Social Satire Story. शाद्घदी के बाद गौने के लिए मायके आई सावित्री चहकते हुए घर में घुसी और पिता श्याम चरण से बोली, ‘‘बापू, कर दिया न तुम ने सब का नुकसान. सुना है, इस साल हाईस्कूल पास करने वाली लड़कियों को बीपीएल कार्ड होने पर कुछ रुपए और एक साइकिल मिल रही है.’’
आंगनबाड़ी में काम करने वाली बहिनजी अनीता सावित्री को देख कर रुक गईं और बोलीं, ‘‘अरे सावित्री, तू कब आई? कैसी है तेरी ससुराल? कितने दिनों के लिए मायके आई है?’’
सावित्री ने हंसते हुए कहा, ‘‘बहिनजी, मैं आज ही आई हूं. मेरी ससुराल बहुत अच्छी है. सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं यहां एक महीने के लिए आई हूं.’’
आंगनबाड़ी की बहिनजी और सावित्री की बातें खत्म होने पर श्याम चरण ने बहिनजी से पूछा, ‘‘बहिनजी, यह बीपीएल क्या होता है? सुना है कि उस से कुछ रुपए भी मिलते हैं.’’
https://youtube.com/shorts/RROHofWLTPI?si=M6yyeC6mhjk5xRCJ
सावित्री ने वहां बिछी खाट पर बहिनजी को बैठने का इशारा किया. उन्होंने खाट पर बैठ कर बताया, ‘‘गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले यानी सब से ज्यादा गरीबों की पहचान होता है बीपीएल कार्ड. यह सफेद रंग का होता है. इस से सरकार से सस्ते दाम पर आटा, चावल, दाल वगैरह सामान खरीदने की सुविधाएं भी मिलती हैं.’’
कुछ देर से सोच में डूबी सावित्री अब चुप न रह सकी और बोली, ‘‘बहिनजी, वहां तो मेरी ननद सरिता को अगले हफ्ते एक साइकिल और कुछ रुपए मिलने वाले हैं. अभी पिछले साल ही तो उस ने मेरे साथ हाईस्कूल का इम्तिहान पास किया था.’’
आंगनबाड़ी की बहिनजी ने हंस कर कहा, ‘‘अब सम?ा, तुम लोग क्यों पूछ रहे हो बीपीएल...’’
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