Editorial. नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार अपने एक वादे पर तो पूरी तरह खरी उतर रही है. वह 200 सालों की जद्दोजेहद का नतीजा है कि किसी तरह पौराणिक राज आ जाए जिस में उसे जनसेवा न करनी पड़े, जनता को उस की सेवा करनी पड़े. हमारे पौराणिक ग्रंथों में जनता की सेवा कोई भी राजा या देवीदेवता करते हों इस की मनगढ़ंत कहानियां भी मुश्किल से मिलेंगी, उन्होंने अपने हितों के लिए कैसे अवतारों और निषादों, वानरों, भालुओं (जो किसी नीची जाति के जंगलवासी ही हो सकते हैं) से अपनी सेवा करवाई इस की कहानियां जरूर हैं.
यह पौराणिक राज आ रहा है. जनसेवा के जितने काम पहले सरकारें करना अपना फर्ज सम झती थीं, उन से पिछले 30 सालों में किनारा कर लिया गया है और सरकार सेवा और सरकार की पुजारी सेवा अब राजा का काम रह गया है.
यूपीआई सब से नया तमाचा है जो नोटबंदी और जीएसटी जैसा है जो जनता पर मारा गया है. सरकार ने अब तक मुफ्त चल रहे पैसों के लेनदेन पर अपना कमीशन लेना शुरू कर दिया है. कहने को यह छोटी ट्रांजैक्शन यानी लेनदेन पर नहीं होगा पर बड़ी ट्रांजैक्शन का टैक्स हर व्यापारी आखिर में छोटे पर बांट देगा और सब्जी वाले, हलवाई, किराने, कैमिस्ट लेनदेन पर टैक्स लेने लगेंगे. हर जगह दिख रहे क्यूआर कोड अब सरकारी लूट का हिस्सा बनने जा रहे हैं.
ऐसा नहीं है कि पहले यह लेनदेन मुफ्त होता था. इन लेनदेन में बैकों के पास कुछ दिनों के लिए पैसा जमा हो जाता था जिस पर उन्हें ब्याज नहीं देना होता था. यह छोटाछोटा पैसा भी जब करोड़ों में गिना जाए तो भारीभरकम हो जाए और इस सिस्टम को चलाने के लिए काफी था.
अब लोग हल्ला मचा रहे हैं क्योंकि मामूली कहे जाने वाले इस टैक्स को बढ़ कर ताड़का बनना ही है. अब लोगों को फिर रेजगारी की कीमत मालूम होगी, छोटे नोटों की कीमत मालूम होगी जो यह जालिम सरकार छापेगी ही नहीं. सिक्कों की बेहद कमी लौटने वाली है.
इस सरकार को सिवा मंदिरों के कुछ नहीं सू झता. यह महान भवन उन देवीदेवताओं की सुरक्षा के लिए बनवाती है, वहां बड़ीबड़ी तिजरोरियां रखती है ताकि वे देवीदेवता अपने मूरख भक्तों को दुखों से बचा सकें. जिस के घर में खुद चोरी हो रही है, जो चोरी की जमीन पर बना हो, जिस के हिसाब में हेराफेरी हो रही है उसे पूजने के लिए चौकस इंतजाम सरकारी खर्च पर होता है पर 5 रुपए, 20 पैसे के लेनदेन का सरकार की नजर है.
सरकार ने पोस्ट सर्विस बंद कर दी है. सरकार ने मुफ्त पीने का पानी देना बंद कर दिया है. मुफ्त शिक्षा खस्ता है. मुफ्त अस्पताल खस्ता हैं. मजबूत है तो हिंदूमुसलिम झगड़ा और फीस, टैक्स, टौल के नाम पर वसूली, मेज के ऊपर और नीचे दोनों से. Editorial




