Hindi Story. कसबे के थाने के सिपाही रामा व शिवा रात के 12 बजे के बाद मोटरसाइकिल पर सवार हो कर गश्त पर निकले थे. पिछले कई दिनों से उन्हें कोई चोर नहीं मिला था, इसलिए वे दोनों थोड़े बेचैन थे. रामा मोटरसाइकिल के पीछे बैठा था. उस के कंधे पर एक पुरानी बंदूक लटकी थी.

शिवा ने परेशान हो कर कहा, ‘‘यार रामा, सब के सब चोर न जाने कहां दुबक गए हैं. अगर कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, तो मोटरसाइकिल की जगह पैदल गश्त लगानी पड़ेगी.’’

‘‘तुम ठीक कहते हो. तनख्वाह के अलावा ऊपर की कमाई नहीं मिले, तो जिंदगी में मजा नहीं रहता.’’

तभी उन्हें सामने से जग्गू चोर आता दिखा. शिवा ने खुश हो कर उस के सामने मोटरसाइकिल रोक दी.

‘‘क्यों जग्गू, बहुत दिनों बाद दिखा है. कोई लंबा हाथ मारा था क्या...’’ ‘‘नहीं हवलदार साहब.’’

‘‘फिर कहां गायब हो गया था?’’ रामा ने मोटरसाइकिल से उतर कर पूछा. ‘‘रिश्तेदारी में गांव गया था. आज ही लौटा हूं और आप को ही तलाश रहा था,’’ जग्गू ने जवाब दिया, तो रामा ने मजाक के लहजे में शिवा से कहा, ‘‘सुनो, चोरों के भी रिश्तेदार होते हैं.’’

जग्गू ने भी उसी लहजे में कहा, ‘‘आप से बढ़ कर मेरे और कौन रिश्तेदार होंगे?’’ ‘‘तो प्यारे रिश्तेदारी निभा,’’ रामा बोला, ‘‘सामने जो मकान है, उस में घुस जा. हम तेरा यहां इंतजार करते हैं.’’

जग्गू आननफानन मकान की दीवार फांद गया. पिछले कई महीनों से जग्गू रामा व शिवा की जानकारी में चोरियां करता आ रहा था. वह जो भी माल चुरा कर लाता, रामा और शिवा शहर जा कर उसे ठिकाने लगा देते थे. फिर तीनों रुपएपैसों का बंटवारा कर लेते.

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