Success Story : इंगलिश में 100 में से 99, कंप्यूटर में 97, हिंदी में 96, सामाजिक विज्ञान में 95, विज्ञान में 93. पलवल कैंप के वीरांगना झलकारी बाई सरकारी उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय की नूर फातिमा के 10वीं क्लास के ये नंबर किसी का भी सीना गर्व से ऊंचा कर सकते हैं. हो भी क्यों न, अपने स्कूल में टौप करना कोई हंसीखेल नहीं है.

15 साल की नूर फातिमा के पिता का नाम मोहम्मद फरियाद और मां का नाम अजिमा खातून है. नूर की 2 बहनें हैं. एक साधारण परिवार की इस बच्ची ने किस तरह पढ़ाई की और खुद को कैसे इम्तिहान के लिए तैयार किया, ऐसी ही कुछ बातें जानने की कोशिश की गईं. पेश हैं, नूर फातिमा से हुई बातचीत के खास अंश :

सब से पहले तो आप को बधाई. आप अपने परिवार के बारे में कुछ और बताएं.

बहुतबहुत शुक्रिया. मेरे परिवार में मेरे अम्मीपापा और हम 3 बहनें हैं. हमारे घर में पढ़ाई पर बहुत जोर दिया जाता है. मेरे परिवार ने हमेशा मुझे  मेहनत करने, खुद पर भरोसा रखने और आगे बढ़ने के लिए बढ़ावा दिया. उन की सपोर्ट की वजह से ही मैं यह मुकाम हासिल कर पाई हूं.

अमूमन ऐसा मान लिया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी होती है. अगर ऐसा है तो आप ने इस गैप कैसे पाटा?

मेरे स्कूल में पढ़ाई के लिए अच्छे संसाधन उपलब्ध थे. हमारे टीचर्स बहुत अच्छा पढ़ाते हैं और हर बच्चे पर ध्यान देते हैं. मैं ने स्कूल में जो पढ़ाया जाता था, उसे नियमित रूप से फौलो किया और उसी से मुझे काफी मदद मिली.

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