जनता कर्फ्यू के सफलता के चलते 22 मार्च रविवार का दिन भारतीय इतिहास दर्ज हो चुका है. कारण है चीन से निकला  और दुनियाँ भर के लिए संकट बन चुका कोरोना वायरस (COVID-19). विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह दुनियां 170 देशों में अपना पैर पसार चुका है.  इससे सबसे ज्यादा प्रभावित देश चीन और इटली है इटली में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या में हर रोज इजाफा हो रहा है. जिससे रोज होने वाली मौतों का आकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. शनिवार को इटली में अकेले 793 लोगों की मौत हो हुई. इसी के साथ  इटली में COVID-19 से मरने वालों की संख्या 4825  हो चुकी है और दुनियां भर में COVID-19 से मरने वालों संख्या 13 हजार के आंकडे को पार कर चुकी है. इससे पीड़ितों की संख्या भी 2 लाख को पार कर चुकी है. भारत में भी कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. और इसके पीड़ितों की संख्या 324 तक पहुँच चुकी है. कोरोना के संक्रमण से भारत में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है.

इसके प्रभाव में आये देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है. लोगों को घर से काम करने की हिदायत दी जा चुकी है. स्कूल कालेजों को बंद कर एक जगह इकठ्ठा होने पर रोक लगाने के उद्देश्य से कई जिलों में धारा 144 लगा दी गई है. कोरोना COVID-19 के संक्रमण के फैलाव का कारण इससे पीड़ितों के संपर्क में आना रहा है. इसको देखते हुए भारत सरकार नें सभी तरह के अन्तराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक लगा दी है. और बचाव के सभी यहतियात और प्रभावी कदम उठाये जा रहें हैं.

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कोरोना को रोकने के लिए प्रधानमन्त्री ने जनता कर्फ्यू के लिए किया अपील

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी नें इसकी भयावहता को देखते हुए COVID-19 के प्रसारपर रोक लगाने के उद्देश्य से 19 मार्च की शाम को देश से सीधा संवाद किया. उन्होंने कहा कि ये मत सोचिए कि सबकुछ ठीक है. वैश्विक महामारी से निश्चिंत होने की ये सोच ठीक नहीं है. मैं आज 130  करोड़ देशवासियों से एक और समर्थन मांग रहा हूँ  यह है जनता कर्फ्यू, जो जनता द्वारा जनता के लिए खुद पर लगाये जाने वाला कर्फ्यू होगा उन्होंने कहा की 22 मार्च को रविवार को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करना है जनता कर्फ्यू के दरमियान कोई भी नागरिक घरों से बाहर न निकले ना सडक पर जाएँ न मोहल्ले में बल्कि अपने घरों में रहें.प्रधानमन्त्री के इस अपील के बाद राज्य सरकारों ने जनता कर्फ्यू का पालन कराने के लिए तत्काल प्रभाव से माल, रेस्टोरेंट,शैलून, जैसे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करने का आदेश दे दिया.

देश के आजादी के बाद सबसे बड़ा जनता कर्फ्यू

भारत में यह पहली बार है जब आजादी के बाद पूरे देश के लोग घरों से बाहर नहीं निकले. प्रधानमन्त्री के इस अपील का जनता पर कितना असर हुआ यह तो नहीं कहा जा सकता है. लेकिन कोरोना COVID-19 का भय जनता में जरुर दिख रहा है. यही कारण है की बेहद कम समय में और बिना किसी प्रसार-प्रचार के जनता कर्फ्यू का असर शहरों से लेकर गाँवों तक देखा गया. जनता कर्फ्यू के चलते पूरा देश सन्नाटे में है. सड़कें सूनी हैं, मार्केट और दूकानों पर ताले लटक रहें हैं. जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए किसान, मजदूरों और व्यवसायियों पूरी तरह से काम ठप रखा. पेट्रोल पम्प, होटल, दुकानें आदि पूरी तरह बंद रहें हैं. यह पहली दफा  है की देश की जनता नें बिना किसी दबाव के जनता कर्फ्यू को सफल बनाने में अपना योगदान दिया. लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले और लोगों से दुरी बनाने में अपनी भागीदारी निभाई.

साफ़-सफाई की आदतों में हुआ इजाफा

कोरोना वायरस के खौफ का असर यह रहा की पढ़े लिखे से लेकर अनपढ़ तक अपनी साफ़ सफाई के प्रति बेहद गंभीर दिख रहें है. लोग इस वायरस से बचने के लिए हाथ को बिना अच्छी तरह से धुले कोई भी काम नहीं कर रहें हैं. साथ ही वायरस का प्रवेश शरीर में न हो इसके लिए मास्क, गमछे से नाक को ढक रहें हैं. अपने घरों के आस-पास साफ़ सफाई का बेहद ख्याल रख रहें हैं. इस लिए यह सीधे तौर पर कहा जा सकता है जो काम सरकारें अरबों खरब रुपया खर्च कर नहीं कर सकती हैं उसे इस खतरनाक वायरस के भय ने कर दिखलाया.

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भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा चक्का जाम –

देश में यह पहली बार होगा की ट्रैक पर ट्रेनों का पहिया थम रहा है. भारत सरकार नें कोरोना वायरस संक्रमण पर रोक लगाने के लिए भारतीय रेल की सभी पैसेंजर ट्रेनों को 31 मार्च, 2020 तक के लिए रद्द कर दिया है.साथ ही रोडवेज की अधिकांश बसों को भी डिपो में खड़ा कर दिया गया है  इसके चलते सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हाईवे से ट्रकों की आवाजाही बंद रही. यूपी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी जनता कर्फ्यू में सहयोग दिया है। अस्पतालों में इमरजेंसी को छोड़ दूसरी सेवाएं बंद हैं.

रोजमर्रा की जरूरतों को छोड़ कर अधिकांश राज्यों में लौक डाउन की स्थिति-

देश के तमाम राज्यों नें कोरोना की रोकथाम के लिए रोजमर्रा की जरूरतों को छोड़ कर बाकी के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ ही भीड़ इकठ्ठा करने वाले संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के प्रवेश पर रोक लगा दिया है. अनुमान लगाया जा रहा है की अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह आदेश और भी बढ़ाया जा सकता है.

जनता रही सजग रोजमर्रा की जरूरतों का बनाया स्टाक

लॉक डाउन को लेकर जनता बेहद सजग है इस लिए खाने-पीने की दुकानों पर जनता कर्फ्यू के एक दिन पहले तक भारी भीड़ देखी गई. लोगों ने नमक, तेल, दाल, चावल, सोयाबीन बड़ी, आलू, माचिस जैसी आवश्यक चीजों की जम कर खरीददारी की और और एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक स्टाक बनाया है ज्यादातर परिवारों ने दूध पाउडर और ब्रेड जैसी वस्तुओं का  भी स्टाक बना रखा है.

जातिधर्म और पार्टी का मुद्दा रहा गायब – कोरोना जैसी महामारी से निबटने के लिए सभी लोग एक जुट नजर आयें ऐसे में सभी पार्टियों और जाति धर्म के लोगों ने मिल कर जनता कर्फ्यू का समर्थन किया.

महानगरों से गाँवों तक में रहा सन्नाटा

देश में इस तरह की स्थिति पहली बार आई है जब महानगरों से लेकर गावों तक में सन्नाटा दिखा. इससे एक बात तो तय है की देश में जनता अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग है. यह सजगता कोरोना जैसी समस्या से निबटने के बाद भी दिखे तो देश के बेहतर बदलाव की उम्मीद की जा सकती है.

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अगर सरकार और जनता इसी तरह से सजग रही तो निश्चित ही कोरोना जैसी महामारी से देश को छुटकारा मिल सकता है. बस इस ऊर्जा को लोगों को बचाए रखना होगा. अगर सरकार और जनता इसमें फेल होती है तो देश के स्वास्थ्य सेवायें इस स्थिति में नहीं हैं की इससे निबट पायें. इस लिए कोरोना से निबटने का देश के सामने सावधानी और बचाव ही एक उपाय है.

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