मेरी अरेंज मैरिज हुई है मैं अपनी वाइफ से इमोशनली अटैच होना चाहता हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरी नईनई शादी हुई है. अरेंज मैरिज है. मैं इमोशनल टाइप का लड़का हूं और शादी मेरे लिए जिंदगी की एक इंपोर्टैंट चीज है. मैं अपनी वाइफ से इमोशनली बहुत ज्यादा अटैच होना चाहता हूं, लेकिन हमारे बीच में कुछ ?ि?ाक सी है. हम दोनों एकदूसरे से खुल नहीं पा रहे. मैं खुल कर सैक्स करना चाहता हूं. लेकिन जैसा सोचता हूं वैसा हो नहीं पाता. इस कारण थोड़ा अपसैट सा रहने लगा हूं. वाइफ अच्छी है. मु?ा से कोई शिकायत नहीं करती. बस, मैं ही खुश नहीं रह पा रहा हूं. इस की क्या वजह हो सकती है?

पतिपत्नी का रिश्ता जितना खुला होगा उस में उतनी ही ताजगी होगी. पतिपत्नी के लिए अपने नए रिश्ते की शुरुआत में ही खुल कर सैक्स की बातें करने से हर चीज करनी आसान हो जाती है. कई लोगों को यह स्वीकार करने में एक ?ि?ाक महसूस होती है कि बैडरूम में उन्हें क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं. जब तक आप इसे अपने पार्टनर को नहीं बताएंगे, सैक्स को एंजौय नहीं कर पाएंगे.

जवाब

कई लोगों में सैक्स फैंटेसीज को ले कर डर होता है कि कहीं उन का पार्टनर उन्हें गलत न सम?ा ले या फिर उन की इच्छाओं को खारिज न कर दे. अपनी कल्पनाओं को स्वीकार करना सीखें, भले ही वे कैसी भी हों. अगर आप को अपने पार्टनर पर पूरा भरोसा है तो बिना ?ि?ाके आप उन से अपनी फैंटेसीज शेयर कर सकते हैं. सैक्स को गंभीरता से लेने के बजाय थोड़ा मस्तीमजाक की तरह लें और हर काम की तरह इसे भी प्राथमिकता दें.

आजकल सामाजिक हालत ठीक नहीं. व्यक्ति को घर के बाहरअंदर हर वक्त सतर्क रहना पड़ता है. बीमारी से खुद को बचा कर रखना है. लेकिन आप जब भी अपने पार्टनर के साथ हों, इंटीमेसी के समय शारीरिक तौर पर पार्टनर के साथ पूरी तरह से इनवौल्व होना जरूरी है. इस के लिए आप को हर चीज को महसूस करने की आदत डालनी चाहिए.

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मेरा बेटा बहुत जिद्दी है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरा 6 साल का बेटा है. पता नहीं क्यों वह दिनोंदिन जिद्दी होता जा रहा है. जो भी कहते हैं, उस का उलटा करता है. जबान चलाता है जबकि हम उस की हर बात मानते हैं. इस के बावजूद वह हर वक्त नाराज व खिंचाखिंचा सा रहता है. हमारी छोटी सी फैमिली है. हम पतिपत्नी और यह हमारा इकलौता बेटा. मुझे उस की बहुत चिंता हो रही है. इस कारण मैं तनाव में रहने लगी हूं. कुछ उपाय बताएं.

जवाब

आजकल न्यूक्लियर फैमिली होती है और अकसर पेरैंट्स को यह प्रौब्लम फेस करनी पड़ती है. खैर, समस्या है तो हल निकालना पड़ेगा. सब से पहले तो आप को यह जानने की कोशिश करनी पड़ेगी कि कहीं आप के बेटे के मन में कुछ परेशानी तो नहीं चल रही. कोई वजह जिस से वह खुश न हो लेकिन आप को शेयर नहीं कर पा रहा तो सब से पहले वह बात जानने की कोशिश आप को करनी पड़ेगी.

यदि ऐसी कोई बात नहीं है तो आप को उसे दूसरी तरह से हैंडल करना पड़ेगा. सब से पहले यदि आप चाहती हैं कि आप का बच्चा आप का और आप के फैसलों का सम्मान करे तो आप को भी उस का सम्मान करना होगा, वरना आप का बच्चा आप की अथौरिटी बिलकुल बरदाश्त नहीं करेगा. बेटे को आदेश न दे कर उसे सु?ाव और विकल्प दें और यह करते हुए धैर्य रखें, अपना आपा न खोएं.

बेटे के साथ किसी भी बात को ले कर जबरदस्ती न करें. बच्चों से जबरन कुछ करवाने से वे वही करने लगते हैं जिस के लिए उन्हें मना किया जाता है. यदि बेटा टीवी देखने में लगा हुआ है. आप खुद भी उस के साथ बैठ जाइए. उस के प्रोग्राम में अपनी दिलचस्पी दिखाएंगी तो वह आप के प्रति ज्यादा जवाबदेह बनता जाएगा. बेटे को महसूस कराएं कि आप उस से जुड़े हुए हैं. जबतब उसे गले लगाएं.

बेटा जब भी अपनी कोई बात कहे उसे ध्यान से सुनें. कुछ बच्चे जिन की मजबूत इच्छाशक्ति होती है उन की राय भी मजबूत होती है और वे कई बार बहस करने लगते हैं. अगर आप बेटे की बात पर गौर नहीं करेंगी तो वह ज्यादा जिद्दी हो जाएगा.

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बच्चे को अपनी मरजी करने दें. यदि वह अपनी मरजी के कपड़े पहनना चाहता है तो पहनने दें. हां, यदि आप को लगता है कि उस के द्वारा सलैक्ट किए गए कपड़े मौके के हिसाब से ठीक नहीं हैं तो आप उसे दोतीन औप्शन दे दीजिए, इस से वह कन्फ्यूज नहीं होगा और आसानी से फैसला कर पाएगा.

एक बात और, बेटे के जिद करने पर आप उस पर चिल्लाएंगी तो शायद वह भी पीछे नहीं रहेगा. हमेशा याद रखें कि बेटे को सम?ाने में आप को उस की मदद करनी है. इन सब बातों का ध्यान रखें, तनाव बिलकुल न लें. खुद भी खुश रहिए, बच्चे को भी खुश रखिए. घर का माहौल बच्चे पर बहुत प्रभाव डालता है.

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मैं अपने से 10 साल बड़ी तलाकशुदा महिला से प्यार करता हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 28 साल की है और मैं अपने से 10 साल बड़ी तलाकशुदा महिला से प्यार कर बैठा हूं. उस का 12 साल का एक बेटा है. वह भी मुझे प्यार करती है और मैं अब उस से शादी करना चाहता हूं लेकिन उस की शर्त है कि वह दोबारा मां नहीं बनेगी. जबकि मैं चाहता हूं मेरा भी एक बच्चा हो. इधर घरवाले मेरे लिए जोरशोर से लड़की ढूंढ़ रहे हैं.

मैं खुद ही उलझा हुआ हूं तो घरवालों को क्या बताऊं. समझ नहीं आ रहा कि मुझे उस महिला की बात मान कर उस से शादी करनी चाहिए या घरवालों की बात मानूं. आप ही मुझे कोई राह सुझाएं.

जवाब

देखिए, मैं तो यही राय दूंगी कि जब तक आप उस महिला के साथ अपने भविष्य को ले कर श्योर नहीं हैं तब तक उस के बेटे को ले कर कोई बड़ा कदम उठाने से बचें. क्या आप उस के बेटे को एक पिता की तरह प्यार करने के लिए तैयार हैं?

क्योंकि जिस बेटे की खातिर वह महिला दूसरा बच्चा पैदा करने को तैयार नहीं उसे यदि आप पिता का प्यार नहीं देंगे तो यह शादी मुझे नहीं लगता कि ज्यादा लंबे समय तक टिक पाएगी. किसी तरह टिक भी जाएगी तो तनाव की स्थिति बनी रहेगी क्योंकि बेटे के साथ आप का रवैया अच्छा नहीं रहा तो उसे बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा.

अफेयर करना एक बात है और उस अफेयर को शादी में तबदील करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. अभी तक तो सबकुछ ठीक चल रहा है लेकिन शादी के बाद सब बदल जाएगा.

सब से बड़ी अड़चन जो पहले ही नजर आ रही है कि आप बच्चा चाहते हैं और वह नहीं. इसलिए आप का निर्णय आप के अपने लिए, आप के परिवार के लिए कितना सही हो सकता है, यह आप को खुद देखना है.

अभी आप की उम्र ज्यादा नहीं. उलझनभरी जिंदगी जीने का फायदा कुछ नहीं. अपनी इच्छा पूरी करना चाहते हैं, अपनी फैमिली बनाना चाहते हैं तो घरवाले लड़की ढूंढ़ रहे हैं तो वहां शादी कर लीजिए. बाकी आप की सोच है, आप जैसा चाहें वैसा कर सकते हैं लेकिन हर पक्ष पर सोचसमझ कर निर्णय लीजिएगा.

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आपकी सेक्स लाइफ खराब कर रहा है टीवी, जानें कैसे

दिनभर के काम के बाद सबसे आरामदेह होता है मैड मेन के क्रेडिट्स पर आंखे गड़ाना और फिर अपने बिस्तर के आगोश में समा जाना. यदि आप अकेली हैं तो ऐसा करना बिल्कुल सही है, लेकिन यदि आप अपने पार्टनर के साथ हैं और फिर भी उनसे बात करने के बजाय डेरेक ऐंड मेरेडिथ देखना पसंद करती हैं तो ये चिंता की बात है.

केवल एक आप ही नहीं हैं, जिसके अच्छे-भले सेक्शुअल जीवन में, दोस्त समझे जानेवाले बुद्धू बक्से ने सेंध लगा दी है. इटली में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, ऐसे जोड़े जिनके बेडरूम में टीवी है, उनके बीच सेक्शुअल संबंधों की संख्या, ऐसे जोड़े की तुलना में जिनके बेडरूम में टीवी नहीं है, आधी होती है.

मुंबई के सेक्शुअल मेडिसिन कंसल्टेंट राज ब्रह्मभट्ट इस अध्ययन का समर्थन करते हैं. ‘‘बेडरूम में टीवी आपके सेक्शुअल जीवन को बर्बाद कर देता है,’’ वे आगे बताते हैं,‘‘इन दिनों घर के हर कमरे में टीवी होना फैशन बन गया है. लेकिन इसका विपरीत परिणाम ये है कि कई कपल्स सेक्स के लिए समय निकालने के बजाय सीरियल देखना पसंद करते हैं.’’

सेक्स विनाशक

‘‘मैं अपना पसंदीदा टीवी सीरियल, लिविंग रूम के बजाय आराम से अपने बेडरूम में देखना पसंद करूंगी,’’ कहना है पीआर एग्जेक्यूटिव रितिका साहनी, का. ‘‘पर समस्या ये है कि मेरे और मेरे पति के पसंदीदा प्रोग्राम अलग-अलग हैं. जब तक मैं अपना सीरियल देखकर सोने के लिए तैयार होती हूं, वे अपने प्रोग्राम्स, खबरें या ऐक्शन मूवीज देखना शुरू कर देते हैं. सेक्स का तो नंबर ही नहीं आ पाता.’’

एक तर्क ये हो सकता है कि रिमोट उठाकर टीवी को बंद करने की ही देर है कि अंतरंग पल जिए जा सकते हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं है. ‘‘कई बार कोई सेक्सी फिल्म देखने के बाद हम निजी पल जीने के मूड में आ जाते हैं,’’ ये बताते हुए मीडिया प्रोफेशनल तनिका बसक कहती हैं, ‘‘पर अधिकतर समय हम न्यूज देखते हैं और इसे देखकर निजता की कोई भावना नहीं उभरती.’’

रचनात्मक तरीके

राज बताते हैं, ‘‘मेरे बहुत-से पेशेंट्स बेडरूम से टीवी हटाने के मेरे सुझाव का विरोध करते हैं. पर ये महसूस करना ज़रूरी है कि एल्कोहल की ही तरह टीवी देखने से इच्छाएं तो बढ़ती हैं, लेकिन सक्रियता कम हो जाती है. अत: इसे लिविंग रूम में रखें, ताकि आप इसे अन्य परिजनों के साथ ही देखें. आप इसे देखने के समय में कटौती करने से भी शुरू कर सकते हैं. यदि आप रोज छह घंटे टीवी देखती हैं तो इसे तीन घंटों तक सीमित कर दें. और ये समय ऐसा रखें कि आप दोनों को दाम्पत्य जीवन के सहज पलों को साथ बिताने का पूरा समय मिले.’’

ये कठिन ज़रूर है, पर पूरी तरह संभव है. अपने सेक्शुअल संबंधों की गर्माहट को पुनर्जीवित करें. फिर आपको ख़ुद ही महसूस होने लगेगा कि वास्तविक जीवन का यह एपिसोड टीवी सीरियल्स के एपिसोड से कहीं ज्यादा अच्छा अनुभव है.

पीरियड्स के समय मुझे पैरों में दर्द की समस्या है, क्या यह चिंता की बात है ?

सवाल
मेरी उम्र 24 साल है. पीरियड्स के दिनों में पैरों में दर्द होता है, क्या यह चिंता की बात है?

जवाब
नहीं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. पीरियड्स के दौरान पैरों और शरीर के निचले हिस्से में दर्द आम बात है. पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द शरीर के  अन्य हिस्सों तक फैलता है. कई औरतों को यह समस्या होती है. पैरों में दर्द की एक वजह गर्भाशय में सिकुड़न भी है.

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पीरियड्स में अब नो टैंशन

अधिकतर महिलाओं के लिए पीरियड्स एक छोटी सी असुविधा होती है, लेकिन कुछ महिलाओं के लिए यह बड़ी समस्या बन जाती है. पीरियड्स का अंतराल 21 दिन से 35 दिन का हो सकता है. पीरियड्स की शुरुआत 11 से 14 वर्ष के बीच होती है. फीमेल सैक्स हारमोन ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं. कुछ टिप्स अपना कर आप इन दिनों भी टैंशन फ्री रह सकती हैं:

बेटी को पहले से कैसे समझाएं

मासिकचक्र के साथ कई प्रकार की चिंताएं और डर होते हैं. कई बच्चियां घबरा जाती हैं कि यह उन के साथ क्या हो रहा है. मासिकचक्र शुरू होने से पहले ही आप को अपनी किशोर बेटी को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से इस के लिए तैयार करना पड़ेगा. हालांकि आमतौर पर पीरियड्स 12 वर्ष की आयु में शुरू होते हैं, लेकिन कई लड़कियों में इस से बहुत पहले ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है. मासिकचक्र शुरू होने से पहले शरीर में कई बदलाव होने शुरू हो जाते हैं. ये बदलाव शारीरिक ही नहीं होते, मनोवैज्ञानिक भी होते हैं. अपनी बेटी से 10 साल की उम्र के आसपास ही इस के बारे में चर्चा करें. उसे समझाएं कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिस से हर औरत को गुजरना पड़ता है. बचपन से किशोर उम्र में कदम रखने पर शरीर किन बदलावों से गुजरता है, यह भी उसे बताएं.

कब करें डाक्टर से संपर्क

– आप के पीरियड्स अचानक 90 दिन से अधिक समय के लिए बंद हो जाएं और आप गर्भवती न हों.

-7 दिनों से अधिक समय तक ब्लीडिंग हो.

-अत्यधिक ब्लीडिंग हो.

-पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग और दर्द हो.

-पीरियड्स का अंतराल 21 दिन से कम या 35 दिन से अधिक हो.

अत्यधिक पीरियड्स से आयरन की कमी हो जाती है. इस से ऐनीमिया, थकान, त्वचा का पीला पड़ जाना, ऊर्जा की कमी, सांस फूलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस)

इसे प्रीमैंस्ट्रुअल टैंशन (पीएमटी) भी कहते हैं. कई महिलाओं में पीरियड्स के दौरान पीएमएस के लक्षण दिखाई देते हैं. इस समय वक्षस्थल में सूजन आ जाना, सिरदर्द, कमर दर्द, पेट फूलना या अधिक भूख लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इस में मुंहासे, उत्तेजना, थकान, अनिद्रा, ऊर्जा की कमी, अवसाद और मूड बदल जाना के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. तीव्र लक्षणों में आक्रामक बरताव या आत्महत्या का खयाल आना. ये लक्षण हर महीने गंभीर हो सकते हैं. तनाव इन लक्षणों को और गंभीर बना सकता है.

पीएमएस के लक्षणों से बचाव

-संतुलित भोजन का सेवन.

– खूब पानी पीना.

– धूम्रपान और एल्कोहल का सेवन न करना.

– पूरी नींद लें.

– तनाव न पालें.

– कुनकुने पानी से स्नान.

मासिकचक्र के दौरान जरूरी सावधानियां

आप पीरियड्स की चिंता न करें. उन दिनों आप अपना ध्यान रखेंगी तो आप का समय आसानी से गुजर जाएगा.

– साफसफाई का विशेष ध्यान रखें. एक ही पैड पूरा दिन न रखें, बदलती रहें.

– अगर ब्लीडिंग अधिक हो रही हो तो रात में भी एक बार पैड बदल लें.

– अगर आप को अपने दांतों का इलाज कराना है या किसी और स्वास्थ्य समस्या के लिए डाक्टर के पास जाना चाहती हैं तो न जाएं, क्योंकि इस दौरान शरीर में ऐस्ट्रोजन हारमोन का स्तर कम होता है, इसलिए दर्द अधिक होता है.

– मासिकचक्र के दौरान वैक्सिंग न कराएं.

– ठंडी चीजों जैसे दही, चावल, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स आदि के सेवन से रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिस से गर्भाशय की अंदरूनी भित्ती निकलने में समस्या आती है.

– कैफीन का सेवन कम मात्रा में करें, क्योंकि इस से रक्तनलिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिस से ब्लीडिंग रुक जाती है. इस से पेट दर्द अधिक होता है.

– अपने योनि क्षेत्र को साफ करने के लिए वर्जाइना वाश का इस्तेमाल न करें. इस की जगह गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. योनि का अपना सैल्फ क्लिंजिंग मैकेनिज्म होता है, जो अपनेआप संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को साफ कर देता है, अगर आप वैजाइना वाश का इस्तेमाल करेंगी, तो इस से नैचुरल प्रोटैक्टिव फ्लोरा मर जाएंगे.

– हमेशा ऊपर से नीचे की ओर वाश करें ताकि गुदा मार्ग से संक्रमण फैलने का डर न हो.

कई महिलाओं को जांघों या योनि क्षेत्र के आसपास रैशेज हो जाते हैं. इस से बचने के लिए साफसफाई का विशेष ध्यान रखें. समय पर पैड बदलें. इस क्षेत्र को सूखा और साफ रखें. अगर आप को फिर भी समस्या होती है, तो किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञा को दिखाएं.

मेरी शादी करने की उम्र हो गई है पर मेरे घरवाले ध्यान नहीं देते, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल की एक कुंआरी लड़की हूं. इतनी उम्र हो जाने के बाद भी मेरे घर वाले मेरी शादी नहीं कराना चाहते हैं, क्योंकि मैं घर में एकलौती कमाने वाली हूं. वे मेरी कमाई खाने के इतने ज्यादा आदी हो गए हैं कि अगर कोई मेरे लिए रिश्ता बताता भी है, तो वे उस पर ध्यान नहीं देते हैं. इस बात से मैं बहुत ज्यादा तनाव में रहती हूं. मेरा खुदकुशी करने का मन करता है. मैं क्या करूं?

जवाब

आप जैसी लाखों लड़कियां अपने घर वालों की खुदगर्जी की सजा भुगत रही हैं. घर वाले निकम्मेपन, आलसीपन और मुफ्तखोरी की आदत के चलते लड़की की शादी नहीं होने देते. खुदकुशी का खयाल मन में न आने दें. जिंदगी अपनी मरजी से जिएं और मनपसंद जगह शादी भी करें.

उन घर वालों की फिक्र न करें, जिन्हें आप की जिंदगी और भविष्य से कोई वास्ता नहीं. खाने को नहीं मिलेगा तो भूख लगने पर उन के हाथपैर खुद ब खुद चलने लगेंगे. हां, जब कभी आप को लगे कि उन्हें वाकई जरूरत है, तो छोटीमोटी मदद कर देना. इस से आप को भी सुकून मिलेगा.

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मेरे दांतों का पीलापन खूबसूरती को फीका कर देता है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल की युवती हूं. देखने में खूबसूरत हूं लेकिन मेरे दांतों का पीलापन मेरी खूबसूरती को फीका कर देता है, जबकि मैं रैग्युलर दोनों वक्त सुबह व रात को सोने से पहले ब्रश कर के सोती हूं. मैं दांतों के डाक्टर के पास नहीं जाना चाहती. कुछ आसान से घरेलू उपाय बताएं जिन्हें अपना सकूं.

जवाब

कुछ आहार ऐसे होते हैं जिन में टैनिक एसिड उच्च मात्रा में होता है जिस से दांतों में पीलापन आ जाता है. इस के अलावा कौफी और सोडा से भी दांत पीले हो सकते हैं. धूम्रपान, कुछ मैडिकल ट्रीटमैंट चल रहा हो या सही तरीके से ब्रश न करना या फिर अत्यधिक फ्लोराइड के कारण भी दांतों का पीलापन बढ़ने लगता है.

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खैर इन में कोई वजह आप को नहीं दिख रही है तो अपने खानपान पर ध्यान दें. शरीर में पोषण या कैल्शियम की कमी होगी तो कितने ही नुस्खे अपना लें, दांत सफेद नहीं होंगे. इसलिए आहार विटामिन डी और कैल्शियम से भरपूर लें. चिपचिप कैंडी, स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ का सेवन न करें.
रही बात घरेलू उपाय अपनाने की तो बेकिंग सोडा दांतों पर रगड़ें या टूथपेस्ट में मिला कर ब्रश कर सकती हैं. आप चाहें तो इस में नमक भी मिला सकती हैं. नारियल का तेल 15-20 मिनट दांतों पर लगा रहने दें फिर ब्रश कर लें. पीलापन कम होगा. हींग पाउडर को पानी में उबाल कर ठंडा कर लें. दिन में 2 बार इस से कुल्ला करें. ये कुछ घरेलू उपाय हैं जो आप अपना सकती हैं.

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5 टिप्स: सिंगल सेक्स को लेकर युवतियों के बदलते विचार

परिवर्तन के इस दौर में न सिर्फ युवतियों के विचार बदले हैं बल्कि उस से कई कदम आगे वे दैहिक स्वतंत्रता की बोल्ड परिभाषा को नए कलेवर में गढ़ती और बुनती नजर आ रही हैं.

1. सेक्सुअलल बोल्डनैस का बोलबाला

आज युवतियों ने सेक्स को अपने बोल्ड व बिंदास अंदाज से बदल दिया है. युवतियां न केवल सोशल फोरम में व सार्वजनिक जगहों पर सेक्स जैसे बोल्ड इश्यू को सरेआम उठा रही हैं बल्कि उस के पक्ष में अपना मजबूत तर्क भी पेश कर रही हैं. वे कैरियर ओरिऐंटिड होने के साथसाथ सेक्स ओरिऐंटिड भी हैं. सेक्स के टैबू होने के मिथक को वे काफी पीछे छोड़ चुकी हैं. वे सेक्स को बुराई नहीं समझतीं बल्कि उस का भरपूर लुत्फ उठाना चाहती हैं.

2. सिंगल सेक्स की पैरोकार आज की युवतियां

कुछ समय पहले तक युवतियों के अकेले रहने या सफर करने पर सवाल उठाए जाते थे, पर जवान होती युवापीढ़ी ने वर्षों से चली आ रही नैतिक व सेक्स से जुड़े सामाजिक मूल्यों की अपनी तरह से व्याख्या की है. सहशिक्षा व बौद्धिक विकास ने इसे बदलने में काफी सहायता की है. शिक्षित स्वतंत्र कम्युनिटी के इस बोल्ड अंदाज ने आम मध्यवर्गीय सोच में भी अपनी पैठ बना ली है. निम्न वर्गों में तो पहले से ही स्वतंत्रता थी. बगावती सुरों ने आजादी पाने की राह आसान कर दी है. युवतियों की आर्थिक स्वतंत्रता ने भी इस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.  सिंगल रहने वाली अधिकतर युवतियां इस सेक्सुअलल फ्रीडम का बेबाकी से फायदा उठाती नजर आती हैं. वे सेक्स को ऐंजौय करने में हिचकिचाती नहीं हैं. यह भी शरीर की एक आवश्यकता है.

3. सेफ सेक्स, सेफ लाइफ का फंडा

आधी आबादी का एक बड़ा वर्ग सेफ सेक्स को तरजीह देता है. सेक्स अब इंटरकोर्स का माध्यम मात्र नहीं बल्कि सुरक्षित व आनंददाई बन गया है. युवतियां अलर्ट हैं, जागरूक हैं और अपनी सेहत को ले कर सजग भी हैं. सेक्सुअलल इंटरकोर्स के दौरान वे दुनियाभर के उपाय जैसे पिल्स, कंडोम आदि का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रही हैं. सिंगल रहने वाली युवतियां अब सेक्स का भी मजा ले रही हैं और फिटनैस भी बरकरार रख रही हैं.

4. सिंगल सेक्स के फायदे

वर्जनाएं अब टूट रही हैं. पढ़ाई, नौकरी या कामकाज के सिलसिले में युवतियां अपनी जद की सीमाएं लांघ रही हैं. ऐसे में बेरोकटोक वाली एकाकी जिंदगी उन्हें ज्यादा रास आ रही है. माना कि आम भारतीय परिवारों में विवाहपूर्व सेक्स को अभी भी वर्जित समझा जाता है और इसे चोरीछिपे ही अंजाम दिया जाता है, लेकिन यही रोकटोक युवाओं को सेक्स के और अधिक करीब खींच कर ला रही है. वैसे तो सिंगल सेक्स अपनेआप में एक फ्रीडम का एहसास कराता है, पर इस के कुछ फायदे भी हैं जैसे :

  •    इस से बोल्डनैस का एहसास होता है.
  •    यह कथित वर्जनाओं को तोड़ने का चरम एहसास कराता है.

माना कि सिंगल सेक्स आप को रियल सेक्सुअलल फन दे सकता है, पर अपनी सेक्सुअलल प्राइवेसी को ले कर सतर्क भी रहें. सेक्सुअलल फ्रीडम की भी लिमिट तय करें तभी आप इस के आनंद के चरम पर पहुंच सकती हैं और इस के बिंदास अंदाज में रंग सकती हैं. सेक्सुअलल इंडिपैंडैंसी जहां आप को बेबाक व बोल्ड बनाती है वहीं मोरल पुलिसिंग का शिकार भी इसलिए फन के साथ केयर का भी खयाल रखें.

5. सिंगल सेक्स के नुकसान

भले ही सिंगल रहने वाली युवतियां सेक्स को ले कर मुखरित हों पर इस के अपने कुछ नुकसान भी हैं:

  •   मल्टी पार्टनर्स से संक्रमण के खतरे बढ़ जाते हैं.
  •  चीटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है.
  •  लंबे समय तक ऐसी फ्रीडम आप को फिजिकल प्रौब्लम्स भी दे सकती है.

कुछ समय पहले मेरे पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी, इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

सवाल-

मेरी उम्र 25 साल है. कुछ समय पहले मेरे अंग से पेशाब के साथसाथ धातु गिरती थी. इस सिलसिले में एक झोलाछाप डाक्टर ने मुझ से कहा था कि तुम गुप्त रोग से पीडि़त हो. इस से तुम्हारी शादी पर बुरा असर पड़ेगा. इस बात से मैं बहुत तनाव में हूं. सलाह दें?

जवाब-

धातु एक ऐसा लक्षण है जो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृतियों में पाया जाता है. इस में मरीजों को समय से पहले पस्त होना या नामर्दी की शिकायत होती है और उन्हें लगता है कि उन के पेशाब के साथ वीर्य भी निकलता है.

इस का इलाज दवाओं से किया जाता है और साथ ही, गलत धारणाओं को दूर करने में मनोवैज्ञानिक सलाह भी कारगर साबित होती है.

कमजोर न पड़ जाएं सेक्स संबंध

शहर कहें या गांव, भारतीय और इसलामिक समाज में स्त्रियों के लिए सेक्स पर चर्चा तथा इस मामले में अपनी इच्छाओं की अभिव्यक्ति को नीच मानसिकता कह कर अनुत्साहित किया जाता है. वैसी स्त्रियां जो अपने पार्टनर से सेक्स के बारे में अपनी इच्छाएं खुल कर कहना चाहती हैं सभ्य और सुसंस्कृत नहीं मानी जातीं. बड़े शहरों की बिंदास लड़कियों को छोड़ दें, तो बाकी सेक्स को पति की सेवा का ही अहम हिस्सा मान कर चलती हैं तथा अपनी इच्छाअनिच्छा पति से बोलने की जरूरत महसूस नहीं करतीं.

1. भेदभाव क्यों

थोड़ा गहराई में जाएं तो पाएंगे कि सेक्स की इच्छा और क्षमता को मानव जीवन का प्रधान तत्त्व समझा जा सकता है. सेक्स जीवन को नियंत्रित करने में जीववैज्ञानिक, नैतिक, सांस्कृतिक, कानूनी, धार्मिक आदि विभिन्न दृष्टिकोणों का योगदान होता है यानी सेक्स जीवन और इस की अभिव्यक्ति पर इन बातों का बहुत प्रभाव रहता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने व्यक्ति के सेक्स जीवन की महत्ता पर बल देते हुए इस के प्रति सकारात्मक और सम्माननीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है. इस संगठन ने माना कि अपने साथी के साथ सेक्स संबंध बिना किसी भेदभाव, हिंसा और शारीरिक, मानसिक शोषण के पूरी ऊर्जा और भावनात्मक संतुलन के साथ होना चाहिए.

सवाल अहम है कि हमारे देश में जहां स्त्रियों पर सेक्स से संबंधित बलात्कार, मानसिक शोषण, घरेलू हिंसा बदस्तूर जारी है, स्त्री के सेक्स संबंधी अधिकार और सेक्स के प्रति खुली राय क्या स्वीकार्य है?

अगर जागरूकता आ जाए और स्त्रियां भी इस मामले में अपनी भावनाओं को पूरा महत्त्व दें व पार्टनर से खुली बातचीत करें तो बहुत फायदे मिल सकते हैं.

2. आपस में दोस्ती का रिश्ता:

अगर पतिपत्नी के बीच दोस्ती की भावना विकसित हो जाए तो इन के बीच ऊंचनीच, बड़ेछोटे का अहंकारपूर्ण भेद अपनेआप मिट जाए. दोनों का आपस में एकदूसरे की सेक्स इच्छाओं के बारे में बताने से यह आसानी से हो सकता है.

3. व्यक्तित्व का विकास:

अगर स्त्री सेक्स के मामले में सिर्फ समर्पिता न रह कर पसंदनापसंद को जाहिर करे, तो वह पुरुष पार्टनर के दिल में आसानी से अपने लिए रुचि जगा सकती है, जो व्यक्तित्व विकास में सहायक है.

4. आत्मविश्वास की बढ़ोत्तरी:

सिर्फ पुरुष की इच्छा पर चलना सेक्स जीवन में एक मशीनी प्रभाव उत्पन्न करता है, लेकिन स्त्री भी इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाए तो जीवन में फिर से नई ऊर्जा का संचार हो जाए.

वैसे तो भारतीय परिवेश को अभी भी लंबा वक्त लगेगा कुसंस्कारों के बंधनों से मुक्त होने में, लेकिन उन कारकों के बारे में बातें कर पिछड़ी मानसिकता को कुछ हद तक कम करने की कोशिश तो कर ही सकते हैं.

बचपन से ही पारिवारिक माहौल में लड़कियों को यह शिक्षा मिलती है कि सेक्स निकृष्ट है और इस से लड़कियों को दूर रहना चाहिए.

चरित्र को भी सेक्स के साथ जोड़ा जाता है. सेक्स की इच्छा को दबा कर या इस के बारे में अपनी राय को छिपा कर ही सद्चरित्र रहा जा सकता है.

चरित्र को परिवार की इज्जत के साथ जोड़ा जाता है. लड़की परिवार की इज्जत मानी जाती है यानी सेक्स के बारे में निजी खुली सोच दुष्चरित्र होने की निशानी है, जिस से परिवार की इज्जत मिट्टी में मिल जाती है.

शादी के बाद यही संस्कार स्त्री में मूलरूप से जमे होते हैं और वह सेक्स के बारे में पति से स्वयं अपनी इच्छा बताने में भारी संकोच महसूस करती है. इस मामले में आम पुरुषों की सोच भी परंपरावादी सामंती प्रथा से प्रभावित लगती है. उन्हें अपनी पत्नी का सेक्स मामले में खुलना और इच्छा जाहिर करना स्त्री सभ्यता के विपरीत लगता है. इस सोच के साथ पुरुष स्त्रियों का कई बार मजाक भी उड़ाते हैं या उन की भावनाओं की कद्र नहीं करते. तब स्त्री के पास भी अपनी खोल में सिमट जाने के अलावा और कोई चारा नहीं होता. बाद में यही पुरुष सेक्स के वक्त स्त्री के मृत जैसा पड़े रहने के उलाहने भी देते हैं, जो संबंध में भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं.

स्त्री जब इन सारी बाधाओं को पार कर समान मूल्य और अधिकार का आनंद ले पाएगी तभी वह एक भोग्या की तरह नहीं एक सही साथी की तरह जिंदगी के इन खुशगवार पलों का उपभोग कर पाएगी.

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