मर्द अपने जीवनसाथी में ढूंढ़ते हैं यह खास गुण

हर पुरुष अपनी होनी वाले जीवनसाथी के अंदर कुछ ऐसे गुण ढूंढ़ता है जो भविष्य में उनके रिश्ते के लिए अच्छे हों. जीवनसाथी अच्छा और समझदार मिले तो जिंदगी बहुत आसानी से गुजारी जा सकती है. अगर उन्हें अपनी जीवनसाथी में कुछ ऐसे गुण मिल जाएं जिनकी उन्हें तलाश हो, तो वह उन्हें हर तरह से खुश रखने की कोशिश करते हैं.

1. समझदारी

पुरुष अपने जीवनसाथी को लेकर हमेशा सोचते हैं कि वह बहुत समझदार हो. हर छोटी-बड़ी बात को ध्यानपूर्वक सुनने और समझने की क्षमता हो ताकि भविष्य में किसी बात को लेकर परेशानी न हो. अगर वह बातों को समझेगी तो रिश्ते में संतुलन बना रहेगा. अगर आगे भविष्य में कोई समस्या आएगी तो दोनों साथ मिलकर उसका हल निकालने की कोशिश करेंगे.

2. परिवार के हित के बारे में सोचने वाली

हर पुरुष चाहता है कि उसकी जीवनसाथी उसके परिवार के बारे में हमेशा सोचे. परिवार से जुड़े हर इंसान का उतना ही सम्मान करे जितना वह अपने परिवार के लोगों का करती है. कभी किसी को कोई ऐसी बात ना बोलें जिससे किसी का दिल दुखे या किसी को बुरा महसूस हो क्योंकि परिवार जीवन का सबसे अहम हिस्सा होता है.

3. मिलनसार हो

पुरुषों को ऐसी साथी चाहिए होती है जो किसी से भी आसानी से बात कर ले. अपने दोस्तों के साथ-साथ उनके दोस्तों से भी बातें करे. वह दूसरों की भावनाओं की कद्र करे. अपने व्यवहार से सबका दिल जीत ले.

4. लक्ष्य पर ध्यान हो

ऐसी महिलाएं जो अपने लक्ष्य को लेकर फोकस होती हैं वह खुद की जिम्मेदारी लेने के काबिल होती हैं. उन्हें भविष्य में किसी के ऊपर आश्रित नहीं होना पड़ता. भविष्य में अपने साथी को भी हर तरह से समर्थन देती हैं. चाहे वह घर से जुड़ी कोई बात हो या अन्य.

मेरा मंगेतर सेक्स करना चाहता है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 25 वर्षीय युवती हूं. 2-3 महीने बाद मेरी शादी होने वाली है. मंगेतर एक बड़ी कंपनी में अच्छे ओहदे पर कार्यरत है. मगर इस के बावजूद एक चिंता भी है. दरअसल, मंगेतर शादी से पहले संबंध बनाना चाहता है. इतना ही नहीं वह मोबाइल पर पोर्न वीडियो भी भेजता रहता है और जब भी बात करो तो सैक्स पर बातचीत अधिक करना चाहता है. वीडियो कौल के दौरान वह मुझे न्यूड होने के लिए भी बोलता है. कहीं मेरा मंगेतर किसी मानसिक विकृति का शिकार तो नहीं है? मुझे क्या करना चाहिए, कृपया सलाह दें?

जवाब

शादी से पहले सैक्स संबंध बनाना कतई उचित नहीं है. अगर आप का मंगेतर आप पर इस के लिए दबाव डाल रहा है, तो उसे साफ मना कर दें. रही बात उस के किसी मानसिक विकृति से ग्रस्त होने की तो यह तभी जाना जा सकता है जब कोई उस के नजदीक रहे.

अगर आप का मंगेतर सिर्फ सैक्स की ही बात करता है, पोर्न फिल्में देखने का शौकीन है, तो जाहिर है यह एक विकृति ही है, जिसे सैक्स ऐडिक्शन कहते हैं.

सैक्स ऐडिक्शन यानी सैक्स की लत एक मानसिक रोग है, जो न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य, बल्कि कैरियर के साथसाथ रिश्तों को भी प्रभावित करता है.

शोधकर्ता मानते हैं कि इस से पीड़ित व्यक्ति सैक्स फैंटेसी में खोया रहता है और उसे सैक्स पर बातें करना, पोर्न मूवी देखना, सैक्स करना अच्छा लगता है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि सैक्स के मामले में खुद पर काबू नहीं रखने वाले लोग अपने साथसाथ दूसरों की जिंदगी भी प्रभावित कर देते हैं. यदि ऐसा व्यक्ति खुद को परेशान या तनाव में महसूस करता है तो वह बारबार सैक्स करना चाहता है ताकि उस का तनाव यानी स्ट्रैस कम हो सके. आप का मंगेतर सैक्स ऐडिक्शन से पीड़ित है, यह तभी जाना जा सकता है जब वह खुद बताए या उस का कोई नजदीकी.

आप जो भी करें सोचसमझ कर और सावधानीपूर्वक. शादी गुड्डेगुड़ियों का खेल नहीं है. अगर आप को मंगेतर के व्यवहार से किसी विकृति का पता लग रहा हो तो आप यह खुद निर्णय लें कि आप को उस के साथ शादी करनी है अथवा नहीं.

मेरा मंगेतर तारीफ नहीं करता, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 26 वर्षीय युवती हूं, जल्दी ही मेरी शादी होने वाली है. मैं और मेरा मंगेतर अकसर मिलतेजुलते हैं. मैं जब भी उस से मिलने जाती हूं, अपनी तरफ से काफी बनसंवर कर जाती हूं. चाहती हूं कि वह मेरी तारीफ करे कि मैं कैसी लग रही हूं. लेकिन जब मैं पूछती हूं तो ही बताता है, खुद अपनेआप तारीफ नहीं करता. मुझे यह अच्छा नहीं लगता. कैसे पता करूं कि वह मेरी ड्रैसिंग सैंस के बारे में क्या महसूस कर रहा है?

जवाब

सब का अपनाअपना स्वभाव होता है. हो सकता है अभी आप का मंगेतर आप से ज्यादा खुला न हो. या हो सकता है आप के मंगेतर को पता ही न हो कि लड़कियों को खुश कैसे किया जाता है. या यह भी हो सकता है वह इन सब बातों को महत्त्व ही न देता हो.

हमारी राय यह है कि आप खुद ही अपने पार्टनर से पूछें कि ‘क्या मेरे पास एक अच्छा ड्रैसिंग सैंस है. आप को पता होना चाहिए कि वह आप के ड्रैसिंग सैंस के बारे में क्या महसूस करता है. हो सकता है कि आप का अपना स्टाइलिंग सैंस हो, लेकिन अगर आप को पार्टनर का आइडिया अच्छा लगे, तो आप को उस पर ध्यान देना चाहिए.

इस के अलावा, कभीकभी अपने पार्टनर को इंप्रैस करने के लिए आप खुद को उस की पसंद के अनुसार ड्रैसअप करें. इस से रिश्ते को स्पाइसअप करने में मदद मिलती है. लड़कों के लिए अपने पार्टनर से इमोशनल बौंडिंग के साथसाथ फिजिकल अपीयरैंस भी काफी माने रखता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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पति पत्नी का रिश्ता : तुम नहीं तो कुछ भी नहीं

‘मैं ने तो तुम से हमेशा ही मुहब्बत की है, तुम्हारे  मना करने से हकीकत नहीं बदलेगी…’ पतिपत्नी का रिश्ता कुछ इस तरह का हो तो ही संबंध लंबे समय तक खुशनुमा रह सकते हैं. पतिपत्नी में विवाद होने पर भी मुहब्बत और निर्भरता कम नहीं होती. ‘तुम ने मेरे लिए क्या किया?’ या ‘तुम ने मेरे साथ ऐसे क्यों किया?’ कहने से पतिपत्नी का प्यार कम नहीं होता.

अफसोस यह है कि आज पतिपत्नी के बीच तर्क व शिक्षा के सीमेंट के पुल बनने के बाद भी उन तत्त्वों की कमी नहीं है, जो पुलों में मोटे छेद बनाने में लगे हैं और जिन में फंस कर पतिपत्नी एक की मुहब्बत को नकार कर शून्य बना देते हैं. औरतों की सुरक्षा और उन के सशक्तीकरण के नाम पर बन रहे कानून और पहले के बने कानूनों का फैलता दायरा पतिपत्नी के संभावित प्रगाढ़ प्रेम की सीमेंट को रेतीला बना रहा है.

आज के युग में कोई लड़का खुद को लड़की पर नहीं थोपता और न ही लड़की लड़के के गले में बंदूक की नाल के बल पर बांधी जाती है. हर विवाह खुशियों का जखीरा होता है जिस में पूरा परिवार शामिल होता है. हैसियत से ज्यादा खर्च किया जाता है और वरवधू को यह एहसास दिलाया जाता है कि उन के बंधन को हमेशा तरोताजा देखने में कितने लोग उत्सुक हैं. फिर भी उन मामलों की कमी नहीं है जिन में लाल या कढ़े हुए जोड़ों में चमचमाती लड़कियां कुछ दिनों के बाद अदालतों में काले कोटों के बीच या पुलिस स्टेशनों में खाकी वरदियों के बीच दिखने लगती हैं.

-पतिपत्नी का संबंध असल में तो कुछ ऐसा है

‘हमारा अंदाज कुछ ऐसा है, जब हम बोलते हैं तो फुहारों की तरह बरस जाते हैं और जब चुप रहते हैं तो सन्नाटे से वे तरस जाते हैं…’ पर कानून उस बरसने को तूफान बना रहा है और चुप्पी को जीवनपर्यंत की सजा दे रहा है. यह अफसोस है कि जिस कानून को संबंधों को मजबूत करना था, विवादों को हल करना था, समस्याओं को दूर करने की कोशिश करना था, हदों की लाइनें खींचना था वह अब सिर्फ और सिर्फ अलग रहना सिखा रहा है.

‘किसी के साथ हमेशा रहना चाहते हो, तो उस से थोड़ा दूरदूर रहो’ को बदल कर औरतों की सुरक्षा के कानूनों ने ‘किसी के साथ हमेशा रहना आखिर क्यों जरूरी है, उस से सदा के लिए दूर रहो’ बना डाला है. कठिनाई यह है कि देश के विकास के नारों और गौरक्षा, सीमा रक्षा, नौकरी रक्षा में उलझे नेताओं को परिवार रक्षा का खयाल तक नहीं है और उन्हें नहीं मालूम कि किस तरह पतिपत्नी अलगाव के बाद एक दुखी व तनाव की जिंदगी जीते हैं. जिस कठिनाई को वे पहले असहनीय मानते थे उस से वे उस आग में कूद जाते हैं, जो पूरे जीवन को राख बना देती है. अफसोस यह आग कानून हमेशा जलाए ही नहीं रखता, हर गली के कोने पर इस का अलाव रख दिया गया है.

‘जो ले जाओ (ए कानून) मेरी नींद सुखचैन उफ भी कैसे करेंगे हम,
अब तो ख्वाब भी गए, चैन भी गया
जीने को जिंदा लाश बची है और बस तनहाई साथ में है…’

जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर जब चाहिए हो किसी का साथ

अकेलेपन की टीस बेहद पीड़ादायक होती है. इस के एहसास की पीड़ा तब तक इंसान को महसूस नहीं होती है जब तक वह इस का भुक्तभोगी न हो. इस अकेलेपन को दूर करने का सब से बड़ा संबल है, एक साथी या जीवनसाथी का होना. साथी की जरूरत जवानी में तो होती ही है पर बुढ़ापे में अधिक होती है. चाहे स्त्री हो या पुरुष, जिंदगी की अन्य जरूरतों की तरह ही शारीरिक जरूरत भी हर इंसान की एक अहम जरूरत है, जो यौवन में ही नहीं, यौवन की दहलीज के पार भी महसूस होती है.

वृद्धावस्था में किसी की शादी की बात सुन कर अकसर हम सब चौंक जाते हैं. उसे दोषी करार देते हैं. पर क्यों? इस के पीछे क्या कारण है, उस ओर हम ध्यान नहीं देते. ‘एक महिला ने 62 साल की उम्र में अपना विवाह बड़ी धूमधाम से किया…’ अखबार में छपी इस खबर ने कुछ पाठकों को जरूर चौंका दिया होगा पर यह घटना न तो असामान्य है, न अमानवीय. मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से अकेले रहने की टीस से नजात पाने के लिए हर इंसान बेचैन रहता है. वह इस कैद से बाहर निकल कर, खुली आबोहवा में सांस ले कर जीना चाहता है. क्या यह अपराध है?

बचपन और किशोरावस्था में इस अकेलेपन के एहसास से इंसान पूरी तरह से अनभिज्ञ रहता है. जवानी में उम्र के जोश और उत्साह के उन्माद में डूबा रहता है. इस भागदौड़ में कब उस की जवानी बीत जाती है, उसे पता ही नहीं चल पाता है. जब वह वृद्धावस्था में कदम रखता है, तो इस सत्य से रूबरू होता है. और जब उसे इस का एहसास होता है, तो वक्त के सारे पंछी उस के हाथों से उड़ चुके होते हैं.

यह एकाकीपन क्या है, क्या होता है, इस का विश्लेषण किया गया. इस से होने वाले नुकसान के बारे में रिसर्च करने पर परिणामस्वरूप बहुत सारे तथ्य सामने आए. समाज के अलगअलग वर्गों और समुदायों के लोगों से बातचीत की गई.

मुंबई के उपनगर बोरीवली की एक मनोचिकित्सक डा. सुमन कालरा, 18 वर्षों से साइकेट्रिक क्लिनिक चला रही हैं. जाहिर है इस विषय में उन्हें प्रगाढ़ अनुभव है. मेरे प्रश्न पर वे मुसकराती हैं और फिर विस्तार से बताती हैं, ‘‘मेरे पास तरहतरह के रोगी आते हैं. उन में जो 50 साल से अधिक उम्र वाले हैं, चाहे पुरुष हों या स्त्री, उन के रोग का मुख्य कारण देखा गया है, ‘जीवन का एकाकीपन.’ यही उन्हें सब से ज्यादा तकलीफ देता है.

‘‘जब धीरेधीरे सभी सगेसंबंधी, मित्र, रिश्तेदार उन्हें छोड़ कर अपनेअपने परिवार में व्यस्त होने लगते हैं, तो बुढ़ापे की ओर अग्रसर, ये एकाकी या चिरकुंआरे लोग, समाज में अलगथलग पड़ जाते हैं और अकेलापन उन के जीवन में दंश देना शुरू कर देता है, जो उन्हें धीरेधीरे असामान्य बना देता है.’’

सैक्स की आवश्यकता और उस की अनिवार्यता को पूरी तरह स्वीकारती, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, डा. रति माथुर बताती हैं, ‘‘जीवन क्या है? परिस्थितिस्वरूप आते बदलाव का नाम ही जीवन है. उम्र के अनुसार शारीरिक बदलाव होते हैं, और यही बदलाव नईनई जरूरतों को जन्म देते हैं. शारीरिक जरूरतों की भी एक खास उम्र हुआ करती है जब विपरीत सैक्स के प्रति अनायास ही चाहेअनचाहे आकर्षण पैदा होने लगता है और उस का साथ अनायास ही अच्छा लगने लगता है. लेकिन 50 की उम्र के बाद, शरीर की सैक्स की मांग कम होने लगती है. ऐसे समय में मानवीय भावनाओं की मांग ज्यादा अहम हो जाती है.’’

डा. रति ने काफी सुलझे हुए तरीके से हमें समझाया कि बढ़ती उम्र में कई वजहों से सहवास की अभिलाषा अवश्य कम हो जाती है पर ‘साथ’ की अभिलाषा खत्म नहीं होती और ‘साथ’ न मिलने पर भावनात्मक पीड़ा होने लगती है.

एक विदेशी फर्म की मार्केटिंग मैनेजर कादंबरी सहाय 59 साल की हैं. अविवाहित कादंबरी को अब अपना अकेलापन खलने लगा है. पारिवारिक जिम्मेदारियां और अपने छोटे भाईबहनों को पढ़ानालिखाना तथा उन की शादी का उत्तरदायित्व भी कादंबरी ने ही उठाया है, जिन के लिए उन्होंने अपनी शादी और अपना भविष्य दांव पर लगा दिया था. अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाने के बाद विडंबना ऐसी कि अब वही अपने लोग, जिन के लिए कादंबरी ने अपनी वैवाहिक आवश्यकता की कुर्बानी दी, उन को गैरजरूरी व भार समझने लगे हैं.

अगले साल रिटायर होने के बाद आने वाला अकेलापन सोच कर कादंबरी कांप उठती हैं. मुंबई में अपना फ्लैट है. घर में आराम के सभी साधन मौजूद हैं. बैंक बैलेंस भी अच्छाखासा है, पर साथ रहने वाला कोई नहीं है.

शारीरिक जरूरतों की बात पर कादंबरी बिना किसी लागलपेट के कहती हैं, ‘‘देखिए, जीवन का एक अटूट हिस्सा है सैक्स. पर मानवीय भावनाओं को मैं ज्यादा अहम मानती हूं. जब अपनों से दिल टूट जाता है, तो ऐसी जिंदगी का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता. इसीलिए अब मैं जिंदगी को पूरी तरह से जीने में यकीन करने लगी हूं. महिला मित्रों के साथसाथ मेरे कुछ पुरुष मित्र भी हैं.

‘‘हम लोग आउटिंग पार्टियां करते रहते हैं, एंजौय करते हैं. पर जब मैं उस टीस के बारे में सोचती हूं, जो मेरे भाईबहन ने मुझे दी है, जिन के लिए मैं ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया है, तो बहुत तकलीफ होती है, बहुत अकेलापन सा लगने लगता है.’’ यह कहने के साथ उन की आंखें भर आईं.

कादंबरी के साथ काम करने वाली उन की ही तरह अविवाहित, फ्लोरिया डिसूजा ने बताया, ‘‘मैं व्यक्तिगत रूप से शारीरिक संबंध को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देती हूं, पर सैक्स की इच्छा को दबा कर दफन करने में भी विश्वास नहीं करती हूं. जहां तक सैक्स की बात है, मुझे अच्छी तरह से याद है कि मेनोपौज तक, जब मैं 48 साल की थी, उन दिनों तक मैं इसे बहुत महत्त्वपूर्ण समझा करती थी.

‘‘यह भी सच है कि अकेलेपन की वजह से सैक्स की इच्छा सामान्य से कुछ अधिक ही हुआ करती है. शायद यह असुरक्षा की भावना रहती होगी या फिर वृद्ध होने के एहसास का भय, पता नहीं? वैसे यह मेरा व्यक्तिगत विचार है.’’

सूरत में अपना क्लिनिक चलाने वाले डा. राहुल जैन से जब जीवन में आने वाले अकेलेपन व सैक्स पर बात हुई, तो उन्होंने बताया, ‘‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए हम सभी को ही परिवार व समाज की आवश्यकता तो होगी ही. अकेलापन जिंदगी को दीमक की तरह खाने लगता है. परंतु मैडिकल साइंस का कुछ और ही कहना है.

‘‘मैडिकल साइंस के हिसाब से, कभीकभी इस का कारण शरीर के कुछ खास हार्मोन्स की गैरमौजूदगी भी हुआ करती है. फ्राइब्रायडो या एडीनी मायेसिस की समस्या अकसर महिलाओं में सैक्स की इच्छा को परोक्षरूप से और बढ़ा देती है. यह बदलाव पुरुषों में भी आता है, पर महिलाओं में कुछ ज्यादा ही आता है. यह विशेष बदलाव महिलाओं में व्यग्रता, अति संवेदनशीलता और अधीरता को बढ़ा देता है. भावनाएं बेचैनी का रूप धारण कर लेती हैं और यही बदलाव धीरेधीरे आदत में परिवर्तित हो जाया करता है. फलस्वरूप, सैक्स की इच्छा बारबार उठती रहती है. इसे मैडिकल की भाषा में पीएमएम यानी पोस्ट मैंस्टुअल मूडस्विंग कहते हैं.

मशहूर जरमन गाइनीकोलौजिस्ट ई डब्लू फेब्रक्स की चर्चित पुस्तक ‘स्पींस्टर ऐंड देअर डिजायर्स’ में लिखा है कि जो भी स्त्री या पुरुष अधिक उम्र तक अविवाहित रहते हैं, वे प्राकृतिक नियमों की अवहेलना और उल्लंघन करते हैं. प्राकृतिक नियमों को तोड़ कर जो अविवाहित रहने का फैसला करते हैं, वे अपने प्रति अन्याय करते हैं.

सैक्स इंसान के जीवन की आवश्यकता ही नहीं, अनिवार्यताओं में एक है. सैक्स इंसान की कुंठाओं को रिलीज कर उसे सामान्य बने रहने में सहायता करता है और साथी पति या पत्नी, को समाज में स्थान और प्रतिष्ठा दिलाता है.

मुंबई की एक संस्था है महाराष्ट्र नारी उत्थान मंडल जिस ने विधवा विवाह और तलाकशुदा महिलाओं का दोबारा विवाह कराने का बीड़ा उठाया है. इस मंडल की संचालिका ममता राज्याध्यक्ष, महिलाओं के अविवाहित रहने की घोर विरोधी हैं. 17 साल से इस मंडल का संचालन कर रही ममता अब तक 250 से भी अधिक पुनर्विवाह करवा चुकी हैं. इन में ज्यादातर महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें शादी के लिए राजी करना टेढ़ी खीर था.

ममता बताती हैं, ‘‘एक ओर तलाकशुदा स्त्रियां, अपनी एक शादी के टूटने से ही इतनी विचलित और भयभीत हो उठती हैं कि दोबारा विवाह करने और किसी दूसरे पुरुष के साथ जीवन बिताने को सोच पाना भी उन्हें कठिन सा लगने लगता है तो दूसरी ओर विधवाओं की अलग ही समस्याएं हैं. पति की मृत्यु के बाद वे अपने पति की याद में खोईखोई सी रहती हैं. उन के लिए किसी और व्यक्ति के साथ रहने या शारीरिक संबंध बनाने व शादी करने की बात उन्हें रास ही नहीं आती.’’

उन्होंने आगे बताया कि दोनों ही मामलों में उन्हें बहुत ही जद्दोजेहद करनी पड़ती है, पर वे इसे भी एंजौय करती हैं. वे कहती हैं, ‘‘कार्य जितना कठिन होता है, उस की संतुष्टि उतनी ही अधिक हुआ करती है. मुझे ऐसी महिलाओं को प्रेरित करने में ऐंडवैचर सा आनंद मिलता है.’’

संख्या की दृष्टि से अविवाहित महिलाओं और पुरुषों की एक बड़ी तादाद मैट्रो शहरों में रह रही है. कारण चाहे जो भी हो, कभी जिंदगी की व्यस्तता होती है, तो कभी कोई सही जीवनसाथी  का न मिल पाना या फिर प्रेम में विफलता का सदमा. पर अविवाहित लोगों का जीवन, उम्र के अंतिम पड़ाव में बहुत ही दुखदाई हो जाता है.

उम्र के उस पड़ाव पर, जब किसी साथी की सब से ज्यादा जरूरत हुआ करती है, अकेलापन मिले तो आप समझ सकते हैं कि यह उसे कितनी टीस देगा. शारीरिक भूख की तृष्णा भले ही उस उम्र में कम हो पर भावनात्मक रूप से तितरबितर सा उस का जीवन अवश्य उसे कचोटता रहेगा. और अकेलेपन के लिए हो रहे पछतावे की आग उसे क्षणक्षण जलाती रहती है.

कुंआरे रहने वाले लोग, अपनेआप को भले ही तरहतरह की तसल्लियों से समझाते रहें, अपने इस निर्णय की सराहना करते रहें, पर जब आसपास का एकाकीपन उन्हें डंसता होगा, तो एक पछतावे की आह अवश्य उन के हृदय से उठती होगी. दरअसल, सचाई तो सचाई ही है. सचाई से आंख चुराई जा सकती है, पर मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है.

मेरी ननद बुरी संगत से प्रभावित हो रही है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी ननद किसी लड़के से 8 सालों से रिलेशनशिप में है. हालांकि वह कहती है कि उन्होंने कभी मर्यादा की सीमारेखा नहीं लांघी है, फिर भी मुझ डर लगता है कि वह कभी कोई गलत फैसला न ले ले. उसने यह बात घर में सभी से छिपा रखी है. मुझे भी इस बात की जानकारी अनजाने में ही हो गई है. अब मुझे लगता है कि यह बात मुझे अपने पति व सास को बता देनी चाहिए. पर कहीं ननद मुझ से हमेशा के लिए खफा न हो जाए. क्या यह ठीक रहेगा?

जवाब

आप अपनी ननद की नाराजगी की चिंता किए बगैर इस बात से घर वालों को अवगत कराएं, क्योंकि यदि जानेअनजाने कल को उस के जीवन में कुछ गलत होता है तो आप को सारी उम्र इस बात का मलाल रहेगा.

मेरी पत्नी को सेक्स में इंटरेस्ट नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 35 साल का शादीशुदा मर्द हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. पिछले कुछ समय से मेरी पत्नी मु झ से दूरी बना कर रख रही है. वैसे, वह स्वभाव की बहुत अच्छी है और मेरा व बच्चों का भी बहुत खयाल रखती है. लेकिन समस्या यह है कि वह अब मेरे प्रेम प्रस्ताव को टाल देती है. जब भी मैं रात को बिस्तर पर उस के पास जाता हूं, तो वह  झिड़क देती है. वह कहती है कि अब बच्चे बड़े हो रहे हैं, ऐसे में यह नौटंकी उसे पसंद नहीं है.

अभी मेरी पत्नी 30 साल की है और ऐसी बातें करती है, जैसे 60 साल की हो गई है. मैं उसे हर तरह से सम झा कर हार गया हूं, लेकिन वह टस से मस नहीं होती है. मैं क्या करूं?

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जवाब

पहले तो यह समझ लें कि पत्नी के माने सिर्फ जिस्म नहीं होता है कि जब पति चाहे तब वह सैक्सी गुडि़या की तरह बिस्तर पर बिछते हुए उसे अनचाहे मन से मनचाहा सुख दे. बाकी तो आप खुद मान रहे हैं कि वह एक अच्छी पत्नी की तरह घर में सब का खयाल रखती है.

ऐसा लगता है कि आप की पत्नी का मन सैक्स से उचट गया है, जबकि उस का लुत्फ लेने का यह बेहतर समय है. मुमकिन है कि अब उसे पहले जैसी संतुष्टि न मिलती हो, इसलिए खीज कर वह ऐसा बरताव कर रही है कि आप ही उस से हमबिस्तरी की पेशकश न करें.

ये भी पढ़ें- मैं अपने बॉयफ्रेंड से इमोशनली अटैच नहीं हूं, क्या करूं?

आप को प्यार और सब्र से काम लेते हुए उस से उस की परेशानी उगलवानी पड़ेगी, उसे सैक्स के लिए उकसाना पड़ेगा. इस के लिए उसे पोर्न फिल्म दिखा कर देखें और उस के सिर से घरगृहस्थी की जिम्मेदारियों का भार कम करें. इस पर भी बात न बने, तो किसी सैक्स स्पैशलिस्ट डाक्टर से  बात करें.

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मेरा भाई जिस लड़की को पसंद करता है वह मेरी बेस्टफ्रेंड है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरा भाई मेरी बैस्टफ्रैंड को पसंद करता है और उस के साथ रिलेशनशिप में आना चाहता है. मेरी बैस्टफ्रैंड इस बारे में क्या सोचती है, मुझे नहीं पता. लेकिन मैं नहीं चाहती कि मेरा भाई उस के साथ रिलेशनशिप में आए. अगर ऐसा हुआ तो सबकुछ बिगड़ जाएगा. वे दोनों मुझे किनारे कर एकसाथ हो जाएंगे, लड़ेंगेझगड़ेंगे और मैं बीच में पिस जाऊंगी. मुझे उन दोनों को अलग रखने के लिए क्या करना चाहिए?

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जवाब

मुझे लगता है कि उन दोनों को अलग करने के बजाय आप को उन्हें उन की जिंदगी के फैसले खुद लेने के लिए छोड़ देना चाहिए. यह उन की जिंदगी है और वे जिसे चाहे, पसंद कर सकते हैं या डेट कर सकते हैं. आप को बीच में टांग नहीं अड़ानी चाहिए. आप की बैस्टफ्रैंड को आप का भाई पसंद हो या न हो, यह उस की पर्सनल चौइस है और आप के भाई की भी. आप को बीच में नहीं पड़ना चाहिए.

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मेरी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, मैं बच्चों की सारी जरूरतें कैसे पूरा करूं?

सवाल

मैं 43 वर्षीय पुरुष हूं. जिंदगी में मैं ने जो चाहा, कभी नहीं मिला. कालेज टाइम में चाहता था कोई गर्लफ्रैंड बने, लेकिन नहीं बनी. एक लड़की को बहुत पसंद करता था लेकिन कभी उस से बोल नहीं पाया. शादी हुई तो सोचा सिंपल सी प्यार भरी लाइफ होगी लेकिन पत्नी ऐसी मिली जिसे सैक्स में रुचि न थी. डिप्रैशन में रहती थी. एक साल के अंदर ही तलाक हो गया. दूसरी शादी की, पत्नी झगड़ालू निकली. मेरे मातापिता से लड़ती. मुझ से ज्यादा पढ़ीलिखी थी, सो इस बात का मुझ पर रोब झाड़ती. खैर, उस ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन डिलीवरी के दौरान कुछ कौंप्लिकेशंस के कारण उस की मौत हो गई.

अब बच्चों को पालने की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरे ऊपर है. पिताजी का देहांत हो चुका है और मम्मी बीमार रहती हैं. सोचता हूं, उन्हें कुछ हो गया तो मैं तो बिलकुल अकेला हो जाऊंगा. रिश्तेदार शादी करने की सलाह देते हैं तो कोई कहता है एक बच्चा मैं गोद दे दूं, 2-2 बच्चे संभालना मुश्किल है.

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आर्थिक प्रौब्लम भी है. प्राइवेट जौब करता हूं. कब छूट जाए, कुछ कह नहीं सकता क्योंकि कंपनी घाटे में चल रही है. मम्मी का कहना है कि शादी के बारे में सोचना छोड़, बच्चों की परवरिश के बारे में सोचूं. लेकिन पुरुष हूं, मेरी शारीरिक जरूरत भी है. मैं बहुत उलझन में हूं. कुछ सोच नहीं पा रहा कि लाइफ में मेरे लिए क्या अच्छा और क्या बुरा?

जवाब

वाकई आप की जिंदगी में मिठास कम, कड़वाहट ज्यादा रही है. खैर, जो हो गया सो गया. अब आगे की ओर देखिए. फिलहाल, अभी आप की पहली समस्या है जुड़वां छोटे बच्चों को पालना. आप की मम्मी ठीक कह रही हैं कि आप का फोकस अभी बच्चों की परवरिश पर होना चाहिए. अभी तो सिर्फ बच्चों की जिम्मेदारी है. दोबारा शादी कर लेंगे तो पत्नी की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ेगी और उसे भी अपना वक्त देना पड़ेगा.

दूसरे, इस बात की क्या गारंटी कि वह गाय की तरह इतनी सीधी होगी कि छोटेछोटे बच्चों को भी संभाल लेगी, घर के कामकाज भी करेगी. आप को शारीरिक सुख देगी तो बदले में क्या कुछ नहीं चाहेगी. क्या आप उस की जरूरतें पूरी करने की हालत में हैं. घर में रुपएपैसे की दिक्कत ही झगड़े पैदा करती है. जिस जने की 2 शादियां हो चुकी हों, उसे नई लड़की मिलेगी भी नहीं. इसलिए हमारी राय में इस वक्त आप का शादी करना एक और मुसीबत अपने सिर ले लेने जैसा है.

अभी आप अपने हिसाब से घर चला रहे हैं. मम्मी का साथ अभी बना हुआ है. उन की हैल्प के लिए डेटाइम एक मेड रख लें. घर के काम और बच्चों को संभालने में मम्मी की मदद हो जाएगी.

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जहां तक शारीरिक सुख की बात है, तो आजकल कई वैबसाइट्स हैं जहां आप की तरह ही कई लेडीज भी हैं जो रिलेशनशिप में विश्वास रखती हैं. फिजिकल रिलेशन के लिए शादी जरूरी तो नहीं. दोदो शादी कर के आप देख भी चुके हैं. और अब तो हालत ऐसी है कि शादी करना किसी भी एंगल से ठीक नहीं लग रहा. बस, पूरी तरह से देखपरख कर रिलेशनशिप का सलैक्शन कीजिएगा. कहीं फिर किसी मुसीबत में न पड़ जाना.

आप हर कदम फूंकफूंक कर रखना. खुद खुश रहना है और बच्चों की खुशीखुशी परवरिश करनी है. ज्यादा आगे की मत सोचिए. भविष्य किसी ने नहीं देखा. बस, वक्त को जितना आसान बना सकते हैं, बनाइए और अपने को फाइनैंशियली स्ट्रौंग बनाने की कोशिश कीजिए.

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मेरी गर्लफ्रेंड कभी कभी इतनी बेवकूफी भरी हरकत कर देती है कि मुझे अपनी पसंद पर शक होने लगता है, मैं क्या करूं ?

सवाल

मैं 22 साल का नौजवान हूं और अपने पड़ोस की एक 17 साल की लड़की को बहुत पसंद करता हूं और उस से शादी करना चाहता हूं. पर वह लड़की अभी नाबालिग है, इसलिए मैं बंध गया हूं. इतना ही नहीं, उस लड़की में बचपना भी बहुत है. वह कभीकभार इतनी बेवकूफी भरी हरकत कर देती है कि मुझे अपनी पसंद पर खुद ही शक होने लगता है.

हाल ही में उस लड़की ने भरे बाजार मुझे चूम लिया था और वहां से भाग गई थी. क्या मुझे उस लड़की से शादी करनी चाहिए?

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जवाब

जाहिर है कि वह लड़की नाबालिग होने के साथसाथ चुलबुली, नादान और अल्हड़ भी है, पर हिम्मत तो उस में गजब की है, जो भरे बाजार वह आप को चूम भी लेती है.

शादी को ले कर अभी जल्दबाजी न करें, क्योंकि मुमकिन यह भी है कि वह लड़की वाकई बेवकूफ हो, जो आगे चल कर आप के लिए अच्छीखासी मुसीबत बन सकती है. उसे दुनियादारी के बारे में समझाएं. अभी कम उम्र के चलते उस का बचपना गया नहीं है. उस के बालिग और समझदार होने तक इंतजार करें.

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