Education System: लोकतंत्र में शिक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर होनी चाहिए, लेकिन जब मामला स्वयं शिक्षा मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र का हो, तो अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के विधानसभा क्षेत्र पानीपत से आई 'राजकीय प्राथमिक पाठशाला, बबैल रोड' की कहानी राज्य की शैक्षणिक प्राथमिकताओं पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक स्कूल, जहाँ 430 बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना है, पिछले सात वर्षों से अपनी एक छत के लिए तरस रहा है। साल 2018 में स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित कर गिरा तो दिया गया, लेकिन 'नव-निर्माण' की फाइलें शायद आज भी फाइलों के बोझ तले दबी हुई हैं। परिणाम यह है कि आज देश के भावी नागरिक मंदिरों और धर्मशालाओं के बरामदों में बैठकर अक्षर ज्ञान लेने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात यह है कि स्कूल के लिए बजट की कमी नहीं है। साल 2019 में ही इसके लिए बजट पास हो गया था, लेकिन प्रशासनिक तालमेल और जमीन के छोटे से पेंच ने इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। मंदिर और धर्मशाला जैसे धार्मिक स्थल आस्था के केंद्र तो हो सकते हैं, लेकिन वे आधुनिक शिक्षा के मानकों (जैसे प्रयोगशाला, खेल का मैदान और शांत वातावरण) को पूरा नहीं कर सकते। जब इन स्थलों पर कोई विवाह या धार्मिक आयोजन होता है, तो बच्चों की पढ़ाई रोक दी जाती है—यह सीधे तौर पर उनके 'शिक्षा के अधिकार' का हनन है।
शिक्षा मंत्री का यह कहना कि 'कांग्रेस सरकार के समय से समस्या है', केवल जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा प्रतीत होता है। जनता यह नहीं पूछती कि गलती किसकी थी, बल्कि यह पूछती है कि समाधान कब होगा? अगर शिक्षा मंत्री के अपने क्षेत्र में 1900 गज जमीन का आवंटन सालों तक अटका रह सकता है, तो प्रदेश के सुदूर गांवों की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है।
अरावली को बचाने के लिए जहाँ अदालतें सख्त हैं, वहीं बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए प्रशासन को स्वयं जागना होगा। मंदिर में भगवान और धर्मशाला में यात्री तो शोभा देते हैं, लेकिन वहां लगती स्कूल की कक्षाएं हमारी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक हैं। उम्मीद है कि 'शिक्षा मंत्री' के क्षेत्र का यह स्कूल जल्द ही अपनी चारदीवारी में लौटेगा, ताकि बच्चों को किसी शादी या उत्सव के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़नी पड़े।
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
- 24 प्रिंट मैगजीन
डिजिटल
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप




