Internship Opportunity: घर की मुरगी दाल बराबर नहीं, न से ‘नौकरी’. कितना सुखद और शानदार शब्द है... हर उस बेरोजगार के लिए जो हर लिहाज से काबिल तो है, पर बेचारे को मिल नहीं पा रही है. यह बात अलग है कि आजकल जो नौजवान सोशल मीडिया पर रील स्क्रौलिंग में अपना अंगूठा घिसते रहते हैं, उन्हें तो यही नौकरी पाने के लिए न जाने कितनी तरह के पापड़ बेलने पड़ सकते हैं.
देश में बढ़ती बेरोजगारी और नौकरियों की कमी से अब इन पापड़ों का भी कोई मोल नहीं रह गया है, क्योंकि सरकारी हो या प्राइवेट, नौकरी पाना खाला के घर जाने जितना आसान तो बिलकुल भी नहीं है. पर जिस तरह से कुकुरमुत्तों की तरह प्राइवेट एजूकेशनल इंस्टीट्यूट खुल गए हैं, उम्मीद की एक किरण यह नजर आती है कि बहुत सी प्राइवेट कंपनियां नौकरी देने से पहले बहुत बार छात्रों को इंटर्नशिप दे देती हैं.
अब यह इंटर्नशिप क्या बला है?
इंटर्नशिप एक ऐसा टैम्परेरी काम होता है, जो किसी छात्र या नए ग्रेजुएट को किसी फील्ड में प्रैक्टिकल नौलेज और एक्सपीरियंस हासिल करने के लिए दिया जाता है. यह आमतौर पर कुछ महीनों से एक साल तक चलता है और कभीकभी पैसे के साथ या बिना पैसे के भी हो सकता है.
इसी के साथ दूसरा सवाल भी मन में उठ सकता है कि इंटर्नशिप करना क्यों जरूरी है? वैसे, इंटर्नशिप करने का फायदा यह हो सकता है :
- छात्र को थ्योरी के साथसाथ रिएल वर्क एनवायरनमैंट का एक्सपीरिंयस मिलता है.
- नई स्किल्स सीखने और मौजूदा स्किल्स को बेहतर बनाने का मौका मिलता है.
- इंडस्ट्री के प्रोफैशनल्स से जुड़ने और कनैक्शन बनाने का मौका हासिल होता है.
- जो इंटर्न अच्छा काम करते हैं, उन्हें कई बार कंपनियां अपने यहां फुलटाइम जौब औफर करती हैं.
- इंटर्नशिप से इंटर्न का रेज्यूमे (बायोडाटा) ज्यादा मजबूत बनता है.
इतना सब होने के बावजूद बहुत से इंटर्न अपनी इंटर्नशिप को सीरियसली नहीं लेते हैं. उन्हें यह बोरिंग काम लगता है. पर ऐसा होने की वजह क्या है?
इंटर्न अपनी इंटर्नशिप को सीरियसली क्यों नहीं लेते?
दिल्ली कालेज औफ आर्ट्स एंड कौमर्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र आदिब खान, जो फिलहाल इंटर्न हैं, का मानना है, ‘‘इंटर्नशिप एक दिलचस्प दौर होता है. जब मैं ने नईनई इंटर्नशिप शुरू की थी, तब मैं काफी जोश में था कि अपने से सीनियर और ज्यादा अनुभवी लोगों के साथ काम करने का मौका मिलेगा.
‘‘लेकिन कुछ दिनों बाद ऐसा महसूस होने लगा कि वे अपना ज्यादातर काम ही करवा रहे हैं. कभीकभी यह भी लगता था कि जब उन से कम पैसे मिल रहे हैं, तो मैं उन के जितना काम क्यों करूं?
‘‘लेकिन धीरेधीरे यह एहसास हुआ कि मैं ऐसा बहुतकुछ सीख रहा हूं, जो मेरे कैरियर और जिंदगी में आगे चल कर काम आएगा. आज के समय में, जब प्रतियोगिता इतनी ज्यादा बढ़ गई है, तो बिना इंटर्नशिप के अनुभव के कार्पोरेट दुनिया में अपनी अच्छी जगह बनाना बहुत मुश्किल हो गया है.’’
आदिब खान ने बहुत अच्छी बात कही. लेकिन यहां पर सब से बड़ी कमी इंटर्न की से जुड़ी होती है, क्योंकि वे इंटर्नशिप को टैम्परेरी और कम इम्पोर्टेंस देते हैं. साथ ही, अगर इंटर्नशिप अनपेड या कम पैसे वाली हो तो इंटर्न का मोटिवेशन कम हो सकता है.
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