सोशल साइट्स पर कैसा हो रंगढंग

Society News in Hindi: सोशल नैटवर्किंग साइट्स ने कुछकुछ नहीं, बहुत कुछ बदल दिया है. तकनीक के जमाने में नैटवर्किंग की तमाम सोशल साइट्स हैं, जैसे फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम आदि. इन सब से हम ऐक्टिव अकाउंट द्वारा जुड़ सकते हैं. जहां एक ओर इन के कई फायदे हैं, वहीं सब से बड़ा नुकसान नैगेटिव पौपुलैरिटी का है यानी बिना जानेसमझे सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर सक्रियता आप पर बुराई का ठप्पा चस्पां सकती है. इसलिए आप को बता दें कि सिर्फ अकाउंट बनाना ही पर्याप्त नहीं है. नैगेटिव पौपुलैरिटी या बैड टैग का ठप्पा न लगे इस के लिए कुछ बेसिक मैनर्स को अपनाना पड़ता है.

प्राइवेसी मजबूत हो

किसी भी सोशल नैटवर्किंग साइट पर अकाउंट बनाएं, लेकिन अपनी प्राइवेसी मेंटेन करते रहें. ताकि कोई अनजान व्यक्ति आप के अकाउंट में ताकाझांकी न कर पाए. इस से बचने का उपाय है कि आप प्राइवेट अकाउंट और अपना पासवर्ड कठिन रखें. महीने में एक बार जरूर पासवर्ड बदलें, पासवर्ड किसी से शेयर न करें.

हेराफेरी न हो

यदि सोशल साइट्स पर आप के परिचित आप से जुड़े हैं, तो डींगे मत हांकिए, सही और सटीक जानकारी अपने प्रोफाइल में अपडेट करें. पब्लिक डिस्प्ले में क्या रखना है, क्या नहीं, यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है. प्रोफाइल फोटो से परहेज न करें. ऐसा करने से नैटवर्क से जुड़े लोग आप को करीब पाएंगे.

 

पर्सनल अलग, प्रोफैशनल अलग

सोशल नैटवर्किंग साइट्स फायदेमंद साबित हों, तो पर्सनल और प्रोफैशनल अकाउंट रखें वरना एक ही अकाउंट रखने से सब गुड़गोबर हो जाएगा. कई बार एक ही अकाउंट की वजह से हम जरूरी जानकारियों से अछूते रह जाते हैं और पर्सनल व प्रोफैशनल लाइफ में अंतर तथा सामंजस्य नहीं बिठा पाते.

संभल कर करें फोटो शेयर

सोशल नैटवर्किंग साइट्स ने फोटो अपलोड की सुविधा दे कर यादों को संजोना आसान कर दिया है. मौका चाहे त्योहार का हो या दोस्तों के साथ मस्ती करने का या फिर अपनों के साथ सैरसपाटे या फिल्म देखने का, हम हर मौके को कैमरे में कैद कर सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर अपलोड कर सकते हैं. यहां तक तो सब ठीक है यदि फोटो सिर्फ आप की हैं, लेकिन मामला तब गड़बड़ा जाता है जब आप दूसरे का फोटो बिना उस से पूछे टैग या अपलोड करते हैं. याद रखें आप की इस छोटी सी हरकत से रिश्ते में दरार आ सकती है. कई लोगों को अपनी फोटो सार्वजनिक करना पसंद नहीं होता, इसलिए फोटो शेयर, टैग या अपलोड करने से पहले उस व्यक्ति की अनुमति जरूर लें.

संभल कर करें कमैंट

कम्युनिकेशन का बैस्ट औप्शन है सोशल साइट्स में कमैंट का औप्शन. पर्सनल और प्रोफैशनल अकाउंट में कमैंट ध्यान से करें. आपत्तिजनक शब्दों और अश्लील भाषा का प्रयोग कतई न करें. कमैंट लिखने के बाद दोबारा जरूर पढ़ें. यदि कुछ पर्सनल लिखना हो, तो मैसेजबौक्स का प्रयोग करें.

आंख बंद कर हामी न भरें

फ्रैंड रिक्वैस्ट की लाइन देख कर खुश न हों. भोलीभाली शक्ल में कोई शैतान छिपा हो सकता है. सोशल नैटवर्किंग साइट्स में हम काफी हद तक बच सकते हैं. मसलन, आंख बंद कर हर रिक्वैस्ट पर हामी न भरें. रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट करने से पहले उस व्यक्ति का अकाउंट अच्छी तरह देख लें. सोचसमझ कर ही फैसला लें. जिन्हें आप जानते हैं उन्हें ही फ्रैंड लिस्ट में शामिल करें. यदि कोई बारबार फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजे जिसे आप जानते नहीं, तो उस रिक्वैस्ट को स्पैम में डाल दें.

सब की अलग पसंद

यदि आप को सोशल साइट्स पर कैंडी क्रश खेलना पसंद हो तो जरूरी नहीं आप के सभी वर्चुअल फ्रैंड्स को भी पसंद होगा. बेवजह दूसरों को ऐसे गेम्स खेलने की रिक्वैस्ट न भेजें.

फौलो हो सही प्रोफाइल

कुछ गलत नहीं यदि आप सैलिब्रिटी के प्रोफाइल को फौलो करते हैं, लेकिन सही प्रोफाइल को फौलो करें, सैलिब्रिटी के अधिकांश प्रोफाइल सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर फेक होते हैं. ओरिजनल की पहचान नीले रंग का मार्क है. जिस सैलिब्रिटी के प्रोफाइल के आगे नीले रंग का निशान हो वह ओरिजनल है. नीले मार्क वाले प्रोफाइल को ही फौलो करें.

बोर्डिंग स्कूल: ताक पर सुरक्षा और पढ़ाई

एक अच्छा महंगा वाला बोर्डिंग स्कूल लड़कियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. पैसे वाले बहुत से मातापिता यह सोच कर निश्चिंत हो जाते हैं कि उन्होंने जिस बोर्डिंग स्कूल में अपनी बेटी को भेजा है वह उसे पढ़ालिखा कर सक्षम भी बनाएगा और सुरक्षित भी रखेगा. वे ये दोनों चीजें पैसे से खरीदने की कोशिश करते हैं पर अफसोस यह है कि ये बोर्डिंग स्कूल एक साफ गटर से ज्यादा कुछ हो ही नहीं सकते.

जहां सिर्फ बहुत सी लड़कियां एकसाथ रहती हों वहां भी सुरक्षित और पढ़ने का माहौल होगा इस की कोई गारंटी नहीं है. उलटे वहां यही गारंटी है कि उद्दंड, टूटे हुए घरों की, मातापिता से दूर, प्यार की भूखी लड़कियां अपने बदन की जरूरतों को पूरा करने के लिए और ज्यादा खुली व निर्भय हो कर हर तरह के प्रयोग कर सकती हैं.

देहरादून के एक स्कूल में एक लड़की के साथ गैंगरेप और फिर स्कूल प्रबंधकों द्वारा घरेलू तरीकों से गर्भपात की कोशिश यह जताती है कि ये स्कूल कितने पिछड़े हैं. अच्छी बिल्डिंग, खेल का मैदान, बड़ा सारा मैस, हर हाथ में मोबाइल, कंप्यूटर, स्ट्रिक्ट डिसिप्लिन इस बात की गारंटी नहीं है कि लड़कियां साफसुथरी होंगी. वे तो ऐसी गंगा में हैं जो सीवर से भी ज्यादा गंदी है.

इस लड़की के साथ स्कूल के 4 लड़कों ने ही गैंगरेप किया और पिता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है. लड़की का गर्भपात कराने की कोशिश हो रही है. लड़कों की गिरफ्तारी हो गई है. पर क्या इस से कुछ सुधरेगा? यह मामला तो रोशनी में आ गया है पर ऐसा तो हर बोर्डिंग स्कूल में होगा, क्योंकि वहां लड़कियां हों या लड़के, उद्दंडों की ही चलती है. सीधे सहमे रहते हैं और ब्लैकमेल होते  रहते हैं. उद्दंड हर तरकीब सीख जाते हैं. लड़कियों में भी गैंग बन जाते हैं, लड़कों में भी. ड्रग्स, शराब, सिगरेट, सैक्स, शैतानी, परपीड़न स्कूली जीवन का हिस्सा बन जाता है. बोर्डिंग स्कूल का कोई स्टूडैंट इन से भाग भी नहीं सकता.

घरों में रहने वाले बच्चे

ज्यादा सुरक्षित हैं, नौकरों और आयाओं के सहारे पलने वाले भी. अकेले पिता के साथ बेटियां बोर्डिंगों से ज्यादा सुरक्षित रहेंगी. उन्हें हर समय मानसिक सुरक्षा मिलती रहेगी. दिन की परेशानी शाम को तो हल हो सकती है. बोर्डिंग स्कूल में तो शिकायत करने वाले को हकारत से देखा जाता है. वहां स्कूल हर तरह की शिकायत दूर कर ही नहीं सकते चाहे कितना पैसा हो. वार्डन या संगीसाथी अपनापन नहीं दे सकते.

महंगे बोर्डिंग स्कूलों का धंधा प्रचार के बल पर चल रहा है पर इस प्रचार में कुछ बच्चों के अच्छे अंक, आधुनिक उपकरणों से सजी लैब्स, बढि़या जिम, भव्य औडिटोरियम हैं. पर इन सब के पीछे स्टूडैंट्स की घुटन, मानसिक परेशानियां, भीड़ में अकेलापन, रातदिन के कमैंट्स को कैसे देखेंगे. प्रचार सही है पर उसी पर निर्भर न रहें.

देशभर में बोर्डिंग स्कूल जम कर खुल रहे हैं. यह बहुत ही गलत तरीका है. इस का पर्याय ढूंढ़ना होगा. शायद घरों के आसपास किसी अंकलआंटी के पास 8-10 लड़कों को दिनभर या कभीकभार रातभर या कुछ दिनों के लिए कुछ पैसा दे कर छोड़ना ज्यादा आसान होगा. बोर्डिंग स्कूल तो घरों के पलते साफ बच्चों को और टूटे, बीमार घरों से आने वालों को एकसाथ ही रखेंगे.

बच्चे किए हैं तो जिम्मेदारी निभाएं, यह बोझ नहीं इनवैस्टमैंट है जो जीवनभर काम आएगी.

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