आभासी दुनिया से शुरू हुआ था मानव और मानवी का प्यार. दोनों के बीच न कोई कमिटमैंट, न सात फेरे, न कोई वचन, था तो सिर्फ भरोसा. उसी के सहारे मानवी ने अपना सबकुछ मानव पर न्योछावर कर दिया, लेकिन वह भरोसा क्या कायम रह सका?