शादी की पहली रात, क्या करें और क्या नहीं

शादी की पहली रात को सुहागरात कहा जाता है. सुहागरात सभी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा मानी जाती है. इस रात को लेकर लोगों के मन में कई तरह के प्रश्न होते हैं. इस रात में महिलाओं व पुरुषों दोनों में ही समान उत्सुकता रहती है.

सामान्य तौर पर सुहागरात का मतलब नव दंपति का शारीरिक रूप से एक होना माना जाता है. लेकिन जिंदगी की इस खास रात को इतना ही समझ लेना गलत होगा. दरअसल शादी के बाद सुहागरात ही पति-पत्नी के नए जीवन की वह पहली रात होती है, जिसमें वह दोनों एक साथ होते हैं. शादी की पहली रात को लेकर पति व पत्नी दोनों के ही मन में उत्सुकता के साथ घबराहट भी बनी रहती है.

इस विषय पर लोगों की उत्सुकता और घबराहट को देखते हुए आज हम आप को सुहागरात के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं. इसके साथ ही आपको यह भी बताएंगे कि सुहागरात क्यों मनाई जाती है और इसको मनाने का सही तरीका क्या है. इसके अलावा आपको यहां सुहागरात मनाने के टिप्स भी बताए जा रहे हैं.

सुहागरात क्या होती है

सुहागरात में क्या करना चाहिए, सुहागरात कैसे मनाएं, सुहागरात को मनाने का तरीका और टिप्स जानने से पहले आप सभी को यह समझना बेहद जरूरी है कि सुहागरात का सही अर्थ क्या है और यह क्यों मनाई जाती है.

सुहागरात का मतलब होता है शादी की वह पहली रात जिसमें पति-पत्नी एक दूसरे को जानते और समझते हैं. हमारे समाज में इस विषय पर ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है. इस पर चर्चा न हो पाने की वजह यह भी है कि सुहागरात को संभोग क्रिया से जोड़कर देखा जाता है. जबकि नव दंपति के बीच शारीरिक संबंध स्थापित होना इस रात का मात्र एक हिस्सा भर है. इसलिए इसको सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने वाली रात समझना बेहद गलत है.

शादी के बाद नव दंपति के जीवन की यह पहली रात होती है. इस रात में ही वह दोनों एक दूसरे के व्यक्तित्व के बारे में जान पाते हैं. साथ ही इस रात वह अपनी शादीशुदा जिंदगी की भावी योजनाएं भी तैयार करते हैं.

सुहागरात की शुरुआत कैसे करें

शादी के बाद जब दुल्हन अपने ससुराल में प्रवेश करती है, तभी से उसकी शादी की पहली रात की तैयारियां शुरू हो जाती है. अपने पति के घर में पहुंचते ही नव वधु को कई रीति-रिवाजों से गुजरना होता है. हर लड़की के लिए यह यादगार पल होता है. दुनिया भर के सभी धर्मों में नई वधु के घर आने पर कई तरह के रीति रिवाजों को पूरा किया जाता है. आइए जानते हैं सुहागरात के कुछ रीति-रिवाजों के बारे में.

बहू का स्वागत :

जैसे ही नव वधु अपने नए घर यानि सुसराल के गेट पर पहुंचती हैं, तो उसके स्वागत के लिए घर की चौखट पर चावल का लोटा रखा जाता है. चावल के लोटे को अपने पैर से आगे गिराते हुए वधु घर में प्रवेश करती है.

खेलों का अयोजन करना :

शादी के बाद वधु अपने ससुराल वालों व रिश्तेदारों के साथ सहज हो सके, इसलिए कई तरह के रोचक खेल संपन्न किए जाते हैं. जिसमें एक बड़े और गहरे बर्तन में दूध व पानी मिलाया जाता है. इसके बाद इस पानी में अंगूठी डाल दी जाती है और जिसके बाद वर-वधु को यह अंगूठी ढुंढनी होती है. जो पहले अंगूठी को ढुंढता है उसको तोहफे दिए जाते हैं.

रिश्तेदारों से मेल-जोल बढ़ाना :

इसके अलावा भारत के कई क्षेत्रों में नववधु से सभी महिलाओं व करीबी रिश्तेदारों के सामने डांस करवाया जाता हैं, ताकि वह सभी लोगों से साथ परिवार की तरह ही घुलमिल सकें और खुद को नए परिवार में सहज महसूस करें.

वर-वधु के लिए कमरा सजाना :

इसके बाद रात होने से पहले वर व वधु के लिए एक कमरे को सजा दिया जाता है, ताकि वह अपनी जिंदगी की शुरुआत एक नए तरीके से कर सकें.

यहां तक सभी रीति-रिवाज खत्म हो जाते हैं. इसके बाद नव वर-वधु को सोने के लिए एक कमरे में भेज दिया जाता है.

पति पत्नी पहली रात को क्या करें

शादी की पहली रात को लेकर हर किसी के मन में उत्सुकता होती है. इस समय पति व पत्नी दोनों ही घबराएं होते हैं. वधु के ससुराल पहुंचने के बाद सभी रिवाजों को पूरा करने के पश्चात वर-वधु को सोने के लिए एक कमरे में भेज दिया जाता है.

अब सुहागरात के दौरान क्या करना चाहिए, उसको क्रमवार तरीके से बताया जा रहा है.

सुहागरात पर वधु को तोहफा दें :

नई वधु को अपने साथ सहज बनाने के लिए बातें करना और तोहफा देना जरूरी होता है. इस रात आप महिला साथी को जो भी तोहफा देंगे वह उनको जीवन भर याद रहेगा. इतना ही नहीं तोहफा से देने डर व घबराहट का माहौल सामान्य हो जाएगा और आप दोनों एक दूसरे से बातों की शुरूआत कर पाएंगे.

सुहागरात में एक दूसरे को जानें :

शादी की पहली रात वर-वधु दोनों को ही एक-दूसरे को जानना चाहिए. इस रात को लेकर सभी के मन में घबराहट और शंकाएं होती हैं. ऐसे में आप दोनों को प्रयास करते हुए माहौल को सहज और खुशनुमा बनाना होगा. इस दौरान आप एक दूसरे की पसंद और ना पंसद के बारे में जानें. इस रात आप अपनी आने वाली जिंदगी के कुछ जरूरी मुद्दों पर भी बात कर सकते हैं. सुहागरात में एक दूसरे से बात करके साथी को समझने में आसानी होती है. साथ ही इससे आप दोनों के बीच के रिश्ते में मजबूती आती है और आप एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ पाते हैं.

शादी की पहली रात कैसे करें सेक्स :

जब आप दोनों साथी एक दूसरे के साथ सहज महसूस करने लगते हैं तो आप दोनों में से कोई भी शारीरिक क्रिया के लिए पहल कर सकता है. सुहागरात पर महिलाओं का ऐसा सोचना कि पुरुष ही पहल करें, एक गलत धारणा है. यह आप दोनों की यौन सहमति के आधार पर की जाने वाली क्रिया होती है. सेक्स करने से पहले आप इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं. इस दौरान आपके मन में सुहागरात को लेकर कोई कल्पना हो तो उसको भी साथी के साथ शेयर करें.

सुहागरात में उतावलापन न दिखाएं :

सुहागरात को लेकर पुरुषों में इतनी उत्सुकता होती है कि वह कमरे में दुल्हन को पाकर उतावले हो जाते हैं. पुरुषों का ऐसा करना महिलाओं को असहज कर सकता है. उतावलेपन में आप अपने साथी को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं. इसलिए जल्दबाजी न दिखाएं और सेक्स करते समय संयम से काम ले और धीरे-धीरे प्यार के साथ सेक्स करें. पहली बार सेक्स करते समय कई महिलाओं की योनि में अधिक दर्द होता है. इसके साथ ही योनि से रक्तस्त्राव भी होता है. ऐसे में आप दोनों ही घबराएं नहीं, यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि पहली बार सेक्स करते समय सभी महिलाओं की योनि से रक्त स्त्राव हो.

शादी की पहली रात सेक्स से पहले करें फोरप्ले :

सुहाग की पहली रात सेक्स करने से पहले आपको साथी के साथ थोड़ा समय फोरप्ले में बिताना चाहिए. महिलाओं को चरमसुख (और्गेज्म) तक पहुंचने में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा समय लगता है. ऐसे में आप फोरप्ले की सहायता से महिला साथी को आसानी से ऑर्गेज्म तक पहुंचा सकते हैं. इसमें किस करना व उनको प्यार से सहलाना शामिल है. फोरप्ले का उद्देश्य महिला को सेक्स के लिए उत्तेजित करना होता है.

शादी की पहली रात सेक्स के दौरान सावधानी बरतें :

शादी की पहली रात सेक्स करते समय आप ऐसा कुछ न करें जिससे आपको यौन संचारित रोग (एसटीडी) होने का खतरा बना रहें. इस तरह के संक्रमण से बचने के लिए आपको सेक्स करते समय सावधानी बरतनी होगी. इसके लिए आप कंडोम का इस्तेमाल करें.

शादी की पहली रात क्या न करें

सुहागरात आपकी जिंदगी की अहम रात होती है. इस रात ऐसी कोई गलती न करें जिससे आपको सारी जिंदगी शर्मिंदगी महसूस हो. इस दौरान निम्न गलतियों को करने से बचें.

जबदस्ती न करें :

सुहागरात में अपनी महिला साथी के साथ सेक्स के लिए जबरदस्ती न करें. उनकी सहजता और सहमति हो तब ही सेक्स करना बेहतर होगा.

नशे से दूर रहें :

शादी की पहली रात खुद को जोशीला बनाने के लिए अधिकतर लोग शराब और धूम्रपान आदि नशा करते हैं. शादी के बाद आप दोनों ही इस नए रिश्ते की शुरुआत करते है ऐसे में नशा करना आपके रिश्ते पर खराब असर डाल सकता है. इसके साथ ही नशा करने से आपकी यह महत्वपूर्ण रात भी खराब हो सकती है. सुहागरात मनाने के तरीके में आपको नशे से दूर रहने की बात को हमेशा याद रखनी चाहिए.

शादी के खर्चों का हिसाब न लगाएं :

शादी के बाद सुहागरात आपकी जीवन की महत्वपूर्ण रात है, इसको शादी में हुए खर्चों को जोड़ने में बर्बाद न करें. सुहागरात टिप्स में यह एक उपयोगी टिप्स मानी जाती है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि पुरुष व महिला को शादी के कामों के बाद इस रात ही फुर्सत के पल मिल पाते हैं और ऐसे में एकांत मिलते ही वह दोनों या कोई एक अपनी शादी के खर्चों को जोड़ना शुरू कर देता हैं. ऐसा करना बेहद ही गलत है.

घबराएं नहीं :

सुहागरात के दिन महिला व पुरुष दोनों ही घबराएं हुए होते हैं. इस घबराहट के कारण पुरुषों में कई बार नपुंसकता व शीघ्रपतन की समस्या हो जाती है. ऐसे में आप घबराकर किसी तरह की दवाईयों का सेवन न करें. पहली बार सेक्स करने और घबराहट के कारण पुरुषों में इस तरह की यौन समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. बार-बार अभ्यास करने से आप सेक्स के लिए सहज हो जाएंगे. सेक्स में आपके सहज होने से इस तरह की यौन समस्याएं अपने आप ही ठीक हो जाएंगी. लेकिन समस्याएं लगातार हो रही है, तो आपको इसके लिए डौक्टर से मिलना होगा.

मेरे पति को लगता है कि मैं बहुत ज्यादा वहमी हूं और किसी पर भरोसा नहीं करती हूं, उन्हें कैसे समझाऊं?

सवाल 

मैं 35 साल की ब्याहता हूं. मेरे पति को लगता है कि मैं बहुत ज्यादा वहम करती हूं और अपनी ससुराल वालों पर बिलकुल भी यकीन नहीं करती हूं. इसी बात पर मेरी और मेरे पति की लड़ाई होती हैक्योंकि मैं ऐसा बिलकुल भी नहीं मानती हूं.

इस सब की वजह यह है कि मेरी ससुराल में ज्यादातर लोग कम पढ़ेलिखे हैं और उन के पास मेरी जायज बातों का सटीक जवाब नहीं होता है. इसी के चलते वे लोग मेरे पति के कान भरते हैं कि तेरी पत्नी तो हमारे ऊपर शक करती है. इन्हीं बातों से घर में तनाव का माहौल रहता है. मैं क्या करूं?

जवाब

समस्या की जड़ आप का अपनी पढ़ाईलिखाई और जायज बातों पर गुमान भी तो हो सकता है. ससुराल वालों का कम पढ़ालिखा होना कोई गुनाह नहीं. उन्हें भी अपनी बातें जायज लगती होंगी. दरअसलसीधी सी बात यह है कि आप के और ससुराल वालों के बीच कोई तालमेल और आपसी समझ ही नहीं है. ऐसे में असल तनाव तो पति को होता हैजो बीवी और घर वालों के बीच पैंडुलम जैसा डोलता रहता है. आप अपनी तरफ से बोलना कम कर के देखें और बहसबाजी से बचें. ससुराल वालों को अपने से छोटा न समझें. घर का माहौल बदलेगा तो समस्या भी खत्म हो जाएगी.

इस दिन शादी करेंगे अथिया शेट्टी और क्रिकेटर केएल राहुल

बॉलीवुड इंडस्ट्री में आए दिन तमाम सितारों के लिंकअप और शादी की खबरें आती रहती हैं. इनमें एक नाम है एक्ट्रेस अथिया शेट्टी (Athiya Shetty) का भी है. अथिया शेट्टी और क्रिकेटर केएल राहुल (KL Rahul) एक दूसरे को काफी समय से डेट कर रहे हैं. इस कपल की शादी की खबरें अक्सर आती रहती हैं. एक बार फिर अथिया शेट्टी और केएल राहुल की शादी को लेकर नया अपडेट आया है. लेटेस्टे मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि इस कपल ने साल 2023 में जनवरी के महीने में अपनी शादी की डेट फाइनल कर ली है.

 

 

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अथिया शेट्टी और केएल राहुल जनवरी, 2023 में करेंगे शादी

 ‘पिंकविला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अथिया शेट्टी और केएल राहुल की शादी के कार्यक्रम 21 से 23 जनवरी के बीच होंगे. सुनील शेट्टी और माना शेट्टी की बेटी आथिया शेट्टी और केएल राहुल जनवरी के चौथे सप्ताह में शादी करने जा रहे हैं. कपल की शादी के दौरान परिवार और करीबी दोस्त शामिल होंगे. रिपोर्ट में बताया गया है कि अथिया शेट्टी और केएल राहुल दिसंबर के आखिर तक निमंत्रण भेजने वाले है और 21 से 23 जनवरी की डेट को लॉक करने के लिए बोलने वाले हैं. इस कपल की शादी में कुछ दिन बचे हैं इसलिए तैयारियां जोरों पर हैं. इन दोनों की शादी साउथ इंडियन की तरह होने वाली है, जिसमें हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे कार्यक्रम होंगे. हालांकि, अथिया शेट्टी और केएल राहुल ने शादी को लेकर कोई भी कमेंट करने से मना किया है.

 

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अथिया शेट्टी और केएल राहुल का रिश्ता

गौरतलब है कि अथिया शेट्टी और केएल राहुल बीते तीन साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। दोनों ने बीते साल अपने रिलेशनशिप को ऑफिशियल किया था जब अथिया शेट्टी अपने भाई अहान शेट्टी की फिल्म ‘तड़प’ की स्क्रीनिंग पर बॉयफ्रेंड केएल राहुल के साथ पहुंची थीं। अथिया शेट्टी अक्सर बॉयफ्रेंड केएल राहुल के इंटरनेशनल क्रिकेट टूर पर उनके साथ जाती हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो अथिया शेट्टी ने साल 2015 में फिल्म ‘हीरो’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनके साथ सूरज पंचोली थे। अथिया शेट्टी पिछली बार साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म ‘मोतीचूर चकनाचूर’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ नजर आई थीं।

मैं एक लड़की से प्यार करता हूं पर 2 साल बाद उस की शादी होने वाली है, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल
मैं 19 साल का हूं और एक लड़की से प्यार करता हूं, पर 2 साल बाद उस की शादी होने वाली है. मैं उस के बिना नहीं जी सकता. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
आप के पास 2 साल हैं. आप इन 2 सालों में खुद को उस लड़की से शादी करने लायक बना सकते हैं. आप कोई अच्छी सी नौकरी करने के बाद उस लड़की के माता पिता से शादी की बात कर सकते हैं. आप दोनों का प्यार देख कर घर वाले भी राजी हो जाएंगे.

सेक्स के बारे में बात करने से चाहे आप कितना भी कतराएं, यकीन मानिए इसमें डूब जाने जितना मज़ा किसी और में नहीं. फिर चाहे आप बौयफ्रेंड के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहती हों या फिर शादी के बाद की पहली रात हो, यह एहसास बहुत खास होता है. लेकिन पहली बार की घबराहट भी उतनी ही होती है, जितना की उत्साह.

दोस्तों के बीच टौयलेट जोक्स और लूज टौक करने में आप अव्वल हैं. फिल्म हो या टीवी, बेड सीन्स देखने में बड़ा मजा आता है. मगर जब खुदकी बारी आई तो टांय टांय फिस्स. आप तो कागज की शेर निकलीं. इतना घबराएंगी तो जीत कैसे हासिल होगी. सेक्स है कोई रौकेट सांइस नहीं. आइए जानते हैं कि वो कौन सी 10 बातें हैं, जिनका ध्यान पहली बार सेक्स करते समय जरूर रखना चाहिए.

कम्फर्टेबल हों तभी बढ़ें आगे

पहला मिलन हमेशा रहता है याद यह जुमला बहुतों से सुना होगा और इससे जुड़ी कई कहानियां भी. कहानियों पर न जाएं. व्यावहारिक होकर सोचें कि क्या वाकई पहली बार सेक्स करना इतना रोमांचित करने वाला होता है! बेशक हो सकता है बशर्ते, पूरी तैयारी के साथ यह कदम उठाया जाए. जब कान्फिडेंट होंगी तभी इसका आनंद ले पाएंगी. क्या मैं इसके लिए तैयार हूं? यह सवाल उतना ही अहम है, जितना आपका सांस लेना. बौयफ्रेंड हो या पति, सोच समझकर, कम्फर्टेबल होने पर ही आगे बढ़ें.

महकी महकी हों आप

चर्चित सेक्सोलौजिस्ट डा. प्रकाश कोठारी की सलाह है, “साथ तभी महकेगा जब आप खुशबू से सराबोर होंगे. कोई अच्छी फ्रेगरैंस लगाएं, क्योंकि सुगंध का आपके मन मस्तिष्क पर बहुत असर पड़ता है. किसी को परफ्यूम पसंद आता है, तो किसी को शरीर की गंध उत्तेजित करती है.” खूशबू आप दोनों को एक दूसरे की ओर आकर्षित करने के साथ साथ एक दूसरे के सामने सहज भी बनाएगी.

उत्साह पर तनाव हावी न होने दें

क्या पहली बार में दर्द होगा? डा. कोठारी के मुताबिक़, यह एक मिथक है. पहली बार की उत्सुकता और घबराहट इतनी ज्यादा होती है कि हल्की सी छुअन भी हमारे पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर देती है. क्या होगा, क्या नहीं, इस घबराहट में हमारे नर्व्स भी तनाव में आ जाते हैं. दूसरा हम अपने प्राइवेट पार्ट्स को भी कसकर बंद कर लेते हैं, क्योंकि हम सहज नहीं होते. इसलिए प्रवेश करने में काफी दिक्कत होती है. और हम मान बैठते हैं कि पहली बार में दर्द होता है. आप जितनी ज्यादा सहज और तनाव मुक्त रहेंगी, उतना ज्यादा बेहतर होगा आपका अनुभव.

आर्गैज्म की राह न ताकें

हो सकता है पहली बार में आपको आर्गैज्म न मिले, तो घबराएं नहीं. क्योंकि शुरुआत में हमें पता ही नहीं होता, कि किस तरह से हमें आर्गैज्म मिलेगा. अलग अलग पोजिशन्स ट्राई करें. कई शोध तो यह भी कहते हैं कि लड़कियों को इंटरकोर्स से पूरा सुख या आर्गैज्म मिलता ही नहीं है. इसकी परवाह न करें, केवल उस पल का आनंद उठाएं.

ड्रेसिंग का भी रखें ख्याल

कपड़ों की भी अहम भूमिका होती है. इसलिए अपने पार्टनर की पसंद का या आकर्षक ड्रेसिंग ज़रूर करें. खुदको मेंटेन रखें, ताकि आप कान्फिडेंट महसूस कर सकें. यह बात लड़कों पर भी लागू होती है. दाढ़ी मूंछ ट्रिम करना न भूलें. किस करते समय सोचिए आपकी पार्टनर का क्या हाल होगा? सेक्सी कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं कि कुछ ऐसा पहन लें, जिसमें आप सहज ही न हों. ज्यादा मेकअप करने से भी बचें.

बातचीत है सेक्स की पहली सीढ़ी

जी हां, बातचीत. इसे सेक्स का चार अक्षरों का पर्यायवाची कहा जाता है. यानी बातचीत से ही सेक्स की शुरुआत होती है. इसे संभोग यूं ही नहीं कहा जाता. संभोग यानी सम भोग. जहां दोनों मिलकर इसका बराबर आनंद उठाते हैं. जहां कोई एक्स्पर्ट या नौसिखिया नहीं है. पहली बार सेक्स कर रहे हैं, इसलिए घबराहट थोड़ी होगी. बात करें, धीरे धीरे हिचक कम होगी. बातों बातों में एक दूसरे का हाथ पकड़ लें. धीरे धीरे फोरप्ले की ओर बढ़ें. हो सकता है शुरुआत करने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन सेक्स कोई अछूता विषय नहीं है. यह आपकी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है, यह बात भूले नहीं. हो सके तो एक दो दिन पहले से ही सेक्स के बारे में बातें करना शुरू कर दें. सेक्स के दौरान अपने पार्टनर को बताएं कि शरीर के किस हिस्से में आप सबसे ज्यादा उत्तेजना महसूस करती हैं और उनसे भी यही सवाल करें.

फोरप्ले है अहम

यह समझ लें, जो मज़ा सफ़र में है, वो मंजिल में नहीं. जल्दबाजी की तो आप चोटिल भी हो सकती हैं, इसलिए अपने प्राइवेट पार्ट में नैचुरल लूब्रिकेशन आने दें. और यह तभी संभव है जब आप और आपका पार्टनर फोरप्ले को खुलकर एन्जौय कर पाएंगे. फोरप्ले जितना लंबा चलेगा आप उतना कम्फर्टेबल महसूस करते जाएंगे. दरअस्ल, स्पर्श से हमारे मस्तिष्क में औक्सिटोसिन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है. इसे रिलीज़ होने दें और फोरप्ले से सेक्स की शुरुआत करें.

कंडोम पहनना न भूलें

एक दूसरे में खोने का अर्थ यह नहीं कि आप लापरवाही करें. माना कि पहली बार करने की हड़बड़ाहट में यह ग़लती सबसे आम है. लेकिन यह गलती जोखिम भरी है. महिलाओं के लिए विशेष कंडोम बनाए गए हैं. मेडिकल स्टोर्स में यह उपलब्ध हैं. पहले से ही प्रैक्टिस करें, ताकि उस दिन आपका मजा किरकिरा न हो. यदि आपकी बजाय आपका पार्टनर प्रोटेक्शन इस्तेमाल करनेवाले हैं, तो उन्हें याद दिलाना न भूलें.

बाहरी लूब्रिकेशन से गुरेज न करें

पहली बार में घबराहट की वजह से कई बार लूब्रिकेशन ठीक तरह से नहीं निकलता. इसलिए आप कृत्रिम लूब्रिकेशन्स का विकल्प चुन सकती हैं. पेट्रोलियम जेली से लेकर नारियल तेल तक ऐसे कई सुरक्षित विकल्प हैं, जो आपके घर में आसानी से उपलब्ध होंगे. इसके अलावा बाजार में भी कई तरह के लूब्रिकेंट्स हैं, जिन्हें आप खरीद सकती हैं.

सेफ्टी का रखें ध्यान

सुरक्षा बहुत जरूरी है. ऐसी जगह ढूंढ़ें, जो पूरी तरह सेफ हो. यदि शादी से पहले सेक्स के बारे में सोच रही हैं तो किसी होटल या दोस्त के घर न जाएं. पार्टनर या आपका घर सबसे सुरक्षित जगह है. यदि आप जगह को लेकर असहज रहेंगी, तो आपका पूरा ध्यान सेक्स पर नहीं होगा. डर आपको सफल भी नहीं होने देगा. बेडरूम में कैंडल्स हों तो कहना ही क्या. फूलों से घर को महकाएं, ताकि सहजता बढ़े.

पहली बार इन पोजिशन्स को आज़माएं

मिशनरीः यह सबसे बुनियादी और आसानी से की जा सकनेवाली  पोजिशन है.

साइड बाय साइड पोजिशनः इस  पोजिशन में पुरुष को आसानी से प्रवेश करने का मौका मिलेगा और आप भी कम्फर्टेबल रहेंगी.

गर्ल औन टौपः यदि आप सहज हों, तो इस पोजिशन को भी चुन सकती हैं. यह पोजिशन आपके पार्टनर को जल्दी उत्तेजित महसूस कराएगी और नियंत्रण भी आपके हाथों में होगा.

 

 

 

शादी से पहले मुझे एक लड़की से प्यार था, उसके मुताबिक मैं उसकी बेटी का बाप हूं, मैं क्या करूं?

सवाल
मेरी शादी हो चुकी है. शादी से 6 साल पहले मुझे एक लड़की से प्यार था. उस लड़की की भी शादी हो चुकी है, फिर भी हम दोनों अभी भी एकदूसरे को चाहते हैं. उस लड़की की एक बेटी भी है. उस के मुताबिक उस की बेटी का बाप मैं हूं. मैं क्या करूं?

जवाब
आप अपनी प्रेमिका को समझा दें कि अगर बेटी आप की है, तो भी उस का खुलासा करने से नुकसान ही होगा. उस का पति उसे अपनी औलाद समझता रहे, इसी में भलाई है. इस खुलासे से आप की बीवी और प्रेमिका के पति को काफी तकलीफ होगी. लिहाजा, इसे राज ही रखें. हो सके तो प्रेमिका से कम से कम मिलें.

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बड़े काम की है सेक्सटिंग की कला

हम टेबल पर, बिस्तर पर, वौशरूम में, सार्वजनिक जगहों पर, मूवी थिएटर में, डिनर टेबल के नीचे सभी जगह तो करते हैं… शरारतभरी बात है ना? पर हम फोन के इस्तेमाल की बात कर रहे हैं. भई, जब तकनीक आपके पास है तो इसका इस्तेमाल दिलों को वाइब्रेट करने के लिए क्यों न किया जाए? और एक समय हम उस जगह भी तो जाते थे-जब सेक्सटिंग को साइबर सेक्स के नाम से जाना जाता था, वो अस्त-व्यस्त से चैट रूम्स, जहां लोग औनलाइन बड़े ही व्यस्त नजर आते थे-तब हम एज/सेक्स/लोकेशन की भाषा में बात करते थे.

हमें लगता है कि सेक्सटिंग कूल है, क्योंकि लोग इसे बार-बार पढ़ना चाहते हैं. पर सच्चाई ये भी है कि ये आसान और बहुत सुविधाजनक भी है. हम आपको इस कला के कुछ सामान्य नियमों का पालन करने कहेंगे.

साथी को जानें

क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ सेक्सटिंग कर रही हैं, जिसे जानती हैं और जिसपर भरोसा कर सकती हैं? तो थम्स अप, आगे बढ़ने के लिए. यदि आप उसे नहीं जानती हैं तो सावधानीपूर्वक आगे बढ़ें. व्यक्तिगत जानकारियां न दें और तस्वीरें भेजने से बचें. टेलेग्राम जैसे ऐप का इस्तेमाल करें, जो आपके और उनके, दोनों ही ओर के सेक्स्ट को ‘सेव’ ना करने का विकल्प देता है.

चैट-अप लाइन तय करें

रियल लाइफ के लिए पिक-अप लाइन्स होती हैं तो आपके औनलाइन वर्जन के लिए चैट-अप लाइन क्यों न हो? ऐसी लाइन का चुनाव करें, जो आपके लिए सही हो, जो सेक्स्ट-स्टार्टर की तरह काम करे. सामनेवाले व्यक्ति की इसपर मिली प्रतिक्रिया आपको बताएगी कि आपको रोमांटिक गीत गाने हैं या अपने लिए किसी दूसरे चौकलेट केक की तलाश करनी है. हां, यदि वे रात 11 बजे के बाद आपके साथ सेक्सटिंग कर रहे हैं तो फिर चाहे जो भी बातें हो रही हों-आप उनकी नजरों में आ चुकी हैं.

स्पष्ट रहें

केवल लिखे हुए शब्दों के माध्यम से आपको अस्पष्ट व सांकेतिक और स्पष्ट व ग्रैफिक होने की पतली-सी रेखा के बीच अंतर रखना है. थंब रूल ये है कि जितना हौट आपका ऐक्शन होगा, उतना ही मुश्किल होगा सेक्सटिंग को समाप्त कर पाना. आपका सेक्स-टेंशन ऐसा होना चाहिए, जो उन्हें फोन से चिपके रहने पर मजबूर कर दे. यहां इमोजीज का इस्तेमाल न करें. शब्द और वाक्य यहां आपके दोस्त बनेंगे, इमोजीज पर्याप्त नहीं हैं.

अजीबोगरीब अब्रीविएशन्स से बचें

कुछ अब्रीविएशन्स आपकी बातों को अंदाजा तो दे देते हैं, लेकिन लोगों को पसंद नहीं आते. प्रसन्नता जैसे मनोभावों को जताना कठिन होता है, पर एलओएल या एलएमओज से बचें.

वैज्ञानिकता न बघारें

अपने नारीत्व का विवरण देने के लिए क्लीनिकल टर्म्स का इस्तेमाल करने से बचें.

सेक्सटिंग के आंकड़े

33% युवा वयस्क (20-26) कभी न कभी सेक्स्ट भेज चुके होते हैं. जुलाई 2011 में हुए एक सर्वे में सामने आया कि सोशल नेटवर्किंग और डेटिंग साइट्स पर मौजूद दो तिहाई महिलाओं ने कभी न कभी सेक्स्ट किया है, इनकी तुलना में यहां मौजूद केवल आधे पुरुषों ने ही सेक्स्ट किया है.

महिलाएं (48%), पुरुषों (45%) से ज़्यादा सेक्स्ट करती हैं, कुछ सर्वेज़ का कहना है. महिलाओं की तुलना में पुरुष सेक्सटिंग की पहल ज़्यादा करते हैं. आंकड़े बताते हैं कि 60% सेक्स्ट उस साथी को भेजे जाते हैं, जिसके साथ महिला/पुरुष रिश्ते में हैं और 33% संभावित बॉयफ्रेंड्स या गर्लफ्रेंड्स को.

सेक्स में आनंद और यौन सतुंष्टि का मतलब भी जानें

विभा ने 25-26 वर्ष की उम्र में जिस से विवाह करने का निर्णय लिया वह वाकई दूरदर्शी और समझदार निकला. विभा ने खूब सोचसमझ कर, देखपरख कर यानी भरपूर मुलाकातों के बाद निर्णय लिया कि इस गंभीर विचार वाले व्यक्ति से विवाह कर वह सुखी रहेगी.

विवाह होने में कुछ ही दिन बचे थे कि इसी बीच भावी पति ने एसएमएस भेजा जिसे पढ़ विभा सकुचा गई. लिखा था, ‘‘तुम अभी से गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन शुरू कर दो वरना बाद में कहोगी कि खानेखेलने भी नहीं दिया बच्चे की परवरिश में फंसा दिया. सैक्स पर कुछ पढ़ लो. कहोगी तो लिंक भेज दूंगा. नैट पर देख लेना.’’ यह पढ़ विभा अचरज में पड़ गई.

उसे समझ नहीं आ रहा था कि अपने होने वाले पति की, अटपटी सलाह पर कैसे अमल करे? कैसे व किस से गोलियां मंगवाए व खाए? साथ ही इस तरह की बातें नैट पर पढ़ना तो सब से कठिन काम है, क्योंकि वहां तो पोर्न ही पोर्न भरा है, जो जानकारी देने की जगह उत्तेजित कर देता है.

मगर विभा की यह दिक्कत शाम होतेहोते हल हो गई. दोपहर की कुरियर से अपने नाम का पैकेट व कुछ किताबें पाईं. गोली प्रयोग की विधि भी साथ में भेजे पत्र में थी और साथ एक निर्देश भी था कि किताबें यदि मौका न मिले तो गुसलखाने में ले जा कर पढ़ना, संकोच मत करना. विवाह वाले दिन दूल्हा बने अपने प्यार की आंखों की शरारती भाषा पढ़ विभा जैसे जमीन में गढ़ गई. सुहागरात को पति ने प्यार से समझाया कि सकुचाने की जरूरत नहीं है. इस आनंद को तनमन से भोग कर ही जीवन की पूर्णता हासिल होती है.

आधी अधूरी जानकारी

ज्यादातर युवतियों को तो कुछ पता ही नहीं होता. न उन्हें कोई बताता है और न ही वे सकुचाहट व शर्म के कारण खुद ही कुछ जानना चाहती हैं. पासपड़ोस, सखीसहेलियों से जो आधीअधूरी जानकारी मिलती है वह इतनी गलतफहमी भरी होती है कि यौन सुख का अर्थ भय में बदल उन्मुक्त आनंद व तृप्ति नहीं लेने देता. नैट पर केवल प्रोफैशनल दिखते हैं, आम लोग नहीं जो पोर्न बेचने के नाम पर उकसाते भर हैं. वास्तव में पिया के घर जाने की जितनी चाहत, ललक हर लड़की में होती है, उसी प्रियतम से मिलन किस तरह सुख भरा, संतोषप्रद व यादगार हो, यह ज्यादातर नहीं जानतीं.

कभीकभार सहेलियों की शादी के अनुभव सुन वे समझती हैं कि शादी के बाद पति का संग तो दुखदायी व तंग करने वाला होता है. जैसे कोई हमउम्र सहेली कहे कि बड़े तंग करते हैं तेरे बहनोई पूरीपूरी रात सोने नहीं देते. सारे बदन का कचूमर बना देते हैं. बिन ब्याही युवतियों के मन में यह सब सुन कर दहशत जगना स्वाभाविक है. ये बातें सुनते समय कहने वाली की मुखमुद्रा, उस के नेत्रों की चंचलता, गोपनीय हंसी, इतराहट तो वे पकड़ ही नहीं पातीं.

बस, शब्दों के जाल में उलझ पति का साथ परेशानी देगा सोच घबरा जाती हैं. ब्याह के संदर्भ में कपड़े, जेवर, घूमनाफिरना आदि तो उन्हें लुभाता है, पर पति से एकांत में पड़ने वाला वास्ता आशंकित करता रहता है. परिणामस्वरूप सैक्स की आधीअधूरी जानकारी भय के कारण उन्हें या तो इस खेल का भरपूर सुख नहीं लेने देती या फिर ब्याह के बाद तुरंत गर्भधारण कर लेने से तबीयत में गिरावट के कारण सैक्स को हौआ मानने लगती हैं.

सैक्स दांपत्य का आधार

सैक्स दांपत्य का आधार है. पर यह यदि मजबूरीवश निभाया जा रहा हो तो सिवा बलात्कार के और कुछ नहीं है और जबरन की यह क्रिया न तो पति को तृप्त कर पाती है और न ही पत्नी को. पत्नी पति को किसी हिंसक पशु सा मान निरीह बनी मन ही मन छटपटाती है. उधर पति भी पत्नी का मात्र तन भोग पाता है. मन नहीं जीत पाता. वास्तव में यह सुख तन के माध्यम से मन की तृप्ति का है. यदि तन की भूख के साथ मन की प्यासी चाहत का गठबंधन न हो तब सिर्फ शरीर भोगा जाता है जो मन पर तनाव, खीज और अपराधभाव लाद दांपत्य में असंतोष के बीज बोता है.

सिर्फ काम नहीं, बल्कि कामतृप्ति ही सुखी, सुदीर्घ दांपत्य का सेतु है. यह समझना बेहद जरूरी है कि पति के संग शारीरिक मिलन न तो शर्मनाक है न ही कोई गंदा काम. विवाह का अर्थ ही वह सामाजिक स्वीकृति है जिस में स्त्रीपुरुष एकसूत्र में बंध यह वादा करते हैं कि वे एकदूसरे के पूरक बन अपने तनमन को संतुष्ट रख कर वंशवृद्धि भी करेंगे व सफल दांपत्य भी निबाहेंगे. यह बात विशेषतौर पर जान लेने की है कि कामतृप्ति तभी मिलती है जब पतिपत्नी प्रेम की ऊर्जा से भरे हों.

यह वह अनुकूल स्थिति है जब मन पर कोई मजबूरी लदी नहीं होती और तन उन्मुक्त होता है. विवाह का मर्म है अपने साथी के प्रति लगाव, चाहत और विश्वास का प्रदर्शन करना. सैक्स यदि मन से स्वीकारा जाए, बोझ समझ निर्वाह न किया जाए तभी आनंद देता है. सैक्स पुरुष के लिए विशेष महत्त्व रखता है.

पौरुष का अपमान

पत्नियों को इस बात को गंभीरता से समझ लेना चाहिए कि पति यौन तिरस्कार नहीं सह पाते हैं, क्योंकि पत्नी का ऐसा व्यवहार उन्हें अपने पौरुष का अपमान प्रतीत होता है. पति खुद को शारीरिक व भावनात्मक माध्यम के रूप में प्रस्तुत करे तो वह स्पष्ट प्यार से एक ही बात कहना चाहता है कि उसे स्वीकार लो. यह पति की संवेदनशीलता है जिसे पहचान पाने वाली पत्नियां ही पतिप्रिया बन सुख व आनंद के सागर में गोते लगा तमाम भौतिक सुखसाधन तो भोगती ही हैं, पति के दिल पर भी राज करती हैं.

कितनी आश्चर्यजनक बात है कि सैक्स तो सभी दंपती करते हैं, लेकिन वे थोड़े से ही होते हैं जिन्हें हर बार चरमसुख की अनुभूति होती. आज की मशीनी जिंदगी में और यौन संबंधी भ्रामक धारणाओं ने समागम को एकतरफा कृत्य बना दिया है. पुरुष के लिए आमतौर पर यह तनाव से मुक्ति का साधन है, कुछ उत्तेजित क्षणों को जी लेने का तरीका है. उसे अपने स्खलन के सुख तक ही इस कार्य की सीमा नजर आती है पर सच तो यह है कि वह यौन समागम के उस वास्तविक सुख से स्वयं भी वंचित रह जाता है जिसे चरमआनंद कहा जा सकता है. अनिवार्य दैनिक कार्यों की तरह किया गया अथवा मशीनी तरीके से किया गया सैक्स चरमसुख तक नहीं ले जाता.

इस के लिए चाहिए आह्लादपूर्ण वातावरण, सुरक्षित व सुरुचिपूर्ण स्थान और दोनों पक्षों की एक हो जाने की इच्छा. यह अनूठा सुख संतोषप्रद समागम के बाद ही अनुभव किया जा सकता है. तब ऐसा लगता है कि कभी ये क्षण समाप्त न हों. तब कोई भी तेजी बर्बरता नहीं लगती, बल्कि मन करता है कि इन क्षणों को और जिएं, बारबार जीएं. जीवन का यह चरमआनंद कोई भी दंपती प्राप्त कर सकता है, लेकिन तभी जब दोनों की सुख के आदानप्रदान की तीव्र इच्छा हो.

मैं इंटर कास्ट मैरिज करना चाहता हूं पर मेरे घरवाले राजी नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 20 साल का हिंदू लड़का हूं और एक मुसलिम लड़की से प्यार करता हूं. हम दोनों शादी करना चाहते हैं, मगर मेरे घर वाले राजी नहीं हैं. मुझे क्या करना चाहिए?

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जवाब

अभी आप की शादी करने की उम्र नहीं है और दूसरे धर्म में शादी करने में तमाम तरह की दिक्कतें आती हैं. बेहतर होगा कि आप उस लड़की का खयाल दिमाग से निकाल कर अपने कैरियर पर ध्यान दें.

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एक लड़का जबरदस्ती मुझसे शादी करना चाहता है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 18 साल की एक लड़की हूं और पढ़ाई में बहुत अच्छी हूं. पिछले एक साल से एक लड़का मेरे पीछे पड़ा है और बोलता है कि मुझ से शादी करेगा. मुझे उस लड़के में कोई बुराई नहीं दिखती, पर मुझे अभी प्यार के चक्कर में नहीं पड़ना है, जबकि वह लड़का बहुत उतावला दिखता है और रोज मेरा सड़क पर पीछा करता है. इस से मुझे बहुत गुस्सा आता है. मैं क्या करूं?

जवाब

तो आप चाहती हैं कि लड़का पीछा भी न करे और प्यार भी घर बैठे जताता रहे. यह उस के लिए मुश्किल काम है. इस उम्र के प्यार में सब्र नहीं होता, बल्कि उतावलापन ही होता है. अगर वह लड़का आप को अच्छा लगता है, तो उस से अपनी फीलिंग्स शेयर करें और उस का मन टटोलें कि कहीं उस की और उस के प्यार की मंजिल सैक्स ही तो नहीं है. अगर वह आप को चाहता होगा, तो आप की भावनाओं को सम झेगा.

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शादी का फैसला 2-3 साल बाद इतमीनान से लें. इस पर भी लड़का पीछा करना न छोड़े और ज्यादा परेशान करने लगे, तो घर के बड़ों को बताएं. वे आप की परेशानी हल कर सकते हैं.

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मैं अपने बॉयफ्रेंड से शादी करना चाहती हूं पर मेरे घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 20 साल है और एक कंपनी में काम करती हूं. मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. वह भी मुझे बेहद चाहता है. मगर समस्या यह है कि मैं उच्च जाति की हूं और लड़का पिछड़ी जाति का घर वाले इस रिश्ते के लिए शायद ही तैयार हों. कृपया उचित सलाह दें?

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जवाब

आज के समय में अंतर्जातीय विवाह आम हैं. समाज का बड़ा वर्ग अब संकीर्ण विचारधारा से बाहर निकल कर ऐसे रिश्तों को अपना रहा है. जातिप्रथा, ऊंचनीच आदि सब बेकार की बातें हैं. बेहतर होगा कि आप अपने घर में
बातचीत चलाएं और मन की बात घर वालों को खुल कर बताएं. अगर वे नहीं मानते तो कोर्ट मैरिज कर सकती हैं.

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लड़के की उम्र अगर 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल हो तो उन्हें आपसी रजामंदी से शादी करने से कोई नहीं रोक सकता.

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किस काम का हिंदू विवाह कानून

उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में प्रवीण व नीलम का विवाह 1998 में हुआ जब नीलम 18 साल की थी. दोनों को एक बेटी भी हुई. फिर दोनों के बीच मतभेद खड़े हो गए और वे अलगअलग रहने लगे. तब 2009 में पति ने तलाक का मुकदमा पारिवारिक अदालत में डाला. होना तो यह चाहिए था कि पत्नी की जो भी वजहें रही हों, पति और पत्नी को जबरन ढोए जा रहे संबंधों से कानूनी मुक्ति दिला दी जानी चाहिए थी पर पारिवारिक अदालत ने ऐप्लिकेशन रद्द कर दी.

चूंकि साथ रहना संभव न था, इसलिए पति ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया. जिला अदालत ने 3 साल इंतजार करा कर 2012 में तलाक मंजूर करने से इनकार कर दिया. नीलम अब 32 साल की हो चुकी थी.

प्रवीण उच्च न्यायालय पहुंचा. उच्च न्यायालय ने मई, 2013 में तलाक नामंजूर कर दिया, जबकि मामला शुरू हुए 15 साल गुजर चुके थे. दोनों जवानी भूल चुके थे.

प्रवीण अब सुप्रीम कोर्ट आया. समझौता वार्त्ता के दौरान प्रवीण ने क्व10 लाख पत्नी को देने की पेशकश की और क्व3 लाख का फिक्स्ड डिपौजिट करने का प्रस्ताव रखा, पर यह करतेकराते सुप्रीम कोर्ट में 6 साल लग गए.

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इस दौरान दोनों पक्षों ने कई मुकदमे शुरू कर दिए. 2009 में गुजारेभत्ते के लिए क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के अंतर्गत जिला अदालत इटावा में एक मुकदमा दायर किया गया. 2009 में ही घरेलू हिंसा का एक और मुकदमा नीलम ने इटावा में दायर किया. एक दहेज के बारे में 2002 में केस दायर किया गया था. एक मामला इटावा में ही इंडियन पीनल कोड की धारा 406 में अमानत में खयानत यानी ब्रीच औफ ट्रस्ट पर दायर किया गया था.

यहां तक कि पति के खिलाफ डकैती तक का मामला दायर किया गया था कि वह 5 जनों के साथ घर लूटने आया था.

आंतरिक विवाद जो भी हों विवाह के मामले में इतनी मुकदमेबाजी आज आम हो गई है और इस में पिसती औरत ही है.

18 साल की लड़की, जिस की शादी 1998 में हुई हो, न जाने कितने सपने ले कर ससुराल आई होगी पर जो भी मतभेद हों, वे अगर हल नहीं होते तो अलग हो कर चाहे तलाकशुदा का तमगा लगाए घूमना पड़े पर 20 साल अदालतों के चक्कर तो नहीं लगाने पड़ने चाहिए.

लाखों की वकीलों की फीस के बदले क्व13 लाख मिले पर क्या ये काफी हैं? क्या यह जवानी की अल्हड़ता फिर आएगी जब बेटी खुद शादी के लायक हो रही है?

यह हिंदू विवाह कानून किस काम का जो औरतों को 20-30 साल इंतजार कराए और बिना तलाक के रखे? यह आतंक तीन तलाक से कम नहीं है, लेकिन हिंदू धर्माधीश इसे सिर पर पगड़ी और माथे पर तिलक मान कर चल रहे हैं.

औरतें उन के पैरों की जूतियां हैं, जो चरणामृत पीती हैं. विवाह तो धर्म के दुकानदारों के हिसाब से संस्कार है. कुंडलियां मिला कर होने वाला विवाह जिस में लड़की की रजामंदी नहीं ली जाती पहले सुधार मांगती है. मुसलिम औरतें कम से कम दासी नहीं हैं, यह निर्णय तो यही कहता है.

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सामाजिक दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन धार्मिक कथाएं किस तरह दिमाग खराब करती हैं और किस तरह औरतों के अत्याचारों के लिए जिम्मेदार हैं, यह रामायण और महाभारत से साफ है. हजारों औरतों को देशभर में अपने पाकसाफ होने के सुबूत में हाथपैर जलाने पड़ते हैं. पति अगर आरोप लगा दे कि पत्नी की किसी से आशनाई चल रही है तो राम और सीता के प्रसंग का लाभ उठा कर घरवाले ही नहीं, बल्कि पूरा समाज औरत को अग्नि परीक्षा सी देने को मजबूर करता है, जिस में स्वाभाविक है वह दोषी पाई जाती है और सदा के लिए बदनाम हो जाती है.

इसी तरह युधिष्ठिर द्वारा द्रौपदी को जुए में हारने की कहानी इतनी बार कही जाती है कि आम लोगों में इसे सही मान कर अपनी पत्नी को दांव पर लगाने का हक सा मिल गया है. रामसीता के प्रदेश उत्तर प्रदेश में जौनपुर में एक पति ने एक बार नहीं 2 बार अपनी पत्नी को जुए में दांव पर लगा दिया और हार गया.

जाफराबाद में पुलिस स्टेशन में जुलाई 2019 में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार एक नशेड़ी व जुआरी पति ने 2 दोस्तों के साथ जुआ खेलते हुए सबकुछ हार कर अपनी पत्नी को ही दांव पर लगा दिया. शायद उस के मन में बैठा होगा कि हारने पर कोई कृष्ण उस की पत्नी को भी बचा ही लेगा. अफसोस वह हार गया और दोनों दोस्तों ने उस की पत्नी का रेप किया, पति की इच्छा के हिसाब से.

नाराज पत्नी के पास घर छोड़ने के अलावा कोई चारा न था, क्योंकि पति ने तो धर्मनिष्ठ काम किया था, जो शायद स्वयं पत्नी की निगाह में अपराध न था. उस ने पहली बार न पुलिस में शिकायत की, न तलाक मांगा. वह घर छोड़ गई तो पति माफी मांगता पहुंचा. बेचारी हिंदू औरत उसे लौटना पड़ा, समाज का दबाव जो था. पति ने तो धर्म की मुहर लगा काम ही किया था न.

पति के सिर पर तो धर्म का भूत सवार था कि पत्नी उस की मिल्कीयत है, हाथ की घड़ी, पैरों के जूतों की तरह. उस ने उसे फिर धर्मराज युधिष्ठिर बन कर दांव पर लगा दिया. इस बार द्रौपदी नाराज हो गई. कोई कृष्ण नहीं आया बचाने के लिए तो पुलिस स्टेशन पहुंची.

अभियुक्तों को पकड़ लिया पर आगे होगा क्या? कुछ नहीं. औरत को झख मार कर लौटना पड़ेगा.

रामायण, महाभारत का नाम ले कर तो कहानियां रातदिन इतनी बार दोहराईर् जाती हैं कि औरतों को अपना पूरा जीवन सेवा और हुक्म मानने के लिए तैयार रहना पड़ता है. जब तलाक मांगो तब अदालतें भी नहीं देतीं. उन के दिमाग में भी बैठा है कि पति के बिना पत्नी कमजोर, असहाय है. इस सामाजिक दुर्दशा के लिए भाजपा सरकार तो कुछ न करेगी. औरतों को खुद ही आगे आना होगा पर वे आएंगी तो तब न जब उन्हें पूजापाठ, व्रतों, संतों की सेवा, तीर्थयात्राओं, जलाभिषेकों, मूर्तिपूजाओं से फुरसत मिले.

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बिजली मुफ्त औरतें मुक्त

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल का 2 बत्ती, 1 टीवी, 1 पंखा, 1 फ्रिज, 1 कूलर, 1 कंप्यूटर के लायक 200 यूनिट तक की बिजली मुफ्त करने का फैसला चतुराईभरा है. 200 यूनिट तक का बिल अब माफ कर दिया गया है. शहर के

45 लाख उपभोक्ताओं को इस से लाभ होगा और बिजली का बिल भुगतान न होने के कारण बिजली इंस्पैक्टरों की धौंस का सामना नहीं करना पड़ेगा.

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से वैसे भी 33% घरों में 200 यूनिट से कम बिजली खर्च होती है. अब तक लोग 200 यूनिट के क्व600-700 देते थे. इस से पहले खर्च क्व1,200 था जिस की खपत ज्यादा है, वे पक्की बात है कि अब कम बत्ती का इस्तेमाल कर के 200 यूनिट के नीचे रहना चाहेंगे. सब से बड़ी बात यह है जब बत्ती मुफ्त मिल रही है तो घर के सामने खुले तारों पर कांटा डाल कर बत्ती जलाने की आदत भी खत्म हो जाएगी.

इस पर खर्च क्व1,400 करोड़ तक आ सकता है पर 60,000 करोड़ के बजट में यह कोई खास नहीं. खासतौर पर तब जब सरकार को कम बिल भेजने पड़ेंगे. एक बिल छापने, भेजने, पैसा वसूल करने में ही 50 से 100 रुपए लग जाना मामूली बात है. बिजली दफ्तर जा कर बिल जमा कराने में शहरी गरीब जनता को न जाने कितना खर्च करना पड़ता है.

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जब सरकार जगहजगह वाईफाई फ्री कर ही रही है कि लोग मोबाइलों का इस्तेमाल कर के हर समय सरकार के फंदे में रहें तो गरीबों को यह छूट देना गलत नहीं है. गरीब औरतों के लिए यह वरदान है कि अब उन की बिजली कटेगी नहीं और वे न रातभर खुले में सोने को मजबूर होंगी और न उन के बच्चे रातभर पढ़ने से रह जाएंगे.

सरकारें बहुत पैसा वैसे भी जनहित के कामों के लिए खर्च करती हैं. हर शहर में पार्क बनते हैं पर पार्क में जाने के लिए पैसे नहीं लिए जाते. सड़कें, गलियां बनती हैं जिन पर चलने की फीस नहीं ली जाती. सस्ते सरकारी स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय हैं जहां बहुत कम पैसों में पढ़ाई होती है. बहुत अस्पतालों में तामझाम का पैसा न ले कर इलाज होता है.

जो लोग इसे टैक्सपेयर की जेब पर डाका मान रहे हैं यह भूल रहे हैं कि उन के अपने कर्मचारी अब ज्यादा सुरक्षित, सुखी और प्रोडक्टिव हो जाएंगे, क्योंकि वे अंधेरे के खौफ में न रहेंगे.

जनहित काम केवल कांवड़ यात्रा का नहीं होता, पटेल की मूर्ति का नहीं होता, मन की बात का जबरन प्रसारण नहीं होता, बिजलीपानी भी जरूरी है. साफ हवा की तरह गरीब औरतों के लिए थोड़ी सी बिजली मुफ्त हो तो एतराज नहीं. यह उन्हें कटने के खौफ से मुक्त रखेगा.

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