News Story. ‘‘अरे यार, अभिजीत दीपके के बस का कुछ नहीं है. वह भले ही 6 जून को अमेरिका से इंडिया आ गया है और जंतरमंतर पर धरने पर बैठ गया है, पर इतने दिन तक ज्यादा छात्र नहीं आ पा रहे हैं,’’ विजय ने कहा.
‘‘क्या बात कर रहे हो. सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े हैं. और फिर यह जो एजुकेशन का फेल सिस्टम है, इस पर बात होनी ही चाहिए,’’ अनामिका बोली.
‘‘पर यार, हम इतने दिन से यहां ग्रुप बना कर आ रहे हैं और मुझे तो कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है,’’ विजय ने कहा.
इतने में अनामिका का फोन बजा, ‘‘फिर पापा का फोन आ गया…’’ अनामिका धीरे से बोली और फोन उठाया, ‘‘जी पापा, कहिए?’’
‘‘क्या तुम आज भी जंतरमंतर आई हो? मैं ने तुम से कहा था कि इस फालतू के पंगे में मत पड़ो. सरकार और पुलिस किसी की नहीं होती. जिस दिन अपने पर आ गई, तो फिर किसी को नहीं छोड़ेगी. तुम्हारी मां अलग से परेशान हो रही हैं,’’ उधर से अनामिका के पापा की आवाज आई.
‘‘पापा, यहां अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है. आज 19 तारीख हो गई है और इतने दिन के बाद भी पुलिस और छात्रों के बीच ज्यादा कोई झड़प नहीं हुई है,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.
‘‘पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि वह अपने लोग भेजेगा. मुझे लग रहा है कि 20 तारीख को वहां कुछ बुरा होगा. तुम लोग अपना खयाल रखना,’’ पापा बोले.
‘‘ठीक है पापा, कल हम खास ध्यान रखेंगे. हम बड़ा ग्रुप बना कर आएंगे,’’ अनामिका बोली.
अनामिका के पापा की चिंता जायज थी. भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को समर्थन देने के लिए भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को खुला चैलेंज दिया था कि वे 20 जुलाई को आंदोलनकारियों के साथ जंतरमंतर से संसद तक एक विशाल मार्च निकालेंगे. उन्होंने कहा कि या तो सरकार 19 जुलाई को हार मानेगी या फिर 20 जुलाई को हम इस तानाशाह हुकूमत को हरा देंगे.
चंद्रशेखर की यह बगावत रंग लाई. 20 तारीख को जंतरमंतर पर लोगों का जमावड़ा बढ़ने लगा. नतीजतन, पहले दिन एक साधारण विरोध प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ यह प्रदर्शन, 20 जुलाई की छात्रों और पुलिस की झड़प के बाद 23 जुलाई तक पूरी तरह से बदल गया.
अनामिका और विजय लगातार जंतरमंतर पर बने रहे थे. उन का और दूसरे लोगों का आंखों देखा हाल कुछ इस तरह रहा था :
संसद की ओर मार्च की घोषणा
20 जुलाई को हुई, जो कि जेन जी के कई सदस्यों के लिए दुखद साबित हुई, क्योंकि वे अपने मातापिता को सूचित किए बिना ही विरोध स्थल पर पहुंच गए थे. आंकड़ों के मुताबिक, कई लोग आंसू गैस के गोलों से घायल हुए, जबकि कई लोग पेलेट गन से घायल हुए.
20 जुलाई को रेल भवन और संसद के पास हुई हिंसा के मामले में कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से कई अहम और चौंकाने वाली बातें सामने आईं. पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में हत्या की कोशिश जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए थे.
यह मामला कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में तैनात एक इंस्पैक्टर की शिकायत पर दर्ज किया गया था. शिकायत के मुताबिक, घटना के दिन ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को वायरलैस पर सूचना मिली, जिस के बाद पुलिस की एक टीम रेल भवन गोलचक्कर पर लगे बैरिकेड्स की ओर पहुंची. वहां पहले से ही हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे.
एफआईआर में पुलिस ने बताया कि लाउडस्पीकर से बारबार घोषणा कर के भीड़ को बताया गया कि इलाके में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है और विरोध प्रदर्शन की कोई इजाजत नहीं दी गई है. इस के बावजूद भीड़ पीछे नहीं हटी और नारेबाजी करती रही.
आरोप है कि कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड्स तोड़ने और संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया. इस के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल को घेर लिया, उन पर हमला किया और पत्थरबाजी की. एफआईआर के मुताबिक, भीड़ ने पुलिसकर्मियों की जान लेने की नीयत से हमला किया, जिस से कई अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए. साथ ही सरकारी संपत्ति और निजी वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंचा.
हालात को काबू में करने और संसद के साथ बाकी संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने हलका लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. बीएनएस की लगभग 13 अलगअलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. इन में हत्या की कोशिश, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना, दंगा करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना जैसे गंभीर आरोप शामिल थे.
20 जुलाई को हुई हिंसक झड़प में कुल 129 पुलिसकर्मी और 60 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे. इस बीच जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम ने जंतरमंतर पर हुए प्रदर्शन में संदिग्ध या आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,500 से ज्यादा लोगों की पहचान की.
इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ‘सैंट्रल दिल्ली में इंटरनैट बंद होने का दावा किया जा रहा है. यह भी दावा किया जा रहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित सख्ती से जुड़ी तसवीरें, वीडियो और अन्य सामग्री हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दबाव बना रही है और विरोध प्रदर्शनों की कवरेज रोकने की कोशिश कर रही है.’
इस के बाद बिहार से भी छात्रों और पुलिस के बीच हुई हिंसा की खबरें आने लगीं. इसी बीच अनामिका के पापा ने फोन किया, ‘‘बेटा, अब तो हमारे बिहार में भी यह आग सुलग गई है. जहानाबाद, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर के बाद गया शहर में भी बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शन के दौरान कई इलाकों में दुकानें बंद कराई गईं, प्रमुख सड़कों पर जाम लग गया और प्रशासन को भारी पुलिस बल के साथ मोरचा संभालना पड़ा.
‘‘गया कालेज से बड़ी संख्या में निकले छात्रों ने शहर की प्रमुख सड़कों पर मार्च निकाला. प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की.
‘‘पटना में पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में नेता तेज प्रताप यादव सड़क पर उतरे. तेज प्रताप यादव ने कहा कि वे छात्रों के साथ पूरी तरह से खड़े हैं. बीते कई दिनों से पटना में पेपर लीक मामले को ले कर छात्रों का प्रदर्शन जारी है, इस दौरान लाठीचार्ज भी हो चुका है. वहीं छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे.’’
‘‘आप अपना ध्यान रखें पापा. जैसे बिहार में नेता छात्रों का साथ दे रहे हैं, वैसे ही दिल्ली में भी बहुत से नेता सरकार के खिलाफ हो गए हैं.
21 जुलाई, 2026 को नीट पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन में कांग्रेस नेता गांधी भी कूद गए. वे सीजेपी के आंदोलन में शामिल होने जंतरमंतर तो नहीं गए, लेकिन अलग तरीके से उस का समर्थन किया. वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए.
‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, और प्रियंका गांधी ने भी उन का साथ दिया. समर्थन के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पहुंच गए. राहुल गांधी हिरासत में लिए गए और फिर रिहा भी गए. इस तरह नीट आंदोलन के बहाने उन्होंने अपनी राजनीति को धार दी,’’ अनामिका बोली.
इस के बाद अनामिका ने फोन काट दिया. उधर जब से 20 तारीख को उग्र प्रदर्शन हुआ था, तब से विजय बहुत ज्यादा डर गया था. दिल्ली पुलिस द्वारा दी जा चेतावनी के बावजूद लोग कम होने के बजाय बढ़ते ही जा रहे थे. इधर, मैट्रो ट्रेन के कई स्टेशनों पर न रुकने के चलते आम लोगों को भी परेशानी हो रही थी.
‘‘यार, बहुत हो आंदोलन, अब हम घर चलते हैं. अब तो सरकार और सीजेपी के बीच एक राउंड की बातचीत हो गई है. सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन तोड़ दिया है,’’ विजय बोला.
‘‘तुम भी गजब करते हो… यहां बच्चे अपने सिर पर लाठियां खा रहे हैं और तुम घर जाने की बात कर रहे हो. अब यह मामला सिर्फ नीट परीक्षा में दिक्कत का नहीं रह गया है, बल्कि उस से ऊपर चला गया है. इस सरकार ने राम मंदिर का चंदा चोरी होने पर क्या किया? ऐसे लोग तो मौका मिलने पर देश बेच दें.
‘‘तुम ने देखा नहीं उस दिन एक बच्चा अपना खाना ले जा रहा था, तो एक पुलिस वाले ने डंडे के जोर पर वह खाना छीन लिया था. इन लोगों ने छात्रों के साथ ऐसा बरताव किया है जैसे वे कोई हार्ड कोर क्रिमिनल हों.
‘‘ठीक है सरकार ने पहले राउंड की बात कर ली है और शायद शनिवार को कोई बड़ा फैसला लिया जाए, पर अब मैं इस सरकार और पुलिस पर रत्तीभर भी यकीन नहीं करती. कल 25 तारीख है और देखते हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है,’’ अनामिका बोली.
25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ पर एक लैटर जारी कर के अपने इस्तीफे का ऐलान किया, जिस के बाद कौकरोच जनता पार्टी की ओर से आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर के बताया कि उन की सभी मांगें मान ली गई हैं, इसलिए अब देश में अलगअलग जगहों पर जारी इस आंदोलन को खत्म किया जाएगा. यह समझाता सरकार और सीजेपी पक्ष के बीच तीसरे दौर की वार्ता के बाद हुआ.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो बोलीं, ‘‘युवाओं ने साबित किया अंधभक्ति के बिना देशभक्ति निभाई जा सकती है.’’
‘‘यार, चलो माना कि यह आंदोलन खत्म हो गया है. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया. नीट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कड़े नियम और कानून बनाने को कहा है और अब छात्र भी शांत हो गए हैं, पर अगर सरकार ऐसा करने में नाकाम रही तो?’’ विजय ने पूछा.
‘‘तो दिक्कत किस बात की. जंतरमंतर भी यहीं है और हम भी. अगर सरकार ने अपनी एक भी बात नहीं रखी या मुकर गई तो फिर हम दोबारा यहीं दिखेंगे. अब तो हर सरकार को अपनी जवाबदेही लेनी पड़ेगी. कहने भर से कुछ नहीं होगा. और अगर जेन जी दोबारा इसी मूड में जंतरमंतर पर आएं तो फिर उन्हें वहां से हटाना नामुमकिन हो जाएगा. सत्ताधारियों के लिए यह तिलचट्टों की चेतावनी है मेरी जान,’’ अनामिका ने इतना कहा और मुसकरा दी. विजय उस का मुंह ताके जा रहा था. News Story




