Hindi Detective Story. देवा एक प्राइवेट जासूस था, जिसे कम ही केस मिलते थे. उस के कालेज की वकील दोस्त रानी उसे कुछ केस दिलवा देती थी. एक दिन डा. चौधरी अपनी बीवी पारुल के साथ उस से मिलने आए. उन का बेटा कुछ दिनों से लापता था. अब पढि़ए आगे...
‘‘बिलकुल सच,’’ रानी ने उसी अंदाज में जवाब दिया. उस शाम देवा ने रानी के फ्लैट पर जा कर उसी के हाथ का बना खाना खाया. रानी उसे ठीक उसी तरह परोस कर खिला रही थी, जैसे कोई बीवी अपने शौहर को.
खाना खाते समय रानी ने पूछा, ‘‘क्या कहते हो चौधरी के लड़के विनय के बारे में?’’ ‘‘यह अपहरण वाला चक्कर नहीं है.’’ ‘‘कैसे?’’ ‘‘अगर होता, तो अब तक चौधरी को फोन आ जाता.’’
‘‘हो सकता है कि बाद में करे?’’ ‘‘कोई चांस नहीं.’’ ‘‘क्यों?’’ ‘‘क्योंकि चौधरी इतना बड़ा आदमी नहीं है कि कोई उस के लड़के का अपहरण कर उस से फिरौती की रकम मांगे.’’
‘‘हुं...’’ रानी ने सहमति जताई, ‘‘तुम्हारा अगला कदम क्या होगा?’’ ‘‘मैं कल स्कूल जा कर पूछताछ शुरू करूंगा,’’ देवा बोला. इस के बाद देवा खापी कर वापस आ गया.
दूसरे दिन देवा विवेकानंद स्कूल पहुंचा. चपरासी से मुलाकात हुई. देवा ने चौथी क्लास की क्लास टीचर से मिलने की इच्छा जाहिर की. चपरासी ने उसे दूर से ही वह क्लास दिखाई, जहां पर चौथी क्लास की क्लास टीचर थीं.
क्लास टीचर ने विनय के बारे में कोई खास दिलचस्पी नहीं ली. देवा ने उस से कुछ सवाल पूछे.
‘‘क्या विनय से मिलने कोई आया था?’’ उस ने उत्तर से दक्षिण की ओर गरदन हिलाई.
‘‘विनय को उस दिन कोई ले गया था? इस वजह से वह गायब है या आप को किसी पर शक है?’’ उस ने फिर न में गरदन हिलाई.
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