Hindi Story. फातिमा खुश थी. वह मां जो बनने वाली थी. लेकिन उसे एक ही परेशानी थी कि ससुराल में शौहर असगर केअलावा कोई और न था.
फातिमा को असगर से कभी कोई शिकायत नहीं हुई. वह सिलाई का अच्छा कारीगर था और उस काम से उस के घर की गाड़ी बड़े आराम से चल रही थी.
असगर का एक भाई मजहर था. जब तक मजहर शहर में रहा, तब तक लोग उस के नाम से कांपते रहे. जब फातिमा के अब्बा ने उस का निकाह असगर से करने की अम्मी से बात चलाई थी, तो वह कांप कर रह गई थी कि उसे एक गुंडे के घर जाना होगा.
‘‘बैठेबैठे सो गई क्या?’’
फातिमा चौंक गई. उसे पता भी नहीं चला कि कब असगर उस के पास आ कर बैठ गए थे.
‘‘ओह, आप आ गए. हाथमुंह धो लीजिए, मैं खाना लाती हूं,’’ कहती हुई फातिमा कमरे से चली गई.
जब वह खाना ले कर आई, असगर भी हाथमुंह धो कर आ चुके थे.
‘‘क्या तुम खाना नहीं खाओगी?’’ असगर ने पूछा. ‘‘मैं बाद में खा लूंगी… एक बात बताऊं?’’ फातिमा बोली.
‘‘फौरन बताओ, इस में पूछने की क्या बात है,’’ असगर बोले.
‘‘पहले आप खाना खा लीजिए, फिर बताऊंगी.’’
‘‘जैसी तुम्हारी इच्छा,’’ कहते हुए असगर खाना खाने लगे.
‘‘अब बताओ,’’ खाना खाने के बाद हाथ धोते हुए असगर बोले.
‘‘अब हमारे आंगन में मुन्ना…’’
‘‘मुबारक हो,’’ कहते हुए असगर ने फातिमा को अपनी बांहों में भर लिया.
‘‘अरेअरे छोड़ो, क्या करते हो, कोई देख लेगा,’’ फातिमा बोली.
‘‘डांटती क्यों हो? अब हम पापा बनने वाले हैं,’’ असगर के कहने के अंदाज पर फातिमा मुसकरा कर रह गई और अपना सिर उन के सीने पर टिका दिया.
‘‘लेकिन एक बात है… इस बच्चे के बाद हमें और बच्चे नहीं चाहिए. तुम औपरेशन करा लेना,’’ असगर बोले.
‘‘क्या…’’ ‘‘हां, हमें एक ही बच्चा चाहिए, जिस की हम ठीक से परवरिश तो कर लेंगे,’’ असगर ने कहा.
‘‘यह आप क्या कह रहे हैं? आप जानते हैं कि यह कितना बड़ा गुनाह…’’
‘‘क्या गुनाह है और क्या नहीं, यह मैं ज्यादा अच्छी तरह से जानता हूं, क्योंकि यह मु झ पर बीता है,’’ असगर धीरे से बोले.
‘‘खुदा की देन को आप रोकना चाहते हैं?’’ ‘‘10 बच्चे हों और चोरलफंगे हों या रिकशा खींचते घूमें, उस से अच्छा है कि एक बच्चा हो, जिस की हम ठीक से देखभाल तो कर सकें.’’
‘‘लेकिन…’’ ‘‘तुम्हें नहीं मालूम. ज्यादा बच्चों का जहर मेरी मां ने पीया था. मेरे घर से एकसाथ 6 जनाजे निकले थे,’’ असगर बोले.
‘‘क्या?’’ फातिमा हैरानी से बोली.
‘‘हां, मेरे अब्बा का काफी बड़ा कारोबार था. वे पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे, रोजे वगैरह रखते थे. अचानक अब्बा का चलता हुआ कारोबार फेल हो गया. वे यह झटका सहन नहीं कर सके और बीमार पड़ गए. उसी साल मेरी 7वीं बहिन ने जन्म लिया. अब्बू बीमार पड़े थे और आमदनी का कोई जरीया नहीं था. घर खर्च के लिए पहले जेवर बिके, फिर दूसरा सामान बिकना शुरू हुआ…’’
‘‘लेकिन इस में बच्चों का क्या कुसूर, यह तो किस्मत की बात थी,’’ फातिमा बोली.
‘‘कम बो झ हो तो हिम्मत कर के उठाया जा सकता है और कमरतोड़ बो झ किस्मत के सहारे छोड़ दिया जाता है. आमदनी बंद होने के चलते मेरी और मजहर की पढ़ाई बंद हो गई. मजहर गलत संगत में पड़ गया. मां ने घर में सिलाई शुरू की, लेकिन फिर भी भुखमरी नहीं खत्म हुई.’’
‘‘ओह…’’ फातिमा ने कहा.
‘‘मैं कैसे भूल सकता हूं, जब रोटी के एकएक टुकड़े के लिए मेरे छोटे भाईबहिन कुत्तों की तरह लड़ते थे. अब्बा एक दिन चल बसे. जीतेजी उन्होंने बेहिसाब दुख सहे थे. घर में हर समय हायतोबा मची रहती थी. अब्बा की मौत से उन का सहारा भी खत्म हो गया.’’
‘‘मजहर और आप तो तब सम झदार हो गए होंगे?’’ फातिमा बोली.
‘‘हां, कुछ दिन मजहर ने एक होटल में काम किया, जहां बातबात पर उसे बेइज्जत होना पड़ता था. उस ने नौकरी छोड़ दी और गुंडागर्दी शुरू कर दी,’’ असगर गहरी सांस छोड़ते हुए बोले.
‘‘मैं ने रिकशा चलाना शुरू किया. छोटी उम्र में बहुत मुश्किल काम था, फिर भी मैं जू झ रहा था और एक दिन बीमार हो गया.
‘‘3 दिन की भुखमरी ने सब को बेहाल कर दिया और मजबूर हो कर मैं उसी हालत में रिकशा ले कर चल दिया, लेकिन जल्दी ही पस्त हो गया.
‘‘तभी महल्ले के इमरान मियां ने खबर दी कि मेरी मां ने हमारे पांचों छोटे भाईबहिनों की गला दबा कर हत्या कर दी और खुद ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली. क्या बीती होगी मां पर, जब उन्होंने अपने हाथों से बच्चों का गला दबाया होगा,’’ असगर ने आगे कहा.
‘‘ओह…’’ फातिमा बोली. उस की आवाज कांप रही थी.
‘‘अगर हम 2 ही भाई होते, तो मां को खुदकुशी नहीं करनी पड़ती.
‘‘इसलिए यह सोचना हमारा काम है कि हम कितने बच्चों की परवरिश सही ढंग से कर सकते हैं,’’ असगर बोले. फातिमा चुप रही.
‘‘हम जैसे छोटे लोगों के लिए एक ही बच्चा काफी है, जिस की हम ठीक से परवरिश कर सकें. अगर रफीक मियां ने सहारा दे कर मुझे सिलाई न सिखाई होती, तो मैं भी गुंडा होता या भिखारी,’’ असगर बोले.
फातिमा की सम झ में अच्छी तरह आ चुका था कि उस के लिए एक ही औलाद ठीक है. Hindi Story
-साबिर हुसैन




