Relationship Story in Hindi. बिजनौर की अवंतिका की शादी मेरठ के पौश इलाके गंगानगर के रहने वाले रिटायर्ड जेलर दीपचंद्र सिंह चहल के बड़े बेटे राहुल से तय हुई तो वह खुशी से  झूम उठी. उस की ससुराल वालों का खूब नाम था. पैसे की कोई कमी न थी. बहुओं को सास का बड़ा डर सताता है, यहां तो सास ही नहीं थी. वे बहुत पहले इस दुनिया से कूच कर गई थीं. हां, उस का एक देवर जरूर था लेकिन उसे तो घर की बड़ी बहू बनने का मौका मिल रहा था.

जेलर दीपचंद्र का ज्यादातर समय जेल की कोठरियों को देख कर बीता था. उन की सोच अभी भी जेलर वाली ही थी. इस की  झलक उन के बड़े मकान में दिखाई पड़ती थी. उनके दुमंजिले मकान में जेल की कोठरियों की तरह कमरे ही कमरे थे. घर की मेन एंट्री पर एक बड़ा मजबूत सा लोहे का गेट लगा था. कोई अजनबी उस मकान में घुस जाए तो उसे भूलभुलैया ही सम झ बैठे. उन्होंने उस मकान में किराएदारों को भी ऐसे ही ठूंसठूंस कर रखा हुआ था जैसे जेल में कैदी. हर कमरे में किराएदार ही किराएदार.

जेलर दीपचंद्र ने वहीं बीच में एक औफिसनुमा कमरा बना रखा था जहां से वे पूरे मकान और किराएदारों पर नजर रखते थे. उसी कमरे में वे सुबह नाश्ता पानी करने के बाद बैठ जाया करते थे. किराएदारों वाला रजिस्टर चैक करते थे कि किस का किराया आया और किस का नहीं. वहीं पर वे अपने मेहमानों या दूसरे लोगों से मिला करते थे. सुबह और शाम को पूरे मकान का एक राउंड वे जरूर ही लगाया करते थे.

उन्होंने अपने दोनों बेटों राहुल और सागर को दवाओं के कारोबार में लगा रखा था. एक बड़ा मैडिकल स्टोर मेन रोड पर खुलवा रखा था. उन का बड़ा बेटा राहुल अल्ट्रामौडर्न था. दोस्तों के संग कौकटेल पार्टी, हुक्का पार्टी करना उस का शौक था. पैसे की कोई कमी थी नहीं इसलिए राहुल की मौजमस्ती में भी कोई कमी आड़े नहीं आती थी.

अवंतिका राहुल को पहली ही नजर में भा गई थी. दीपचंद्र का नाम इतना बड़ा था कि उन की शोहरत की आड़ में राहुल के सब ऐब ढक गए थे. जब किसी रिश्तेदार ने अवंतिका के पिता को इशारों ही इशारों में बताया था कि राहुल शराब पीता है तो उन्होंने तपाक से कहा, ‘‘अरे भाई, आजकल शराब कौन नहीं पीता? ये तो बड़े लोगों के शौक हुआ करते हैं.’’

लेकिन यह बात उन्होंने अवंतिका से जानबू झ कर छिपाई. उन्हें डर था कि उन की बेटी की शादी एक अमीर परिवार में हो रही है, राहुल के शराब पीने की बात पर कहीं कोई अड़चन पैदा न हो जाए.

अवंतिका और राहुल की शादी मेरठ के एक बड़े होटल में बड़ी धूमधाम के साथ हो गई. बड़ी नामीगिरामी हस्तियां इस शादी समारोह में शामिल हुईं. पुलिस महकमे के आला अफसर वरवधु को आशीर्वाद देने के लिए पधारे.

अवंतिका को तो अपनी इस शादी पर बड़ा गुमान हो रहा था कि उस का शादी समारोह कितने शानदार ढंग से हो रहा है.

लेकिन सुहागरात को ही अवंतिका के सपने तब चकनाचूर हो गए जब राहुल नशे की हालत में उस के पास पहुंचा. वह बहकीबहकी बातें कर रहा था और होशोहवास में नहीं था. वह तो उस की हालत को देख कर ही घबरा उठी. वह बैड के एक कोने में सिमट कर बैठ गई और वह नशेडि़यों की तरह हरकतें करता रहा और फिर बेसुध हो गया.

सुहागरात को ही अवंतिका के सारे अरमान ताश के पत्तों की तरह बिखर गए. हालांकि, नशा उतरते ही सुबह के समय राहुल ने उस से माफी मांग ली लेकिन अब माफी मांगने से कोई फायदा होने वाला नहीं था. एक लड़की जिस रात को अपनी जिंदगी की सब से खास रात मानती है, वह तो गुजर चुकी थी.

राहुल ने इस की भरपाई करने की बहुत कोशिश की. वह अवंतिका को एक लंबे टूर पर गोवा और अंदमान निकोबार द्वीप समूह ले कर गया. उस की हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश की. अवंतिका ने भी उसे दिल से माफ कर दिया और जीवन में मधुर रस घोलने की कोशिश की. कुछ खट्टेमीठे अनुभवों के साथ 2 साल गुजर गए और वह एक बेटी सान्वी की मां भी बन गई.

अवंतिका के कहने से राहुल ने शराब पीना कम तो कर दिया था, लेकिन बंद नहीं किया था. किसीकिसी दिन तो वह यारदोस्तों के संग इतनी पी लेता था कि उसे संभालना तक मुश्किल हो जाता था. तब अवंतिका को लगता था कि उस की जिंदगी नरक बन गई है.

कोई भी औरत अपने आदमी को बिस्तर पर कभी भी बेसुध देखना नहीं चाहती. उस की भी तो अपनी इच्छाएं होती हैं. एक ओर भरा बंधा यौवन और दूसरी ओर बेसुध पड़ा आदमी. दिनभर का रोमांटिक मूड पलभर में स्वाह. आखिर कौन औरत ऐसा चाहेगी?

लेकिन नशे की आदत कुत्ते की टेढ़ी दुम की तरह होती है. न दुम सीधी होती है और न ही नशा छूटता है. राहुल के साथ भी ऐसा ही था. आएदिन वह नशे की हालत में घर पहुंचता. उस का छोटा भाई सागर ही उसे उठा कर बिस्तर तक लाता. कभीकभी अवंतिका को भी नशे में चूर राहुल को उठाने में सागर की सहायता करनी पड़ती. उस समय सागर के हाथों का स्पर्श उसे अलग ही आनंद देता था.

एक दिन अवंतिका ने सागर से कहा, ‘‘देवरजी, ऐसा कब तक चलेगा? आप अपने भाई को शराब पीने से रोकते क्यों नहीं? इन्हें सम झाते क्यों नहीं?’’

‘‘भाभी, मैं तो बहुत मना करता हूं लेकिन भैया मानते ही नहीं. शाम होते ही इन पर न जाने कौन सा फुतूर सवार हो जाता है कि पिए बिना रहते ही नहीं.’’

‘‘देवरजी, ऐसे काम नहीं चलने वाला. कितनी ही रातें तुम्हारे भैया के चक्कर में मु झे जाग कर गुजारनी पड़ती हैं.’’

‘‘तो भाभी, आप जागती क्यों हो? सो जाया करो.’’

‘‘इन्हें इस हालत में छोड़ कर देवरजी, आप सम झो तो सही मु झे नींद ही कैसे आएगी?’’

धीरेधीरे इन बातों का दायरा बढ़ने लगा. अवंतिका को अपने देवर सागर से बातें करने में अजीब सा सुकून मिलता. इस सुकून का दायरा भी धीरेधीरे बढ़ कर बांहों की पनाह तक पहुंच गया. सागर का कमरा बराबर में ही था. जब राहुल बिस्तर पर नशे में चूर पड़ा होता था तब अवंतिका सागर की बांहों में असीम सुकून पा रही होती थी.

ससुर दीपचंद्र को जब इस की भनक लगी तो उन्होंने चुप रहना ही बेहतर सम झा. ये हालात देख कर उन्होंने अपने औफिस को ही अपना बैडरूम बना लिया. घर के अंदर आना कम से कम कर दिया मानो ऐसा कर के वे अवंतिका और सागर के संबंधों को अपनी मौन स्वीकृति दे रहे हों. अब वे अपना ज्यादातर समय वहीं गुजारने लगे.

राहुल को जब अवंतिका और सागर के संबंधों का पता चला तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई लेकिन वह क्या करे गलती खुद उस की थी. लेकिन कौन मर्द होगा जो अपनी पत्नी को दूसरों की बांहों में होने की बात सुन कर चुप रह जाए. वह तो अंदर ही अंदर सुलग रहा था और मौका मिलते ही भड़क उठा, ‘‘अवंतिका, ऐसा नीच काम कोई गिरी हुई औरत ही कर सकती है जो तुम कर रही हो.’’

अवंतिका भी इस लांछन को सुन कर चुप रहने वाली नहीं थी. वह भी फट पड़ी, ‘‘मु झे नीच औरत कहने में तो तुम्हें शर्म नहीं आती लेकिन ये हालात पैदा किस ने किए? रात में शराब के नशे में चूर बिस्तर पर आ कर पड़ जाते हो उस का क्या?’’

‘‘तो तुम यह सब करोगी क्या?’’

‘‘मैं ब्याहता हूं कोई संन्यासिनी नहीं. मेरे बदन को भी भूखप्यास लगती है. अगर नशे में ऐसे ही चूर रहना था तो शादी ही क्यों की?’’

ऐसा कह कर अवंतिका अपनी बिटिया सान्वी को ले कर किचन में चली गई और राहुल सिर पकड़ कर वहीं बैठ गया. इस बेवफाई से वह बुरी तरह टूट गया. अब तो वह अपना गम भुलाने के लिए कभी भी पीनी शुरू कर देता. न वह दिन देखता, न रात.

अब उस का मन किसी काम में भी नहीं लगता. सारी दुनिया उसे बेगानी सी लगती. हर समय वह अवंतिका को  झिड़कता रहता. उसे दुत्कारता रहता. न जाने क्याक्या बड़बड़ाता रहता. अवंतिका भी उस के प्रति ढीठ बन गई थी. उस ने राहुल की चिंता ही करनी छोड़ दी. वह जोकुछ भी कहता उसे वह एक कान से सुनती दूसरे से निकाल देती.

राहुल को लगता था जैसे उस के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया हो. उसे पता था कि घर में वह 24 घंटे अपनी पत्नी की निगरानी नहीं कर सकता. सागर की जगह कोई और होता तो शायद वह उसे गोली से ही उड़ा देता, लेकिन छोटे भाई पर वह गोली कैसे चलाए? उस पर गोली चलाने की बात सोच कर ही उस की रूह कांप जाती.

जिस भाई के साथ उस ने इतने साल इतने प्रेम से गुजारे, आज वह उस पर गोली चला कर उस की जान लेले… नहींनहीं, वह ऐसा नहीं कर सकता. इस से बेहतर तो यही है कि वह खुद अपनी जान देदे. अब उस के जीवन में हताशा और निराशा के सिवा कुछ नहीं बचा था.

दीपचंद्र सबकुछ जान कर भी अनजान बने हुए थे. वे घर की बात को घर में ही रखना चाहते थे. वे जानते थे कि ये हालात इतने खतरनाक और काबू से बाहर हो चुके हैं कि कभी भी कुछ भी हो सकता है.

उन्हें पता था कि राहुल ने अगर शराब पीनी नहीं छोड़ी तो अवंतिका अब कभी उस की नहीं हो सकेगी. राहुल के सामने यही बड़ी समस्या थी कि वह शराब के नशे का दास बन चुका था और दासत्व की बेडि़यों में जकड़ा आदमी कभी कुछ नहीं कर सकता.

दीपचंद्र सोचते बहुत थे, लेकिन करते कुछ नहीं थे. यहां तक कि उन्होंने अवंतिका से भी इस मसले पर कभी खुल कर बात नहीं की. वे तो सागर के लिए आने वाले रिश्तों को भी इसीलिए टालते रहे कि पता नहीं आगे क्या हो.

एक दिन राहुल ने अवंतिका और सागर को एक साथ देख लिया. वह उस समय भी नशे में था लेकिन उन दोनों को साथ देख कर उस का नशा काफूर हो गया. वह अपने ऊपर से कंट्रोल खो बैठा और घर में रखी लाइसैंसी बंदूक उठा लाया.

वह अवंतिका को गोली मारना चाहता था लेकिन सागर के बीच में आ जाने से उस का निशाना चूक गया. फिर भी कुछ छर्रे अवंतिका को लग ही गए.

सागर और दीपचंद्र अवंतिका को तुरंत अस्पताल ले कर गए जहां डाक्टरों ने कड़ी मशक्कत से उस के शरीर में घुसे छर्रों को निकाला. पुलिस केस भी दर्ज हुआ, लेकिन दीपचंद्र ने अपने असर और पैसे से केस ही बदलवा दिया.

अब केस यह बना कि अवंतिका घर की सफाई करते समय बंदूक को एक जगह से उठा कर दूसरी जगह रख रही थी तभी लापरवाही से बंदूक का ट्रिगर दब गया और गोली चल गई, जिस के कारण कुछ  छर्रे अवंतिका को लगे. इस तरह से पुलिस केस रफादफा हो गया.

लेकिन लोग इतने भोले नहीं थे. सच्चाई धीरेधीरे सब को पता चल रही थी. अवंतिका ने सबकुछ हिम्मत से सहन किया. वह अभी भी इस इंतजार में थी कि राहुल संभल जाए तो वह अपने देवर की शादी किसी और से करा दे, लेकिन वह इतनी होशियार भी थी कि अगर उस का पति नहीं सुधरता है तो वह देवर को अपना बना कर रखेगी और उस की शादी में अड़ंगे लगाएगी. किसी भी सूरत में वह उस की शादी नहीं होने देगी.

इस तरह से वह अपने जीवन को सुरक्षित रखेगी भले ही दुनिया कुछ भी कहे. वह सागर को अपने पति की तरह ट्रीट करने लगी थी. कोई क्या कह रहा था उस ने इस की चिंता करनी बंद कर दी थी.

राहुल ने जब से उन दोनों को साथ देखा था तब से वह और ज्यादा टूट गया था. वह खुद को संभाल नहीं पा रहा था. अब दुनिया में उस का एक ही सहारा था और वह थी शराब. अब वह हर समय नशे में डूबा रहता.

उस ने बाहर आनाजाना भी छोड़ दिया था. नशा उतरते ही उस की आंखों के सामने वही घातक दृश्य घूमने लगता जिस में उस ने अपनी पत्नी को सागर के साथ गलबहियां करते देखा था. यह उस के लिए असहनीय था. इस के बाद वह फिर से जाम पर जाम चढ़ाने लगता और अवंतिका को गंदीगंदी गालियां बकने लगता.

अवंतिका पर इन गालियों का रत्तीभर भी असर नहीं होता, बल्कि वह इन गालियों को सुन कर खुद को और मजबूत कर रही होती. उसे तो इस लाचार ओर शराबी आदमी पर तरस ही आता. उसे पता था कि वह शराब पीने और गालियां बकने के अलावा कुछ नहीं कर सकता.

दीपचंद्र ने इन हालात का आकलन कर के मन में बहुतकुछ सोच लिया था. इसी आधार पर वे न तो राहुल को कुछ सम झाते और न ही उसे डाक्टर के पास ले कर जाते. इस मामले में वे बिलकुल निष्क्रिय हो गए थे और अवंतिका के साथ मजबूती से खड़े थे. उन्हें पता था कि राहुल पूरी तरह से बरबाद हो चुका है और इस के लिए वह खुद जिम्मेदार है. उस का इस दुनिया में रहना न रहना बराबर है. इस के लिए उन्होंने अपने कलेजे पर पत्थर रख लिया था, आखिर बेटा तो वह उन्हीं का था.

ज्यादा शराब पीने के चलते आखिरकार राहुल का जिगर जवाब दे गया. अवंतिका और परिवार के दूसरे सदस्यों को इस का अंदाजा पहले से ही था. जब वे उसे अस्पताल ले कर गए तो वह मरने की हालत में पहुंच चुका था. उस का चैकअप कर डाक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए. घर पहुंचते ही वह मर गया. वह हड्डियों का ढांचा मात्र बचा था.

दिखाने के लिए सब रोए, लेकिन मन ही मन सब ने चैन की सांस ली कि एक मुसीबत टली. कुदरत ने आखिरकार अपना अनोखा फैसला कर ही दिया था. कमजोर को जाना है, मजबूत को जीवन का आनंद लेना है. प्रकृति की नजर में राहुल कमजोर साबित हुआ और अवंतिका मजबूत.

अब अवंतिका के लिए कोई रोकटोक नहीं थी. राहुल का जाना अवंतिका के लिए ही नहीं सब के लिए अंदरूनी खुशियां ले कर आया था. खराब और कमजोर किसी को बरदाश्त नहीं चाहे परिवार हो समाज हो या कुदरत. दुनिया में रहना तो काबिल बनना ही होगा. नकारा लोग खुद ब खुद हाशिए पर चले जाते हैं.

राहुल की तेरहवीं होते ही दीपचंद्र ने अवंतिका के मातापिता को बुला कर उन से बात की. अवंतिका और सागर से उन्होंने पहले ही बात कर ली थी. सब यही चाहते थे कि घर की दौलत और सम्मान के साथ घर में ही रहे.

दीपचंद्र ने सम झदारी दिखाते हुए एक सादा समारोह आयोजित कर के अवंतिका और सागर को शादी के बंधन में बांध दिया, लेकिन कोर्ट में कानूनी कार्यवाही करना वे नहीं भूले. उन की शादी का रजिस्ट्रेशन करवा कर सर्टिफिकेट हासिल किया जिस से भविष्य में कोई अड़चन न आए.

अवंतिका की जिंदगी में फिर से इतनी मुसीबतों के बाद खुशियों की बहार आ गई थी. वह जिंदगी के नए सवेरे में ताजगी और उमंग भरने के लिए सागर के साथ दिल्ली एयरपोर्ट से स्पेन के लिए उड़ चली जहां उसे अपना हनीमून मनाना था. पुरानी जिंदगी और यादों को दफन करना था और नई जिंदगी को गुलाबों की बगिया की तरह महकाना था. Relationship Story in Hindi

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