देश जिन हालातों और माहौल से गुजर रहा है उसे देखते हुए वाकई किसी बड़े आंदोलन की सख्त जरूरत है, जिससे मूर्छित होती जनता को सांस लेने नए और खुलेपन की आक्सीजन मिले. पिछले एक साल से आंदोलन करूंगा, आंदोलन करूंगा  की रट लगाए बैठे गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने इस अदृश्य मांग को समझते दोबारा एक बड़ा आंदोलन करने की हुंकार भर दी है. यह प्रस्तावित आंदोलन भी भ्रष्टाचार के ही खिलाफ होगा. इस बाबत अन्ना ने बाकायदा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते चेतावनी भी दी है कि 3 साल गुजर जाने के बाद भी न तो लोकपाल और लोकयुक्तों की नियुक्तियां हुई हैं और न ही सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर अमल करने कोई पहल कर रही है.

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