Emotional Story in Hindi. ‘‘गुंडुर गुरंग,’’ कमांडिंग अफसर ने पुकारा, तो पहाड़ी नाकनक्श वाले 18-20 बरस के नौजवान ने सावधान की मुद्रा में तेजी से बाहर निकल फुरती से पैर पटका और सैल्यूट करता हुआ खड़ा हो गया.
अफसर ने उस की ओर गौर से देखा. सांवले रंग का थोड़ा छोटा सा दिखता कसा पहाड़ी शरीर, तेज मगर भोलापन लिए आंखें.
अफसर ने उस की हाजिरी लगाई, फिर मूक इशारा किया. सैल्यूट ठोंकता हुआ नौजवान टोली में जा मिला.
‘‘सुखबीर सिंह,’’ एक सिख नौजवान सामने आ गया. सतवीर शर्मा, विवेक जैन, रविंद्र सैनी वगैरह.
कमांडिंग अफसर नाम पुकारता गया. देश के अलगअलग हिस्से से आए नौजवान आगे आते गए और अपनी हाजिरी लगवा कर टोली में वापस खड़े होते गए. सब की हाजिरी लगा कर कमांडिंग अफसर ने इशारा किया. सारी टोली लैफ्टराइट करती अपनीअपनी बैरक को चली गई.
सेना के इस ट्रेनिंग कैंप में नए सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाता था. तरहतरह की कसरतें कराई जाती थीं. अनुशासन के साथसाथ मनोरंजक माहौल भी था. सुबह होते ही परेड शुरू हो जाती थी.
एक घंटा परेड के बाद सैनिक नहातेधोते थे और फिर नाश्ते का समय हो जाता था. फिर शाम तक तरहतरह की ट्रेनिंग का सिलसिला चलता था.
शाम को हर बैरक में टैलीविजन, वीडियो का दौर चलता था. कभी टैलीविजन होना भी मुश्किल था, मगर अब मोबाइल फोन भी आम था. बदलते वक्त के साथ अब हर चीज आम थी.
दूरसंचार के सभी साधनों के सहजसुलभ हो जाने पर भी क्या प्रेमीप्रेमिका का मिलन आसान था?
एसएमएस भेजने या मोबाइल फोन से बात करने के बाद भी ज्यादातर फौजी या अंडर ट्रेनी खत को ही तरजीह देते थे.
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