हमारे यहां पढ़ाई के नाम पर जगहजगह धंधे चल रहे हैं. कुछ को छोड़ कर सारे छात्र सिर्फ जुगाड़बाजी में लगे रहते हैं. पढ़ने से ज्यादा गुंडई का राज है क्योंकि शिक्षक अपनी सहूलियतों को ले कर धरनेप्रदर्शन करते रहते हैं.