Family Story. जैसे ही खाला ने अम्मी के कान भरे वे अपने बेटे की दूसरी शादी कराने पर आमादा हो गईं. इस राह में सब से बड़ा रोड़ा इन की बहू थी. मांबेटे ने एक प्लान बनाया. क्या वे दोनों कामयाब रहे?
‘‘फूफी जान… फूफी जान… अम्मी नहीं आईं क्या?’’ बुखार से तपते सुहेल ने फरजाना से पूछा. ‘‘अम्मी आ जाएंगी… मैं तो हूं न…’’ फरजाना सुहेल के माथे पर पानी से भीगा कपड़ा रखते हुए बोली.
‘‘फूफी जान, अम्मी कहां गई हैं? बताओ न? क्या मेरी अम्मी भी नीशू की अम्मी के जैसे अब कभी लौट कर नहीं आएंगी?’’ मासूम सुहेल ने धीरे से अपनी आंखें खोलते हुए फरजाना से दोबारा पूछा.
सुहेल की बात सुन कर फरजाना खामोश हो गई. आयशा उस के पड़ोस में ही रहती थी. वह उसे ‘अप्पी कहती थी. आयशा खूबसूरत ही नहीं, जहीन भी थी. सिलाईकढ़ाई हो या घर का काम, सभी में माहिर थी वह. उस की ग्रेजुएशन भी पूरी हो चुकी थी और स्वभाव ऐसा कि कुछ ही वक्त में किसी को भी अपना बना ले.
फरजाना को याद है कि आयशा के रिश्ते के लिए उस के परिवार को ज्यादा कोशिश भी नहीं करनी पड़ी थी. जल्द ही उस के लिए एक बेहतर रिश्ता आ गया था. लड़का समीर एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा था और परिवार भी पढ़ालिखा था. और फिर धूमधाम और हंसीखुशी के साथ आयशा अप्पी का निकाह समीर से हो गया.
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आयशा के पापा को यकीन था कि उन की पढ़ीलिखी और कामकाजी बेटी को बहू के रूप में पा कर ससुराल वाले बहुत ही खुश होंगे, लेकिन फिर भी उन्होंने आयशा को भरपूर दहेज दिया था.
लेकिन निकाह के कुछ दिनों के बाद ही आयशा अप्पी को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा. शादी के 2 साल बीत गए थे और आयशा अप्पी की गोद में नीशू आ गया, लेकिन उस के बावजूद अभी तक आयशा अप्पी की ससुराल वालों ने उन्हें नहीं अपनाया था.
एक दिन रहमान चाचा बता रहे थे कि आयशा का रिश्ता उन्होंने पढ़ालिखा घरबार देख कर किया था कि पढ़ीलिखी और सलीकेमंद बहू पा कर वे लोग खुश होंगे, लेकिन वहां तो सबकुछ पैसा ही अहमियत रखता है. आज फिर फोन आया है कि 2 लाख रुपए उन को भेजें, लेकिन उन के पास तो अब कुछ बचा भी नहीं है.
फरजाना को यकीन था कि नीशू के आ जाने के बाद अब जल्द ही आयशा अप्पी को उस की ससुराल वाले अपना लेंगे, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही आयशा की ससुराल से फोन आया कि सिलैंडर लीक होने की वजह से उस के कपड़ो में आग लग गई, जिस से वह गंभीर रूप से ?ालस गई और फिर अस्पताल में उस की मौत हो गई. यह सुन कर वह अंदर तक कांप गई थी.
लेकिन जब फरजाना को पता चला कि आयशा अप्पी ने मरने से पहले बयान दिया था कि उस के कपड़ों में आग लगने की वजह से ही वह जल गई थी, क्योंकि अप्पी को सम?ा दिया गया था कि अगर उस ने बता दिया कि तुम्हारे साथ हम ने ऐसा किया है और हम लोग जेल चले गए, तो उस के मासूम नीशू को कौन संभालेगा?
ममता के मोह में बेचारी आयशा अपने हत्यारों के खिलाफ मुंह भी न खोल सकी थी और उस के हत्यारे जेल जाने से बच गए थे.
यह जान कर फरजाना का खून खौल उठा था. वह सोच रही थी कि आयशा अप्पी के हत्यारों को सजा जरूर मिलनी चाहिए थी.
मासूम नीशू को उस के नानानानी घर ले आए और उन को किसी ने रोकने की कोशिश भी नहीं की थी. फिर कुछ दिनों के बाद ही समीर के घर वालों ने उस का दूसरा निकाह भी करवा दिया.
यह देख कर फरजाना समझ गई कि वे लोग आयशा अप्पी की मौत का इंतजार ही कर रहे थे कि वह मरे तो वे अपने बेटे का दूसरा निकाह कर दें.
फरजाना हैरान थी कि आज भी लोग लड़कियों को बो?ा ही सम?ाते हैं. सब को पता है कि वे लोग आयशा अप्पी के हत्यारे हैं, लेकिन उस के बावजूद लोग अपनी बेटियों का निकाह ऐसे लोगों के घर में कर देते हैं.
‘‘फूफी जान, अम्मी आ जाएंगी?’’ सुहेल की आवाज सुनते ही फरजाना खयालों से फारिग हो कर एक बार फिर हकीकत में आ गई. ‘‘हां, बिलकुल आ जाएंगी. अपने प्यारे बेटे को छोड़ कर वे कहीं जा सकती हैं भला,’’ बहुत ही प्यार से सुहेल को समझाते हुए फरजाना बोली.
‘‘फरजाना, अब सुहेल की तबीयत कैसी है?’’ अम्मी ने कमरे में आते हुए पूछा. ‘‘दवा पिला दी है, लेकिन बुखार अभी तेज है,’’ फरजाना धीरे से बोली. ‘‘दादी, अम्मी कब आएंगी?’’ बहुत ही मासूमियत से सुहेल ने दादी से पूछा. ‘‘अरे, आ जाएंगी अम्मी, पहले तुम ठीक तो हो जाओ,’’ फरजाना ने एक बार फिर प्यार से समझाते हुए धीरे से सुहेल से कहा.

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फरजाना को मालूम था कि सुहेल के इस सवाल पर अम्मी भाभी के लिए जरूर उलटासीधा बोलना शूरू कर देंगी, जो सुहेल के कोमल मन पर गलत असर ही डालेगा.
‘‘इस लड़के ने तो नाक में दम कर के रखा हुआ है. हर वक्त अम्मीअम्मी की रट लगाए रहता है,’’ अम्मी झुन्झला कर बोलीं.
‘‘चुप रहो अम्मा… क्यों तुम इस मासूम की जान लेने पर तुली हो. अगर इस से इतनी ही परेशानी है तो इसे रोका क्यों, इसे भी भाभी के साथ भेज देतीं,’’ फरजाना कुछ तीखे लहजे में बोली.
‘‘तू बहुत ही हमदर्द बन रही है अपनी भाभी की. ऐसा लग रहा है कि हम कुछ नहीं, सबकुछ वह करमजली ही है,’’ गुस्से से बड़बड़ाती हुई अम्मी कमरे से बाहर चली गईं.
फरजाना कुछ नहीं बोली, चुपचाप सुहेल के माथे पर पानी से पट्टी करती रही. कितनी हैरानी की बात है कि कहां वह आयशा अप्पी की ससुराल वालों के बारे सोच रही थी कि कैसे लोग हैं वे, लेकिन यहां तो उस के घर वाले भी दहेज के लोभी बन चुके हैं.
पहले कितना सुकून था घर में. चारों ओर खुशियां ही खुशियां थीं. घर पर केवल अम्मी, वह और भाईभाभी थे. भाईजान सुबह दुकान चले जाते और वह कालेज. घर पर केवल भाभी और अम्मी रह जातीं. भाभी घर का काम करती रहतीं और अम्मी सुहेल को बाहर घुमाने चली जातीं.
भाभी फरजाना के लिए भाभी कम बड़ी बहन ज्यादा थीं. वह कालेज से आ कर खाली समय में भाभी की घर के कामों में मदद करती और बाकी समय में वह भाभी से कुछ न कुछ सीखती रहती. उन्हीं की बदौलत वह सिलाईकढ़ाई से ले कर बेहतर खाना बनाना भी सीख गई थी.
लेकिन जब से फरजाना की खाला घर पर आने लगी थी, तभी से उस के घर का सुकून छिन गया था. एक दिन वह घर पर अम्मी के साथ बैठी हुई थी, तभी घर पर खाला आ गई.
‘‘रुखसाना, तुम्हें पता है कि तरीकुन के लड़के जुबेर की शादी में लड़की वालों ने बहुत ज्यादा दहेज दिया है कि उन के घर में भी नहीं आ पा रहा है और बाइक के साथसाथ कार भी मिली है. लेकिन रुखसाना, तुम तो ठग गई. बताओ, मेरे भांजे को तुम ने सस्ते में ही निबटा दिया. बहू तो एक बाइक तक नहीं ला पाई,’’ कह कर खाला चली गई, लेकिन उस ने यह सब कह कर जैसे शांत अपनी में कंकड़ मार दिया था और घर का सुकून कहीं खो गया था.
उस के बाद से फरजाना की अम्मी के मन में यह बैठ गया था कि रेहान भाईजान के निकाह में वे ठगी गई हैं और वे बिलकुल बदल गईं. वे अब भाभी को बातबात पर बेइज्जत करने लगी थीं. दिनभर भाभी की तारीफ करते न थकने वाली अम्मी अब बातबात पर भाभी के काम में कमी निकालने लगी थीं.
फरजाना को बहुत हैरानी हो रही थी कि हर रिश्ता अब पैसों से तोला जाने लगा है. यह वही खाला थी जिस ने भाईजान के बीमार हो जाने पर हजार रुपए देने से साफ इनकार कर दिया था, जबकि उस के खालू का इतना अच्छा बिजनैस चल रहा है. तब अब्बू के दोस्त लक्ष्मी अंकल ने अम्मी को भाईजान के इलाज के लिए रुपए दिए थे.
लक्ष्मी अंकल अब्बू के बहुत ही पुराने दोस्त थे. पहले अब्बू और अंकल एकसाथ मिल कर ही मेलों में दुकानें लगाते थे, जिस से उन में आपस में दोस्ती बढ़ती गई. अब्बू के इंतकाल के बाद लक्ष्मी अंकल को काफी सदमा पहुंचा था.
थोड़ी सी खेती की जमीन थी जिस से खाने भर का अनाज पैदा हो जाता था और अम्मी घर पर ही सिलाई करने लगी थीं, जिस से दूसरे खर्चे निकल जाते थे. उन के घर के हालात खराब होते ही सभी नातेरिश्तेदार न जाने कहां गायब हो गए थे.
रेहान भाईजान पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन आमदनी का कोई नजरिया न होने पर उन्होंने कपड़े की एक दुकान कर ली. पैसे कम पड़े तो अम्मी ने बचीखुची जमीन बेच दी थी. भाईजान की दुकान होते ही काम अच्छा चलने लगा, जिस से सबकुछ सही हो गया. घर के हालात सही होते ही सभी रिश्तेदारी दोबारा जुड़ने लगे थे.
कुछ दिनों के बाद ही भाईजान की शादी कर दी गई और शबनम के रूप में भाभी फरजाना के घर आ गईं. शबनम भाभी के अब्बू ने अपनी हैसियत से बहुत ज्यादा दहेज दिया था. पहले तो अम्मी को दहेज के कम ज्यादा से कोई मतलब नहीं था, लेकिन जब से खाला आने लगी थी तभी से अम्मी के मन में जहर का बीज पलने लगा था.
‘‘रेहान, तुम्हारे ससुर ने तो तुम से कहा था कि वह तुम को बाइक देंगे, लेकिन अभी तक उन्होंने बाइक नहीं दी. तुम अब उन से कहो कि वे बाइक के बदले एक लाख रुपए दे दें,’’ अम्मी रेहान से बोलीं.
‘‘लेकिन अम्मी, शादी में तो अब्बू ने अपनी औकात से ज्यादा ही उस को दहेज दिया था, जिस के चलते उन्हें घर की कुछ जमीन भी बेचना पड़ी थी. अब वे कहां से लाएंगे इतने रुपए,’’ शबनम भाभी ने हैरानी से धीरे से अम्मी से कहा. ‘‘तो हम क्या करें. हम ने क्या ठेका ले रखा है कि वे कहां से रुपए देंगे,’’ अम्मी गुस्से से बोलीं.
अम्मी की बात सुन कर भाभी खामोश हो गई. उस दिन के बाद से भाईजान के दिमाग पर एक लाख रुपए या फिर बाइक की बात दिमाग में बैठ गई. अब वे आएदिन भाभी से कहने लगे थे कि वह अपने अब्बू से कह कर रुपए मंगवाए, जिस के बाद से जैसे भाभी की जिंदगी जहन्नुम बन गई.
‘‘अम्मी, क्यों भाभी को परेशान करती हो…’’ फरजाना ने अम्मी से कहा था. ‘‘तुम्हें कुछ नहीं मालूम. यह सब चलता रहता है,’’ अम्मी ने फरजाना को समझाया था. ‘‘रेहान, शबनम को रुपए लाने के लिए उस के मायके भेज दो,’’ एक दिन अम्मी ने भाईजान से कहा और दूसरे दिन भाईजान ने भाभी को घर जा कर रुपए लाने के लिए बोल दिया.
मजबूरी में भाभी अपने घर जाने लगीं. तब अम्मी ने सुहेल को गोद में यह कह कर ले लिया कि वह सुहेल को नहीं जाने देंगी… तुम पहले पैसे ले कर आओ.
सुहेल अपनी अम्मी के लिए बिलखता रहा था. आज 2 दिन हो गए थे, लेकिन भाभी अभी तक नहीं आईं. इस वजह से सुहेल को बुखार आ रहा था. तभी बाहर उसे खाला की आवाज सुनाई दी. खाला की आवाज सुन कर फरजाना एक बार फिर यादों के भंवर से बाहर आ गई. उस ने सुहेल को छू कर देखा, बुखार थोड़ा हलका हो गया था.
फरजाना कमरे से बाहर आई. उस ने देखा कि खाला अम्मी के पास बैठी हुई थी. उसे मालूम था कि आज फिर खाला अम्मी के दिमाग में कुछ जहर बोने आई होगी. ‘‘बताओ… रेहान के लिए कितना अच्छा रिश्ता है.चारपहिया गाड़ी देने की बात कर रहे थे, लेकिन अफसोस मुझे उन्हें मना करना पड़ा. अगर बहू न होती तो…’’ खाला जानबूझ कर बात अधूरी छोड़ कर वहां से चली गई.
‘‘इस से तो छुटकरा पाना ही होगा. अब रेहान का निकाह बड़े घर में करेंगे,’’ फरजाना ने कुछ ही देर में अम्मी को भाईजान से कहते सुना. ‘‘अम्मी, क्या तुम भाभी को मार दोगी?’’ फरजाना ने अम्मी के पास जा कर डर से सिहरते हुए पूछा.
‘‘देख, अब रेहान का दूसरा निकाह तो करना ही है. वैसे भी आजकल बहुओं की जल कर बहुत मौतें हो रही हैं,’’ अम्मी ने फरजाना से कहा. ‘‘क्या तुम पैसों के लिए भाभी की हत्या करोगी?’’ डर से सिहरते हुए फरजाना अम्मी से बोली. ‘‘आजकल पैसों से सारे गुनाह धुल जाते हैं,’’ अम्मी दो टूक उस से बोलीं और वहां से चली गईं. ‘‘तभी बाहर दरवाजे की डोरबैल बजी. फरजाना ने दरवाजा खोला. सामने भाभी खड़ी थीं.
भाभी फरजाना से बोले बिना चुपचाप अंदर आ कर सुहेल के पास चली गईं. भाभी को खाली हाथ देख कर फरजाना समझ गई कि रुपयों का इंतजाम नहीं हो सका था. उस ने एक झलक अम्मी को देखा, जिन की आंखें गुस्से से लाल हो रही थीं. तभी उन्होंने भाईजान को बुलाया और उन से धीरेधीरे कुछ बात करने लगीं.
अम्मी को बातें करते देख कर अचानक फरजाना का दिल तेज धड़कने लगा. ‘‘भाभी, आज आप सुहेल को ले कर मेरे कमरे में सो जाना. मुझे देर तक पढ़ाई करनी है और मेरे कमरे की लाइट कम लग रही है,’’ फरजाना ने कमरे में जा कर भाभी से कहा. ‘‘ठीक है जैसे तुम कहो,’’ भाभी धीरे से फरजाना से बोलीं और सुहेल को ले कर उस के कमरे में चली गईं.
फरजाना ने देखा कि भाभी के चेहरे की रंगत उड़ गई थी. हंसताखिलखिलाता हुआ चेहरा पूरी तरह से कुम्हला चुका था. यह देख कर अनायास ही उस की आंखो में आंसू आ गए.
फरजाना ने कमरे की लाइट बंद की और वह निढाल हो कर बिस्तर पर लेट गई. आज उस का दिल किसी अनहोनी के डर से घिरा हुआ था.आज उस की आंखो से नींद कोसों दूर थी. वह सोच रही थी कि अगर खाला ने उस की अम्मी के मन में जहर का बीज नहीं बोया होता तो आज भी उस का पूरा परिवार हंसीखुशी रह रहा होता.
तभी अचानक फरजाना पर पानी जैसा कुछ पड़ा. वह चौंक गई. उस के नथुनों में अजीब सी गंध समाई. फरजाना ने देखा कि सामने अम्मी और भाईजान थे. भाईजान के हाथ में बड़ी प्लास्टिक की बोतल थी. वह कुछ समझती उस से पहले ही उस पर जलती हुई कोई चीज गिरी और फिर आग भड़क उठी.
तेज जलन की वजह से फरजाना चीखनेचिल्लाने लगी. उस की आवाज सुन कर अम्मी और भाईजान चौंक गए. तेज आग की रोशनी होते ही सामने बहू की जगह फरजाना को जलता देख कर वे दोनों घबरा गए और आग बुझाने की कोशिश करने लगे. फरजाना की चीखपुकार सुन कर भाभी भी वहां आ गईं और वहां का नजारा देख कर वे कांप गईं.
‘‘अम्मी, जो तुम भाभी के साथ करना चाहती थीं वहीं कल मेरे साथ भी होना था, क्योंकि जो बच्चों के मांबाप करते हैं वही बच्चों को भुगतना ही पड़ता है. इस से बेहतर था कि मैं भाभी की जान बचा लूं.” ‘‘आप लोगों ने यह भी नहीं सोचा कि आप की भी बेटी और बहन है, जिस को भी अपनी सुसराल जाना है और जैसा आप किसी दूसरे की बेटी के साथ कर रहे हैं अगर आप की बेटी के साथ भी वही हुआ तो क्या गुजरेगी आप लोगों पर, कभी सोचा है? आखिर क्यों नहीं सोचते आप लोग कि बहू भी बेटी है? आखिर क्यों?’’ फरजाना तेज जलन और दर्द से तड़पते हुए बोली और फिर धीरेधीरे उस की आंखें बंद होती चली गईं. Family Story
लेखक : फारूख हुसैन




