प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर जनता कर्फ्यू के दिन शाम को शंखनाद , घंटे , तालियां , सबकी मधुर झंकार से जनता भावुक होकर एक श्रेष्ठ भारत के साक्षात दर्शन कर रही थी ,सबको लगा , वे सब सब साथ साथ कोरोना से जंग कर रहे हैं. जिन लोगों का आभार प्रकट करने के लिए यह करने का आदेश था , वही लोग जो अपनी जान की बाजी लगाकर इस इमरजेंसी में अपने रात दिन दे रहे हैं ,अपना सर पकड़ बैठ गए .मूर्ख , अंधभक्तों ने अति उत्साह में जश्न , शक्ति प्रदर्शन करते हुए जनता कर्फ्यू की इस पूरी संकल्पना का मजाक बना कर रख दिया , इस तरह संक्रमण बुरी तरह फ़ैल सकता है , क्या पता फैला भी हो .एक जगह तो डी  एम साहब भीड़ लेकर जुलूस की शकल में गाजे बाजे के साथ निकल पड़े , लोग थाली पीट रहे थे , कुत्ते , बिल्लियां घबराकर  यहाँ वहां भाग रहे थे , कुछ डर से दुबके पड़े थे .

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जनता अपनी मूर्खता का शिकार बेजुबानो को भी बना रही थी . लोगों ने घातक बीमारी को भी मनोरंजक समझकर जश्न मना लिया , कितनी मूर्खता , कितने बेतुके तर्क बुद्दिजीवी देते रहे . देश को तालियों , थालियों की इतनी जरुरत नहीं है जितनी टेस्टिंग किट्स, वेंटिलेटर्स , आइसोलेशन वार्डस और फ्री इलाज की है . पता नहीं कितने वीडियो देखने को मिले जिसमे लोग शाम को जश्न मनाने निकले . अहमदाबाद खादिया से  भी एक वीडियो सामने आया , उसमे भी इस कर्फ्यू का मजाक उड़ा कर रख दिया गया, भीड़ सड़कों पर उतर आयी , गाना बजाना हुआ , गरबा हुआ  और यह हुआ भी पी एम और एच एम के होम स्टेट में , इन मूर्खों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए . ये लोग खुद  समाज के ऐसे वायरस हैं जिनका इलाज बहुत जरुरी है , नहीं तो मेडिकल स्टाफ और डौक्टर्स की सारी मेहनत बेकार चली जाएगी .एक वीडियो में फिल्म  स्टार अक्षय कुमार अपनी पत्नी के साथ चीयर अप कर रहे हैं और लोग उनका वीडियो बना रहे हैं , सेलिब्रिटी को देखकर तो लोग वैसे ही पागल हो उठते हैं , यह सबको पता है , लोग इकठ्ठा न होते , ऐसा ही कुछ किया जाना था , पर बिलकुल उल्टा हुआ .

कितने ही बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया पर बताया कि वे कितने भावुक हो गए थे , वे भारतीय संस्कृति पर गर्व कर रहे थे , उनकी आँखें भर आयी थी , और जो लोग इसे तमाशा कह रहे हैं , वे कितने पत्थरदिल हैं , उनके अंदर भावनाएं हैं ही नहीं  , उन्हें  देश की परम्पराओं , संस्कृति  पर गर्व नहीं , वे कैसे भारतीय हैं ! महामारी के समय देश को इस तमाशे और पागलपन में धकेलने के लिए देश से माफ़ी मांगी जानी चाहिए और फिर राष्ट्र को सम्बोधित करके बताना चाहिए कि इस बेवकूफी से , अंधभक्ति से कितना भारी नुकसान हुआ है.

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