सरकारी विभागों में ‘हिंदी सेल’ क्या बनाए गए नंदू चाचा जैसों की बन आई. वे ‘हिंदी आन सेल’ का नुसखा बांटने लगे. कारोबारियों ने हिंदी को कैसेकैसे बेचा, इस पर पढि़ए राधेश्याम गुप्ता का यह व्यंग्य.