Story in Hindi. 2 बच्चों के बाप आशुतोष का दिल अपने बैंक में काम करने वाली मोना पर आ गया. वह उसे घर ले आया. आगे क्या हुआ?
यह बात है आज से 10 साल पहले की. कुरुक्षेत्र के एक सब्जी आढ़ती की बेटी संध्या का ब्याह करनाल में बैंक मैनेजर आशुतोष के साथ हुआ.
संध्या बीए पास थी, इसलिए वह केवल घरेलू औरत ही रही. वैसे भी आशुतोष की पुश्तैनी जमीनजायदाद बहुत ज्यादा थी. बैंक में तो वह केवल शौकिया नौकरी करता था. परिवार में भी और कोई नहीं था, इसलिए केवल आशुतोष और संध्या यही छोटी सी फैमिली थी.
शादी के 2 साल बाद संध्या ने एक बेटी को जन्म दिया. बहुत ही प्यारी और सुंदर परियों जैसी बेटी थी. आशुतोष बेटी को पा कर बहुत खुश था. उस ने बेटी का नामकरण बड़े ही धूमधाम से किया. बेटी 2 साल की थी तो एक बेटा पैदा हुआ. दोनों बच्चे बहुत ही प्यारे और सुंदर थे.
आशुतोष बच्चों को बहुत प्यार करता था. जाहिर सी बात है कि हर मातापिता अपने बच्चों को प्यार करते हैं. कभीकभी तो संध्या इस बात पर आशुतोष से नाराज हो जाती थी और कहती थी, ‘‘इतना लाड़ मत दो बच्चों को. बिगाड़ रहे हो.’’
इस पर आशुतोष कहता, ‘‘बच्चे ही तो हैं, बिगड़ेंगे नहीं तो क्या हमारी तरह सम झदार होंगे? जब वे बड़े हो जाएंगे खुद ही सम झ आ जाएगी. जो करते हैं करने दो.’’
आशुतोष और संध्या का बेटा रौनक पहली क्लास में और बेटी शनाया 5वीं क्लास में करनाल के सब से बड़े आदर्श निकेतन पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे.
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