सरस सलिल विशेष

‘‘बस, कह दिया मैं ने कि नहीं जाऊंगी तो नहीं जाऊंगी.’’ ‘‘मगर, क्यों नहीं जाएगी?’’ जगदीश जरा नाराज हो कर बोला. ‘‘उन साहब की नीयत जरा भी अच्छी नहीं है.’’ ‘‘तू नहीं जाएगी तो साहब मुझे परमानैंट नहीं करेंगे...’’ इस समय जगदीश की आंखों में गुजारिश थी. पलभर बाद वह दोबारा बोला, ‘‘देख रामकली, जब तक ये साहब हैं, तू काम छोड़ने की मत सोच. साहब मेरी नौकरी परमानैंट कर देंगे, फिर मत मांजना बरतन.’’ ‘‘देखोजी, मुझे वहां जाने को मजबूर मत करो. औरत एक बार सब की हो जाती है न...’’ पलभर बाद वह बोली, ‘‘खैर, जाने दो. आप कहते हैं तो मैं नहीं छोड़ूंगी. यह जहर भी पी जाऊंगी.’’

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