Social Story. नरेंद्र ने चंपा को प्यार के सुनहरे सपने दिखाए. चंपा भी उस की मुहब्बत में दीवानी थी. लेकिन क्या नरेंद्र वाकई चंपा से प्यार करता था या.
नरेंद्र चंपा की खूबसूरत जवानी के पीछे पागल हो गया था. वह हमेशा उसी की टोह में रहता.
चंपा भी नरेंद्र को पसंद करती थी. आखिर वह लंबा, छरहरा व बांका नौजवान था. वह भी छिपछिप कर नरेंद्र को निहारा करती. पर सोचती, ‘पहल नरेंद्र ही करे, तो ज्यादा ठीक है.’
जब चंपा अपने आंगन में होती, तो नरेंद्र अपनी छत पर नजर आता. अकसर नरेंद्र अपनी छत पर आ कर बैठता, तो चंपा अपने आंगन में जम जाती.
एक दिन नरेंद्र कान में उंगली डालने के बहाने चंपा को इशारा कर बैठा. चंपा ने उस इशारे का जवाब इशारे से ही दिया.
नरेंद्र खुशी से झूम उठा. फिर तो देर तक दोनों में तरहतरह के इशारे होते रहे.
एक दिन अकेले में नरेंद्र ने चंपा का हाथ पकड़ लिया और कहा, ‘‘तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.’’
‘‘झूठे, छोड़ो मेरा हाथ,’’ चंपा अपना हाथ खींचते हुए बोली.
‘‘मन करता है कि तुम्हारा हाथ हमेशा के लिए थाम लूं,’’ नरेंद्र ने हाथ पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी.
‘‘छोड़ो भी... कोई देख लेगा... जो कर नहीं सकते, वह कहते क्यों हो?’’ चंपा बोली.
‘‘सच कहता हूं चंपा,’’ नरेंद्र ने उसे खींच कर गले से लगा लिया, ‘‘ठाकुर की जबान कच्ची नहीं होती. वह जो कहता है, करता है.’’
चंपा ने किसी तरह खुद को नरेंद्र से अलग करते हुए कहा, ‘‘अरे जाओ ठाकुर साहब, यह पट्टी किसी और को पढ़ाओ. मुझे बखूबी मालूम है कि ऐसा नहीं हो पाएगा. मैं निचली जाति की जो ठहरी.’’
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