शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियां, स्कूलों में गुणवत्तापरक शिक्षा का अभाव और प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भुनाते हुए कोचिंग सैंटर्स मोटा पैसा कमाने के अड्डे बन चुके हैं. इन्होंने शिक्षा को विशुद्ध कारोबार में तबदील कर दिया है.