लेखक-  शरद उपाध्याय

हमारे देश में प्रतिदिन हजारों बच्चों का जन्म होता है. बच्चे धीरेधीरे बड़े होते हैं व एक दिन उस अवस्था को प्राप्त करते हैं जहां पर उन्हें स्कूल भेजने का संस्कार संपन्न कराना पड़ता है.

बच्चों को स्कूल में डालना, देखने में जितना सरल प्रतीत होता है उतना सरल वास्तव में है नहीं. वे दिन गए जब बच्चों को सरलता से स्कूल में एडमिशन मिल जाया करता था. बच्चा थोड़ा सा ठीकठाक हुआ, उलटीसीधी गिनती बताने लगता था तो भी वे मात्र इस आधार पर कि बच्चे को पर्याप्त दिशाज्ञान है, स्कूल में भर्ती कर लेते थे.

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