Social Issue. अभी मीडिया बनाम कोचिंग विवाद थमा ही नहीं था कि कोचिंग का आपसी झगड़ा सामने आ गया. वह भी खास पटना में, जो कोचिंग का हब माना जाता है.

एक समय था, जब यहां इंजीनियरिंग और मैडिकल का भी कोचिंग हब था. पर जब नामांकन और डिगरियां आसानी से मिलने लगीं, लोगों का मोह भंग हुआ, तो वे इस से किनारा करने लगे. एक कारण यह भी था कि कोटा और दिल्ली कोचिंग हब बनने लगे थे, तो एक पढ़नेपढ़ाने वालों का एक बड़ा तबका उधर शिफ्ट हो गया था.

मगर बिहार में छोटे पद वालों, जैसे क्लर्क की, टीचर की, सिपाही आदि की नौकरियां तो थीं ही. हाल ही में थोक में बहाली भी हुई, तो अभ्यार्थियों के झुंड के झुंड इधर आने लगे. और अब बारी थी इन के कोचिंग की. कोचिंग वालों ने इधर संभावनाएं देखीं और अपनी सारी ऊर्जा इधर ही लगा दी. और कहना नहीं होगा कि उन्हें अपार सफलता भी मिली है.

मगर इस कोचिंग के चक्कर में हुआ यह है कि कहीं भी गांवदेहात में किसी भी बेनामी स्कूलकालेज में नामांकन ले कर अभ्यर्थी इस कोचिंग के नाम पर हजारोंलाखों की संख्या में पटना में रह रहे हैं. पढ़ाई के नाम पर मूल किताब किसी को पढ़ना नहीं है. कौन उस के पीछे लगे. सभी के हाथ में ग्लौसी पेपर में छपी गाइड, कुंजियां आदि हैं.

हाल यह है कि 50 रुपए की मूल किताब उन्हें महंगी लगती है, मगर 500 की गाइड, कुंजी आदि सस्ती दिखती है. सो, प्रकाशकों की भी बन गई है.

कौन कितना पढ़ रहा है या कौन कितना पढ़ा रहा है, यह बाद की बात है. फिलहाल ध्यान सफलता की तरफ है. और यह सफलता नतीजे से जानी जाती है.

यह सफलता तब दिखती है, जब थोक में बहालियां होती हैं. और तब कोचिंग सैंटर अपना दावा ठोंकने लगते हैं कि अमुक थोक बहाली में उन के इतने स्टूडैंट सफल हुए. उन लोगों की लिस्ट में जिन सफल अभ्यर्थियों के नाम होते हैं, वे सभी में होते हैं. और विवाद यहीं उठ खड़ा होता है कि सही सूची कौन सी है.

लोभी गांव में ठग भूखों नहीं मरते. अभ्यर्थी भी होशियार है. वह यहां भी माल काटना चाहता है, वहां भी गिफ्ट बटोरना चाहता है. वह यह भी देखता है कि कहां कितना बढि़या माल या गिफ्ट हाथ लगने वाला है.

साल 2019 के आगेपीछे यही काम इंजीनियरिंग कोचिंग वाले करते थे. जिन अभ्यर्थियों का नामांकन आईआईटी, एनआईटी आदि में हो जाता था, उसे महंगे मोबाइल फोन से ले कर लैपटौप तक के किट्स उपलब्ध कराए जाने लगे, तो मारामारी मच गई.

उन अभ्यर्थियों को लगने लगा कि बस अब तो हम मैदान मार ही लिया, जबकि उन्हें अभी 5 साल की पढ़ाई के पीछे लाखों रुपए खर्च करने थे. फिर नौकरियों के लिए लाइन में लगना था.

और इस विवाद में कोचिंग वालों की कलई खुलने लगी. अभ्यर्थियों का मोह भंग हुआ, तो कोटा, दिल्ली, पुणे आदि का रुख करने लगे. फिलहाल इंजीनियरिंग कोचिंग का बाजार पटना में मंदा है.

लेकिन छोटी नौकरियों का तो है ही, जो मैट्रिक और इंटर लैवल पर होते हैं. आमतौर पर कहीं भी किसी स्कूलकालेज में एडमिशन करा ये अभ्यर्थी अपने भावअभाव के साथ शहरों में चले आते हैं कोचिंग करने. अभिभावक अपना पेट काट कर उन्हें इन कोचिंगों में पढ़ने के लिए भेजते हैं.

पटना में रहनेपढ़ने का औसतन खर्च प्रति छात्र 10,000 का है. इस का सर्वे दिल्ली प्रैस के कहने पर मैं ने किया था. अंदाज करें कि लाखों छात्रों के पीछे पटना में कितना पैसा आता होगा. अब तो लड़कियां भी इस पढ़ाई के मैदान में ताल ठोंक कर आ रही हैं. सो, पटना में कुकुरमुत्तों की तरह गर्ल्स होस्टल हर गलीमहल्लों में हैं. लड़कों के लौज, होस्टल आदि का कहना ही क्या. सालोंसाल ये पढ़ते ही रहते हैं.

इन लाखों अभ्यर्थियों के पीछे पैसा पानी की तरह बह रहा है, जिस से एक नई अर्थव्यवस्था उपजी है. और इसी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को अपने नाम करने के लिए वर्चस्व की लड़ाई है.

‘समय मंथन’ के संपादक सेराज अनवर का सवाल है कि ‘यूट्यूब पर पढ़ाने वाले टीचर्स, जो न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप की एक भद्दी टिप्पणी से तिलमिलाए हुए हैं. ‘गोदी’ मीडिया को आज सत्ता के दलाल, चाटुकार, लोकतंत्र के दुश्मन और न जाने ग़ुस्सा में क्याक्या बता रहे हैं. क्या आप ने अपने बच्चों को लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में कभी पढ़ाया है? धर्मनिरपेक्षता की खूबियां बताई हैं? संविधान पर क्या खतरा है समझाया है? हिंदूमुसलिम एकता क्यों जरूरी है बताया? बेशक, आप ने दारोगा बनाया, एसपीडीएसपी भी बनाया होगा, हजारोंलाखों को नौकरी दिलाई होगी, लेकिन एक सभ्य नागरिक भी उसे बनाया?

‘आप सब के करोड़ोंअरबों फौलोअर्स हैं, तो समाज में नफरत का बीज कौन बो रहा है? उस में आप के लोग भी हैं क्योंकि आपने शिक्षा को रोजगार से, नौकरी से जोड़ दिया. इनसान बनने के बुनियादी टिप्स नहीं दिए वरना समाज इतना जहरीला नहीं होता. एजूकेशन को जब तक सिविलाइजेशन से नहीं जोड़ा जाएगा समाज में दो कौड़ी के लोग ही पैदा होंगे.

‘आप जब पढ़ाते हैं मुसलमान पंचर बनाता है, तो क्लासरूम में बैठा हिंदू दोस्त मुसलिम छात्र को घृणा वाली नजर से देखता है. आप जब मौब लिंचिग पर चुप रहते हैं, तो आप के छात्र की मानसिकता में उथलपुथल चलती है और आगे चल कर उसे जायज समझने लगता है.

आप जब बुलडोजर राज पर एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक के बतौर चुप रहते हैं तो आप के पढ़ाए पुलिस अधिकारी, नौकरशाह और नेता को बल मिलता है. आप जब वोट के अधिकार, गलत और सही का चुनाव करने के गुलाम मानसिकता को नहीं भेद पाते तो सत्ता के दलाल मीडिया को कुछ भी बकने का सेफ पैसेज देते हैं.

‘यह समाज आप का ही बनाया हुआ है मास्टर साहब, जो अब्दुल को टाइट करने को अपना धर्म मानते हैं. यदि आप ने लोकतंत्र, सैकुलरिज्म, संविधान की ताकत को समझायापढ़ाया होता तो किसी अंजना ओम कश्यप को ओछी टिप्पणी करने की जुर्रत नहीं होती.

‘यदि आप ने भारत की साँझा विरासत पढ़ाई होती तो समाज नहीं बंटता. यदि आप गंगाजमुनी संस्कृति की धारा को सकारात्मक रुख देते तो हिंदूमुसलिम में इतना मतभेद नहीं होता. यदि आप एक नौकरीपेशा के साथ छात्रों को एक अच्छा इनसान भी बनाए होते तो देश चमन होता. क्या आप ने यह सब सब्जैक्ट पढ़ाया?

‘आप को भी दरअसल नफरती समाज चाहिए. नफरत बढ़ाने में भी आप यूट्यूब के स्टार टीचरों का योगदान उतना ही है. छात्रों को रट्टूमल बना दिया, लेकिन इनसान नहीं बनाया तो भुगतेगा कौन?’

यहीं पर एक सवाल यह भी कि क्या यह मौजूदा समय में अंजना ओम कश्यप और कोचिंग संस्थानों के बीच जो शीतयुद्ध जैसा माहौल है, वह दरअसल पेपर लीक और सीबीएसई परीक्षा में फैली घटनाओं से ध्यान भटकाने के लिए एक सोचीसमझ  रणनीति तो नहीं है? दोनों एकदूसरे के सहयोगी और चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह के स्टंट करते रहते हैं.

मूल सवाल यह है कि शिक्षा की गिरती साख को ले कर व्यापक प्रतिरोध कैसे खड़ा हो? शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में लगी आग क्या मात्र एक आपदा है या कुछ और? इस पर विचार करने की जरूरत है.

Social Issueआईआईटी एडवांस में पहली रैंक लाने वाले शुभम कुमार को बधाई देते हुए फेसबुक पर वाहवाही लूटने वाले नेताओं से क्या यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि मैट्रिक पास करने के बाद वह गयाजी से कोटा पढ़ाई करने क्यों गया? क्या यह बिहार के शिक्षण व्यवस्था की नाकामयाबी का सुबूत नहीं है? उस के रिजल्ट को ले कर मैंटर्स ने जो दावा किया, वह झूठ अब सामने आ रहा है. कोचिंग संस्थानों द्वारा रिजल्ट को बढ़ाचढ़ा कर पेश करते हुए विज्ञापन करना और उस की आड़ में बहुत सारे बच्चों को अपने कोचिंग संस्थानों में नामांकन कराने की पेशकश करना दुर्भाग्यपूर्ण है.

हाल ही में खान सर कोचिंग में हुए हमले पर सारा विवाद सतह पर सामने आ गया. साफ दिखा कि कोचिंग की आपसी होड़ में शिक्षा व्यवस्था की क्या दुर्गति हो रही है. खान कोचिंग ‘ग्लोबल स्टडीज कोचिंग सैंटर’ की ‘ज्ञान बिंदु’ कोचिंग से पुरानी प्रतिस्पर्धा है. मजे की बात यह कि यह दोनों कोचिंग सैंटर पटना के सर्वाधिक सघन इलाके मुसल्लहपुर हाट में अगलबगल ही हैं.

यह प्रतिस्पर्धा जब रंजिश में बदलती है, तो हमले होते हैं. यह हमला किस ने और कैसे किया, यह सब युद्ध स्तर पर पुलिस छानबीन कर ही रही है. सीसीटीवी के फुटेज तलाशे जा रहे हैं, बयान लिए जा रहे हैं. सो, सहीगलत का फैसला सामने आ ही जाएगा.

मगर इस चक्कर में कोचिंग उद्योग का सच सामने आ रहा है. 2 जून को अफवाह फैली कि गोलियां चली हैं, इस से सनसनी फैल गई. खुद खान सर ने आगे बढ़ कर यह दावा किया. हालांकि वे अगले दिन इस बयान से मुकर गए.

खान सर ने जो बयान दिया था उस के मुताबिक, रात के 10 बज रहे थे और औनलाइन बैच चल रहे थे. उन्होंने कहा था कि सिक्योरिटी गार्ड को इतना मारा गया कि उस का सिर फोड़ दिया. हमलावर बोल रहे थे कि 2 दिन के अंदर कोचिंग सैंटर को उड़ा देंगे. उन का कहना था कि वह यहां बच्चों को पढ़ाते हैं और अच्छे रिजल्ट देते हैं.

ऐसा हमला करना बचकाना हरकत है. गार्ड बोल रहा था कि दूसरी कोचिंग वाले लोग ही हमला करने आए थे. सीसीटीवी में सभी का चेहरा नजर आया है और नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है.

उन्होंने यह भी दावा किया था कि कोचिंग सैंटर में बम भी चलाया गया है. जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी होगी. उन्होंने अन्य कोचिंग सैंटर्स के संचालकों पर हमला बोलते हुए कहा था कि शिक्षक के भेष में यहां व्यापारी घुसे रहते हैं.

हालांकि, बाद में पटना पुलिस के बड़े अधिकारियों के पहुंचने के बाद खान सर ने गोलीबारी वाला बयान बदल दिया था. उन्होंने कहा था कि उस समय ऐसा माहौल हो गया था कि कुछ समझ  में नहीं आया. पुलिस से अनुरोध है कि सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए.

खान सर ने बताया कि गार्ड को घसीट कर ले जा कर मारा गया. पता नहीं टारगेट कौन था, बीच में गार्ड मिला तो उसे मार दिया. गार्ड को इतनी चोट लगी है कि वह अभी कुछ बताने कि हालत में नहीं है. अभी हमारी प्राथमिकता यह है कि गार्ड ठीक हो जाए.

‘क्या सैंटर पर गोली चली थी?’ पत्रकारों के इस सवाल पर खान सर नाराज हो कर बोले, ‘‘हम लोग यहां लड़ाई झगड़ा के लिए नहीं बैठते. पुलिस जांच कर रही है. हमारे गार्ड को घसीट कर बहुत मारा गया है. जब वह सही होगा, तो बताएगा. कोचिंग सैंटर पर हमला कर बच्चों का मनोबल तोड़ने की कोशिश की गई है, लेकिन कोई ऐसा नहीं कर पाएगा.

‘‘कोई भी कोचिंग वाला ऐसा करता है, क्या कोई सोच सकता है? पर हम लोग कम पैसे में ही पढ़ाएंगे. क्या शिक्षा का हक केवल अमीर का है?’’

खान सर का कहना था कि हमारी कोशिश यही रहती है कि गरीब से गरीब बच्चे को पढ़ाया जाए और इस में कुछ लोग बाधा बनते हैं. लेकिन हमें प्रशासन पर पूरा भरोसा है. यहां पुलिस प्रशासन ने सजगता दिखाई है. सभी अधिकारी यहां देर रात तक मौजूद थे. पुलिस जल्द

से जल्द कार्रवाई करे और दोषियों को सजा दी जाए. किसी को भी आपसी द्वेष नहीं रखना चाहिए. यहां सुरक्षा मुहैया कराई जाए.

लड़ाई का मुख्य बिंदु क्या था, इस पर प्रकाश डालना उचित होगा. दरअसल, 19,000 सिपाहियों की बहाली हुई थी. सफल प्रतिभागियों को सम्मानित करने के लिए दोनों कोचिंग संस्थानों ने अलगअलग सम्मान समारोह का आयोजन किया था. इस सम्मान समारोह में सम्मानितों की जो सूची थी, उस में बड़ी संख्या में नाम दोनों ही सूची में थे. और इस बात पर दोनो ही समूह आमनेसामने थे.

शाम में ‘ज्ञान बिंदु’ के संचालकों ने पाया कि उन के बैनरहोर्डिंग्स पर खान कोचिंग के बैनरहोर्डिंग्स आदि लगाए हुए हैं. यहीं से उन का गुस्सा फूटा और बैनर हटाओ या फाड़ो अभियान चल गया. हालांकि, 10 बजे रात तक तक तो कार्यक्रम संपन्न हो ही चुके थे. मगर गरमी का दिन, लोग आमतौर पर जल्दी सोते नहीं.

छात्रों का कहना ही क्या, वे झुंड  में उपस्थित थे ही. लोगों को अंदाजा नहीं था कि मामला इतना संगीन हो जाएगा. गुस्से से उफन रहे कुछ लोग बैनरहोर्डिंग्स हटानेफाड़ने के क्रम में ढेलेबाजी भी करने लगे. खान कोचिंग के एक गार्ड ने विरोध किया, तो उस को पकड़ कर जम कर धुनाई कर दी.

वरिष्ठ पत्रकार अनूप सिंह बताते हैं, ‘‘पटना में कोचिंग संस्थानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई कोई नई बात नहीं है. हाल की घटनाओं ने एक बार फिर उस दुनिया की तरफ लोगों का ध्यान खींचा है, जहां शिक्षा, प्रतिस्पर्धा, कारोबार, ब्रांडिंग और लोकप्रियता का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है.

‘‘एक समय था जब देश में इंजीनियरिंग और मैडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए पटना सब से बड़े केंद्रों में गिना जाता था. अनिल परमार, बीके सिंह, भूपेश कुमार जैसे शिक्षकों की कक्षाओं में जगह मिलना ही छात्रों के लिए उपलब्धि मानी जाती थी. इसी दौर में ‘सुपर 30’ का उदय हुआ.

‘‘गरीब छात्रों को आईआईटी तक पहुंचाने के अभियान ने आनंद कुमार को राष्ट्रीय पहचान दिलाई. बाद में ‘सुपर 30’ और उस से जुड़े अन्य संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा, सफलता का श्रेय लेने की होड़ और प्रचारप्रसार को ले कर कई विवाद भी सामने आए.

‘‘समय बदला और देश का कोचिंग नक्शा भी बदला. कोटा राष्ट्रीय स्तर पर सब से बड़ा कोचिंग हब बन गया, लेकिन पटना की प्रासंगिकता समाप्त नहीं हुई. यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों की नई पीढ़ी सामने आई. डाक्टर एम. रहमान जैसे शिक्षकों ने लाखों छात्रों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई.

‘‘फिर आया कोरोना काल. लौकडाउन ने शिक्षा जगत की दिशा ही बदल दी. पहली बार ऐसा हुआ कि कक्षा से ज्यादा महत्व मोबाइल स्क्रीन और इंटरनैट को मिलने लगा. जो शिक्षक डिजिटल प्लेटफार्म को समझ  गए, वे रातोंरात राष्ट्रीय स्तर के ब्रांड बन गए. यूट्यूब, फेसबुक, टैलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंच नए क्लासरूम बन गए.

‘‘इसी दौर में खान सर जैसे शिक्षक देशभर में चर्चित हुए. लाखों छात्र घर बैठे पढ़ाई करने लगे. शिक्षा सस्ती हुई, पहुंच बढ़ी और कोचिंग संस्थानों की भौगोलिक सीमाएं समाप्त हो गईं. बिहार का शिक्षक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और यहां तक कि विदेशों में बैठे छात्रों तक पहुंचने लगा. औनलाइन शिक्षा ने शिक्षकों के लिए आय के नए स्रोत भी खोले. फीस के अलावा यूट्यूब विज्ञापन, डिजिटल सदस्यता, ब्रांड सहयोग और सोशल मीडिया की लोकप्रियता भी आय का जरीया बन गई.

‘‘धीरेधीरे कोचिंग संस्थान शिक्षा संस्थान से आगे बढ़ कर ब्रांड में बदलने लगे. बड़े टीवी चैनलों पर शिक्षकों को बुलाया जाने लगा. सोशल मीडिया पर उन की फैन फौलोइंग बनने लगी. कुछ शिक्षक सैलिब्रिटी की तरह पहचाने जाने लगे. शिक्षा और मनोरंजन के बीच की दूरी कम होने लगी. आज पटना का कोचिंग बाजार केवल एक या 2 नामों तक सीमित नहीं है.

‘‘ज्ञान बिंदु, एस मिश्रा, औफिसर्स अकादमी सहित कई संस्थान औनलाइन और औफलाइन दोनों माध्यमों में सक्रिय हैं. दूसरी ओर अनअकैडमी जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्म ने पूरे देश के शिक्षकों और छात्रों को एक मंच पर ला कर प्रतिस्पर्धा को और तीखा बना दिया है.

‘‘इस प्रतिस्पर्धा का एक दूसरा पहलू भी है. रिजल्ट के प्रचार की लड़ाई अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक हो चुकी है. किसी परीक्षा में जितनी रिक्तियां होती हैं, उस से कई गुना अधिक सफल छात्रों पर दावा करने के आरोप समयसमय पर लगते रहे हैं. सफल छात्रों को बाइक, बुलेट या अन्य उपहार दे कर सम्मानित किया जाता है. उन की कहानियां वीडियो के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं. सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार किया जाता है ताकि नए छात्रों को आकर्षित किया जा सके.

‘‘वास्तविकता यह है कि कोचिंग उद्योग अब केवल शिक्षा का क्षेत्र नहीं रह गया है. यह एक बड़ा आर्थिक तंत्र बन चुका है, जहां लोकप्रियता, डिजिटल पहुंच, मार्केटिंग और ब्रांड वैल्यू भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है, जितनी पढ़ाई.

‘‘दिलचस्प बात यह है कि जो शिक्षक कभी मुख्यधारा मीडिया और टीवी एंकरों से वैचारिक बहस करते दिखाई देते थे, आज उन्हीं के बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव की खबरें सामने आने लगी हैं. इस का कारण केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता हुआ वह बाजार भी है, जिस में लाखों छात्र और करोड़ों रुपए दांव पर लगे हैं.

‘‘पटना का कोचिंग जगत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां शिक्षा, तकनीक और व्यापार तीनों का संगम दिखाई देता है. यह बदलाव अवसर भी ले कर आया है और चुनौतियां भी. अंतत: छात्रों और अभिभावकों के लिए सब से महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि चमकदार प्रचार, वायरल वीडियो और बड़ेबड़े

दावों के बीच वास्तविक गुणवत्ता और परिणाम को कैसे पहचाना जाए, क्योंकि किसी भी शिक्षा व्यवस्था की असली सफलता यूट्यूब के व्यूज, सोशल मीडिया फौलोअर्स या प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से तय होती है.’’

इस कोचिंग सैंटर विवाद में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, साक्ष्यों तथा बयानों के आधार पर ‘ज्ञान बिंदु’ के संचालक रोशन आनंद के साथ उन के सहयोगी अभिषेक तथा गौरव को गिरफ्तार कर लिया है. जो भी हो, कुछ दिन सनसनी रहेगी. कोचिंग संस्थान बंद रहेंगे. लेकिन अभिभावक ही नहीं, छात्र भी कुछ सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि क्या ऐसा ही चलता रहेगा? पढ़ाई के नाम पर पटना में मौजमस्ती और गाइडों का सहारा ले कर सफलता कितनी हाथ लगेगी?

शिक्षक, सिपाही, स्टाफ सेलेक्शन कमीशन आदि की परीक्षाएं गांवों और छोटे शहरों के स्कूलकालेज में पढ़ कर भी पास की जा सकती है. अच्छी पढ़ाई घर पर रह कर भी की जा सकती है, यह उन्हें समझना होगा. वह गाइड, कुंजी के बजाय मूल पुस्तकों की ओर बढ़ेंपढ़ें, तो वहां भी सफलता की इबारत लिखी जा सकती है.

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