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Bhojpuri Singer : भोजपुरी श्रोताओं के दिल की आवाज बन रहे भावुक के गीत

Bhojpuri Singer. भोजपुरी सिनेमा में जब अश्लीलता और फूहड़ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, ऐसे समय में मनोज भावुक के गीत यह साबित कर रहे हैं कि भोजपुरी गीत-संगीत की असली पहचान अभी भी जीवित है. उनके गीत मनोरंजन के साथ-साथ संवेदना, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को भी अभिव्यक्ति देते हैं. यही कारण है कि उनके गीत सीधे श्रोताओं के दिल तक पहुंचते हैं.

इन गीतों से मिली एक अलग पहचान

हाल ही में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म ‘गरीब बेटी के अमीर ससुराल’ में मनोज भावुक ने 2 महत्वपूर्ण गीत लिखे हैं. इनमें एक फिल्म का शीर्षक गीत है और दूसरा एक बेहद मधुर रोमांटिक गीत. विशेष बात यह है कि यह प्रेमगीत पारंपरिक प्रेमी-प्रेमिका के रिश्ते पर नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच मौजूद विश्वास, समर्पण और आत्मीय प्रेम को अभिव्यक्त करता है. गीत की पंक्तियां हैं :

‘जइसे नयना के संगे रहे निंदिया,
जइसे निंदिया के संगे सपनवा रहे,
ओइसही हमरा दिलवा के धड़कन में हो,
सांस बनके हमेशा सजनवा रहे…’

आगे गीत में प्रेम की गहराई और आत्मिक जुड़ाव को स्वर मिलता है :

‘रूह में उतरल बाड़ू तू अब, कइसे छूटी हाथ हो…’

और फिर प्रेम की सुंदरतम व्याख्या सामने आती है :

‘दिलवे के सुंदरता सजना हो सबके,
नेह के डोर में बांधे,
रंगवा आ रूपवा, सीरत आ सूरत,
सब फींका एकरा आगे.
जइसे राम-सिया जी के जोड़ी रहे,
जइसे राधा-किसन के लगनवा रहे,
ओइसही हमरा दिलवा के धड़कन में हो,
सांस बनके हमेशा सजनवा रहे…’

यह गीत दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

फिल्म का शीर्षक गीत भी अपनी मार्मिकता के कारण विशेष चर्चा में है. यह गीत उस गरीब बेटी की व्यथा को सामने लाता है, जो अमीर ससुराल में अपमान और उपेक्षा सहने के बाद मायके लौटने को विवश हो जाती है. गीत की पंक्तियां हैं :

‘रोजे-रोजे ताना, रोजे-रोजे ओरहन हो,
केहू नाहीं पढ़ेला ए दुखिया के मन हो,
जइसे सोनवा के पिंजरा में चिरई के हाल, ओइसे गरीब बेटी के अमीर ससुराल…’

गीत का भावपूर्ण अंतरा श्रोताओं को भीतर तक उद्वेलित कर देता है :

‘बेटी के रस्ता ह नइहर से ससुरा,
हम चलनी ससुरा से नइहर के राहे,
रीती बा बदलल कि फूटल बा भगिया,
कि आइल समइया बा हमरा के थाहे,
किस्मत बा कइले हमार पगली के हाल,
हाय रे… गरीब बेटी के अमीर ससुराल…’

ऋचा दीक्षित और ओम झा ने बनाया खास

फिल्म में इन गीतों को लोकप्रिय अभिनेत्री ऋचा दीक्षित पर फिल्माया गया है. चर्चित संगीतकार ओम झा ने अपने मधुर संगीत से गीतों को और प्रभावशाली बनाया है. फिल्म के निर्माता संदीप सिंह और रामा प्रसाद हैं, जबकि निर्देशन अजय कुमार झा ने किया है.

मनोज भावुक को मिले सम्मान

मनोज भावुक को वर्ष 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ के गीतों के लिए व्यापक प्रशंसा मिली थी. वहीं फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के गीतों के लिए उन्हें बेस्ट लिरिसिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

इसके अलावा साल 2025 के लिए उन्हें बेस्ट गीतकार के लिए पटना में हुए सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

गीत-सृजन के साथ-साथ मनोज भावुक कई चर्चित पुस्तकों के लेखक भी हैं. भोजपुरी सिनेमा पर लिखी उनकी पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ को विशेष सराहना प्राप्त हुई है. उन्हें फिल्मफेयर, फेमिना, दिल्ली प्रेस, भारतीय भाषा परिषद सम्मान, भोजपुरी भाषा शिखर सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है.

गीतों के लिंक :

Bhojpuri Cine Awards 2025: मनोज भावुक को मिला बैस्ट राइटर अवार्ड

Bhojpuri Cine Awards 2025: इस साल ‘छठे सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स’ शो में एक ऐसी नई कैटेगरी शामिल की गई थी, जो अपनेआप में खास थी. यह कैटेगरी थी साल 2024 में प्रकाशित भोजपुरी सिनेमा के अब तक के इतिहास पर आधारित बुक के लिए बैस्ट राइटर का अवार्ड.

अभी तक भोजपुरी सिनेमा को ले कर जितने भी अवार्ड शो होते रहे हैं, वे इस कैटेगरी से अछूते रहे हैं. पहली बार भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार को सम्मानित किया गया.

क्यों खास है यह पुस्तक अवार्ड ग्रहण करने के बाद मनोज भावुक ने कहा कि यह किताब उन के 30 वर्षों की मेहनत का फल है. उन्होंने आडियंस को पुस्तक दिखाते हुए बताया कि वे साल 1995 से ही भोजपुरी सिनेमा पर लगातार लिख रहे हैं. यह भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर भोजपुरी भाषा में पहली किताब है. इस किताब में वर्ष 1931 से ले कर अब तक के भोजपुरी सिनेमा के सफर का बहुत ही बारीकी से वर्णन किया गया है.

वर्ष 1962 में भोजपुरी की पहली फिल्म ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो’ आई थी. उस के पहले 1931 से 1962 तक हिंदी सिनेमा में संवाद और गीतों के जरीए भोजपुरी भाषा कैसे अपना परचम लहराती रही, इस के रोचक किस्से भी इस पुस्तक में हैं.

अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, राकेश पांडेय, कुणाल सिंह, रवि किशन और मनोज तिवारी जैसी सिनेमा हस्तियों के साक्षात्कार शामिल हैं, भोजपुरी सिनेमा की चुनौतियों, संभावनाओं, बिजनैस और भविष्य पर खुल कर लिखा गया है. साथ ही ओटीटी, भोजपुरी वैब सीरीज, टैलीफिल्म, सीरियल पर भी प्रकाश डाला गया है.

मैथिलीभोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित 405 पन्नों की इस पुस्तक में अलगअलग फिल्मों की शूटिंग के अनेक रोचक प्रसंग भी शामिल हैं. इस पुस्तक में भोजपुरी सिनेमा के सफर को 3 खंडों में बांटा गया है.

पहले खंड में वर्ष 1931 से वर्ष 2000 के कालखंड में फिल्मी दुनिया में भोजपुरी के प्रवेश की कहानी, पहली फिल्म के निर्माण की कहानी, भोजपुरी सिनेमा के भीष्म पितामह नाजिर हुसैन का दुर्लभ लेख, उस दौर के प्रतिमान, गीत व कथापटकथा के साथ कुछ खास साक्षात्कार भी शामिल हैं.

दूसरे खंड में वर्ष 2001 से वर्ष 2019 तक के सफर का बारीकी से वर्णन है. इस दौर के नायकनायिका, गीतकारसंगीतकार, निर्मातानिर्देशक व क्रिएटिव टीम के परिचय व योगदान के साथ बदलते सिनेमा, भूतल से रसातल तक जाते सिनेमा, चेतावनी और चुनौती पर खुल कर विमर्श है.

तीसरा खंड विविधा का है जिस में सिनेमा के विभिन्न आयामों पर चर्चा है. लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी के भोजपुरी गीतों पर रोचक आलेख हैं. भोजपुरी सिनेमा, राजनीति और चुनाव का भी जिक्र है.

गौरतलब है कि मनोज भावुक को फिल्मफेयर व फेमिना द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन जिस पुस्तक के लिए उन्होंने 30 साल गहन शोध किया, जिस पुस्तक को भोजपुरी सिनेमा के महानायक कुणाल सिंह ‘भोजपुरी सिनेमा की रामायण’ कहते हैं, उस के लिए वे पहली बार सम्मानित हुए हैं.

कौन हैं मनोज भावुक

मनोज भावुक भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार, संपादक, सुप्रसिद्ध कविगीतकार, टीवी पत्रकार और भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं. लगभग एक दशक तक अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम में बतौर इंजीनियर सेवा देने के बाद मनोज पूरी तरह मीडिया से जुड़ गए और अनेक चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम किया. वे सारेगामापा (रीजनल) के प्रोजैक्ट हैड रहे हैं साथ ही कई पुस्तकों के प्रणेता हैं. वे एक सफल टीवी एंकर और अंतर्राष्ट्रीय मंच संचालक भी हैं. उन्होंने कई फिल्मों और धारावाहिकों में अभिनय किया है. कई फिल्मों में गीत भी लिखे हैं.

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