Masturbation : मास्टरबेट करना चाहता हूं पर डरता हूं

अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें..

सवाल –

मैं 19 साल का हूं. मेरे मन में मास्टरबेशन को ले कर कई सवाल आते हैं और मुझे इसे करने का भी बहुत मन करता है पर मुझे डर लगता है कि इस से कहीं मेरे लिंग को कोई नुकसान न पहुंच जाए. मैं ने कई बार गूगल पर भी इस के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की लेकिन सच कहूं तो इंटरनैट पर मिली जानकारी पर मुझे पूरी तरह भरोसा नहीं होता. मेरा परिवार पारंपरिक रुढ़िवादी सोच रखता है तो मैं उन से भी खुल कर बात नहीं कर पाता क्योंकि मुझे लगता है कि अगर मैं ने कुछ ऐसी बात की तो वे मुझ पर काफी गुस्सा करेंगे. आप ही मुझे जानकारी दीजिए कि मेरे लिए क्या सही है और क्या गलत.

जवाब –

सब से पहले तो आप को किसी बात की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. मास्टरबेशन पूरी तरह से नैचुरल है और आप की उम्र में सब का मन करता है मास्टरबेट करने का. और तो और आप ही की तरह ऐसे सवाल सब के मन में आते हैं.

बढ़ती उम्र में हमारे शरीर में कई सारे हारमोनल बदलाव होते हैं जिस की वजह से हमें मास्टरबेट करने का मन करता है जोकि पूरी तरह से स्वभाविक है. कई डौक्टर्स के अनुसार तो मास्टरबेशन को हैल्दी भी बताया गया है मगर सीमित रूप में ही.

यह सच है कि मास्टरबेट करने से हमारा स्ट्रैस खत्म होता है और हमारे मन में किसी के प्रति गलत विचार नहीं आते. अगर आप का मन करता है कि आप मास्टरबेट करें तो आप बिंदास कर सकते हैं, बिना किसी बात का स्ट्रैस लिए पर ध्यान रहे कि मास्टरबेट हमेशा अकेले में करें और इस बात का जिक्र अपने परिवार में से किसी से न करें.

आप को मास्टरबेशन की आदत बिलकुल नहीं बनानी है क्योंकि अभी आप की उम्र पढ़ाई करने की है तो आप को ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ने में लगाना चाहिए और इन सब खयालों से दूर रहना चाहिए.

भले ही मास्टरबेट करने में कोई नुकसान नहीं है पर अगर आप के दिमाग में हर समय बस इसी का खयाल रहता है तो आप को ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए. आप को ऐसे खयालों से बचना होगा और कभीकभी ही मास्टरबेट करें तो अच्छा है.

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हस्तमैथुन नहीं है गंदी बात, काबू में रहते हैं जज्बात

महेश अपने बिस्तर पर बैठे शाम की चाय का लुत्फ ले रहे थे कि तभी उन की पत्नी सुधा किसी गुस्सैल नागिन सी फनफनाती हुई वहां आई और उन के कान में जहर उगलते हुए बोली, ‘‘अपने लाड़ले की करतूत देखी. यह लड़का तो हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा. जवानी की मूंछें क्या फूटीं घर में ही नरक मचाने लगा है.’’

‘‘अब क्या कर दिया साहिल ने? क्यों सारा घर सिर पर उठा रही हो?’’ यह पूछते हुए महेश की चाय का स्वाद एकदम से फीका हो गया.

‘‘अभी मैं उस के कमरे के बाहर से निकली तो देखती हूं कि उस के एक हाथ में मोबाइल फोन था और दूसरा हाथ पजामे के अंदर. पहले तो मैं समझ ही नहीं पाई कि पता नहीं क्या हिला रहा था, फिर मेरे कान एकदम से खड़े हुए कि इस की तो जवानी जोश मार रही है. यह लड़का तो एक दिन हमारी नाक ही कटवा कर मानेगा,’’ सुधा ने सारा किस्सा ही खोल डाला.

यह सुन कर पहले तो महेश का माथा ठनका, पर साथ ही उस ने अपनी पत्नी की मन ही मन तारीफ भी की कि उस ने किसी आम मां की तरह अपने बेटे की इस हरकत पर उसे सुनाई नहीं, बल्कि अपने पति को बताना ठीक समझ, पर सुधा का यह बौखलाया रूप महेश के लिए चिंताजनक था, क्योंकि वह जानता है कि उस के बेटे ने कोई अनोखा काम नहीं किया है, पर चूंकि हमारा समाज इसे घिनौना काम सम?ाता है, इसलिए सुधा सबकुछ जान बूझ कर आगबबूला हुए जा रही है.

‘‘तुम चिंता मत करो. मैं उसे समझ दूंगा,’’ महेश ने सुधा से कहा और एक और चाय बनाने की मनुहार करने लगा.

सुधा बड़बड़ाते हुए रसोईघर में चली गई. महेश ने कुछ सोचा और फिर साहिल के कमरे में चला गया.

अपने पिता को अचानक वहां आया देख कर साहिल ने अपना फोन बंद कर दिया और अपने कपड़े ठीक करने लगा.

‘‘क्या हो रहा है?’’ महेश ने साहिल से पूछा.

‘‘कुछ खास नहीं…’’ साहिल ने जवाब दिया.

‘‘बेटा, मैं तेरा बाप हूं और तेरी मां ने मुझ जो बताया है, वैसा होना कोई अचरज की बात नहीं है. तुम्हारी उम्र में इस सब की शुरुआत होती है…’’

पापा के इतना कहने का इशारा साहिल समझ चुका था, पर उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे उस के हस्तमैथुन करने की बात को इस सहज अंदाज में उस के सामने रखेंगे.

साहिल झिझकते हुए बोला, ‘‘सौरी पापा, पर मैं भावनाओं में बह गया था. मुझे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि घर में सब हैं या मैं इस समय बाथरूम में नहीं हूं.’’

एक समझदार पिता और बेटे का यह संवाद सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है, पर अगर हस्तमैथुन को समाज के नाम पर धब्बा न समझ जाए तो समस्या उतनी ही छोटी है, जितनी महेश और साहिल के बीच की बातचीत थी.

पर भारत जैसे देश में, जहां धर्म और सामाजिक रूढि़यां लोगों के दिमाग पर हद से ज्यादा हावी रहती हैं, हस्तमैथुन पर बात करना तो दूर इशारों में भी इस के बारे में कहना बड़ा दिलेरी वाला काम समझ जाता है.

सब से दुखद पहलू तो यह है कि हस्तमैथुन को विकृति मान लिया जाता है. हमउम्र किशोर भी इसे ले कर एकदूसरे की खिल्ली उड़ाते हैं या फिर सुनीसुनाई अधकचरी जानकारी एकदूसरे पर उड़ेल देते हैं.

15 साल के विनोद का ही किस्सा ले लें. एक दिन उस के अंग में जोश आया तो वह खिलौना समझ कर खेल गया. चूंकि घर पर अकेला था तो बाद में उसे ग्लानि हुई. वह भी सिर्फ इसलिए कि उस का हाथ और कपड़े खराब हो गए थे.

विनोद को लगा कि उस से यह कोई अपराध हुआ है और उस ने दोबारा इसे न दोहराने की कसम खाई. पर अपने अंग के तनाव को कब तक रोक पाता. फिर वही हुआ, पर इस बार उसे ज्यादा मजा आया और उस ने एक अच्छी किताब से इस बारे में पढ़ा.

विनोद को जो समझ आया, उस का सार यह था कि यह खुद से किया गया ऐसा सैक्स है, जिस में पार्टनर की जरूरत नहीं होती है. यह कुदरती है और किसी तरह की कोई जिस्मानी बीमारी नहीं है, पर हां, बहुत से लड़के इसे बीमारी मान कर दिमाग में टैंशन जरूर भर लेते हैं और फिर झलाछाप डाक्टरों के चंगुल में फंस जाते हैं. वे शातिर डाक्टर हस्तमैथुन को जानलेवा मर्ज बता कर पीडि़त को नीलीपीली गोलियां थमा देते हैं.

पर जब इस बारे में प्लास्टिक, कौस्मैटिक और एंड्रोलौजिस्ट डाक्टर अनूप धीर से बात की गई, तो उन्होंने बताया, ‘‘हस्तमैथुन करना बहुत ही सामान्य बात है. यह अपने शरीर के बारे में जानने, मजे का अहसास करने और सैक्सुअल तनाव को कम करने का कुदरती और महफूज तरीका है.

‘‘हालांकि इसे ले कर कई तरह के झठ फैले हुए हैं, पर हस्तमैथुन से किसी तरह का शारीरिक नुकसान नहीं होता है, लेकिन ज्यादा हस्तमैथुन करना आप के रिश्ते और रोजाना की जिंदगी को नुकसान पहुंचा सकता है.

‘‘कुछ लोग सांस्कृतिक, आध्यात्मिक या धार्मिक मान्यताओं की वजह से हस्तमैथुन को लेकर शर्म महसूस कर सकते हैं. हस्तमैथुन न तो गलत है और न ही अनैतिक, फिर भी आप को कुछ ऐसे संदेश सुनने को मिल सकते हैं कि ऐसा आत्मसुख ‘गंदी’ और ‘शर्मनाक’ बात है.

‘‘अगर आप हस्तमैथुन को ले कर शर्म महसूस कर रहे हैं, तो किसी ऐसे इनसान से बात करें, जिस पर आप इन बातों को ले कर विश्वास कर सकते हैं और इस भावना से बाहर निकलने के तरीकों के बारे में बात कर सकते हैं. सैक्सुअल मामलों के माहिर आप के लिए मददगार साबित हो सकते हैं.’’

डाक्टर अनूप धीर ने यह भी बताया कि किस तरह हस्तमैथुन से हमारी सेहत पर पड़ने वाले पौजिटिव असर के बारे में जान और समझ कर किस तरह सेहत से जुड़ी समस्याओं में मदद मिलती है :

* हस्तमैथुन से शरीर में खून का दौरा बढ़ता है और ऐंडौर्फिन रिलीज होता है, जो मजा बढ़ाने वाला ब्रेन कैमिकल है.

* इस से दिमागी तनाव और परेशानी कम होती है. इस से आप को आराम मिलता है और आप का आत्मविश्वास बढ़ता है. इस से आप को अपनी इच्छाओं के बारे में पता चलता है और आप पार्टनर के बिना भी सैक्सुअली संतुष्ट हो सकते हैं. इस से आप को अपने साथ प्रयोग करने का मौका मिलता है, आप अपने शरीर को सम?ा पाते हैं.

* दक्षिण एशिया (पाकिस्तान, भारत, बंगलादेश, नेपाल और श्रीलंका समेत) की संस्कृतियों में धत् सिंड्रोम जिसे संस्कृत में ‘धातु दोष’ कहते हैं, पाया जाता है. इस में मरीज यह बताते हैं कि वे समय से पहले पस्त होने या नामर्दी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं और मानते हैं कि पेशाब के रास्ते उन का वीर्य निकल जाता है.

* कुछ सभ्यताओं में माना जाता है कि धत् को सुरक्षित रखने से आप को अच्छी सेहत और लंबी जिंदगी मिलती है. इसी वजह से धत् गंवाने को गलत माना जाता है.

* माना जाता है कि यह सोच सैक्स को ले कर पीढि़यों से चली आ रही गलत सोच की वजह से उभरी है. रिसर्च करने वालों का मानना है कि धत् सिंड्रोम से पीडि़त नौजवान होते हैं और सैक्स को ले कर रूढि़वादी मान्यताओं को मानने वाले गांवदेहात के इलाकों में बसते हैं. उन के मुताबिक, धत् सिंड्रोम से पीडि़त मर्द कम पढ़ेलिखे होते हैं और उन का सामाजिक और माली लैवल काफी नीचे होता है.

* इस के इलाज में आमतौर पर दवाएं (डिप्रैशन और तनाव से बचाने वाली दवाएं), सैक्स शिक्षा और संस्कृतियों के हिसाब से काउंसलिंग व ज्ञान संबंधी व्यवहार से संबंधित थैरेपी शामिल हैं.

डाक्टर अनूप धीर ने हस्तमैथुन के बारे में तकनीकी और डाक्टरी जानकारी दी. इस के अलावा हम फिल्म ‘छिछोरे’ के एक किरदार ‘सैक्स’ से भी सीख ले सकते हैं, जो इंजीनियरिंग कर रहा है, खूब खातापीता है, तंदुरुस्त है, पर अपने ‘बंटी’ से खेलना उस का शौक है.

इस किरदार से एक सीख और भी मिलती है कि भले ही ‘सैक्स’ को लड़की नहीं मिलती है, जबकि उस के दिमाग में हमेशा लड़की ही छाई रहती है, पर वह लड़कियों के साथ कभी बदतमीजी नहीं करता है. उन्हें ले कर रेप करने के बारे में नहीं सोचता है. उसे अपने हस्तमैथुन को ले कर कोई ग्लानि नहीं, बल्कि वह उसे ऐंजौय करता है.

लिहाजा, हस्तमैथुन को भयंकर बीमारी मानने की भूल कतई न करें और इस का इलाज नीमहकीम डाक्टरों के पास तो बिलकुल भी नहीं है. कोई बड़ी समस्या होती है तो माहिर डाक्टर से ही मिलें.

एक रोमांचक अनुभव : साथी को कराएं सतरंगी दुनिया की सैर

सेक्स कुदरत का वह शानदार तोहफा है जिस में आनंद तो है ही, इस से ताउम्र रिश्तों में गरमाहट भी बनी रहती है.

यों तो सेक्स को मजेदार बनाने के कई आसन हैं, मगर फिंगर सेक्स इस प्रकिया को और भी आनंद से भर देता है.

तो फिर आइए, इस पल को मजेदार बनाने के लिए जानें कि फिंगर सेक्स किस तरह दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकता है :

हाइजीन का रखें ध्यान : हाथों और उंगलियां हमेशा दूषित पदार्थों और बैक्टीरिया के संपर्क में रहते हैं. फिंगर सेक्स शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि हाथ और खासकर उंगलियां साफ और स्वच्छ रहें.

संक्रमण या चोट से बचने के लिए नाखूनों को काट लें व उन्हें साफ रखें.

ध्यान रखें : फिंगर सेक्स शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि ड्राइनैस की समस्या न रहे. आमतौर पर यह तभी होता है जब सेक्स पार्टनर इस के लिए तैयार हो. हालांकि उत्तेजना के दौरान साथी पूरी तरह सेक्स के लिए तैयार रहती है और यह समय ही उचित है जब पार्टनर के साथ फिंगर सेक्स का आनंद उठाया जाए. चिकनाई के लिए क्रीम अथवा तेल का प्रयोग भी किया जा सकता है.

यदि आप चरमोत्कर्ष पर जाने का लक्ष्य बना रहे हैं, तो ध्यान दें कि कुछ महिलाएं दूसरों की तुलना में बाद में सुख प्राप्त करती हैं. इसलिए जरूरी होगा कि पार्टनर इस के लिए पूरी तरह तैयार हो.

पार्टनर को क्या पसंद है : फिंगर सेक्स के दौरान पार्टनर से पूछिए कि उसे क्या पसंद है और क्या नहीं? मसलन शरीर के अन्य अंगों पर भी उंगलियों से सहलाना और हलकाहलका चिकोटी काटना पार्टनर को खूब आनंदित करेगा.

आप सेक्स पार्टनर से सलाह भी ले सकते हैं. इस के अलावा, यह एक अच्छा, चिढ़ाने वाला फोरप्ले बनाता है. पार्टनर के अंगों को करीब से देखें और उसे अपने हाथों को सही स्थानों पर निर्देशित करने के लिए कहें.

कैसे करें शुरुआत : फिंगर सेक्स करने से पहले उसे फोरप्ले के साथ शुरू करना सुखद अनुभव से भर देगा.

सेक्स को अधिक सुखद बनाने के लिए एक उपयोगी ट्रिक यह भी है कि आप साथी के नाजुक अंगों और उस के आसपास की जगहों पर उंगलियों से पियानो की तरह बजा सकते हैं. यकीन मानिए, इस से पार्टनर को अच्छा लगेगा और वह पुरूष साथी को प्रोत्साहित करती रहेगी.

जी स्पौट को ढूंढ़ें : जी स्पौट महिला अंग का एक स्पंजी हिस्सा है जो उस के पूर्व भाग पर स्थित होता है या ऊपरी भाग पर. हालांकि उत्तेजित करने का कोई समान्य तरीका नहीं है, और यह प्रति व्यक्ति अलगअलग हो सकता है. बावजूद इस प्रकिया में आप पहले साथी से बातचीत कर लें.

कमरे में प्रकाश का संयोजन : संवेदनशील व नाजुक अंगों को हलकाहलका स्पर्श कर उसे प्रारंभ करने और उसे उस लायक तैयार करने का एक अच्छा तरीका है कि अपनी उंगलियों को लगातार बाहरी भाग पर स्पर्श कराते रहें. यह एक ऐसी प्रकिया है जो पार्टनर को आनंद से भर देगा.

इस दौरान कमरे में प्रकाश का ध्यान रखें. मध्यम और रंगबिरंगी लाइटों में सेक्स प्रकिया शानदार अनुभव देता है.

कैसे करें शुरूआत : इस दौरान तर्जनी और मध्यमा उंगुली का प्रयोग करें. जी स्पौट को उत्तेजित करते हुए धीरेधीरे प्रयोग करना शुरू करें. इस दौरान साथी से पूछें कि उसे कैसा लग रहा है? उस के कहे अनुसार ही इस में आगे बढ़ें.

धीमी शुरुआत करें और बाद में आक्रामकता तभी लाएं जब पार्टनर बोले.

इस दौरान पार्टनर के गरदन पर चुंबन, उस के कान की बालियों, कानाफूसी के दौरान डर्टी टौकिंग, विभिन्न जगहों पर चुंबन आदि पार्टनर को इस प्रकिया में आनंदित महसूस कराएगा.

जिस ‘बीमारी’ से परेशान थे आयुष्मान, क्या आपको पता है उसके बारे में ?

आपने आयुष्मानखुराना की फिल्म “शुभ मंगल सावधान” तो देखी होगी उसमें उनको एक एक हेल्थ प्रौब्लम होती  हैं जिसके चलते उनकी शादी तो खतरे में पड़ती ही है साथ ही उनको शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता  हैं, वो समस्या हैं….शीघ्रपतन (Premature ejaculation) .

आमतौर पर देखा जाता है की सेक्स से जुड़ी समस्या को लोग किसी को  भी जल्दी नही बताते. इसका कारण या तो शर्म होती है या फिर मन की झिझक, पर इस समस्या को जितना छिपाया जाता है उतनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं. इन्हीं समस्याओं मे से एक समस्या है शीघ्रपतन (Premature ejaculation) . आम भाषा में कहे तो शीघ्रपतन का मतलब होता है वीर्य का जल्दी निकलना.

सेक्स के दौरान या पहले पुरुषों का वीर्य स्‍खलित हो जाना शीघ्रपतन कहलाता है. स्‍त्री की कामोत्‍तेजना (Orgasm) शांत होने से पहले या हस्‍तमैथुन  (Masturbation) क्रिया के दौरान यदि पुरुषों का वीर्य स्‍खलित हो जाता है तो इसका मतलब है कि वह शीघ्रपतन की समस्‍या से गुजर रहा है.

इस समस्या को लेकर लोग डाक्टर के पास भी नहीं जाते पर देखा जाए तो शीघ्रपतन कोई बड़ी समस्या नहीं है और इसका उपचार भी हो सकता है. तो आज हम आपको शीघ्रपतन के बारे में विस्‍तार से बता रहे हैं, जिससे आपको काफी हद तक इस समस्‍या का समाधान मिल सके.

 क्यों होता है शीघ्रपतन

शीघ्रपतन के दो कारण है- लाइफ लौन्ग (प्राइमरी), एक्वायर्ड (सेकेंडरी). शीघ्रपतन की समस्‍या पहली बार या किसी नए पार्टनर के साथ संभोग करने के दौरान कामोउत्तेजना के ज्यादा प्रवाह होने के चलते भी ये हो सकता है. अगर लंबे समय के बाद संभोग किया जाए तो भी शीघ्रपतन की समस्‍या हो सकती है. इसके अलावा अपनी पार्टनर के बीच के रिश्‍तों के बारे में तनाव या ज्‍यादा सोचना भी शीघ्रपतन का कारण है.

क्या है इसके लक्षण

  • बार-बार प्रयास करने पर भी संभोग (sexual intercourse) के दौरान 1 मिनट तक ना रोक पाना.
  • सेक्स को टालना.
  • सेक्स करने के बाद पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाना.
  • सेक्स से पहले मन में शीघ्रपतन का डर आना.

क्या है इसका उपचार

शीघ्रपतन कोई लाइलाज बीमारी नही है इसका इलाज सम्भव है. जहां तक स्‍टेमिना की बात है तो यह हर स्वस्थ पुरूष में नेचुरली रहती है जिसे वे ठीक तरह से महसूस नहीं कर पाते. यदि वे सेक्स के समय सहवास, भोजन के समय भोजन के बारे में सोचें तो उनकी स्‍टेमिना में फर्क साफ दिखेगा. यानी आप जब जो काम करें उसे अच्छे से करें. दिन-रात केवल सहवास के विषय में ही सोचते रहने से तथा अपनी स्‍टेमिना पर अकारण ही शंका करते रहने से वास्तविक यौन शक्ति पर मानसिक रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जो धीरे-धीरे शारीरिक रूप से भी कमजोर कर देती है.

खाने पर दें ध्यान

शीघ्रपतन ठीक करने और ऊर्जा व स्फूर्ति को कायम रखने के लिए खान-पान का भी ध्यान रकना जरुरी है.  शाकाहारी भोजन प्राकृतिक गुणों से परिपूर्ण व सुपाच्य होता है. ऐसे भोजन को पचाने के लिए शरीर की अतिरिक्त ऊर्जा भी खर्च नहीं होती तथा व्यक्ति को यौन शक्ति भी अनुकूल बनी रहती है. ताजे मौसमी फल, कच्ची सब्जियां, अंकुरित आनाज, दूध, शहद, लस्सी आदि निरोगी पदार्थ हैं जिनके सेवन से शरीर शक्ति से भरपूर निरोग बना रहता है.

इसके अलावा  आपसे हमारी यही सलाह होगी की जैसे ही आपको लगे की आप इस समस्या से जूझ रहे है तो फौरन डाक्टर की सलाह ले और शर्माएं नही.

मुझे मास्टरबेशन की आदत है, 10 सेकेंड में इजैक्युलेट हो जाता हूं. क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल का हूं, 16 साल की उम्र से ही मैंने मास्टरबेशन करना शुरू कर रहा हूं. मुझे लगता है कि इससे मेरी सेक्स लाइफ प्रभावित हो रही है. अब मैं 10 सेकेंड में ही इजैक्युलेट कर देता हूं. इसके अलावा मुझे पौर्न देखने की बुरी आदत है. सोते वक्त मुझे कभी-कभी सेक्स के सपने आते हैं और मेरा इजैक्युलेशन हो जाता है. मैं मास्टरबेशन की इस उत्तेजना को कैसे कम करूं?

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 जवाब 

आपने जो टिप्स मांगे हैं उनसे आपको सेक्शुअल एक्सपीरियंस को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि आपको अपने सेक्शुअल बिहेवियर को सुधारने की जरूरत है. हालांकि इसमें कुछ महीने का समय लग जाएगा. अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपने तरीकों में बदलाव लाएं और जो उद्देश्य है उसे पाने की कोशिश करें. इस संबंध में सेक्स एक्सपर्ट या फिर काउंसलर आपकी मदद कर सकता है.

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बेफिक्र होकर उठाएं Masturbation का लुत्फ

के के अग्रवाल देश के जाने माने डाक्टर हैं जिन्हे अपनी काबिलियत के लिए कई दूसरे पुरुस्कारों और सम्मान के साथ  सरकार से पद्म श्री जैसा पुरुस्कार भी मिल चुका है . दिल के रोगों के माहिर ये डाक्टर साहब सेक्स से ताल्लुक रखते मसलों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं . देश के वे पहले नामी डाक्टर हैं जो मास्टरवेशन यानि हस्तमैथुन पर खुलकर बोलते लोगों की कई गलतफहमियाँ दूर करते हैं . उनकी मानें तो हस्तमैथुन कतई सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं है बल्कि फायदेमंद है .

हस्तमैथुन को लेकर कई गलतफहमियाँ फैली हुई हैं , बेहतर तो यह कहना होगा कि जानबूझकर फैलाई जाती हैं जिससे लोग इसका लुत्फ न ले सकें .  जबकि सेक्स सुख लेने का यह इकलौता बेहतर और महफूज रास्ता है जिसमें किसी पार्टनर की मोहताजी नहीं रह जाती . मेडिकल साइंस में यह बात ज़ोर देकर कही और मानी जाती है कि एक दो या चार पाँच नहीं बल्कि 99 फीसदी लोग हस्तमैथुन करते हैं . खासतौर से कुँवारे लड़के लड़कियां तो सेक्स की अपनी इच्छा इसी से पूरी करते हैं . हालांकि दिलचस्प सच यह भी है कि कई शादीशुदा लोग भी हस्तमैथुन करते हैं क्योंकि उन्हें हमबिस्तरी से पूरा और मनमाफिक मजा नहीं मिलता.

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यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक आम बात है लेकिन सच यह भी है कि सही जानकारियाँ न होने से अधिकतर लोग हस्तमैथुन को लेकर वेबजह के तनाव में रहते हैं और खुद को कमजोर और कभी कभी तो नामर्द तक समझने की गलती कर बैठते हैं . ऐसा महज इसलिए कि इनके दिमाग में यह बात ठूंस ठूंस कर भर दी गई है कि हस्तमैथुन बुरी बात है और इसके जरिये जो वीर्य बेकार निकल जाता है वह बड़ी मुश्किल से बनता है इसकी एक बूंद की कीमत ही करोड़ों रु होती है . इस बाबत वेबकूफी भरी बात यह फैला दी गई है कि एक बूंद वीर्य बनने सैकड़ों किलो अन्न लगता है जिससे खून और उस खून से एक तरह का रस और फिर उससे वीर्य बनता है .

गलतफहमी यह भी बड़े पैमाने पर पसरी है कि जो वीर्य को हस्तमैथुन के जरिये जाया कर देता है उसकी ज़िंदगी के कोई माने नहीं रह जाते उसके चेहरे पर रौनक नहीं रह जाती और उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है . धार्मिक किताबों में इस वीर्य का बखान इतने भयानक तरीके से किया गया है कि अच्छे अच्छे इसे पढ़कर दहल जाएँ लेकिन हकीकत एकदम उलट है .

जानें सच – हकीकत यह है कि वीर्य शरीर में लगातार बनते रहने बाला एक खास किस्म का केमिकल है जो बनता तभी है जब शरीर और दिमाग में सेक्स की उत्तेजना चरम पर होती है हर कोई इसे महसूसता भी है . यानि वीर्य शरीर के अंदर स्टाक में नहीं रहता है और न ही उत्तेजना होने पर इसका निकलना रोका जा सकता .  इस के निकलने से ही सेक्स सुख मिलता है फिर चाहे वह हमबिस्तरी से मिले या हस्तमैथुन से इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता . आमतौर पर मर्दों में 12 – 13 साल की उम्र में सेक्स उत्तेजना आने लगती है जिसे शांत या पूरी करने वे हस्तमैथुन करते हैं .

गड़बड़ यहीं से शुरू होती है क्योंकि जवान होते लड़के लड़कियों के दिमाग में यह बात पहले से ही भरी होती है कि हस्त मैथुन गलत है , पाप है . ये बातें वे ठीक उसी तरह सीखते हैं जैसे यह कि भगवान है और उसके पूजा पाठ से ही मनचाहे फल मिलते हैं . फर्क इतना है कि हस्तमैथुन के बारे में जानकारियाँ उन्हें इधर उधर से नीम हकीमों के इश्तिहारों और यार दोस्तों से मिलती हैं.

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जब जवान होते लड़के किसी इश्तहार में यह पढ़ते हैं कि बचपन के कुसंग की वजह से नामर्दी या  कमजोरी आ गई हो , थकान महसूस होती हो , शीघ्रपतन हो जाता हो , स्वप्न दोष हो तो घबराएँ नहीं शीघ्र हमसे मिलें और मर्दाना ताकत पाएँ तो वे घबरा उठते हैं और उन्हें यह वहम और गलतफहमी हो जाती है कि वे हस्तमैथुन करने के चलते बच्चा पैदा करना तो बाद की बात है औरत को सेक्स सुख नहीं दे पाएंगे . ऐसा इसलिए और भी होता है कि हमारे यहाँ सेक्स एज्यूकेशन यानि तालीम के कोई इंतजाम नहीं हैं . गलत जानकारियाँ कैसे ज़िंदगी दुश्वार कर देती हैं इसके बारे में भोपाल के नजदीक सीहोर के एक दुकानदार के उदाहरण से समझा जा सकता है .

40 साला इस दुकानदार के मुताबिक वह 15 साल की उम्र से ही हस्तमैथुन कर रहा था 25 का होते होते जब शादी की बात चली तो वह घबरा उठा कि कैसे बीबी को संतुष्ट करेगा इसलिए वह शादी से कतराने लगा . एक दिन उसने शहर के कोतवाली चौराहे पर एक खानदानी हकीम को तम्बू गड़ाए देखा तो अपनी परेशानी लेकर उसके पास जा पहुंचा . हकीम साहब तो बैठे ही ऐसे मुर्गों के लिए थे .  उन्होने पहले तो उसे डराया फिर 40 रु लेकर कुछ पुड़ियेँ थमा दीं कि रात को सोते वक्त दूध के साथ खाते रहना आठ दिन में ही घोड़े को भी मात कर दोगे .

सोते वक्त  दुकानदार ने हिदायत के मुताबिक दवा दूध से खा ली लेकिन आधी रात को उसके पेट में इतना भयंकर दर्द उठा कि उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा . डाक्टर ने खान पान के बारे में पूछताछ की तो घबराए दुकानदार ने तुरंत सच उगल दिया . 2 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी हुई तो अकेले में उसके चाचा ने उसे समझाया कि हस्तमैथुन से ऐसा कुछ नहीं होता जिसे सोचकर वह घबरा गया था . फिर उन्होने सेक्स से ताल्लुक रखती कई अहम बातें उसे समझाईं तो उसका डर जाता रहा . अब यह दुकानदार 2 बच्चों का बाप है और बिना किसी खानदानी हकीम की दवा खाए इस उम्र में भी पलंग तोड़ सेक्स करता है और नौजवानों को मेसेज देता है कि वे नीम हकीमी के चक्कर में वक्त और पैसा जाया न करें हस्तमैथुन से न तो कमजोरी आती और न ही ज़िंदगी बर्बाद होती .

नुकसान कुछ नहीं फायदे कई – माहिरों की मानें तो हस्तमैथुन से कोई नुकसान नहीं होता उल्टे फायदे कई होते हैं मसलन इससे मूड फ्रेश होता है और जिस्म सहित अंग की भी कसरत हो जाती है . जानकर हैरानी होना कुदरती बात है कि इससे तनाव भी दूर होता है .  कई रिचर्स में चौका देने बाली ये बातें भी उजागर हुई है कि सेक्स की इच्छा होने पर हस्तमैथुन कर लेने से लोग सेक्स रोगों के जोखिम से बचे रहते हैं और स्वप्न दोष भी नहीं होता अलावा इसके अच्छी नींद भी आती है .

डाक्टर के के अग्रवाल पूरे भरोसे से ज़ोर देकर कहते हैं कि मेडिकल साइंस हस्तमैथुन को गलत या नुकसानदेह नहीं मानती और न ही इसका शरीर की ताकत और मर्दानगी से कुछ लेना देना यह एक कुदरती बात है . इससे एनर्जी कम नहीं होती बल्कि बढ़ती है . भोपाल के नामी  मनोविज्ञानी यानि दिमागी बीमारियों के माहिर डाक्टर विनय मिश्रा तो यह तक कहते हैं कि अगर सेक्स इच्छाओं को जरूरत से ज्यादा दबाया जाये तो जरूर दिमागी बीमारियों का खतरा बनने लगता है . इसलिए जरूरत पड़ने पर हस्तमैथुन करना हर्ज की बात नहीं .

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एहतियात रखें – एक पुरानी कहावत है कि अति सर्वत्र वर्जयते यानि अति हर जगह नुकसान करती है फिर वह चाहे अच्छे खाने पीने की ही क्यों न हो . हस्तमैथुन पर भी यह बात  लागू होती है . आमतौर पर माहिर यह मानते हैं कि हफ्ते में 3-4 दिन हस्तमैथुन किया जा सकता है . इसके अलावा ये एहतियात भी बरतना चाहिए –

1 – अंग को पूरा उत्तेजित होने पर ही हस्तमैथुन करना चाहिए .

2 – कमरे या बाथरूम बगैरह जहां भी करें दरवाजा अच्छे से बंद कर लेना चाहिए .

3 – ज्यादा ज़ोर से नहीं करना चाहिए इससे अंग को नुकसान हो सकता है .

4 – वीर्य को पोंछने साफ कपड़े या टिसु पेपर का इस्तेमाल करना चाहिए .

5 – एक दिन में बार बार हस्तमैथुन नहीं करना चाहिए .

6 – अगर इसके लिए किसी सेक्स टोय का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे अच्छे से साफ करना चाहिए खासतौर से उन लड़कियों को जो नकली अंग का इस्तेमाल करती हैं .

और आखिरी बात जो हमेशा जेहन में रखनी चाहिए वह यह कि हस्तमैथुन कतई नुकसानदेह नहीं है इसे आत्मनिर्भरता भी कहा और समझा जा सकता है .

शराब पीकर बस में चढ़ा, लड़की को घूरा, फिर खोल दी जिप

साउथ दिल्ली में मंगलवार रात क्लस्टर बस में एक युवती के सामने मस्टरबेट करने के आरोपी के बारे में कई जानकारियां मिली हैं. बिहार का रहने वाला आरोपी मुकेश कुमार रंजन (39) बस में शराब पीकर चढ़ा था. फिर वह युवती की सीट पर पहुंच गया. वहां उसने युवती को घूरना शुरू किया.

काफी देर तक उसे घूरते देख युवती ने भी उसे घूरा तो मुकेश ने प्राइवेट पार्ट निकाल लिया. उसके बाद बस में मस्टरबेट करने लगा. इस घटना से महिलाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल उठने लगे हैं.

रात 9 से 9:15 बजे के बीच हुई घटना के आरोपी मुकेश रंजन को महरौली थाना पुलिस ने जेल भेज दिया है. वह यहां काफी समय से मोलड़बंद गांव में परिवार के साथ रह रहा था. परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. आरोपी एक फैक्ट्री में काम करता है.

जांच में पता लगा है कि कापसहेड़ा से बदरपुर बौर्डर के बीच चलने वाली रूट नंबर-717 की जिस बस में युवती सवार थी. उसी बस में आरोपी माता चौक महिपालपुर से सवार हुआ था. बस में भीड़ थी. आरोपी की हरकत को पहले युवती ने नजरअंदाज किया. जब वह कई किलोमीटर युवती को घूरते गया तो युवती ने भी गुस्से में उसकी ओर घूर दिया. इसके बाद यह वाकया हुआ. युवती ने विरोध किया तो आरोपी ने उसे धक्का भी दिया. युवती की मदद को बस में सिर्फ एक युवक आगे आया.

युवती ने सेंडल से आरोपी की धुनाई कर दी. बाद में पुलिस को कौल की. बताया जाता है कि मौके पर शुरुआत में पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी.

जब युवती ने बताया कि वह दिल्ली महिला आयोग के लिए भी काम कर चुकी है तो पुलिसवाले आरोपी को थाने ले गए. वहां एसएचओ अतुल कुमार वर्मा ने युवती की बहादुरी की तारीफ की.

‘मिर्जापुर’ के मस्टरबेशन सीन पर श्वेता त्रिपाठी ने क्या कहा

हाल ही में आई वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की स्टोरी आजकल लोगों के बीच काफी पौपुलर है. बाहुबलियों की लड़ाई, खून खराबा, खाटी यूपी टोन, परिवारों की कहानी, पंकज त्रिपाठी की जबरदस्त एक्टिंग के बदौलत इस सीरीज ने काफी सुर्खियां बटोरी है. हालांकि इस सीरीज को इसकी बोल्डनेस के कारण भी काफी पौपुलैरिटी मिली है. इसमें पहली बार श्वेता त्रिपाठी भी बोल्ड अवतार में दिखी हैं. एक खास सीन पर बात करते हुए श्वेता ने अपने अनुभवों को साझा किया है. उनकी बातें चौकाने वाली थी.

shweta tripathi on masturbation scene of mirzapur

मिर्जापुर में शुरुआती एक सीन में श्वेता लाइब्रेरी में मस्टरबेट करती नजर आ रही हैं. आप सीन में देखेंगे कि गोलू गुप्ता (श्वेता) लाइब्रेरी में बैठकर एक किताब पढ़ रही हैं. वहीं गोलू की बहन उन्हें ढूंढ रही है. वह गोलू को कमरे के एक कोने में पसीने में लथपथ पाती हैं तो पूछती हैं ‘मिल गई पूरी दुनिया की जानकारी.’ इस पर गोलू जवाब देती है ‘हां दीदी स्वर्ग की तो मिल ही गई.’ मस्टरबेशन के इस सीन पर श्वेता ने कहा कि इसको पर्फौरम करना कौफी पीने जैसा रेगुलर और नौर्मल था. श्वेता का ये सीन वेब सीरीज में उनका इंट्रोडक्शन सीन है.

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इस सीन पर श्वेता ने कहा, महिलाएं पुरुषों को पसंद करती हैं. उनकी सेक्सुअल डिजायर्स होती हैं. जब मैंने सीन पढ़ा और पूरा ग्राफ समझा तो मुझे ये सीन बिल्कुल भी बोल्ड नहीं लगा.

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