Story in Hindi. तमाम लोगों की भीड़ के बावजूद यहां हर इनसान अकेला है. हर दिन एक अकेला इनसान भीड़ में भागता है. भीड़ में होता है एक अकेला इनसान. तमाम ऊंचीऊंची बिल्डिंगें होने के बावजूद यहां भी झोंपड़पट्टियां हैं. इन झोंपड़पट्टियों से नहीं दिख पाती बिल्डिंग की छत, पर बिल्डिंग की एक खिड़की से दिख जाती हैं सारी झोंपड़पट्टियां.
ऐसी ही एक झोंपड़पट्टी में मैं रहता हूं और ऊंचीऊंची बिल्डिंगों का चौकीदार हूं. चौकीदार हूं का मतलब यह नहीं कि मैं सिर्फ चौकीदार ही हूं, क्योंकि कभीकभी हम जो होते हैं वह दिखता नहीं और जो नहीं होते वह प्रमुखता से दिख जाता है.
खैर, मुझे किसी ने चौकीदारी करने के लिए नहीं कहा था. मैं बीएससी पास हूं, स्वभाव का गुस्सैल हूं. मैं झारखंड से यहां हीरो बनने आया था. यों तो झारखंड और बिहार से लाखों की तादाद में लोग यहां मजदूरी करने आते हैं, पर मैं यहां मजदूर बनने कभी नहीं आया था, पर मुंबई एक ऐसा शहर है जो आप से क्या न करवा ले. कभीकभी महानगर में जो आप होते हैं उस से इतर आप कुछ और हो जाते हैं.
https://youtube.com/shorts/0GAfWg9KRLs?si=sg6XQP49c2NGCgVD
यह मेरी कहानी नहीं है, इसलिए अपनी बात को विराम दे कर मैं कहानी को वहां ले कर चलता हूं, जहां से कहानी की शुरुआत हुई थी. तो यह कहानी कुछ इस तरह शुरू हुई थी. हां, कहानी शुरू करने के पहले आप सब से यही इजाजत लेना चाहूंगा कि अगर मेरी जरूरत होने पर वहां मुझे हाजिर होना पड़ेगा. इस में आप सब को कोई एतराज नहीं होना चाहिए. तो कहानी की तरफ आगे बढ़ते हैं.
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