उन को विशिष्ट स्तर पर क्यों रखा जा रहा है, समाप्त हो गया है. भारतीय जनता पार्र्टी ने यह कदम उठा कर उन भारतीयों को संतोष दिया है जो एक देश एक संविधान का नारा देते थे. ये लोग बाकी संविधान को कितना मानते थे, कितना समझते थे, यह बात न आज पूछने की है, न कहने की.

भारत सरकार को अंदाजा है कि इस कदम को उठाने के बाद कश्मीर में और आग सुलगेगी. इसीलिए कश्मीर को पूरी छावनी बना डाला गया है और वहां से पर्यटकों को निकाल दिया गया है. यहां तक कि अचानक अमरनाथ यात्रा भी स्थगित कर दी गई. भारत सरकार को अब पूरा एहसास है कि कश्मीर विवाद और उलझेगा, तभी तो वहां भारी संख्या में सेना व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

देश का हर नागरिक देश की अखंडता व एकता में विश्वास रखता है और जब अरसा पहले तमिलों ने या पंजाब में सिखों ने अलग होने की मांग रखी थी तो भारत सरकार ने बल व कूटनीति दोनों का इस्तेमाल कर के इन इलाकों को शांत किया था. आशा की जानी चाहिए कि यही कश्मीर के साथ होगा.

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कश्मीर का वैसे तो भारत में विलय 1947 में ही हो गया था पर जो संवैधानिक रेखा खिंची थी उस के हटने से वही फर्क पड़ेगा जो गोवा, पुडुचेरी या सिक्किम पर पड़ा. कभी विदेशी ताकतों के अधीन रहे या स्वतंत्र इन भूभागों के भारत में पूर्ण विलय के बाद न वहां के जनमानस पर कोई असर पड़ा है और न बाकी देश पर. कश्मीर के अनुच्छेदों 370 व 35ए की समाप्ति के बाद कश्मीर की हालत सुधरेगी यह तो आशा नहीं पर बाकी भारत को भारी संतोष होगा कि उस ने एक संवैधानिक विजय पाई है.

भारतीय जनता पार्टी को वही लाभ होगा जैसा इंदिरा गांधी को 1969-71 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स समाप्त करने, कपड़ा मिलों व खानों

का राष्ट्रीयकरण और बंगलादेश

को अलग कराने से हुआ था.

इंदिरा गांधी के इन ऐतिहासिक

कदमों का देश में जो स्वागत हुआ

था, वैसा ही अब हो रहा है, पर इंदिरा गांधी ने यह अपनी गद्दी की खातिर किया था.

कश्मीर के बारे में निर्णय लेने में अब दिल्ली को दो बार नहीं सोचना पड़ेगा कि संविधान आड़े आ रहा है. केंद्र सरकार को किसी तरह की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी. हां, कश्मीरी इसे कैसे पचाएंगे, यह कहना कठिन है. भारतीय जनता पार्टी फिलहाल तो कश्मीरियों को पुचकारने या मनाने के मूड में नहीं है.

कर्नाटक में करा नाटक

भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार कर्नाटक में पौराणिक परंपरा के अनुसार सुग्रीवों व विभीषणों के सहारे कांग्रेस और जनता दल सैक्युलर की गठबंधन सरकार को गिरा कर लंका को जीत ही लिया है. अब किसी विभीषण को राज्य का उपमुख्यमंत्री बना कर रामराज्य स्थापित कर दिया जाएगा. जब लोकसभा में भारी बहुमत हो और अधिकांश राज्यों में भाजपा की ही सरकारें हों, ऐसे में भाजपा की कर्नाटक की बेचैनी और विधायकों की खरीद समझ से परे है.

यह स्पष्ट है कि भाजपा उस कल्पित चक्रवर्ती राज के सपने देख रही है जिस में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भाजपा का राज हो और कामगार खुश हों या न हों, ऋषिमुनियों को लगातार प्रतिष्ठा, दान और पैसा सब मिलता रहे. ऐसे में कर्नाटक क्यों हाथ से दूर रहे. 5 गांव मांगने वाले पांडवों ने कहनेसुनने पर अपने पूरे खानदान को मरवा दिया था और महाभारत के युद्ध के अंत में बचे पांडवों को हिमालय पर जा कर आत्महत्या करनी पड़ी थी.

जहां चुनावों में विधिवत जीत मिली हो वहां तो कुछ नहीं कहा जा सकता. पर जहां बहुमत न मिला हो वहां भी सरकार बनाने की जो जिद भाजपा ने पकड़ ली है, वह देश को भारी पड़ेगी. इस जिद के चलते साम, दाम, दंड व भेद अपनाए जाएंगे और यही साम, दाम, दंड, भेद भाजपा की शासन संस्कृति बन जाएंगे. ये राज्य के हर अंग पर चलेंगे.

सरकार पहले ही जाति व धर्म का भेद भुना कर पूरे समाज को दीवारों से बांट रही है. हर धर्म ही नहीं, हर जाति के लोग भी अपने में सिमट रहे हैं कि कहीं उन के अस्तित्व पर आंच न आ जाए, उन की किसी कमजोरी या गलती को तिल का ताड़ न बना दिया जाए. कर्नाटक में कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा से इसीलिए जा मिले ताकि उन को संरक्षण मिल सके.

जब भी कोई शासक अति शक्तिशाली होता है, वह थोड़े से विरोध को भी नहीं सह सकता. उस के लिए लोकतंत्र एक सीढ़ी मात्र होता है जिसे चढ़ने के बाद उसे जला देना ठीक रहता है ताकि और कोई उस का इस्तेमाल कर चुनौती न दे सके. कर्नाटक में सरकार का फेरबदल अनावश्यक था. एक लोकतांत्रिक पार्टी सत्तारूढ़ पार्टी मेंहो रही उठापटक को चुनावों में भुना सकती है, अपनी सरकार बनाने के लिए नहीं.

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कांग्रेस और जनता दल सैक्युलर अपनी पार्टियों में घुसे सैकड़ों सुग्रीवों और विभीषणों से मुकाबला नहीं कर सकते. जाति का सवाल उठे बिना यह स्पष्ट है कि आज जो दलबदल हो रहे हैं उन में वही सब से बड़ा कारण है. कांग्रेस और दूसरे दलों की अब खैर नहीं, क्योंकि भाजपा अपना एकछत्र राज चाहती है. यही सपना कभी 1977 में मोरारजी देसाई ने देखा था और यही राजीव गांधी ने 1984 में संसद में भारी बहुमत पा कर देखा था.

धार्मिक कट्टरता

रांची की जिला अदालत के एक मजिस्ट्रेट मनीश कुमार सिंह ने कट्टरपंथी बनती 19 वर्षीया हिंदू लड़की रिचा भारती को फेसबुक पर अनापशनाप पोस्ट करने से रोकने के लिए जो कदम उठाया, वह सही होते हुए भी अजीब था. इसलाम को बदनाम करने के प्रयास में अगर पहली पेशी में बिना पूरी सुनवाई के सिर्फ जमानत की शर्त पर कुरान की 5 प्रतियां बांटने को कहा जाए तो यह एक तरह की सजा ही होगी. जो मजिस्ट्रेट को नहीं देनी चाहिए थी.

अदालत के इस फैसले का लाभ देशभर के हिंदूवादी लोगों ने जम कर उठाया. वे  व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, फेसबुक पर मजिस्ट्रेट का मखौल उड़ाने, उन की भर्त्सना करने और रिचा भारती को महान बताने में जुट गए. 2 दिनों बाद मजिस्ट्रेट ने फैसला तो बदला लेकिन तब तक धर्म के दुकानदारों को भरपूर बारूद मिल चुका था.

मजिस्ट्रेट की नीयत खराब न थी. वे इतना ही चाहते होंगे कि 19 वर्षीया लड़की धर्म की दुकानदारी के पचड़े में न पड़े और कुरान बांटने के बहाने मुसलमानों के संपर्क में आए. पर, हिंदू कट्टरों ने लगातार खोदी जा रही खाई में इसे रुकावट समझा.

ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप ऐसी पोस्टों से भरे पड़े हैं जिन में मुसलिम कपड़े पहने युवक बुराभला कह रहे हैं. ये पोस्ट असली हैं, इस को साबित करना असंभव है. यह संभव है कि किसी भी हिंदू को टोपी पहना कर, दाढ़ी बढ़वा कर कुछ भी कहते रिकौर्डिंग कर लें और फिर दुष्प्रचार के लिए डाल दें. आज का डरा हुआ मुसलमान, दलित, पिछड़ा इतनी हिम्मत नहीं रखता कि वह पाखंडियों के बारे में कुछ कह सके, धमकियां देना तो बहुत दूर की बात है. पर, हिंदू धर्म के प्रचारकों के लिए इस नए प्रकार का नाटक कराना वैसा ही आसान है जैसा वे रामलीला में राक्षसों की पोशाक पहना कर युवाओं से कराते हैं.

देश का टुकड़ेटुकड़े गैंग उदारवादियों में नहीं है जो मानवता की बात करते

हैं. टुकड़ेटुकड़े गैंग तो धर्म के अंधविश्वासियों में है जो हर रोज भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगवाते हैं.

सुरक्षा कहां जरूरी

नेताओं के चारों ओर काली या खाकी वरदी में बंदूकधारी गार्डों की भीड़ कई बार नेताओं को छिपा देती है और उन्हें अपने समर्थकों से दूर कर देती है. फिर भी न जाने क्यों ज्यादातर नेता इस सिक्योरिटी को अपने लिए तमगा समझते रहे हैं जबकि यह उन के और समर्थकों के बीच अकसर दीवार भी बन जाती है. साथ ही, इस भीड़ में मौजूद गुप्तचर सत्तारूढ़ दल के नेताओं के लिए घातक भी हो सकते हैं.

देश में कानूनव्यवस्था ऐसी नहीं है कि तालियां बजाई जाएं. पर 10-15 गार्डों की सुरक्षा को रखना न केवल सरकार पर निरर्थक बोझ है, यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ भी है. सुरक्षा मन से होती है. गांधी की हत्या हो गई थी. इंदिरा गांधी की हत्या सुरक्षाकर्मियों ने ही कर दी थी. राजीव गांधी तमाम सुरक्षा के बावजूद मारे गए थे.

सुरक्षा केवल मानसिक बल से मिलती है, सरकारी गार्डों से नहीं. आज जिस तरह से आत्मघाती हत्यारों को तैयार किया जा रहा है, उस से कोई

भी सुरक्षित नहीं है. आज बाजार में राइफलें खुलेआम उपलब्ध हैं जो काफी दूर तक अचूक निशाना साध सकती हैं. वहीं, पुलिस व सेना से ऐसी राइफलों को चुरानाछीनना भी आम  है. इन की, चाहो तो, तस्करी भी आसानी से हो सकती है.

अगर सरकार ने बहुत से नेताओं

व दूसरे लोगों की सुरक्षा का स्तर घटाया है तो सही किया है. यह चाहे राजनीतिक विरोध के चलते किया गया हो या सुरक्षा कर्मियों की निरर्थकता के लिए, फैसला सही ही है. सुरक्षा तो वहां होनी चाहिए जहां पैसा है, कमजोर लोग हैं, बच्चे हैं. आमतौर पर वे जगहें असुरक्षित रहती हैं.

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हमारे यहां महल्लों में पुलिस की नियमित गश्त लगना बंद हो गई है. घरवाले अपने आसपास तैनात पुलिसमैन का नाम व नंबर जानना तो क्या, शक्ल भी नहीं पहचानते. हर 100-200 घरों के आसपास एक नियमित गश्त करने वाला नेताओं की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी है. वह अपरोक्ष रूप में नेताओं को भी सुरक्षा देगा क्योंकि पुलिसमैन बहुत कुछ पता कर सकता है.

ममता की ओर झुकते नीतीश?

इस बीच ऐसी अटकलें भी तेज हुई थीं कि नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की बहुत ज्यादा बुराई करने को ले कर अजय आलोक से नाराज थे.

अजय आलोक ने पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख वशिष्ठ नारायण सिंह को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे में लिखा था, ‘मैं आप को पत्र लिख कर यह सूचित कर रहा हूं कि मैं पार्टी प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि मैं पार्टी के लिए अच्छा काम नहीं कर रहा हूं. मैं यह अवसर देने के लिए आप का और पार्टी का धन्यवाद करता हूं लेकिन कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार करें.’

बता दें कि अपने एक ट्वीट में अजय आलोक ने पहले भी जद (यू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की कंपनी के ममता बनर्जी के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभालने पर सवाल उठाए थे.

अजय आलोक पटना के मशहूर डाक्टर गोपाल प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं. आलोक अपने कालेज के दिनों से राजनीति में सक्रिय थे. उन्होंने साल 2012 में जद (यू) को जौइन किया था.

सांसद के घर कुर्की का आदेश

वाराणसी. इन लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की घोसी लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के नेता अतुल राय सांसद बने थे, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान एक छात्रा ने उन पर यह कहते हुए रेप का आरोप लगाया था कि अतुल ने उसे अपनी पत्नी से मिलाने के लिए अपने आवास पर बुलाया था और इस के बाद रेप किया था.

उस पीडि़ता का कहना है कि अतुल राय ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी, जबकि अतुल राय का कहना है कि वह छात्रा उन के औफिस आ कर चुनाव लड़ने के नाम पर चंदा लेती थी और चुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई.

छात्रा के आरोप के बाद न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने अतुल राय की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए थे. वे जमानत के लिए हाईकोर्ट तक गए, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली, तो वे फरार हो गए जिस के चलते 14 जून को पुलिसप्रशासन ने उन के घर पर कुर्की का नोटिस लगा दिया.

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बिजली के बहाने भिड़ंत

भोपाल. मध्य प्रदेश में बिजली की कटौती को ले कर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के एक नेता का सोशल मीडिया पर लंगर डाल कर बिजली गुल करने वाले लड़कों की भरती का इश्तिहार सामने आने से कांग्रेस और उस में तकरार और ज्यादा बढ़ गई.

दरअसल, दमोह जिले के मीडिया प्रभारी मनीष तिवारी ने 12 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था, ‘विज्ञापन-बिजली गोल कराने वाले लड़कों की आवश्यकता है. नोट-लंगर डालने में ऐक्सपर्ट हों. संपर्क करें बीजेपी दमोह.’

इस मसले पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा, ‘प्रदेश में भाजपा के लोग बिजली गुल कराने की एक बड़ी साजिश चला रहे हैं. बिजली गुल कराने के लिए टीम लगाई जा रही है.’

 राजस्थान कांग्रेस में रार

जयपुर. राजस्थान में सत्ता का सुख भोग रही कांग्रेस पार्टी में खेमेबंदी अब खुल कर सामने आ रही है. इस खेमेबाजी की एक तरफ वहां के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं, तो दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट.

दरअसल, दौसा जिले के भंडाना इलाके में मंगलवार, 11 जून को सचिन पायलट के पिता व केंद्रीय मंत्री रह चुके राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर कराई गई एक प्रार्थना सभा में सरकार के 15 मंत्रियों समेत 62 विधायक पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं आए थे. उन्होंने ट्विटर के जरीए राजेश पायलट को श्रद्धांजलि दी थी.

इस के ठीक एक दिन बाद जब अशोक गहलोत जयपुर में एमएसएमई के एक पोर्टल की शुरुआत कर रहे थे तो कई बड़े मंत्री जयपुर में होने के बावजूद वहां नहीं गए थे.

कैप्टन ने कन्नी काटी

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में शनिवार, 15 जून को हुई नीति आयोग की बैठक में भाग लेने नहीं गए.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के बैठक में शामिल न होने की वजह उन का बीमार होना बताई गई, जबकि वे पूरा एक हफ्ता हिमाचल प्रदेश में अपने फार्महाउस पर छुट्टियां बिता कर पंजाब लौटे थे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह देश के ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री थे जो इस खास बैठक में शामिल होने नहीं गए.

गरमाई धरने की सियासत

बैंगलुरु. जेएसडब्लू जमीन सौदे में धांधली का आरोप लगाते हुए कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री रह चुके बीएस येदियुरप्पा और दूसरे नेताओं ने 14 जून को बैंगलुरु में पूरी रात धरनाप्रदर्शन किया जिस से एचडी कुमारस्वामी की राज्य सरकार कठघरे में आ गई.

यह मामला जेएसडब्लू स्टील कंपनी की बेल्लारी में 3,667 एकड़ जमीन की बिक्री का है. भाजपा ने आरोप लगाया कि जेएसडब्लू को सस्ती दर पर जमीन अलौट करने का फैसला सरकार ने जानबूझ कर किया है. ऐसा कर के सरकार अपनी झोली भरने का काम करना चाहती है, क्योंकि उसे राज्य में अपनी सरकार गिरने का डर है.

केजरीवाल ने उठाया मुद्दा

नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 15 जून को नीति आयोग की बैठक में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा उठाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उन्होंने कहा, ‘दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए जिस का वादा सालों से किया जा रहा है लेकिन लगातार केंद्र सरकारें इनकार करती रही हैं.’

आम आदमी पार्टी ने हालिया लोकसभा चुनाव में भी दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का मुद्दा उठाया था. उस का कहना है कि केंद्र की दखलअंदाजी की वजह से वह अपनी योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करने में कामयाब नहीं हो पा रही?है.

 मूर्ति पर हुई गिरफ्तारी

हैदराबाद. मंगलवार, 17 जून को कांग्रेस के सांसद रह चुके 2 बड़े नेताओं वी. हनुमंथा राव, हर्ष कुमार और उन के समर्थकों को तब गिरफ्तार कर लिया गया जब वे शहर के पंजागुट्टा चौराहे पर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश कर रहे थे.

दरअसल, अप्रैल महीने में ग्रेटर हैदराबाद  नगरनिगम ने ‘अंबेडकर जयंती’ से एक दिन पहले ‘जय भीम सोसाइटी’ द्वारा अंबेडकर की मूर्ति को स्थापित किए जाने के बाद उस जगह से हटा दिया था. बाद में वह मूर्ति टूटीफूटी हालत में कूड़े में मिली थी, जिस का दलित संगठनों ने कड़ा विरोध जताया और इस के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की.

ग्रेटर हैदराबाद नगरनिगम के अधिकारियों ने कहा कि मूर्ति को बिना इजाजत लिए लगाया गया था, इसलिए हटा दिया गया.

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नेता के सामने पी लिया जहर

मुंबई. 15 जून को महाराष्ट्र के ऊर्जा राज्यमंत्री एमएम येरावर के सामने एक किसान ने जहर पी कर जान देने की कोशिश की. दरअसल, बुलढाणा में एक कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा राज्यमंत्री मंच पर मौजूद थे, तभी ईश्वर खारटे नाम के एक किसान ने वहां सब के सामने कीटनाशक पी कर जान देने की कोशिश की.

अस्पताल ले जाए गए ईश्वर खारटे का आरोप है कि उस के दादा ने साल 1980 में बिजी के कनैक्शन के लिए अर्जी लगाई थी पर उन्हें अब तक कनैक्शन नहीं मिला है, जबकि संबंधित अधिकारी का कहना है कि ईश्वर खारटे ने बकाया जमा नहीं किया है, इसलिए उन्हें कनैक्शन नहीं मिला है.              द्य

 

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