किसी भी लड़की के लिए प्रेग्नेंसी जीवन के उन खास पलों में से एक है जो काफी अहम होता है. इस एहसास को पुरुषो कभी अनुभव नही कर सकते है पर सोचिए की अगर हम कहे की प्रेग्नेंसी के दौरान जैसा महिलाएं महसूस करती है वैसा ही किसी पुरुष को भी गर्भावस्था के लक्षण महसूस हो तो आप मानेंगे? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि पुरुषों को भी गर्भावस्था के लक्षण महसूस हो सकते हैं. यह एक प्रकार का सिंड्रोम होता है जो पुरुषों को ठीक वैसे ही लक्षण महसूस कराता है जिसे महिलायें गर्भवती होने पर करती हैं इसे सिंपथेटिक प्रेगनेंसी जिसे कौवौड सिंड्रोम (Couvade syndrome) के नाम से भी जाना जाता है. इस स्थिति में स्वस्थ आदमी को भी गर्भावस्था के लक्षणों का आभास होता है.

क्या है कौवौड सिंड्रोम

एक रीसर्च के मुताबिक कौवौड सिंड्रोम आम हो सकता है, और ये कोई घोषित मानसिक बीमारी नहीं है. हालांकि आगे और भी रीसर्च से यह निर्धारित करने की जरूरत है कि कौवौड सिंड्रोम मनोवैज्ञानिक कारणों वाली कोई शारीरिक स्थिति है या नहीं. कौवौड सिंड्रोम के जुड़े लक्षणों की सूचनाओं के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न हैं और आमतौर पर गर्भावस्था के पहले और तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान ही होते हैं.

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शरीर में कैसे आते है बदलाव

इस स्थिती में शरीर में लक्षणों आम होते है जैसे पेट में दर्द, सूजन, भूख में परिवर्तन, सांस की समस्याएं, दांत में दर्द, पैर में ऐंठन, पीठ दर्द और मूत्र या जननांग में जलन.

इसके मनोवैज्ञानिक लक्षणों में नींद आने में समस्या, चिंता, अवसाद, कम कामेच्छा, थकान और बेचैनी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं.

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कौवौड सिंड्रोम से घबराएं नहीं

चाहे कौवौड सिंड्रोम असली है या नहीं, खास बात यह है कि एक पिता बनना भावनात्मक और तनावपूर्ण रूप से रोमांचक हो सकता है. अगर आपकी साथी भी गर्भवती हैं तो तनाव प्रबंधन करने के लिए कदम उठाएं और पिता बनने के लिए तैयार हो जाएं. आप इसके लिये डाक्टर से सलाह ले सकते हैं या फिर अपने मित्रों और परिवार के लोगों से इस संबंध में प्रोत्साहन ले सकते हैं. अपने साथी से भी इस संबंध में बात करें. ये कोई खातरनाक सिंड्रोम नही है बल्कि ये एक समान्य है.

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