17 अक्तूबर, 2019 की शाम का वक्त था. हिंदूवादी नेता 50 साल के कमलेश तिवारी लखनऊ के खुर्शेदबाग स्थित अपने औफिस में बैठे थे. औफिस के ऊपर ही उन का आवास भी था, जिस में वह पत्नी किरन और बेटे ऋषि के साथ रहते थे. घर के नीचे कार्यकर्ताओं और दूसरे लोगों के बैठने की व्यवस्था थी. उसी समय उन के मोबाइल पर एक फोन आया जिस पर बात करने वाले ने कहा, ‘हम लोग आप से मिलने कल आ रहे हैं.’

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